NCERT कक्षा 9 गणित मंजरी समाधान: भाग 1 (अध्याय 1) — विस्तृत व्याख्या एवं हल

'गणित मंजरी' कक्षा 9 समाधान श्रृंखला का पहला भाग। इसमें अध्याय 1 से 8 तक के विस्तृत हल दिए गए हैं, जिसमें निर्देशांक ज्यामिति, बहुपद, संख्या पद्धति, वृत्त, क्षेत्रफल, प्रायिकता और अनुक्रम (AP/GP) शामिल हैं। भाग 2 के लिए जुड़े रहें!

Apr 24, 2026 - 02:17
May 5, 2026 - 18:37
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NCERT कक्षा 9 गणित मंजरी समाधान: भाग 1 (अध्याय 1) — विस्तृत व्याख्या एवं हल
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ताजा खबर — 23 अप्रैल 2025
NCERT ने कक्षा 9 की 4 नई पाठ्यपुस्तकें ऑनलाइन जारी कीं — अभी डाउनलोड करें

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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 23 अप्रैल 2026 को कक्षा 9 के लिए चार नई पाठ्यपुस्तकों की सॉफ्ट कॉपी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी है। ये पुस्तकें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप तैयार की गई हैं और फिलहाल अंग्रेजी माध्यम में जारी की गई हैं।

NCERT के आधिकारिक Instagram अकाउंट @ncertindia पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस बार जो चार पुस्तकें जारी की गई हैं उनमें शामिल हैं — विज्ञान के लिए Exploration, गणित के लिए Ganita Manjari, अंग्रेजी के लिए Kaveri और संस्कृत के लिए Sharada। इन पुस्तकों को QR कोड स्कैन करके या NCERT की वेबसाइट से सीधे डाउनलोड किया जा सकता है।

इस लेख में हम मुख्य रूप से गणित की नई पाठ्यपुस्तक गणित मंजरी (Ganita Manjari) की बात करेंगे। फिलहाल यह पुस्तक अंग्रेजी संस्करण में उपलब्ध है, जल्द ही इसका हिंदी संस्करण भी NCERT द्वारा जारी किया जाएगा।

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गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 1
निर्देशांक का उपयोग: स्वयं को दिशा दें — सम्पूर्ण अध्याय व्याख्या एवं हल सहित

1.1 भूमिका (Introduction)

निर्देशांक तंत्र (Coordinate System) एक ऐसी व्यवस्था है जिसके द्वारा हम किसी भी बिंदु की सटीक स्थिति संख्याओं के माध्यम से बता सकते हैं — ठीक वैसे जैसे मानचित्र पर ग्रिड रेखाएं होती हैं। NCERT की नई पुस्तक गणित मंजरी इस अवधारणा की जड़ें भारत में ढूंढती है।

पुस्तक बताती है कि सिंधु-सरस्वती सभ्यता में नगरों की सड़कें उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशाओं में समान दूरी (लगभग 10 मीटर) पर बनाई जाती थीं — यह व्यवहार में निर्देशांक तंत्र ही था। बौधायन ने बाद में इसी आधार पर बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय विकसित की। उज्जयिनी को प्राचीन काल में शून्य देशांतर (central meridian) माना जाता था। ब्रह्मगुप्त ने शून्य और ऋणात्मक संख्याओं को औपचारिक रूप दिया, जिसके बिना चतुर्थांश (Quadrant) वाला कार्तीय तल संभव ही नहीं होता। अंततः रेने देकार्त (1637 ई.) ने इसे आधुनिक रूप दिया।

1.2 नई जगह, नई पहचान (Settling In)

पुस्तक एक कहानी के माध्यम से निर्देशांक समझाती है। रेयान एक दृष्टिहीन बच्चा है जो नए शहर में आया है। उसकी बड़ी बहन शालिनी — जिसने कक्षा 9 में निर्देशांक ज्यामिति पढ़ी है — एक आयताकार ग्रिड पर पिन और धागे से कमरे का नक्शा बनाती है ताकि रेयान अपनी उंगलियों से स्थानों को महसूस कर सके। यह कहानी समावेशी शिक्षा (inclusive education) का सुंदर उदाहरण है।

1.3 द्विविमीय कार्तीय निर्देशांक तंत्र

दो परस्पर लंबवत् रेखाएं मिलकर कार्तीय तल (Cartesian Plane) बनाती हैं। क्षैतिज रेखा x-अक्ष और ऊर्ध्वाधर रेखा y-अक्ष कहलाती है। जहां दोनों मिलती हैं वह बिंदु मूल बिंदु O(0,0) है।

ये दोनों अक्ष तल को चार भागों में बांटते हैं जिन्हें चतुर्थांश (Quadrants) कहते हैं। प्रत्येक चतुर्थांश में निर्देशांकों के चिह्न इस प्रकार होते हैं — प्रथम में (+, +), द्वितीय में (−, +), तृतीय में (−, −) और चतुर्थ में (+, −)।

मुख्य परिभाषाएं: किसी बिंदु P(x, y) में x उसकी y-अक्ष से दूरी है और y उसकी x-अक्ष से दूरी है। x-अक्ष पर स्थित बिंदु का रूप (x, 0) होता है और y-अक्ष पर स्थित बिंदु का रूप (0, y) होता है।

अभ्यास 1.1 — सम्पूर्ण हल (Exercise Set 1.1)

आधार: Fig 1.3 में रेयान के कमरे के कोने O(0,0), A(12,0), B(12,10), C(0,10) हैं। D₁R₁ कमरे का दरवाजा है जहां R₁ = (11.5, 0) दिया है।

(i) दरवाजे की y-अक्ष और x-अक्ष से दूरी:
Fig 1.3 में D₁ x-अक्ष पर लगभग x = 10 पर स्थित है। अतः बायीं दीवार (y-अक्ष) से दूरी = 10 फुट। चूंकि दरवाजा x-अक्ष पर ही है, x-अक्ष से दूरी = 0

(ii) D₁ के निर्देशांक:
D₁ = (10, 0)

(iii) दरवाजे की चौड़ाई:
चौड़ाई = R₁ − D₁ = 11.5 − 10 = 1.5 फुट। यह एक सामान्य कमरे के दरवाजे के लिए पर्याप्त नहीं है (मानक चौड़ाई लगभग 3 फुट होती है)। व्हीलचेयर के लिए न्यूनतम 2.7 फुट की आवश्यकता होती है, अतः 1.5 फुट का यह दरवाजा व्हीलचेयर के लिए उपयुक्त नहीं है।

(iv) बाथरूम का दरवाजा संकरा है या चौड़ा?
बाथरूम दरवाजे की चौड़ाई = B₂ − B₁ = 4 − 1.5 = 2.5 फुट। कमरे के दरवाजे की चौड़ाई = 1.5 फुट। अतः बाथरूम का दरवाजा चौड़ा है।

अभ्यास 1.2 — सम्पूर्ण हल (Exercise Set 1.2)

प्रश्न 1: अध्ययन मेज के चारों पाए
तीन पाए (8,9), (11,9) और (11,7) पर हैं।

(i) चौथा पाया: आयताकार मेज में सम्मुख कोने समान x या y-निर्देशांक साझा करते हैं। (8,9) और (11,7) को जोड़ने वाला बिंदु (8,7) होगा। अतः चौथा पाया = (8, 7)

(ii) क्या यह उचित स्थान है? मेज कमरे के अंदर x = 8 से 11 और y = 7 से 9 के बीच है, जो दीवारों से दूर है। हां, यह उचित स्थान है।

(iii) चौड़ाई और लंबाई: चौड़ाई (x-दिशा) = 11 − 8 = 3 फुट। लंबाई (y-दिशा) = 9 − 7 = 2 फुट। ऊंचाई 2D नक्शे से ज्ञात नहीं हो सकती।

प्रश्न 2: बाथरूम का दरवाजा और अलमारी
दरवाजे का कब्जा B₁(0, 1.5) पर है, चौड़ाई 2.5 फुट। दरवाजा अंदर खुलने पर 2.5 फुट की त्रिज्या में घूमेगा अर्थात् x = 2.5 तक पहुंचेगा। अलमारी (Wardrobe) x = 3 से शुरू होती है। अतः दरवाजा अलमारी से नहीं टकराएगा — बस 0.5 फुट का अंतर रहेगा। यदि दरवाजा चौड़ा किया जाए तो अलमारी टकराने का खतरा होगा, इसलिए या तो दरवाजा बाहर की ओर खुलने वाला बनाएं या अलमारी को थोड़ा और दाईं ओर खिसकाएं।

प्रश्न 3: बाथरूम के कोनों के निर्देशांक
बाथरूम y-अक्ष के बाईं ओर है (ऋणात्मक x में)। 6 ft × 9 ft के अनुसार:

(i) कोने: O(0, 0), F(0, 9), R(−6, 9), P(−6, 0)

(ii) नहाने का क्षेत्र SHWR: यह बाथरूम के ऊपरी भाग में है। अनुमानित निर्देशांक: S(−6, 6), H(−6, 9), W(−3, 9), R(−3, 6) — यह 3ft × 3ft का आयताकार क्षेत्र है।

(iii) वाशबेसिन (3 ft × 2 ft) और शौचालय (2 ft × 3 ft) — विद्यार्थी स्वयं बाथरूम की शेष जगह में इन्हें रखकर निर्देशांक लिखें।

प्रश्न 4: अन्य कमरे
(i) डाइनिंग रूम 18 ft लंबा और 15 ft चौड़ा है। P(−6, 0) और A(12, 0) के बीच की दूरी = 18 ft ✓। कोने होंगे: P(−6, 0), A(12, 0), (12, −15), (−6, −15)

(ii) 5 ft × 3 ft डाइनिंग टेबल कमरे के केंद्र में। केंद्र = (−6+12)/2 = 3, (0+(−15))/2 = −7.5 → केंद्र (3, −7.5)। टेबल के पाए: (0.5, −6), (5.5, −6), (5.5, −9), (0.5, −9)

1.4 दो बिंदुओं के बीच की दूरी (Distance Formula)

यदि दो बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा किसी भी अक्ष के समानांतर नहीं है, तब हम बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करते हैं।

किन्हीं दो बिंदुओं (x₁, y₁) और (x₂, y₂) के बीच की दूरी का सूत्र: d = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]

उदाहरण: A(3,4) और D(7,1) के बीच दूरी = √[(7−3)² + (1−4)²] = √[16 + 9] = √25 = 5 इकाई। इसी प्रकार DM = √[2² + 5²] = √29 और MA = √[6² + 2²] = √40 इकाई।

ध्यान दें: यह सूत्र तब भी काम करता है जब निर्देशांक ऋणात्मक हों। परावर्तन (reflection) से भुजाओं की लंबाई अपरिवर्तित रहती है।

अध्याय-अंत अभ्यास — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: दोनों अक्षों के प्रतिच्छेद बिंदु (मूल बिंदु) के निर्देशांक क्या हैं?
उत्तर: x-निर्देशांक = 0, y-निर्देशांक = 0 अर्थात् O(0, 0)

प्रश्न 2: W का x-निर्देशांक −5 है। H, W से होकर y-अक्ष के समानांतर रेखा पर है। H के संभावित चतुर्थांश?
उत्तर: H = (−5, y) जहां y कोई भी मान ले सकता है। यदि y > 0 तो H द्वितीय चतुर्थांश में, यदि y < 0 तो तृतीय चतुर्थांश में होगा। यदि y = 0 तो H = W = (−5, 0) जो x-अक्ष पर है।

प्रश्न 3: R(3,0), A(0,−2), M(−5,−2), P(−5,2) — RAMP बनाएं।

(i) परस्पर लंब दो भुजाएं: AM: (0,−2) से (−5,−2) — यह क्षैतिज है। MP: (−5,−2) से (−5,2) — यह ऊर्ध्वाधर है। अतः AM ⊥ MP

(ii) अक्ष के समानांतर भुजा: AM (दोनों बिंदुओं का y = −2, अतः x-अक्ष के समानांतर) तथा MP (दोनों का x = −5, अतः y-अक्ष के समानांतर)।

(iii) दर्पण प्रतिबिंब: M(−5,−2) और P(−5,2) — दोनों का x समान है, y के चिह्न विपरीत हैं। ये x-अक्ष में एक-दूसरे के प्रतिबिंब हैं।

प्रश्न 4: Z(5,−6) पर आधारित समकोण त्रिभुज IZN।
उत्तर (एक संभावित हल): I(5, 0), Z(5, −6), N(0, 0) लें। IZ = 6, IN = 5, ZN = √(25+36) = √61 इकाई।

प्रश्न 5: बिना ऋणात्मक संख्याओं के निर्देशांक तंत्र कैसा होगा?
उत्तर: ऐसे तंत्र में केवल प्रथम चतुर्थांश ही संभव होगा। y-अक्ष के बाईं ओर और x-अक्ष के नीचे के बिंदुओं को locate करना असंभव होगा। अतः यह तंत्र 2-D तल के सभी बिंदुओं को locate करने में सक्षम नहीं होगा

★ चुनौती प्रश्न (उच्च स्तरीय)

★ प्रश्न 6: क्या M(−3,−4), A(0,0) और G(6,8) एक ही सरल रेखा पर हैं?
ढाल MA = (0−(−4))/(0−(−3)) = 4/3
ढाल AG = (8−0)/(6−0) = 8/6 = 4/3
दोनों ढाल समान हैं और बिंदु A उभयनिष्ठ है।
निष्कर्ष: हां, तीनों बिंदु एक ही सरल रेखा पर हैं।

★ प्रश्न 7: क्या R(−5,−1), B(−2,−5) और C(4,−12) संरेखी हैं?
ढाल RB = (−5−(−1))/(−2−(−5)) = −4/3
ढाल BC = (−12−(−5))/(4−(−2)) = −7/6
−4/3 ≠ −7/6
निष्कर्ष: नहीं, ये तीनों बिंदु संरेखी नहीं हैं।

★ प्रश्न 8: मूल बिंदु को एक शीर्ष मानकर त्रिभुज बनाएं।

(i) समकोण समद्विबाहु त्रिभुज: O(0,0), A(4,0), B(0,4). OA = OB = 4, कोण AOB = 90°।

(ii) समद्विबाहु त्रिभुज (एक शीर्ष Q III में, एक Q IV में): O(0,0), P(−3,−4), Q(3,−4). OP = √(9+16) = 5, OQ = √(9+16) = 5 ✓ समद्विबाहु।

★ प्रश्न 9: क्या M बिंदु ST का मध्यबिंदु है? मध्यबिंदु सूत्र: M = ((x_S+x_T)/2, (y_S+y_T)/2)

S M T क्या M मध्यबिंदु है? कारण
(−3, 0) (0, 0) (3, 0) हां (−3+3)/2=0, (0+0)/2=0 → (0,0) ✓
(2, 3) (3, 4) (4, 5) हां (2+4)/2=3, (3+5)/2=4 → (3,4) ✓
(0, 0) (0, 5) (0, −10) नहीं (0+0)/2=0, (0+(−10))/2=−5 → (0,−5) ≠ (0,5)
(−8, 7) (0, −2) (6, −3) नहीं (−8+6)/2=−1, (7+(−3))/2=2 → (−1,2) ≠ (0,−2)

संबंध: M का x-निर्देशांक = (S का x + T का x) ÷ 2 तथा M का y-निर्देशांक = (S का y + T का y) ÷ 2

★ प्रश्न 10: M(−7,1) बिंदु A(3,−4) और B(x,y) का मध्यबिंदु है। B ज्ञात करें।
(3+x)/2 = −7 → x = −17
(−4+y)/2 = 1 → y = 6
B = (−17, 6)

★ प्रश्न 11: A(4,7) और B(16,−2) के त्रिभाजन बिंदु P और Q।
P (AP:PB = 1:2): P = (4 + (1/3)(16−4), 7 + (1/3)(−2−7)) = (4+4, 7−3) = (8, 4)
Q (AQ:QB = 2:1): Q = (4 + (2/3)(12), 7 + (2/3)(−9)) = (4+8, 7−6) = (12, 1)

★ प्रश्न 12:

(i) A(1,−8): OA = √(1+64) = √65 | B(−4,7): OB = √(16+49) = √65 | C(−7,−4): OC = √(49+16) = √65
तीनों बिंदुओं की O से दूरी समान है। अतः वे केंद्र O, त्रिज्या √65 वाले वृत्त पर स्थित हैं।

(ii) D(−5,6): OD = √(25+36) = √61 < √65 → D वृत्त के अंदर है।
E(0,9): OE = 9. चूंकि 9² = 81 > 65, अतः 9 > √65 → E वृत्त के बाहर है।

★ प्रश्न 13: त्रिभुज ABC की भुजाओं के मध्यबिंदु D(5,1), E(6,5), F(0,3) हैं।
A+B = 2F = (0,6), A+C = 2E = (12,10), B+C = 2D = (10,2)
A+B+C = (11,9)
A = (11,9)−(10,2) = (1,7)
B = (11,9)−(12,10) = (−1,−1)
C = (11,9)−(0,6) = (11,3)
जांच: मध्यबिंदु(BC) = (5,1) = D ✓, मध्यबिंदु(AC) = (6,5) = E ✓, मध्यबिंदु(AB) = (0,3) = F ✓

प्रश्न 14: शहर की 10 सड़कें प्रत्येक दिशा में।
(a) चौराहा (4,3): उत्तर-दक्षिण की चौथी सड़क और पूर्व-पश्चिम की तीसरी सड़क — यह केवल 1 विशिष्ट चौराहा है।
(b) चौराहा (3,4): यह भी केवल 1 विशिष्ट चौराहा है। किंतु (4,3) और (3,4) दोनों अलग-अलग स्थान हैं।

प्रश्न 15: स्क्रीन 800×600 pixels। वृत्त A: केंद्र (100,150), त्रिज्या 80. वृत्त B: केंद्र (250,230), त्रिज्या 100.

(i) वृत्त A की सीमाएं: बाईं 20, दाईं 180, नीचे 70, ऊपर 230 — सभी स्क्रीन के भीतर। वृत्त B की सीमाएं: बाईं 150, दाईं 350, नीचे 130, ऊपर 330 — सभी भीतर। दोनों वृत्त स्क्रीन के भीतर हैं।

(ii) केंद्रों के बीच की दूरी = √[(250−100)² + (230−150)²] = √[22500+6400] = √28900 = 170 pixels। दोनों त्रिज्याओं का योग = 80+100 = 180. चूंकि 170 < 180, दोनों वृत्त एक-दूसरे को काटते हैं।

प्रश्न 16: A(2,1), B(−1,2), C(−2,−1), D(1,−2) — क्या ABCD एक वर्ग है?
AB = BC = CD = DA = √10 — सभी भुजाएं समान।
विकर्ण AC = BD = √20 — समान।
मध्यबिंदु AC = मध्यबिंदु BD = (0,0) — विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं।
ढाल AC = 1/2, ढाल BD = −2 → गुणनफल = −1 → परस्पर लंब।
निष्कर्ष: ABCD एक वर्ग है। क्षेत्रफल = (√10)² = 10 वर्ग इकाई।

अध्याय सारांश

इस अध्याय में हमने सीखा कि दो परस्पर लंबवत् अक्षों (x-अक्ष और y-अक्ष) से बनने वाला कार्तीय तल किसी भी बिंदु की स्थिति निर्धारित करने में सक्षम है। मूल बिंदु O(0,0) से चारों दिशाओं में फैले ये अक्ष तल को चार चतुर्थांशों में विभाजित करते हैं। किसी भी दो बिंदुओं के बीच की दूरी निकालने के लिए बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय पर आधारित दूरी सूत्र — d = √[(x₂−x₁)² + (y₂−y₁)²] — का उपयोग होता है। यह सूत्र ऋणात्मक निर्देशांकों के लिए भी समान रूप से लागू होता है।

Shakti Rao Mani Shakti Rao Mani शिक्षा नीति, सरकारी योजनाओं और उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा तंत्र पर विशेष रूप से लिखते हैं। Aapbiti के Education Unit से जुड़े हैं और अभिभावकों व छात्रों तक सटीक एवं उपयोगी जानकारी पहुँचाना उनकी प्राथमिकता है।