NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 2 – कोशिका: जीवन की आधारभूत इकाई | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या
NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 2 की पूरी हिंदी व्याख्या — कोशिका झिल्ली, ऑस्मोसिस, कोशिकांग, DNA, सूक्ष्मदर्शी, माइटोसिस, मेयोसिस और कोशिका सिद्धांत — सब कुछ एक ही जगह।
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Chapter 2 का परिचय — जीवन की उत्पत्ति और कोशिका
वैज्ञानिक समुदाय में यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि जीवन की उत्पत्ति जल में हुई। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि जीवन महासागरों की बजाय बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों वाले छोटे जल-कुंडों में उत्पन्न हुआ होगा। उष्ण जलधारे (Hot Springs) ऐसे ही वातावरण के उदाहरण हैं।
भारत में, लद्दाख की पुगा घाटी के उष्ण जलधारे ठंडी जलवायु में भी बहुत उच्च तापमान (लगभग पानी के उबलने के बिंदु तक) बनाए रखते हैं। ये पर्यावरणीय परिस्थितियाँ लगभग 3.5 अरब वर्ष पहले की आरंभिक पृथ्वी जैसी लगती हैं। इन उष्ण जलधाराओं में रहने वाले जीव अधिकतर थर्मोफाइल (Thermophiles) नामक ताप-प्रेमी बैक्टीरिया हैं जो एकल-कोशिकीय (Unicellular) हैं।
लखनऊ के बीरबल साहनी पुरापौधविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने इन उष्ण जलधाराओं का अध्ययन किया और पाया कि उनके आसपास कैल्शियम कार्बोनेट तेज़ी से बनता था। ये जमाव प्रारंभिक कार्बनिक अणुओं को हानिकारक विकिरण और अत्यधिक परिस्थितियों से सुरक्षित कर सकते थे, और प्रथम सुरक्षात्मक झिल्ली — कोशिका की सीमा रेखा — के निर्माण में भी मदद कर सकते थे।
सभी जीवित जीव कोशिकाओं (Cells) से बने होते हैं। कोशिका वह मूलभूत स्तर है जिस पर जीवन अस्तित्व में होता है। बैक्टीरिया या यीस्ट जैसे कुछ जीवों में केवल एक ही कोशिका होती है (एकल-कोशिकीय / Unicellular), जबकि पौधे, मछली, पक्षी या मनुष्य जैसे अन्य जीव लाखों कोशिकाओं से बने होते हैं जो मिलकर काम करती हैं (बहु-कोशिकीय / Multicellular)।
समान कार्य करने वाली समान कोशिकाओं का समूह ऊतक (Tissue) बनाता है। विभिन्न ऊतक मिलकर अंग (Organ) बनाते हैं और कई अंग मिलकर अंग तंत्र (Organ System) बनाते हैं। जैसे — नासिका रंध्र, नासिका गुहा, श्वासनली और फेफड़े मिलकर श्वसन तंत्र (Respiratory System) बनाते हैं।
2.1 कोशिकाओं का अध्ययन कैसे करें? (How to Study Cells?)
मानव नेत्र की विभेदन सीमा (Limit of Resolution)
मानव आँख की क्षमता है कि वह दो बहुत पास की वस्तुओं को अलग-अलग देख सके। जब दो बिंदु एक-दूसरे के बहुत पास आ जाते हैं, तो वे एक ही बिंदु दिखने लगते हैं। लगभग 25 cm (मानव नेत्र का निकट बिंदु) की दूरी से देखने पर, लगभग 0.1 mm की दूरी पर स्थित दो बिंदु अलग दिखते हैं — इससे कम दूरी पर वे एक दिखने लगते हैं। यही मानव नेत्र की विभेदन सीमा (Limit of Resolution) = 0.1 mm है।
अधिकांश कोशिकाएँ इतनी छोटी होती हैं कि नग्न आँख से नहीं देखी जा सकतीं — इसीलिए वैज्ञानिकों को सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की ज़रूरत पड़ी।
सूक्ष्मदर्शी — कोशिका देखने का उपकरण
रॉबर्ट हुक (Robert Hooke) पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1665 में अपने स्वयं डिज़ाइन किए सूक्ष्मदर्शी से कोशिका देखी। कॉर्क की पतली परत की जाँच करते समय उन्होंने छोटे-छोटे बॉक्स जैसे खानों को देखा और उन्हें 'cells' (कोशिका) नाम दिया। उनका सूक्ष्मदर्शी लगभग 200–300X आवर्धन करने में सक्षम था।
विद्यालय प्रयोगशालाओं में प्रकाश सूक्ष्मदर्शी (Light Microscope) का उपयोग होता है। इसमें विभिन्न उद्देश्य लेंस (10X, 40X) होते हैं जो दृश्य प्रकाश में बेहतर आवर्धन और विभेदन देते हैं।
इससे भी अधिक सटीक जाँच के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope) का उपयोग होता है — यह प्रकाश की जगह इलेक्ट्रॉनों की किरण उपयोग करता है और नैनोमीटर स्तर पर कोशिका संरचना दिखाता है। (1 नैनोमीटर = एक मीटर का एक अरबवाँ हिस्सा)
Activity 2.1 — प्याज की कोशिका के आकार का अनुमान
कोशिका का अनुमानित आकार निकालने का सूत्र:
कोशिका का अनुमानित आकार = दृश्य क्षेत्र का व्यास (माइक्रोमीटर में) ÷ व्यास के साथ कोशिकाओं की संख्या
उदाहरण: यदि दृश्य क्षेत्र का व्यास 5 mm = 5000 µm है और 25 कोशिकाएँ दिखती हैं, तो एक कोशिका का आकार = 5000 ÷ 25 = 200 µm।
यदि नेत्रिका (Eyepiece) और उद्देश्य लेंस दोनों 10X हों, तो कुल आवर्धन = 100X। इसका अर्थ है 200 µm की कोशिका 100 गुना बड़ी दिखेगी।
| सूक्ष्मदर्शी का प्रकार | किरण | विभेदन क्षमता | उपयोग |
|---|---|---|---|
| प्रकाश सूक्ष्मदर्शी | दृश्य प्रकाश | लगभग 0.2 µm | स्कूल प्रयोगशाला |
| इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी | इलेक्ट्रॉन | नैनोमीटर स्तर | उन्नत अनुसंधान |
2.2 कोशिका की संरचना (Structure of a Cell)
2.2.1 कोशिका झिल्ली — कोशिका की सार्वभौमिक विशेषता
कोशिका झिल्ली (Cell Membrane / Plasma Membrane) एक पतली सीमा है जो कोशिका को घेरती है और उसकी सामग्री की रक्षा करती है। यह कोशिका की व्यक्तिगत पहचान निर्धारित करती है। कोशिका झिल्ली वरणात्मक पारगम्य (Selectively Permeable) होती है — यानी यह कुछ पदार्थों को गुजरने देती है और कुछ को रोकती है।
Activity 2.2 — आलू का प्रयोग (Osmosis समझना)
आलू के दो टुकड़े समान आकार के काटें:
- Beaker A — सादे पानी में रखें → आलू फूल जाता है (भार बढ़ता है)
- Beaker B — 20% नमक/शक्कर के घोल में रखें → आलू सिकुड़ जाता है (भार घटता है)
कारण: कोशिका झिल्ली पानी को अंदर-बाहर जाने देती है, लेकिन नमक/शक्कर के अणुओं को नहीं। पानी अधिक जल-सांद्रता (dilute solution) से कम जल-सांद्रता (concentrated solution) की ओर चलता है — यही परासरण (Osmosis) है।
विसरण (Diffusion): कणों का अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर गति — बिना झिल्ली के भी होता है।
परासरण (Osmosis): वरणात्मक पारगम्य झिल्ली के पार पानी का विसरण।
| घोल का प्रकार | परिभाषा | कोशिका पर प्रभाव |
|---|---|---|
| समपरासारी (Isotonic) | बाहर और अंदर की सांद्रता बराबर | कोई परिवर्तन नहीं |
| अल्पपरासारी (Hypotonic) | बाहर की सांद्रता < अंदर की | कोशिका फूलती है |
| अतिपरासारी (Hypertonic) | बाहर की सांद्रता > अंदर की | कोशिका सिकुड़ती है |
कोशिका झिल्ली की संरचना — Fluid-Mosaic Model
कोशिका झिल्ली केवल 7 से 10 नैनोमीटर मोटी होती है। यह लिपिड (वसा) और प्रोटीन से बनी होती है। इसकी संरचना Fluid-Mosaic Model से समझाई जाती है:
- झिल्ली में लिपिड द्विस्तर (Lipid Bilayer) होती है — दो परतें जिनके सिरे पानी की ओर आकर्षित होते हैं और पूँछें पानी को दूर करती हैं — बीच में प्रोटीन धँसे होते हैं।
- अणु झिल्ली के अंदर इधर-उधर खिसक सकते हैं — इसीलिए यह "Fluid" (तरल) है।
- प्रोटीन द्वारपाल की तरह काम करते हैं — पदार्थों को अंदर-बाहर जाने में मदद करते हैं।
- अणु मोज़ेक टाइल्स की तरह व्यवस्थित हैं — इसीलिए यह "Mosaic" (मोज़ेक) मॉडल है।
2.2.2 कोशिका भित्ति — कोशिका का बाहरी आवरण
पौधे, कवक और बैक्टीरिया में कोशिका झिल्ली के बाहर एक अतिरिक्त परत होती है — कोशिका भित्ति (Cell Wall)। जानवरों में कोशिका भित्ति नहीं होती।
| विशेषता | कोशिका झिल्ली | कोशिका भित्ति |
|---|---|---|
| पाई जाती है | सभी कोशिकाओं में | पौधे, कवक, बैक्टीरिया में |
| पारगम्यता | वरणात्मक पारगम्य | पारगम्य (permeable) |
| बनावट | लिपिड और प्रोटीन | मुख्यतः सेलुलोज (पौधों में) |
| कठोरता | लचीली | कठोर |
| मुख्य कार्य | पदार्थों का नियंत्रित प्रवाह | आकार और सुरक्षा |
पौधों को एक जगह स्थिर रहकर हवा और बारिश के दबाव को झेलना होता है — इसीलिए उन्हें कठोर कोशिका भित्ति की ज़रूरत होती है। पादप कोशिका भित्ति मुख्यतः सेलुलोज (Cellulose) से बनती है — जो कई ग्लूकोज इकाइयों से मिलकर बना कार्बोहाइड्रेट है। हमारे आहार में सेलुलोज रेशे (Roughage) का काम करता है और पाचन में मदद करता है।
जब प्याज या Rhoeo की कोशिका को केंद्रित शक्कर के घोल में रखें — कोशिका का आंतरिक भाग सिकुड़ता है लेकिन कोशिका भित्ति के कारण बाहरी आकार वही रहता है। जंतु कोशिकाओं (जैसे गाल कोशिकाएँ) में भित्ति न होने से वे घोल में पूरी तरह सिकुड़ जाती हैं।
2.3 कोशिका का आंतरिक भाग — एक समन्वित कार्य प्रणाली
अधिकांश कोशिकाओं के तीन मूलभूत भाग होते हैं:
- कोशिका झिल्ली (Plasma Membrane) — वरणात्मक पारगम्य
- कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) — जेली जैसा अर्धतरल पदार्थ
- केंद्रक (Nucleus) — कोशिका का नियंत्रण केंद्र
केंद्रक के अतिरिक्त कोशिका द्रव्य में कई उपकोशिकीय घटक होते हैं जिन्हें कोशिकांग (Organelles) कहते हैं — जिनमें से अधिकांश केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से ही दिखते हैं।
प्रोकेरियोटिक और यूकेरियोटिक कोशिकाएँ
| विशेषता | प्रोकेरियोटिक कोशिका | यूकेरियोटिक कोशिका |
|---|---|---|
| केंद्रक | अपरिभाषित (Nucleoid) | सुपरिभाषित, झिल्ली से घिरा |
| आकार | 1 से 10 µm | 10 से 100 µm |
| कोशिकांग | झिल्लीबद्ध कोशिकांग अनुपस्थित | झिल्लीबद्ध कोशिकांग उपस्थित |
| जीव | प्रायः एककोशिकीय (बैक्टीरिया) | एककोशिकीय या बहुकोशिकीय |
| उदाहरण | बैक्टीरिया | पौधे, जंतु, कवक |
Pro = आदिम, Karyon = केंद्रक | Eu = सच्चा, Karyon = केंद्रक
2.3.1 यूकेरियोटिक कोशिकांग — विस्तृत व्याख्या
केंद्रक (Nucleus) — कूटबद्ध निर्देशों का भंडार
केंद्रक में दोहरी झिल्ली (Nuclear Membrane) होती है जिसमें केंद्रकीय छिद्र (Nuclear Pores) होते हैं — जो केंद्रक और कोशिका द्रव्य के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान करते हैं। केंद्रिका (Nucleolus) केंद्रक के अंदर घना गोल पिंड है जहाँ राइबोसोम उपइकाइयों का निर्माण होता है।
केंद्रक में गुणसूत्र (Chromosomes) होते हैं — जो केवल कोशिका विभाजन के समय छड़-आकार में दिखते हैं। गुणसूत्र DNA और विशिष्ट प्रोटीनों से बने होते हैं। DNA के कार्यात्मक खंडों को जीन (Genes) कहते हैं। विभाजन न होने पर यह DNA क्रोमैटिन (Chromatin) के रूप में धागे जैसे उलझे द्रव्य के रूप में होता है।
रोचक तथ्य: परिपक्व लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs) में केंद्रक नहीं होता — इससे हीमोग्लोबिन के लिए अधिक स्थान मिलता है और अधिक ऑक्सीजन ले जाई जा सकती है। इसी कारण RBC की आयु केवल लगभग 120 दिन होती है — वे खुद को सुधार या विभाजित नहीं कर सकतीं।
राइबोसोम (Ribosomes) — प्रोटीन का कारखाना
ये अत्यंत छोटी संरचनाएँ हैं जो कोशिका द्रव्य में स्वतंत्र रूप से या अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) से जुड़ी हुई पाई जाती हैं। राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis) के स्थान हैं।
अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum / ER) — निर्माण कारखाना
ER एक बड़ा कोशिकांग है जो कोशिका द्रव्य में जाल की तरह फैला होता है। यह केंद्रक की बाहरी झिल्ली से जुड़ा होता है। ER प्रोटीन, वसा (लिपिड) और कुछ हार्मोन के संश्लेषण और परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ER दो प्रकार का होता है:
- खुरदरी ER (RER — Rough Endoplasmic Reticulum): इसकी सतह पर राइबोसोम लगे होते हैं — इसीलिए यह खुरदरी दिखती है। यह प्रोटीन संश्लेषण और स्राव में मुख्य भूमिका निभाती है (जैसे — अग्न्याशय की ग्रंथि कोशिकाओं में)।
- चिकनी ER (SER — Smooth Endoplasmic Reticulum): इस पर राइबोसोम नहीं होते — इसीलिए चिकनी दिखती है। यह वसा और हार्मोन के संश्लेषण और भंडारण में मदद करती है।
गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) — पैकेजिंग और वितरण केंद्र
यह चपटी थैलीनुमा संरचनाओं के ढेर से बना होता है। गॉल्जी उपकरण कोशिका के डाकघर की तरह काम करता है — यह प्रोटीन और लिपिड को संशोधित करके, वर्गीकृत करके, पैक करके परिवहन, स्राव या लाइसोसोम निर्माण के लिए भेजता है।
वैज्ञानिक परिचय: गॉल्जी उपकरण को सर्वप्रथम 1898 में इतालवी वैज्ञानिक Camillo Golgi ने एक बार्न उल्लू की तंत्रिका कोशिकाओं में देखा। शुरू में कई वैज्ञानिकों को इसके अस्तित्व पर संदेह था — लेकिन इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी ने दशकों बाद इसे सिद्ध किया।
लाइसोसोम (Lysosomes) — सफाई तंत्र
लाइसोसोम एकल झिल्ली से घिरी थैलियाँ हैं जो एंज़ाइमों से भरी होती हैं। ये अनावश्यक प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और कोशिका के क्षतिग्रस्त भागों को तोड़ती हैं — कोशिका को स्वच्छ और स्वस्थ रखती हैं। टूटने से बने उत्पाद कोशिका द्रव्य में वापस जाते हैं और पुनः उपयोग होते हैं।
रोचक तथ्य: मानव शुक्राणु कोशिकाओं में लाइसोसोमल एंज़ाइम होते हैं। जब शुक्राणु अंडे से मिलता है, ये एंज़ाइम अंडे की बाहरी परत तोड़ने में मदद करते हैं — जिससे निषेचन (Fertilisation) संभव होता है।
माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) — कोशिका का ऊर्जा घर
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का बिजलीघर (Powerhouse of the Cell) कहा जाता है। प्रत्येक माइटोकॉन्ड्रियन दो झिल्लियों से घिरा होता है:
- बाहरी झिल्ली — चिकनी और सूक्ष्मरंध्रयुक्त
- आंतरिक झिल्ली — उंगली जैसे मोड़ों में मुड़ी होती है जिन्हें क्राइस्टी (Cristae) कहते हैं — ये रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए सतह क्षेत्रफल बढ़ाते हैं।
माइटोकॉन्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) के दौरान ग्लूकोज टूटकर ऊर्जा छोड़ता है। यह ऊर्जा ATP (Adenosine Triphosphate) के रूप में संग्रहित होती है — जो कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।
विशेष बात: माइटोकॉन्ड्रिया का अपना DNA और राइबोसोम होता है — जो बताता है कि इनका विकासीय इतिहास एककोशिकीय जीवों से जुड़ा है।
लवक (Plastids) — पादप कोशिकाओं में भोजन संश्लेषण केंद्र
पौधे प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा भोजन बनाते हैं। इसके लिए विशेष कोशिकांग लवक (Plastids) का उपयोग होता है।
| लवक का प्रकार | वर्णक | कार्य/उदाहरण |
|---|---|---|
| हरितलवक (Chloroplast) | हरा — क्लोरोफिल | प्रकाश-संश्लेषण — सूर्यप्रकाश अवशोषित करना |
| वर्णलवक (Chromoplast) | पीला, नारंगी, लाल | फूलों और फलों को रंग देना — परागणकर्ताओं को आकर्षित करना |
| अवर्णलवक (Leucoplast) | रंगहीन | भोजन संग्रहण — स्टार्च, तेल, प्रोटीन (जैसे आलू, अरबी में) |
हरितलवक के अंदर स्ट्रोमा (Stroma) नामक अर्धतरल पदार्थ होता है। उसके अंदर डिस्क आकार की झिल्ली संरचनाएँ हैं जिनमें क्लोरोफिल होता है। प्रकाश-संश्लेषण में बने शर्करा और स्टार्च कण स्ट्रोमा में संग्रहित होते हैं।
हरितलवक में भी अपना DNA और राइबोसोम होता है — माइटोकॉन्ड्रिया की तरह — जो विकासीय साझा इतिहास बताता है।
रसधानी (Vacuoles) — भंडारण और सहारे का कोशिकांग
परिपक्व पादप कोशिका में एक बड़ी केंद्रीय रसधानी (Large Central Vacuole) होती है जो एकल वरणात्मक पारगम्य झिल्ली से घिरी होती है। इसमें कोशिका रस (Cell Sap) — जल, खनिज, शर्करा और अपशिष्ट पदार्थ — भरे होते हैं। रसधानी का दबाव कोशिका को दृढ़ रखता है — जब पानी कम हो तो पौधा मुरझा जाता है।
जंतु कोशिकाओं में भी कभी-कभी रसधानी होती है — लेकिन ये पादप कोशिकाओं की तुलना में बहुत छोटी होती हैं।
कोशिकाओं की तुलना — एक नज़र में
| संरचना | बैक्टीरिया कोशिका | पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|---|---|
| कोशिका झिल्ली | ✓ | ✓ | ✓ |
| कोशिका भित्ति | ✓ | ✓ | ✗ |
| सुपरिभाषित केंद्रक | ✗ (Nucleoid) | ✓ | ✓ |
| झिल्लीबद्ध कोशिकांग | ✗ | ✓ | ✓ |
| हरितलवक | ✗ | ✓ | ✗ |
| बड़ी रसधानी | ✗ | ✓ | ✗ (छोटी) |
| लाइसोसोम | ✗ | ✗ (सामान्यतः) | ✓ |
2.4 सामान्य कोशिकाएँ कैसे बढ़ती और विभाजित होती हैं?
जब त्वचा पर छोटा कट लगता है, वह कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। बाल झड़ने पर नए उग आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे शरीर की कोशिकाएँ पुरानी, मृत या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की जगह लेने के लिए बढ़ और विभाजित हो सकती हैं।
हर दिन हमारे शरीर में लगभग खरबों कोशिकाएँ (कुल कोशिकाओं का लगभग 1%) बदली जाती हैं।
2.4.1 कोशिका विभाजन के प्रकार
कोशिका विभाजन (Cell Division) वह प्रक्रिया है जिससे पूर्व-विद्यमान कोशिकाओं से नई कोशिकाएँ बनती हैं। यह जीवों को बढ़ने, ऊतकों की मरम्मत करने और प्रजनन करने में सक्षम बनाता है। दो प्रमुख प्रकार हैं — माइटोसिस और मेयोसिस।
माइटोसिस (Mitosis) — समसूत्री विभाजन
हर इंसान एक निषेचित अंडे से जीवन शुरू करता है। वह एक कोशिका विभाजित होकर शरीर में खरबों कोशिकाएँ बनाती है — यह माइटोसिस से होता है।
- माइटोसिस से दो आनुवंशिक रूप से समान पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं।
- प्रत्येक नई कोशिका में वही DNA और वही संख्या में गुणसूत्र होते हैं जो मूल कोशिका में थे।
- यह सामान्य वृद्धि, मरम्मत, रखरखाव और अलैंगिक प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण है।
मेयोसिस (Meiosis) — अर्धसूत्री विभाजन
मेयोसिस केवल प्रजनन अंगों की कोशिकाओं में होता है और युग्मक (Gametes) — शुक्राणु और अंडे — बनाता है।
- मूल कोशिका दो बार विभाजित होती है → चार पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं।
- पहले विभाजन में गुणसूत्र आधे हो जाते हैं।
- दूसरा विभाजन माइटोसिस जैसा होता है।
- परिणाम: प्रत्येक युग्मक में आधे गुणसूत्र होते हैं।
- निषेचन पर दोनों युग्मकों के गुणसूत्र मिलकर मूल संख्या पुनः स्थापित करते हैं।
- मेयोसिस आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है — इसीलिए बच्चे माता-पिता जैसे दिखते हैं पर बिल्कुल समान नहीं होते।
| विशेषता | माइटोसिस | मेयोसिस |
|---|---|---|
| पुत्री कोशिकाएँ | 2 | 4 |
| गुणसूत्र संख्या | अपरिवर्तित | आधी |
| आनुवंशिक समानता | समान | भिन्न (विविधता) |
| कहाँ होता है | शरीर की सभी कोशिकाओं में | केवल प्रजनन अंगों में |
| उद्देश्य | वृद्धि, मरम्मत | यौन प्रजनन |
त्रुटियों के परिणाम:
- माइटोसिस में त्रुटि → अनियंत्रित कोशिका विभाजन → ट्यूमर / कैंसर
- मेयोसिस में त्रुटि → आनुवंशिक विकार, विकास संबंधी समस्याएँ, या प्रजनन क्षमता में कमी
2.5 कोशिका सिद्धांत — जीव विज्ञान का एकीकरण सिद्धांत
कोशिका सिद्धांत के निर्माण में तीन महान वैज्ञानिकों का योगदान रहा:
- Matthias Schleiden (1838) — जर्मन वनस्पतिशास्त्री: सभी पौधे कोशिकाओं से बने हैं।
- Theodor Schwann (1839) — जर्मन प्राणिशास्त्री: सभी जंतु भी कोशिकाओं से बने हैं।
- Rudolf Virchow (1855) — जर्मन वैज्ञानिक: नई कोशिकाएँ केवल पूर्व-विद्यमान कोशिकाओं से बनती हैं।
कोशिका सिद्धांत के तीन मूल कथन:
- सभी जीवित जीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं।
- कोशिका सभी जीवों में संरचना और कार्य की मूलभूत इकाई है।
- सभी कोशिकाएँ पूर्व-विद्यमान कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं।
क्या कोशिकाएँ हमेशा बढ़ती और विभाजित होती रहती हैं?
नहीं। कोशिकाएँ नियंत्रित तरीके से बढ़ती, अपना कार्य करती और अंततः मर जाती हैं। जब जंतु कोशिकाएँ पड़ोसी कोशिकाओं के संपर्क में आती हैं तो विभाजन रुक जाता है — इसे संपर्क अवरोध (Contact Inhibition) कहते हैं। कैंसर कोशिकाएँ यह नियंत्रण खो देती हैं और अनियंत्रित रूप से विभाजित होती रहती हैं — जिससे ट्यूमर बनते हैं।
पादप कोशिकाएँ कठोर भित्ति के कारण संपर्क अवरोध नहीं दिखातीं और अलग तरह से बढ़ती हैं।
Programmed Cell Death (PCD): कोशिकाओं के पास प्राकृतिक रूप से मरने का आनुवंशिक तंत्र भी है। उदाहरण — भ्रूण विकास में उंगलियों के बीच की कोशिकाएँ PCD से मरती हैं — वरना हाथ जालदार होते।
J. Craig Venter (2010): वैज्ञानिकों ने Mycoplasma mycoides का पूरा DNA कम्प्यूटर से पढ़कर प्रयोगशाला में रासायनिक रूप से बनाया — इसे एक अन्य बैक्टीरिया की खाली कोशिका में डाला → कोशिका ने नई DNA के निर्देशों पर बढ़ना और विभाजित होना शुरू किया। इससे सिद्ध हुआ कि DNA कोशिका की संरचना और गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
Chapter 2 के महत्वपूर्ण बिंदु (At a Glance)
- कोशिका सभी जीवों की संरचना और कार्य की मूलभूत इकाई है।
- प्रोकेरियोटिक कोशिकाओं में सुपरिभाषित केंद्रक और झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं होते।
- यूकेरियोटिक कोशिकाएँ बड़ी और जटिल होती हैं — सुपरिभाषित केंद्रक और कोशिकांग होते हैं।
- सभी कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली होती है। पौधे, कवक और बैक्टीरिया में कोशिका भित्ति भी होती है।
- Osmosis = वरणात्मक पारगम्य झिल्ली के पार पानी का विसरण।
- कोशिका झिल्ली Fluid-Mosaic Model से समझाई जाती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक दोनों का अपना DNA होता है।
- माइटोसिस = 2 समान पुत्री कोशिकाएँ। मेयोसिस = 4 पुत्री कोशिकाएँ (आधे गुणसूत्र)।
- कैंसर में संपर्क अवरोध टूट जाता है और कोशिकाएँ अनियंत्रित विभाजित होती हैं।
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- Exploration Chapter 1 – द्वितीयक विज्ञान की दुनिया में प्रवेश
- NCERT कक्षा 9 गणित मंजरी समाधान — अध्याय 1 से 8 (भाग 1)
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. Robert Hooke ने कोशिका कब और कैसे देखी?
1665 में अपने स्वयं डिज़ाइन किए सूक्ष्मदर्शी से कॉर्क की पतली परत की जाँच करते हुए। उन्होंने छोटे-छोटे बॉक्स जैसे खानों को "cells" नाम दिया।
Q2. Osmosis और Diffusion में क्या अंतर है?
Diffusion = कण अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर बिना झिल्ली के भी जाते हैं। Osmosis = वरणात्मक पारगम्य झिल्ली के पार विशेष रूप से जल का विसरण।
Q3. पादप कोशिका और जंतु कोशिका में मुख्य अंतर क्या है?
पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है — जंतु कोशिका में ये नहीं होतीं। जंतु कोशिका में लाइसोसोम होते हैं जो पादप कोशिका में सामान्यतः नहीं होते।
Q4. माइटोकॉन्ड्रिया को "कोशिका का बिजलीघर" क्यों कहते हैं?
क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन द्वारा ग्लूकोज टूटता है और ATP के रूप में ऊर्जा उत्पन्न होती है जो अधिकांश कोशिकीय गतिविधियों के लिए उपयोग होती है।
Q5. प्रोकेरियोटिक और यूकेरियोटिक में मूल अंतर क्या है?
प्रोकेरियोटिक में सुपरिभाषित केंद्रक और झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं होते — DNA न्यूक्लॉइड क्षेत्र में होता है। यूकेरियोटिक में दोनों होते हैं।
Q6. कोशिका सिद्धांत किसने दिया?
Schleiden (1838), Schwann (1839) और Virchow (1855) — तीनों के सामूहिक योगदान से।
Q7. RBC में केंद्रक क्यों नहीं होता?
केंद्रक न होने से हीमोग्लोबिन के लिए अधिक स्थान मिलता है जिससे अधिक ऑक्सीजन वाहन संभव है। लेकिन इसी कारण RBC खुद को सुधार नहीं सकती और केवल 120 दिन जीती है।
Q8. माइटोसिस और मेयोसिस में मुख्य अंतर क्या है?
माइटोसिस में 2 समान पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं (गुणसूत्र संख्या समान)। मेयोसिस में 4 पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं (गुणसूत्र संख्या आधी)।
Q9. Contact Inhibition क्या है?
जब जंतु कोशिकाएँ पड़ोसी कोशिकाओं को छूती हैं तो विभाजन स्वतः रुक जाता है। कैंसर कोशिकाएँ यह क्षमता खो देती हैं।
Q10. सफेद फूलों में क्या वर्णक होता है?
सफेद फूलों की पंखुड़ियों में क्लोरोफिल नहीं होता और रंगीन वर्णक भी नहीं। उनमें वायु से भरी कोशिकाएँ होती हैं जो प्रकाश को परावर्तित कर सफेद रंग देती हैं — लेकिन वर्णक अनुपस्थित होते हैं। (अपवाद: कुछ सफेद फूलों में फ्लेवोनॉइड्स जैसे रंगहीन वर्णक हो सकते हैं।)
Revise, Reflect, Refine — Exercise उत्तर
प्रश्न 1(i): Cell Membrane और Cell Wall में अंतर (पारगम्यता के आधार पर)
कोशिका झिल्ली वरणात्मक पारगम्य है — केवल चुनिंदा पदार्थ गुजरते हैं। कोशिका भित्ति पारगम्य है — जल और घुले खनिज स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं।
प्रश्न 1(ii): RER और SER में अंतर (संरचना के आधार पर)
RER की सतह पर राइबोसोम होते हैं — इसीलिए खुरदरी दिखती है। SER पर राइबोसोम नहीं होते — इसीलिए चिकनी दिखती है।
प्रश्न 1(iii): Chloroplast और Chromoplast में अंतर (वर्णक के आधार पर)
हरितलवक में हरा वर्णक क्लोरोफिल होता है — प्रकाश-संश्लेषण के लिए। वर्णलवक में पीले, नारंगी या लाल वर्णक होते हैं — फूलों और फलों को रंग देने के लिए।
प्रश्न 2: Cell X (pure water) और Cell Y (concentrated salt)
सही उत्तर: (iii) — पानी Cell X में गया (बाहर dilute, अंदर concentrated) और Cell Y से निकला (बाहर concentrated) — कोशिका झिल्ली के पार।
प्रश्न 4: सही विकल्प (पादप कोशिका में उपस्थित / जंतु कोशिका में अनुपस्थित)
सही उत्तर: (i) — Leucoplast पादप कोशिका में उपस्थित ✓ और Cell Wall जंतु कोशिका में अनुपस्थित ✓।
प्रश्न 5: Renu सही है या Rohit?
Rohit आंशिक रूप से सही है लेकिन Renu पूर्णतः सही है। जड़ों में Chloroplast नहीं होता (प्रकाश नहीं पहुँचता), लेकिन Leucoplast और अन्य plastids होते हैं। इसलिए जड़ों में भी plastids होते हैं — बस हरे नहीं।
प्रश्न 7: कौन से कोशिकांगों में DNA होता है?
सही उत्तर: (ii) Mitochondria और Nucleus — दोनों में अपना DNA होता है। (हरितलवक में भी DNA होता है लेकिन यह विकल्प नहीं है।)
प्रश्न 11: गलत मिलान कौन सा है?
सही उत्तर: (ii) SER — Lipid और cellulose synthesis — SER Lipid और hormone बनाता है, cellulose नहीं। Cellulose cell wall का घटक है जो cytoplasm में नहीं बनता।
प्रश्न 12: सभी माइटोकॉन्ड्रिया हटाने पर क्या होगा?
ATP का उत्पादन बंद हो जाएगा। कोशिका ऊर्जाहीन हो जाएगी — कोशिकीय श्वसन, सक्रिय परिवहन, प्रोटीन संश्लेषण — सब बाधित होंगे। कोशिका अंततः मर जाएगी।
प्रश्न 13: ट्यूमर को कौन रोकता है? क्या पौधों में ट्यूमर हो सकता है?
जंतुओं में Contact Inhibition ट्यूमर को रोकता है। पौधों में कठोर कोशिका भित्ति के कारण Contact Inhibition नहीं होता — लेकिन Agrobacterium tumefaciens बैक्टीरिया संक्रमण से पौधों में Crown Gall Disease (एक प्रकार का ट्यूमर) हो सकता है।
प्रश्न 15: यदि युग्मक माइटोसिस से बनें तो क्या होगा?
युग्मकों में गुणसूत्र आधे न होकर पूरे (2n) होंगे। निषेचन पर गुणसूत्र संख्या दोगुनी (4n) हो जाएगी। हर पीढ़ी में दोगुनी होती रहेगी — जो जीव के लिए घातक होगा।
प्रश्न 16: Deepa के प्रयोग का वैज्ञानिक आधार (Osmosis)
(i) परासरण (Osmosis) — उच्च नमक/शक्कर सांद्रता से बैक्टीरिया/कवक की कोशिकाओं का पानी बाहर खिंच जाता है → वे मर जाते हैं।
(ii) Hypertonic environment में सूक्ष्मजीव shrink होकर निष्क्रिय हो जाते हैं — वृद्धि रुकती है।
(iii) नींबू का अचार: नींबू के टुकड़े + नमक + हल्दी → नमक osmosis से नमी खींचता है → संरक्षण।
(iv) वैज्ञानिक मूल्य: प्रयोगसिद्ध ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग, खाद्य सुरक्षा, किसान का सशक्तीकरण।


