NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 4 – हमारे चारों ओर गति | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या

NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 4 की पूरी हिंदी व्याख्या — दूरी, विस्थापन, औसत वेग, त्वरण, स्थिति-समय ग्राफ, वेग-समय ग्राफ, गतिकी समीकरण और एकसमान वृत्तीय गति — सब कुछ एक ही जगह।

May 15, 2026 - 14:31
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NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 4 – हमारे चारों ओर गति | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या
NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 4 – Describing Motion Around Us, complete Hindi explanation covering distance, displacement, velocity, acceleration, kinematic equations and uniform circular motion, published on aapbiti.com for session 2026-27

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Chapter 4 का परिचय — गति हर जगह है

प्रकृति में हर वस्तु गति में है — विशाल खगोलीय पिंडों से लेकर उप-परमाणु कणों तक। तितलियों का उड़ना, साँपों का रेंगना, घोड़ों का दौड़ना, समुद्री लहरों का उठना-गिरना, बादलों का जमा होना — सभी गति के विभिन्न रूप हैं। गति के इस विविध संसार को समझने के लिए विज्ञान सबसे पहले उसे आदर्श सरल रूपों में अध्ययन करता है।

इस अध्याय में हम रेखीय गति (Linear Motion) और एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) को विस्तार से समझेंगे। साथ ही हम गति को न केवल शब्दों में, बल्कि संख्याओं, समीकरणों और ग्राफों के माध्यम से व्यक्त करना सीखेंगे।

इस अध्याय में नई भौतिक राशियाँ सीखेंगे — विस्थापन, औसत वेग और औसत त्वरण।

4.1 सरल रेखा में गति (Motion in a Straight Line)

जब कोई वस्तु सरल रेखा में चलती है, उसे रेखीय गति (Linear Motion) कहते हैं। यह गति का सबसे सरल प्रकार है। उदाहरण — तैराकी प्रतियोगिता में बच्चे, ऊर्ध्वाधर गिरती गेंद, सीधी सड़क पर चलती कार, सीधी पटरी पर दौड़ती ट्रेन।

4.1.1 स्थिति का वर्णन (Describing Position)

किसी वस्तु की स्थिति बताने के लिए पहले एक सन्दर्भ बिंदु (Reference Point) तय करना होता है। किसी भी क्षण पर वस्तु की सन्दर्भ बिंदु से दूरी और दिशा — यही उसकी स्थिति है।

  • गति (Motion): यदि वस्तु की स्थिति सन्दर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ बदलती है।
  • विराम (Rest): यदि वस्तु की स्थिति सन्दर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ नहीं बदलती।

उदाहरण — एक धाविका सरल पथ पर दौड़ रही है। उसके शुरुआती बिंदु को मूल बिंदु O (Origin) मानते हैं। O के दाईं ओर की स्थितियाँ धनात्मक (+) और बाईं ओर की ऋणात्मक (–) होती हैं।

4.1.2 तय की गई दूरी और विस्थापन (Distance and Displacement)

मान लीजिए एक धाविका O से चलती है (t=0), B तक पहुँचती है (t=4s), A तक जाती है (t=10s), फिर वापस B तक आती है (t=16s):

राशि परिभाषा उदाहरण में मान
तय की गई दूरी कुल चली गई लंबाई (दिशा का महत्त्व नहीं) OA + AB = 100 + 60 = 160 m
विस्थापन (Displacement) प्रारम्भिक और अन्तिम स्थिति के बीच का नेट परिवर्तन (दिशा सहित) OB = 40 m (धनात्मक दिशा में)

महत्वपूर्ण नियम: विस्थापन का परिमाण हमेशा तय की गई दूरी से कम या बराबर होता है। जब वस्तु बिना पलटे एक दिशा में चले, तब दोनों बराबर होते हैं। दोनों की SI इकाई मीटर (m) है।

Activity 4.1 के उत्तर (गेंद ऊपर-नीचे फेंकना):

स्थिति तय की गई दूरी विस्थापन
O (शुरू) 0 cm 0 cm
A (40 cm) 40 cm 40 cm ऊपर
B (140 cm) 140 cm 140 cm ऊपर
C (80 cm) 200 cm 80 cm ऊपर
O (वापस) 280 cm 0 cm

सही कथन: (iii) — विस्थापन का परिमाण हमेशा तय की गई दूरी से कम या बराबर होता है।

4.1.3 औसत चाल और औसत वेग (Average Speed and Average Velocity)

औसत चाल (Average Speed) बताती है कि वस्तु कितनी तेज़ या धीमी गति से चल रही है।

औसत चाल = कुल तय की गई दूरी ÷ समय अंतराल

चाल में केवल संख्यात्मक मान होता है, दिशा नहीं। यदि वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करे → एकसमान गति (Uniform Motion), अन्यथा असमान गति (Non-Uniform Motion)

औसत वेग (Average Velocity) बताता है कि स्थिति कितनी तेज़ और किस दिशा में बदल रही है।

औसत वेग (vav) = विस्थापन (s) ÷ समय अंतराल (t)

दिशा के लिए + या – चिह्न उपयोग होता है। SI इकाई: m s⁻¹ या m/s (km h⁻¹ भी प्रचलित है)।

महत्वपूर्ण नोट: एक दिशा में गति के लिए औसत चाल और औसत वेग का परिमाण बराबर होता है।

भारत का वैज्ञानिक योगदान

गति की अवधारणा — "चाल = दूरी ÷ समय" — भारत में प्राचीन काल से ज्ञात थी। आर्यभटीय (5वीं शताब्दी ई.) में इसका उल्लेख है। गणितकौमुदी (14वीं शताब्दी ई.) में एक प्रश्न है — दो डाकिए 210 योजन की दूरी से एक-दूसरे की ओर चलते हैं। पहला 9 योजन/दिन और दूसरा 5 योजन/दिन चलता है। कितने दिनों में मिलेंगे?

हल: एक दिन में कुल दूरी = 9 + 5 = 14 योजन। 210 योजन तय करने में समय = 210 ÷ 14 = 15 दिन।

Example 4.2 — सारंग का तैरना

सारंग 25 m लंबे तालाब में एक छोर से दूसरे और वापस 50 s में तैरता है।

  • कुल दूरी = 50 m | औसत चाल = 50/50 = 1 m s⁻¹
  • विस्थापन = 0 m | औसत वेग = 0/50 = 0 m s⁻¹

Pause and Ponder 4 — परिवार की सड़क यात्रा

200 km उत्तर (3 घंटे) + 200 km दक्षिण (2 घंटे):

  • कुल दूरी = 400 km | कुल समय = 5 घंटे | औसत चाल = 80 km h⁻¹
  • विस्थापन = 0 | औसत वेग = 0 km h⁻¹

4.1.4 औसत त्वरण (Average Acceleration)

जब वाहन अचानक चलने लगता है या रुकता है — हमें झटका लगता है। यह वेग में परिवर्तन का अनुभव है।

औसत त्वरण = वेग में परिवर्तन ÷ समय अंतराल

यदि प्रारम्भिक वेग u (समय t₁ पर) और अन्तिम वेग v (समय t₂ पर) हो:

a = (v – u) ÷ (t₂ – t₁)

SI इकाई: m s⁻² या m/s²

  • यदि वेग का परिमाण बढ़ रहा है → त्वरण वेग की दिशा में
  • यदि वेग का परिमाण घट रहा है → त्वरण वेग की विपरीत दिशा में (ऋणात्मक)

महत्वपूर्ण: कोई वस्तु बहुत तेज़ चल रही हो और फिर भी त्वरण शून्य हो सकता है — जैसे सीधी सड़क पर स्थिर वेग से चलती बस। त्वरण इस बात पर निर्भर है कि वेग कितनी तेज़ी से बदल रहा है, न कि वेग कितना अधिक है।

Example 4.3 — बस का त्वरण

बस 36 km h⁻¹ (= 10 m s⁻¹) से चल रही है। Accelerator दबाने पर 10 s में 54 km h⁻¹ (= 15 m s⁻¹) हो जाती है। फिर brake से 5 s में रुक जाती है।

(i) Accelerator दबाने पर: a = (15 – 10)/10 = +0.5 m s⁻² (वेग की दिशा में)

(ii) Brake दबाने पर: a = (0 – 15)/5 = –3 m s⁻² (वेग के विपरीत)

Example 4.4 — गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण

ऊँचाई से गिरती वस्तु की गति (नीचे की ओर धनात्मक):

समय अंतराल औसत त्वरण
0 s से 1 s (9.8 – 0)/1 = 9.8 m s⁻²
1 s से 2 s (19.6 – 9.8)/1 = 9.8 m s⁻²
2 s से 3 s (29.4 – 19.6)/1 = 9.8 m s⁻²
3 s से 4 s (39.2 – 29.4)/1 = 9.8 m s⁻²

त्वरण स्थिर और बराबर g = 9.8 m s⁻² है। यही गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity) है।

4.2 गति का ग्राफीय निरूपण (Graphical Representation of Motion)

ग्राफ गति का दृश्य निरूपण है। इससे समय के साथ स्थिति, वेग और त्वरण के परिवर्तन दिखते हैं। दो वस्तुओं की गति की तुलना, भौतिक राशियों की गणना और एकसमान/असमान गति की पहचान संभव होती है।

4.2.1 ग्राफ कैसे बनाएँ

ग्राफ बनाने के चरण:

  • X-अक्ष पर समय, Y-अक्ष पर स्थिति (या वेग) लें।
  • उपयुक्त पैमाना (Scale) चुनें जो डेटा को प्रभावी ढंग से दर्शाए।
  • प्रत्येक समय-स्थिति जोड़े का बिंदु अंकित करें।
  • बिंदुओं को मिलाएँ — सरल रेखा या वक्र।

याद रखें: ग्राफ कोई मार्ग-चित्र नहीं है। यह दिखाता है कि वस्तु की स्थिति मूल बिंदु के सापेक्ष समय के साथ कैसे बदलती है।

4.2.2 स्थिति-समय ग्राफ (Position-Time Graph)

ग्राफ का आकार गति की प्रकृति त्वरण
X-अक्ष के समानांतर सरल रेखा वस्तु विराम में है शून्य
सरल रेखा (झुकी हुई) एकसमान वेग (Constant velocity) शून्य
वक्र (Curve) असमान वेग, त्वरित गति अशून्य

स्थिति-समय ग्राफ की ढलान (Slope) = वेग का परिमाण

ग्राफ में A (s₁, t₁) और B (s₂, t₂) बिंदु लें:

Slope = BC/CA = (s₂ – s₁)/(t₂ – t₁) = औसत वेग

उदाहरण: s₁ = 40 m (t₁ = 2 s), s₂ = 80 m (t₂ = 4 s) → वेग = 40/2 = 20 m s⁻¹

जितनी खड़ी रेखा → उतना अधिक वेग। दो वस्तुओं की तुलना में जिसकी रेखा अधिक खड़ी है, उसका वेग अधिक है।

4.2.3 वेग-समय ग्राफ (Velocity-Time Graph)

ग्राफ का आकार गति की प्रकृति त्वरण
X-अक्ष के समानांतर सरल रेखा एकसमान वेग (Constant velocity) शून्य
ऊपर जाती सरल रेखा बढ़ता वेग, स्थिर त्वरण धनात्मक स्थिर
नीचे जाती सरल रेखा घटता वेग, स्थिर मंदन ऋणात्मक स्थिर

वेग-समय ग्राफ से दो राशियाँ निकलती हैं:

(1) ढलान (Slope) = त्वरण:

a = (v – u)/(t₂ – t₁) = BC/CA

उदाहरण: 10 s से 20 s के बीच → a = (10 – 5)/(20 – 10) = 0.5 m s⁻²

(2) ग्राफ और समय-अक्ष के बीच का क्षेत्रफल = विस्थापन:

  • एकसमान वेग → आयत का क्षेत्रफल = वेग × समय = विस्थापन
  • स्थिर त्वरण → आयत + त्रिभुज का क्षेत्रफल = विस्थापन

उदाहरण (स्थिर वेग 20 m s⁻¹, 6 s): विस्थापन = 20 × 6 = 120 m

उदाहरण (बढ़ता वेग, 10 s से 20 s, u=5 m s⁻¹, v=10 m s⁻¹): विस्थापन = (5×10) + (½×10×5) = 50 + 25 = 75 m

4.3 सरल रेखा में स्थिर त्वरण के लिए गतिकी समीकरण

जब त्वरण स्थिर हो, तो पाँच भौतिक राशियाँ — विस्थापन (s), समय (t), प्रारम्भिक वेग (u), अन्तिम वेग (v) और त्वरण (a) — तीन समीकरणों से जोड़ी जाती हैं:

समीकरण सूत्र इसमें अनुपस्थित राशि
प्रथम समीकरण v = u + at s
द्वितीय समीकरण s = ut + ½at² v
तृतीय समीकरण v² = u² + 2as t

समीकरण 1 की व्युत्पत्ति (v = u + at)

त्वरण की परिभाषा से: a = (v – u)/t → v = u + at

समीकरण 2 की व्युत्पत्ति (s = ut + ½at²)

वेग-समय ग्राफ में OABD क्षेत्रफल = s = आयत OACD + त्रिभुज ABC

= u×t + ½×t×(v–u) = ut + ½×t×at = ut + ½at²

समीकरण 3 की व्युत्पत्ति (v² = u² + 2as)

समीकरण 1 से: t = (v–u)/a → इसे समीकरण 2 में रखने पर:

s = u×(v–u)/a + ½×a×(v–u)²/a² → हल करने पर → v² = u² + 2as

Note: ये समीकरण केवल तभी मान्य हैं जब त्वरण स्थिर हो। एक दिशा में गति के लिए दूरी = विस्थापन का परिमाण।

Example 4.8 — ब्रेक लगाने पर रुकने की दूरी

दिया: a = –4 m s⁻², v = 0

v² = u² + 2as → 0 = u² – 8s → s = u²/8

  • (i) u = 54 km h⁻¹ = 15 m s⁻¹ → s = 225/8 = 28.1 m
  • (ii) u = 108 km h⁻¹ = 30 m s⁻¹ → s = 900/8 = 112.5 m

निष्कर्ष: वेग दोगुना होने पर रुकने की दूरी चार गुनी हो जाती है! इसीलिए तेज़ रफ्तार पर आगे की गाड़ी से सुरक्षित दूरी बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।

विज्ञान और समाज का सेतु — सुरक्षित दूरी

ब्रेक लगाने पर वाहन रुकने से पहले कुछ दूरी तय करता है — यह ब्रेकिंग दूरी (Braking Distance) है। यह निर्भर करती है:

  • ब्रेक लगाते समय वाहन का वेग
  • सड़क की सतह (गीली/सूखी)
  • वाहन की ब्रेकिंग क्षमता (ऋणात्मक त्वरण)
  • चालक की प्रतिक्रिया समय (Reaction Time)

भारत सहित अनेक देशों में अब V2V (Vehicle-to-Vehicle) संचार तकनीक विकसित हो रही है जो वाहनों को संकेत भेजकर संभावित टक्कर की चेतावनी देती है।

4.4 समतल में गति (Motion in a Plane)

जब वस्तु दो आयामों में (एक समतल में) गति करती है — जैसे ओवरटेक करती कार, किक की हुई फुटबॉल, या वृत्ताकार पथ पर उपग्रह — इसे द्वि-आयामी गति (Motion in Two Dimensions) कहते हैं।

4.4.1 एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion)

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर स्थिर चाल से चलती है — इसे एकसमान वृत्तीय गति कहते हैं।

मान लीजिए एक बच्चा मेरी-गो-राउंड पर A से B से C पर जाता है:

  • तय की गई दूरी = चाप ABC
  • विस्थापन = सरल रेखा AC
  • एक पूरे चक्कर में दूरी = 2πR (परिधि)
  • एक पूरे चक्कर में विस्थापन = 0 (वापस प्रारम्भिक स्थान)

यदि एक चक्कर में T समय लगे:

औसत चाल (vav) = 2πR/T

औसत वेग = 0 (विस्थापन = 0)

एकसमान वृत्तीय गति में त्वरण

वृत्तीय गति में चाल स्थिर होती है लेकिन वेग की दिशा लगातार बदलती है। किसी बिंदु पर वेग उस बिंदु पर वृत्त की स्पर्शरेखा (Tangent) के अनुदिश होता है।

चूँकि वेग की दिशा बदलती है → त्वरण अशून्य है। इसीलिए एकसमान वृत्तीय गति त्वरित गति है — भले ही चाल स्थिर हो।

Activity 4.5 — कंचे का प्रयोग: जब ring उठा लिया जाता है, कंचा सरल रेखा में चला जाता है — उस दिशा में जिसमें वह उस क्षण चल रहा था। यह बताता है कि वृत्तीय गति में वेग हर क्षण स्पर्शरेखा की दिशा में होता है।

रोज़मर्रा में एकसमान वृत्तीय गति के उदाहरण

  • घड़ी की सुइयों का सिरा
  • पंखे के ब्लेड का सिरा
  • पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर परिक्रमण (लगभग)
  • उपग्रहों की वृत्तीय कक्षाएँ

नोट: वास्तविक जीवन में स्थिर चाल और वृत्तीय पथ की शर्तें पूरी तरह नहीं मिलतीं — इसलिए यह एक आदर्श मॉडल है। लेकिन यह ग्रहों की गति जैसी जटिल वास्तविक स्थितियों को समझने का आधार है।

Chapter 4 के महत्वपूर्ण बिंदु (At a Glance)

  • स्थिति = सन्दर्भ बिंदु से दूरी और दिशा।
  • विस्थापन = दो क्षणों के बीच स्थिति में नेट परिवर्तन (दिशा सहित)।
  • औसत चाल = कुल दूरी ÷ समय।
  • औसत वेग = विस्थापन ÷ समय।
  • औसत त्वरण = वेग में परिवर्तन ÷ समय।
  • स्थिति-समय ग्राफ की ढलान = वेग।
  • वेग-समय ग्राफ की ढलान = त्वरण।
  • वेग-समय ग्राफ और समय-अक्ष के बीच क्षेत्रफल = विस्थापन।
  • गतिकी समीकरण: v = u+at; s = ut+½at²; v² = u²+2as (केवल स्थिर त्वरण के लिए)।
  • एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर, वेग की दिशा बदलती है → त्वरित गति।

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FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. दूरी और विस्थापन में मूल अंतर क्या है?

दूरी में केवल संख्यात्मक मान होता है (अदिश), विस्थापन में दिशा भी होती है (सदिश)। विस्थापन का परिमाण हमेशा दूरी से कम या बराबर होता है।

Q2. औसत चाल और औसत वेग कब बराबर होते हैं?

जब वस्तु एक ही दिशा में बिना पलटे चले — तब तय की गई दूरी और विस्थापन का परिमाण बराबर होते हैं, इसलिए दोनों बराबर होते हैं।

Q3. क्या कोई वस्तु तेज़ गति से चलते हुए भी शून्य त्वरण पर हो सकती है?

हाँ। यदि वेग का परिमाण और दिशा दोनों स्थिर हैं (जैसे सीधी सड़क पर स्थिर गति से चलती बस) तो त्वरण शून्य होगा।

Q4. वेग-समय ग्राफ से विस्थापन कैसे निकालते हैं?

ग्राफ की रेखा और समय-अक्ष के बीच का क्षेत्रफल = विस्थापन।

Q5. गतिकी समीकरण कब मान्य नहीं होते?

जब त्वरण स्थिर न हो (बदलता रहे) — तब ये समीकरण मान्य नहीं होते।

Q6. एकसमान वृत्तीय गति में त्वरण क्यों होता है जबकि चाल स्थिर है?

क्योंकि वेग की दिशा लगातार बदलती है — और त्वरण वेग में किसी भी प्रकार के परिवर्तन (परिमाण या दिशा) से होता है।

Q7. स्थिति-समय ग्राफ पर समय-अक्ष के समानांतर रेखा क्या दर्शाती है?

वस्तु विराम में है — उसकी स्थिति समय के साथ नहीं बदल रही।

Q8. Scalar और Vector में क्या फ़र्क है?

Scalar (अदिश) — केवल संख्यात्मक मान, जैसे दूरी, चाल। Vector (सदिश) — परिमाण और दिशा दोनों, जैसे विस्थापन, वेग, त्वरण।

Revise, Reflect, Refine — Exercise उत्तर

प्रश्न 1: पिता का दुकान का चक्कर

घर→दुकान (250m)→घर (250m)→दुकान (250m)→घर (250m)। कुल दूरी = 1000 m। विस्थापन = 0 (घर से घर वापस)।

प्रश्न 2: छात्र की ऊर्ध्वाधर यात्रा (प्रत्येक मंजिल = 3 m)

ग्राउंड→4th floor = 12 m, 4th floor→2nd floor = 6 m।
(i) कुल ऊर्ध्वाधर दूरी = 12 + 6 = 18 m
(ii) विस्थापन = ग्राउंड से 2nd floor = 6 m ऊपर

प्रश्न 3: स्कूटर का स्पीडोमीटर स्थिर पर भी त्वरण?

हाँ — यदि स्कूटर मुड़ रही हो तो वेग की दिशा बदलती है → त्वरण होता है, भले ही चाल स्थिर हो (वृत्तीय गति)।

प्रश्न 4: कार — विराम से 24 m s⁻¹, 6 s में

a = (24–0)/6 = 4 m s⁻²
s = ut + ½at² = 0 + ½×4×36 = 72 m

प्रश्न 5: मोटरबाइक — 28 m s⁻¹ से 98 m में रुकती है

v² = u² + 2as → 0 = 784 + 2a×98 → a = –784/196 = –4 m s⁻²
v = u + at → 0 = 28 + (–4)t → t = 7 s

प्रश्न 8: ट्रक — 54 km h⁻¹ से 36 km h⁻¹, 36 s में

u = 15 m s⁻¹, v = 10 m s⁻¹, t = 36 s
s = ½(u+v)×t = ½×25×36 = 450 m

प्रश्न 9: कार — विराम→20 m s⁻¹ (5s)→स्थिर (10s)→रुकती है (6s)

  • Phase 1 (त्वरण): s₁ = ½×4×25 = 50 m
  • Phase 2 (स्थिर वेग): s₂ = 20×10 = 200 m
  • Phase 3 (मंदन): a = –20/6 = –10/3 m s⁻², s₃ = 20×6 + ½×(–10/3)×36 = 120 – 60 = 60 m
  • कुल दूरी = 50 + 200 + 60 = 310 m

प्रश्न 10: बस — 36 km h⁻¹, 30 m आगे अवरोध, Reaction time = 0.5 s, a = –2.5 m s⁻²

u = 10 m s⁻¹
Reaction phase: s₁ = 10×0.5 = 5 m
Braking phase: v² = u² + 2as → 0 = 100 – 5×s₂ → s₂ = 20 m
कुल दूरी = 5 + 20 = 25 m < 30 mबस रुक जाएगी — टक्कर नहीं होगी।

प्रश्न 11: पृथ्वी पर रखी वस्तु — विराम में है?

यह सन्दर्भ बिंदु पर निर्भर है। पृथ्वी के सापेक्ष → विराम में। सूर्य के सापेक्ष → गति में (पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है)। गति और विराम सापेक्ष अवधारणाएँ हैं।

प्रश्न 16: रोहन की घड़ी (6 PM से 7:30 PM, मिनट की सुई = 7 cm)

1.5 घंटे = 90 मिनट → मिनट की सुई 1.5 पूरे चक्कर लगाती है।

  • (i) दूरी = 1.5 × 2π × 7 = 1.5 × 44 = 66 cm
  • (ii) विस्थापन: 6 PM पर सुई 12 पर (ऊपर), 7:30 PM पर सुई 6 पर (नीचे) → दोनों के बीच सीधी रेखा = व्यास = 2×7 = 14 cm नीचे
  • (iii) चाल = 66 cm / 5400 s ≈ 0.012 cm s⁻¹
  • (iv) वेग = 14 cm / 5400 s ≈ 0.0026 cm s⁻¹ (नीचे की दिशा में)

Shakti Rao Mani Shakti Rao Mani शिक्षा नीति, सरकारी योजनाओं और उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा तंत्र पर विशेष रूप से लिखते हैं। Aapbiti के Education Unit से जुड़े हैं और अभिभावकों व छात्रों तक सटीक एवं उपयोगी जानकारी पहुँचाना उनकी प्राथमिकता है।