गणित मंजरी कक्षा 9 अध्याय 6 — परिमाप और क्षेत्रफल: वृत्त, π का इतिहास, हेरॉन और ब्रह्मगुप्त सूत्र
गणित मंजरी कक्षा 9 अध्याय 6 में वृत्त की परिधि, π का इतिहास, चाप की लंबाई, हेरॉन का सूत्र, ब्रह्मगुप्त सूत्र और त्रिभुज-बहुभुज के क्षेत्रफल की पूरी जानकारी — सरल हिंदी में हल सहित।
गणित मंजरी कक्षा 9 — अध्याय 6
स्थान का मापन: परिमाप और क्षेत्रफल
वृत्त की परिधि, π का इतिहास, चाप की लंबाई, त्रिभुज और बहुभुज का क्षेत्रफल, हेरॉन का सूत्र, ब्रह्मगुप्त का सूत्र
इस अध्याय को कैसे पढ़ें? यह अध्याय थोड़ा लंबा है लेकिन बहुत रोचक है। इसे एक बार पूरा पढ़ें, फिर हर Section का अभ्यास अलग-अलग करें। जो प्रश्न समझ न आए, उसे नीचे Comment में पूछें — हम जल्द जवाब देंगे।
6.1 परिचय — 4 × 100 मीटर रिले दौड़ और स्टैगर की पहेली
4 × 100 मीटर रिले दौड़ में आपने देखा होगा कि बाहरी लेन के धावक भीतरी लेन के धावकों से आगे खड़े होते हैं, जबकि फिनिश लाइन सबके लिए एक ही होती है। आसन्न लेनों के आरंभिक बिंदुओं के बीच की दूरी को 'स्टैगर' कहते हैं।
क्या यह स्टैगर किसी को अनुचित लाभ देता है? नहीं! क्योंकि बाहरी लेन की त्रिज्या बड़ी होने से उनका अर्धवृत्त अधिक लंबा होता है। स्टैगर इसी अंतर की भरपाई करता है। इस प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए हमें वृत्त की परिधि ज्ञात करनी होगी।
सोचें और विचार करें: मेरे विद्यालय में 400 मीटर की ट्रैक के लिए मैदान बहुत छोटा है, इसलिए विद्यालय ने 200 मीटर की ट्रैक बनाई है। क्या इसका मतलब है कि उसी 4 × 100 मीटर रिले दौड़ के लिए हमें ओलंपिक की तुलना में छोटे स्टैगर की आवश्यकता होगी?
6.1 आकृति का परिमाप
किसी भी आकृति का परिमाप उसकी सीमा के चारों ओर की कुल लंबाई है। एक छोटे कीड़े की कल्पना करें जो आकृति की सीमा पर चलता है — बिना पीछे मुड़े — जब तक वह अपने प्रारंभिक बिंदु पर वापस न आ जाए। वह जो कुल दूरी तय करता है, वही परिमाप है।
मूलभूत आकृतियों के परिमाप के सूत्र:
• वर्ग (भुजा = a): परिमाप = 4a इकाई
• समबाहु त्रिभुज (भुजा = a): परिमाप = 3a इकाई
• आयत (लंबाई = a, चौड़ाई = b): परिमाप = 2(a + b) इकाई
• वृत्त (त्रिज्या = r): परिमाप (परिधि) = ? — यही इस अध्याय की मुख्य खोज है!
एक महत्वपूर्ण पैटर्न: यदि वर्ग की भुजा दोगुनी हो जाए तो परिमाप भी दोगुना हो जाता है। परिमाप और भुजा का अनुपात 4:1 सभी वर्गों के लिए स्थिर रहता है। इसी प्रकार समबाहु त्रिभुजों के लिए यह अनुपात 3:1 है। वृत्त के लिए — परिधि (C) और व्यास (D) का अनुपात क्या है?
6.2 वृत्त का परिमाप — C/D अनुपात और π का इतिहास
प्राचीन काल से मनुष्यों ने यह जाना कि वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात वृत्त के आकार पर निर्भर नहीं करता — यह सदा एक ही स्थिरांक रहता है। इसे हम C/D अनुपात कहते हैं और आज इसे π (pi) के नाम से जानते हैं।
घरेलू माप प्रयोग करके देखें: एक धागे की रील लें। रील का व्यास D जितना सटीक हो सके मापें। धागे को रील के चारों ओर 20 बार लपेटें, फिर खोलकर उसकी लंबाई L मापें। L/(20D) की गणना करें। यही C/D अनुपात है। क्या आपको 3 और 4 के बीच का परिणाम मिला? 3.1 और 3.2 के बीच?
π की रोमांचक यात्रा — प्राचीन काल से माधव तक
मेसोपोटामिया (लगभग 1900 ईसा पूर्व): उन्होंने जाना कि वृत्त की परिधि उसमें अंकित षट्भुज से थोड़ी बड़ी होती है। उन्होंने π = 3 + 1/8 = 3.125 लिया।
आर्किमिडीज (250 ईसा पूर्व): उन्होंने वृत्त में अंकित और परिगत बहुभुजों का उपयोग करके π को 'फँसाया'। 96 भुजाओं वाले बहुभुज तक जाकर उन्होंने सिद्ध किया: 3(10/71) < π < 3(1/7)
टॉलेमी (150 ईस्वी): π ≈ 377/120 ≈ 3.14167
लियू हुई और झू चोंगज़ी (263–480 ईस्वी): 24,576 भुजाओं वाले बहुभुज तक पहुँचकर झू ने दो मान दिए — युएलू (अनुमानित): 22/7 ≈ 3.1428 और मियू (निकट अनुपात): 355/113 ≈ 3.1415929। यह मान 800 वर्षों तक सबसे सटीक रहा!
आर्यभट (499 ईस्वी): π ≈ 62832/20000 = 3.1416। उन्होंने इसे 'आसन्न' (approaching/approximate) कहा — एक गहन अंतर्दृष्टि कि π को एक साधारण भिन्न के रूप में ठीक-ठीक नहीं दिया जा सकता।
ब्रह्मगुप्त (628 ईस्वी): π ≈ √10 ≈ 3.1622। थोड़ा कम सटीक, लेकिन समीकरणों में प्रयोग की सुगमता के लिए चुना।
माधव (संगमग्राम, लगभग 1400 ईस्वी): उन्होंने π का पहला सटीक सूत्र खोजा — एक अनंत श्रेणी के रूप में:
π/4 = 1 – 1/3 + 1/5 – 1/7 + …
इस सूत्र ने गणित में क्रांति ला दी। उन्होंने π को 11 दशमलव स्थानों तक (3.14159265358) ज्ञात किया।
π का नाम और चिह्न: 1706 में वेल्श गणितज्ञ विलियम जोन्स ने ग्रीक शब्द perimetros (परिमाप) के प्रथम अक्षर π का उपयोग C/D अनुपात के लिए किया। स्विस-जर्मन गणितज्ञ लियोनार्ड ऑयलर ने इसे लोकप्रिय बनाया।
मजेदार तथ्य — π याद करने का तरीका: "How I wish I could recollect pi."
प्रत्येक शब्द के अक्षरों की संख्या गिनें: 3, 1, 4, 1, 5, 9, 2 — यही π के प्रथम अंक हैं!
6.3 π अपरिमेय है
π के अंक अनंत तक चलते हैं और उनमें कोई दृश्यमान पैटर्न नहीं है। हम जानते हैं कि परिमेय संख्याएं आवर्ती दशमलव देती हैं: 1/3 = 0.33333…, 1/11 = 0.09090909…, 1/7 = 0.142857 142857…
लेकिन π के लिए ऐसा कोई पैटर्न नहीं है! π को दो पूर्णांकों के अनुपात के रूप में नहीं लिखा जा सकता। ऐसी संख्याएं अपरिमेय (irrational) कहलाती हैं।
- आर्यभट और झू चोंगज़ी ने अपने लेखन में संकेत दिया था कि π अपरिमेय है।
- 1761 में गणितज्ञ लैम्बर्ट ने इसे सिद्ध किया।
- 22/7 अधिकांश व्यावहारिक उपयोगों के लिए पर्याप्त है, परंतु π ≠ 22/7।
- बहुत बेहतर सन्निकटन: 355/113।
- π ≈ 3.14 होने से 14 मार्च को Pi Day और 22 जुलाई को Pi Approximation Day मनाया जाता है।
6.4 वृत्त के चाप की लंबाई
त्रिज्या r के वृत्त की परिधि = 2πr (या πd, जहाँ d = व्यास)।
अर्धवृत्त की लंबाई: 2πr ÷ 2 = πr
चतुर्थांश की लंबाई: 2πr ÷ 4 = πr/2
सामान्य सूत्र: यदि चाप AB केंद्र O पर θ° कोण अंतरित करे, तो चाप की लंबाई = 2πr × (θ°/360°)
400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक का विश्लेषण
400 मीटर ट्रैक की संरचना:
• दो सीधे खंड: प्रत्येक 84.39 मीटर लंबे (कुल = 168.78 मीटर)
• दो अर्धवृत्ताकार मोड़: अंदरूनी त्रिज्या 36.5 मीटर; प्रत्येक लेन 1.22 मीटर चौड़ी
पहली लेन का धावक (भीतरी सीमा से 0.3 मीटर पर दौड़ता है):
— दो अर्धवृत्त की त्रिज्या = 36.5 + 0.3 = 36.8 मीटर
— दो अर्धवृत्त मिलाकर पूरे वृत्त की परिधि = 2 × π × 36.8 = 2 × 3.1416 × 36.8 ≈ 231.22 मीटर
— कुल दूरी = 168.78 + 231.22 = 400 मीटर ✓
स्टैगर: सीधे खंडों पर दोनों लेनों की दूरी बराबर है, लेकिन मोड़ पर दूसरी लेन की त्रिज्या बड़ी है। इस अतिरिक्त दूरी की भरपाई के लिए स्टैगर दिया जाता है।
सोचें और विचार करें: पहली और दूसरी लेन की त्रिज्याओं में क्या अंतर है? दूसरी लेन के धावक के लिए आवश्यक स्टैगर ज्ञात करें। क्या तीसरी और दूसरी लेन के बीच भी बराबर स्टैगर चाहिए?
6.5 परिमाप पर समस्याएं, पहेलियाँ और विरोधाभास
उदाहरण 1: दो बराबर त्रिज्या वाले वृत्त इस प्रकार हैं कि प्रत्येक वृत्त दूसरे के केंद्र से होकर गुजरता है। त्रिज्या = r। दोनों वृत्तों से बनी आकृति का परिमाप ज्ञात करें।
हल: माना वृत्त A और B के केंद्र हैं; वे C और D पर मिलते हैं।
त्रिभुज ABC में AB = AC = BC = r → समबाहु त्रिभुज → ∠CAB = 60°
अतः ∠CAD = 120° (चाप जो दिखाई नहीं देता, वह 1/3 परिधि है)
दृश्यमान प्रत्येक चाप = 2/3 × 2πr = 4πr/3
दोनों चापों की कुल लंबाई = 2 × (4πr/3) = 8πr/3
उदाहरण 2 (एक रोचक विरोधाभास): P और Q को जोड़ने वाले दो पथ हैं — पथ 'a' (एक अर्धवृत्त) और पथ 'b+c+d' (तीन छोटे अर्धवृत्त)। कौन सा पथ लंबा है?
हल: PQ = 2a' = 2b' + 2c' + 2d' → a' = b' + c' + d'
पथ a की लंबाई = πa'; पथ b+c+d की लंबाई = π(b' + c' + d')
अतः दोनों पथों की लंबाई बराबर है! — यह आश्चर्यजनक है।
अभ्यास सेट 6.1
नोट: जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = 22/7 का उपयोग करें।
प्र. 1: वृत्त की परिधि 44 सेमी है। त्रिज्या = ?
2πr = 44 → r = 44/(2 × 22/7) = 44 × 7/44 = 7 सेमी
प्र. 2: परिधि (3 सार्थक अंक तक):
(i) r = 7 सेमी: C = 2 × 22/7 × 7 = 44.0 सेमी
(ii) r = 10 सेमी: C = 2 × 22/7 × 10 = 440/7 ≈ 62.9 सेमी
(iii) r = 12 सेमी: C = 2 × 22/7 × 12 = 528/7 ≈ 75.4 सेमी
प्र. 3: चाप की लंबाई:
(i) r = 3.5 सेमी, θ = 60°: l = 2 × 22/7 × 3.5 × 60/360 = 11/3 ≈ 3.67 सेमी
(ii) r = 6.3 मीटर, θ = 120°: l = 2 × 22/7 × 6.3 × 120/360 = 13.2 मीटर
प्र. 4: r = 14 सेमी, θ = 75° का त्रिज्यखंड का परिमाप:
चाप = 2 × 22/7 × 14 × 75/360 = 55/3 ≈ 18.33 सेमी
परिमाप = चाप + 2r = 55/3 + 28 = 139/3 ≈ 46.3 सेमी
प्र. 5: विभिन्न आकृतियों के परिमाप:
(i) 60 × 80 आयत और अर्धवृत्त: परिमाप = 80 + 60 + 60 + π×40 ≈ 325.7 मीटर
(iii) 10 सेमी व्यास का पूर्ण वृत्त: C = π × 10 = 220/7 ≈ 31.4 सेमी
(v) 14 सेमी वाला आकार: 56 सेमी
प्र. 6: कार टायर व्यास = 56 सेमी
(i) एक चक्कर = परिधि = 22/7 × 56 = 176 सेमी
(ii) 10 किमी = 1000000 सेमी में चक्कर = 1000000/176 ≈ 5682 चक्कर
प्र. 8: दो वृत्तों के परिमाप का अनुपात 5:4 → त्रिज्याओं का अनुपात = 5:4
6.6 आयत का क्षेत्रफल
क्षेत्रफल किसी द्विविमीय क्षेत्र द्वारा घेरे गए 'स्थान की मात्रा' है। इकाई 1×1 वर्ग है जिसका क्षेत्रफल 1 वर्ग इकाई है।
वर्ग (भुजा a): क्षेत्रफल = a² वर्ग इकाई
आयत (a × b): क्षेत्रफल = ab वर्ग इकाई
6.7 समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल
समांतर चतुर्भुज ABCD को एक आयत में रूपांतरित किया जा सकता है जिसका आधार और ऊँचाई समान हो।
समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई = bh
सोचें और विचार करें — 'पतले' समांतर चतुर्भुज की समस्या: यदि समांतर चतुर्भुज 'पतला' हो और C से AD पर लंबपाद AD पर ही न पड़े तो क्या करें?
हल: D के पास D' और A के विस्तार पर A' चुनें (A'A = D'D)। A'BCD' भी एक समांतर चतुर्भुज है और ΔCDD' ≅ ΔBAA' होने से इसका क्षेत्रफल ABCD के बराबर है। इस चरण को आवश्यकतानुसार दोहराएं।
महत्वपूर्ण: यदि केवल भुजाओं की लंबाई पता हो तो क्या समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात किया जा सकता है? नहीं! ऊँचाई जानना आवश्यक है, जो आसन्न भुजाओं के बीच के कोण पर निर्भर करती है।
6.8 त्रिभुज का क्षेत्रफल
विधि 1 — आयत में रखकर: त्रिभुज को एक आयत में रखें (जिसका आधार b और ऊँचाई h है)। त्रिभुज उस आयत के ठीक आधे भाग को घेरता है।
त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½bh
विधि 2 — दो सर्वांगसम त्रिभुजों से: त्रिभुज ABC और उसकी समान प्रतिलिपि A'B'C' को मिलाने पर एक समांतर चतुर्भुज बनता है। समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = bh → त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½bh
त्रिभुज की मध्यिका का गुण — एक सुंदर प्रमेय
प्रमेय: त्रिभुज की मध्यिका उसे दो समान क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभाजित करती है।
प्रमाण: ΔABD और ΔACD के आधार BD = DC (बराबर) हैं और दोनों की ऊँचाई h बराबर है।
∴ क्षेत्रफल(ΔABD) = ½ × BD × h = ½ah
क्षेत्रफल(ΔACD) = ½ × DC × h = ½ah
अतः दोनों का क्षेत्रफल बराबर है! यह आश्चर्यजनक है क्योंकि ΔABD और ΔACD (सामान्यतः) सर्वांगसम नहीं होते, फिर भी उनके क्षेत्रफल बराबर हैं।
सोचें और विचार करें:
1. चूँकि ΔABD और ΔACD के क्षेत्रफल बराबर हैं — क्या हम ΔABD को सीधे कटों से टुकड़ों में काटकर ΔACD को ढक सकते हैं? कितने टुकड़े न्यूनतम आवश्यक होंगे?
2. यदि दो बहुभुज P और Q के क्षेत्रफल बराबर हों — क्या एक को काटकर हमेशा दूसरे को ढका जा सकता है?
3. परिमाप 40 इकाई वाले विभिन्न आयतों में से कौन सा सबसे बड़ा और सबसे छोटा क्षेत्रफल रखता है?
6.8.1 हेरॉन का सूत्र — भुजाओं से क्षेत्रफल
त्रिभुज का क्षेत्रफल केवल उसकी भुजाओं से भी ज्ञात किया जा सकता है! यह सूत्र ग्रीक गणितज्ञ और आविष्कारक हेरॉन (Heron) ने खोजा था, जो अलेक्जेंड्रिया के संग्रहालय में पढ़ाते थे।
हेरॉन का सूत्र:
यदि ΔABC की भुजाएं BC = a, CA = b, AB = c हों और अर्धपरिमाप s = ½(a + b + c) हो, तो:
क्षेत्रफल = √[s(s–a)(s–b)(s–c)]
उदाहरण 3: समबाहु त्रिभुज (भुजा a)।
s = 3a/2, s–a = a/2 (तीनों के लिए)
क्षेत्रफल = √[(3a/2)(a/2)(a/2)(a/2)] = √(3a⁴/16) = (√3/4)a²
जाँच: ½ × a × (√3/2)a = (√3/4)a² ✓
उदाहरण 4: समद्विबाहु त्रिभुज (बराबर भुजाएं = a, आधार = 2b)।
s = a + b
क्षेत्रफल = √[(a+b)(b)(b)(a–b)] = b√(a²–b²)
जाँच: ½ × 2b × √(a²–b²) = b√(a²–b²) ✓
उदाहरण 5: त्रिभुज जिसकी भुजाएं 3, 4, 5 इकाई हैं।
s = ½(3+4+5) = 6
क्षेत्रफल = √[6×3×2×1] = √36 = 6 वर्ग इकाई
जाँच: 3² + 4² = 5² ∴ समकोण त्रिभुज → क्षेत्रफल = ½ × 3 × 4 = 6 ✓
त्रिभुज के क्षेत्रफल के दो और सूत्र
ΔABC में भुजाएं a, b, c; परिवृत्त त्रिज्या R; अंतर्वृत्त त्रिज्या r:
परिवृत्त से: क्षेत्रफल(ΔABC) = abc / (4R)
अंतर्वृत्त से: क्षेत्रफल(ΔABC) = r(a+b+c) / 2
चक्रीय चतुर्भुज के क्षेत्रफल का ब्रह्मगुप्त सूत्र (628 ईस्वी)
क्या किसी चतुर्भुज का क्षेत्रफल केवल उसकी चारों भुजाओं से ज्ञात किया जा सकता है? नहीं — क्योंकि एक ही भुजाओं वाले चतुर्भुज के भिन्न-भिन्न क्षेत्रफल हो सकते हैं।
लेकिन यदि चतुर्भुज चक्रीय हो (एक वृत्त पर स्थित) तो 628 ईस्वी में ब्रह्मगुप्त ने एक अद्भुत सूत्र खोजा:
ब्रह्मगुप्त का सूत्र:
चक्रीय चतुर्भुज (भुजाएं a, b, c, d) के लिए:
s = ½(a+b+c+d)
क्षेत्रफल = √[(s–a)(s–b)(s–c)(s–d)]
उदाहरण 6: आयत (a × b) के लिए जाँच (सभी आयत चक्रीय होते हैं)।
s = a + b
क्षेत्रफल = √[(b)(a)(b)(a)] = √(a²b²) = ab ✓
उदाहरण 7: समद्विबाहु समलंब: समांतर भुजाएं 2a और 2b; बराबर तिरछी भुजाएं c।
s = a + b + c
क्षेत्रफल = (a+b)√[c² – (b–a)²] — यह (½)(2a+2b)×ऊँचाई के समान है ✓
ब्रह्मगुप्त का सूत्र — हेरॉन के सूत्र का सामान्यीकरण:
यदि चतुर्भुज ABCD में d = 0 हो तो A और D मिल जाते हैं और यह त्रिभुज बन जाता है।
s = ½(a+b+c+0) = ½(a+b+c) — यही त्रिभुज का अर्धपरिमाप है।
ब्रह्मगुप्त का सूत्र: √[(s–a)(s–b)(s–c)(s–0)] = √[s(s–a)(s–b)(s–c)]
यही हेरॉन का सूत्र है!
अतः हेरॉन का सूत्र, ब्रह्मगुप्त के सूत्र का एक विशेष स्थिति है।
अभ्यास सेट 6.2
प्र. 1: त्रिभुज ADE का क्षेत्रफल (ABCD = 10 × 8 = 80 वर्ग सेमी; E, BC का मध्यबिंदु है।)
क्षेत्रफल(ADE) = ½ × क्षेत्रफल(ABCD) = 40 वर्ग सेमी
प्र. 2: समलंब: समांतर भुजाएं 40 और 20 सेमी, बराबर तिरछी भुजाएं 26 सेमी।
ऊँचाई h: h² = 26² – 10² = 676 – 100 = 576 ∴ h = 24 सेमी
क्षेत्रफल = ½ × (40+20) × 24 = ½ × 60 × 24 = 720 वर्ग सेमी
प्र. 3: भुजाएं 8, 11 सेमी; परिमाप 32 → तीसरी भुजा = 32–8–11 = 13 सेमी
s = 16; क्षेत्रफल = √[16×8×5×3] = √1920 = 8√30 ≈ 43.8 वर्ग सेमी
प्र. 4: भुजाएं 3k, 5k, 7k; 3k+5k+7k = 300 → k = 20 → भुजाएं 60, 100, 140 मीटर
s = 150; क्षेत्रफल = √[150×90×50×10] = √67500000 = 1500√30 ≈ 8215 वर्ग मीटर
प्र. 5: एक विकर्ण दूसरे का दोगुना: d₁ = 2d₂; क्षेत्रफल = ½ × d₁ × d₂ = d₂² = 128
d₂ = 8√2 ≈ 11.3 सेमी
प्र. 6: ABCD समांतर चतुर्भुज; P, Q भुजा AB पर कोई भी दो बिंदु। ΔPCD और ΔQCD दोनों का आधार CD और ऊँचाई समान है।
∴ क्षेत्रफल(ΔPCD) : क्षेत्रफल(ΔQCD) = 1 : 1
प्र. 7: O समांतर चतुर्भुज PQRS के विकर्ण PR पर कोई बिंदु। माध्यिका प्रमेय से दोनों क्षेत्रफल बराबर सिद्ध होते हैं।
6.9 आयत का वर्गीकरण — बौधायन की विधि (800 ईसा पूर्व)
प्राचीन काल में 'किसी आकृति का वर्गीकरण' का अर्थ था — उसके क्षेत्रफल के बराबर क्षेत्रफल वाला एक वर्ग बनाना। बौधायन ने अपने शुल्बसूत्र (800 ईसा पूर्व) में a × b भुजाओं वाले आयत का वर्गीकरण करने की विधि बताई है।
बौधायन की रचना विधि (आयत ABCD; AD = a, AB = b, a > b):
चरण 1: AD पर E चुनें जहाँ AE = AB = b
चरण 2: ED का मध्यबिंदु F ज्ञात करें
चरण 3: AF भुजा का वर्ग AFGH खींचें (H, AB के विस्तार पर)
चरण 4: H से चाप AG खींचें; यह BC को K पर काटे
चरण 5: K से AH के समानांतर रेखा खींचें जो GH को P पर काटे
परिणाम: HP भुजा का वर्ग HPQS, आयत ABCD के क्षेत्रफल के बराबर है।
यह क्यों काम करता है?
AF = (AE + AD)/2 = (a+b)/2 → HG = HK = (a+b)/2
BH = AF – AB = (a+b)/2 – b = (a–b)/2
HP² = HK² – BH² = [(a+b)/2]² – [(a–b)/2]² = 4ab/4 = ab
अतः वर्ग HPQS का क्षेत्रफल = ab = आयत ABCD का क्षेत्रफल ✓
यह सूत्र [(a+b)/2]² – [(a–b)/2]² = ab का ज्यामितीय रूपांतरण है।
6.10 वृत्त का क्षेत्रफल
प्राचीन समाजों ने जाना कि वृत्त का क्षेत्रफल A, उसकी परिधि C के वर्ग के समानुपाती है।
वर्ग (भुजा a): P = 4a, A = a² → P² : A = 16 : 1 (सभी वर्गों के लिए समान)
बेबीलोनियन (1500 ईसा पूर्व से पहले): C² : A ≈ 12 → A ≈ C²/12
प्राचीन मिस्री (1500 ईसा पूर्व): A ≈ (8d/9)² = (256/81)r² — बहुत सटीक!
250 ईसा पूर्व में आर्किमिडीज ने सिद्ध किया कि स्थिरांक ठीक π है:
वृत्त का क्षेत्रफल = ½ × परिधि × त्रिज्या = ½ × 2πr × r = πr²
नीलकंठ सोमयाजी (लगभग 1500 ईस्वी) ने आर्यभटीय की टीका में इसकी सबसे दृश्यात्मक व्याख्या दी: वृत्त को पतली-पतली फाँकों में काटकर उन्हें एक समांतर चतुर्भुज जैसी आकृति में सजाएं।
• आधार = आधी परिधि = πr
• ऊँचाई = त्रिज्या = r
वृत्त का क्षेत्रफल = πr × r = πr²
6.10.1 वृत्त के त्रिज्यखंड (Sector) का क्षेत्रफल
त्रिज्यखंड वह क्षेत्र है जो एक चाप और उसके दोनों अंतिम बिंदुओं को मिलाने वाली दो त्रिज्याओं से घिरा हो।
अर्धवृत्त का क्षेत्रफल: = (180/360) × πr² = ½πr²
चतुर्थांश का क्षेत्रफल: = (90/360) × πr² = ¼πr²
सामान्य त्रिज्यखंड (θ° कोण): त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = πr² × (θ°/360°)
वृत्त-खंड (Segment) का क्षेत्रफल: = त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल – त्रिभुज का क्षेत्रफल
अभ्यास सेट 6.3
प्र. 1: r = 7 सेमी, θ = 60°
क्षेत्रफल = 22/7 × 7² × 60/360 = 22 × 7 × 1/6 = 154/6 = 77/3 ≈ 25.67 वर्ग सेमी
प्र. 2: परिधि = 44 सेमी → r = 7 सेमी; चतुर्थांश = ¼ × 22/7 × 49 = 38.5 वर्ग सेमी
प्र. 3: मिनट की सुई = 7 सेमी; 10 मिनट में = 60° कोण
क्षेत्रफल = 22/7 × 49 × 60/360 = 77/3 ≈ 25.67 वर्ग सेमी
प्र. 4: r = 10 सेमी; π = 3.14
(i) लघु त्रिज्यखंड (90°): 3.14 × 100 × 90/360 = 78.5 वर्ग सेमी
(ii) बृहत् त्रिज्यखंड (270°): 3.14 × 100 × 270/360 = 235.5 वर्ग सेमी
प्र. 5: r = 15 सेमी, θ = 60°; π = 3.14, √3 ≈ 1.73
त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = 3.14 × 225 × 60/360 = 117.75 वर्ग सेमी
त्रिभुज का क्षेत्रफल (समबाहु, भुजा 15 सेमी) = (√3/4) × 225 ≈ 97.31 वर्ग सेमी
लघु वृत्त-खंड = 117.75 – 97.31 = 20.44 वर्ग सेमी
बृहत् वृत्त-खंड = 706.5 – 20.44 = 686.06 वर्ग सेमी
प्र. 6: प्रत्येक वाइपर: l = 28 सेमी, θ = 120°
एक वाइपर का क्षेत्रफल = 22/7 × 784 × 120/360 = 2464/3 वर्ग सेमी
दो वाइपर = 4928/3 ≈ 1642.67 वर्ग सेमी
अध्याय के अंत के प्रश्न (चुनिंदा)
प्र. 1: बीजगणितीय सर्वसमिकाओं का क्षेत्रफल मॉडल
(a + b)² = a² + 2ab + b² — यह एक (a+b) भुजा के वर्ग को 4 भागों में विभाजित करके दिखाया जाता है।
(a+b)(a–b) = a²–b²: a भुजा के वर्ग में से b भुजा का वर्ग हटाएं → L-आकार बने। उसे पुनर्व्यवस्थित करें → (a+b) × (a–b) आयत बनती है।
(a+b+c)² = a²+b²+c²+2ab+2bc+2ca: (a+b+c) भुजा के वर्ग को 9 भागों में बांटें — 3 वर्ग (a², b², c²) और 6 आयत (ab, bc, ca प्रत्येक दो बार)।
प्र. 2: समद्विबाहु त्रिभुज (परिमाप 40 सेमी, बराबर भुजाएं 15 सेमी)।
तीसरी भुजा = 40–30 = 10 सेमी; s = 20
क्षेत्रफल = √[20×5×5×10] = √5000 = 50√2 ≈ 70.7 वर्ग सेमी
प्र. 3: समद्विबाहु त्रिभुज (आधार 10 सेमी, क्षेत्रफल 60 वर्ग सेमी)।
½ × 10 × h = 60 → h = 12 सेमी
बराबर भुजा = √(12² + 5²) = √169 = 13 सेमी
प्र. 4: समकोण त्रिभुज (क्षेत्रफल 54 वर्ग सेमी, एक भुजा 12 सेमी)।
½ × 12 × दूसरी भुजा = 54 → दूसरी भुजा = 9 सेमी
कर्ण = √(12² + 9²) = √225 = 15 सेमी
परिमाप = 12 + 9 + 15 = 36 सेमी
प्र. 5: भुजाएं 2k, 3k, 4k; 9k = 45 → k = 5 → भुजाएं 10, 15, 20 सेमी
s = 22.5; क्षेत्रफल ≈ 72.6 वर्ग सेमी
प्र. 6: भुजाएं 7, 24, 25 सेमी
विधि 1: 7²+24² = 625 = 25² → समकोण त्रिभुज → क्षेत्रफल = ½×7×24 = 84 वर्ग सेमी
विधि 2: s = 28; √[28×21×4×3] = √7056 = 84 वर्ग सेमी ✓
प्र. 7: व्यास = 60 सेमी → r = 30 सेमी
100 चक्करों में = 100 × 2 × 22/7 × 30 = 132000/7 ≈ 188.57 मीटर
प्र. 8: परिधि 66 सेमी → r = 10.5 सेमी
चतुर्थांश = ¼ × 22/7 × 10.5² = 86.625 वर्ग सेमी
प्र. 9: r = 28 सेमी
एक पूर्ण चक्कर = 2 × 22/7 × 28 = 176 सेमी
1 किमी = 100000 सेमी में चक्कर = 100000/176 ≈ 568 बार
प्र. 14: पतंग (Kite) का क्षेत्रफल
पतंग ABCD में AC ⊥ BD। माना AC = d₁, BD = d₂।
पतंग = 4 समकोण त्रिभुजों का योग = 4 × ½ × (d₁/2) × (d₂/2) = ½d₁d₂
ज्यामितीय विधि: पतंग को d₁ × d₂ आयत में रखें — पतंग उस आयत का ठीक आधा भाग घेरती है।
∴ पतंग का क्षेत्रफल = ½ × d₁ × d₂
*प्र. 23 (उन्नत): दो संकेंद्रित वृत्त और हरा क्षेत्र
बड़े वृत्त की जीवा BC = l छोटे वृत्त को A पर स्पर्श करती है।
माना बड़े वृत्त की त्रिज्या R, छोटे की r (OA ⊥ BC)।
r² + l²/4 = R²
हरे क्षेत्र का क्षेत्रफल = πR² – πr² = π(R²–r²) = πl²/4
अध्याय सारांश
- परिमाप: किसी आकृति की सीमा की कुल लंबाई। वर्ग = 4a; आयत = 2(a+b); वृत्त (परिधि) = 2πr।
- π: वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात — एक अपरिमेय स्थिरांक। π ≈ 22/7 ≈ 3.14। माधव का सटीक सूत्र: π/4 = 1 – 1/3 + 1/5 – 1/7 + …
- चाप की लंबाई: l = 2πr × (θ°/360°) जहाँ θ केंद्रीय कोण है।
- त्रिभुज का क्षेत्रफल: A = ½bh; त्रिभुज की मध्यिका उसे दो समान क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में बाँटती है।
- हेरॉन का सूत्र: A = √[s(s–a)(s–b)(s–c)], जहाँ s = ½(a+b+c)।
- वृत्त का क्षेत्रफल: A = πr²। त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = πr² × (θ°/360°)।
- ब्रह्मगुप्त का सूत्र: चक्रीय चतुर्भुज (भुजाएं a, b, c, d): A = √[(s–a)(s–b)(s–c)(s–d)] जहाँ s = ½(a+b+c+d)। यह हेरॉन के सूत्र का सामान्यीकरण है।
- समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल: आधार × ऊँचाई (केवल भुजाओं से नहीं ज्ञात होता)।
- बौधायन की विधि: आयत का वर्गीकरण — सूत्र [(a+b)/2]² – [(a–b)/2]² = ab पर आधारित।
π के ऐतिहासिक मान — एक दृष्टि में:
मेसोपोटामिया: π = 3.125 | आर्किमिडीज (250 ईसा पूर्व): 3(10/71) < π < 3(1/7) | झू चोंगज़ी (480 ईस्वी): π ≈ 355/113 | आर्यभट (499 ईस्वी): π ≈ 3.1416 | माधव (लगभग 1400 ईस्वी): π/4 = 1–1/3+1/5–1/7+… | आज: π = 3.14159265358979… (100 ट्रिलियन से अधिक अंक ज्ञात)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: हेरॉन का सूत्र कब उपयोग करें और ½bh कब?
उत्तर: जब ऊँचाई (h) दी हुई हो तो ½bh आसान है। जब केवल तीनों भुजाएं दी हों और ऊँचाई पता न हो, तब हेरॉन का सूत्र उपयोग करें। परीक्षा में अधिकतर जब 'तीन भुजाओं से क्षेत्रफल' पूछा जाए तो हेरॉन का सूत्र ही सही तरीका है।
प्रश्न 2: π = 22/7 और π = 3.14 में से कौन सा उपयोग करें?
उत्तर: जब प्रश्न में त्रिज्या 7 के गुणज (7, 14, 21, 28…) में हो तो 22/7 आसान रहता है। जब दशमलव में उत्तर चाहिए या π = 3.14 दिया हो तो 3.14 उपयोग करें। प्रश्न में जो दिया हो वही उपयोग करें।
प्रश्न 3: वृत्त-खंड (Segment) और त्रिज्यखंड (Sector) में क्या अंतर है?
उत्तर: त्रिज्यखंड = चाप + दो त्रिज्याएं (पिज्जा के टुकड़े जैसा)। वृत्त-खंड = चाप + जीवा (चाँद के टुकड़े जैसा)। वृत्त-खंड का क्षेत्रफल = त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल — संबंधित त्रिभुज का क्षेत्रफल।
प्रश्न 4: ब्रह्मगुप्त का सूत्र हेरॉन का सामान्यीकरण कैसे है?
उत्तर: ब्रह्मगुप्त के सूत्र में d = 0 रखने पर चतुर्भुज, त्रिभुज बन जाता है और सूत्र स्वयं हेरॉन के सूत्र में बदल जाता है। गणित में जब कोई बड़ा सूत्र एक विशेष स्थिति में छोटे सूत्र को देता है, तो उसे सामान्यीकरण (Generalization) कहते हैं।
प्रश्न 5: समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल केवल भुजाओं से क्यों नहीं निकलता?
उत्तर: एक ही भुजाओं वाले समांतर चतुर्भुज को 'दबाकर' पतला बनाया जा सकता है — तब भुजाएं वही रहती हैं लेकिन ऊँचाई घट जाती है। इसलिए क्षेत्रफल के लिए ऊँचाई या कोण जानना अनिवार्य है।
प्रश्न 6: स्टैगर का मतलब क्या है और यह बराबर क्यों नहीं होता?
उत्तर: स्टैगर वह अतिरिक्त दूरी है जो बाहरी लेन के धावक को अपनी बड़ी त्रिज्या के कारण अधिक दौड़नी पड़ती — इसकी भरपाई के लिए उसे आगे खड़ा किया जाता है। हर लेन की त्रिज्या में 1.22 मीटर का अंतर होने से हर लेन के बीच स्टैगर = 2π × 1.22 ≈ 7.67 मीटर होता है — यह सभी लेनों के बीच बराबर होता है।
कोई प्रश्न समझ नहीं आया? इस अध्याय में कोई भी Step समझ न आई हो — चाहे हेरॉन का सूत्र हो, π का प्रमाण हो या कोई अभ्यास प्रश्न — नीचे Comment Box में लिखें। हम जल्द से जल्द सरल भाषा में जवाब देंगे। Aapbiti पर आपके हर सवाल का जवाब मिलेगा।