NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 3 – ऊतक: जीवन की कार्यशाला | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या
NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 3 की पूरी हिंदी व्याख्या — पादप ऊतक, जंतु ऊतक, विभज्योतकी, स्थायी, एपिथीलियम, संयोजी, पेशी, तंत्रिका ऊतक, अस्थि-पेशी तंत्र — सब एक जगह।
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जीवन की शुरुआत एक कोशिका से होती है। वह एक कोशिका बार-बार विभाजित होती है और अंततः लाखों-करोड़ों कोशिकाएँ मिलकर त्वचा, हड्डियाँ, माँसपेशियाँ, नसें और सभी अंग बनाती हैं। यह प्रक्रिया इतनी जटिल और सुनियोजित है कि वैज्ञानिक इसे प्रकृति का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग चमत्कार मानते हैं। अध्याय 2 – कोशिका: जीवन की आधारभूत इकाई में हमने सीखा कि कोशिका जीवन की मूलभूत इकाई है। इस अध्याय 3 में हम समझेंगे कि समान कोशिकाएँ एक साथ मिलकर ऊतक (Tissue) कैसे बनाती हैं, और ये ऊतक पौधों और जंतुओं में किस प्रकार अलग-अलग कार्य करते हैं।
सभी बहुकोशिकीय जीवों में संगठन का एक क्रम होता है — कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव। एककोशिकीय जीवों जैसे अमीबा में एक ही कोशिका सभी जीवन क्रियाएँ करती है। लेकिन बहुकोशिकीय जीवों — जैसे पौधे, मछली, पक्षी, मनुष्य — में विभिन्न समूहों की कोशिकाएँ अलग-अलग कार्य करती हैं। यही श्रम विभाजन (Division of Labour) शरीर की कार्यकुशलता बढ़ाता है और जटिल जीवन प्रक्रियाओं को संभव बनाता है।
3.1 पादप और जंतु ऊतक अलग क्यों होते हैं?
अध्याय 2 में हमने पादप और जंतु कोशिकाओं की तुलना की थी। अब उनके ऊतकों में अंतर समझते हैं।
अधिकांश पौधे एक स्थान पर स्थिर रहते हैं — वे जंतुओं की तरह चलते-फिरते नहीं। उन्हें सीधे खड़े और मज़बूत रहना होता है। इसीलिए पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति (Cell Wall) होती है जो दृढ़ता और शक्ति प्रदान करती है। दूसरी ओर जंतु सामान्यतः गति कर सकते हैं। कठोर कोशिका भित्ति न होने से जंतु कोशिकाएँ आसानी से आकार बदल सकती हैं — यही लचीलापन उनके शरीर को गति के लिए उपयुक्त बनाता है।
पादप और जंतु में पोषण का तरीका भी अलग है। जंतुओं में भोजन पचाने वाले ऊतक होते हैं, जबकि पौधों में प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा भोजन बनाने वाले ऊतक। भोजन और जल को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाने के लिए दोनों में विशिष्ट संवहन ऊतक होते हैं। वृद्धि के पैटर्न भी अलग होते हैं क्योंकि दोनों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ऊतकों की संरचना और कार्य भिन्न होते हैं।
3.2 पौधों में वृद्धि के लिए ऊतक — विभज्योतकी ऊतक
एक छोटा अंकुर कैसे विशाल वृक्ष बन जाता है? जड़ें मिट्टी में गहरी जाती हैं, तने मोटे होते हैं और घास काटने के बाद फिर उग आती है — यह सब किन ऊतकों के कारण होता है?
पौधे तीन तरीकों से बढ़ते हैं:
- लंबाई में वृद्धि — तने की ऊँचाई और जड़ों की गहराई बढ़ना।
- मोटाई (Girth) में वृद्धि — तने का व्यास बढ़ना।
- कटने या चरने के बाद पुनर्वृद्धि — घास का फिर उगना।
इस वृद्धि के लिए सक्रिय रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाएँ चाहिए — इनके समूह को विभज्योतकी ऊतक (Meristematic Tissue) कहते हैं।
3.2.1 शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem) — पौधे लंबाई में कैसे बढ़ते हैं?
प्याज के बल्ब की जड़ों की वृद्धि का प्रयोग करके हम समझते हैं कि जड़ें कहाँ से बढ़ती हैं।
Activity 3.1 — प्रयोग: दो काँच के जार पानी से भरें। दोनों में एक-एक प्याज का बल्ब रखें। 3 दिन तक जड़ों की लंबाई मापें। तीसरे दिन — Jar B की जड़ों के सिरे लगभग 1 cm काट दें। उसके बाद दोनों की जड़ों की वृद्धि देखते रहें।
परिणाम: Jar A की जड़ें बढ़ती रहती हैं। Jar B की जड़ें सिरे काटने के बाद बढ़ना बंद कर देती हैं।
निष्कर्ष: जड़ें केवल अपने सिरों से बढ़ती हैं। इन सिरों में लगातार विभाजित होने वाली कोशिकाएँ होती हैं। इसी प्रकार प्ररोह (Shoot) के सिरों में भी सक्रिय रूप से विभाजित कोशिकाएँ होती हैं जो तने को लंबाई में बढ़ाती हैं। जड़ और प्ररोह के इन सिरों पर स्थित विभज्योतकी ऊतक को शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem) कहते हैं।
3.2.2 पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem) — पौधे मोटाई में कैसे बढ़ते हैं?
द्विबीजपत्री पौधों (Dicot Plants) के तने न केवल लंबाई में बल्कि व्यास (Girth) में भी बढ़ते हैं। यदि आपने किसी पेड़ का कटा हुआ तना देखा है तो उस पर वलय जैसे गोल निशान दिखे होंगे — इन्हें वार्षिक वलय (Annual Growth Rings) कहते हैं।
कुछ वार्षिक वलय चौड़े होते हैं (अनुकूल मौसम में) और कुछ संकरे (प्रतिकूल मौसम में)। इन वलयों को गिनकर वैज्ञानिक पेड़ की आयु और उस दौरान की जलवायु का अनुमान लगाते हैं।
तने की मोटाई में वृद्धि तने में एक वलय के रूप में व्यवस्थित सक्रिय रूप से विभाजित होती कोशिकाओं के कारण होती है। ये कोशिकाएँ अंदर और बाहर दोनों दिशाओं में नई कोशिकाएँ बनाती हैं जिससे तने का व्यास बढ़ता है। इस विभज्योतकी ऊतक को पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem) कहते हैं।
3.2.3 अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem) — कटने के बाद पौधे कैसे बढ़ते हैं?
यदि किसी युवा तने का सिरा काट दें तो तना लंबाई में बढ़ना बंद कर देता है — लेकिन तने की पर्वसंधियों (Nodes) से नई शाखाएँ निकलती हैं। पर्वसंधि (Node) वह बिंदु है जहाँ से शाखाएँ या पत्तियाँ निकलती हैं। दो पर्वसंधियों के बीच के भाग को पर्व (Internode) कहते हैं।
बगीचे की झाड़ी काटने पर उसमें नई शाखाएँ निकलती हैं। घास काटने या पशुओं द्वारा चरने के बाद भी घास फिर उग आती है — यह पर्वसंधियों के आधार पर स्थित अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem) के कारण होता है।
संक्षेप में — पौधों में तीन प्रकार के विभज्योतकी ऊतक होते हैं:
| विभज्योतक का प्रकार | स्थान | कार्य |
|---|---|---|
| शीर्षस्थ (Apical) | जड़ और प्ररोह के सिरे | लंबाई में वृद्धि |
| पार्श्व (Lateral) | तने की परिधि के साथ | मोटाई (Girth) में वृद्धि |
| अंतर्वेशी (Intercalary) | पर्वसंधि के आधार पर | कटने के बाद पुनर्वृद्धि |
विभज्योतकी ऊतक की कोशिकाएँ छोटी, पतली भित्तियों वाली होती हैं, इनमें बड़ा और स्पष्ट केंद्रक तथा सघन कोशिका द्रव्य होता है। रसधानियाँ (Vacuoles) सामान्यतः अनुपस्थित होती हैं और कोशिकाएँ बिना अंतरकोशिकीय स्थान के सघन रूप से जमी होती हैं — ये गुण इन्हें लगातार और तेज़ी से विभाजित होने देते हैं।
लगातार कोशिका विभाजन से विभज्योतकी ऊतक पौधे के शरीर में नई कोशिकाएँ जोड़ता है। कुछ नई कोशिकाएँ विभज्योतकी ही रहती हैं और कुछ विभाजन की क्षमता खो देती हैं — वे संरचना और कार्य में बदलाव करके स्थायी ऊतक (Permanent Tissues) बन जाती हैं। यह प्रक्रिया जिसमें विभज्योतकी ऊतक विशिष्ट कार्य करने वाले ऊतक में बदलता है, विभेदन (Differentiation) कहलाती है।
3.2.4 स्थायी ऊतक (Permanent Tissues)
स्थायी ऊतक दो प्रकार के होते हैं — सरल (Simple) यानी एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने, और जटिल (Complex) यानी एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बने।
(i) सुरक्षात्मक ऊतक — बाह्यत्वचा (Epidermis)
पौधे को यांत्रिक चोट, जलहानि, हानिकारक सूक्ष्मजीवों और अत्यधिक पर्यावरणीय परिस्थितियों से कौन बचाता है? — बाह्यत्वचा (Epidermis)।
बाह्यत्वचा पादप शरीर की सबसे बाहरी परत है। इसमें चपटी और आयताकार कोशिकाओं की एक सघन परत होती है। इन कोशिकाओं पर क्यूटिन (Cutin) नामक मोमी परत होती है जिसे क्यूटिकल (Cuticle) कहते हैं। बहुत शुष्क आवास वाले पौधों में वाष्पोत्सर्जन द्वारा जलहानि कम करने के लिए यह क्यूटिकल मोटी होती है।
जड़ों में बाह्यत्वचा कोशिकाओं से बाल जैसे प्रवर्ध निकलते हैं जिन्हें मूलरोम (Root Hair) कहते हैं — ये मिट्टी से जल और खनिज अवशोषण के लिए सतह क्षेत्रफल बढ़ाते हैं। पत्तियों की बाह्यत्वचा में रंध्र (Stomata) नामक छिद्र होते हैं जो गैसीय विनिमय और वाष्पोत्सर्जन में मदद करते हैं। वाष्पोत्सर्जन xylem में एक खिंचाव (Transpiration Pull) बनाकर जल परिवहन में सहायक है और पादप शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को भी बाहर करता है।
(ii) सहायक ऊतक — सरल स्थायी ऊतक
पौधे को सीधा रखने, लचीलापन देने और कठोर बीज आवरण बनाने का काम सहायक ऊतक (Supporting Tissues) करते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं:
a. मृदूतक (Parenchyma)
मृदूतक जीवित कोशिकाओं से बना होता है जिनकी भित्तियाँ पतली होती हैं। कोशिकाएँ अंतरकोशिकीय स्थानों के साथ शिथिल रूप से व्यवस्थित होती हैं। मृदूतक मुख्यतः भोजन का भंडारण करता है और पौधे के हरे भागों में प्रकाश-संश्लेषण भी करता है। जलीय पौधों में विशेष मृदूतक वायु-स्थान बनाता है जिससे वे तैरते हैं।
b. स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma)
स्थूलकोण ऊतक जीवित कोशिकाओं से बना होता है जिनके कोनों पर पेक्टिन (Pectin) के असमान जमाव से भित्तियाँ मोटी होती हैं। पेक्टिन रबर की तरह लचीलापन देता है। यह ऊतक तनों और प्रतानों (Tendrils) जैसे पादप भागों को टूटे बिना मुड़ने देता है — सहारा और लचीलापन दोनों प्रदान करता है।
c. दृढ़ोतक (Sclerenchyma)
दृढ़ोतक कोशिकाओं की भित्तियाँ लिग्निन (Lignin) के जमाव से मोटी, कठोर और मज़बूत होती हैं — यह काष्ठीय संरचना बनाता है। इनमें से अधिकांश कोशिकाएँ मृत होती हैं। यह ऊतक तनों, पत्ती शिराओं, बीजों और मेवों के कठोर आवरणों में पाया जाता है — जैसे नारियल की जटा और अखरोट का कवच।
| ऊतक | कोशिका की स्थिति | भित्ति | मुख्य कार्य |
|---|---|---|---|
| मृदूतक | जीवित | पतली | भंडारण, प्रकाश-संश्लेषण, उत्प्लावन |
| स्थूलकोण ऊतक | जीवित | कोनों पर मोटी (पेक्टिन) | लचीलापन, सहारा |
| दृढ़ोतक | अधिकतर मृत | मोटी, लिग्निनयुक्त | दृढ़ता, कठोरता |
(iii) संवहन ऊतक — जटिल स्थायी ऊतक (Xylem और Phloem)
ऊँचे पेड़ों की पत्तियों तक जल कैसे पहुँचता है? पत्तियों में बना भोजन शरीर के अन्य भागों तक कैसे जाता है? — इसका उत्तर है जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) — ये मिलकर जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissues) या संवहन ऊतक (Vascular Tissues) बनाते हैं।
जाइलम (Xylem): यह जड़ों से जल और खनिज लवण पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है और पौधे को शक्ति भी देता है। जाइलम चार घटकों से बना है — वाहिनिकाएँ (Tracheids), वाहिकाएँ (Vessels), जाइलम मृदूतक (Xylem Parenchyma) और जाइलम तंतु (Xylem Fibres)। वाहिनिकाएँ और वाहिकाएँ नलिकाकार और मोटी भित्तियों वाली होती हैं। जाइलम मृदूतक जाइलम का एकमात्र जीवित घटक है जबकि वाहिनिकाएँ, वाहिकाएँ और जाइलम तंतु मुख्यतः दृढ़ोतकी (Sclerenchymatous) होते हैं।
फ्लोएम (Phloem): जाइलम के विपरीत फ्लोएम अधिकतर जीवित कोशिकाओं से बना होता है। इसके घटक हैं — चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes), सहकोशिकाएँ (Companion Cells), फ्लोएम मृदूतक (Phloem Parenchyma) और फ्लोएम तंतु (Phloem Fibres)। कुछ कोशिकाएँ लंबी और नलिकाकार होती हैं जो छिद्रयुक्त भित्तियों द्वारा जुड़ी होती हैं — ये चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes) बनाती हैं जो पत्तियों से भोजन पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाती हैं। सहकोशिकाएँ (Companion Cells) विशिष्ट मृदूतक कोशिकाएँ हैं जो चालनी नलिकाओं में शर्करा के लोडिंग और अनलोडिंग को नियंत्रित करती हैं। फ्लोएम मृदूतक भोजन, रेजिन, टैनिन और लेटेक्स संग्रहित करता है। फ्लोएम तंतु मुख्यतः दृढ़ोतकी होते हैं जो शक्ति प्रदान करते हैं।
| विशेषता | जाइलम | फ्लोएम |
|---|---|---|
| कार्य | जल और खनिज का परिवहन (जड़ से ऊपर) | भोजन का परिवहन (पत्ती से अन्य भागों तक) |
| कोशिकाएँ | अधिकतर मृत | अधिकतर जीवित |
| घटक | वाहिनिकाएँ, वाहिकाएँ, मृदूतक, तंतु | चालनी नलिकाएँ, सहकोशिकाएँ, मृदूतक, तंतु |
| परिवहन की दिशा | एकदिशीय (ऊपर की ओर) | द्विदिशीय |
पादप ऊतक तीन ऊतक तंत्रों (Tissue Systems) में संगठित होते हैं:
- बाह्यत्वचीय तंत्र (Dermal Tissue System): पादप की बाहरी परत — आंतरिक भागों की सुरक्षा और जलहानि को कम करना।
- भरण ऊतक तंत्र (Ground Tissue System): बाह्यत्वचीय और संवहन ऊतकों के बीच पादप का मुख्य शरीर — मृदूतक, स्थूलकोण और दृढ़ोतक।
- संवहन ऊतक तंत्र (Vascular Tissue System): जाइलम और फ्लोएम — संवहन ऊतक।
3.3 जंतु ऊतक (Animal Tissues)
पौधों की तरह जंतु कोशिकाएँ भी एक साथ मिलकर विशिष्ट कार्य करती हैं। आँख झपकाना, मुट्ठी बंद करना, गहरी साँस लेना, गर्म-ठंडा महसूस करना — इन सभी क्रियाओं के पीछे विभिन्न ऊतकों की भूमिका है।
3.3.1 उपकला ऊतक (Epithelial Tissue) — संरचना और कार्य
उपकला ऊतक शरीर की बाहरी परत (त्वचा) और आंतरिक अंगों — जैसे मुँह, फेफड़े, रक्त वाहिकाएँ और आँत — की आंतरिक परत बनाता है। यह सघन रूप से पैक कोशिकाओं से बना होता है जिनके बीच बहुत कम स्थान होता है। यह संरचना रोगाणुओं के प्रवेश को रोकती है, जलहानि कम करती है और पदार्थों के अवशोषण, स्राव और गति में सहायक है।
| कार्य | संरचना | शरीर में स्थान |
|---|---|---|
| विनिमय: द्रव और गैसों का तीव्र विसरण | चपटी, पतली कोशिकाओं की एकल परत | रक्त वाहिकाओं और फेफड़ों की परत |
| सुरक्षा: यांत्रिक चोट, घर्षण और सूक्ष्मजीवों से रक्षा | कोशिकाओं की कई परतें; बाहरी कोशिकाएँ चपटी और सघन | त्वचा, मुँह और ग्रासनली |
| स्राव: श्लेष्म, एंज़ाइम, हार्मोन, पसीना, लार का उत्पादन | उत्पादन और स्राव के लिए विशेष कोशिकाएँ (घनाभ या स्तंभाकार) | लार ग्रंथियाँ, पसीने की ग्रंथियाँ, आमाशय की परत |
| संवेदी कार्य: गंध, स्वाद, ध्वनि और संतुलन | सिलिया जैसे बाल वाली विशिष्ट ग्राही कोशिकाएँ | नासिका, स्वाद कलिकाएँ, आंतरिक कान |
| अवशोषण: पोषक तत्वों और जल का कुशल ग्रहण | लंबी, स्तंभाकार कोशिकाओं की एकल परत (प्रायः बाल जैसी संरचना) | छोटी आँत की परत |
3.3.2 संयोजी ऊतक (Connective Tissue) — शरीर के भाग कैसे जुड़े हैं?
रक्त विभिन्न भागों को पोषक तत्व, गैसें और हार्मोन पहुँचाकर जोड़ता है। उसी प्रकार हड्डियाँ सिर से पाँव तक शरीर को जोड़ती और सहारा देती हैं। अन्य ऊतकों को जोड़ने और सहारा देने वाले ऊतक को संयोजी ऊतक (Connective Tissue) कहते हैं।
रक्त और हड्डियाँ दोनों संयोजी ऊतक हैं — लेकिन दोनों की स्थिरता बहुत अलग है। रक्त तरल है जबकि हड्डी कठोर। यह अंतर आधात्री (Matrix) के कारण है — रक्त में यह पानीदार, मुलायम और जेली जैसी होती है, हड्डियों में कठोर, ठोस और दृढ़।
रक्त (Blood) के घटक और दैनिक जीवन से सम्बन्ध:
- रक्त का लाल रंग लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में हीमोग्लोबिन के कारण है — RBCs लगभग 4 महीने जीती हैं।
- प्लेटलेट्स (Platelets) चोट वाले स्थान पर रक्त का थक्का जमाने में मदद करती हैं।
- व्यायाम के दौरान माँसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन चाहिए — साँस तेज़ होती है और रक्त प्रवाह बढ़ता है।
- श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs) संक्रमित क्षेत्रों में एकत्र होती हैं — मवाद और सूजन का कारण यही हैं।
हड्डियाँ (Bones): इनकी आधात्री में कैल्शियम और फॉस्फोरस के यौगिक होते हैं जो इन्हें शक्ति और दृढ़ता देते हैं।
उपास्थि (Cartilage): इसकी आधात्री मुलायम और जेली जैसी होती है — लचीलापन और हड्डियों के सिरों पर कुशनिंग प्रदान करती है। कान दबाने पर वह नरम और लचीला लगता है — यही उपास्थि है।
कण्डरा (Tendon): माँसपेशी को हड्डी से जोड़ता है — माँसपेशी के संकुचन का बल हड्डी तक पहुँचाता है जिससे गति होती है।
स्नायु (Ligament): हड्डी को हड्डी से जोड़ता है — जोड़ को स्थिरता देता है, गति की सीमा तय करता है और अव्यवस्था (Dislocation) रोकता है।
| क्रिया | अनुभव | कार्य | संयोजी ऊतक |
|---|---|---|---|
| कोहनी छूना | कठोर और दृढ़ संरचना | शक्ति, सहारा, सुरक्षा | हड्डी (Bone) |
| कान दबाना | मुलायम और लचीली संरचना जो फिर आकार में आ जाए | लचीलापन और कुशनिंग | उपास्थि (Cartilage) |
| अग्रबाहु की माँसपेशी छूकर उँगलियाँ हिलाना | दूर होने पर भी अग्रबाहु में हलचल | माँसपेशी को हड्डी से जोड़ना | कण्डरा (Tendon) |
| कुर्सी पर बैठकर घुटने तक पैर उठाना | जोड़ एक सीमा के बाद नहीं जाता | हड्डी को हड्डी से जोड़ना, स्थिरता | स्नायु (Ligament) |
3.3.3 पेशी ऊतक (Muscular Tissue) — शरीर में गति कैसे होती है?
कुछ गतियाँ हमारे सचेत नियंत्रण में होती हैं — दौड़ना, लिखना, वस्तु उठाना — ये ऐच्छिक गतियाँ (Voluntary Movements) हैं जो कंकाल पेशियों (Skeletal Muscles) द्वारा होती हैं। ये पेशियाँ कंकाल से जुड़ी होती हैं और लंबी, बेलनाकार, बहुकेंद्रकीय (Multinucleate) और रेखित (Striated) कोशिकाओं के बंडलों से बनी होती हैं।
कुछ गतियाँ अनैच्छिक होती हैं — आँत में भोजन का संचलन, हृदय का धड़कना — ये अनैच्छिक गतियाँ (Involuntary Movements) हैं।
चिकनी पेशियाँ (Smooth Muscles): आमाशय और आँत जैसे अंगों में पाई जाती हैं। इनकी कोशिकाएँ तर्कुरूपी (Spindle-shaped), एककेंद्रकीय और अरेखित होती हैं। ये पाचन जैसी धीमी, निरंतर गतियों में मदद करती हैं।
हृदय पेशियाँ (Cardiac Muscles): केवल हृदय में पाई जाती हैं। इनके तंतु बेलनाकार और शाखित होते हैं, एककेंद्रकीय और हल्के से रेखित। हृदय पेशियाँ बिना थके और लयबद्ध रूप से काम करती हैं — पूरे जीवनकाल में हृदय को बिना रुके धड़काती हैं।
| विशेषता | कंकाल पेशी | चिकनी पेशी | हृदय पेशी |
|---|---|---|---|
| नियंत्रण | ऐच्छिक | अनैच्छिक | अनैच्छिक |
| आकार | लंबा, बेलनाकार | तर्कुरूपी | बेलनाकार, शाखित |
| केंद्रक | बहुकेंद्रकीय | एककेंद्रकीय | एककेंद्रकीय |
| रेखन | स्पष्ट रेखित | अरेखित | हल्का रेखित |
| स्थान | कंकाल से जुड़ी | आमाशय, आँत | केवल हृदय |
3.3.4 तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) — शरीर कैसे महसूस करता, संवाद करता और प्रतिक्रिया करता है?
गर्म चीज़ को छूते ही हाथ तुरंत हट जाता है — पुरानी धुन सुनकर पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं। ये सब तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) के कारण होता है जो शरीर का नियंत्रण और समन्वय नेटवर्क बनाता है। मस्तिष्क नियंत्रण केंद्र के रूप में सभी गतिविधियों, स्मृतियों और प्रतिक्रियाओं का समन्वय करता है। व्यायाम के दौरान मस्तिष्क हृदय को तेज़ धड़कने का संकेत देता है।
तंत्रिका ऊतक की कोशिकाओं को न्यूरॉन (Neurons) या तंत्रिका कोशिकाएँ कहते हैं। प्रत्येक न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं:
- कोशिका पिंड (Cell Body): केंद्रक युक्त — कोशिका की गतिविधियाँ नियंत्रित करता है।
- द्रुमिकाएँ (Dendrites): अन्य न्यूरॉनों से संकेत ग्रहण करती हैं।
- तंत्रिका तंतु (Axon): लंबा तंतु — कोशिका से संदेश ले जाता है और अंत में अक्षतंतु टर्मिनल (Axon Terminals) पर समाप्त होता है जो अन्य कोशिकाओं को संदेश भेजते हैं।
3.4 अस्थि-पेशी तंत्र (The Musculoskeletal System)
अस्थि-पेशी तंत्र हड्डियों, माँसपेशियों, जोड़ों, उपास्थि, कण्डराओं और स्नायुओं से मिलकर बना है। यह तंत्र हमें सीधे खड़े रहने, चलने, मुद्रा बनाए रखने और नाजुक अंगों की रक्षा करने में मदद करता है। यह तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में काम करता है। माँसपेशियाँ हड्डियों को खींचती हैं जिससे गति होती है — ये कण्डराओं (Tendons) द्वारा हड्डियों से जुड़ी होती हैं।
एक औसत वयस्क मानव कंकाल कुल शरीर के भार का लगभग 12–15 प्रतिशत होता है।
Activity 3.4 — शरीर का कितना वजन हड्डियों और माँसपेशियों का है? तराज़ू पर खड़े होकर कुल वजन नोट करें। औसत हड्डी (12–15%) और माँसपेशी प्रतिशत (पुरुष: 40–50%, महिला: 30–40%) से हड्डियों और माँसपेशियों का अनुमानित भार निकालें। सहपाठियों से तुलना करें और कक्षा का औसत निकालें।
3.5 जोड़ों के प्रकार (Types of Joints)
जोड़ (Joint) दो या अधिक हड्डियों का मिलन-स्थल है। जोड़ गति को संभव बनाते हैं लेकिन स्वयं हड्डियों को नहीं हिला सकते — यह काम माँसपेशियाँ करती हैं।
3.5.1 कन्दुक-खल्लिका जोड़ (Ball and Socket Joint)
कंधे का जोड़ भुजा की स्वतंत्र गति की अनुमति देता है। ऊपरी भुजा की हड्डी का गोल सिरा कंधे की हड्डी के उथले खोखले में फिट होता है — यह कन्दुक-खल्लिका जोड़ है। यह आगे, पीछे, बगल और गोलाकार गतियाँ करने देता है।
3.5.2 कब्ज़ा जोड़ (Hinge Joint)
कोहनी दरवाज़े के कब्ज़े की तरह केवल एक दिशा में मुड़ती है — यह कब्ज़ा जोड़ है। घुटने में भी यही जोड़ होता है जहाँ एक छोटी हड्डी — घुटनास्थि (Kneecap) — जोड़ की रक्षा करती है।
3.5.3 धुराग्र जोड़ (Pivot Joint)
सिर को 'नहीं' में हिलाना — यह धुराग्र जोड़ (Pivot Joint) के कारण होता है जो खोपड़ी को मेरुदंड से जोड़ता है और सिर को दरवाज़े के कुंडे की तरह इधर-उधर घुमाने देता है।
3.5.4 स्थायी जोड़ (Fixed Joints)
खोपड़ी की हड्डियाँ स्थायी जोड़ों (Fixed Joints) से जुड़ी होती हैं — इसका अर्थ है ये हड्डियाँ हिल नहीं सकतीं। यह मस्तिष्क, आँखों और कानों को सुरक्षित रखता है।
| जोड़ का प्रकार | स्थान | गति |
|---|---|---|
| कन्दुक-खल्लिका | कंधा, नितंब | सभी दिशाओं में, गोलाकार |
| कब्ज़ा | कोहनी, घुटना | केवल एक दिशा (मुड़ना) |
| धुराग्र | गर्दन का आधार | बगल में घुमाना |
| स्थायी | खोपड़ी | कोई गति नहीं |
3.6 कंकाल तंत्र (Skeletal System)
कंकाल तंत्र हड्डियों की एक संरचना है जो शक्ति प्रदान करती है और नाजुक आंतरिक अंगों की रक्षा करती है। इसमें खोपड़ी (Skull), कशेरुक स्तंभ (Vertebral Column) और पसली पिंजर (Rib Cage) शामिल हैं।
खोपड़ी के आधार से रीढ़ की हड्डी (Backbone/Vertebral Column) नीचे जाती है — यह छोटी हड्डियों की श्रृंखला से बनी है जिन्हें कशेरुक (Vertebrae) कहते हैं। प्रत्येक कशेरुक के बीच एक उपास्थि डिस्क (Cartilage Disc) होती है जो कुशन का काम करती है और लचीलापन देती है — इसीलिए हम आंतरिक मेरुरज्जु को चोट पहुँचाए बिना झुक और मुड़ सकते हैं।
छाती के नीचे की हड्डियाँ पसलियाँ (Ribs) हैं — 12 जोड़ी पसलियाँ मिलकर पसली पिंजर (Rib Cage) बनाती हैं जो हृदय और फेफड़ों की रक्षा करती है। पसलियाँ पीछे मेरुदंड से और आगे उरोस्थि (Sternum) से जुड़ी होती हैं — लचीली उपास्थि द्वारा। यह लचीलापन साँस लेने के दौरान पसली पिंजर को फैलने-सिकुड़ने देता है।
वैज्ञानिक की तरह सोचें — टोटिपोटेंसी (Totipotency): एक कोशिका से पूरा जीव
1958 में F. C. Steward ने दिखाया कि गाजर की संवहनी फ्लोएम की एकल कोशिकाएँ भी पूरा पौधा पुनर्जनित कर सकती हैं।
उन्होंने गाजर की फ्लोएम कोशिकाओं को सरल शर्करा और हार्मोन युक्त पोषक माध्यम में उगाया। इन कोशिकाओं ने पहले एक अविभेदित कोशिका-समूह बनाया — फिर धीरे-धीरे जड़, प्ररोह और अंततः पूरा पौधा बन गया।
इससे सिद्ध हुआ कि फ्लोएम की कोशिकाएँ पहले अविभेदित (Dedifferentiated) हुईं — अविशेष कोशिकाओं का समूह बना — फिर उपयुक्त परिस्थितियों में पुनः विभेदित (Redifferentiated) होकर जड़, प्ररोह और पूरा पौधा बना। किसी भी परिपक्व पादप कोशिका की यह क्षमता कि वह अविभेदित होकर पूरे जीव को बना सके — टोटिपोटेंसी (Totipotency) कहलाती है।
Steward के प्रयोग में तीन संयोजनों के परिणाम:
| प्रकाश | वायु | पोषक माध्यम | ताज़े भार में वृद्धि |
|---|---|---|---|
| ✓ | ✗ | ठोस + पोषक | कम हुई |
| ✓ | ✓ | तरल + पोषक | 20% बढ़ी |
| ✗ | ✓ | तरल + पोषक | कम हुई |
निष्कर्ष — पौधे की वृद्धि के लिए प्रकाश और वायु (ऑक्सीजन) दोनों आवश्यक हैं। केवल तरल माध्यम + प्रकाश + वायु के संयोजन में सर्वाधिक वृद्धि हुई।
अध्याय 3 के महत्वपूर्ण बिंदु (At a Glance)
- ऊतक समान कोशिकाओं का वह समूह है जो मिलकर एक विशिष्ट कार्य करता है।
- पादप ऊतक — विभज्योतकी और स्थायी — विभाजन की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत।
- स्थायी ऊतक सरल (एक प्रकार की कोशिकाएँ) या जटिल (एक से अधिक प्रकार) हो सकते हैं।
- सरल स्थायी ऊतक — मृदूतक, स्थूलकोण, दृढ़ोतक।
- जटिल स्थायी ऊतक — जाइलम (जल परिवहन) और फ्लोएम (भोजन परिवहन)।
- जंतु ऊतक मुख्यतः चार प्रकार के — उपकला, संयोजी, पेशी, तंत्रिका।
- कंकाल तंत्र अंगों की रक्षा और सहारा देता है।
- शरीर में गति अस्थि-पेशी तंत्र की माँसपेशियों और हड्डियों के समन्वय से होती है — तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में।
- टोटिपोटेंसी — परिपक्व पादप कोशिका की पूरे पौधे को पुनर्जनित करने की क्षमता।
Revise, Reflect, Refine — Exercise के उत्तर
प्रश्न 1: विभज्योतकी ऊतक बार-बार विभाजित होता है — इसकी कौन सी कोशिकीय विशेषता यह संभव करती है?
सही उत्तर: (iii) — पतली भित्तियाँ, सघन कोशिका द्रव्य और बड़ा स्पष्ट केंद्रक — ये गुण लगातार और तेज़ विभाजन के लिए आवश्यक हैं। रसधानी न होने से पूरी कोशिका विभाजन के लिए उपलब्ध है।
प्रश्न 2: यदि पौधा पत्तियों से जड़ों तक भोजन नहीं पहुँचा पा रहा तो कौन सा ऊतक खराब है?
सही उत्तर: (ii) फ्लोएम — भोजन का परिवहन फ्लोएम करता है। जाइलम जल और खनिज परिवहन करता है।
प्रश्न 3: जंतु के आंतरिक अंगों की परत वाले उपकला ऊतक एक या कुछ कोशिकाएँ मोटे ही क्यों होते हैं?
सही उत्तर: (iii) — पदार्थों के त्वरित विनिमय के लिए। जितनी कम परतें उतना कम रास्ता — गैसें और पोषक तत्व तेज़ी से अंदर-बाहर हो सकते हैं।
प्रश्न 5: घुटने और टखने मोड़ने पर कौन सा जोड़ काम करता है?
सही उत्तर: (ii) कब्ज़ा जोड़ (Hinge Joint) — घुटने और टखने दोनों एक दिशा में ही मुड़ते हैं।
प्रश्न 6 — Assertion-Reason:
- A. उत्तर: (iii) — Assertion सही है (उपकला गैस विनिमय के लिए उपयुक्त है) लेकिन Reason गलत है — फेफड़ों में उपकला एकल परत की पतली चपटी कोशिकाओं से बनी है जो विसरण को तेज़ करती है, धीमा नहीं।
- B. उत्तर: (i) — दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। हृदय पेशियों में अधिक माइटोकॉन्ड्रिया और भरपूर रक्त आपूर्ति उन्हें बिना थके लगातार काम करने देती है।
- C. उत्तर: (iii) — Assertion गलत है — कण्डरा माँसपेशी को हड्डी से जोड़ता है, हड्डी को हड्डी से नहीं (वह स्नायु का काम है)। Reason सही है।
- D. उत्तर: (iii) — Assertion सही है (कब्ज़ा जोड़ में गति एक तल में होती है) लेकिन Reason गलत है — हड्डियों के सिरे सभी दिशाओं में खिसकने के लिए नहीं बल्कि केवल एक दिशा में बंद रहने के लिए आकार में होते हैं।
प्रश्न 7: तेक के पेड़ की आयु, DBH और वार्षिक वलयों का ग्राफ:
- (i) DBH और वार्षिक वलयों की संख्या दोनों आयु के साथ रैखिक रूप से बढ़ते हैं। प्रारंभिक वर्षों में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी है (5 वर्ष = 4 cm DBH) और बाद में तेज़ हो जाती है।
- (ii) DBH और वार्षिक वलयों की संख्या सीधे समानुपाती (Directly Proportional) हैं — जितने अधिक वार्षिक वलय उतना अधिक DBH।
- (iii) पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem) — तने की परिधि के साथ वलय के रूप में — मोटाई के लिए जिम्मेदार है।
प्रश्न 8: हाथी द्वारा पेड़ की छाल उखाड़ने पर:
- (i) छाल उखाड़ने से बाह्यत्वचीय तंत्र क्षतिग्रस्त होता है — जलहानि बढ़ेगी, सूक्ष्मजीव प्रवेश करेंगे और सुरक्षा घटेगी।
- (ii) छाल हटने के बाद और नुकसान से — पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem/Vascular Cambium) और फ्लोएम प्रभावित होंगे।
- (iii) यदि फ्लोएम नष्ट हो तो पत्तियों से जड़ों तक भोजन पहुँचना बंद हो जाएगा — जड़ें भूखी मर जाएंगी।
- (iv) मान्यता: छाल में कार्क, कार्क कैम्बियम और फ्लोएम शामिल हैं। यदि चोट सतही हो और फ्लोएम बचा हो तो पेड़ ठीक हो सकता है।
प्रश्न 9: आम के पौधे का तना मानसूनी हवाओं में झुकता है लेकिन टूटता नहीं — कौन सा ऊतक?
स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma) — पेक्टिन के जमाव से मोटे कोनों वाली जीवित कोशिकाएँ लचीलापन देती हैं। यदि इसकी जगह दृढ़ोतक (Sclerenchyma) हो तो तना कठोर हो जाएगा — हवा में झुकने की बजाय टूट जाएगा। दृढ़ोतक मृत और लिग्निनयुक्त होता है — यह लचीलापन नहीं देता।
प्रश्न 10: गन्ने की दो प्रकार की कटाई (A और B):
- (i) Type B कट में पर्वसंधि (Node) शामिल था जहाँ अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem) होता है — इसीलिए अंकुरण हुआ।
- (ii) Type B में पर्वसंधि थी — Type A में नहीं (केवल पर्व/Internode था)।
- (iii) अंकुरण की उपस्थिति/अनुपस्थिति और नई कोशिकाओं की वृद्धि — यह परिवर्तन का मापन था।
- (iv) मिट्टी का प्रकार, तापमान, जल की मात्रा, धूप — दोनों कटाइयों के लिए समान रखना ज़रूरी था।
प्रश्न 11: Rohan बनाम Rajiv — सरल और जटिल ऊतकों की परिभाषा:
Rohan की परिभाषा सरल ऊतकों पर लागू होती है — मृदूतक, स्थूलकोण, दृढ़ोतक — जहाँ एक ही प्रकार की कोशिकाएँ समान कार्य करती हैं। जटिल ऊतकों जैसे जाइलम और फ्लोएम में अलग-अलग प्रकार की कोशिकाएँ एक साथ मिलकर कार्य करती हैं — इसलिए Rajiv सही है कि जटिल ऊतक की परिभाषा थोड़ी भिन्न है।
प्रश्न 12: नारियल जटा के तंतु — कौन सा ऊतक?
दृढ़ोतक (Sclerenchyma) — लिग्निन से मोटी भित्तियाँ, अधिकतर मृत कोशिकाएँ — कठोरता और तन्यता (Tensile Strength) देती हैं। जीवित मृदूतक पतली भित्तियों और अंतरकोशिकीय स्थानों के कारण यह शक्ति नहीं दे सकता।
प्रश्न 13: Vibha का कथन — "विभज्योतकी कोशिकाएँ केवल जड़ और प्ररोह के सिरों पर होती हैं।"
कथन अधूरा है। Neha पूछ सकती है — "तो घास काटने के बाद वह कैसे उगती है? उसके सिरे तो कट जाते हैं।" — इससे स्पष्ट होगा कि अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem) पर्वसंधियों पर भी होता है। पार्श्व विभज्योतक भी सिरों पर नहीं बल्कि तने की परिधि में होता है।
प्रश्न 14: पादप और जंतु कोशिका — समान आकार में बड़ी रसधानी किसमें?
- (i) पादप कोशिका में बड़ी रसधानी होगी — क्योंकि पादप कोशिकाएँ स्थिर हैं और उन्हें स्फीति दाब (Turgor Pressure) के लिए बड़ी रसधानी चाहिए। जंतु कोशिकाओं में छोटी या अनुपस्थित रसधानियाँ होती हैं।
- (ii) मान्यता: दोनों कोशिकाएँ स्वस्थ और परिपक्व हैं, और एक विशिष्ट कोशिका प्रकार (जड़ नहीं जो रसधानी विहीन हो) की प्रतिनिधि हैं।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. ऊतक (Tissue) क्या है?
समान संरचना वाली कोशिकाओं का वह समूह जो मिलकर एक विशिष्ट कार्य करता है, ऊतक कहलाता है। उदाहरण — माँसपेशी ऊतक गति के लिए, तंत्रिका ऊतक संदेश संचार के लिए।
Q2. विभज्योतकी और स्थायी ऊतक में मुख्य अंतर क्या है?
विभज्योतकी ऊतक में कोशिकाएँ सक्रिय रूप से विभाजित होती हैं और वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं। स्थायी ऊतक में कोशिकाएँ विभाजन की क्षमता खो चुकी हैं और विशिष्ट कार्य करती हैं।
Q3. जाइलम और फ्लोएम में क्या फर्क है?
जाइलम जल और खनिज को जड़ से ऊपर की ओर ले जाता है और अधिकतर मृत कोशिकाओं से बना है। फ्लोएम पत्तियों में बना भोजन अन्य भागों तक ले जाता है और अधिकतर जीवित कोशिकाओं से बना है।
Q4. चार प्रकार के जंतु ऊतक कौन-कौन से हैं?
उपकला (Epithelial), संयोजी (Connective), पेशी (Muscular) और तंत्रिका (Nervous) ऊतक।
Q5. कण्डरा और स्नायु में क्या अंतर है?
कण्डरा (Tendon) माँसपेशी को हड्डी से जोड़ता है। स्नायु (Ligament) हड्डी को हड्डी से जोड़ता है और जोड़ को स्थिरता देता है।
Q6. हृदय पेशी अन्य पेशियों से कैसे अलग है?
हृदय पेशी बेलनाकार, शाखित, एककेंद्रकीय और हल्की रेखित होती है। यह अनैच्छिक है — बिना थके और लयबद्ध रूप से पूरे जीवन धड़कती है।
Q7. टोटिपोटेंसी क्या है?
किसी परिपक्व पादप कोशिका की वह क्षमता जिससे वह अविभेदित होकर पुनः पूरे पौधे को बना सके। F. C. Steward ने 1958 में गाजर की फ्लोएम कोशिकाओं से पूरा पौधा उगाकर यह सिद्ध किया।
Q8. वार्षिक वलय (Annual Growth Rings) से क्या जानकारी मिलती है?
इन्हें गिनकर वैज्ञानिक पेड़ की आयु और उस दौरान की जलवायु परिस्थितियों का अनुमान लगाते हैं। चौड़े वलय अनुकूल और संकरे वलय प्रतिकूल परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
Q9. पादप ऊतकों के तीन तंत्र कौन से हैं?
बाह्यत्वचीय तंत्र (Dermal), भरण ऊतक तंत्र (Ground) और संवहन ऊतक तंत्र (Vascular)।
Q10. Ball and Socket और Hinge Joint में क्या अंतर है?
Ball and Socket Joint (कंधे, नितंब में) सभी दिशाओं में गति देता है। Hinge Joint (कोहनी, घुटने में) केवल एक दिशा में — दरवाज़े के कब्ज़े की तरह।
इस श्रृंखला के अन्य अध्यायों की हिंदी व्याख्या के लिए पढ़ें: Exploration Chapter 2 — कोशिका: जीवन की आधारभूत इकाई | Exploration Chapter 1 — द्वितीयक विज्ञान की दुनिया में प्रवेश
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