Class 9 Science Chapter 7 – कार्य, ऊर्जा और सरल मशीनें | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
NCERT Exploration Class 9 Science Chapter 7 कार्य, ऊर्जा और सरल मशीनें – हिंदी में सम्पूर्ण व्याख्या, सभी सूत्र, उदाहरण और Revise Reflect Refine के सभी प्रश्नों के हल।
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अध्याय 7: कार्य, ऊर्जा और सरल मशीनें – परिचय
इस अध्याय में हम कार्य (Work), ऊर्जा (Energy) और शक्ति (Power) की वैज्ञानिक परिभाषाएँ समझेंगे। साथ ही सरल मशीनें (Simple Machines) जैसे पुली, आनत तल और उत्तोलक (Lever) के बारे में जानेंगे। जब बल जटिल या परिवर्तनशील हो, तो न्यूटन के नियमों को सीधे लगाना कठिन हो जाता है – ऐसे में कार्य और ऊर्जा की अवधारणाएँ बहुत उपयोगी होती हैं।
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7.1 स्थिर बल द्वारा किया गया कार्य (Work Done by a Constant Force)
कार्य की वैज्ञानिक परिभाषा हमारे दैनिक अनुभव से थोड़ी अलग है। यदि कोई बल किसी वस्तु पर लगे और वह वस्तु बल की दिशा में विस्थापित हो, तभी कार्य हुआ माना जाता है।
कार्य का सूत्र (Formula of Work)
यदि कोई स्थिर बल F किसी वस्तु पर लगे और वस्तु बल की दिशा में s दूरी तय करे, तो किया गया कार्य:
W = F × s ...(समीकरण 7.2)
कार्य की SI इकाई जूल (J) है।
1 J = 1 N × 1 m = 1 kg m² s⁻²
अर्थात जब 1 न्यूटन का बल किसी वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित करे, तो 1 जूल कार्य होता है।
बल-विस्थापन ग्राफ (Force-Displacement Graph)
यदि बल स्थिर न हो, तब भी बल-विस्थापन ग्राफ के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रफल (Area under the graph) से कार्य की गणना की जा सकती है।
7.1.1 कार्य कब शून्य होता है? (When is Work Done Zero?)
- जब बल F = 0 हो।
- जब विस्थापन s = 0 हो (जैसे दीवार को धकेलना – दीवार हिलती नहीं)।
- जब बल और विस्थापन परस्पर लम्बवत (90°) हों – जैसे एक लड़की बॉक्स उठाकर क्षैतिज दिशा में चलती है; उसका बल ऊपर की ओर है और विस्थापन क्षैतिज, इसलिए इस बल द्वारा कार्य शून्य है।
नोट: दीवार को धकेलते समय आप थके हुए महसूस करते हैं क्योंकि आपकी माँसपेशियाँ आन्तरिक ऊर्जा खर्च करती हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से दीवार पर कार्य शून्य है।
7.1.2 धनात्मक और ऋणात्मक कार्य (Positive and Negative Work)
- धनात्मक कार्य (Positive Work): जब विस्थापन बल की दिशा में हो। उदाहरण: व्हीलचेयर को धकेलना।
- ऋणात्मक कार्य (Negative Work): जब विस्थापन बल की विपरीत दिशा में हो। उदाहरण: गोलकीपर द्वारा गेंद रोकना – बल गेंद की गति के विपरीत है।
उदाहरण 7.1
प्रश्न: व्यायाम करते समय एक लड़की डम्बल उठाती है और धीरे-धीरे नीचे करती है। बताइए कब धनात्मक और कब ऋणात्मक कार्य होता है?
उत्तर: डम्बल ऊपर उठाते समय बल और विस्थापन दोनों ऊपर की ओर → धनात्मक कार्य। डम्बल नीचे करते समय लड़की ऊपर की दिशा में बल लगाती है लेकिन विस्थापन नीचे → ऋणात्मक कार्य।
उदाहरण 7.2
प्रश्न: एक गोलकीपर ने गेंद रोकते समय 200 N का बल लगाया और उसका हाथ 15 cm पीछे गया। गोलकीपर ने गेंद पर कितना कार्य किया?
उत्तर: बल विपरीत दिशा में → ऋणात्मक कार्य।
W = F × (−s) = 200 N × (−0.15 m) = −30 J
7.2 कार्य-ऊर्जा प्रमेय (The Work-Energy Theorem)
जब किसी वस्तु पर कार्य किया जाता है, तो उसकी ऊर्जा बदलती है। किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय:
किसी वस्तु पर किया गया कार्य = उसकी ऊर्जा में परिवर्तन ...(समीकरण 7.3)
ऊर्जा की SI इकाई जूल (J) है – कार्य की इकाई के समान।
उदाहरण 7.3
प्रश्न: कैरम में एक स्ट्राइकर सफेद गोटी से टकराता है, जो काली गोटी से टकराती है। ऊर्जा परिवर्तन पहचानिए।
उत्तर: स्ट्राइकर सफेद गोटी पर धनात्मक कार्य करता है → सफेद गोटी की ऊर्जा बढ़ती है। न्यूटन के तृतीय नियम से सफेद गोटी स्ट्राइकर पर ऋणात्मक कार्य करती है → स्ट्राइकर की ऊर्जा घटती है। इसी तरह सफेद गोटी काली गोटी पर धनात्मक कार्य करती है → काली गोटी की ऊर्जा बढ़ती है।
7.3 ऊर्जा के रूप (Forms of Energy)
ऊर्जा अनेक रूपों में पाई जाती है:
- यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy): गति या स्थिति के कारण।
- ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy): वस्तुओं को गर्म करती है।
- प्रकाश ऊर्जा (Light Energy): देखने में सहायक।
- ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy): वायु/माध्यम के कंपन से।
- विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy): आवेश की गति/स्थिति से।
- रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy): ईंधन और भोजन में संग्रहीत।
- नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy): परमाणु के नाभिक में संग्रहीत।
ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है। जैसे: बल्ब में विद्युत ऊर्जा → प्रकाश + ऊष्मा ऊर्जा।
7.4 यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)
किसी वस्तु की गति या स्थिति के कारण उसमें संचित ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं। यह दो प्रकार की होती है – गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा।
7.4.1 गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
किसी वस्तु की गति के कारण उसमें निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं। सभी गतिशील वस्तुओं में गतिज ऊर्जा होती है।
सूत्र: K = ½ mv² ...(समीकरण 7.6)
जहाँ m = वस्तु का द्रव्यमान (kg), v = वेग (m/s)
गतिज ऊर्जा की SI इकाई जूल (J) है। गतिज ऊर्जा की कोई दिशा नहीं होती।
व्युत्पत्ति: किनेमेटिक्स के समीकरण v² = u² + 2as और न्यूटन के द्वितीय नियम F = ma से W = ½m(v² − u²) प्राप्त होता है। यदि u = 0, तो W = K = ½mv²।
उदाहरण 7.4
प्रश्न: यदि किसी वाहन का वेग दोगुना हो जाए, तो गतिज ऊर्जा कितनी गुनी होगी?
उत्तर: K₁ = ½mv², K₂ = ½m(2v)² = 4 × ½mv²
गतिज ऊर्जा 4 गुनी हो जाएगी।
उदाहरण 7.5
प्रश्न: एक क्रिकेट गेंद (mass = 0.2 kg) 154.8 km/h की गति से फेंकी गई। गतिज ऊर्जा ज्ञात करें।
उत्तर: v = 154.8 × 1000/3600 = 43 m/s
K = ½ × 0.2 × (43)² = ½ × 0.2 × 1849 = 184.9 J
उदाहरण 7.6
प्रश्न: एक जेट विमान (mass = 15000 kg) विमानवाहक पोत के डेक पर उतरता है। एक तार 367500 N का विपरीत बल लगाकर विमान को 100 m में रोक देती है। विमान की प्रारंभिक गति क्या थी?
उत्तर: तार द्वारा किया गया कार्य (ऋणात्मक) = ΔKE
−367500 × 100 = 0 − ½ × 15000 × v²
v² = (367500 × 100 × 2) / 15000 = 4900 m²/s²
v = 70 m/s = 252 km/h
7.4.2 स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
किसी वस्तु की विकृति (deformation) या किसी निकाय में वस्तुओं की सापेक्ष स्थिति के कारण संचित ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
- लोचदार स्थितिज ऊर्जा: खिंचे हुए रबर बैंड, संपीडित/खिंची हुई स्प्रिंग में।
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: ऊँचाई पर रखी वस्तु में।
- चुम्बकीय/विद्युत स्थितिज ऊर्जा: दो चुम्बकों या आवेशों की सापेक्ष स्थिति में।
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र
h ऊँचाई पर m द्रव्यमान की वस्तु की स्थितिज ऊर्जा:
U = mgh ...(समीकरण 7.8)
जहाँ g = गुरुत्वीय त्वरण (10 m/s²), h = पृथ्वी सतह से ऊँचाई
उदाहरण 7.7
प्रश्न: 200 g की क्रिकेट गेंद 10 m ऊँचाई तक फेंकी गई। अधिकतम ऊँचाई पर स्थितिज ऊर्जा कितनी? (g = 10 m/s²)
उत्तर: U = mgh = 0.2 × 10 × 10 = 20 J
7.4.3 यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण (Conservation of Mechanical Energy)
यांत्रिक ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गति करती है (अन्य कोई बाहरी बल न हो), तो उसकी यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है – अर्थात स्थिर रहती है।
उदाहरण: h ऊँचाई से गिरती वस्तु:
- बिंदु A (ऊपर): PE = mgh, KE = 0, ME = mgh
- बिंदु B (बीच में): PE = mgh', KE = ½mv², ME = mgh (स्थिर)
- बिंदु C (जमीन पर): PE = 0, KE = mgh, ME = mgh (स्थिर)
सरल लोलक: जब लोलक का गोलक एक छोर P पर छोड़ा जाता है (PE = mgh, KE = 0), तो निम्नतम बिंदु Q पर PE = 0, KE = अधिकतम होती है और दूसरे छोर R पर फिर PE = mgh, KE = 0 हो जाती है। वास्तविक जीवन में घर्षण और वायु प्रतिरोध के कारण लोलक धीरे-धीरे रुक जाता है।
उदाहरण 7.8
प्रश्न: h ऊँचाई की स्लाइड के तल पर बच्चे का वेग क्या होगा?
उत्तर: ऊर्जा संरक्षण से: mgh = ½mv²
v = √(2gh)
यह वेग बच्चे के द्रव्यमान और स्लाइड के आकार पर निर्भर नहीं करता।
उदाहरण 7.9
प्रश्न: 10000 kg का ट्रक 72 km/h की गति से एस्केप रैंप पर चढ़ता है। रेत 50000 N का विपरीत बल लगाती है। 30° के आनत तल की न्यूनतम लंबाई क्या होनी चाहिए? (g = 10 m/s², संकेत: 30° पर हर 2 m दूरी के लिए 1 m ऊँचाई)
उत्तर:
v = 72 km/h = 20 m/s
प्रारंभिक KE = ½ × 10000 × 20² = 2000000 J
माना ट्रक d दूरी तय करता है। ऊँचाई = d/2
अंतिम PE = mg × d/2 = 10000 × 10 × d/2 = 50000d J
रेत द्वारा कार्य = −50000d J
कार्य-ऊर्जा प्रमेय से: −50000d = (50000d − 2000000)
2000000 = 100000d
d = 20 m
7.5 शक्ति (Power)
शक्ति = कार्य करने की दर (Rate of doing work)
P = W / t ...(समीकरण 7.11)
शक्ति की SI इकाई वाट (W) है।
1 W = 1 J/s
1 अश्वशक्ति (Horsepower) = 746 W
शक्ति का नाम जेम्स वाट के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने कुशल भाप इंजन का आविष्कार किया।
उदाहरण 7.10
प्रश्न: एक भारोत्तोलक 75 kg द्रव्यमान को 2 m ऊँचा उठाने में 5 सेकंड लेती है। शक्ति कितनी?
उत्तर: W = mgh = 75 × 10 × 2 = 1500 J
P = 1500 / 5 = 300 W
उदाहरण 7.11
प्रश्न: 1000 kg की कार विराम से 10 s में 72 km/h की गति प्राप्त करती है। इंजन की शक्ति?
उत्तर: v = 72 km/h = 20 m/s, u = 0
W = ½mv² − ½mu² = ½ × 1000 × 400 − 0 = 200000 J
P = 200000 / 10 = 20000 W = 20 kW
7.6 सरल मशीनें (Simple Machines)
सरल मशीनें वे युक्तियाँ हैं जो लगाए जाने वाले बल की दिशा या परिमाण बदलकर कार्य को सरल बनाती हैं। ये कुल आवश्यक कार्य को कम नहीं करतीं।
- प्रयास (Effort): मशीन पर लगाया गया बल।
- भार (Load): जिस बल को पार करना है।
- यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) = भार / प्रयास ...(समीकरण 7.12)
7.6.1 पुली (Pulley)
पुली एक पहिया है जिसमें रस्सी के लिए खाँचा (groove) होता है।
- स्थिर पुली (Fixed Pulley): बल का परिमाण नहीं घटाती, केवल दिशा बदलती है। यांत्रिक लाभ = 1। ऊपर उठाने की बजाय नीचे खींचना सुविधाजनक होता है।
- चल पुली (Movable Pulley): यांत्रिक लाभ > 1। कम प्रयास से अधिक भार उठाया जा सकता है।
पुलियों का उपयोग लिफ्ट और क्रेन में होता है।
7.6.2 आनत तल (Inclined Plane)
आनत तल एक सरल मशीन है जो भारी वस्तु को ऊँचाई तक ले जाने में सहायता करती है।
यदि आनत तल की लंबाई L और ऊँचाई h हो, तो:
यांत्रिक लाभ = L / h ...(समीकरण 7.13)
चूँकि L > h, इसलिए यांत्रिक लाभ हमेशा 1 से अधिक होता है। ढलान जितनी कम, यांत्रिक लाभ उतना अधिक, लेकिन दूरी भी अधिक तय करनी पड़ती है।
उदाहरण 7.12
प्रश्न: एक रैंप की ऊँचाई 30 cm और चौड़ाई 40 cm है। यांत्रिक लाभ?
उत्तर: पाइथागोरस प्रमेय से: L = √(30² + 40²) = √(900+1600) = √2500 = 50 cm
यांत्रिक लाभ = L/h = 50/30 = 1.67
7.6.3 उत्तोलक (Lever)
उत्तोलक एक दृढ़ छड़ है जो एक स्थिर बिंदु आधार (Fulcrum) के चारों ओर घूम सकती है।
- आधार (Fulcrum): स्थिर बिंदु जिसके आसपास उत्तोलक घूमता है।
- भार-भुजा (Load Arm): भार से आधार की दूरी।
- प्रयास-भुजा (Effort Arm): प्रयास से आधार की दूरी।
मूल सिद्धांत: प्रयास × प्रयास-भुजा = भार × भार-भुजा ...(समीकरण 7.15)
यांत्रिक लाभ = प्रयास-भुजा / भार-भुजा ...(समीकरण 7.16)
उत्तोलक के तीन वर्ग (Three Classes of Levers)
| वर्ग | बीच में क्या है? | उदाहरण |
|---|---|---|
| Class I | आधार (Fulcrum) | चिमटा, कैंची, क्राउबार, सीसॉ, तराजू |
| Class II | भार (Load) | नींबू निचोड़क, व्हीलबैरो, बोतल खोलक |
| Class III | प्रयास (Effort) | चिमटी (tweezers), झाड़ू, हथौड़ा, चप्पू (oar) |
उदाहरण 7.13
प्रश्न: एक सीसॉ में AC = EC = 2 m और BC = DC = 1 m है। 15 kg और 30 kg के बच्चे किन सीटों पर बैठें कि सीसॉ संतुलित रहे?
उत्तर: 15 kg बच्चा सीट A (2 m) पर बैठे। समीकरण 7.15 से:
15 × 2 = 30 × L → L = 1 m
30 kg वाला बच्चा सीट D (1 m) पर बैठे।
Pause and Ponder – सभी प्रश्नों के उत्तर
प्र. 1: भारोत्तोलक बारबेल को स्थिर पकड़े है। क्या वह बारबेल पर कार्य कर रही है?
उत्तर: नहीं। विस्थापन s = 0 है, इसलिए W = F × 0 = 0। वैज्ञानिक दृष्टि से बारबेल पर कोई कार्य नहीं हो रहा।
प्र. 2: खुरदरी सतह पर चलने वाले सिक्कों के ढेर पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य – धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य?
उत्तर: ऋणात्मक। घर्षण बल गति की विपरीत दिशा में है।
प्र. 3: साइकिल चलाते समय माँसपेशीय ऊर्जा किन रूपों में प्रकट होती है?
उत्तर: यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा – साइकिल की गति), ऊष्मीय ऊर्जा (घर्षण से), ध्वनि ऊर्जा (टायर और सड़क की रगड़ से)।
प्र. 4: A (द्रव्यमान m) और B (द्रव्यमान 4m) की गतिज ऊर्जा समान है। वेगों का अनुपात?
उत्तर: ½mv_A² = ½(4m)v_B² → v_A²/v_B² = 4 → v_A/v_B = 2:1
प्र. 5: स्थिर वेग से चलने वाली वस्तु की गतिज ऊर्जा स्थिति के साथ बदलती है?
उत्तर: नहीं। स्थिर वेग पर K = ½mv² = स्थिर रहती है।
प्र. 6: क्षैतिज दिशा में स्थिर वेग से चलने पर PE बदलती है? ऊर्ध्वाधर ऊपर जाने पर?
उत्तर: क्षैतिज गति में h नहीं बदलता → PE = mgh स्थिर। ऊर्ध्वाधर ऊपर जाने पर h बढ़ता है → PE बढ़ती है।
प्र. 7: जमीन से ठीक पहले वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा = mgh दिखाइए।
उत्तर: जमीन से ठीक पहले v² = 2gh (मुक्त पतन)। KE = ½mv² = ½m(2gh) = mgh। PE = 0। ME = mgh + 0 = mgh ✓
प्र. 8: रोलर कोस्टर में A, B, C पर ऊर्जा परिवर्तन। बाद के बिंदु C, D, E की ऊँचाई कम क्यों?
उत्तर: A (सबसे ऊँचा): PE अधिकतम, KE = 0। B (नीचे): PE घटती, KE बढ़ती। C (फिर ऊपर): PE बढ़ती, KE घटती। C, D, E की ऊँचाई कम होती है क्योंकि घर्षण से ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती जाती है।
प्र. 9: पहाड़ी सड़कें सीधी न जाकर घुमावदार क्यों होती हैं?
उत्तर: घुमावदार सड़क से L बढ़ता है और h समान रहता है → यांत्रिक लाभ L/h बढ़ता है → कम बल लगाना पड़ता है। आनत तल का सिद्धांत।
प्र. 10: झुकी सीढ़ी सीधी सीढ़ी से आसान क्यों?
उत्तर: झुकी सीढ़ी में प्रयास-भुजा अधिक होती है → यांत्रिक लाभ अधिक → कम बल। आनत तल के समान सिद्धांत।
प्र. 11: चम्मच से डिब्बे का ढक्कन खोलना आसान क्यों?
उत्तर: चम्मच Class I उत्तोलक की तरह काम करता है। ढक्कन का किनारा आधार, चम्मच का लंबा सिरा प्रयास-भुजा → यांत्रिक लाभ > 1 → कम बल में ढक्कन खुलता है।
प्र. 12: कठोर वस्तु काटते समय उसे कैंची के आधार के पास क्यों रखते हैं?
उत्तर: वस्तु को आधार के पास रखने से भार-भुजा कम होती है → यांत्रिक लाभ = प्रयास-भुजा/भार-भुजा अधिक होता है → कम प्रयास में अधिक बल लगता है।
प्र. 13: चिरस्थायी मशीनें (Perpetual Machines) काम क्यों नहीं करतीं?
उत्तर: घर्षण और वायु प्रतिरोध के कारण हमेशा कुछ ऊर्जा ऊष्मा में बदलती रहती है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार कोई भी मशीन बिना बाहरी ऊर्जा के चलती नहीं रह सकती। इसीलिए सभी वास्तविक मशीनें अंततः रुक जाती हैं।
Revise, Reflect, Refine – सभी प्रश्नों के हल
प्रश्न 1: सत्य/असत्य बताइए
- (i) असत्य – कार्य के लिए विस्थापन आवश्यक है।
- (ii) सत्य – बल और विस्थापन दोनों ऊपर की दिशा में → धनात्मक कार्य।
- (iii) सत्य – कार्य और ऊर्जा दोनों की SI इकाई जूल (J) है।
- (iv) असत्य – स्थिर खिंचे रबर बैंड में लोचदार स्थितिज ऊर्जा है, गतिज नहीं।
- (v) सत्य – ऊर्जा एक रूप से दूसरे में परिवर्तित हो सकती है।
प्रश्न 2: रिक्त स्थान भरिए
- (i) कार्य = बल × विस्थापन (बल की दिशा में)
- (ii) 1 जूल कार्य होता है जब 1 न्यूटन का बल
- (iii) K = ½mv²
- (iv) U = mgh
- (v) शक्ति कार्य करने की दर (Rate) है
प्रश्न 3: ऊपर फेंकी गई गेंद अधिकतम ऊँचाई पर – सही कथन?
- (i) असत्य – गुरुत्व बल mg अभी भी लग रहा है।
- (ii) असत्य – त्वरण a = g = 10 m/s² है, शून्य नहीं।
- (iii) सत्य ✓ – वेग = 0 इसलिए KE = 0।
- (iv) सत्य ✓ – अधिकतम ऊँचाई पर PE = mgh = अधिकतम।
प्रश्न 4: ऊर्जा रूपांतरण पहचानिए
- (i) ट्रक ऊँचाई पर: रासायनिक ऊर्जा (ईंधन) → यांत्रिक + स्थितिज ऊर्जा
- (ii) घड़ी की स्प्रिंग: लोचदार स्थितिज ऊर्जा → गतिज (यांत्रिक) ऊर्जा
- (iii) प्रकाश संश्लेषण: प्रकाश ऊर्जा → रासायनिक ऊर्जा
- (iv) बाँध से जल: स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
- (v) माचिस जलना: रासायनिक ऊर्जा → ऊष्मा + प्रकाश ऊर्जा
- (vi) पटाखा फूटना: रासायनिक ऊर्जा → ऊष्मा + प्रकाश + ध्वनि + गतिज ऊर्जा
- (vii) माइक्रोफोन: ध्वनि ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
- (viii) बल्ब: विद्युत ऊर्जा → प्रकाश + ऊष्मा ऊर्जा
- (ix) सौर पैनल: प्रकाश ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
प्रश्न 5: h = 72.5 m, g = 10 m/s², m = 50 kg
(i) लिफ्ट से ऊपर जाने पर PE में वृद्धि:
PE = mgh = 50 × 10 × 72.5 = 36250 J
(ii) सीढ़ियों से चढ़ने पर PE में वृद्धि:
PE = mgh = 50 × 10 × 72.5 = 36250 J (समान)
(iii) निष्कर्ष: स्थितिज ऊर्जा तय किए गए रास्ते पर निर्भर नहीं करती, केवल ऊँचाई पर निर्भर करती है।
प्रश्न 6: क्रेन – 10वीं मंजिल (समय t) और 20वीं मंजिल (समय 2t)
माना प्रत्येक मंजिल की ऊँचाई = h₀
10वीं के लिए: E₁ = mg(10h₀), P₁ = E₁/t
20वीं के लिए: E₂ = mg(20h₀) = 2E₁, P₂ = 2E₁/2t = E₁/t = P₁
ऊर्जा 2 गुनी अधिक चाहिए। शक्ति समान रहेगी।
प्रश्न 7: पुली से झंडा – ऊर्जा, कार्य और शक्ति
आवश्यक ऊर्जा = झंडे का द्रव्यमान × g × ऊँचाई (W = mgh)। धीमे या तेज चढ़ाने से कार्य नहीं बदलता। यदि गति दोगुनी करें तो समय आधा → शक्ति दोगुनी हो जाएगी (P = W/t)।
प्रश्न 8: स्कूटर – ईंधन अनुपात
दिन 1: कुल द्रव्यमान = 60 + 100 = 160 kg, KE₁ = ½ × 160 × v²
दिन 2: कुल द्रव्यमान = 60 + 40 + 100 = 200 kg, KE₂ = ½ × 200 × v²
ईंधन अनुपात = KE₁ : KE₂ = 160 : 200 = 4 : 5
प्रश्न 9: सीसॉ – वयस्क का द्रव्यमान बच्चे का दोगुना
माना बच्चे का द्रव्यमान = m, वयस्क = 2m।
संतुलन: m × d₁ = 2m × d₂ → d₁ = 2d₂
अर्थात बच्चा आधार से 2x दूरी पर, वयस्क x दूरी पर बैठे। (उदाहरण: बच्चा 2 m, वयस्क 1 m।)
प्रश्न 10: गेंद (m = 2 kg, v = 20 m/s ऊपर)
(i) ऊपर जाते समय: गुरुत्व नीचे, विस्थापन ऊपर → ऋणात्मक कार्य। नीचे आते समय: दोनों नीचे → धनात्मक कार्य।
(ii) बिना वायु प्रतिरोध अधिकतम ऊँचाई = v²/2g = 400/20 = 20 m।
वास्तविक ऊँचाई = 19.4 m। कार्य-ऊर्जा प्रमेय से:
W_गुरुत्व + W_वायु = ΔKE = 0 − ½ × 2 × 400 = −400 J
W_गुरुत्व = −mgh = −2 × 10 × 19.4 = −388 J
W_वायु = −400 − (−388) = −12 J
प्रश्न 11: ब्लॉक (m = 10 kg, KE at 0 m = 180 J), चर बल (Fig 7.37 – 50 N, 0 से 4 m)
ग्राफ से अनुमानित कार्य: 0-2m पर 50N (W = 100J), 2-3m पर त्रिभुजाकार (+25J), 3-4m पर ऋणात्मक त्रिभुज (−25J)। कुल W = 100 J।
(i) 0 m पर: KE = 180 J → ½ × 10 × v² = 180 → v² = 36 → v = 6 m/s
(ii) 4 m पर: KE = 180 + 100 = 280 J → ½ × 10 × v² = 280 → v² = 56 → v ≈ 7.48 m/s
3 से 4 m के बीच बल ऋणात्मक है → उस भाग में ऋणात्मक त्वरण।
प्रश्न 12: चंद्रमा पर गेंद की ऊँचाई
पृथ्वी पर: h = v²/2g = 8 m → v² = 16g
चंद्रमा पर गुरुत्व = g/6
h_चंद्र = v²/(2 × g/6) = 6v²/2g = 6 × 8 = 48 m
प्रश्न 13: कार (m = 1000 kg), ग्राफ से A पर v = 35 m/s
(i) A से B तक: ग्राफ में गति स्थिर है → स्थिर गति (uniform motion), ब्रेक लगाने से पहले।
(ii) A पर KE: K = ½ × 1000 × 35² = ½ × 1000 × 1225 = 612500 J
(iii) B से C तक ब्रेक द्वारा कार्य: W = ΔKE = 0 − 612500 = −612500 J
(iv) गतिज ऊर्जा → ऊष्मीय ऊर्जा (ब्रेक और टायर में घर्षण से)।
प्रश्न 14: PE-विस्थापन ग्राफ, m = 0.5 kg, O पर v = 0, PE = 30 J
कुल यांत्रिक ऊर्जा = KE + PE = 0 + 30 = 30 J (संरक्षित)
बिंदु P पर (PE ≈ 20 J): KE = 30 − 20 = 10 J → ½ × 0.5 × v² = 10 → v² = 40 → v = √40 ≈ 6.32 m/s
बिंदु Q पर (PE ≈ 10 J): KE = 20 J → v² = 80 → v = √80 ≈ 8.94 m/s
बिंदु R पर (PE ≈ 0 J): KE = 30 J → v² = 120 → v = √120 ≈ 10.95 m/s
प्रश्न 15: नारियल (m = 1.5 kg, h = 10 m, g = 10 m/s², रेत का बल = 3000 N)
(i) जमीन से ठीक पहले वेग:
v = √(2gh) = √(2 × 10 × 10) = √200 = 10√2 ≈ 14.14 m/s
(ii) रेत में गहराई:
KE जमीन पर = mgh = 1.5 × 10 × 10 = 150 J
रेत द्वारा कार्य = F × d = 3000 × d (ऋणात्मक)
कार्य-ऊर्जा प्रमेय: −3000 × d = −150
d = 150/3000 = 0.05 m = 5 cm
अध्याय सारांश (At a Glance)
- कार्य = बल × विस्थापन (बल की दिशा में); W = F × s; इकाई: जूल (J)।
- किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता = उसकी ऊर्जा।
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय: किया गया कार्य = ऊर्जा में परिवर्तन।
- गतिज ऊर्जा K = ½mv²।
- स्थितिज ऊर्जा U = mgh।
- यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण: KE + PE = नियतांक (जब कोई बाहरी बल नहीं)।
- शक्ति P = W/t; इकाई: वाट (W)।
- सरल मशीनें बल की दिशा/परिमाण बदलती हैं; कुल कार्य कम नहीं होता।
- यांत्रिक लाभ = भार/प्रयास।
- आनत तल का MA = L/h; उत्तोलक का MA = प्रयास-भुजा/भार-भुजा।


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