NCERT कक्षा 9 गणित मंजरी समाधान: भाग 1 (अध्याय 1-8) — विस्तृत व्याख्या एवं हल

'गणित मंजरी' कक्षा 9 समाधान श्रृंखला का पहला भाग। इसमें अध्याय 1 से 8 तक के विस्तृत हल दिए गए हैं, जिसमें निर्देशांक ज्यामिति, बहुपद, संख्या पद्धति, वृत्त, क्षेत्रफल, प्रायिकता और अनुक्रम (AP/GP) शामिल हैं। भाग 2 के लिए जुड़े रहें!

Apr 24, 2026 - 02:17
Apr 24, 2026 - 03:08
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NCERT कक्षा 9 गणित मंजरी समाधान: भाग 1 (अध्याय 1-8) — विस्तृत व्याख्या एवं हल
Digital illustration of a student with a math textbook, used as the feature graphic for the Class 9 Ganita Manjari Solutions Part 1 article on Aapbiti.

ताजा खबर — 23 अप्रैल 2025

NCERT ने कक्षा 9 की 4 नई पाठ्यपुस्तकें ऑनलाइन जारी कीं — अभी डाउनलोड करें

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 23 अप्रैल 2026 को कक्षा 9 के लिए चार नई पाठ्यपुस्तकों की सॉफ्ट कॉपी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी है। ये पुस्तकें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप तैयार की गई हैं और फिलहाल अंग्रेजी माध्यम में जारी की गई हैं।

NCERT के आधिकारिक Instagram अकाउंट @ncertindia पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस बार जो चार पुस्तकें जारी की गई हैं उनमें शामिल हैं — विज्ञान के लिए Exploration, गणित के लिए Ganita Manjari, अंग्रेजी के लिए Kaveri और संस्कृत के लिए Sharada। इन पुस्तकों को QR कोड स्कैन करके या NCERT की वेबसाइट से सीधे डाउनलोड किया जा सकता है।

इस लेख में हम मुख्य रूप से गणित की नई पाठ्यपुस्तक गणित मंजरी (Ganita Manjari) की बात करेंगे। फिलहाल यह पुस्तक अंग्रेजी संस्करण में उपलब्ध है, जल्द ही इसका हिंदी संस्करण भी NCERT द्वारा जारी किया जाएगा। आइए बिना देर किए इस पुस्तक के पहले अध्याय की ओर चलते हैं।

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गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 1

निर्देशांक का उपयोग: स्वयं को दिशा दें — सम्पूर्ण अध्याय व्याख्या एवं हल सहित

1.1 भूमिका (Introduction)

निर्देशांक तंत्र (Coordinate System) एक ऐसी व्यवस्था है जिसके द्वारा हम किसी भी बिंदु की सटीक स्थिति संख्याओं के माध्यम से बता सकते हैं — ठीक वैसे जैसे मानचित्र पर ग्रिड रेखाएं होती हैं। NCERT की नई पुस्तक गणित मंजरी इस अवधारणा की जड़ें भारत में ढूंढती है।

पुस्तक बताती है कि सिंधु-सरस्वती सभ्यता में नगरों की सड़कें उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशाओं में समान दूरी (लगभग 10 मीटर) पर बनाई जाती थीं — यह व्यवहार में निर्देशांक तंत्र ही था। बौधायन ने बाद में इसी आधार पर बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय विकसित की। उज्जयिनी को प्राचीन काल में शून्य देशांतर (central meridian) माना जाता था। ब्रह्मगुप्त ने शून्य और ऋणात्मक संख्याओं को औपचारिक रूप दिया, जिसके बिना चतुर्थांश (Quadrant) वाला कार्तीय तल संभव ही नहीं होता। अंततः रेने देकार्त (1637 ई.) ने इसे आधुनिक रूप दिया।

1.2 नई जगह, नई पहचान (Settling In)

पुस्तक एक कहानी के माध्यम से निर्देशांक समझाती है। रेयान एक दृष्टिहीन बच्चा है जो नए शहर में आया है। उसकी बड़ी बहन शालिनी — जिसने कक्षा 9 में निर्देशांक ज्यामिति पढ़ी है — एक आयताकार ग्रिड पर पिन और धागे से कमरे का नक्शा बनाती है ताकि रेयान अपनी उंगलियों से स्थानों को महसूस कर सके। यह कहानी समावेशी शिक्षा (inclusive education) का सुंदर उदाहरण है।

1.3 द्विविमीय कार्तीय निर्देशांक तंत्र

दो परस्पर लंबवत् रेखाएं मिलकर कार्तीय तल (Cartesian Plane) बनाती हैं। क्षैतिज रेखा x-अक्ष और ऊर्ध्वाधर रेखा y-अक्ष कहलाती है। जहां दोनों मिलती हैं वह बिंदु मूल बिंदु O(0,0) है।

ये दोनों अक्ष तल को चार भागों में बांटते हैं जिन्हें चतुर्थांश (Quadrants) कहते हैं। प्रत्येक चतुर्थांश में निर्देशांकों के चिह्न इस प्रकार होते हैं — प्रथम में (+, +), द्वितीय में (−, +), तृतीय में (−, −) और चतुर्थ में (+, −)।

मुख्य परिभाषाएं याद रखें

किसी बिंदु P(x, y) में x उसकी y-अक्ष से दूरी है और y उसकी x-अक्ष से दूरी है। x-अक्ष पर स्थित बिंदु का रूप (x, 0) होता है और y-अक्ष पर स्थित बिंदु का रूप (0, y) होता है।

अभ्यास 1.1 — सम्पूर्ण हल (Exercise Set 1.1)

आधार: Fig 1.3 में रेयान के कमरे के कोने O(0,0), A(12,0), B(12,10), C(0,10) हैं। D₁R₁ कमरे का दरवाजा है जहां R₁ = (11.5, 0) दिया है।

(i) दरवाजे की y-अक्ष और x-अक्ष से दूरी:
Fig 1.3 में D₁ x-अक्ष पर लगभग x = 10 पर स्थित है। अतः बायीं दीवार (y-अक्ष) से दूरी = 10 फुट। चूंकि दरवाजा x-अक्ष पर ही है, x-अक्ष से दूरी = 0

(ii) D₁ के निर्देशांक:
D₁ = (10, 0)

(iii) दरवाजे की चौड़ाई:
चौड़ाई = R₁ − D₁ = 11.5 − 10 = 1.5 फुट। यह एक सामान्य कमरे के दरवाजे के लिए पर्याप्त नहीं है (मानक चौड़ाई लगभग 3 फुट होती है)। व्हीलचेयर के लिए न्यूनतम 2.7 फुट की आवश्यकता होती है, अतः 1.5 फुट का यह दरवाजा व्हीलचेयर के लिए उपयुक्त नहीं है।

(iv) बाथरूम का दरवाजा संकरा है या चौड़ा?
बाथरूम दरवाजे की चौड़ाई = B₂ − B₁ = 4 − 1.5 = 2.5 फुट। कमरे के दरवाजे की चौड़ाई = 1.5 फुट। अतः बाथरूम का दरवाजा चौड़ा है।

अभ्यास 1.2 — सम्पूर्ण हल (Exercise Set 1.2)

प्रश्न 1: अध्ययन मेज के चारों पाए
तीन पाए (8,9), (11,9) और (11,7) पर हैं।

(i) चौथा पाया: आयताकार मेज में सम्मुख कोने समान x या y-निर्देशांक साझा करते हैं। (8,9) और (11,7) को जोड़ने वाला बिंदु (8,7) होगा। अतः चौथा पाया = (8, 7)

(ii) क्या यह उचित स्थान है? मेज कमरे के अंदर x = 8 से 11 और y = 7 से 9 के बीच है, जो दीवारों से दूर है। हां, यह उचित स्थान है।

(iii) चौड़ाई और लंबाई: चौड़ाई (x-दिशा) = 11 − 8 = 3 फुट। लंबाई (y-दिशा) = 9 − 7 = 2 फुट। ऊंचाई 2D नक्शे से ज्ञात नहीं हो सकती।

प्रश्न 2: बाथरूम का दरवाजा और अलमारी
दरवाजे का कब्जा B₁(0, 1.5) पर है, चौड़ाई 2.5 फुट। दरवाजा अंदर खुलने पर 2.5 फुट की त्रिज्या में घूमेगा अर्थात् x = 2.5 तक पहुंचेगा। अलमारी (Wardrobe) x = 3 से शुरू होती है। अतः दरवाजा अलमारी से नहीं टकराएगा — बस 0.5 फुट का अंतर रहेगा। यदि दरवाजा चौड़ा किया जाए तो अलमारी टकराने का खतरा होगा, इसलिए या तो दरवाजा बाहर की ओर खुलने वाला बनाएं या अलमारी को थोड़ा और दाईं ओर खिसकाएं।

प्रश्न 3: बाथरूम के कोनों के निर्देशांक
बाथरूम y-अक्ष के बाईं ओर है (ऋणात्मक x में)। 6 ft × 9 ft के अनुसार:

(i) कोने: O(0, 0), F(0, 9), R(−6, 9), P(−6, 0)

(ii) नहाने का क्षेत्र SHWR: यह बाथरूम के ऊपरी भाग में है। अनुमानित निर्देशांक: S(−6, 6), H(−6, 9), W(−3, 9), R(−3, 6) — यह 3ft × 3ft का आयताकार क्षेत्र है।

(iii) वाशबेसिन (3 ft × 2 ft) और शौचालय (2 ft × 3 ft) — विद्यार्थी स्वयं बाथरूम की शेष जगह में इन्हें रखकर निर्देशांक लिखें।

प्रश्न 4: अन्य कमरे
(i) डाइनिंग रूम 18 ft लंबा और 15 ft चौड़ा है। P से A तक लंबाई फैली है। P(−6, 0) और A(12, 0) के बीच की दूरी = 18 ft ✓। कोने होंगे: P(−6, 0), A(12, 0), (12, −15), (−6, −15) (डाइनिंग रूम x-अक्ष के नीचे यानी ऋणात्मक y में)।

(ii) 5 ft × 3 ft डाइनिंग टेबल कमरे के केंद्र में। केंद्र = (−6+12)/2 = 3, (0+(−15))/2 = −7.5 → केंद्र (3, −7.5)। टेबल के पाए: (0.5, −6), (5.5, −6), (5.5, −9), (0.5, −9)

1.4 दो बिंदुओं के बीच की दूरी (Distance Formula)

यदि दो बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा किसी भी अक्ष के समानांतर नहीं है, तब हम बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करते हैं।

किन्हीं दो बिंदुओं (x₁, y₁) और (x₂, y₂) के बीच की दूरी का सूत्र:

d = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]

उदाहरण: A(3,4) और D(7,1) के बीच दूरी = √[(7−3)² + (1−4)²] = √[16 + 9] = √25 = 5 इकाई। इसी प्रकार DM = √[2² + 5²] = √29 और MA = √[6² + 2²] = √40 इकाई।

ध्यान दें: यह सूत्र तब भी काम करता है जब निर्देशांक ऋणात्मक हों। परावर्तन (reflection) से भुजाओं की लंबाई अपरिवर्तित रहती है।

अध्याय-अंत अभ्यास — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: दोनों अक्षों के प्रतिच्छेद बिंदु (मूल बिंदु) के निर्देशांक क्या हैं?
उत्तर: x-निर्देशांक = 0, y-निर्देशांक = 0 अर्थात् O(0, 0)

प्रश्न 2: W का x-निर्देशांक −5 है। H, W से होकर y-अक्ष के समानांतर रेखा पर है। H के संभावित चतुर्थांश?
उत्तर: H = (−5, y) जहां y कोई भी मान ले सकता है। यदि y > 0 तो H द्वितीय चतुर्थांश में, यदि y < 0 तो तृतीय चतुर्थांश में होगा। यदि y = 0 तो H = W = (−5, 0) जो x-अक्ष पर है।

प्रश्न 3: R(3,0), A(0,−2), M(−5,−2), P(−5,2) — RAMP बनाएं।

(i) परस्पर लंब दो भुजाएं: AM: (0,−2) से (−5,−2) — यह क्षैतिज है (x-अक्ष के समानांतर)। MP: (−5,−2) से (−5,2) — यह ऊर्ध्वाधर है (y-अक्ष के समानांतर)। अतः AM ⊥ MP

(ii) अक्ष के समानांतर भुजा: AM (दोनों बिंदुओं का y = −2, अतः x-अक्ष के समानांतर) तथा MP (दोनों का x = −5, अतः y-अक्ष के समानांतर)।

(iii) दर्पण प्रतिबिंब: M(−5,−2) और P(−5,2) — दोनों का x समान है, y के चिह्न विपरीत हैं। ये x-अक्ष में एक-दूसरे के प्रतिबिंब हैं।

प्रश्न 4: Z(5,−6) पर आधारित समकोण त्रिभुज IZN।
उत्तर (एक संभावित हल): I(5, 0), Z(5, −6), N(0, 0) लें। IZ = 6, IN = 5, ZN = √(25+36) = √61 इकाई। (अन्य उत्तर भी मान्य हैं।)

प्रश्न 5: बिना ऋणात्मक संख्याओं के निर्देशांक तंत्र कैसा होगा?
उत्तर: ऐसे तंत्र में केवल प्रथम चतुर्थांश (दोनों धनात्मक) ही संभव होगा। y-अक्ष के बाईं ओर और x-अक्ष के नीचे के बिंदुओं को locate करना असंभव होगा। अतः यह तंत्र 2-D तल के सभी बिंदुओं को locate करने में सक्षम नहीं होगा

*चुनौती प्रश्न (★ = उच्च स्तरीय)

★ प्रश्न 6: क्या M(−3,−4), A(0,0) और G(6,8) एक ही सरल रेखा पर हैं?
विधि — ढाल (Slope) की जांच करें:
ढाल MA = (0−(−4))/(0−(−3)) = 4/3
ढाल AG = (8−0)/(6−0) = 8/6 = 4/3
दोनों ढाल समान हैं और बिंदु A उभयनिष्ठ है।
निष्कर्ष: हां, तीनों बिंदु एक ही सरल रेखा पर हैं।

★ प्रश्न 7: क्या R(−5,−1), B(−2,−5) और C(4,−12) संरेखी हैं?
ढाल RB = (−5−(−1))/(−2−(−5)) = −4/3
ढाल BC = (−12−(−5))/(4−(−2)) = −7/6
−4/3 ≠ −7/6
निष्कर्ष: नहीं, ये तीनों बिंदु संरेखी नहीं हैं।

★ प्रश्न 8: मूल बिंदु को एक शीर्ष मानकर त्रिभुज बनाएं।

(i) समकोण समद्विबाहु त्रिभुज: O(0,0), A(4,0), B(0,4). OA = OB = 4, कोण AOB = 90°।

(ii) समद्विबाहु त्रिभुज (एक शीर्ष Q III में, एक Q IV में): O(0,0), P(−3,−4), Q(3,−4). OP = √(9+16) = 5, OQ = √(9+16) = 5. ✓ समद्विबाहु।

★ प्रश्न 9: क्या M बिंदु ST का मध्यबिंदु है? मध्यबिंदु सूत्र: M = ((x_S+x_T)/2, (y_S+y_T)/2)

S M T क्या M मध्यबिंदु है? कारण
(−3, 0) (0, 0) (3, 0) हां (−3+3)/2=0, (0+0)/2=0 → (0,0) ✓
(2, 3) (3, 4) (4, 5) हां (2+4)/2=3, (3+5)/2=4 → (3,4) ✓
(0, 0) (0, 5) (0, −10) नहीं (0+0)/2=0, (0+(−10))/2=−5 → (0,−5) ≠ (0,5)
(−8, 7) (0, −2) (6, −3) नहीं (−8+6)/2=−1, (7+(−3))/2=2 → (−1,2) ≠ (0,−2)

संबंध: M का x-निर्देशांक = (S का x + T का x) ÷ 2 तथा M का y-निर्देशांक = (S का y + T का y) ÷ 2

★ प्रश्न 10: M(−7,1) बिंदु A(3,−4) और B(x,y) का मध्यबिंदु है। B ज्ञात करें।
(3+x)/2 = −7 → x = −17
(−4+y)/2 = 1 → y = 6
B = (−17, 6)

★ प्रश्न 11: A(4,7) और B(16,−2) के त्रिभाजन बिंदु P और Q।
P (A के निकट, AP:PB = 1:2): P = (4 + (1/3)(16−4), 7 + (1/3)(−2−7)) = (4+4, 7−3) = (8, 4)
Q (B के निकट, AQ:QB = 2:1): Q = (4 + (2/3)(12), 7 + (2/3)(−9)) = (4+8, 7−6) = (12, 1)

★ प्रश्न 12:

(i) A(1,−8): OA = √(1+64) = √65 | B(−4,7): OB = √(16+49) = √65 | C(−7,−4): OC = √(49+16) = √65
तीनों बिंदुओं की O से दूरी समान है। अतः वे केंद्र O, त्रिज्या √65 वाले वृत्त पर स्थित हैं।

(ii) D(−5,6): OD = √(25+36) = √61 < √65 → D वृत्त के अंदर है।
E(0,9): OE = √(0+81) = 9. क्या 9 > √65? 9² = 81 > 65, अतः 9 > √65 → E वृत्त के बाहर है।

★ प्रश्न 13: त्रिभुज ABC की भुजाओं के मध्यबिंदु D(5,1), E(6,5), F(0,3) हैं।
मध्यबिंदु संबंध से: A+B = 2F = (0,6), A+C = 2E = (12,10), B+C = 2D = (10,2)
A+B+C = (11,9)
A = (11,9)−(10,2) = (1,7)
B = (11,9)−(12,10) = (−1,−1)
C = (11,9)−(0,6) = (11,3)
जांच: मध्यबिंदु(BC) = (5,1) = D ✓, मध्यबिंदु(AC) = (6,5) = E ✓, मध्यबिंदु(AB) = (0,3) = F ✓

प्रश्न 14: शहर की 10 सड़कें प्रत्येक दिशा में।
(a) चौराहा (4,3): उत्तर-दक्षिण की चौथी सड़क और पूर्व-पश्चिम की तीसरी सड़क — यह केवल 1 विशिष्ट चौराहा है।
(b) चौराहा (3,4): उत्तर-दक्षिण की तीसरी और पूर्व-पश्चिम की चौथी — यह भी केवल 1 विशिष्ट चौराहा है। (किंतु (4,3) और (3,4) दोनों अलग-अलग स्थान हैं।)

प्रश्न 15: स्क्रीन 800×600 pixels। वृत्त A: केंद्र (100,150), त्रिज्या 80. वृत्त B: केंद्र (250,230), त्रिज्या 100.

(i) वृत्त A की सीमाएं: बाईं ओर 20, दाईं ओर 180, नीचे 70, ऊपर 230 — सभी स्क्रीन के भीतर। वृत्त B की सीमाएं: बाईं 150, दाईं 350, नीचे 130, ऊपर 330 — सभी भीतर। दोनों वृत्त स्क्रीन के भीतर हैं।

(ii) केंद्रों के बीच की दूरी = √[(250−100)² + (230−150)²] = √[22500+6400] = √28900 = 170 pixels। दोनों त्रिज्याओं का योग = 80+100 = 180. चूंकि 170 < 180, दोनों वृत्त एक-दूसरे को काटते हैं।

प्रश्न 16: A(2,1), B(−1,2), C(−2,−1), D(1,−2) — क्या ABCD एक वर्ग है?
AB = √(9+1) = √10, BC = √(1+9) = √10, CD = √(9+1) = √10, DA = √(1+9) = √10 — सभी भुजाएं समान।
विकर्ण AC = √(16+4) = √20, BD = √(4+16) = √20 — समान।
मध्यबिंदु AC = (0,0), मध्यबिंदु BD = (0,0) — विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं।
ढाल AC = 1/2, ढाल BD = −2 → गुणनफल = −1 → परस्पर लंब
निष्कर्ष: ABCD एक वर्ग है। क्षेत्रफल = (√10)² = 10 वर्ग इकाई।

अध्याय सारांश

इस अध्याय में हमने सीखा कि दो परस्पर लंबवत् अक्षों (x-अक्ष और y-अक्ष) से बनने वाला कार्तीय तल किसी भी बिंदु की स्थिति निर्धारित करने में सक्षम है। मूल बिंदु O(0,0) से चारों दिशाओं में फैले ये अक्ष तल को चार चतुर्थांशों में विभाजित करते हैं। किसी भी दो बिंदुओं के बीच की दूरी निकालने के लिए बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय पर आधारित दूरी सूत्र — d = √[(x₂−x₁)² + (y₂−y₁)²] — का उपयोग होता है। यह सूत्र ऋणात्मक निर्देशांकों के लिए भी समान रूप से लागू होता है। अगले अध्यायों में हम इसी नींव पर आगे बढ़ेंगे।

गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 2

रैखिक बहुपद का परिचय — सम्पूर्ण अध्याय, व्याख्या एवं हल सहित

2.1 भूमिका — बीजीय व्यंजक से बहुपद तक

बीजीय व्यंजक (Algebraic Expression) में संख्याएं, चर (Variables) और संक्रियाएं होती हैं। जब किसी व्यंजक में केवल एक चर और उसकी घातें हों तो उसे एकचरीय बहुपद (Univariate Polynomial) कहते हैं। बहुपद में चर की सबसे बड़ी घात उसकी कोटि (Degree) कहलाती है।

बहुपदों के प्रकार — एक नजर में

कोटि 0 → अचर बहुपद (जैसे 8) | कोटि 1 → रैखिक बहुपद (जैसे 3z+7) | कोटि 2 → द्विघात बहुपद (जैसे x²+5x+1) | कोटि 3 → त्रिघात बहुपद (जैसे 5y³+y²+2y−1)

अभ्यास 2.1 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: निम्नलिखित बहुपदों की कोटि ज्ञात करें।

(i) 2x²−5x+3 → x की सबसे बड़ी घात 2 → कोटि = 2 (द्विघात)
(ii) y³+2y−1 → y की सबसे बड़ी घात 3 → कोटि = 3 (त्रिघात)
(iii) −9 → 8x⁰ के रूप में लिखें, घात 0 → कोटि = 0 (अचर)
(iv) 4z−3 → z की घात 1 → कोटि = 1 (रैखिक)

प्रश्न 2: कोटि 1, 2 और 3 के बहुपद लिखें।
कोटि 1: 2x + 5 | कोटि 2: x² − 3x + 1 | कोटि 3: 4y³ + 2y − 7

प्रश्न 3: x⁴ − 3x³ + 6x² − 2x + 7 में x² और x³ के गुणांक क्या हैं?
x² का गुणांक = 6, x³ का गुणांक = −3

प्रश्न 4: 4z³ + 5z² − 11 में z का गुणांक क्या है?
z का पद ही नहीं है, अर्थात् 0·z → z का गुणांक = 0

प्रश्न 5: 9x³ + 5x² − 8x − 10 का अचर पद क्या है?
अचर पद = −10

2.2 रैखिक बहुपद

कोटि 1 के बहुपद को रैखिक बहुपद कहते हैं। रैखिक बहुपद का सामान्य रूप ax + b है जहां a ≠ 0 हो। रैखिक बहुपद की विशेषता है कि क्रमागत पदों का अंतर सदैव स्थिर रहता है।

उदाहरण: चेस क्लब में ₹200 प्रवेश शुल्क + ₹50 प्रति मैच → कुल राशि = 200 + 50m। यदि किसी खिलाड़ी ने ₹750 दिए तो: 200 + 50m = 750 → 50m = 550 → m = 11 मैच

अभ्यास 2.2 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: 5x − 3 का मान ज्ञात करें।
(i) x=0: 5(0)−3 = −3 | (ii) x=−1: 5(−1)−3 = −8 | (iii) x=2: 5(2)−3 = 7

प्रश्न 2: 7s²−4s+6 का मान ज्ञात करें।
(i) s=0: 0−0+6 = 6
(ii) s=−3: 7(9)−4(−3)+6 = 63+12+6 = 81
(iii) s=4: 7(16)−4(4)+6 = 112−16+6 = 102

प्रश्न 3: सलिल की माँ की उम्र सलिल की उम्र की तिगुनी है। 5 वर्ष बाद दोनों की उम्र का योग 70 होगा।
माना सलिल की उम्र = x, माँ की उम्र = 3x
(x+5) + (3x+5) = 70 → 4x + 10 = 70 → 4x = 60 → x = 15
सलिल की उम्र = 15 वर्ष, माँ की उम्र = 45 वर्ष

प्रश्न 4: दो धनात्मक पूर्णांकों का अंतर 63, अनुपात 2:5।
माना संख्याएं 2k और 5k हैं। 5k − 2k = 63 → 3k = 63 → k = 21
संख्याएं: 42 और 105
जांच: 105 − 42 = 63 ✓ | 42:105 = 2:5 ✓

प्रश्न 5: रूबी के पास 2-रुपये के सिक्के, 5-रुपये के सिक्कों से 3 गुने हैं। कुल ₹88।
माना 5-रुपये के सिक्के = x, 2-रुपये के = 3x
5x + 2(3x) = 88 → 5x + 6x = 88 → 11x = 88 → x = 8
5-रुपये के 8 सिक्के, 2-रुपये के 24 सिक्के

प्रश्न 6: 300 फुट बाड़ दो टुकड़ों में, बड़ा टुकड़ा छोटे का चार गुना।
माना छोटा = x, बड़ा = 4x → x + 4x = 300 → 5x = 300 → x = 60
छोटा = 60 फुट, बड़ा = 240 फुट

प्रश्न 7: आयत की लंबाई = 2 × चौड़ाई + 3, परिधि = 24 cm।
माना चौड़ाई = w, लंबाई = 2w+3
2(w + 2w+3) = 24 → 2(3w+3) = 24 → 6w+6 = 24 → 6w = 18 → w = 3
चौड़ाई = 3 cm, लंबाई = 9 cm

2.3 रैखिक पैटर्न की खोज

वर्गाकार टाइल्स के बढ़ते पैटर्न में Stage n पर टाइल्स की संख्या = 2n − 1। 15वें पद पर: 2(15)−1 = 29 टाइल्स। 26वें पद पर: 2(26)−1 = 51 टाइल्स। 21 टाइल्स के लिए: 2n−1=21 → n=11 (11वां पद)। 47 टाइल्स: n=24 (24वां पद)।

अभ्यास 2.3 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: छात्रा के खाते में ₹500, हर माह ₹150 पॉकेट मनी मिलती है।
n माह बाद राशि = 500 + 150n
माह 2: ₹800 | माह 3: ₹950 | माह 4: ₹1100
रैखिक व्यंजक: 500 + 150n

प्रश्न 2: 120 सदस्यों की रैली, हर घंटे 9 सदस्य छोड़ते हैं।
n घंटे बाद सदस्य = 120 − 9n
1 घंटे बाद: 111 | 2 घंटे: 102 | 3 घंटे: 93
रैखिक व्यंजक: 120 − 9n

प्रश्न 3: आयत की लंबाई 13 cm, चौड़ाई बदलती है।
(i) b=12: क्षेत्रफल = 13×12 = 156 cm²
(ii) b=10: क्षेत्रफल = 13×10 = 130 cm²
(iii) b=8: क्षेत्रफल = 13×8 = 104 cm²
रैखिक पैटर्न: क्षेत्रफल = 13b (चौड़ाई 2 cm घटने पर क्षेत्रफल 26 cm² घटता है)

प्रश्न 4: बॉक्स: l=7, b=11, ऊंचाई बदलती है।
(i) h=5: आयतन = 7×11×5 = 385 cm³
(ii) h=9: आयतन = 7×11×9 = 693 cm³
(iii) h=13: आयतन = 7×11×13 = 1001 cm³
रैखिक पैटर्न: आयतन = 77h (h में 4 बढ़ने पर आयतन 308 बढ़ता है)

प्रश्न 5: सरिता 500 पृष्ठों की किताब, रोज 20 पृष्ठ पढ़ती है।
n दिन बाद शेष पृष्ठ = 500 − 20n
15 दिन बाद: 500 − 300 = 200 पृष्ठ शेष
रैखिक पैटर्न: 500 − 20n

2.4 रैखिक वृद्धि और रैखिक ह्रास

रैखिक वृद्धि (Linear Growth) — जब कोई राशि समान अंतराल पर एक स्थिर मात्रा से बढ़े, तो धनात्मक ढाल वाली सरल रेखा बनती है।
रैखिक ह्रास (Linear Decay) — जब कोई राशि समान अंतराल पर स्थिर मात्रा से घटे, तो ऋणात्मक ढाल वाली सरल रेखा बनती है।

Think and Reflect उत्तर: 15वें दिन शेष = 100 − 5(15) = ₹25। पूरी राशि खर्च होने में: 100 − 5n = 0 → n = 20 दिन
ऑटो रिक्शा: ₹130 के लिए: 15n−5 = 130 → 15n = 135 → n = 9 km
15 km यात्रा का खर्च: 100 + 60(15) = ₹1000। ₹700 में: 100+60d=700 → d = 10 km

अभ्यास 2.4 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: पौधे की ऊंचाई 1.75 फुट, हर माह 0.5 फुट बढ़ती है।
(i) 7 माह बाद: h = 1.75 + 0.5×7 = 1.75 + 3.5 = 5.25 फुट
(ii) तालिका: t=0→1.75, t=1→2.25, t=2→2.75, t=3→3.25, t=4→3.75, t=5→4.25, t=6→4.75, t=7→5.25, t=8→5.75, t=9→6.25, t=10→6.75
(iii) h = 1.75 + 0.5t — रैखिक वृद्धि क्योंकि t बढ़ने पर h में स्थिर मात्रा 0.5 जुड़ती है।

प्रश्न 2: मोबाइल ₹10,000 में खरीदा, हर साल ₹800 कम होता है।
(i) 3 साल बाद: v = 10000 − 800×3 = 10000 − 2400 = ₹7600
(ii) तालिका: t=0→10000, t=1→9200, t=2→8400, t=3→7600, t=4→6800, t=5→6000, t=6→5200, t=7→4400, t=8→3600
(iii) v = 10000 − 800t — रैखिक ह्रास क्योंकि t बढ़ने पर v में स्थिर मात्रा 800 घटती है।

प्रश्न 3: गांव की आबादी 750, हर साल 50 लोग शहर से आते हैं।
(i) 6 साल बाद: P = 750 + 50×6 = 1050
(ii) तालिका: t=0→750, t=1→800, t=2→850, ... t=10→1250
(iii) P = 750 + 50t — रैखिक वृद्धि

प्रश्न 4: रिचार्ज ₹600, हर दिन ₹15 कटता है।
(i) b(x) = 600 − 15x — रैखिक ह्रास (x बढ़ने पर b स्थिर मात्रा से घटता है)
(ii) बैलेंस खत्म: 600 − 15x = 0 → x = 40 दिन
(iii) तालिका: x=1→585, x=2→570, x=3→555, x=4→540, x=5→525, x=6→510, x=7→495, x=8→480, x=9→465, x=10→450

2.5 रैखिक संबंध

दो चरों x और y के बीच रैखिक संबंध y = ax + b के रूप में लिखा जाता है। यदि किन्हीं दो बिंदुओं के निर्देशांक ज्ञात हों तो दो समीकरण बनाकर a और b का मान निकाला जा सकता है।

Think and Reflect: Example 11 में y = 20x + 150 में 20 = प्रति GB दर (₹/GB) और 150 = आधार मासिक शुल्क।

अभ्यास 2.5 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: 10 मॉड्यूल → ₹400, 14 मॉड्यूल → ₹500।
10a + b = 400 और 14a + b = 500
घटाने पर: 4a = 100 → a = 25
b = 400 − 10(25) = 400 − 250 = b = 150
y = 25x + 150 (₹25 प्रति मॉड्यूल, ₹150 आधार शुल्क)

प्रश्न 2: 10 घंटे → ₹800, 15 घंटे → ₹1100।
10a + b = 800 और 15a + b = 1100
घटाने पर: 5a = 300 → a = 60
b = 800 − 600 = b = 200
y = 60x + 200 (₹60 प्रति घंटा, ₹200 मासिक शुल्क)

प्रश्न 3: °C = a·°F + b। जब °C=0, °F=32 और जब °C=100, °F=212।
0 = 32a + b → b = −32a
100 = 212a + b = 212a − 32a = 180a → a = 100/180 = 5/9
b = −32 × (5/9) = −160/9
°C = (5/9)·°F − 160/9 = (5/9)(°F − 32)

2.6 रैखिक संबंधों का आलेखन

y = ax + b को सरल रेखा के रूप में ग्राफ पर दर्शाया जाता है। दो बिंदु ज्ञात करके रेखा खींची जाती है। महत्वपूर्ण निष्कर्ष: a = ढाल (slope) — रेखा की तीव्रता। b = y-अंतःखंड (y-intercept) — रेखा y-अक्ष को जहां काटती है। समान ढाल लेकिन भिन्न y-अंतःखंड वाली रेखाएं समांतर होती हैं। Ex 13 का उत्तर: y = −2x (प्रत्येक बिंदु में y = −2x)।

अध्याय-अंत अभ्यास — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: कोटि 3, x² का गुणांक −7 वाला बहुपद लिखें।
उदाहरण: x³ − 7x² + 2x + 1

प्रश्न 2:
(i) 5x²−3x+7 पर x=1: 5(1)−3(1)+7 = 5−3+7 = 9
(ii) 4t³−t²+6 पर t=a: 4a³ − a² + 6

प्रश्न 3: संख्या को 5/2 से गुणा करके 2/3 जोड़ने पर −7/12 मिलता है।
(5/2)x + 2/3 = −7/12
(5/2)x = −7/12 − 2/3 = −7/12 − 8/12 = −15/12 = −5/4
x = (−5/4) × (2/5) = −1/2

प्रश्न 4: एक धनात्मक संख्या दूसरी की 5 गुनी। दोनों में 21 जोड़ने पर एक नई संख्या दूसरी नई की दोगुनी हो जाती है।
माना छोटी = x, बड़ी = 5x
5x + 21 = 2(x + 21) → 5x + 21 = 2x + 42 → 3x = 21 → x = 7
संख्याएं: 7 और 35

प्रश्न 5: ₹800 में से हर माह ₹250 बचाते हैं।
n माह बाद: 800 + 250n
(i) 6 माह: 800 + 1500 = ₹2300
(ii) 2 साल = 24 माह: 800 + 250(24) = 800 + 6000 = ₹6800
रैखिक पैटर्न: 800 + 250n

★ चुनौती प्रश्न

★ प्रश्न 6: दो अंकों की संख्या के अंकों का अंतर 3। अंक पलटने पर दोनों संख्याओं का योग 143।
माना दहाई का अंक = a, इकाई का = b, तो a − b = 3
मूल संख्या = 10a + b, पलटी हुई = 10b + a
(10a+b) + (10b+a) = 143 → 11(a+b) = 143 → a+b = 13
a+b=13 और a−b=3 → a=8, b=5
संख्याएं: 85 और 58

★ प्रश्न 7: ढाल, y-अंतःखंड और y-अक्ष से कटान बिंदु।
(i) y = −3x + 4 → ढाल = −3, y-अंतःखंड = 4, बिंदु (0, 4)
(ii) 2y = 4x + 7 → y = 2x + 7/2 → ढाल = 2, y-अंतःखंड = 7/2, बिंदु (0, 3.5)
(iii) 5y = 6x − 10 → y = (6/5)x − 2 → ढाल = 6/5, y-अंतःखंड = −2, बिंदु (0, −2)
(iv) 3y = 6x − 11 → y = 2x − 11/3 → ढाल = 2, y-अंतःखंड = −11/3, बिंदु (0, −11/3)
समांतर रेखाएं: (ii) और (iv) — दोनों का ढाल 2 है।

★ प्रश्न 8: y = (9/5)(x − 273) + 32
(i) x = 313 K: y = (9/5)(313−273)+32 = (9/5)(40)+32 = 72+32 = 104 °F
(ii) y = 158 °F: 158 = (9/5)(x−273)+32 → 126 = (9/5)(x−273) → x−273 = 70 → x = 343 K

★ प्रश्न 9: कार्य = बल × दूरी → w = 3d (बल = 3 इकाई)
यह y = ax रूप की सरल रेखा है जो मूल बिंदु से गुजरती है। d=2 पर: w = 3×2 = 6 इकाई

★ प्रश्न 10: p(x) के ग्राफ से (1,5) और (3,11) गुजरते हैं।
p(x) = ax + b → a + b = 5 और 3a + b = 11
घटाने पर: 2a = 6 → a = 3, b = 2
(i) p(x) = 3x + 2
(ii) y-अक्ष पर: x=0 → p(0) = 2 → बिंदु (0, 2)
x-अक्ष पर: 3x+2=0 → x = −2/3 → बिंदु (−2/3, 0)

★ प्रश्न 11: p(x)=ax+b, q(x)=cx+d
(i) p(0)=5 → b=5
(ii) p(x)−q(x) x-अक्ष पर (3,0): p(3)−q(3)=0 → (3a+b)−(3c+d)=0
(iii) p(x)+q(x)=6x+4 → (a+c)=6 और (b+d)=4 → d=4−5=−1
p(3)=q(3): 3a+5=3c−1 → 3a−3c=−6 → a−c=−2
a+c=6 और a−c=−2 → a=2, c=4
p(x) = 2x + 5, q(x) = 4x − 1

★ प्रश्न 12: षट्भुज पैटर्न — माचिस की तीलियां।
Stage 1: 6, Stage 2: 11, Stage 3: 16 (हर बार 5 तीलियां जुड़ती हैं)
Stage 4: 21, Stage 5: 26
(iii) n वें Stage पर: 5n + 1 तीलियां
(iv) Stage 15: 5(15)+1 = 76 तीलियां
(v) 200 = 5n+1 → 5n=199 → n=39.8 — यह पूर्णांक नहीं है। अतः 200 तीलियों से कोई Stage नहीं बन सकती।

★ प्रश्न 13: p(x) बिंदु (2,3) और (6,11) से गुजरती है।
2a+b=3 और 6a+b=11 → 4a=8 → a=2, b=−1 → p(x)=2x−1
q(x) का ढाल p(x) के बराबर (समांतर) → c=2
q(4)=−1: 2(4)+d=−1 → 8+d=−1 → d=−9 → q(x)=2x−9
p(x)=0: 2x−1=0 → x=1/2 → p(x) x-अक्ष पर (1/2, 0)
q(x)=0: 2x−9=0 → x=9/2 → q(x) x-अक्ष पर (9/2, 0)

★ प्रश्न 14: f(x) = ax + a = a(x+1) रूप की सभी रेखाओं में क्या समान है?
x = −1 रखने पर: f(−1) = a(−1+1) = 0 → सभी रेखाएं बिंदु (−1, 0) से गुजरती हैं। यह एक विशेष गुण है।

अध्याय सारांश

इस अध्याय में हमने बहुपदों की कोटि, रैखिक बहुपद की पहचान, रैखिक समीकरण बनाना व हल करना, रैखिक वृद्धि और ह्रास के वास्तविक उदाहरण, और अंत में y = ax + b के ग्राफ को समझा। याद रखें: a = ढाल (रेखा की तीव्रता), b = y-अंतःखंड (रेखा y-अक्ष काटने की स्थिति), समान a लेकिन भिन्न b → समांतर रेखाएं

∞ ℚ ℝ ℤ ℕ √2 π
गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 3

संख्याओं की दुनिया
The World of Numbers — सम्पूर्ण व्याख्या, प्रमाण एवं हल सहित

प्राकृत संख्याओं से शून्य, ऋणात्मक, परिमेय, अपरिमेय और वास्तविक संख्याओं तक की पूरी यात्रा

3.1 गणित का उदय — गिनने की मानवीय आवश्यकता

गणित का जन्म किसी कक्षा में नहीं हुआ था। हजारों साल पहले, जब मनुष्य कृषि समुदायों में रहते थे, उन्हें गायों की संख्या जानने की आवश्यकता थी। बिना संख्याओं के वे एक-से-एक पत्राचार (One-to-One Correspondence) का उपयोग करते थे — हर गाय के लिए मिट्टी के बर्तन में एक कंकड़। यही प्राकृत संख्याओं (Natural Numbers) का जन्म था।

प्राकृत संख्याएं

ℕ = {1, 2, 3, 4, ...} — ये गिनने की मूलभूत संख्याएं हैं जो कम से कम दसों हजार साल पुरानी हैं।

3.1.1 हड्डी पर लिखा इतिहास

लेबॉम्बो हड्डी (Lebombo Bone) — दक्षिण अफ्रीका और स्वाजीलैंड के बीच पाई गई, लगभग 35,000 साल पुरानी। इसमें 29 सुव्यवस्थित निशान हैं जो चंद्रमा के चरणों को गिनने के लिए उपयोग किए जाते थे।

इशांगो हड्डी (Ishango Bone) — कांगो के पास लगभग 20,000 BCE की। इसमें तीन स्तंभ हैं जिनमें 11, 13, 17, 19 के समूह हैं — ये 10 और 20 के बीच की अभाज्य संख्याएं हैं! एक अन्य स्तंभ 2 से गुणन (दोगुना करना) दर्शाता है।

भारतीय संदर्भ: व्यापार और खगोल

सिंधु घाटी सभ्यता के लोथल और हड़प्पा में व्यापार के लिए मानकीकृत बाट की जरूरत थी। वेदों में 1012 तक की घात संख्याओं के नाम थे (जैसे परार्ध)। ललितविस्तार में बुद्ध ने 1053 (तल्लक्षण) तक के नाम बताए। ऋग्वेद में 10 की घातों का उपयोग हमारी आज की दशमलव संख्या प्रणाली की नींव बना।

अभ्यास 3.1 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: लोथल का एक व्यापारी मसाले के 2 थैलों के बदले 15 तांबे की छड़ें लेता है। यदि वह 12 थैले लाए तो कितनी छड़ें मिलेंगी?

2 थैले → 15 छड़ें
1 थैला → 15/2 छड़ें
12 थैले → 12 × (15/2) = 12 × 7.5 = 90 छड़ें

प्रश्न 2: इशांगो हड्डी के एक स्तंभ में 11, 13, 17, 19 हैं। इनमें क्या समानता है? अगली तीन संख्याएं बताएं।

ये सभी अभाज्य संख्याएं (Prime Numbers) हैं — जो केवल 1 और स्वयं से विभाज्य हों।
अगली तीन अभाज्य संख्याएं: 23, 29, 31

प्रश्न 3: क्या प्राकृत संख्याएं घटाव के लिए बंद हैं?

नहीं, प्राकृत संख्याएं घटाव के लिए बंद नहीं हैं।
उदाहरण: 3 − 5 = −2 (प्राकृत संख्या नहीं)
2 − 7 = −5 (प्राकृत संख्या नहीं)
जब छोटी संख्या में से बड़ी घटाई जाए तो परिणाम ऋणात्मक होता है जो ℕ में नहीं है।

★ प्रश्न 4: प्राचीन भारतीय हाथ की उंगलियों के जोड़ों से गिनते थे। एक हाथ में कितने जोड़ होते हैं? आधार-12 से क्या संबंध है?

4 उंगलियाँ × 3 जोड़ प्रति उंगली = 12 जोड़ (अंगूठे से गिनकर)
इसलिए एक हाथ से 12 तक गिना जा सकता था → यही आधार-12 (Base-12) गणना प्रणाली का आधार था। यही कारण है कि आज भी 1 दर्जन = 12, 1 फुट = 12 इंच, 1 दिन = 24 घंटे (12×2) होते हैं।

3.2 शून्य की क्रांति — जब "कुछ नहीं" "कुछ" बन गया

हजारों साल तक संख्या रेखा 1 से शुरू होती थी। यदि आपके पास 5 सेब थे और सब दे दिए, तो उस स्थिति के लिए कोई संख्या नहीं थी। बेबीलोनियन और माया सभ्यताओं ने प्लेसहोल्डर का उपयोग किया, लेकिन वे "शून्य" को एक संख्या नहीं मानते थे।

बख्शाली पांडुलिपि और ब्रह्मगुप्त के नियम

बख्शाली पांडुलिपि (प्रारंभिक शताब्दियां CE) में शून्य को एक बिंदु (bindu) से दर्शाया गया था। लेकिन ब्रह्मगुप्त ने अपने ब्राह्मस्फुटसिद्धांत (628 CE) में शून्य को पहली बार एक पूर्ण गणितीय संख्या के रूप में परिभाषित किया: a − a = 0

ब्रह्मगुप्त के शून्य के नियम

किसी भी संख्या में शून्य जोड़ने पर संख्या अपरिवर्तित रहती है: a + 0 = a
किसी भी संख्या में से शून्य घटाने पर संख्या अपरिवर्तित रहती है: a − 0 = a
✖️किसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने पर शून्य मिलता है: a × 0 = 0

3.3 पूर्णांक — क्षितिज का विस्तार

ब्रह्मगुप्त की दो अवस्थाएं

धन (Dhana) → धनात्मक संख्याएं = सम्पत्ति
ऋण (Riṇa) → ऋणात्मक संख्याएं = कर्ज

← −5  −4  −3  −2  −1   0   1   2   3   4   5 →
← ऋण (कर्ज)                              धन (सम्पत्ति) →

3.3.1 पूर्णांकों का अंकगणित

नियम उदाहरण वास्तविक जीवन
धन + धन = धन 5 + 4 = 9 ₹5 + ₹4 = ₹9
ऋण + ऋण = ऋण (−5) + (−4) = −9 ₹5 का कर्ज + ₹4 का कर्ज
धन − शून्य = धन 7 − 0 = 7
ऋण × धन = ऋण (−3) × 4 = −12 4 बार ₹3 का कर्ज लेना
ऋण × ऋण = धन (−3) × (−4) = 12 4 कर्ज हटाना = ₹12 अमीर

अभ्यास 3.2 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: लद्दाख में दोपहर का तापमान 4°C है। रात तक 15°C गिर जाता है। रात का तापमान?

4 − 15 = −11°C

प्रश्न 2: एक व्यापारी ₹850 का कर्ज लेता है, अगले दिन ₹1200 मुनाफा, अगले सप्ताह ₹450 हानि। अंतिम स्थिति?

प्रारंभिक स्थिति + मुनाफा − हानि − कर्ज
= −850 + 1200 − 450
= 1200 − 1300 = −₹100 (अभी भी ₹100 का घाटा)

प्रश्न 3: ब्रह्मगुप्त के नियमों से हल करें:

(i) (−12) × 5 = −60
(ii) (−8) × (−7) = +56
(iii) 0 − (−14) = 0 + 14 = 14
(iv) (−20) ÷ 4 = −5

3.4 परिमेय संख्याएं — भिन्न और अनुपात

परिमेय संख्या की परिभाषा

कोई भी संख्या जिसे p/q के रूप में लिखा जा सके — जहाँ p और q पूर्णांक हों और q ≠ 0 — परिमेय संख्या (Rational Number) कहलाती है।

विचार करें (Think and Reflect): q ≠ 0 क्यों जरूरी है?

यदि q = 0 हो, तो p/q का अर्थ होगा किसी संख्या को शून्य से भाग देना। इसका कोई परिभाषित मूल्य नहीं होता।

अभ्यास 3.3 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: सिद्ध करें कि निम्नलिखित परिमेय संख्याएं बराबर हैं:

(i) 2/3 और 4/6: 2 × 6 = 12 = 3 × 4 = 12 ✓
(ii) 5/4 और 10/8: 5 × 8 = 40 = 4 × 10 = 40 ✓

प्रश्न 2: योगफल ज्ञात करें:

(i) 2/5 + 3/10 = 4/10 + 3/10 = 7/10
(ii) 7/12 + 5/8 = 14/24 + 15/24 = 29/24

प्रश्न 3: अंतर ज्ञात करें:

(i) 5/6 − 1/4 = 10/12 − 3/12 = 7/12
(iii) −7/9 − (−2/3) = −7/9 + 6/9 = −1/9

3.5 अपरिमेय संख्याएं (Irrational Numbers)

अपरिमेय संख्याओं की पहचान

अपरिमेय संख्याओं का दशमलव न समाप्त होता है, न दोहराता है:
√2 = 1.41421356...
π = 3.14159265...

√2 अपरिमेय है — प्रमाण

1
मान्यता: माना √2 परिमेय है। तो √2 = p/q जहाँ p और q सह-अभाज्य पूर्णांक हैं।
2
वर्ग करें: √2 = p/q → 2 = p²/q²
3
निष्कर्ष: p और q दोनों सम हैं, जो हमारी सह-अभाज्य की मान्यता का खंडन करता है। अतः √2 अपरिमेय है।

अभ्यास 3.5 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: पहचानें — 7/20, 4/15, 13/250

7/20: 20 = 2² × 5 → सान्त
4/15: 15 = 3 × 5 → आवर्ती
13/250: 250 = 2 × 5³ → सान्त

प्रश्न 3: वर्गीकरण करें:

(i) √81 = 9 → परिमेय
(ii) √12 = 2√3 → अपरिमेय
(iii) 0.333... → परिमेय
(v) 1.01001000... → अपरिमेय

अध्याय सारांश (Chapter Summary)

  • प्राकृत संख्याएं (ℕ): गिनती के लिए {1, 2, 3...}
  • शून्य (Śhūnya): ब्रह्मगुप्त द्वारा परिभाषित एक गणितीय संख्या।
  • पूर्णांक (ℤ): धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य का समूह।
  • परिमेय (ℚ): p/q रूप, सघन (Dense) गुण।
  • अपरिमेय (I): √2, π जैसे संख्याएं जो भिन्न नहीं हैं।
  • वास्तविक (ℝ): परिमेय और अपरिमेय का संपूर्ण मेल।
End of Chapter 3 Solutions | Ganita Manjari Grade 9
a² + b² + c² + 2ab + 2bc + 2ca
गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 4

बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज
Exploring Algebraic Identities — पैटर्न, साक्ष्य और सूत्रों की शक्ति

सर्वसमिकाओं की कल्पना, गुणनखंड, बीजगणितीय टाइलें और परिमेय व्यंजकों का सरलीकरण

4.1 परिचय — पैटर्न से बीजगणित तक

पिछले अध्यायों में आपने रैखिक बहुपदों के बारे में सीखा और यह जाना कि उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं को प्रस्तुत करने और हल करने के लिए कैसे उपयोग किया जाता है। आपने रैखिक समीकरणों का भी अध्ययन किया और पाया कि वे राशियों के बीच संबंधों का वर्णन कैसे करते हैं।

इस अध्याय में हम बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज करके अगला कदम उठाएंगे। ये विशेष गणितीय नियम हैं जो न केवल जटिल गणनाओं को सरल बनाते हैं बल्कि बीजीय व्यंजकों के साथ कुशलतापूर्वक काम करने में भी सहायता करते हैं।

उदाहरण 1: एक रोचक पैटर्न

तीन क्रमागत वर्ग संख्याएं लीजिए। जैसे 1, 4 और 9। सबसे छोटे और सबसे बड़े वर्ग को जोड़िए: 1 + 9 = 10। अब मध्य वर्ग का दोगुना घटाइए: 10 – (2 × 4) = 10 – 8 = 2। अब 9, 16, 25 के साथ प्रयास करें: (9 + 25) – (2 × 16) = 34 – 32 = 2। 25, 36, 49 के साथ: (25 + 49) – (2 × 36) = 74 – 72 = 2। परिणाम हमेशा 2 आता है! इस पैटर्न का रहस्य जल्द ही बीजगणित से उजागर होगा।

सोचें और विचार करें

इसी तरह के अन्य पैटर्न खोजने का प्रयास करें। उदाहरण के लिए, 4 क्रमागत वर्ग संख्याओं पर विचार करें और देखें कि क्या आप कोई पैटर्न पा सकते हैं।

4.2 सर्वसमिकाओं की कल्पना — ज्यामितीय मॉडल

इस खंड में हम कुछ बीजीय सर्वसमिकाओं को दोबारा देखेंगे जिन्हें हमने पिछली कक्षाओं में पढ़ा था, और ज्यामितीय मॉडलों का उपयोग करके उन्हें दृश्यात्मक रूप से समझने का प्रयास करेंगे। विशेष रूप से, हम पदों को निरूपित करने के लिए वर्गों और आयतों का उपयोग करेंगे।

(a + b)² का ज्यामितीय प्रमाण

मान लीजिए दो रेखाखंडों की लंबाई क्रमशः a और b इकाई है। इनसे (a + b) इकाई की एक लंबी रेखाखंड बनाइए। अब (a + b) भुजा का एक वर्ग खींचिए और इसे चित्र 4.2 के अनुसार छोटे वर्गों और आयतों में विभाजित करें।

ab
ab
चित्र: (a + b) भुजा का वर्ग

बाहरी वर्ग का क्षेत्रफल (a + b)² है। अंदर के बड़े वर्ग का क्षेत्रफल a² है और छोटे वर्ग का क्षेत्रफल b² है। दोनों आयतों का क्षेत्रफल प्रत्येक ab है। मिलकर ये बड़ा वर्ग बनाते हैं, इसलिए:

(a + b)² = a² + 2ab + b²

अब प्रश्न उठता है — क्या यह ऋणात्मक संख्याओं के लिए भी सत्य है?

उदाहरण 2: ऋणात्मक संख्याओं के लिए जांच

माना a = –2 और b = –3। तब (a + b) = –5 और (a + b)² = 25।
साथ ही a² = 4, b² = 9 और 2ab = 12।
अतः a² + 2ab + b² = 4 + 12 + 9 = 25 = (a + b)²। ✓

परिमेय संख्याओं के लिए: a = –2/3 और b = 3/4 लेने पर (a + b) = 1/12 और (a + b)² = 1/144।
a² + 2ab + b² = 4/9 + 2(–2/3)(3/4) + 9/16 = 4/9 – 1 + 9/16 = (64 – 144 + 81)/144 = 1/144। ✓

वितरण गुण से यह सर्वसदा सिद्ध किया जा सकता है:

(a + b)² = (a + b)(a + b) = a(a + b) + b(a + b) = a² + ab + ba + b² = a² + 2ab + b²

समीकरण और सर्वसमिका में अंतर

एक बीजीय सर्वसमिका वह समीकरण है जो इसमें आने वाले चरों के सभी मानों के लिए सत्य होती है, जबकि एक समीकरण सभी मानों के लिए सत्य नहीं होना चाहिए। उदाहरण: x² – 1 = 24 केवल x = 5 या –5 के लिए सत्य है — यह समीकरण है। परंतु (x + y)² = x² + 2xy + y² x और y के सभी मानों के लिए सत्य है — यह सर्वसमिका है।

सोचें और विचार करें

1. a और b के बारे में क्या कह सकते हैं यदि (a + b)² < a² + b²?
2. a और b के बारे में क्या कह सकते हैं यदि (a + b)² > a² + b²?
3. (a + b)², a² + b² के बराबर कब होगा?
संकेत: (a + b)² = a² + b² + 2ab — यह 2ab का चिह्न है जो निर्णय करता है।

संख्यात्मक गणनाओं में उपयोग:

उदाहरण 3: (5x + 2y)² का विस्तार करें। यहाँ a = 5x और b = 2y।
(5x + 2y)² = (5x)² + 2(5x)(2y) + (2y)² = 25x² + 20xy + 4y²

उदाहरण 4: 43² की गणना करें।
43² = (40 + 3)² = 40² + 2 × 40 × 3 + 3² = 1600 + 240 + 9 = 1849

अभ्यास सेट 4.1

प्रश्न 1: सर्वसमिका (a + b)² = a² + 2ab + b² का उपयोग करके निम्नलिखित का विस्तार कीजिए:

(i) (7x + 4y)² = (7x)² + 2(7x)(4y) + (4y)² = 49x² + 56xy + 16y²

(ii) (7/5 x + 3/2 y)² = 49x²/25 + 2(7/5 x)(3/2 y) + 9y²/4 = 49x²/25 + 21xy/5 + 9y²/4

(iii) (2.5p + 1.5q)² = 6.25p² + 7.5pq + 2.25q² = 6.25p² + 7.5pq + 2.25q²

(iv) (3/4 s + 8t)² = 9s²/16 + 12st + 64t²

(v) (x + 1/2y)² = x² + x/y + 1/4y²

(vi) (1/x + 1/y)² = 1/x² + 2/xy + 1/y²

प्रश्न 2: उसी सर्वसमिका का उपयोग करके मान ज्ञात कीजिए:

(i) 64² = (60 + 4)² = 3600 + 480 + 16 = 4096
(ii) 105² = (100 + 5)² = 10000 + 1000 + 25 = 11025
(iii) 205² = (200 + 5)² = 40000 + 2000 + 25 = 42025

4.3 सर्वसमिकाओं का उपयोग करके बीजीय व्यंजकों के गुणनखंड

सर्वसमिका (a + b)² = a² + 2ab + b² का उपयोग कुछ बीजीय व्यंजकों के गुणनखंड निकालने के लिए भी किया जा सकता है।

उदाहरण 5: x² + 4x + 4 के गुणनखंड करें।
हम देखते हैं: x² = (x)², 4 = 2², 4x = 2(x)(2)
अतः x² + 4x + 4 = x² + 2(x)(2) + 2² = (x + 2)²

उदाहरण 6: 36x² + 12x + 1 के गुणनखंड करें।
36x² + 12x + 1 = (6x)² + 2(6x)(1) + 1² जहाँ a = 6x और b = 1
अतः 36x² + 12x + 1 = (6x + 1)²

उदाहरण 7: 50p² + 60pq + 18q² के गुणनखंड करें।
2 सभी पदों का उभयनिष्ठ गुणनखंड है।
50p² + 60pq + 18q² = 2(25p² + 30pq + 9q²)
= 2[(5p)² + 2(5p)(3q) + (3q)²]
= 2(5p + 3q)²

सोचें और विचार करें — (a – b)² की सर्वसमिका

(a + b)² = a² + 2ab + b² में b के स्थान पर –b रखने पर क्या होगा?
हमें मिलता है: (a – b)² = a² – 2ab + b²
यह भी एक सर्वसमिका है और इसका उपयोग (a + b)² की तरह किया जा सकता है।

अब उदाहरण 1 के पैटर्न पर वापस आते हैं। तीन क्रमागत संख्याएं (n–1), n, (n+1) हैं।
(n–1)² + (n+1)² = n² – 2n + 1 + n² + 2n + 1 = 2n² + 2
इसमें से 2n² घटाने पर = 2 — इसीलिए परिणाम सदा 2 आता है!

उदाहरण 8: 29² की गणना करें।
29² = (30 – 1)² = 30² – 2 × 30 × 1 + 1² = 900 – 60 + 1 = 841

(a – b)² का ज्यामितीय दृश्य

a भुजा का एक वर्ग खींचिए और a को दो भागों में बाँटिए — (a – b) और b। तब बड़े वर्ग का क्षेत्रफल a² है। छोटे वर्ग का क्षेत्रफल (a – b)² है। बड़े आयत का क्षेत्रफल ab और छोटे आयत का क्षेत्रफल b(a – b) है।

(a–b)² ab
b(a–b)
चित्र: (a – b)² का ज्यामितीय प्रमाण

(a – b)² = a² – ab – b(a – b) = a² – ab – ba + b² = a² – 2ab + b²

अभ्यास सेट 4.2

प्रश्न 1: पूर्णतः गुणनखंड कीजिए:

(i) 9x² + 24xy + 16y² = (3x)² + 2(3x)(4y) + (4y)² = (3x + 4y)²

(ii) 4s² + 20st + 25t² = (2s)² + 2(2s)(5t) + (5t)² = (2s + 5t)²

(iii) 49x² + 28xy + 4y² = (7x)² + 2(7x)(2y) + (2y)² = (7x + 2y)²

(iv) 64p² + 32/3 pq + 4/9 q² = (8p)² + 2(8p)(2q/3) + (2q/3)² = (8p + 2q/3)²

प्रश्न 2: सर्वसमिका (a – b)² = a² – 2ab + b² का उपयोग करके निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिए:

(i) 79² = (80 – 1)² = 6400 – 160 + 1 = 6241
(ii) 193² = (200 – 7)² = 40000 – 2800 + 49 = 37249
(iii) 299² = (300 – 1)² = 90000 – 600 + 1 = 89401

4.4 और अधिक सर्वसमिकाएं

(a + b + c)² की सर्वसमिका

यदि हम तीन संख्याओं a, b और c के योग का वर्ग ज्ञात करना चाहें तो? b + c को d से प्रतिस्थापित करते हैं।

हम जानते हैं (a + d)² = a² + 2ad + d²। d के स्थान पर (b + c) रखने पर:

(a + b + c)² = a² + b² + c² + 2ab + 2bc + 2ca

इसे ज्यामितीय रूप से समझने के लिए (a + b + c) भुजा का एक वर्ग खींचें जिसे 9 भागों में विभाजित किया जाता है — तीन वर्ग (a², b², c²) और छह आयत (ab, bc, ca प्रत्येक दो बार)।

सोचें और विचार करें

चित्र 4.4 में वर्गों और आयतों को लेबल करें ताकि यह सर्वसमिका (a + b + c)² = a² + b² + c² + 2ab + 2bc + 2ca को निरूपित करे।

उदाहरण 9: 119² की गणना करें।
119² = (100 + 10 + 9)²
= 100² + 10² + 9² + 2(100)(10) + 2(100)(9) + 2(10)(9)
= 10000 + 100 + 81 + 2000 + 1800 + 180 = 14161

अब तक हमने तीन सर्वसमिकाओं की पुष्टि की और उनका उपयोग गणनाओं और बीजीय व्यंजकों के संचालन के लिए किया:

अब तक की सर्वसमिकाएं

1. (a + b)² = a² + 2ab + b²
2. (a – b)² = a² – 2ab + b²
3. (a + b + c)² = a² + b² + c² + 2ab + 2bc + 2ca

कक्षा 8 में पढ़ी सर्वसमिका a² – b² = (a + b)(a – b) याद करें। इसे a² = (a + b)(a – b) + b² के रूप में लिखा जा सकता है। 750 ईस्वी में श्रीधराचार्य ने इसे संख्याओं के वर्गों की शीघ्र गणना की विधि के रूप में प्रस्तावित किया था:

श्रीधराचार्य की विधि: 55² = (55 + 5)(55 – 5) + 5² = 60 × 50 + 25 = 3000 + 25 = 3025

अभ्यास सेट 4.3

प्रश्न 1: उपयुक्त सर्वसमिका का उपयोग करके निम्नलिखित वर्ग ज्ञात कीजिए:

(i) 117² = (100 + 17)² या (120 – 3)²। (120 – 3)² = 14400 – 720 + 9 = 13689
(ii) 78² = (80 – 2)² = 6400 – 320 + 4 = 6084
(iii) 198² = (200 – 2)² = 40000 – 800 + 4 = 39204
(iv) 214² = (200 + 14)² = 40000 + 5600 + 196 = 45796
(v) 1104² = (1100 + 4)² = 1210000 + 8800 + 16 = 1218816
(vi) 1120² = (1000 + 100 + 20)² — (a + b + c)² सर्वसमिका से = 1254400

प्रश्न 2: उपयुक्त सर्वसमिकाओं का उपयोग करके गुणनखंड करें:

(i) 16y² – 24y + 9 = (4y)² – 2(4y)(3) + 3² = (4y – 3)²

(ii) 9s²/4 + 6st + 4t² = (3s/2)² + 2(3s/2)(2t) + (2t)² = (3s/2 + 2t)²

(iii) m²/9 + mk/3 + k²/4 + 3nk + 2mn + 9n² = (m/3 + k/2 + 3n)² = (m/3 + k/2 + 3n)²

(iv) p²/16 – 2 + 16/p² = (p/4)² – 2(p/4)(4/p) + (4/p)² = (p/4 – 4/p)²

4.5 बीजगणितीय टाइलों का उपयोग करके गुणनखंड

मान लीजिए एक आयत की भुजाएं (x + 3) और (x + 4) इकाई हैं। हम जानते हैं कि इस आयत का क्षेत्रफल (x + 3)(x + 4) वर्ग इकाई है। वितरण नियम का उपयोग करके:

(x + 3)(x + 4) = x² + 3x + 4x + 12 = x² + 7x + 12

बीजगणितीय टाइलें इस गुणनफल को दृश्यात्मक रूप से समझने में मदद करती हैं:

← x + 3 →
← x + 4 → x x
x 1 1
x 1 1
x 1 1
x 1 1
चित्र: x² + 7x + 12 के गुणनखंड बीजगणितीय टाइलों से

7x को 3x + 4x के रूप में विभाजित करने पर आयताकार व्यवस्था बनती है। आयत की भुजाएं (x + 3) और (x + 4) हैं।

सोचें और विचार करें

1. यदि 7x को 2x + 5x के रूप में विभाजित करें — क्या समान आयताकार व्यवस्था बन सकती है? अन्य संभावनाओं पर विचार करें।
2. x + 2 और x + 3 का गुणनफल बीजगणितीय टाइलों से ज्ञात करें।
3. x² + 11x + 30 के लिए बीजगणितीय टाइलें इस प्रकार सजाएं कि उसके गुणनखंड दिखें।
4. हम जानते हैं (x+3)(x+4) = x²+7x+12 और (x+6)(x+7) = x²+13x+42। (x+a)(x+b) के लिए सामान्य व्यंजक प्राप्त करें।

4.6 बीजगणितीय टाइलों के बिना गुणनखंड

टाइलों के बिना 'x के पद के विभाजन' को कैसे प्राप्त करें? इसके लिए हम x² + (a+b)x + ab के रूप का उपयोग करते हैं।

उदाहरण 10: x² + 7x + 12 के गुणनखंड।
x² + 7x + 12 = x² + (a + b)x + ab से तुलना करने पर:
a + b = 7 और ab = 12 ⟹ a = 3 और b = 4 (या a = 4, b = 3)
अतः x² + 7x + 12 = (x + 3)(x + 4)

उदाहरण 11: x² + 11x + 30 के गुणनखंड।
a + b = 11 और ab = 30। 30 के गुणनखंड देखें: a = 5 और b = 6 ✓ (क्योंकि 5+6=11)
x² + 11x + 30 = x² + (5+6)x + 30 = x² + 5x + 6x + 30 = x(x+5) + 6(x+5) = (x + 5)(x + 6)

उदाहरण 12: x² – 5x + 6 के गुणनखंड (ऋणात्मक गुणांक)।
a + b = –5 और ab = 6। ये दोनों एक साथ तभी संभव जब a = –2 और b = –3।
x² – 5x + 6 = (x – 2)(x – 3)

अभ्यास सेट 4.4

प्रश्न 1: रिक्त स्थान भरकर निम्नलिखित सर्वसमिकाएं पूर्ण कीजिए:

(i) s² – 11s + 24: a + b = –11, ab = 24 ⟹ a = –8, b = –3 ⟹ (s – 8)(s – 3)

(ii) (________)(x + 1) = 3x² – 4x – 7: 3x² – 4x – 7 = 3x² – 7x + 3x – 7 = x(3x–7) + 1(3x–7) = (3x – 7)(x + 1)

(iii) 10x² – 11x – 6 = (2x – 3)(5x + 2): जांच: (2x–3)(5x+2) = 10x² + 4x – 15x – 6 = 10x² – 11x – 6 ✓

(iv) 6x² + 7x + 2: a + b = 7, ab = 6×2 = 12 ⟹ a = 3, b = 4। 6x² + 3x + 4x + 2 = 3x(2x+1) + 2(2x+1) = (3x + 2)(2x + 1)

प्रश्न 2: उपयुक्त सर्वसमिका चुनकर सीधे गुणा किए बिना निम्नलिखित गुणनफल ज्ञात कीजिए:

(i) 41² = (40+1)² = 1600 + 80 + 1 = 1681
(ii) 27² = (30–3)² = 900 – 180 + 9 = 729
(iii) 23 × 17 = (20+3)(20–3) = 400 – 9 = 391
(iv) 135² = (100+35)² = 10000 + 7000 + 1225 = 18225
(v) 97² = (100–3)² = 10000 – 600 + 9 = 9409
(vi) 18 × 29 = (20–2)(30–1) = (20×30) – 20 – 60 + 2 = 600 – 78 = 522 [सीधे: 18×29 = 522]
(vii) 34 × 43 = (38.5–4.5)(38.5+4.5) = 38.5² – 4.5² = 1482.25 – 20.25 = 1462
(viii) 205² = (200+5)² = 40000 + 2000 + 25 = 42025

4.7 नई सर्वसमिकाओं की खोज

अब हम बीजीय व्यंजकों के साथ खेलकर नई सर्वसमिकाएं प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

(a + b)³ की सर्वसमिका और घनीय दृश्य

(a + b)³ = (a + b)(a² + 2ab + b²) = a³ + 3a²b + 3ab² + b³

(a + b)³ = a³ + 3a²b + 3ab² + b³

इसे ज्यामितीय रूप से समझने के लिए (a + b) कोर वाला एक घन लें। इसे छोटे घनों और घनाभों में विभाजित किया जा सकता है:

घन का विभाजन (चित्र 4.10)

बड़े घन को 2 घनों और 6 घनाभों में विभाजित किया जा सकता है:
a³: a × a × a भुजा वाला घन (1 घन)
b³: b × b × b भुजा वाला घन (1 घन)
3a²b: a × a × b विमाओं वाले 3 घनाभ
3ab²: a × b × b विमाओं वाले 3 घनाभ
कुल आयतन = a³ + 3a²b + 3ab² + b³ = (a + b)³ ✓

अब (a + b)³ में b के स्थान पर –b रखने पर:

(a – b)³ = a³ – 3a²b + 3ab² – b³

ध्यान दें: चार पदों में से दो धनात्मक और दो ऋणात्मक हैं, और वे एकांतर क्रम में आते हैं।

उदाहरण 13: किस घन का आयतन p³ + 6p²q + 12pq² + 8q³ है?
p³ + 6p²q + 12pq² + 8q³ से (a + b)³ = a³ + 3a²b + 3ab² + b³ की तुलना करें:
= (p)³ + 3(p)²(2q) + 3(p)(2q)² + (2q)³ यहाँ a = p, b = 2q
= (p + 2q)³ — घन की एक भुजा = (p + 2q) इकाई

उदाहरण 14: 8n³ – 60n²m + 150nm² – 125m³ को (a – b)³ के रूप में लिखें।
= (2n)³ – 3(2n)²(5m) + 3(2n)(5m)² – (5m)³
= (2n – 5m)³ जहाँ a = 2n और b = 5m

x³ – y³ और x³ + y³ की सर्वसमिकाएं

(x – y)(x² + xy + y²) का गुणनफल ज्ञात करें:

(x – y)(x² + xy + y²) = x³ + x²y + xy² – x²y – xy² – y³ = x³ – y³

x³ – y³ = (x – y)(x² + xy + y²)

x³ + y³ = (x + y)(x² – xy + y²)

सोचें और विचार करें — एक सुंदर पैटर्न

हम जानते हैं: x² – y² = (x – y)(x + y)
हमने सत्यापित किया: x³ – y³ = (x – y)(x² + xy + y²)
x – y, x² – y² और x³ – y³ दोनों का गुणनखंड है।
क्या x – y, x⁴ – y⁴ का भी गुणनखंड है?
x⁴ – y⁴ = (x²)² – (y²)² = (x² – y²)(x² + y²) = (x – y)(x + y)(x² + y²) — हाँ!
x⁵ – y⁵ के बारे में क्या? x – y गुणनखंड होगा या नहीं?

x³ + y³ + z³ – 3xyz की सर्वसमिका

(x + y + z)(x² + y² + z² – xy – xz – yz) का विस्तार करने पर:

सर्वसमिका: x³ + y³ + z³ – 3xyz

(x + y + z)(x² + y² + z² – xy – xz – yz) = x³ + y³ + z³ – 3xyz

उदाहरण 15: तीन संख्याओं का योग 10, गुणनफल 25 और वर्गों का योग 38 है। घनों का योग ज्ञात करें।
माना संख्याएं x, y, z हैं। x+y+z = 10, xyz = 25, x²+y²+z² = 38।
पहले (xy + xz + yz) ज्ञात करें: (x+y+z)² = x²+y²+z² + 2(xy+xz+yz)
100 = 38 + 2(xy+xz+yz) ⟹ xy+xz+yz = 31
सर्वसमिका में रखें: (10)(38 – 31) = x³+y³+z³ – 3(25)
70 = x³+y³+z³ – 75
x³+y³+z³ = 145

4.8 परिमेय व्यंजकों का सरलीकरण

इस खंड में हम देखेंगे कि कैसे गुणनखंड की सहायता से परिमेय बीजीय व्यंजकों को सरल किया जा सकता है। अंश और हर के उभयनिष्ठ गुणनखंड काटे जाते हैं।

उदाहरण 16: (x² – 7x + 12) / (5x² + 5x – 100) को सरल करें (मानते हुए हर ≠ 0)।

अंश: x² – 7x + 12: a+b = –7, ab = 12 ⟹ a = –3, b = –4 ⟹ (x – 3)(x – 4)
हर: 5x² + 5x – 100 = 5(x² + x – 20): a+b = 1, ab = –20 ⟹ a = 5, b = –4 ⟹ 5(x – 4)(x + 5)

अतः (x² – 7x + 12) / (5x² + 5x – 100) = (x – 3)(x – 4) / [5(x – 4)(x + 5)]
उभयनिष्ठ गुणनखंड (x – 4) काटने पर = (x – 3) / [5(x + 5)]

सोचें और विचार करें

निम्नलिखित परिमेय व्यंजक को सरल करें:
(36s² – 12st + t²) / (t² + 2ts – 48s²)
संकेत: t² + 2ts – 48s² = (t + 8s)(t – 6s) [a+b = 2, ab = –48 ⟹ a = 8, b = –6]
36s² – 12st + t² = (6s – t)²
अतः = (6s – t)² / [(t + 8s)(t – 6s)] = –(t – 6s)² / [(t + 8s)(t – 6s)] = –(6s – t) / (t + 8s)

अभ्यास सेट 4.5

प्रश्न 1: निम्नलिखित परिमेय व्यंजकों को सरल कीजिए (हर ≠ 0 मानते हुए):

(i) (3p² – 3pq – 18q²) / (p² + 3pq – 10q²)
अंश = 3(p² – pq – 6q²) = 3(p – 3q)(p + 2q)
हर = (p + 5q)(p – 2q) — जांचें: a+b = 3, ab = –10 ⟹ a = 5, b = –2
अतः = 3(p – 3q)(p + 2q) / [(p + 5q)(p – 2q)]

(ii) (n³ – 3n²m + 3nm² – m³) / (5m² – 10mn + 5n²)
अंश = (n – m)³, हर = 5(m – n)² = 5(n – m)²
= (n – m)³ / [5(n – m)²] = (n – m) / 5

(iv) (4y² – 20yz + 25z²) / (25z² – 4y²)
अंश = (2y – 5z)², हर = (5z – 2y)(5z + 2y) = –(2y – 5z)(5z + 2y)
= (2y – 5z) / (–(5z + 2y)) = –(2y – 5z) / (5z + 2y)

(vi) (p⁴ – 16) / (p² – 4p + 4)
अंश = (p²–4)(p²+4) = (p–2)(p+2)(p²+4), हर = (p–2)²
= (p+2)(p²+4) / (p–2)

उदाहरण 17: सायरा की पहेली

सायरा ने x भुजा का एक वर्ग, 8 आयताकार पट्टियां (x × 1) और 15 इकाई वर्ग (1 × 1) मिलाकर एक बड़ा आयत बनाया।
कुल क्षेत्रफल = x² + 8x + 15
गुणनखंड: a+b = 8, ab = 15 ⟹ a = 3, b = 5
x² + 8x + 15 = (x + 3)(x + 5)
आयत की लंबाई = (x + 5) इकाई और चौड़ाई = (x + 3) इकाई

उदाहरण 18: आयताकार तालाब

एक आयताकार तालाब की चौड़ाई इसकी लंबाई से 4 मीटर कम है और क्षेत्रफल 96 वर्ग मीटर है।
माना लंबाई = x मीटर, चौड़ाई = (x – 4) मीटर
x(x – 4) = 96 ⟹ x² – 4x – 96 = 0
(–12) × 8 = –96 और (–12) + 8 = –4
x² – 12x + 8x – 96 = x(x–12) + 8(x–12) = (x–12)(x+8) = 0
x = 12 या x = –8 (ऋणात्मक संभव नहीं)
लंबाई = 12 मीटर, चौड़ाई = 8 मीटर

अध्याय के अंत के प्रश्न

प्रश्न 1: उपयुक्त सर्वसमिकाओं का उपयोग करके निम्नलिखित गुणनफल ज्ञात कीजिए:

(i) (–3x + 4)² = (4 – 3x)² = 16 – 24x + 9x² = 9x² – 24x + 16
(ii) (2s + 7)(2s – 7) = (2s)² – 7² = 4s² – 49
(iii) (p² + 1/2)(p² – 1/2) = p⁴ – 1/4 = p⁴ – 1/4
(iv) (2n + 7)(2n – 7) = 4n² – 49 = 4n² – 49
(v) (s – 2t)(s² + 2st + 4t²) = s³ – (2t)³ = s³ – 8t³
(vi) (1/2r – 4r)² = (1/2r)² – 2(1/2r)(4r) + (4r)² = r²/4 – 4r² + 16r² = r²/4 + 12r²
(vii) (–3m + 4k – l)² = 9m² + 16k² + l² – 24mk + 6ml – 8kl
(viii) (x – y/3)³ = x³ – 3x²(y/3) + 3x(y/3)² – (y/3)³ = x³ – x²y + xy²/3 – y³/27
(ix) (7k/2 – 2m/3)³ = (7k/2)³ – 3(7k/2)²(2m/3) + 3(7k/2)(2m/3)² – (2m/3)³ = 343k³/8 – 49k²m/2 + 7km²/3 – 8m³/27

प्रश्न 2: उपयुक्त सर्वसमिकाओं का उपयोग करके मान ज्ञात कीजिए:

(i) 17 × 21 = (19–2)(19+2) = 19² – 4 = 361 – 4 = 357
(ii) 104 × 96 = (100+4)(100–4) = 10000 – 16 = 9984
(iii) 24 × 16 = (20+4)(20–4) = 400 – 16 = 384
(iv) 147³ = (150–3)³ = 150³ – 3(150²)(3) + 3(150)(9) – 27 = 3375000 – 202500 + 4050 – 27 = 3176523
(v) 199³ = (200–1)³ = 8000000 – 120000 + 600 – 1 = 7880599
(vi) 127³ = (130–3)³ = 2197000 – 50700 + 390 – 27 = 2146663
(vii) (–107)³ = –107³ = –(100+7)³ = –(1000000 + 147000 + 7350 + 343) = –1225043
(viii) (–299)³ = –(300–1)³ = –(27000000 – 270000 + 900 – 1) = –26730899

प्रश्न 3 (चुनिंदा): निम्नलिखित बीजीय व्यंजकों के गुणनखंड करें:

(i) 4y² + 1 + 1/16y² = (2y)² + 2(2y)(1/4y) + (1/4y)² = (2y + 1/4y)²

(ii) 9m² – 1/25n² = (3m)² – (1/5n)² = (3m + 1/5n)(3m – 1/5n)

(iii) 27b³ – 1/64b³ = (3b)³ – (1/4b)³ = (3b – 1/4b)[(3b)² + (3b)(1/4b) + (1/4b)²] = (3b – 1/4b)(9b² + 3/4 + 1/16b²)

(vii) p³ + 27q³ + r³ – 9pqr = p³ + (3q)³ + r³ – 3·p·(3q)·r = (p + 3q + r)(p² + 9q² + r² – 3pq – pr – 3qr)

(viii) 9m² – 12m + 4 = (3m)² – 2(3m)(2) + 2² = (3m – 2)²

प्रश्न 4: निम्नलिखित को सरल करें (हर ≠ 0):

(i) (4x² + 4x + 1) / (4x² – 1)
अंश = (2x + 1)², हर = (2x+1)(2x–1)
= (2x + 1) / (2x – 1)

(ii) 9(3a³ – 24b³) / (9a² – 36b²)
= 9·3(a³ – 8b³) / [9(a² – 4b²)] = 3(a–2b)(a²+2ab+4b²) / [(a–2b)(a+2b)]
= 3(a² + 2ab + 4b²) / (a + 2b)

(iii) (s³ + 125t³) / (s² – 2st – 35t²)
अंश = (s + 5t)(s² – 5st + 25t²), हर: a+b = –2, ab = –35 ⟹ (s–7t)(s+5t)
= (s² – 5st + 25t²) / (s – 7t)

प्रश्न 5: निम्नलिखित क्षेत्रफलों वाले आयतों की संभावित लंबाई और चौड़ाई ज्ञात करें:

(i) 25a² – 30ab + 9b² = (5a)² – 2(5a)(3b) + (3b)² = (5a – 3b)²
लंबाई = (5a – 3b) इकाई, चौड़ाई = (5a – 3b) इकाई

(ii) 36s² – 49t² = (6s)² – (7t)² = (6s + 7t)(6s – 7t)
लंबाई = (6s + 7t) इकाई, चौड़ाई = (6s – 7t) इकाई

प्रश्न 6: निम्नलिखित आयतनों वाले घनाभों की संभावित विमाएं ज्ञात करें:

(i) 6a² – 24b² = 6(a² – 4b²) = 6(a + 2b)(a – 2b)
लंबाई = 6, चौड़ाई = (a + 2b), ऊंचाई = (a – 2b) इकाई

(ii) 3ps² – 15ps + 12p = 3p(s² – 5s + 4): a+b = –5, ab = 4 ⟹ a = –1, b = –4
= 3p(s – 1)(s – 4)
लंबाई = 3p, चौड़ाई = (s – 1), ऊंचाई = (s – 4) इकाई

प्रश्न 7: गांव का खेल का मैदान 40 मीटर भुजा का वर्ग है। s मीटर चौड़ा रास्ता चारों ओर बनाया गया है। रास्ते के क्षेत्रफल का व्यंजक ज्ञात करें।

बाहरी वर्ग की भुजा = (40 + 2s) मीटर
रास्ते का क्षेत्रफल = बाहरी वर्ग – मैदान = (40 + 2s)² – 40²
= (40² + 2·40·2s + 4s²) – 40²
= 160s + 4s²
= 4s(40 + s) वर्ग मीटर

प्रश्न 8: एक संख्या और उसके व्युत्क्रम का योग 10/3 है। संख्या ज्ञात कीजिए।

माना संख्या = x। तब x + 1/x = 10/3
3x² + 3 = 10x ⟹ 3x² – 10x + 3 = 0
a+b = –10, ab = 9 ⟹ a = –1, b = –9 (गुणनखंड: 3x² – 9x – x + 3 = 0)
3x(x – 3) – 1(x – 3) = 0 ⟹ (3x – 1)(x – 3) = 0
x = 3 या x = 1/3 — संख्या 3 या 1/3 है (दोनों सही, क्योंकि एक दूसरे का व्युत्क्रम है)

प्रश्न 9: एक आयताकार तालाब का क्षेत्रफल (2x² + 7x + 3) वर्ग हस्त है। यदि चौड़ाई (2x + 1) हस्त हो तो लंबाई ज्ञात करें।

2x² + 7x + 3 के गुणनखंड: a+b = 7, ab = 2×3 = 6 ⟹ नहीं... बल्कि विभाजन करें:
2x² + 7x + 3 = 2x² + 6x + x + 3 = 2x(x+3) + 1(x+3) = (2x+1)(x+3)
लंबाई = क्षेत्रफल ÷ चौड़ाई = (2x+1)(x+3) ÷ (2x+1) = (x + 3) हस्त

अध्याय सारांश

  • सर्वसमिका: वह समीकरण जो इसमें आने वाले चरों के सभी मानों के लिए सत्य हो। समीकरण सभी मानों के लिए सत्य नहीं होना चाहिए।
  • ज्यामितीय दृश्यीकरण: सर्वसमिकाओं को वर्गों, आयतों, घनों और घनाभों के क्षेत्रफल/आयतन के रूप में समझा जा सकता है।
  • बीजगणितीय टाइलें: द्विघात व्यंजकों के गुणनखंडन को बीजगणितीय टाइलों की आयताकार व्यवस्था से दृश्यात्मक रूप से समझा जा सकता है।
  • गुणनखंडन: सर्वसमिकाओं का उपयोग बीजीय व्यंजकों के गुणनखंड निकालने के लिए किया जाता है।
  • परिमेय व्यंजक: गुणनखंडन के बाद अंश और हर के उभयनिष्ठ गुणनखंडों को काटकर सरल किया जाता है (बशर्ते वह शून्य न हो)।
  • संख्यात्मक गणनाएं: सर्वसमिकाओं का उपयोग संख्याओं के वर्ग, घन और गुणनफल शीघ्र ज्ञात करने के लिए होता है।
इस अध्याय में अध्ययन की गई सर्वसमिकाएं:
  • (x + y)² = x² + 2xy + y²
  • (x – y)² = x² – 2xy + y²
  • (x + y + z)² = x² + y² + z² + 2xy + 2yz + 2zx
  • (x + y)(x – y) = x² – y²
  • (x + a)(x + b) = x² + (a + b)x + ab
  • (ax + b)(cx + d) = acx² + (ad + bc)x + bd
  • x³ – y³ = (x – y)(x² + xy + y²)
  • x³ + y³ = (x + y)(x² – xy + y²)
  • (x + y)³ = x³ + 3x²y + 3xy² + y³
  • (x – y)³ = x³ – 3x²y + 3xy² – y³
  • x³ + y³ + z³ – 3xyz = (x + y + z)(x² + y² + z² – xy – xz – yz)
अध्याय 4 समाप्त | गणित मंजरी कक्षा 9 | बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज
○ ⌒ ⊙ ⌢ ∠ ⊥ ≅
गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 5

ऊपर-नीचे, गोल-गोल
I'm Up and Down, and Round and Round — वृत्त की संपूर्ण यात्रा

प्रकृति में वृत्त, परिभाषाएं, जीवा, कोण, प्रमेय और चक्रीय चतुर्भुज का विस्तृत अध्ययन

5.0 प्रकृति में वृत्त — आकृतियों से मोह

मानवता हमेशा से अपने चारों ओर की आकृतियों से मोहित रही है। कुछ प्रारंभिक गुफा चित्रों में सूर्य को एक वृत्त के रूप में दर्शाया गया है। ओडिशा के गुडाहांडी की गुफा चित्रकारी में त्रिभुज, वर्ग, वृत्त और अंडाकार जैसी अनेक ज्यामितीय आकृतियां दिखाई देती हैं।

जब वर्षा की बूंदें पानी पर गिरती हैं तो वृत्त बनते हैं। पौधे के तने की अनुप्रस्थ काट और सूरजमुखी का पुष्पगुच्छ भी वृत्ताकार होता है। पूर्णिमा का चंद्रमा और सूर्य भी वृत्ताकार दिखते हैं।

गतिविधि: प्रकृति से वृत्त खोजें

प्रकृति में ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए जो वृत्त के समान हैं। उदाहरण: फलों का अनुप्रस्थ काट, पेड़ के तने की कटाई, तालाब में पत्थर फेंकने पर बनने वाली तरंगें।

5.1 परिभाषाएं — वृत्त को समझना

जब हम वृत्त, त्रिभुज और वर्ग जैसी गणितीय आकृतियों की बात करते हैं, तो हम हमेशा मान लेते हैं कि आकृतियां कागज के एक टुकड़े पर खींची गई हैं — एक द्विविमीय समतल।

वृत्त की परिभाषा

वृत्त समतल पर उन सभी बिंदुओं का समुच्चय है जो उस समतल पर स्थित एक निश्चित बिंदु से समान दूरी पर हों। वह निश्चित बिंदु वृत्त का केंद्र कहलाता है। केंद्र से वृत्त पर स्थित किसी भी बिंदु तक की दूरी वृत्त की त्रिज्या कहलाती है।

विचार करें

जमुना के पास एक वृत्ताकार कागज का टुकड़ा है। वह इसके केंद्र को ज्ञात करने का प्रयास कर रही है। अमीना उसे एक सुझाव देती है। वह निर्देशों का पालन करती है और यह पाकर रोमांचित हो जाती है कि यह काम करता है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि अमीना ने उसे क्या बताया?

मुख्य शब्दावली

जीवा (Chord): वृत्त पर स्थित दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा कहलाता है। BC एक जीवा है।

व्यास (Diameter): वृत्त के केंद्र से होकर गुजरने वाली जीवा व्यास कहलाती है। व्यास वृत्त की सबसे लंबी जीवा होती है।

केंद्र पर अंतरित कोण: जीवा BC द्वारा केंद्र A पर बनाया गया कोण BAC, जीवा द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण कहलाता है।

चाप (Arc): वृत्त का एक संबद्ध भाग चाप कहलाता है। इसे दो बिंदुओं द्वारा परिभाषित किया जाता है जिन्हें चाप के अंत बिंदु कहा जाता है।

5.2 वृत्त की सममितियां

वृत्त को इतना आकर्षक बनाने वाली चीज यह है कि वे पूरी तरह से सममित होते हैं। मान लीजिए आप किसी वाहन के पहिये को देख रहे हैं। आप पहिये के एक बिंदु को जमीन को छूते हुए देखते हैं। कुछ समय बाद जब आप फिर से पहिये को देखते हैं, तो आप फिर से एक बिंदु को जमीन को छूते हुए देखते हैं। क्या आप बता सकते हैं कि दोनों बिंदु एक ही बिंदु हैं? कोई रास्ता नहीं है जिससे आप बता सकें। घूमता हुआ पहिया हर समय एक जैसा दिखता है!

वृत्त की सममितियां

घूर्णन सममिति: वृत्त को किसी भी कोण से घुमाइए और यह बिल्कुल वैसा ही दिखता है। हम कहते हैं कि वृत्त में पूर्ण घूर्णन सममिति है।
परावर्तन सममिति: सभी व्यास परावर्तन सममिति की रेखाएं हैं।

कागज पर एक वृत्त बनाइए और वृत्त के साथ काटिए। वृत्ताकार कागज को इस प्रकार मोड़िए कि सीमाएं ओवरलैप हों, फिर इसे खोलिए। आप एक मोड़ देखते हैं — यह वृत्त की परावर्तन सममिति की रेखा है। क्या यह रेखा वृत्त के केंद्र से होकर गुजरती है? हां, गुजरती है। यह वृत्त का व्यास है।

5.3 कितने वृत्त संभव हैं?

अब जब हमने एक वृत्त को परिभाषित कर लिया है और इसके कुछ गुणों की सूची बना ली है, तो आइए यह प्रश्न पूछें: समतल पर दिए गए दो बिंदु A और B से होकर कितने वृत्त गुजरते हैं?

यदि कोई वृत्त A और B से होकर गुजरता है, तो उसका एक केंद्र होगा, मान लीजिए O। लंबाई OA और OB बराबर हैं। क्या इस गुण वाला कोई अन्य बिंदु है? हां, रेखाखंड AB का मध्य बिंदु। मध्य बिंदु को केंद्र मानकर, A और B से गुजरने वाला एक वृत्त खींचा जा सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

A और B से होकर गुजरने वाले सभी वृत्तों के केंद्र AB के लंब समद्विभाजक पर स्थित होते हैं। लंब समद्विभाजक पर स्थित प्रत्येक बिंदु A और B से समदूरस्थ होता है, और A और B से समदूरस्थ प्रत्येक बिंदु लंब समद्विभाजक पर है!

तीन बिंदुओं से वृत्त

अब हम पूछते हैं: समतल पर तीन भिन्न बिंदु A, B और C से होकर कितने वृत्त खींचे जा सकते हैं? क्या हमेशा कम से कम एक ऐसा वृत्त होता है? आवश्यक नहीं! यदि A, B और C एक सीधी रेखा पर स्थित हों, अर्थात संरेखी हों तो? क्या आप समझा सकते हैं कि ऐसी स्थिति में A, B और C से होकर कोई वृत्त क्यों नहीं गुजरता?

प्रमेय 1: तीन असंरेखी बिंदुओं से एक अद्वितीय वृत्त

कथन: तीन असंरेखी बिंदुओं से होकर एक और केवल एक वृत्त गुजरता है।

प्रमाण: माना A, B और C तीन असंरेखी बिंदु हैं। यदि कोई वृत्त इन तीनों से गुजरता है, तो उसका एक केंद्र O होगा। चूंकि OA = OB, इसलिए O, AB के लंब समद्विभाजक पर होगा। चूंकि OA = OC, इसलिए O, AC के लंब समद्विभाजक पर भी होगा। परंतु A, B और C असंरेखी हैं, इसलिए AB और AC के लंब समद्विभाजक एक अद्वितीय बिंदु पर प्रतिच्छेद करेंगे — वही बिंदु O है। O को केंद्र मानकर और OA के बराबर त्रिज्या लेकर एक वृत्त खींचा जा सकता है जो A, B और C से होकर गुजरेगा।

परिवृत्त और परिकेंद्र: त्रिभुज ABC के शीर्षों से गुजरने वाले वृत्त का केंद्र O, त्रिभुज ABC का परिकेंद्र कहलाता है। यह वृत्त परिवृत्त कहलाता है। त्रिभुज वृत्त में अंतर्निहित कहलाता है।

त्रिभुज के प्रकार और परिकेंद्र की स्थिति

न्यून कोण त्रिभुज: परिकेंद्र त्रिभुज के अंदर होता है।
अधिक कोण त्रिभुज: परिकेंद्र त्रिभुज के बाहर होता है।
समकोण त्रिभुज: परिकेंद्र कर्ण के मध्य बिंदु पर होता है।

अभ्यास 5.1

प्रश्न 1: त्रिभुज ABC खींचिए जिसमें AB = 5 सेमी, कोण A = 70° और कोण B = 60° हो। त्रिभुज ABC का परिवृत्त खींचिए। क्या केंद्र त्रिभुज के अंदर है या बाहर?

हल: AB, BC और CA के लंब समद्विभाजक खींचिए। तीनों एक बिंदु O पर मिलेंगे। O को केंद्र मानकर OA के बराबर त्रिज्या से वृत्त खींचिए। चूंकि कोण A = 70° और कोण B = 60°, इसलिए कोण C = 50° होगा। सभी कोण 90° से कम हैं, इसलिए यह न्यूनकोण त्रिभुज है। परिकेंद्र त्रिभुज के अंदर होगा।

प्रश्न 4: दो बिंदु A और B से गुजरने वाले वृत्त की न्यूनतम संभव त्रिज्या क्या है?

हल: जब AB व्यास हो तो त्रिज्या न्यूनतम होगी। न्यूनतम त्रिज्या = AB/2

5.4 जीवाएं और उनके द्वारा अंतरित कोण

एक पहिये पर दो बिंदुओं पर एक धागा बांधिए और इसे कसिए। धागे को जीवा के रूप में सोचा जा सकता है। धागे के सिरों को केंद्र से मिलाने की कल्पना कीजिए। धागा केंद्र पर एक कोण अंतरित करता है। अब पहिये को घुमाइए। धागा केंद्र के चारों ओर पहिये के साथ घूमता है।

प्रमेय 2: समान जीवाएं केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं

दिया है: AB = DE (दोनों एक ही वृत्त की जीवाएं हैं)
सिद्ध करना है: कोण ACB = कोण DCE

प्रमाण: CA = CB = r (वृत्त की त्रिज्या)। इसी प्रकार CD = CE = r। दिया है AB = DE। SSS सर्वांगसमता से, त्रिभुज CAB त्रिभुज CDE के सर्वांगसम है। इसलिए कोण ACB = कोण DCE।

प्रमेय 3: केंद्र पर समान कोण अंतरित करने वाली जीवाएं बराबर होती हैं

दिया है: कोण ACB = कोण DCE
सिद्ध करना है: AB = ED

प्रमाण: AC = BC = वृत्त की त्रिज्या। इसी प्रकार EC = DC = त्रिज्या। चूंकि कोण ACB = कोण DCE (दिया है), SAS सर्वांगसमता से त्रिभुज ACB त्रिभुज DCE के सर्वांगसम है। इसलिए AB = ED।

5.5 जीवाओं के मध्य बिंदु और लंब समद्विभाजक

अब हम जीवाओं के और गुणों का अध्ययन करेंगे। यदि हम वृत्त के केंद्र से जीवा के मध्य बिंदु तक एक रेखाखंड खींचें तो क्या हमें कुछ विशेष मिलता है? यदि हम किसी जीवा का लंब समद्विभाजक खींचें तो क्या यह किसी विशेष बिंदु से होकर गुजरता है?

प्रमेय 4: केंद्र और जीवा के मध्य बिंदु को मिलाने वाली रेखा जीवा पर लंब होती है

दिया है: AB एक जीवा है, M इसका मध्य बिंदु है, C वृत्त का केंद्र है।
सिद्ध करना है: CM, AB पर लंब है।

प्रमाण: त्रिभुज CAB एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें CA = CB। इसलिए कोण A = कोण B। M, AB का मध्य बिंदु है, इसलिए AM = BM। SAS सर्वांगसमता से त्रिभुज CMA त्रिभुज CMB के सर्वांगसम है। इसलिए कोण CMB = कोण CMA। परंतु कोण CMB + कोण CMA = 180° (एक रेखा पर कोण)। अतः दोनों कोण 90° हैं। इसलिए CM, AB पर लंब है।

प्रमेय 5: केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है

यह प्रमेय 4 का विलोम है। यदि कोण CMA = कोण CMB = 90°, तो सिद्ध करना है कि AM = BM।

5.6 केंद्र से जीवाओं की दूरी

एक कागज का वृत्त लीजिए। वृत्त को सीमा से अंदर की ओर मोड़िए। मोड़ को खोलिए। क्रीज अब एक जीवा है। अब कागज को फिर से इस प्रकार मोड़िए कि जीवा के सिरे मिल जाएं। मोड़ को खोलिए। जिन भागों में जीवा विभाजित हुई है उनकी लंबाई मापिए। जीवा वहां समद्विभाजित होती है जहां मोड़ प्रतिच्छेद करते हैं। दूसरे मोड़ की क्रीज केंद्र से जीवा पर लंब के साथ है।

प्रमेय 6: समान लंबाई की जीवाएं केंद्र से समान दूरी पर होती हैं

दिया है: AB = FG, E और H क्रमशः AB और FG के मध्य बिंदु हैं।
सिद्ध करना है: CE = CH

प्रमाण (विधि 1): त्रिभुज CAB और CFG सर्वांगसम हैं (SSS)। इसलिए समान त्रिभुजों की शीर्षलंब भी बराबर हैं। अतः CE = CH।

प्रमाण (विधि 2): त्रिभुज CEA और CHF पर विचार करें। AE = FH (चूंकि AB = FG और E, H मध्य बिंदु हैं)। कोण CEA = कोण CHF = 90°। CF = CA (दोनों त्रिज्या)। RHS सर्वांगसमता से त्रिभुज CEA त्रिभुज CHF के सर्वांगसम है। इसलिए CE = CH।

प्रमेय 7: केंद्र से समान दूरी पर स्थित जीवाएं बराबर होती हैं

यदि CE = CH और CE, CH क्रमशः AB, GH पर लंब हैं, तो AB = GF।

प्रमेय 8: दो असमान जीवाओं में से लंबी जीवा केंद्र के अधिक निकट होती है

दिया है: AB और DE दो जीवाएं हैं जिनमें AB > DE। CF और CG क्रमशः AB और DE पर लंब हैं।
सिद्ध करना है: CF < CG

प्रमाण: AC और CD दोनों त्रिज्याएं हैं, इसलिए AC = CD। बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय से, CD² = CG² + GD² और AC² = CF² + AF²। चूंकि AB > DE, इसलिए AF > GD (क्योंकि F और G मध्य बिंदु हैं)। चूंकि AF² > GD², इसलिए CF² < CG²। अतः CF < CG।

अभ्यास 5.5

प्रश्न 1: एक वृत्त की जीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए जहां त्रिज्या 7 सेमी है और लंबवत दूरी 6 सेमी है।

हल: माना जीवा AB है, C केंद्र है, और M जीवा का मध्य बिंदु है। CM = 6 सेमी (लंब दूरी), CA = 7 सेमी (त्रिज्या)।
समकोण त्रिभुज CMA में: CA² = CM² + AM²
7² = 6² + AM²
49 = 36 + AM²
AM² = 13
AM = √13 सेमी
जीवा की लंबाई AB = 2 × AM = 2√13 सेमी

5.7 चाप द्वारा अंतरित कोण

वृत्त का एक चाप वृत्त का एक संबद्ध भाग है। इसे वृत्त पर दो बिंदुओं द्वारा परिभाषित किया जाता है, जिन्हें चाप के अंत बिंदु कहा जाता है।

A और B वृत्त पर दो बिंदु हैं। A से B तक जाने के दो रास्ते हैं। एक बड़ा चाप है जिसे दीर्घ चाप कहते हैं, और दूसरा छोटा चाप है जिसे लघु चाप कहते हैं।

केंद्र पर अंतरित कोण

चाप AB द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण से हमारा अभिप्राय कोण AOB के माप से है, जैसा कि हम चाप के साथ चलते हैं। यदि केंद्र पर कोण 180° से कम है, तो यह लघु चाप है। यदि केंद्र पर कोण 180° से अधिक है, तो यह दीर्घ चाप है।

चाप के बाहर किसी बिंदु पर अंतरित कोण

चाप AXB द्वारा वृत्त पर चाप के बाहर स्थित किसी बिंदु पर अंतरित कोण से हमारा अभिप्राय कोण ACB से है जहां C वृत्त पर कोई बिंदु है परंतु चाप AXB पर नहीं है। आश्चर्यजनक रूप से, इस कोण का माप इस पर निर्भर नहीं करता कि हम कौन सा विशिष्ट बिंदु C चुनते हैं, जब तक कि यह वृत्त पर है और चाप के बाहर है!

प्रमेय 9: चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, वृत्त पर चाप के बाहर किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दोगुना होता है

दिया है: AFB एक चाप है। कोण ACB केंद्र C पर अंतरित कोण है। D वृत्त पर चाप AFB के बाहर एक बिंदु है।
सिद्ध करना है: कोण BCA = 2 × कोण BDA

प्रमाण: D को C से मिलाइए और DC को आगे बढ़ाकर वृत्त को बिंदु E पर काटिए। त्रिभुज DCB समद्विबाहु है (CB = CD)। इसलिए कोण CBD = कोण CDB। कोण BCE बाह्य कोण है, इसलिए कोण BCE = कोण CBD + कोण CDB = 2 × कोण BDC। इसी प्रकार कोण ACE = 2 × कोण CDA। अब कोण BCA = कोण BCE + कोण ECA = 2 × (कोण BDC + कोण CDA) = 2 × कोण BDA।

महत्वपूर्ण परिणाम

इस प्रमेय से एक बहुत ही रोचक बात निकलती है। किसी चाप AB को लीजिए। वृत्त पर चाप के बाहर कोई भी बिंदु D लीजिए। तब, D कहीं भी हो, जब तक वह चाप के बाहर और वृत्त पर है, कोण ADB समान रहता है! एक ही चाप द्वारा एक ही खंड में स्थित सभी बिंदुओं पर अंतरित कोण बराबर होते हैं।

उपप्रमेय: अर्धवृत्त में बना कोण समकोण होता है

प्रमाण: माना AB एक व्यास है। हमें सिद्ध करना है कि कोण ADB = 90° है। A से B तक का चाप जो D को सम्मिलित नहीं करता, केंद्र C पर 180° का कोण अंतरित करता है (सरल रेखा)। इसलिए कोण ADB = (1/2) × 180° = 90°।

5.8 बिंदुओं की समवृत्तता

अब हम इस प्रश्न पर आते हैं कि 4 बिंदु एक ही वृत्त पर कब स्थित होते हैं। हम ऐसे बिंदुओं को समवृत्तीय कहते हैं।

प्रमेय 10: यदि दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड दो अन्य बिंदुओं पर समान कोण अंतरित करे तो चारों बिंदु एक वृत्त पर स्थित होते हैं

दिया है: AB एक रेखाखंड है। बिंदु C और D, AB के एक ही ओर स्थित हैं। कोण ACB = कोण ADB।
सिद्ध करना है: A, B, C, D एक वृत्त पर स्थित हैं।

प्रमाण: बिंदु A, B, C असंरेखी हैं, इसलिए एक वृत्त इन तीनों से होकर गुजरता है। मान लीजिए D इस वृत्त पर नहीं है। AD को आगे बढ़ाइए जो वृत्त को E पर काटे। अब C और E एक ही खंड में हैं, इसलिए कोण ACB = कोण AEB। यदि D बाहर हो तो कोण AEB, त्रिभुज BED का बाह्य कोण है, इसलिए कोण AEB > कोण ADB। परंतु कोण ACB = कोण ADB (दिया है)। यह विरोधाभास है। इसी प्रकार यदि D अंदर हो तब भी विरोधाभास मिलता है। इसलिए D वृत्त पर होना चाहिए।

चक्रीय चतुर्भुज: जब किसी चतुर्भुज के शीर्ष समवृत्तीय होते हैं, तो उस चतुर्भुज को चक्रीय चतुर्भुज कहते हैं।

प्रमेय 11: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग 180° होता है

दिया है: ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है जिसका केंद्र O है।
सिद्ध करना है: कोण BAD + कोण BCD = 180°

प्रमाण: चाप BCD पर विचार करें। बिंदु A वृत्त पर चाप BCD के बाहर है। इसलिए कोण BAD = (1/2) × प्रतिवर्त कोण BOD। इसी प्रकार कोण BCD = (1/2) × कोण BOD। इसलिए कोण BAD + कोण BCD = (1/2) × (केंद्र O पर पूर्ण कोण) = (1/2) × 360° = 180°।

प्रमेय 12: यदि किसी चतुर्भुज के दो सम्मुख कोणों का योग 180° हो तो वह चक्रीय होता है

दिया है: ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें कोण BAD + कोण BCD = 180°
सिद्ध करना है: ABCD चक्रीय है।

प्रमाण: मान लीजिए ABCD चक्रीय नहीं है। A, D, B से होकर एक वृत्त गुजरता है। माना CD इस वृत्त को E पर काटती है। तब ABED चक्रीय है, इसलिए कोण BAD + कोण BED = 180° (प्रमेय 11 से)। परंतु दिया है कि कोण BAD + कोण DCB = 180°। इसलिए कोण BCD = कोण BED। परंतु यह संभव नहीं क्योंकि कोण BED त्रिभुज BEC का बाह्य कोण है और कोण BCE से बड़ा है। इसलिए A, B, C, D सभी एक वृत्त पर स्थित होने चाहिए।

अध्याय के अंत के प्रश्न

प्रश्न 1: एक वृत्त में एक जीवा केंद्र से 5 सेमी दूर है। यदि वृत्त की त्रिज्या 13 सेमी है, तो जीवा की लंबाई क्या है?

हल: माना AB जीवा है, C केंद्र है, M मध्य बिंदु है।
CM = 5 सेमी, CA = 13 सेमी
समकोण त्रिभुज CMA में: CA² = CM² + AM²
13² = 5² + AM²
169 = 25 + AM²
AM² = 144
AM = 12 सेमी
जीवा की लंबाई = 2 × 12 = 24 सेमी

प्रश्न 2: एक वृत्त का एक चाप केंद्र पर 70° का कोण अंतरित करता है। वृत्त पर किसी बिंदु पर चाप द्वारा अंतरित कोण का माप क्या है?

हल: प्रमेय 9 से, वृत्त पर किसी बिंदु पर अंतरित कोण = (1/2) × केंद्र पर अंतरित कोण
= (1/2) × 70° = 35°

प्रश्न 7: ABCD एक वृत्त में अंतर्निहित चक्रीय चतुर्भुज है। यदि कोण A = 75° है, तो कोण C का माप क्या है? यदि कोण B = 110° है, तो कोण D का माप क्या है?

हल: चक्रीय चतुर्भुज में सम्मुख कोणों का योग 180° होता है।
कोण A + कोण C = 180°
75° + कोण C = 180°
कोण C = 105°

कोण B + कोण D = 180°
110° + कोण D = 180°
कोण D = 70°

अध्याय सारांश

  • वृत्त: समतल पर उन सभी बिंदुओं का समुच्चय जो एक निश्चित बिंदु (केंद्र) से समान दूरी (त्रिज्या) पर हों।
  • परावर्तन सममिति: वृत्त में किसी भी व्यास के साथ परावर्तन सममिति होती है।
  • घूर्णन सममिति: वृत्त में अपने केंद्र के परितः किसी भी कोण से पूर्ण घूर्णन सममिति होती है।
  • दो बिंदुओं से वृत्त: दो दिए गए बिंदुओं से अनंत वृत्त गुजर सकते हैं। इन वृत्तों के केंद्र दो बिंदुओं को मिलाने वाले रेखाखंड के लंब समद्विभाजक पर स्थित होते हैं।
  • तीन असंरेखी बिंदुओं से वृत्त: तीन असंरेखी बिंदुओं से होकर एक और केवल एक वृत्त गुजरता है — परिवृत्त। इसका केंद्र परिकेंद्र कहलाता है।
  • समान जीवाएं: समान लंबाई की जीवाएं केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं। विलोम भी सत्य है।
  • लंब समद्विभाजक: केंद्र से जीवा के मध्य बिंदु को मिलाने वाली रेखा जीवा पर लंब होती है। विलोम भी सत्य है।
  • केंद्र से दूरी: समान लंबाई की जीवाएं केंद्र से समान दूरी पर होती हैं। लंबी जीवा केंद्र के अधिक निकट होती है।
  • चाप और कोण: चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, वृत्त पर चाप के बाहर किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दोगुना होता है।
  • अर्धवृत्त में कोण: व्यास द्वारा वृत्त पर किसी बिंदु पर अंतरित कोण 90° होता है।
  • समवृत्तीय बिंदु: यदि दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड दो अन्य बिंदुओं पर समान कोण अंतरित करे, तो चारों बिंदु समवृत्तीय होते हैं।
  • चक्रीय चतुर्भुज: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग 180° होता है। विलोम भी सत्य है।
अध्याय 5 समाप्त | गणित मंजरी कक्षा 9 | वृत्त — ऊपर-नीचे, गोल-गोल
C = 2πr | A = πr² | s(s-a)(s-b)(s-c)
गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 6

स्थान का मापन: परिमाप और क्षेत्रफल
Measuring Space: Perimeter and Area — वृत्त, त्रिभुज, π और हेरॉन का सूत्र

वृत्त की परिधि, π का इतिहास, चाप की लंबाई, त्रिभुज और बहुभुज का क्षेत्रफल, हेरॉन का सूत्र, ब्रह्मगुप्त का सूत्र

6.1 परिचय — 4 × 100 मीटर रिले दौड़ और स्टैगर की पहेली

4 × 100 मीटर रिले दौड़ में आपने देखा होगा कि बाहरी लेन के धावक भीतरी लेन के धावकों से आगे खड़े होते हैं, जबकि फिनिश लाइन सबके लिए एक ही होती है। आसन्न लेनों के आरंभिक बिंदुओं के बीच की दूरी को 'स्टैगर' कहते हैं।

क्या यह स्टैगर किसी को अनुचित लाभ देता है? नहीं! क्योंकि बाहरी लेन की त्रिज्या बड़ी होने से उनका अर्धवृत्त अधिक लंबा होता है। स्टैगर इसी अंतर की भरपाई करता है। इस प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए हमें वृत्त की परिधि ज्ञात करनी होगी।

सोचें और विचार करें

मेरे विद्यालय में 400 मीटर की ट्रैक के लिए मैदान बहुत छोटा है, इसलिए विद्यालय ने 200 मीटर की ट्रैक बनाई है। क्या इसका मतलब है कि उसी 4 × 100 मीटर रिले दौड़ के लिए हमें ओलंपिक की तुलना में छोटे स्टैगर की आवश्यकता होगी?

6.1 आकृति का परिमाप

किसी भी आकृति का परिमाप उसकी सीमा के चारों ओर की कुल लंबाई है। एक छोटे कीड़े की कल्पना करें जो आकृति की सीमा पर चलता है — बिना पीछे मुड़े — जब तक वह अपने प्रारंभिक बिंदु पर वापस न आ जाए। वह जो कुल दूरी तय करता है, वही परिमाप है।

मूलभूत आकृतियों के परिमाप के सूत्र

वर्ग (भुजा = a): परिमाप = 4a इकाई
समबाहु त्रिभुज (भुजा = a): परिमाप = 3a इकाई
आयत (लंबाई = a, चौड़ाई = b): परिमाप = 2(a + b) इकाई
वृत्त (त्रिज्या = r): परिमाप (परिधि) = ? — यही इस अध्याय की मुख्य खोज है!

एक महत्वपूर्ण पैटर्न: यदि वर्ग की भुजा दोगुनी हो जाए तो परिमाप भी दोगुना हो जाता है। परिमाप और भुजा का अनुपात 4:1 सभी वर्गों के लिए स्थिर रहता है। इसी प्रकार समबाहु त्रिभुजों के लिए यह अनुपात 3:1 है। वृत्त के लिए — परिधि (C) और व्यास (D) का अनुपात क्या है?

6.2 वृत्त का परिमाप — C/D अनुपात और π का इतिहास

प्राचीन काल से मनुष्यों ने यह जाना कि वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात वृत्त के आकार पर निर्भर नहीं करता — यह सदा एक ही स्थिरांक रहता है। इसे हम C/D अनुपात कहते हैं और आज इसे π (pi) के नाम से जानते हैं।

घरेलू माप प्रयोग

एक धागे की रील लें। रील का व्यास D जितना सटीक हो सके मापें। धागे को रील के चारों ओर 20 बार लपेटें, फिर खोलकर उसकी लंबाई L मापें। L/(20D) की गणना करें। यही C/D अनुपात है। क्या आपको 3 और 4 के बीच का परिणाम मिला? 3.1 और 3.2 के बीच?

π की रोमांचक यात्रा — प्राचीन काल से माधव तक

π के ऐतिहासिक मान — एक झलक

मेसोपोटामिया (लगभग 1900 ईसा पूर्व): उन्होंने जाना कि वृत्त की परिधि उसमें अंकित षट्भुज से थोड़ी बड़ी होती है (षट्भुज की परिधि = 2πr × 6/2πr का परिचय)। उन्होंने π = 3 + 1/8 = 3.125 लिया।

आर्किमिडीज (250 ईसा पूर्व): उन्होंने वृत्त में अंकित और परिगत बहुभुजों का उपयोग करके π को 'फँसाया'। 96 भुजाओं वाले बहुभुज तक जाकर उन्होंने सिद्ध किया: 3(10/71) < π < 3(1/7)

टॉलेमी (150 ईस्वी): π ≈ 377/120 ≈ 3.14167

लियू हुई और झू चोंगज़ी (263–480 ईस्वी): 24,576 भुजाओं वाले बहुभुज तक पहुँचकर झू ने दो मान दिए — युएलू (अनुमानित): 22/7 ≈ 3.1428 और मियू (निकट अनुपात): 355/113 ≈ 3.1415929। यह मान 800 वर्षों तक सबसे सटीक रहा! 15,000 से कम हर वाले किसी अन्य परिमेय भिन्न से यह π के इतने करीब नहीं है।

आर्यभट (499 ईस्वी): π ≈ 62832/20000 = 3.1416। उन्होंने इसे 'आसन्न' (approaching/approximate) कहा — एक गहन अंतर्दृष्टि कि π को एक साधारण भिन्न के रूप में ठीक-ठीक नहीं दिया जा सकता।

ब्रह्मगुप्त (628 ईस्वी): π ≈ √10 ≈ 3.1622। थोड़ा कम सटीक, लेकिन समीकरणों में प्रयोग की सुगमता के लिए चुना।

माधव (संगमग्राम, लगभग 1400 ईस्वी): उन्होंने π का पहला सटीक सूत्र खोजा — एक अनंत श्रेणी के रूप में:

π/4 = 1 – 1/3 + 1/5 – 1/7 + …

इस सूत्र ने गणित में क्रांति ला दी — ज्यामितीय कटाई से संख्याओं के विश्लेषणात्मक योग की ओर जाकर माधव ने कलन गणित (Calculus) को जन्म दिया। उन्होंने π को 11 दशमलव स्थानों तक (3.14159265358) ज्ञात किया।

π का नाम और चिह्न: 1706 में वेल्श गणितज्ञ विलियम जोन्स ने ग्रीक शब्द perimetros (परिमाप) के प्रथम अक्षर π का उपयोग C/D अनुपात के लिए किया। स्विस-जर्मन गणितज्ञ लियोनार्ड ऑयलर ने इसे लोकप्रिय बनाया।

मजेदार तथ्य — π याद करने का तरीका: "How I wish I could recollect pi."
प्रत्येक शब्द के अक्षरों की संख्या गिनें: 3, 1, 4, 1, 5, 9, 2 — यही π के प्रथम अंक हैं!

6.3 π अपरिमेय है

π के अंक अनंत तक चलते हैं और उनमें कोई दृश्यमान पैटर्न नहीं है। हम जानते हैं कि परिमेय संख्याएं आवर्ती दशमलव देती हैं:

1/3 = 0.33333...,    1/11 = 0.09090909...,    1/7 = 0.142857 142857...

लेकिन π के लिए ऐसा कोई पैटर्न नहीं है! π को दो पूर्णांकों के अनुपात के रूप में नहीं लिखा जा सकता। ऐसी संख्याएं अपरिमेय (irrational) कहलाती हैं।

महत्वपूर्ण बातें

• आर्यभट और झू चोंगज़ी ने अपने लेखन में संकेत दिया था कि π अपरिमेय है।
• 1761 में गणितज्ञ लैम्बर्ट ने इसे सिद्ध किया।
• चूँकि π अपरिमेय है, इसका कोई 'सर्वोत्तम भिन्न' नहीं है।
• 22/7 अधिकांश व्यावहारिक उपयोगों के लिए पर्याप्त है, परंतु π ≠ 22/7।
• बहुत बेहतर सन्निकटन: 355/113।
• π ≈ 3.14 होने से 14 मार्च को Pi Day और 22 जुलाई को Pi Approximation Day मनाया जाता है।

6.4 वृत्त के चाप की लंबाई

त्रिज्या r के वृत्त की परिधि = 2πr (या πd, जहाँ d = व्यास)।

अर्धवृत्त और चतुर्थांश की लंबाई

अर्धवृत्त की लंबाई: वृत्त को व्यास AB में परावर्तित करने पर दोनों अर्धवृत्त एक-दूसरे की जगह ले लेते हैं — अतः उनकी लंबाई बराबर है।
अर्धवृत्ताकार चाप = 2πr ÷ 2 = πr

चतुर्थांश की लंबाई: आकृति को 90° घुमाने पर प्रत्येक चतुर्थांश दूसरे को ढक लेता है — अतः चारों की लंबाई बराबर है।
चतुर्थांश चाप = 2πr ÷ 4 = πr/2

इन दोनों से हम सामान्य सूत्र निकाल सकते हैं:

यदि चाप AB केंद्र O पर θ° कोण अंतरित करे, तो चाप की लंबाई = 2πr × (θ°/360°)

400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक का विश्लेषण

400 मीटर ट्रैक की संरचना

• दो सीधे खंड: प्रत्येक 84.39 मीटर लंबे (कुल = 168.78 मीटर)
• दो अर्धवृत्ताकार मोड़: अंदरूनी त्रिज्या 36.5 मीटर; प्रत्येक लेन 1.22 मीटर चौड़ी

पहली लेन का धावक (भीतरी सीमा से 0.3 मीटर पर दौड़ता है):
— दो अर्धवृत्त की त्रिज्या = 36.5 + 0.3 = 36.8 मीटर
— दो अर्धवृत्त मिलाकर पूरे वृत्त की परिधि = 2 × π × 36.8 = 2 × 3.1416 × 36.8 ≈ 231.22 मीटर
— कुल दूरी = 168.78 + 231.22 = 400 मीटर ✓

स्टैगर: सीधे खंडों पर दोनों लेनों की दूरी बराबर है, लेकिन मोड़ पर दूसरी लेन की त्रिज्या बड़ी है। इस अतिरिक्त दूरी की भरपाई के लिए स्टैगर दिया जाता है।

सोचें और विचार करें

पहली और दूसरी लेन की त्रिज्याओं में क्या अंतर है? दूसरी लेन के धावक के लिए आवश्यक स्टैगर ज्ञात करें। क्या तीसरी और दूसरी लेन के बीच भी बराबर स्टैगर चाहिए?

6.5 परिमाप पर समस्याएं, पहेलियाँ और विरोधाभास

उदाहरण 1: दो बराबर त्रिज्या वाले वृत्त इस प्रकार हैं कि प्रत्येक वृत्त दूसरे के केंद्र से होकर गुजरता है। त्रिज्या = r। दोनों वृत्तों से बनी आकृति का परिमाप ज्ञात करें।

हल: माना वृत्त A और B के केंद्र हैं; वे C और D पर मिलते हैं।
त्रिभुज ABC में AB = AC = BC = r → समबाहु त्रिभुज → ∠CAB = 60°
अतः ∠CAD = 120° (चाप जो दिखाई नहीं देता, वह 1/3 परिधि है)
दृश्यमान प्रत्येक चाप = 2/3 × 2πr = 4πr/3
दोनों चापों की कुल लंबाई = 2 × (4πr/3) = 8πr/3

उदाहरण 2 (एक रोचक विरोधाभास): P और Q को जोड़ने वाले दो पथ हैं — पथ 'a' (एक अर्धवृत्त) और पथ 'b+c+d' (तीन छोटे अर्धवृत्त)। कौन सा पथ लंबा है?

हल: अर्धवृत्तों a, b, c, d की त्रिज्याएं a', b', c', d' हों।
पथ a की लंबाई = πa'
पथ b+c+d की लंबाई = π(b' + c' + d')
PQ = 2a' = 2b' + 2c' + 2d' → a' = b' + c' + d'
अतः दोनों पथों की लंबाई बराबर है! — यह आश्चर्यजनक है।

अभ्यास सेट 6.1

नोट: जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = 22/7 का उपयोग करें।

प्र. 1: वृत्त की परिधि 44 सेमी है। त्रिज्या = ?
2πr = 44 → r = 44/(2 × 22/7) = 44 × 7/44 = 7 सेमी

प्र. 2: परिधि (3 सार्थक अंक तक):
(i) r = 7 सेमी: C = 2 × 22/7 × 7 = 44.0 सेमी
(ii) r = 10 सेमी: C = 2 × 22/7 × 10 = 440/7 ≈ 62.9 सेमी
(iii) r = 12 सेमी: C = 2 × 22/7 × 12 = 528/7 ≈ 75.4 सेमी

प्र. 3: चाप की लंबाई:
(i) r = 3.5 सेमी, θ = 60°: l = 2 × 22/7 × 3.5 × 60/360 = 22 × 3.5/21 = 11/3 ≈ 3.67 सेमी
(ii) r = 6.3 मीटर, θ = 120°: l = 2 × 22/7 × 6.3 × 120/360 = 2 × 22/7 × 6.3 × 1/3 = 13.2 मीटर

प्र. 4: r = 14 सेमी, θ = 75° का त्रिज्यखंड (sector) का परिमाप:
चाप = 2 × 22/7 × 14 × 75/360 = 88 × 75/360 = 55/3 ≈ 18.33 सेमी
परिमाप = चाप + 2r = 55/3 + 28 = (55 + 84)/3 = 139/3 ≈ 46.3 सेमी

प्र. 5: विभिन्न आकृतियों के परिमाप (संकेत):
(i) 60 × 80 आयत और अर्धवृत्त: परिमाप = 80 + 60 + 60 + π×40 = 200 + 880/7 ≈ 325.7 मीटर
(iii) 10 सेमी व्यास का पूर्ण वृत्त: C = π × 10 = 220/7 ≈ 31.4 सेमी
(v) 14 सेमी वाला आकार (दो अर्धवृत्त + दो भुजाएं): 56 सेमी

प्र. 6: कार टायर व्यास = 56 सेमी
(i) एक चक्कर = परिधि = 22/7 × 56 = 176 सेमी
(ii) 10 किमी = 1000000 सेमी में चक्कर = 1000000/176 ≈ 5682 चक्कर

प्र. 8: दो वृत्तों के परिमाप का अनुपात 5:4 → त्रिज्याओं का अनुपात = 5:4

6.6 आयत का क्षेत्रफल

क्षेत्रफल किसी द्विविमीय क्षेत्र द्वारा घेरे गए 'स्थान की मात्रा' है। इकाई 1×1 वर्ग है जिसका क्षेत्रफल 1 वर्ग इकाई है।

वर्ग (भुजा a): क्षेत्रफल = a² वर्ग इकाई
आयत (a × b): क्षेत्रफल = ab वर्ग इकाई

6.7 समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल

समांतर चतुर्भुज ABCD को एक आयत में रूपांतरित किया जा सकता है जिसका आधार और ऊँचाई समान हो। यद्यपि आकृतियाँ भिन्न हैं, उनके क्षेत्रफल समान हैं।

समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई = bh

सोचें और विचार करें — 'पतले' समांतर चतुर्भुज की समस्या

यदि समांतर चतुर्भुज 'पतला' हो (Fig. 6.18) और C से AD पर लंबपाद AD पर ही न पड़े तो क्या करें?
हल: D के पास D' और A के विस्तार पर A' चुनें (A'A = D'D)। A'BCD' भी एक समांतर चतुर्भुज है और ΔCDD' ≅ ΔBAA' होने से इसका क्षेत्रफल ABCD के बराबर है। इस चरण को आवश्यकतानुसार दोहराएं।

महत्वपूर्ण प्रश्न: यदि केवल भुजाओं की लंबाई पता हो तो क्या समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात किया जा सकता है? नहीं! ऊँचाई जानना आवश्यक है, जो आसन्न भुजाओं के बीच के कोण पर निर्भर करती है।

6.8 त्रिभुज का क्षेत्रफल

त्रिभुज के क्षेत्रफल का सूत्र दो विधियों से प्राप्त किया जा सकता है:

विधि 1: आयत में रखकर

त्रिभुज को एक आयत में रखें (जिसका आधार b और ऊँचाई h है)। त्रिभुज उस आयत के ठीक आधे भाग को घेरता है।
त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½bh

विधि 2: दो सर्वांगसम त्रिभुजों से समांतर चतुर्भुज

त्रिभुज ABC और उसकी समान प्रतिलिपि A'B'C' को मिलाने पर एक समांतर चतुर्भुज बनता है।
समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = bh
∴ त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × bh

त्रिभुज की मध्यिका का गुण — एक सुंदर प्रमेय

त्रिभुज ABC में AD मध्यिका है (D, BC का मध्यबिंदु)।

प्रमेय: त्रिभुज की मध्यिका उसे दो समान क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभाजित करती है।

प्रमाण: ΔABD और ΔACD के आधार BD = DC (बराबर) हैं और दोनों की ऊँचाई h बराबर है।
∴ क्षेत्रफल(ΔABD) = ½ × BD × h = ½ah
क्षेत्रफल(ΔACD) = ½ × DC × h = ½ah
अतः दोनों का क्षेत्रफल बराबर है! यह आश्चर्यजनक है क्योंकि ΔABD और ΔACD (सामान्यतः) सर्वांगसम नहीं होते, फिर भी उनके क्षेत्रफल बराबर हैं।

सोचें और विचार करें

1. चूँकि ΔABD और ΔACD के क्षेत्रफल बराबर हैं — क्या हम ΔABD को सीधे कटों से टुकड़ों में काटकर ΔACD को ढक सकते हैं? कितने टुकड़े न्यूनतम आवश्यक होंगे?
2. यदि दो बहुभुज P और Q के क्षेत्रफल बराबर हों — क्या एक को काटकर हमेशा दूसरे को ढका जा सकता है? एक वर्ग और गैर-वर्गाकार आयत के साथ प्रयास करें।
3. परिमाप 40 इकाई वाले विभिन्न आयतों में से कौन सा सबसे बड़ा और सबसे छोटा क्षेत्रफल रखता है?

6.8.1 हेरॉन का सूत्र — भुजाओं से क्षेत्रफल

त्रिभुज का क्षेत्रफल केवल उसकी भुजाओं से भी ज्ञात किया जा सकता है! यह सूत्र ग्रीक गणितज्ञ और आविष्कारक हेरॉन (Heron) ने खोजा था, जो अलेक्जेंड्रिया के संग्रहालय में पढ़ाते थे।

हेरॉन का सूत्र

यदि ΔABC की भुजाएं BC = a, CA = b, AB = c हों और अर्धपरिमाप s = ½(a + b + c) हो, तो:
क्षेत्रफल = √[s(s–a)(s–b)(s–c)]

उदाहरण 3: समबाहु त्रिभुज (भुजा a)।
s = 3a/2, s–a = a/2 (तीनों के लिए)
क्षेत्रफल = √[(3a/2)(a/2)(a/2)(a/2)] = √(3a⁴/16) = (√3/4)a²
जाँच: ½ × a × (√3/2)a = (√3/4)a² ✓

उदाहरण 4: समद्विबाहु त्रिभुज (बराबर भुजाएं = a, आधार = 2b)।
s = a + b
क्षेत्रफल = √[(a+b)(b)(b)(a–b)] = b√(a²–b²)
जाँच: ½ × 2b × √(a²–b²) = b√(a²–b²) ✓

उदाहरण 5: त्रिभुज जिसकी भुजाएं 3, 4, 5 इकाई हैं।
s = ½(3+4+5) = 6
क्षेत्रफल = √[6×3×2×1] = √36 = 6 वर्ग इकाई
जाँच: 3² + 4² = 5² ∴ समकोण त्रिभुज → क्षेत्रफल = ½ × 3 × 4 = 6 ✓

त्रिभुज के क्षेत्रफल के दो और सूत्र

ΔABC में भुजाएं a, b, c; परिवृत्त त्रिज्या R; अंतर्वृत्त त्रिज्या r:

परिवृत्त से: क्षेत्रफल(ΔABC) = abc / (4R)
अंतर्वृत्त से: क्षेत्रफल(ΔABC) = r(a+b+c) / 2

दोनों सूत्रों में सुंदर समरूपता है! दूसरे सूत्र का प्रमाण कक्षा 10 में।

चक्रीय चतुर्भुज के क्षेत्रफल का ब्रह्मगुप्त सूत्र (628 ईस्वी)

क्या किसी चतुर्भुज का क्षेत्रफल केवल उसकी चारों भुजाओं से ज्ञात किया जा सकता है? नहीं — क्योंकि एक ही भुजाओं वाले चतुर्भुज के भिन्न-भिन्न क्षेत्रफल हो सकते हैं (जैसे 3-3-3-3 भुजाओं वाले समचतुर्भुज का क्षेत्रफल 9, 8.01, 5.41 हो सकता है)।

लेकिन यदि चतुर्भुज चक्रीय हो (एक वृत्त पर स्थित) तो 628 ईस्वी में ब्रह्मगुप्त (598–668 ईस्वी) ने एक अद्भुत सूत्र खोजा:

ब्रह्मगुप्त का सूत्र

चक्रीय चतुर्भुज (भुजाएं a, b, c, d) के लिए:
s = ½(a+b+c+d)
क्षेत्रफल = √[(s–a)(s–b)(s–c)(s–d)]

उदाहरण 6: आयत (a × b) के लिए जाँच (सभी आयत चक्रीय होते हैं)।
s = a + b
क्षेत्रफल = √[(b)(a)(b)(a)] = √(a²b²) = ab

उदाहरण 7: समद्विबाहु समलंब (विषमलंब; सभी समद्विबाहु समलंब चक्रीय होते हैं)।
समांतर भुजाएं 2a और 2b; बराबर तिरछी भुजाएं c।
s = a + b + c
क्षेत्रफल = (a+b)√[c² – (b–a)²] — यह (½)(2a+2b)×ऊँचाई के समान है ✓

ब्रह्मगुप्त का सूत्र — हेरॉन के सूत्र का सामान्यीकरण

गणित में विशेष स्थिति (Special Case) और सामान्यीकरण

यदि चतुर्भुज ABCD में d = 0 हो तो A और D मिल जाते हैं और यह त्रिभुज बन जाता है।
s = ½(a+b+c+0) = ½(a+b+c) — यही त्रिभुज का अर्धपरिमाप है।
ब्रह्मगुप्त का सूत्र: √[(s–a)(s–b)(s–c)(s–0)] = √[s(s–a)(s–b)(s–c)]
यही हेरॉन का सूत्र है!

अतः हेरॉन का सूत्र, ब्रह्मगुप्त के सूत्र का एक विशेष स्थिति है और ब्रह्मगुप्त का सूत्र हेरॉन के सूत्र का सामान्यीकरण है।

अन्य उदाहरण: (a+b)² = a²+2ab+b² ब्रह्मगुप्त के सूत्र का विशेष स्थिति है (a+b+c)² = a²+b²+c²+2ab+2bc+2ca जब c=0 रखें।

अभ्यास सेट 6.2

प्र. 1: त्रिभुज ADE का क्षेत्रफल (आधार AD = 10 सेमी, ऊँचाई = 8/2 = 4 सेमी अनुमान; आकृति से AE = 8 सेमी)
ABCD = 10 × 8 = 80 वर्ग सेमी; E, BC का मध्यबिंदु है।
क्षेत्रफल(ADE) = ½ × क्षेत्रफल(ABCD) = 40 वर्ग सेमी

प्र. 2: समलंब: समांतर भुजाएं 40 और 20 सेमी, बराबर तिरछी भुजाएं 26 सेमी।
ऊँचाई h: h² = 26² – 10² = 676 – 100 = 576 ∴ h = 24 सेमी
क्षेत्रफल = ½ × (40+20) × 24 = ½ × 60 × 24 = 720 वर्ग सेमी

प्र. 3: भुजाएं 8, 11 सेमी; परिमाप 32 → तीसरी भुजा = 32–8–11 = 13 सेमी
s = 16; क्षेत्रफल = √[16×8×5×3] = √1920 = 8√30 ≈ 43.8 वर्ग सेमी

प्र. 4: भुजाएं 3k, 5k, 7k; 3k+5k+7k = 300 → k = 20 → भुजाएं 60, 100, 140 मीटर
s = 150; क्षेत्रफल = √[150×90×50×10] = √67500000 = 1500√30 ≈ 8215 वर्ग मीटर

प्र. 5: एक विकर्ण दूसरे का दोगुना: d₁ = 2d₂; क्षेत्रफल = ½ × d₁ × d₂ = ½ × 2d₂ × d₂ = d₂² = 128
d₂ = 8√2 ≈ 11.3 सेमी (या d₂² = 128 → d₂ = 8√2)

प्र. 6: ABCD समांतर चतुर्भुज; P, Q भुजा AB पर कोई भी दो बिंदु। ΔPCD और ΔQCD दोनों का आधार CD और ऊँचाई AB से CD तक की दूरी समान है।
∴ क्षेत्रफल(ΔPCD) : क्षेत्रफल(ΔQCD) = 1 : 1

प्र. 7: O समांतर चतुर्भुज PQRS के विकर्ण PR पर कोई बिंदु।
ΔPSO और ΔPQO: आधार PS और PQ बराबर नहीं, परंतु विकर्ण PR दोनों को समान ऊँचाई देता है।
माध्यिका प्रमेय से: ΔPSR को PR मध्यिका से दो बराबर भागों में विभाजित करती है → क्षेत्रफल(ΔPSO) = क्षेत्रफल(ΔPRO) में से उचित गणना से बराबर सिद्ध होता है।

6.9 आयत का वर्गीकरण — बौधायन की विधि (800 ईसा पूर्व)

प्राचीन काल में 'किसी आकृति का वर्गीकरण' का अर्थ था — उसके क्षेत्रफल के बराबर क्षेत्रफल वाला एक वर्ग बनाना। बौधायन ने अपने शुल्बसूत्र (800 ईसा पूर्व) में a × b भुजाओं वाले आयत का वर्गीकरण करने की विधि बताई है।

बौधायन की रचना विधि (आयत ABCD; AD = a, AB = b, a > b)

चरण 1: AD पर E चुनें जहाँ AE = AB = b
चरण 2: ED का मध्यबिंदु F ज्ञात करें
चरण 3: AF भुजा का वर्ग AFGH खींचें (H, AB के विस्तार पर)
चरण 4: H से चाप AG खींचें; यह BC को K पर काटे
चरण 5: K से AH के समानांतर रेखा खींचें जो GH को P पर काटे
परिणाम: HP भुजा का वर्ग HPQS, आयत ABCD के क्षेत्रफल के बराबर है।

*यह क्यों काम करता है?
AF = (AE + AD)/2 = (a+b)/2 → HG = HK = (a+b)/2
BH = AF – AB = (a+b)/2 – b = (a–b)/2
HP² = HK² – BH² = [(a+b)/2]² – [(a–b)/2]²
= (a²+2ab+b²)/4 – (a²–2ab+b²)/4 = 4ab/4 = ab
अतः वर्ग HPQS का क्षेत्रफल = ab = आयत ABCD का क्षेत्रफल। ✓
यह सूत्र [(a+b)/2]² – [(a–b)/2]² = ab का ज्यामितीय रूपांतरण है।

6.10 वृत्त का क्षेत्रफल

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — C² : A अनुपात

प्राचीन समाजों ने जाना कि वृत्त का क्षेत्रफल A, उसकी परिधि C के वर्ग के समानुपाती है। यह तर्क इस प्रकार है:

वर्ग (भुजा a): P = 4a, A = a² → P² : A = 16a² : a² = 16 : 1 (सभी वर्गों के लिए समान)
समबाहु त्रिभुज (भुजा a): P = 3a, A = (√3/4)a² → P² : A = 9a² : (√3/4)a² = 36 : √3 (सभी के लिए समान)
इसी तर्क से वृत्त के लिए भी C² : A = निश्चित स्थिरांक।

बेबीलोनियन (1500 ईसा पूर्व से पहले): C² : A ≈ 12 → A ≈ C²/12
प्राचीन मिस्री (1500 ईसा पूर्व): A ≈ (8d/9)² = (256/81)r² — बहुत सटीक!
बौधायन (800 ईसा पूर्व): उन्होंने भी ज्यामितीय विधि से यही सन्निकटन पाया।

वर्तमान में प्रचलित सूत्र — आर्किमिडीज और नीलकंठ

250 ईसा पूर्व में आर्किमिडीज ने सिद्ध किया कि स्थिरांक ठीक π है — वही π जो परिधि में आता है! उन्होंने इसे इस प्रकार व्यक्त किया:

वृत्त का क्षेत्रफल = ½ × परिधि × त्रिज्या = ½ × 2πr × r = πr²

नीलकंठ सोमयाजी (लगभग 1500 ईस्वी) ने आर्यभटीय की टीका में इसकी सबसे दृश्यात्मक व्याख्या दी: वृत्त को पतली-पतली फाँकों में काटकर उन्हें एक समांतर चतुर्भुज जैसी आकृति में सजाएं।

नीलकंठ की दृश्यात्मक विधि

जैसे-जैसे फाँकें छोटी होती जाती हैं, परिणामी आकृति समांतर चतुर्भुज के निकट होती जाती है:
• आधार = आधी परिधि = πr (क्योंकि फाँकें एकांतर दिशाओं में लगाई जाती हैं)
• ऊँचाई = त्रिज्या = r
वृत्त का क्षेत्रफल = समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = πr × r = πr²

6.10.1 वृत्त के त्रिज्यखंड (Sector) का क्षेत्रफल

त्रिज्यखंड वह क्षेत्र है जो एक चाप और उसके दोनों अंतिम बिंदुओं को मिलाने वाली दो त्रिज्याओं से घिरा हो।

अर्धवृत्त का क्षेत्रफल: = (180/360) × πr² = ½πr²
चतुर्थांश का क्षेत्रफल: = (90/360) × πr² = ¼πr²
सामान्य त्रिज्यखंड (θ° कोण):

त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = πr² × (θ°/360°)

वृत्त-खंड (Segment) का क्षेत्रफल: = त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल – त्रिभुज का क्षेत्रफल

अभ्यास सेट 6.3

प्र. 1: r = 7 सेमी, θ = 60°
क्षेत्रफल = 22/7 × 7² × 60/360 = 22 × 7 × 1/6 = 154/6 = 77/3 ≈ 25.67 वर्ग सेमी

प्र. 2: परिधि = 44 सेमी → r = 7 सेमी; चतुर्थांश = ¼πr² = ¼ × 22/7 × 49 = 38.5 वर्ग सेमी

प्र. 3: मिनट की सुई = 7 सेमी; 10 मिनट में = 60° कोण
क्षेत्रफल = 22/7 × 49 × 60/360 = 22 × 7/6 = 154/6 = 77/3 ≈ 25.67 वर्ग सेमी

प्र. 4: r = 10 सेमी; π = 3.14
(i) लघु त्रिज्यखंड (90°): 3.14 × 100 × 90/360 = 78.5 वर्ग सेमी
(ii) बृहत् त्रिज्यखंड (270°): 3.14 × 100 × 270/360 = 235.5 वर्ग सेमी

प्र. 5: r = 15 सेमी, θ = 60°; π = 3.14, √3 ≈ 1.73
त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = 3.14 × 225 × 60/360 = 3.14 × 37.5 = 117.75 वर्ग सेमी
त्रिभुज का क्षेत्रफल (समबाहु, भुजा 15 सेमी) = (√3/4) × 225 = 1.73 × 56.25 ≈ 97.31 वर्ग सेमी
लघु वृत्त-खंड = 117.75 – 97.31 = 20.44 वर्ग सेमी
बृहत् वृत्त-खंड = πr² – 20.44 = 706.5 – 20.44 = 686.06 वर्ग सेमी

प्र. 6: प्रत्येक वाइपर: l = 28 सेमी, θ = 120°
एक वाइपर का क्षेत्रफल = 22/7 × 784 × 120/360 = 22/7 × 784/3 = 22 × 112/3 = 2464/3 वर्ग सेमी
दो वाइपर = 4928/3 ≈ 1642.67 वर्ग सेमी

अध्याय के अंत के प्रश्न (चुनिंदा)

प्रश्न 1: बीजगणितीय सर्वसमिकाओं का क्षेत्रफल मॉडल

(a + b)² = a² + 2ab + b² — यह एक (a+b) भुजा के वर्ग को 4 भागों में विभाजित करके दिखाया जाता है (जैसा हमने अध्याय 4 में सीखा)।

(a+b)(a–b) = a²–b²: a भुजा के वर्ग में से b भुजा का वर्ग हटाएं → L-आकार बने। उसे पुनर्व्यवस्थित करें → (a+b) × (a–b) आयत बनती है।

(a+b+c)² = a²+b²+c²+2ab+2bc+2ca: (a+b+c) भुजा के वर्ग को 9 भागों में बांटें — 3 वर्ग (a², b², c²) और 6 आयत (ab, bc, ca प्रत्येक दो बार)।

प्र. 2: समद्विबाहु त्रिभुज (परिमाप 40 सेमी, बराबर भुजाएं 15 सेमी)।
तीसरी भुजा = 40–30 = 10 सेमी; s = 20
क्षेत्रफल = √[20×5×5×10] = √5000 = 50√2 ≈ 70.7 वर्ग सेमी

प्र. 3: समद्विबाहु त्रिभुज (आधार 10 सेमी, क्षेत्रफल 60 वर्ग सेमी)।
½ × 10 × h = 60 → h = 12 सेमी
बराबर भुजा = √(12² + 5²) = √169 = 13 सेमी

प्र. 4: समकोण त्रिभुज (क्षेत्रफल 54 वर्ग सेमी, एक भुजा 12 सेमी)।
½ × 12 × दूसरी भुजा = 54 → दूसरी भुजा = 9 सेमी
कर्ण = √(12² + 9²) = √225 = 15 सेमी
परिमाप = 12 + 9 + 15 = 36 सेमी

प्र. 5: भुजाएं 2k, 3k, 4k; 9k = 45 → k = 5 → भुजाएं 10, 15, 20 सेमी
s = 22.5; क्षेत्रफल = √[22.5×12.5×7.5×2.5] = √5273.4 ≈ 72.6 वर्ग सेमी

प्र. 6: भुजाएं 7, 24, 25 सेमी
विधि 1: 7²+24² = 49+576 = 625 = 25² → समकोण त्रिभुज → क्षेत्रफल = ½×7×24 = 84 वर्ग सेमी
विधि 2: s = 28; √[28×21×4×3] = √7056 = 84 वर्ग सेमी ✓

प्र. 7: व्यास = 60 सेमी → r = 30 सेमी
100 चक्करों में = 100 × 2πr = 100 × 2 × 22/7 × 30 = 132000/7 ≈ 188.57 मीटर

प्र. 8: परिधि 66 सेमी → r = 66/(2π) = 66×7/44 = 21/2 = 10.5 सेमी
चतुर्थांश = ¼ × 22/7 × 10.5² = ¼ × 22/7 × 110.25 = 86.625 वर्ग सेमी

प्र. 9: r = 28 सेमी
एक पूर्ण चक्कर = 2πr = 2 × 22/7 × 28 = 176 सेमी
1 किमी = 100000 सेमी में चक्कर = 100000/176 ≈ 568 बार

प्रश्न 14: पतंग (Kite) का क्षेत्रफल = ½ × विकर्णों का गुणनफल

बीजगणितीय विधि: पतंग ABCD में AC ⊥ BD (विकर्ण लंबवत)। माना AC = d₁, BD = d₂।
पतंग = 4 समकोण त्रिभुजों का योग = 4 × ½ × (d₁/2) × (d₂/2) = ½d₁d₂

ज्यामितीय विधि: पतंग को d₁ × d₂ आयत में रखें। पतंग उस आयत का ठीक आधा भाग घेरती है।
∴ पतंग का क्षेत्रफल = ½ × d₁ × d₂

*प्रश्न 23 (उन्नत): दो संकेंद्रित वृत्त और हरा क्षेत्र

बड़े वृत्त की जीवा BC = l छोटे वृत्त को A पर स्पर्श करती है।
माना बड़े वृत्त की त्रिज्या R, छोटे की r (OA ⊥ BC)।
OA² + (l/2)² = R² और OA = r (OA ⊥ BC)
∴ r² + l²/4 = R²
हरे क्षेत्र का क्षेत्रफल = πR² – πr² = π(R²–r²) = π × l²/4 = πl²/4

अध्याय सारांश

  • परिमाप: किसी आकृति की सीमा की कुल लंबाई। वर्ग = 4a; आयत = 2(a+b); वृत्त (परिधि) = 2πr।
  • π: वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात — एक अपरिमेय स्थिरांक। π ≈ 22/7 ≈ 3.14। माधव का सटीक सूत्र: π/4 = 1 – 1/3 + 1/5 – 1/7 + …
  • चाप की लंबाई: l = 2πr × (θ°/360°) जहाँ θ केंद्रीय कोण है।
  • त्रिभुज का क्षेत्रफल: A = ½bh; त्रिभुज की मध्यिका उसे दो समान क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में बाँटती है।
  • हेरॉन का सूत्र: A = √[s(s–a)(s–b)(s–c)], जहाँ s = ½(a+b+c)।
  • वृत्त का क्षेत्रफल: A = πr²। त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = πr² × (θ°/360°)।
  • ब्रह्मगुप्त का सूत्र: चक्रीय चतुर्भुज (भुजाएं a, b, c, d): A = √[(s–a)(s–b)(s–c)(s–d)] जहाँ s = ½(a+b+c+d)। यह हेरॉन के सूत्र का सामान्यीकरण है।
  • समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल: आधार × ऊँचाई (केवल भुजाओं से नहीं ज्ञात होता — ऊँचाई/कोण भी चाहिए)।
  • बौधायन की विधि: आयत का वर्गीकरण — सूत्र [(a+b)/2]² – [(a–b)/2]² = ab पर आधारित।
π के ऐतिहासिक मान — एक दृष्टि में
  • मेसोपोटामिया: π = 3.125
  • आर्किमिडीज (250 ईसा पूर्व): 3(10/71) < π < 3(1/7)
  • झू चोंगज़ी (480 ईस्वी): π ≈ 355/113 (800 वर्षों तक सबसे सटीक)
  • आर्यभट (499 ईस्वी): π ≈ 3.1416 (आसन्न — अपरिमेय होने का संकेत)
  • माधव (लगभग 1400 ईस्वी): π/4 = 1–1/3+1/5–1/7+… (पहला सटीक सूत्र, π को 11 दशमलव तक)
  • आज: π = 3.14159265358979… (100 ट्रिलियन से अधिक अंक ज्ञात)
अध्याय 6 समाप्त | गणित मंजरी कक्षा 9 | स्थान का मापन: परिमाप और क्षेत्रफल
P(A) = n(A)/n(S) | 0 ≤ P(E) ≤ 1 | P = favourable/possible
गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 7

शायद का गणित: प्रायिकता का परिचय
The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability

यादृच्छिकता, प्रायिकता पैमाना, प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक प्रायिकता, प्रतिदर्श समष्टि, घटनाएं, वृक्ष आरेख, जुआरी की भूल (Gambler's Fallacy)

7.1 प्रायिकता क्या है? — अनिश्चितता का विज्ञान

प्रायिकता (Probability) एक प्रकार का मापन है — ठीक वैसे जैसे हम लंबाई, क्षेत्रफल या आयतन मापते हैं। लेकिन यहाँ हम भौतिक राशियों के बजाय घटनाओं की संभावना मापते हैं। यह बताता है कि हम किसी घटना के घटित होने के बारे में कितने आश्वस्त हैं।

उदाहरण के लिए, आप अपने मित्र से पूछ सकते हैं:

• क्या आज बारिश होगी?
• क्या हमारा विद्यालय कल अंतर-विद्यालय हॉकी मैच जीतेगा?
• क्या मुझे मासिक लकी ड्रॉ में चुना जाएगा? (जिसमें सभी विद्यार्थियों के नाम पर्चियों पर लिखे हैं और एक यादृच्छिक रूप से चुना जाता है।)

ये सभी यादृच्छिक घटनाएं (Random Events) हैं। हम संभावित परिणाम जानते हैं, परंतु पहले से नहीं जानते कि कौन सा परिणाम निश्चित रूप से होगा। इसमें संयोग (chance) या यादृच्छिकता (randomness) का तत्व होता है।

इन प्रश्नों का उत्तर असंभव या निश्चित, या कम संभावना, अधिक संभावना, समान संभावना जैसे शब्दों से दिया जा सकता है। यह निर्णय एकत्रित साक्ष्यों पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, एक मित्र कहे — "धूप तेज है, इसलिए बारिश की संभावना कम है" — यह व्यक्तिपरक प्रायिकता (Subjective Probability) है।

मुख्य विचार

प्रायिकता अनिश्चितता से संबंधित है। हमारे जटिल समाज में ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिनका कोई निश्चित उत्तर नहीं बल्कि एक या अधिक संभावनाएं होती हैं। इसलिए घटनाओं की प्रायिकता का वस्तुनिष्ठ (objective) अनुमान लगाना जीवन के अनेक पहलुओं में महत्वपूर्ण है।

7.1.1 यादृच्छिकता क्या है? (What is Randomness?)

यादृच्छिकता (Randomness) एक ऐसी स्थिति या क्रिया को कहते हैं (जैसे सिक्का उछालना या पासा फेंकना) जिसमें आप ठीक-ठीक नहीं बता सकते कि क्या होगा। यद्यपि आप सभी संभावित परिणाम जानते हैं, फिर भी आप नहीं जानते कि कौन सा निश्चित रूप से आएगा।

यादृच्छिकता के उदाहरण

सिक्का उछालना: आप जानते हैं कि चित (Heads) या पट (Tails) आ सकता है, लेकिन एकल उछाल में निश्चित नहीं जानते।
पासा फेंकना: आप जानते हैं कि 1, 2, 3, 4, 5 या 6 आ सकता है, लेकिन किसी विशेष फेंक में कौन सा आएगा, नहीं जानते।
लकी ड्रॉ: हर विद्यार्थी को समान अवसर है, परंतु परिणाम पहले से नहीं जाना जा सकता।

यादृच्छिक प्रयोग की परिभाषा

एक यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment) वह है जिसे आप दोहरा सकते हैं (जैसे सिक्का उछालना), जहाँ हर बार परिणाम भिन्न हो सकता है और परिणाम पहले से नहीं जाना जा सकता।

सोचें और विचार करें

क्रिकेट में टॉस: क्रिकेट मैच में यह तय करने के लिए कि कौन सी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी, सिक्का उछाला जाता है। यह एक उचित (fair) तरीका क्यों माना जाता है?

उत्तर: क्योंकि सिक्के के दोनों ओर आने की प्रायिकता बराबर (1/2) होती है। कोई भी पक्ष दूसरे से अधिक अनुकूल नहीं है — इसीलिए यह पूर्णतः निष्पक्ष विधि है।

बारिश यादृच्छिक क्यों है? बारिश अनेक जटिल वायुमंडलीय कारकों (तापमान, आर्द्रता, वायुदाब, पवन प्रतिरूप) पर निर्भर करती है और इन कारकों के प्रति इतनी संवेदनशील है कि इसे पूर्ण निश्चितता से नहीं बताया जा सकता। हालांकि, आँकड़ों के आधार पर विभिन्न स्थानों में बारिश की संभावना का अनुमान लगाया जा सकता है।

7.1.2 प्रायिकता पैमाना (The Probability Scale)

प्रायिकता को 0 से 1 के पैमाने पर मापा जाता है ताकि किसी घटना के घटित होने की संभावना व्यक्त की जा सके।

प्रायिकता पैमाने की व्याख्या

P = 0 (असंभव): घटना कभी घटित नहीं हो सकती। जैसे — बिना खेले जीतना।
P = 0.25 (कम संभावना): घटना घटित हो सकती है लेकिन इसकी संभावना कम है।
P = 0.5 (समान संभावना): घटना के घटित होने और न होने की संभावना बराबर है। जैसे — सिक्का उछालने पर चित आना।
P = 0.75 (अधिक संभावना): घटना के घटित होने की संभावना अधिक है।
P = 1 (निश्चित): घटना अवश्य घटित होगी। जैसे — सूरज का पूर्व में उगना।

6 कार्डों का उदाहरण — बैंगनी और हरे कार्ड

6 कार्डों की गड्डी में बैंगनी और हरे कार्ड हैं। बैंगनी कार्ड चुनने की प्रायिकता:
• 0 बैंगनी कार्ड → P = 0/6 = 0 (असंभव)
• 2 बैंगनी कार्ड → P = 2/6 = 1/3 ≈ 0.33 (कम संभावना)
• 3 बैंगनी कार्ड → P = 3/6 = 1/2 = 0.5 (समान संभावना)
• 5 बैंगनी कार्ड → P = 5/6 ≈ 0.83 (अधिक संभावना)
• 6 बैंगनी कार्ड → P = 6/6 = 1 (निश्चित)

घटनाएं और उनकी प्रायिकता — तालिका
घटना अर्थ प्रायिकता
पासे पर 6 से अधिक संख्या असंभव: पासे पर 1-6 ही होते हैं 0
पासे पर 3 आना कम संभावना: असंभव नहीं, 1 फलक पर 3 है 1/6 ≈ 0.17
सिक्के पर चित आना समान संभावना: चित और पट बराबर 1/2 = 0.5
52 पत्तों में से 2-10 वाला पत्ता अधिक संभावना: 36 पत्तों पर 2-10 हैं 36/52 ≈ 0.69
सभी लाल मिठाइयों में से लाल चुनना निश्चित: सभी मिठाइयाँ लाल हैं 1

अभ्यास सेट 7.1 — हल सहित

प्र. 1: निम्नलिखित घटनाओं को 0 (असंभव) से 1 (निश्चित) के पैमाने पर रखें:

(i) अगला सोमवार रविवार के बाद आएगा।
प्रायिकता = 1 (निश्चित) — यह कैलेंडर का नियम है, सदा सत्य।

(ii) जुलाई में मुंबई में बर्फ गिरेगी।
प्रायिकता = 0 (असंभव) — मुंबई उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में है; यहाँ कभी बर्फ नहीं गिरती।

(iii) आज एक हाथी आपकी कक्षा में चलकर आएगा।
प्रायिकता ≈ 0 (असंभव के निकट) — यह सैद्धांतिक रूप से असंभव नहीं, किंतु व्यावहारिक रूप से अत्यंत असंभावित।

(iv) आप कल विद्यालय में कम से कम एक मित्र से मिलेंगे।
प्रायिकता = 1 के निकट (निश्चित के निकट): यदि आप विद्यालय जाते हैं और वहाँ अन्य विद्यार्थी भी हैं, तो यह लगभग निश्चित है।

7.2 प्रायिकता को वस्तुनिष्ठ रूप से मापना

प्रायिकता का वस्तुनिष्ठ अनुमान लगाने के दो प्रमुख तरीके हैं:

1. अनुभव से प्राप्त साक्ष्य: प्रयोग को अनेक बार करके या पिछले अवलोकनों के सांख्यिकीय आँकड़ों का विश्लेषण करके। इसे प्रायोगिक प्रायिकता (Experimental Probability) कहते हैं।

2. सैद्धांतिक विधि: यह मानते हुए कि सभी संभावित परिणाम समान रूप से संभावित (equally likely) हैं। इसे सैद्धांतिक प्रायिकता (Theoretical Probability) कहते हैं।

7.2.1 प्रायोगिक प्रायिकता — प्रयोग करके

किसी प्रयोग में परिणाम को आउटकम (Outcome) कहते हैं। किसी प्रयोग के सभी संभावित परिणामों के समुच्चय को प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) कहते हैं।

प्रायोगिक प्रायिकता का सूत्र

प्रायोगिक प्रायिकता = घटना घटित होने की संख्या / कुल परीक्षणों की संख्या

उदाहरण 1: प्रतिदर्श समष्टि के उदाहरण:
सिक्का उछालना: S = {H, T}, n(S) = 2
पासा फेंकना: S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, n(S) = 6

उदाहरण 2: पासा 50 बार फेंकने पर 4 ठीक 8 बार आता है।
4 की प्रायोगिक प्रायिकता = 8/50 = 0.16 या 16%
सापेक्ष आवृत्ति (Relative Frequency) भी 8/50 = 0.16 है।

सापेक्ष आवृत्ति वास्तविक डेटा पर आधारित प्रायिकता समझने में सहायक है, सैद्धांतिक पूर्वानुमान पर नहीं।

क्या आप जानते हैं? — साँप-सीढ़ी का इतिहास

साँप-सीढ़ी का खेल प्राचीन भारत से उत्पन्न हुआ है। यह ज्ञान-चौपड़ नामक पारंपरिक पासे के खेल से विकसित हुआ, जिसका उपयोग शैक्षिक उपकरण के रूप में किया जाता था। प्रत्येक सीढ़ी एक सद्गुण का और प्रत्येक साँप एक दुर्गुण का प्रतीक था। यह खेल अच्छे और बुरे व्यवहार के परिणाम सिखाता था।

7.2.2 सैद्धांतिक प्रायिकता (Theoretical Probability)

सैद्धांतिक प्रायिकता में सभी संभावित परिणामों के समान रूप से संभावित (equally likely) होने की मान्यता होती है। यह एक आदर्श, पूर्णतः निष्पक्ष स्थिति का अध्ययन करती है। इसे P(घटना) से दर्शाते हैं।

सैद्धांतिक प्रायिकता का सूत्र

P(A) = अनुकूल परिणामों की संख्या / संभावित परिणामों की कुल संख्या

उदाहरण 3: 6-फलकीय पासे पर 4 आने की प्रायिकता?
अनुकूल परिणाम = 1 (केवल 4)
कुल संभावित परिणाम = 6 (1 से 6 तक)
P(4 आना) = 1/6 ≈ 0.167 या 16.7%

उदाहरण 4: 'PROBABILITY' शब्द से यादृच्छिक रूप से एक अक्षर चुना जाए। B आने की प्रायिकता?
PROBABILITY: P-R-O-B-A-B-I-L-I-T-Y → 11 अक्षर
B की संख्या = 2 (चौथा और छठा अक्षर)
P(B) = 2/11 ≈ 0.182 या 18.2%

7.2.3 सांख्यिकीय आँकड़ों का उपयोग करके प्रायिकता

उदाहरण 5: 50 विद्यार्थियों के पसंदीदा फल — 20 आम, 15 सेब, 10 केला, 5 अंगूर।

आम की प्रायिकता: P(आम) = 20/50 = 0.4 या 40%

पूरे विद्यालय के 1500 विद्यार्थियों के लिए:
आम के लिए आवश्यक संख्या = 0.4 × 1500 = 600 आम

महत्वपूर्ण अवधारणाएं:
जनसंख्या (Population): विद्यालय के सभी 1500 विद्यार्थी
प्रतिदर्श (Sample): 50 विद्यार्थी जिनसे डेटा लिया
नमूनाकरण (Sampling): यदि और सटीक अनुमान चाहिए तो बड़ा और प्रतिनिधि प्रतिदर्श लें (जैसे विभिन्न कक्षाओं से 100 विद्यार्थी)।

प्रायोगिक बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता — तुलना
आधार प्रायोगिक प्रायिकता सैद्धांतिक प्रायिकता
आधार वास्तविक प्रयोग/अवलोकन तार्किक कारण/मान्यता
मान्यता कोई विशेष मान्यता नहीं सभी परिणाम समान रूप से संभावित
उपयोग वास्तविक डेटा विश्लेषण आदर्श स्थिति में पूर्वानुमान
संबंध बड़ी संख्या के नियम (Law of Large Numbers): परीक्षण बढ़ने पर प्रायोगिक → सैद्धांतिक
⚠️ जुआरी की भूल (Gambler's Fallacy)

बहुत से लोग सोचते हैं कि यदि कोई यादृच्छिक घटना लगातार कई बार हो (जैसे सिक्के पर 6 बार चित), तो अगली बार विपरीत (पट) आने की संभावना अधिक है। यह गलत है!

सिक्के को याद नहीं रहता कि पहले क्या हुआ। हर बार चित या पट की प्रायिकता 1/2 ही रहती है — चाहे पहले कितनी भी बार चित आया हो। इसी भूल को Gambler's Fallacy कहते हैं।

उदाहरण 6 (साँप-सीढ़ी): यदि आपने पासे पर लगातार तीन बार 6 पाया और सोचते हैं कि अब 6 नहीं आएगा — यह Gambler's Fallacy है। प्रत्येक पासा फेंकना स्वतंत्र घटना है। P(6) = 1/6 ≈ 0.166 हमेशा

मुख्य विचार: यादृच्छिकता की कोई स्मृति नहीं होती (Randomness has no memory)।

निष्पक्ष और अनभिनत (Fair and Unbiased)

जब हम सिक्के की बात करते हैं, हम मानते हैं कि वह 'निष्पक्ष (fair)' है — अर्थात् यह सममित है और किसी एक ओर अधिक झुकता नहीं। इसे 'अनभिनत (unbiased)' कहते हैं। 'यादृच्छिक उछाल' का अर्थ है कि सिक्के को बिना किसी पक्षपात के स्वतंत्र रूप से गिरने दिया जाए।

अभ्यास सेट 7.2 — विस्तृत हल

प्र. 1: एक थैले में 30 मिठाइयों का नमूना — 10 लाल, 8 हरी, 7 पीली, 5 नीली

(i) हरी मिठाई की प्रायिकता:
P(हरी) = 8/30 = 4/15 ≈ 0.267 या 26.7%

(ii) 600 मिठाइयों में पीली का अनुमान:
P(पीली) = 7/30
पीली का अनुमान = 7/30 × 600 = 7 × 20 = 140 पीली मिठाइयाँ

text प्र. 2: 40 विद्यार्थियों का सर्वेक्षण — 14 विज्ञान, 11 कला, 9 खेल, 6 वाद-विवाद

(i) कला क्लब की प्रायिकता:
P(कला) = 11/40 = 0.275 या 27.5%

(ii) 800 विद्यार्थियों में खेल क्लब का अनुमान:
P(खेल) = 9/40
अनुमान = 9/40 × 800 = 9 × 20 = 180 विद्यार्थी

प्र. 3: सिक्का 20 बार उछालना (नमूना परिणाम मान लें — 11 चित, 9 पट):
(i) चित की संख्या ≈ 10 (लगभग; वास्तविक परिणाम भिन्न हो सकते हैं)
(ii) पट की संख्या ≈ 10
(iii) प्रायोगिक P(चित) = (चित की संख्या)/20 — यह प्रत्येक बार भिन्न होगा
(iv) सैद्धांतिक P(पट) = 1/2 = 0.5 — यह हमेशा 1/2 रहता है, चाहे पहले क्या भी हुआ हो।

प्र. 4: कागज का कप 100 बार उछालना — तीन स्थितियाँ: नीचे, ऊपर, किनारे पर। (मान लें: नीचे = 45 बार, ऊपर = 20 बार, किनारे = 35 बार)
P(नीचे) = 45/100 = 0.45; P(ऊपर) = 20/100 = 0.20; P(किनारे) = 35/100 = 0.35
नोट: यह प्रयोग-आधारित है; वास्तविक परिणाम भिन्न होंगे। तीनों प्रायिकताओं का योग = 1.00 ✓

प्र. 5: 6-फलकीय पासे पर सम संख्या आने की प्रायिकता:
सम संख्याएं = {2, 4, 6} → 3 अनुकूल परिणाम
P(सम) = 3/6 = 1/2 = 0.5 या 50%

प्र. 6: पासा 12 बार फेंकने पर '3' तीन बार आया।
(i) प्रायोगिक P(3) = 3/12 = 1/4 = 0.25 या 25%
(ii) सैद्धांतिक P(3) = 1/6 ≈ 0.167 या 16.7%
(iii) ये प्रायिकताएं भिन्न हैं क्योंकि परीक्षणों की संख्या (12) अपेक्षाकृत कम है। जैसे-जैसे परीक्षण बढ़ेंगे, प्रायोगिक प्रायिकता सैद्धांतिक प्रायिकता के निकट आएगी:
• 60 बार → लगभग 10 बार '3' आने की उम्मीद → P ≈ 10/60 = 1/6
• 600 बार → लगभग 100 बार → P ≈ 100/600 = 1/6
• 6000 बार → P लगभग बिल्कुल 1/6 होगी → बड़ी संख्या का नियम!

7.3 प्रायिकता के तत्व: प्रतिदर्श समष्टि और घटनाएं

7.3.1 प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space)

प्रतिदर्श समष्टि की परिभाषा और नियम

प्रतिदर्श समष्टि (S): यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों की सूची।

• S में हर संभावित परिणाम होना चाहिए (कोई छूटे नहीं)।
• कोई परिणाम एक से अधिक बार न हो।
• S के तत्वों की संख्या को प्रतिदर्श आकार n(S) कहते हैं।

प्रतिदर्श समष्टि के उदाहरण

1. बारिश: S = {बारिश, बारिश नहीं}, n(S) = 2
2. मैच परिणाम: S = {जीत, हार, बराबरी}, n(S) = 3
3. सिक्का उछालना: S = {H, T}, n(S) = 2
4. पासा फेंकना: S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, n(S) = 6
5. दो सिक्के एक साथ: S = {HH, HT, TH, TT}, n(S) = 4

विशेष ध्यान: HT और TH अलग-अलग परिणाम हैं! पहले सिक्के पर H + दूसरे पर T ≠ पहले पर T + दूसरे पर H।

सोचें और विचार करें — प्रतिदर्श समष्टि की विस्तृतता

जब हमने {बारिश, बारिश नहीं} लिया, तो हमने केवल यह जानना चाहा कि बारिश होगी या नहीं। लेकिन यदि हम बारिश की मात्रा जानना चाहें, तो S = {बारिश नहीं, बूंदाबांदी, हल्की बारिश, भारी बारिश} होगा। प्रतिदर्श समष्टि प्रश्न के अनुसार पर्याप्त विस्तृत होनी चाहिए।

7.3.2 घटनाएं (Events)

एक घटना (Event) प्रतिदर्श समष्टि का कोई उपसमुच्चय (subset) है — अर्थात् यह एक या अधिक परिणामों का समूह है जिसकी हम प्रायिकता ज्ञात करना चाहते हैं।

प्रतिदर्श समष्टि और घटनाओं के उदाहरण

1. दो सिक्के उछालना:
S = {HH, HT, TH, TT}; n(S) = 4
घटना E: 'कम से कम एक चित' = E = {HH, HT, TH}; P(E) = 3/4

2. 6-फलकीय पासा:
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}; n(S) = 6
घटना E: '4 से बड़ी संख्या' = E = {5, 6}; P(E) = 2/6 = 1/3

3. टोकरी से फल चुनना:
S = {सेब, केला, संतरा}; n(S) = 3
घटना E: 'पीला फल' = E = {केला}; P(E) = 1/3

अभ्यास सेट 7.3 — विस्तृत हल

प्र. 1: एक 6-फलकीय पासा फेंकने पर प्रतिदर्श समष्टि में परिणामों की कुल संख्या?
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6} → n(S) = 6

text प्र. 2: निम्नलिखित प्रयोगों के लिए प्रतिदर्श समष्टि S लिखें:

(i) पासा फेंकना और सिक्का उछालना एक साथ:
पासे के 6 परिणाम × सिक्के के 2 परिणाम = 12 परिणाम
S = {(1,H), (1,T), (2,H), (2,T), (3,H), (3,T), (4,H), (4,T), (5,H), (5,T), (6,H), (6,T)}
n(S) = 12

(ii) –5 और +5 के बीच यादृच्छिक पूर्णांक चुनना:
S = {–5, –4, –3, –2, –1, 0, 1, 2, 3, 4, 5}
n(S) = 11

(iii) 5 हरी और 7 लाल गेंदों वाले डिब्बे से एक गेंद निकालना:
S = {हरी, लाल}
n(S) = 2 (रंग की दृष्टि से); लेकिन यदि प्रत्येक गेंद को अलग मानें तो n(S) = 12
P(हरी) = 5/12; P(लाल) = 7/12

प्र. 3: ग्राम मेले में — 3 खाद्य पदार्थ (समोसा, पकोड़ा, भजी) और 2 पेय (चाय, लस्सी)।

(i) सभी संभावित संयोजन (प्रतिदर्श समष्टि):
S = {(समोसा, चाय), (समोसा, लस्सी), (पकोड़ा, चाय), (पकोड़ा, लस्सी), (भजी, चाय), (भजी, लस्सी)}
n(S) = 6

(ii) घटना 'समोसा चुनना':
E = {(समोसा, चाय), (समोसा, लस्सी)}
P(समोसा) = 2/6 = 1/3 ≈ 0.33

7.4 वृक्ष आरेख (Tree Diagrams)

एक वृक्ष आरेख (Tree Diagram) बहु-चरण प्रयोग के सभी संभावित परिणामों को सूचीबद्ध करने का दृश्यात्मक तरीका है। बहु-चरण प्रयोग में स्वतंत्र परीक्षणों की एक श्रृंखला होती है — जैसे सिक्का दो बार उछालना, पासा तीन बार फेंकना।

वृक्ष आरेख के उपयोग

• बहु-चरण प्रयोगों को दृश्यात्मक रूप से समझना
• प्रतिदर्श समष्टि के सभी परिणाम सूचीबद्ध करना
• प्रत्येक शाखा पर प्रायिकता लिखना और संयुक्त प्रायिकता ज्ञात करना

उदाहरण 7: सिक्का दो बार उछालना — वृक्ष आरेख

 पहला उछाल दूसरा उछाल परिणाम ┌── H (1/2) ──── HH [P = 1/4] H (1/2) ─┤ └── T (1/2) ──── HT [P = 1/4] Start ─────┤ ┌── H (1/2) ──── TH [P = 1/4] T (1/2) ─┤ └── T (1/2) ──── TT [P = 1/4] 
S = {HH, HT, TH, TT}, n(S) = 4
P(HH) = 1/4 = 0.25 या 25%
P(एक चित और एक पट) = P(HT) + P(TH) = 1/4 + 1/4 = 2/4 = 1/2 = 50%

अभ्यास सेट 7.4 — विस्तृत हल

प्र. 1: टोकरी A में 1 सेब और 2 संतरे; टोकरी B में 1 केला और 1 आम। प्रत्येक टोकरी से एक फल यादृच्छिक चुनें।

(i) वृक्ष आरेख:

 टोकरी A टोकरी B परिणाम ┌── केला (1/2) ─── (सेब, केला) [P = 1/2 × 1/3 = 1/6] सेब (1/3) ─┤ └── आम (1/2) ─── (सेब, आम) [P = 1/2 × 1/3 = 1/6]
text

         ┌── केला (1/2) ─── (संतरा, केला) [P = 1/2 × 2/3 = 2/6]
संतरा (2/3)─┤
└── आम (1/2) ─── (संतरा, आम) [P = 1/2 × 2/3 = 2/6]

(ii) प्रतिदर्श समष्टि:
S = {(सेब, केला), (सेब, आम), (संतरा, केला), (संतरा, आम)}, n(S) = 4

(iii) एक सेब और एक केला चुनने की प्रायिकता:
P(सेब, केला) = (1/3) × (1/2) = 1/6 ≈ 0.167 या 16.7%
व्याख्या: P(सेब) = 1/3 (A में 3 फल, 1 सेब); P(केला) = 1/2 (B में 2 फल, 1 केला)

text प्र. 2: डिब्बे में 3 लाल, 4 काली, 2 हरी कलम। आप एक कलम लें, वापस रखें; फिर मित्र लें।
कुल कलमें = 9; P(लाल) = 3/9 = 1/3; P(काली) = 4/9; P(हरी) = 2/9

(i) संभावित परिणाम और वृक्ष आरेख:
रंग = {लाल (R), काली (B), हरी (G)} — 3×3 = 9 संभावित जोड़े

आप → मित्र → परिणाम प्रायिकता
─R(1/3)─ (R,R) 1/3 × 1/3 = 1/9
R(1/3) ───B(4/9)─ (R,B) 1/3 × 4/9 = 4/27
─G(2/9)─ (R,G) 1/3 × 2/9 = 2/27

text

      ─R(1/3)─    (B,R)         4/9 × 1/3 = 4/27
B(4/9) ───B(4/9)─ (B,B) 4/9 × 4/9 = 16/81
─G(2/9)─ (B,G) 4/9 × 2/9 = 8/81

text

      ─R(1/3)─    (G,R)         2/9 × 1/3 = 2/27
G(2/9) ───B(4/9)─ (G,B) 2/9 × 4/9 = 8/81
─G(2/9)─ (G,G) 2/9 × 2/9 = 4/81

(ii) दोनों एक ही रंग की कलम:
P(R,R) + P(B,B) + P(G,G) = (3/9)² + (4/9)² + (2/9)²
= 9/81 + 16/81 + 4/81 = 29/81 ≈ 0.358 या 35.8%

अध्याय के अंत के प्रश्न — विस्तृत हल

प्र. 1: रिक्त स्थान भरें:
(i) असंभव घटना की प्रायिकता = 0
(ii) यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों के समुच्चय को प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) कहते हैं।
(iii) निश्चित घटना की प्रायिकता = 1
(iv) निष्पक्ष सिक्के पर चित आने की प्रायिकता = 1/2

text प्र. 2: 50 विद्यार्थियों में 15 फुटबॉल पसंद करते हैं।
सापेक्ष आवृत्ति (Relative Frequency) = 15/50 = 3/10 = 0.3

प्र. 3: समान रूप से संभावित परिणाम वाले प्रयोग:
(i) कार स्टार्ट होना या न होना → समान रूप से संभावित नहीं (यांत्रिक स्थिति पर निर्भर)
(ii) निष्पक्ष सिक्का उछालना → हाँ, समान रूप से संभावित (P = 1/2 दोनों के लिए)
(iii) निष्पक्ष 6-फलकीय पासा → हाँ (P = 1/6 प्रत्येक के लिए)
(iv) 3 लाल और 7 नीली गोलियों से चुनना → नहीं (P(लाल) = 3/10 ≠ P(नीली) = 7/10)
(v) बच्चे का लड़का या लड़की होना → लगभग समान रूप से संभावित (P ≈ 1/2, परंतु सटीक रूप से नहीं)

प्र. 4: प्रतिदर्श समष्टि और प्रायिकता:

(i) दो सिक्के — कम से कम एक चित:
S = {HH, HT, TH, TT}, n(S) = 4
E = {HH, HT, TH}, n(E) = 3
P(कम से कम एक चित) = 3/4 = 0.75 या 75%

text (ii) 1-10 अंकित कार्डों में सम संख्या:
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10}, n(S) = 10
सम संख्याएं = {2, 4, 6, 8, 10}, n = 5
P(सम) = 5/10 = 1/2 = 0.5 या 50%

(iii) पासे पर 4 से बड़ी संख्या:
S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}, n(S) = 6
E = {5, 6}, n(E) = 2
P(4 से बड़ी) = 2/6 = 1/3 ≈ 0.333 या 33.3%

(iv) थैले में 3 लाल, 2 नीली, 1 हरी गेंद — लाल नहीं:
कुल गेंदें = 6; लाल नहीं = 2 + 1 = 3
P(लाल नहीं) = 3/6 = 1/2 = 0.5 या 50%

(v) तीन सिक्के — ठीक दो चित:
S = {HHH, HHT, HTH, THH, HTT, THT, TTH, TTT}, n(S) = 8
ठीक दो चित = {HHT, HTH, THH}, n = 3
P(ठीक दो चित) = 3/8 = 0.375 या 37.5%

प्र. 5: थैले में 3 टॉफियाँ — स्ट्रॉबेरी, नींबू, पुदीना।
P(स्ट्रॉबेरी) = 1/3 ≈ 0.333 या 33.3%

प्र. 6: 2 कमीजें (लाल, नीली) और 3 पतलूनें (जींस, खाकी, शॉर्ट्स) — संयोजन तालिका:

कमीज पतलून संयोजन
लाल जींस लाल + जींस
लाल खाकी लाल + खाकी
लाल शॉर्ट्स लाल + शॉर्ट्स
नीली जींस नीली + जींस
नीली खाकी नीली + खाकी
नीली शॉर्ट्स नीली + शॉर्ट्स

कुल संयोजन = 2 × 3 = 6

प्र. 7: 1000 टायरों का जीवनकाल डेटा:

दूरी (किमी) <4000 4001–9000 9001–14000 >14000
केस 20 210 325 445

(i) P(<4000 किमी) = 20/1000 = 0.02 या 2%
(ii) P(4000–14000 किमी) = (210+325)/1000 = 535/1000 = 0.535 या 53.5%
(iii) P(>14000 किमी) = 445/1000 = 0.445 या 44.5%
जाँच: 0.02 + 0.535 + 0.445 = 1.00 ✓

text प्र. 8: 'PEACE' के अक्षर — P, E, A, C, E (5 कार्ड, E दो बार)।
(i) P, E या C की प्रायिकता:
P = 1 कार्ड, E = 2 कार्ड, C = 1 कार्ड → अनुकूल = 4
P(P, E या C) = 4/5 = 0.8 या 80%
(ii) E न होने की प्रायिकता:
E नहीं = {P, A, C} → 3 कार्ड
P(E नहीं) = 3/5 = 0.6 या 60%

*प्र. 9: घूमने वाला तीर — 1 से 8 तक समान संभावना वाली संख्याएं:
n(S) = 8

(i) P(8) = 1/8 = 0.125 या 12.5%
(ii) विषम संख्याएं = {1, 3, 5, 7} → P(विषम) = 4/8 = 1/2 = 50%
(iii) 2 से बड़ी संख्याएं = {3, 4, 5, 6, 7, 8} → P = 6/8 = 3/4 = 75%
(iv) 9 से कम = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8} = सभी → P = 8/8 = 1 (निश्चित)
(v) 3 के गुणज = {3, 6} → P = 2/8 = 1/4 = 25%

*प्र. 10: टोकरी में 4 लाल (R) और 5 नीली (B) गेंद — बिना वापस रखे दो गेंद निकालना।
कुल = 9; पहली गेंद के बाद 8 बचती हैं।

 पहली दूसरी संयोजन प्रायिकता R(3/8)─────── (R,R) 4/9 × 3/8 = 12/72 = 1/6 R(4/9) ──┤ B(5/8)─────── (R,B) 4/9 × 5/8 = 20/72 = 5/18
text

     R(4/8)─────── (B,R)     5/9 × 4/8 = 20/72 = 5/18
B(5/9) ──┤
B(4/8)─────── (B,B) 5/9 × 4/8 = 20/72 = 5/18

नोट: दूसरी B निकालने पर 5-1=4 B और 8-1=7 गेंद, इसलिए P(B|B पहले) = 4/8

(i) P(पहले लाल, फिर नीली) = 4/9 × 5/8 = 20/72 = 5/18 ≈ 0.278 या 27.8%
(ii) P(दोनों नीली) = 5/9 × 4/8 = 20/72 = 5/18 ≈ 0.278 या 27.8%
जाँच: 12/72 + 20/72 + 20/72 + 20/72 = 72/72 = 1 ✓

*प्र. 11: दो 6-फलकीय पासे फेंकना।
P = 0 वाली घटना (असंभव): दोनों पासों का योग = 1 (न्यूनतम योग = 2)
P = 1 वाला परिणाम (निश्चित): दोनों पासों का योग 2 से 12 के बीच होगा।

*प्र. 12:

(i) दो पासे — योग एक अभाज्य संख्या जो 5 से बड़ी हो:
n(S) = 36; 5 से बड़ी अभाज्य संख्याएं = {7, 11}
योग = 7: (1,6),(2,5),(3,4),(4,3),(5,2),(6,1) → 6 तरीके
योग = 11: (5,6),(6,5) → 2 तरीके
P = 8/36 = 2/9 ≈ 0.222 या 22.2%

text (ii) 4 लाल, 3 हरी, 2 नीली गेंद — बिना वापस रखे दो; दोनों अलग रंग:
कुल = 9; n(S) = 9×8 = 72 (क्रमबद्ध)
एक ही रंग की जोड़ियाँ:
• दोनों लाल: 4×3 = 12
• दोनों हरी: 3×2 = 6
• दोनों नीली: 2×1 = 2
एक ही रंग = 20; अलग रंग = 72-20 = 52
P(अलग रंग) = 52/72 = 13/18 ≈ 0.722 या 72.2%

(iii) तीन सिक्के — पहला चित और कुल ठीक दो चित:
S = {HHH, HHT, HTH, HTT, THH, THT, TTH, TTT}, n(S) = 8
पहला चित + ठीक दो चित कुल = {HHT, HTH}
P = 2/8 = 1/4 = 0.25 या 25%

(iv) 1,2,3,4 से बिना दोहराव के 4-अंकीय संख्या — सम संख्या:
कुल 4-अंकीय संख्याएं = 4! = 24
सम संख्या के लिए अंतिम अंक 2 या 4 होना चाहिए:
• अंतिम अंक 2: शेष 3 जगह = 3! = 6 संख्याएं
• अंतिम अंक 4: शेष 3 जगह = 3! = 6 संख्याएं
सम = 12; P(सम) = 12/24 = 1/2 = 0.5 या 50%

(v) 3 प्रश्न, प्रत्येक में 4 विकल्प — अनुमान से ठीक 2 उत्तर:
P(सही) = 1/4; P(गलत) = 3/4
ठीक 2 के तरीके = C(3,2) = 3: (सही,सही,गलत), (सही,गलत,सही), (गलत,सही,सही)
P = 3 × (1/4)² × (3/4) = 3 × 1/16 × 3/4 = 9/64 ≈ 0.141 या 14.1%

*प्र. 13: 4 गेंदें (1,2,3,4 अंकित) — वृक्ष आरेख से प्रतिदर्श समष्टि:

(i) वापस रखकर (With Replacement):
प्रत्येक बार 4 विकल्प → n(S) = 4 × 4 = 16
S = {(1,1),(1,2),(1,3),(1,4),(2,1),(2,2),(2,3),(2,4),(3,1),(3,2),(3,3),(3,4),(4,1),(4,2),(4,3),(4,4)}

(ii) बिना वापस रखे (Without Replacement):
पहली बार 4 विकल्प, दूसरी बार 3 → n(S) = 4 × 3 = 12
S = {(1,2),(1,3),(1,4),(2,1),(2,3),(2,4),(3,1),(3,2),(3,4),(4,1),(4,2),(4,3)}

(iii) प्रतिदर्श आकार: वापस रखकर = 16; बिना वापस रखे = 12

*प्र. 14: सिक्का उछालना + 1-6 अंकित 6 कार्डों में से एक खींचना:
S = {(H,1),(H,2),(H,3),(H,4),(H,5),(H,6),(Th,1),(T,2),(T,3),(T,4),(T,5),(T,6)}
n(S) = 2 × 6 = 12

text *प्र. 15: तीन सिक्के — चितों की संख्या रिकॉर्ड करना:
चित 0 से 3 तक आ सकते हैं।
सही प्रतिदर्श समष्टि: S = {0, 1, 2, 3}

(i) {1, 2, 3} — अमान्य (0 चित की स्थिति छूटी = TTT)
(ii) {0, 1, 2} — अमान्य (3 चित की स्थिति छूटी = HHH)
(iii) {0, 1, 2, 3, 4} — अमान्य (4 चित असंभव है, 3 से अधिक नहीं हो सकते)
(iv) {0, 1, 2, 3}✓ सही प्रतिदर्श समष्टि! सभी संभावित परिणाम हैं और कोई अतिरिक्त नहीं।

*प्र. 16: 3m × 2m आयताकार क्षेत्र में 1m व्यास (r = 0.5m) का वृत्त:
आयत का क्षेत्रफल = 3 × 2 = 6 वर्ग मीटर
वृत्त का क्षेत्रफल = π × (0.5)² = π/4 ≈ 0.785 वर्ग मीटर
P(वृत्त के अंदर) = (π/4)/6 = π/24 ≈ 0.131 या 13.1%

अध्याय सारांश — Chapter 7

  • प्रायिकता: घटनाओं की संभावना का मापन। 0 ≤ P(E) ≤ 1. P = 0 → असंभव; P = 1 → निश्चित।
  • यादृच्छिकता: ऐसी स्थिति जहाँ सभी संभावित परिणाम ज्ञात हों किंतु कोई एक परिणाम पहले से नहीं बताया जा सके। यादृच्छिकता की कोई स्मृति नहीं होती।
  • प्रायोगिक प्रायिकता: वास्तविक प्रयोग पर आधारित। P = (घटना घटित संख्या)/(कुल परीक्षण)।
  • सैद्धांतिक प्रायिकता: समान संभावना की मान्यता पर आधारित। P(A) = (अनुकूल परिणाम)/(कुल संभावित परिणाम)।
  • बड़ी संख्या का नियम: परीक्षण बढ़ने पर प्रायोगिक प्रायिकता सैद्धांतिक प्रायिकता के निकट आती जाती है।
  • प्रतिदर्श समष्टि (S): यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों का समुच्चय। n(S) = प्रतिदर्श आकार।
  • घटना (Event): प्रतिदर्श समष्टि का कोई उपसमुच्चय। P(E) = n(E)/n(S)।
  • वृक्ष आरेख: बहु-चरण प्रयोगों के सभी परिणाम दर्शाने की दृश्यात्मक विधि। प्रत्येक शाखा एक संभावित परिणाम को दर्शाती है।
  • जुआरी की भूल (Gambler's Fallacy): यह गलत धारणा कि पिछले यादृच्छिक परिणाम भविष्य के परिणामों को प्रभावित करते हैं। वास्तव में, प्रत्येक स्वतंत्र घटना की प्रायिकता सदा समान रहती है।
महत्वपूर्ण सूत्र — एक दृष्टि में
  • प्रायोगिक प्रायिकता = (घटना घटित संख्या) / (कुल परीक्षण)
  • सैद्धांतिक प्रायिकता P(A) = n(A) / n(S)
  • 0 ≤ P(E) ≤ 1 (सभी घटनाओं के लिए)
  • P(असंभव) = 0; P(निश्चित) = 1
  • दो सिक्के: n(S) = 4; तीन सिक्के: n(S) = 8
  • दो पासे: n(S) = 36; वापस रखकर दो गेंद: n(S) = n²
  • बिना वापस रखे दो गेंद (कुल n से): n(S) = n(n–1)
अध्याय 7 समाप्त | गणित मंजरी कक्षा 9 | शायद का गणित: प्रायिकता का परिचय
tₙ = a + (n–1)d | tₙ = arⁿ⁻¹ | Sₙ = n(n+1)/2
गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 8

अगला क्या आएगा? — अनुक्रम और श्रेढ़ियों की खोज
Predicting What Comes Next: Exploring Sequences and Progressions

अनुक्रम, स्पष्ट नियम, पुनरावर्ती नियम, समांतर श्रेढ़ी (AP), प्राकृत संख्याओं का योग, गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP), फ्रैक्टल, सीएर्पिन्स्की त्रिभुज, विराहाँका–फिबोनाची अनुक्रम

8.1 अनुक्रम का परिचय (Introduction to Sequences)

हमारे चारों ओर प्रकृति में, कला में, संगीत में, वित्त में और जीवन के अनेक प्रसंगों में प्रतिरूप (Patterns) दिखाई देते हैं। प्रतिरूप हमें इस संसार को समझने में और आगे क्या आएगा, इसका अनुमान लगाने में सहायता करते हैं। गणित में, अनुक्रम (Sequences) संख्याओं या वस्तुओं के ऐसे विशेष प्रतिरूप हैं जो एक निश्चित क्रम में सजे होते हैं।

परिचित अनुक्रम (Familiar Sequences)

1, 2, 3, 4, 5, 6, …      (प्राकृत संख्याएं / Natural Numbers)
1, 3, 5, 7, 9, 11, …     (विषम संख्याएं / Odd Numbers)
1, 3, 6, 10, 15, 21, …   (त्रिभुजीय संख्याएं / Triangular Numbers)
1, 4, 9, 16, 25, 36, …   (वर्ग संख्याएं / Square Numbers)

तीन बिंदु यह दर्शाते हैं कि अनुक्रम अनंत तक जारी रहता है। इससे पहले कि हम आगे बढ़ें, अनुक्रम (Sequence) को परिभाषित करें — यह संख्याओं की एक क्रमबद्ध सूची है जिसमें प्रत्येक संख्या अनुक्रम का एक पद (Term) कहलाती है।

सोचें और विचार करें

क्या आप ऊपर के प्रत्येक अनुक्रम में प्रतिरूप बता सकते हैं? क्या आप इन अनुक्रमों के अगले कुछ पद बता सकते हैं?

संकेत: वर्ग संख्याओं के अनुक्रम 1, 4, 9, 16, 25, 36 … में 1 पहला पद है, 4 दूसरा पद है, 25 पाँचवाँ पद है। अनुक्रम परिमित (Finite) या अनंत (Infinite) दोनों हो सकते हैं। जैसे 6, 12, 24, 48, 96 — यह 5 पदों वाला परिमित अनुक्रम है।

त्रिभुजीय संख्याएं और वर्ग संख्याएं — गहरी समझ

त्रिभुजीय संख्याओं का विश्लेषण

अनुक्रम 1, 3, 6, 10, 15, 21, … में क्रमिक पदों के बीच का अंतर है: 2, 3, 4, 5, 6

हम इन्हें प्राकृत संख्याओं के योग के रूप में लिख सकते हैं:
• 1 = 1
• 3 = 1 + 2
• 6 = 1 + 2 + 3
• 10 = 1 + 2 + 3 + 4
• 15 = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 (पाँचवीं त्रिभुजीय संख्या)

वर्ग संख्याओं का विश्लेषण: 1, 4, 9, 16, 25, 36, … में क्रमिक पदों के बीच का अंतर है: 3, 5, 7, 9, 11 (विषम संख्याएं!)
• 1 = 1
• 4 = 1 + 3
• 9 = 1 + 3 + 5
• 16 = 1 + 3 + 5 + 7
→ प्रत्येक वर्ग संख्या = उस स्थान तक की विषम संख्याओं का योग।

पद-संकेतन (Term Notation): किसी अनुक्रम के n-वें पद को tₙ (या sₙ, uₙ) से दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, विषम संख्याओं के अनुक्रम में:
t₁ = 1, t₂ = 3, t₃ = 5, t₄ = 7, …
यहाँ t₄ = 7 का अर्थ है: चौथे स्थान पर स्थित पद 7 है।

अभ्यास: अनुक्रम 1, 4, 7, 10, 13, … के अगले चार पद क्या हैं? (इसके पद योग से बना अनुक्रम: 1, 5, 12, 22, … क्या आप पहले 10 पद ज्ञात कर सकते हैं?)

8.2 अनुक्रम के लिए स्पष्ट नियम (Explicit Rule for a Sequence)

tₙ संकेतन का उपयोग करके हम अनुक्रम के n-वें पद के लिए एक स्पष्ट नियम (Explicit Formula) लिख सकते हैं। स्पष्ट सूत्र पद की स्थिति संख्या n का उपयोग करके उस पद का मान प्रत्यक्ष ज्ञात करता है।

स्पष्ट नियम का महत्व

स्पष्ट सूत्र से हम किसी भी पद का मान सीधे ज्ञात कर सकते हैं — पिछले पदों की जानकारी आवश्यक नहीं!

उदाहरण 1: व्यंजक uₙ = 2n – 1 पर विचार करें।

n = 1 रखने पर: u₁ = 2×1 – 1 = 1
n = 2 रखने पर: u₂ = 2×2 – 1 = 3
n = 3 रखने पर: u₃ = 2×3 – 1 = 5

अतः uₙ = 2n – 1 विषम संख्याओं के अनुक्रम का n-वें पद का स्पष्ट नियम है।

53वाँ पद: u₅₃ = 2×53 – 1 = 105
108वाँ पद: u₁₀₈ = 2×108 – 1 = 215
1170वाँ पद: u₁₁₇₀ = 2×1170 – 1 = 2339

स्पष्ट नियम का अन्य उपयोग: हम यह भी जाँच सकते हैं कि कोई संख्या अनुक्रम का पद है या नहीं।

क्या 137 विषम संख्याओं के अनुक्रम का पद है?
uₙ = 137 हल करें: 2n – 1 = 137 → 2n = 138 → n = 69
अतः 137 विषम संख्याओं के अनुक्रम का 69वाँ पद है।

उदाहरण 2: अनुक्रम sₙ = 5n – 2 पर विचार करें।

प्रथम 6 पद: s₁ = 3, s₂ = 8, s₃ = 13, s₄ = 18, s₅ = 23, s₆ = 28
100वाँ पद: s₁₀₀ = 5×100 – 2 = 498
1000वाँ पद: s₁₀₀₀ = 5×1000 – 2 = 4998

क्या 308 इस अनुक्रम का पद है?
5n – 2 = 308 → 5n = 310 → n = 62 ✓ → 308 इस अनुक्रम का 62वाँ पद है।

क्या 471 इस अनुक्रम का पद है?
5n – 2 = 471 → 5n = 473 → n = 94.6 — यह प्राकृत संख्या नहीं → 471 इस अनुक्रम का पद नहीं है।

सोचें और विचार करें

n को हमेशा प्राकृत संख्या (धनात्मक पूर्णांक) होना क्यों आवश्यक है? क्योंकि पद की स्थिति (position) ऋणात्मक या भिन्नात्मक नहीं हो सकती — पहला पद, दूसरा पद होता है, न कि "–2वाँ" या "1.5वाँ" पद।

वर्ग संख्याओं के n-वें पद का नियम क्या होगा? → tₙ = n²

अभ्यास (tn = 3n – 7 पर आधारित) — विस्तृत हल

व्यंजक: tₙ = 3n – 7

(i) प्रथम, द्वितीय, तृतीय, 12वाँ, 18वाँ और 50वाँ पद:
t₁ = 3×1 – 7 = –4
t₂ = 3×2 – 7 = –1
t₃ = 3×3 – 7 = 2
t₁₂ = 3×12 – 7 = 29
t₁₈ = 3×18 – 7 = 47
t₅₀ = 3×50 – 7 = 143

(ii) अनुक्रम का कौन सा पद 332 है?
tₙ = 332 → 3n – 7 = 332 → 3n = 339 → n = 113
332 इस अनुक्रम का 113वाँ पद है।

(iii) क्या 557 इस अनुक्रम का पद है?
3n – 7 = 557 → 3n = 564 → n = 188
188 एक प्राकृत संख्या है → हाँ, 557 इस अनुक्रम का 188वाँ पद है।

8.3 अनुक्रम के लिए पुनरावर्ती नियम (Recursive Rule for a Sequence)

n-वें पद के स्पष्ट सूत्र के अलावा, अनुक्रम का नियम लिखने का एक और तरीका है। जब किसी अनुक्रम में प्रत्येक पद पिछले पद (या पदों) से संबंधित हो, तो इसे पुनरावर्ती नियम (Recursive Rule) कहते हैं।

पुनरावर्ती नियम का उदाहरण

अनुक्रम 1, 4, 7, 10, 13, … पर विचार करें।
स्पष्ट नियम: tₙ = 3n – 2
पुनरावर्ती नियम: t₁ = 1, tₙ = tₙ₋₁ + 3, जहाँ n ≥ 2

क्योंकि: t₂ = t₁ + 3 = 1 + 3 = 4 ✓
t₃ = t₂ + 3 = 4 + 3 = 7 ✓
t₄ = t₃ + 3 = 7 + 3 = 10 ✓

महत्वपूर्ण: पुनरावर्ती नियम का उपयोग करने के लिए पहले के पदों का ज्ञान होना अनिवार्य है।

उदाहरण 3: पुनरावर्ती नियम: u₁ = 1, uₙ = 2uₙ₋₁ + 3 (n ≥ 2) के प्रथम चार पद और क्या 133 इस अनुक्रम का पद है?

u₁ = 1
u₂ = 2×u₁ + 3 = 2×1 + 3 = 5
u₃ = 2×u₂ + 3 = 2×5 + 3 = 13
u₄ = 2×u₃ + 3 = 2×13 + 3 = 29

आगे: u₅ = 2×29 + 3 = 61; u₆ = 2×61 + 3 = 125; u₇ = 2×125 + 3 = 253
चूँकि 125 < 133 < 253, और कोई भी पद 133 नहीं है → 133 इस अनुक्रम का पद नहीं है।

उदाहरण 4: पुनरावर्ती नियम: s₁ = 3, sₙ = sₙ₋₁(sₙ₋₁ – 1) (n ≥ 2) के प्रथम चार पद:

s₁ = 3
s₂ = s₁(s₁ – 1) = 3×(3–1) = 3×2 = 6
s₃ = s₂(s₂ – 1) = 6×(6–1) = 6×5 = 30
s₄ = s₃(s₃ – 1) = 30×(30–1) = 30×29 = 870

अतः प्रथम चार पद हैं: 3, 6, 30, 870

विराहाँका–फिबोनाची अनुक्रम (Virahānka–Fibonacci Sequence)

?? भारतीय गणित की गौरवशाली विरासत

पुनरावर्ती नियम केवल एक पिछले पद पर ही नहीं, बल्कि दो या अधिक पिछले पदों पर भी आधारित हो सकता है। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है:

V₁ = 1, V₂ = 2, Vₙ = Vₙ₋₁ + Vₙ₋₂ (n ≥ 3)

V₃ = V₂ + V₁ = 2 + 1 = 3
V₄ = V₃ + V₂ = 3 + 2 = 5
V₅ = V₄ + V₃ = 5 + 3 = 8

→ अनुक्रम: 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, …

इस अनुक्रम को विराहाँका–फिबोनाची अनुक्रम कहते हैं। इसे सर्वप्रथम विराहाँका ने अपनी कृति वृत्तजातिसमुच्चय में 7वीं शताब्दी CE में लिखा। उन्होंने इसे प्राकृत छंद-शास्त्र के संदर्भ में खोजा! बाद में गोपाल (c. 1135 CE), हेमचंद्र (c. 1150 CE) और इतालवी गणितज्ञ Fibonacci (c. 1200 CE) ने भी इसका अध्ययन किया।

अभ्यास सेट 8.1 — विस्तृत हल

प्र. 1: निम्नलिखित के लिए n-वाँ पद दिया गया है — प्रथम पाँच पद ज्ञात करें:

(i) tₙ = 3n – 4:
t₁ = –1, t₂ = 2, t₃ = 5, t₄ = 8, t₅ = 11

(ii) tₙ = 2 – 5n:
t₁ = –3, t₂ = –8, t₃ = –13, t₄ = –18, t₅ = –23

(iii) tₙ = n² – 2n + 3:
t₁ = 1–2+3 = 2, t₂ = 4–4+3 = 3, t₃ = 9–6+3 = 6, t₄ = 16–8+3 = 11, t₅ = 25–10+3 = 18

प्र. 2: अनुक्रम tₙ = 5n – 3 के 10वें और 15वें पद:
t₁₀ = 5×10 – 3 = 47; t₁₅ = 5×15 – 3 = 72

प्र. 3: क्या 97 और 172 अनुक्रम tₙ = 5n – 3 के पद हैं?
5n – 3 = 97 → n = 20 ✓ → 97 इसका 20वाँ पद है।
5n – 3 = 172 → n = 35 ✓ → 172 इसका 35वाँ पद है।

प्र. 4: tₙ = 5n – 3 में कौन सा पद 607 है?
5n – 3 = 607 → 5n = 610 → n = 122 → 607 इसका 122वाँ पद है।

प्र. 5: पुनरावर्ती नियम: t₁ = –5, tₙ₊₁ = tₙ + 3 (n ≥ 1) — प्रथम 5 पद:
t₁ = –5, t₂ = –5+3 = –2, t₃ = –2+3 = 1, t₄ = 1+3 = 4, t₅ = 4+3 = 7
क्या 52 इसका पद है? tₙ = –5 + (n–1)×3 = 3n – 8
3n – 8 = 52 → 3n = 60 → n = 20 ✓ → 52 इसका 20वाँ पद है।

प्र. 6: T₁ = 1, T₂ = 2, T₃ = 4, Tₙ = Tₙ₋₁ + Tₙ₋₂ + Tₙ₋₃ (n ≥ 4):
T₄ = 4+2+1 = 7; T₅ = 7+4+2 = 13; T₆ = 13+7+4 = 24; T₇ = 24+13+7 = 44; T₈ = 44+24+13 = 81

8.4 समांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progressions — AP)

अब तक हमने सीखा कि अनुक्रम संख्याओं की एक क्रमबद्ध सूची होती है जो किसी नियम का अनुसरण कर सकती है। इस अनुभाग में हम एक विशेष प्रकार के अनुक्रम — समांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progression) — का अध्ययन करेंगे।

वर्गों का बढ़ता प्रतिरूप — AP की खोज

एक बढ़ते प्रतिरूप में (चरण 1 से 4) वर्गों की संख्या: 1, 5, 9, 13
प्रत्येक चरण में 4 वर्ग जुड़ते हैं।

इन्हें इस प्रकार लिखें:
1, 1+4, 1+4+4, 1+4+4+4, … = 1, 1+1×4, 1+2×4, 1+3×4, …

t₁ = 1, t₂ = 1+1×4, t₃ = 1+2×4, t₄ = 1+3×4
→ n-वाँ पद: tₙ = 1 + (n–1)×4 = 4n – 3

क्रमिक पदों के बीच का अंतर सदा 4 है — यही सार्व अंतर (Common Difference) है।

समांतर श्रेढ़ी — परिभाषा और सूत्र

tₙ = a + (n – 1) × d

जहाँ a = प्रथम पद, d = सार्व अंतर (Common Difference)
AP का सामान्य रूप: a, a+d, a+2d, a+3d, …, a+(n–1)d

AP के उदाहरण
अनुक्रम प्रथम पद (a) सार्व अंतर (d) n-वाँ पद
1, 5, 9, 13, 17, … 1 4 4n – 3
1, 4, 7, 10, … 1 3 3n – 2
11, 7, 3, –1, –5, … 11 –4 15 – 4n
–7, –3, 1, 5, 9, … –7 4 4n – 11

8.4.1 AP का दृश्यात्मक निरूपण (Visualising an AP)

जब हम AP 1, 5, 9, 13, 17 के क्रमित युग्म (x, y) — जहाँ x = चरण संख्या, y = वर्गों की संख्या — को आलेखित करते हैं:
(1,1), (2,5), (3,9), (4,13), (5,17)

ये सभी बिंदु एक सरल रेखा पर स्थित हैं!
→ AP के बिंदु सदा एक सरल रेखा बनाते हैं।

AP और Recursive Rule: tₙ = a + (n–1)d स्पष्ट नियम है।
Recursive नियम: t₁ = a, tₙ = tₙ₋₁ + d (n ≥ 2)

उदाहरण 5 (वास्तविक जीवन): एक व्यक्ति टैक्सी बुक करता है। कंपनी ₹200 बुकिंग शुल्क + ₹40 प्रति किमी लेती है।

1 किमी बाद: ₹200 + ₹40 = ₹240
2 किमी बाद: ₹200 + ₹80 = ₹280
3 किमी बाद: ₹200 + ₹120 = ₹320

अनुक्रम: 240, 280, 320, … → यह AP है जहाँ a = 240, d = 40
n-वाँ पद: tₙ = 240 + (n–1)×40 = 200 + 40n
10 किमी का कुल किराया: t₁₀ = 200 + 40×10 = ₹600

8.5 प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग (Sum of the First n Natural Numbers)

क्या आप वास्तव में जोड़े बिना प्रथम 10 प्राकृत संख्याओं का योग ज्ञात कर सकते हैं? आइए एक अनूठी विधि आजमाएं।

गाउस की युक्ति (Gauss's Trick)

माना S = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8 + 9 + 10
तो S = 10 + 9 + 8 + 7 + 6 + 5 + 4 + 3 + 2 + 1
दोनों जोड़ने पर:
2S = (1+10) + (2+9) + (3+8) + … + (10+1) = 11 × 10 = 110
S = 55

सामान्य सूत्र:
S = 1 + 2 + … + n और S = n + (n–1) + … + 1
2S = n(n+1) → Sₙ = n(n+1)/2

प्रथम n प्राकृत संख्याओं के योग का सूत्र

Sₙ = n(n + 1) / 2

यह सूत्र सर्वप्रथम आर्यभट्ट की कृति आर्यभटीय, अध्याय 2, श्लोक 19 में मिलता है।

उपयोग के उदाहरण:

S₂₀ = 20×21/2 = 210
S₅₀ = 50×51/2 = 1275
S₁₀₀₀ = 1000×1001/2 = 500500

क्रमागत संख्याओं का योग: 25 + 26 + 27 + … + 58
= S₅₈ – S₂₄ = (58×59/2) – (24×25/2) = 1711 – 300 = 1411

त्रिभुजीय संख्याओं से संबंध:
त्रिभुजीय अनुक्रम 1, 3, 6, 10, 15 … का n-वाँ पद = n(n+1)/2
10वीं त्रिभुजीय संख्या = 10×11/2 = 55
17वीं त्रिभुजीय संख्या = 17×18/2 = 153
80वीं त्रिभुजीय संख्या = 80×81/2 = 3240

अभ्यास सेट 8.2 — विस्तृत हल

प्र. 1: AP: 3, 8, 13, 18, … के 10वें और 26वें पद ज्ञात करें।
a = 3, d = 5
t₁₀ = 3 + 9×5 = 3 + 45 = 48
t₂₆ = 3 + 25×5 = 3 + 125 = 128

प्र. 2: AP: 21, 18, 15, … में कौन सा पद –81 है? क्या 0 इसका पद है?
a = 21, d = –3
tₙ = –81 → 21 + (n–1)(–3) = –81 → 21 – 3n + 3 = –81 → 3n = 105 → n = 35
–81 इसका 35वाँ पद है।
क्या 0 पद है? 21 + (n–1)(–3) = 0 → 3n = 24 → n = 8 ✓ → 0 इसका 8वाँ पद है।

प्र. 3: AP: 11, 8, 5, 2, … का n-वाँ पद और recursive नियम:
a = 11, d = –3
tₙ = 11 + (n–1)(–3) = 11 – 3n + 3 = 14 – 3n
Recursive: t₁ = 11, tₙ = tₙ₋₁ – 3 (n ≥ 2)

प्र. 4: AP के 50 पद हैं जिसमें t₃ = 12 और t₅₀ = 106। t₂₉ ज्ञात करें।
a + 2d = 12 … (i) और a + 49d = 106 … (ii)
(ii) – (i): 47d = 94 → d = 2
(i) से: a = 12 – 4 = 8
t₂₉ = 8 + 28×2 = 8 + 56 = 64

प्र. 5: 3 से विभाज्य 2-अंकीय संख्याएं और उनका योग:
ऐसी संख्याएं: 12, 15, 18, …, 99 → AP जहाँ a = 12, d = 3, aₙ = 99
99 = 12 + (n–1)×3 → n – 1 = 29 → n = 30 (कुल 30 संख्याएं)
योग = 30/2 × (12 + 99) = 15 × 111 = 1665

प्र. 6: हरिश की वार्षिक आय AP: 5,00,000; 5,20,000; 5,40,000 …
a = 5,00,000; d = 20,000; tₙ = 7,00,000
5,00,000 + (n–1)×20,000 = 7,00,000
(n–1) = 10 → n = 11 → 11वें वर्ष में आय ₹7,00,000 हो जाएगी।

प्र. 7: एक बच्चा 25 पंक्तियों में कंचे सजाता है: 1+2+3+…+25
S₂₅ = 25×26/2 = 325 कंचे

8.6 गुणोत्तर श्रेढ़ी (Geometric Progressions — GP)

इस अनुभाग में हम एक और विशेष प्रकार के अनुक्रम — गुणोत्तर श्रेढ़ी (Geometric Progression / GP) — का अध्ययन करेंगे।

वर्गों का बढ़ता प्रतिरूप — GP की खोज

हरे वर्गों की संख्या: 3, 6, 12, 24, … (प्रत्येक चरण में दोगुनी)

इन्हें इस प्रकार लिखें: 3, 3×2, 3×2², 3×2³, …
t₁ = 3, t₂ = 3×2, t₃ = 3×2², t₄ = 3×2³
→ n-वाँ पद: tₙ = 3 × 2ⁿ⁻¹

अनुपात: 6/3 = 12/6 = 24/12 = 48/24 = 2 (सार्व अनुपात / Common Ratio)

गुणोत्तर श्रेढ़ी — परिभाषा और सूत्र

tₙ = a × rⁿ⁻¹

जहाँ a = प्रथम पद, r = सार्व अनुपात (Common Ratio)
GP का सामान्य रूप: a, ar, ar², ar³, …, arⁿ⁻¹

GP के उदाहरण (उदाहरण 6, 7, 8)
अनुक्रम प्रथम पद (a) सार्व अनुपात (r) n-वाँ पद
1, 2, 4, 8, 16, … 1 2 2ⁿ⁻¹
1, 3, 9, 27, 81, … 1 3 3ⁿ⁻¹
1, –1, 1, –1, 1, … 1 –1 (–1)ⁿ⁻¹

उदाहरण 9: अनुक्रम 5, 15/4, 45/16, 135/64, … की जाँच करें।

t₂/t₁ = (15/4) ÷ 5 = 15/4 × 1/5 = 3/4
t₃/t₂ = (45/16) ÷ (15/4) = 45/16 × 4/15 = 3/4
t₄/t₃ = (135/64) ÷ (45/16) = 135/64 × 16/45 = 3/4

→ सार्व अनुपात स्थिर है → यह GP है जहाँ a = 5, r = 3/4
n-वाँ पद = 5 × (3/4)ⁿ⁻¹

8.6.1 फ्रैक्टल के साथ मज़ा (Fun with Fractals)

सीएर्पिन्स्की त्रिभुज (Sierpiński Triangle)

निर्माण: चरण 0 = समबाहु त्रिभुज। तीनों भुजाओं के मध्यबिंदुओं को मिलाएं → 4 छोटे त्रिभुज बनते हैं → केंद्रीय त्रिभुज हटाएं = चरण 1। यह प्रक्रिया अनंत तक दोहराएं।

काले त्रिभुजों की संख्या: चरण 0 में 1, चरण 1 में 3, चरण 2 में 9, चरण 3 में 27 …
GP: 1, 3, 9, 27, 81, … जहाँ tₙ = 3ⁿ (n = चरण संख्या)

काले क्षेत्रफल (प्रारंभिक = 1 वर्ग इकाई):
चरण 0: 1; चरण 1: 3/4; चरण 2: (3/4)²; चरण 3: (3/4)³ …
GP: 1, 3/4, 9/16, 27/64, … जहाँ sₙ = (3/4)ⁿ

आश्चर्यजनक: काले त्रिभुजों की संख्या तेज़ी से बढ़ती है, किंतु काला क्षेत्रफल 0 की ओर घटता है!

तालिका 1 — सीएर्पिन्स्की त्रिभुज
चरण (n) 0 1 2 3 4 5 n
काले त्रिभुज (tₙ) 1=3⁰ 3=3¹ 9=3² 27=3³ 81=3⁴ 243=3⁵ 3ⁿ
छायांकित क्षेत्र (sₙ) 1 3/4 (3/4)² (3/4)³ (3/4)⁴ (3/4)⁵ (3/4)ⁿ

Recursive नियम: t₁ = 1, tₙ = 3×tₙ₋₁ (n ≥ 2) और s₁ = 1, sₙ = (3/4)×sₙ₋₁ (n ≥ 2)

फ्रैक्टल क्या है?

फ्रैक्टल (Fractals) ऐसी आकृतियाँ या प्रतिरूप हैं जो विभिन्न पैमानों पर स्वयं को दोहराते हैं — यदि आप किसी फ्रैक्टल के किसी छोटे भाग को ज़ूम करें, तो वह पूरी आकृति जैसा दिखता है! फ्रैक्टल प्रकृति में सर्वत्र पाए जाते हैं — वृक्षों की शाखाओं में, गोभी में, हिमकणों (snowflakes) में, समुद्र तटों के प्रतिरूप में।

8.6.2 GP का दृश्यात्मक निरूपण (Visualising a GP)

जब हम GP 3, 6, 12, 24, 48 के क्रमित युग्म (x, y) — जहाँ x = चरण संख्या, y = वर्गों की संख्या — को आलेखित करते हैं:
(1,3), (2,6), (3,12), (4,24), (5,48)

ये बिंदु सरल रेखा पर नहीं बल्कि एक वक्र (Curve) पर स्थित हैं!
AP के बिंदु → सरल रेखा; GP के बिंदु → घातांकीय वक्र (Exponential Curve)

उदाहरण 10 (उछलती गेंद): एक गेंद 24 फुट की ऊँचाई से गिराई जाती है। प्रत्येक बार वह पिछली ऊँचाई का 3/4 भाग उछलती है।

(a) पाँच उछालों में ऊँचाई:
पहली उछाल: 24 × 0.75 = 18 फुट
दूसरी उछाल: 18 × 0.75 = 13.5 फुट
तीसरी उछाल: 13.5 × 0.75 = 10.125 फुट
चौथी उछाल: 10.125 × 0.75 ≈ 7.594 फुट
पाँचवीं उछाल: 7.594 × 0.75 ≈ 5.695 फुट

→ GP: a = 18, r = 3/4

(b) गेंद मूल ऊँचाई के 1/6 से नीचे कब रहेगी?
1/6 × 24 = 4 फुट।
6वीं उछाल: 5.695 × 0.75 ≈ 4.27 फुट (4 से अधिक)
7वीं उछाल: 4.27 × 0.75 ≈ 3.20 फुट (4 से कम) ✓
7वीं उछाल के बाद गेंद मूल ऊँचाई के 1/6 से नीचे रहती है।

अभ्यास सेट 8.3 — विस्तृत हल

प्र. 1: सार्व अनुपात 2 वाले GP का 8वाँ पद 192 है — 12वाँ पद ज्ञात करें।
tₙ = ar^(n–1) → t₈ = a × 2⁷ = 192 → a × 128 = 192 → a = 192/128 = 3/2
t₁₂ = (3/2) × 2¹¹ = (3/2) × 2048 = 3 × 1024 = 3072

प्र. 2: GP: 5, 25, 125, … के 10वें और n-वें पद:
a = 5, r = 5
t₁₀ = 5 × 5⁹ = 5¹⁰ = 9765625
tₙ = 5 × 5^(n–1) = 5ⁿ

*प्र. 3: Recursive: t₁ = 2, tₙ₊₁ = 3tₙ – 2 → कौन सा पद 730 है?
t₁ = 2, t₂ = 3×2–2 = 4, t₃ = 3×4–2 = 10, t₄ = 3×10–2 = 28, t₅ = 82, t₆ = 244, t₇ = 730
730 इसका 7वाँ पद है।

प्र. 4: GP: 2, 6, 18, … में कौन सा पद 4374 है?
a = 2, r = 3; tₙ = 2 × 3^(n–1) = 4374 → 3^(n–1) = 2187 = 3⁷ → n–1 = 7 → n = 8
स्पष्ट: tₙ = 2 × 3^(n–1); Recursive: t₁ = 2, tₙ = 3tₙ₋₁ (n ≥ 2)

प्र. 5: गेंद 80 मीटर से गिराई, प्रत्येक बार 60% उछाल:
a = 80, r = 0.6
(i) 5वीं उछाल की ऊँचाई: t₅ = 80 × (0.6)⁵ = 80 × 0.07776 ≈ 6.22 मीटर
(ii) 6वीं बार ज़मीन तक कुल ऊर्ध्वाधर दूरी:
नीचे: 80 + (80×0.6) + (80×0.6²) + … + (80×0.6⁵) = 80×[1+(0.6+0.6²+0.6³+0.6⁴+0.6⁵)]
= 80 + 48 + 28.8 + 17.28 + 10.368 + 6.2208 = 190.67 मीटर (नीचे)
ऊपर (5 उछालें): 48 + 28.8 + 17.28 + 10.368 + 6.2208 = 110.67 मीटर
कुल = 190.67 + 110.67 ≈ 301.34 मीटर

प्र. 6: अनुक्रम 2, 2√2, 4, … में कौन सा पद 128 है?
a = 2, r = √2; tₙ = 2 × (√2)^(n–1) = 128 = 2⁷
2 × 2^((n–1)/2) = 2⁷ → 1 + (n–1)/2 = 7 → n–1 = 12 → n = 13

प्र. 7: सीएर्पिन्स्की वर्ग कालीन (Sierpiński Square Carpet):
चरण 0: 1 लाल वर्ग। प्रत्येक चरण में प्रत्येक वर्ग 9 भागों में बँटता है, केंद्र हटाओ = 8 बचते हैं।

(i) चरण 0 से 3 में लाल वर्गों की संख्या:
चरण 0: 1; चरण 1: 8; चरण 2: 64; चरण 3: 512

(ii) चरण 4 और 5 में:
चरण 4: 512 × 8 = 4096; चरण 5: 4096 × 8 = 32768

(iii) n-वें चरण में लाल वर्गों की संख्या:
स्पष्ट: tₙ = 8ⁿ; Recursive: t₀ = 1, tₙ = 8 × tₙ₋₁ (n ≥ 1)

(iv) लाल क्षेत्रफल (चरण 0 में = 1 वर्ग इकाई):
प्रत्येक चरण में प्रत्येक वर्ग का क्षेत्रफल 1/9 हो जाता है, 8 वर्ग बचते हैं → गुणक = 8/9
चरण 1: 8/9; चरण 2: (8/9)²; चरण 3: (8/9)³
n-वाँ चरण: sₙ = (8/9)ⁿ
Recursive: s₀ = 1, sₙ = (8/9) × sₙ₋₁
जैसे-जैसे n बढ़ता है, (8/9)ⁿ → 0 → क्षेत्रफल शून्य की ओर घटता है।

अध्याय के अंत के प्रश्न — विस्तृत हल

प्र. 1: AP जिसका 11वाँ पद 38 और 16वाँ पद 73 है — 31वाँ पद ज्ञात करें।
a + 10d = 38 … (i); a + 15d = 73 … (ii)
(ii) – (i): 5d = 35 → d = 7
(i) से: a = 38 – 70 = –32
t₃₁ = –32 + 30×7 = –32 + 210 = 178

प्र. 2: AP जिसका तीसरा पद 16 है और 7वाँ पद 5वें से 12 अधिक है।
a + 2d = 16 … (i); (a + 6d) – (a + 4d) = 12 → 2d = 12 → d = 6
(i) से: a = 16 – 12 = 4
AP: 4, 10, 16, 22, 28, …

*प्र. 3: 7 से विभाज्य तीन-अंकीय संख्याएं कितनी हैं?
सबसे छोटी: 105 (= 7×15); सबसे बड़ी: 994 (= 7×142)
AP: 105, 112, 119, …, 994 जहाँ a = 105, d = 7
tₙ = 994 → 105 + (n–1)×7 = 994 → (n–1) = 127 → n = 128
7 से विभाज्य 128 तीन-अंकीय संख्याएं हैं।

*प्र. 4: 10 और 250 के बीच 4 के कितने गुणज हैं?
सबसे छोटा: 12 (= 4×3); सबसे बड़ा: 248 (= 4×62)
AP: 12, 16, 20, …, 248 जहाँ a = 12, d = 4
tₙ = 248 → 12 + (n–1)×4 = 248 → n – 1 = 59 → n = 60

*प्र. 5: GP जिसके प्रथम दो पदों का योग –4 और पाँचवाँ पद तीसरे का 4 गुना है।
a + ar = –4 → a(1+r) = –4 … (i)
ar⁴ = 4·ar² → r² = 4 → r = 2 या r = –2
यदि r = 2: a(3) = –4 → a = –4/3; GP: –4/3, –8/3, –16/3, …
यदि r = –2: a(–1) = –4 → a = 4; GP: 4, –8, 16, –32, …

*प्र. 6: 100 को क्रमागत प्राकृत संख्याओं के योग के रूप में — सभी संभव तरीके:
• 18 + 19 + 20 + 21 + 22 = 100 (5 संख्याएं)
• 9 + 10 + 11 + … + 18 = 100 (10 संख्याएं)
• 36 + 37 + 27 (3 संख्याएं: 33+34+33? जाँचें) → 33+34+33 नहीं
वास्तव: 100 = 18+19+20+21+22 = 9+10+…+18 (10 पद) = 100 (1 पद) आदि।

*प्र. 7: जीवाणु संख्या प्रत्येक घंटे दोगुनी होती है; प्रारंभ में 30:
GP: a = 30, r = 2
2वें घंटे के अंत में: t₂ = 30×2² = 120 (2 गुणा 2 बार)
4वें घंटे के अंत में: t₄ = 30×2⁴ = 480
n-वें घंटे के अंत में: tₙ = 30×2ⁿ → 30 × 2ⁿ जीवाणु

*प्र. 8: AP में t₄ + t₈ = 24 और t₆ + t₁₀ = 44। प्रथम तीन पद ज्ञात करें।
(a+3d) + (a+7d) = 24 → 2a + 10d = 24 → a + 5d = 12 … (i)
(a+5d) + (a+9d) = 44 → 2a + 14d = 44 → a + 7d = 22 … (ii)
(ii)–(i): 2d = 10 → d = 5; a = 12 – 25 = –13
प्रथम तीन पद: –13, –8, –3

*प्र. 9: सबसे छोटा n जिसके लिए Sₙ > 1000:
n(n+1)/2 > 1000 → n² + n – 2000 > 0
n ≈ (–1 + √8001)/2 ≈ 44.2 → n = 45 (S₄₅ = 45×46/2 = 1035 > 1000 ✓)

*प्र. 10: GP: 2, 8, 32, … में कौन सा पद 131072 है?
a = 2, r = 4; tₙ = 2 × 4^(n–1) = 131072 = 2¹⁷
2 × 4^(n–1) = 2¹⁷ → 4^(n–1) = 2¹⁶ = 4⁸ → n–1 = 8 → n = 9
स्पष्ट: tₙ = 2 × 4^(n–1); Recursive: t₁ = 2, tₙ = 4tₙ₋₁

*प्र. 11: GP के प्रथम तीन पदों का योग 13/12 और गुणनफल –1।
माना पद: a/r, a, ar
गुणनफल: (a/r)×a×(ar) = a³ = –1 → a = –1
योग: –1/r + (–1) + (–r) = 13/12 → –1/r – 1 – r = 13/12
→ 1/r + r = –1 – 13/12 = –25/12
→ 12r² + 25r + 12 = 0 → r = –3/4 या r = –4/3
यदि r = –3/4: पद = 4/3, –1, 3/4
यदि r = –4/3: पद = 3/4, –1, 4/3
पद हैं: 4/3, –1, 3/4 (या 3/4, –1, 4/3)

*प्र. 12: GP के 4वें, 10वें और 16वें पद क्रमशः x, y, z हैं। सिद्ध करें कि x, y, z GP में हैं।
GP में tₙ = ar^(n–1) माना:
x = ar³, y = ar⁹, z = ar¹⁵
y/x = ar⁹/ar³ = r⁶; z/y = ar¹⁵/ar⁹ = r⁶
→ y/x = z/y → y² = xz → x, y, z GP में हैं। (सिद्ध)

*प्र. 13: GP के प्रथम तीन पदों का योग 26 और वर्गों का योग 364।
माना पद: a/r, a, ar
a/r + a + ar = 26 … (i); (a/r)² + a² + (ar)² = 364 … (ii)
(i) को वर्ग करें: a²(1/r + 1 + r)² = 676
(ii): a²(1/r² + 1 + r²) = 364
(1/r + 1 + r)² – 2(1/r + 1 + r) + 2 = 1/r² + 1 + r² + 2/r + 2 + 2r नहीं — सीधे हल करें:
माना S = 1/r + 1 + r → S² – 2(1/r + r) – 2 = 1/r² + r² → a²S = 26, a²(S²–2–2/a²?) जटिल।
सरल प्रयास: a = 2, r = 3 → 2/3 + 2 + 6 = 26/3 ≠ 26। a = 1, r = 3: 1/3 + 1 + 3 = 13/3 ≠ 26।
a = 2, r = 3: 2/3+2+6 = 26/3 नहीं। पद: 2, 6, 18 → योग = 26 ✓ (a/r=2 → r=1 नहीं।)
माना पद: a, ar, ar² → a+ar+ar² = 26, a²+a²r²+a²r⁴ = 364
a(1+r+r²) = 26; a²(1+r²+r⁴) = 364 → a²(1+r²+r⁴) = 364
(1+r+r²)² = 1+r²+r⁴+2r+2r²+2r³; 676 = a²(1+r²+r⁴)
676/364 = (1+r+r²)²/(1+r²+r⁴) → जटिल। पद 2, 6, 18 जाँचें: 4+36+324 = 364 ✓ और 2+6+18 = 26 ✓
GP के पद हैं: 2, 6, 18 (a=2, r=3)

*प्र. 14: P₁=1, P₂=2, Pₙ = P₁+P₂+…+Pₙ₋₁+1 (n>2):
P₃ = 1+2+1 = 4; P₄ = 1+2+4+1 = 8; P₅ = 16; P₆ = 32; P₇ = 64; P₈ = 128
Pₙ = 2^(n–1) (n ≥ 1); Recursive: P₁=1, Pₙ = 2Pₙ₋₁ (n ≥ 2)

*प्र. 15: W₁=1, W₂=2, Wₙ = W₁+W₂+…+Wₙ₋₂+2 (n>2):
W₃ = W₁+2 = 1+2 = 3; W₄ = W₁+W₂+2 = 1+2+2 = 5
W₅ = W₁+W₂+W₃+2 = 1+2+3+2 = 8; W₆ = 1+2+3+5+2 = 13
W₇ = 1+2+3+5+8+2 = 21; W₈ = 1+2+3+5+8+13+2 = 34
→ अनुक्रम: 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, … → यह विराहाँका–फिबोनाची अनुक्रम है!

AP और GP की तुलना — एक दृष्टि में

आधार समांतर श्रेढ़ी (AP) गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP)
परिभाषा क्रमिक पदों का अंतर स्थिर क्रमिक पदों का अनुपात स्थिर
स्थिर राशि सार्व अंतर (d) सार्व अनुपात (r)
सामान्य रूप a, a+d, a+2d, … a, ar, ar², …
n-वाँ पद tₙ = a + (n–1)d tₙ = arⁿ⁻¹
Recursive नियम t₁=a, tₙ=tₙ₋₁+d t₁=a, tₙ=r·tₙ₋₁
ग्राफ सरल रेखा (Linear) घातांकीय वक्र (Exponential)
वास्तविक उदाहरण टैक्सी किराया, वेतन वृद्धि जीवाणु वृद्धि, उछलती गेंद

अध्याय सारांश — Chapter 8

  • अनुक्रम (Sequence): संख्याओं की एक क्रमबद्ध सूची जहाँ प्रत्येक संख्या को पद (Term) कहते हैं। अनुक्रम परिमित या अनंत हो सकते हैं।
  • स्पष्ट नियम (Explicit Formula): पद की स्थिति n का उपयोग करके सीधे उसका मान देता है। जैसे tₙ = 2n–1 (विषम संख्याएं)।
  • पुनरावर्ती नियम (Recursive Formula): पिछले पद (या पदों) के मान से वर्तमान पद का मान देता है। जैसे t₁=1, tₙ=tₙ₋₁+3।
  • त्रिभुजीय संख्याएं: 1, 3, 6, 10, 15, … जहाँ tₙ = n(n+1)/2 — यही प्रथम n प्राकृत संख्याओं के योग का सूत्र है (आर्यभट्ट)।
  • समांतर श्रेढ़ी (AP): जिसमें क्रमिक पदों का अंतर (सार्व अंतर d) स्थिर हो। tₙ = a + (n–1)d। AP के बिंदु सरल रेखा बनाते हैं।
  • गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP): जिसमें क्रमिक पदों का अनुपात (सार्व अनुपात r) स्थिर हो। tₙ = arⁿ⁻¹। GP के बिंदु घातांकीय वक्र बनाते हैं।
  • विराहाँका–फिबोनाची अनुक्रम: V₁=1, V₂=2, Vₙ=Vₙ₋₁+Vₙ₋₂ → 1, 2, 3, 5, 8, 13, … — 7वीं शताब्दी में भारतीय गणितज्ञ विराहाँका द्वारा छंद-शास्त्र में खोजा गया।
  • फ्रैक्टल और GP: सीएर्पिन्स्की त्रिभुज और वर्ग कालीन में काले त्रिभुजों/वर्गों की संख्या और क्षेत्रफल दोनों GP बनाते हैं — संख्या बढ़ती है, क्षेत्रफल शून्य की ओर घटता है।
महत्वपूर्ण सूत्र — एक दृष्टि में
  • प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग: Sₙ = n(n+1)/2
  • AP का n-वाँ पद: tₙ = a + (n–1)d
  • GP का n-वाँ पद: tₙ = arⁿ⁻¹
  • त्रिभुजीय संख्या: tₙ = n(n+1)/2
  • सीएर्पिन्स्की त्रिभुज — काले त्रिभुज: tₙ = 3ⁿ; क्षेत्रफल: sₙ = (3/4)ⁿ
  • सीएर्पिन्स्की वर्ग कालीन — लाल वर्ग: tₙ = 8ⁿ; क्षेत्रफल: sₙ = (8/9)ⁿ
  • AP → सरल रेखा (Linear Graph); GP → घातांकीय वक्र (Exponential Curve)
अध्याय 8 समाप्त | गणित मंजरी कक्षा 9 | अगला क्या आएगा? — अनुक्रम और श्रेढ़ियों की खोज
Shakti Rao Mani Shakti Rao Mani शिक्षा नीति, सरकारी योजनाओं और उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा तंत्र पर विशेष रूप से लिखते हैं। Aapbiti के Education Unit से जुड़े हैं और अभिभावकों व छात्रों तक सटीक एवं उपयोगी जानकारी पहुँचाना उनकी प्राथमिकता है।