NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 5 – मिश्रण और उनका पृथक्करण | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या
NCERT Class 9 Science Exploration Chapter 5 की पूरी हिंदी व्याख्या — विलयन, सांद्रता, क्रिस्टलीकरण, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, कोलॉइड, टिंडल प्रभाव और सभी प्रश्नोत्तर।
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Chapter 5 का परिचय — मिश्रणों का विज्ञान
क्या आपने कभी सोचा कि हरे-भरे गन्ने के पौधों से सफेद चीनी कैसे बनती है? या डॉक्टर खून की कुछ बूँदों से मलेरिया कैसे पकड़ते हैं? ये सब मिश्रणों को अलग करने की तकनीकों से संभव है। इस अध्याय में हम मिश्रणों के प्रकार, उनके गुण और उन्हें अलग करने की विभिन्न विधियाँ विस्तार से समझेंगे।
5.1 मिश्रणों का वर्गीकरण (Classification of Mixtures)
समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture / Solution)
जिस मिश्रण की संरचना पूरे द्रव्यमान में एकसमान हो — उसे समांगी मिश्रण या विलयन (Solution) कहते हैं। चीनी-पानी का मिश्रण पहले और आखिरी घूँट में बराबर मीठा होता है। अन्य उदाहरण — सिरका (एसिटिक एसिड + पानी), सोडा (CO₂ + पानी)। विलयन हमेशा समांगी रहता है।
विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)
जिस मिश्रण की संरचना एकसमान न हो — उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं। जैसे — रेत और पानी (रेत दिखती है और समय के साथ नीचे बैठ जाती है)। तेल और पानी का मिश्रण भी विषमांगी है।
Activity 5.1 के परिणाम
| मिश्रण | कण दिखते हैं? | Laser से प्रकाश मार्ग? | छानने पर अवशेष? | प्रकार |
|---|---|---|---|---|
| A — नमक + पानी | नहीं | नहीं दिखता | नहीं | विलयन (Solution) |
| B — चाक + पानी | हाँ | दिखता है | हाँ | निलंबन (Suspension) |
| C — दूध + पानी | नहीं (आँखों से) | दिखता है | नहीं | कोलॉइड (Colloid) |
5.2 विलयन (Solutions)
विलयन समांगी मिश्रण हैं। इनमें विलेय (Solute) वह पदार्थ है जो घुलता है, और विलायक (Solvent) वह है जो घोलता है। चीनी-पानी में: चीनी = विलेय, पानी = विलायक।
5.2.1 विलयन की सांद्रता (Concentration of a Solution)
किसी निश्चित मात्रा के विलायक या विलयन में घुले विलेय की मात्रा को सांद्रता (Concentration) कहते हैं। सही अनुपात ज़रूरी है — जैसे ORS में नमक और चीनी की निश्चित मात्रा। किसान कीटनाशक भी सही मात्रा में ही मिलाते हैं — कम हो तो असर नहीं, अधिक हो तो फसल नष्ट।
Dilip Mahalanabis — भारतीय बालरोग विशेषज्ञ जिन्होंने ORS (Oral Rehydration Solution) विकसित किया जिसने हैजे और दस्त से लाखों जानें बचाईं।
5.2.2 सांद्रता व्यक्त करने के तरीके
A. द्रव्यमान/द्रव्यमान प्रतिशत (% m/m या % w/w)
100 g विलयन में कितने g विलेय है।
% m/m = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100
Example 5.1: 10 g नमक + 90 g पानी
विलयन का द्रव्यमान = 10 + 90 = 100 g
% m/m = (10/100) × 100 = 10% m/m
B. द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (% m/v या % w/v)
100 mL विलयन में कितने g विलेय है। दवाओं और प्रयोगशाला में उपयोगी।
% m/v = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का आयतन) × 100
Example 5.2: 5 g ग्लूकोज़ → 100 mL विलयन
% m/v = (5/100) × 100 = 5% m/v
रोचक तथ्य: अस्पताल में saline drip — 0.9% m/v सोडियम क्लोराइड (100 mL में 0.9 g नमक) — यह रक्त के लिए सुरक्षित है।
C. आयतन/आयतन प्रतिशत (% v/v)
100 mL विलयन में कितने mL विलेय है। इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, सिरके में।
% v/v = (विलेय का आयतन / विलयन का आयतन) × 100
Example 5.3: 1 mL कीटनाशक → 100 mL विलयन
% v/v = (1/100) × 100 = 1% v/v
Pause and Ponder — उत्तर
प्रश्न 1: 300 g टेल्कम पाउडर में 4% m/m जिंक ऑक्साइड
जिंक ऑक्साइड = (4/100) × 300 = 12 g
प्रश्न 2: 2 चम्मच = 2 × 15 = 30 mL concentrate, कुल विलयन = 150 mL
% v/v = (30/150) × 100 = 20% v/v
प्रश्न 3: सिरके में 5% v/v एसिटिक एसिड चाहिए। 100 mL सिरका बनाने के लिए:
5 mL ग्लेशियल एसिटिक एसिड लें → पर्याप्त पानी मिलाकर 100 mL विलयन बनाएँ।
5.2.3 पदार्थों की विलेयता (Solubility)
किसी निश्चित तापमान पर 100 mL या 100 g विलायक में घुलने वाली विलेय की अधिकतम मात्रा उसकी विलेयता (Solubility) है। जब विलयन और विलेय नहीं घोल सकता — वह संतृप्त विलयन (Saturated Solution) है।
- ठोस की विलेयता → तापमान बढ़ने से बढ़ती है।
- गैस की विलेयता → तापमान बढ़ने से घटती है।
Activity 5.2 — विलेयता वक्र के उत्तर:
(i) यौगिक A की विलेयता 20°C पर 60°C से कम है।
(ii) यौगिक B की विलेयता 20°C पर 60°C से कम है।
(iii) यौगिक B की विलेयता यौगिक A से अधिक बढ़ती है।
5.3 समांगी मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ
5.3.1 क्रिस्टलीकरण (Crystallization)
यदि 60°C पर यौगिक B का संतृप्त विलयन (287 g/100 g जल) को 40°C तक ठंडा करें → 40°C पर केवल 241 g ही घुल सकता है → शेष (287-241 = 46 g) ठोस के रूप में क्रिस्टल बनकर अलग हो जाएगा।
क्रिस्टल — नियमित ज्यामितीय पैटर्न में व्यवस्थित कणों से बना ठोस पदार्थ। उदाहरण — सेंधा नमक, मिश्री, हिमकण, खिड़कियों पर ओस।
क्रिस्टलीकरण का सिद्धांत: विभिन्न तापमानों पर पदार्थ की विलेयता में अंतर।
उपयोग: ठोस का शुद्धिकरण, दो ठोस पदार्थों का पृथक्करण जब दोनों एक ही विलायक में घुलते हों।
भारत का वैज्ञानिक योगदान: भारत के तटीय क्षेत्रों में नमक क्रिस्टलीकरण की प्राचीन परंपरा — समुद्री जल उबालकर पंग नमक और वाष्पीकरण से कड़कट नमक बनाया जाता था।
Pause and Ponder 4: 80°C से 60°C तक ठंडा करने पर — यौगिक B अधिक ठोस जमा करेगा क्योंकि इसकी विलेयता में अधिक कमी आती है।
Pause and Ponder 5: वाष्पीकरण की दर बढ़ने पर छोटे क्रिस्टल बनते हैं (जल्दी ठंडा होना = कम समय)। धीरे वाष्पीकरण से बड़े, सुंदर क्रिस्टल बनते हैं।
5.3.2 आसवन (Distillation)
दो मिश्रणीय (miscible) द्रवों के मिश्रण को गर्म करके निम्न क्वथनांक वाले द्रव को वाष्पीकृत कर, फिर ठंडा करके शुद्ध द्रव प्राप्त करना — आसवन है।
शर्त: दोनों द्रवों के क्वथनांक में कम से कम 25°C का अंतर हो।
उपयोग: मिश्रणीय द्रवों का पृथक्करण, ठोस-द्रव मिश्रण से द्रव प्राप्त करना।
एसीटोन (क्वथनांक 56°C) + पानी (100°C) → दोनों का अंतर = 44°C → आसवन से अलग किया जा सकता है।
भारत का योगदान — देग-भपका विधि: उत्तर प्रदेश के कन्नौज (इत्र की राजधानी) में फूलों की सुगंध को आसवन द्वारा पकड़ा जाता है। बारिश के बाद मिट्टी की सुगंध से मिट्टी का इत्र बनाया जाता है।
प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation): जब क्वथनांक में अंतर 25°C से कम हो — तब प्रभाजी आसवन काम आता है। कच्चे तेल (Crude Petroleum) से पेट्रोलियम गैस, पेट्रोल, मिट्टी का तेल, डीज़ल, स्नेहक तेल, बिटुमेन — सब इसी विधि से अलग किए जाते हैं।
5.3.3 पेपर क्रोमैटोग्राफी (Paper Chromatography)
जब काले स्केच पेन की स्याही पर पानी डालें — अलग-अलग रंग फैलते हैं। यह क्रोमैटोग्राफी का सरल उदाहरण है।
शब्द का अर्थ: ग्रीक शब्द chroma (रंग) + graphein (लिखना) → "रंग से लिखना"।
सिद्धांत: मिश्रण के अवयवों का विलायक और कागज के साथ अलग-अलग अंतःक्रिया के आधार पर पृथक्करण। जो अवयव कागज के साथ कम जुड़ता है, वह विलायक के साथ अधिक ऊपर जाता है।
उपयोग: स्याही के रंग अलग करना, पालक के क्लोरोफिल का विश्लेषण, फूलों के वर्णक अलग करना, खाद्य रंगों की जाँच।
Pause and Ponder 6 — सही/गलत:
- (i) सत्य — नमक को वाष्पीकरण या आसवन से अलग किया जा सकता है।
- (ii) असत्य — समान क्वथनांक वाले द्रवों को आसवन से अलग नहीं किया जा सकता।
- (iii) असत्य — पेपर क्रोमैटोग्राफी में विलायक का स्तर नमूने के धब्बे से नीचे होना चाहिए।
- (iv) असत्य — वाष्पीकरण और क्रिस्टलीकरण अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। वाष्पीकरण में विलायक उड़ जाता है, क्रिस्टलीकरण में संतृप्त विलयन को ठंडा करके क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।
5.4 विषमांगी मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ
5.4.1 अमिश्रणीय द्रवों का पृथक्करण — पृथक्करण कीप (Separating Funnel)
जो द्रव आपस में नहीं मिलते — अमिश्रणीय (Immiscible) द्रव कहलाते हैं। जैसे तेल और पानी। इन्हें पृथक्करण कीप (Separating Funnel) से अलग किया जाता है।
सिद्धांत: अमिश्रणीय द्रव घनत्व के अनुसार अलग-अलग परतें बनाते हैं। सरसों तेल (कम घनत्व) ऊपर, पानी (अधिक घनत्व) नीचे।
क्रिया: नल (stopcock) खोलकर पहले नीचे वाली परत (पानी) निकालें → थोड़ा मिश्रित भाग फेंक दें → फिर ऊपर वाली परत (तेल) निकालें।
Pause and Ponder 7: अमिश्रणीय द्रव अलग-अलग घनत्व के कारण परतें बनाते हैं — हल्का द्रव ऊपर, भारी नीचे। एक ही घनत्व के अमिश्रणीय द्रव — परतें नहीं बनेंगी, बल्कि अलग-अलग बूँदों में मिले रहेंगे।
5.4.2 ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
जब कोई ठोस गर्म करने पर (अपने गलनांक से पहले) सीधे ठोस → वाष्प में बदल जाए — इसे ऊर्ध्वपातन (Sublimation) कहते हैं।
वाष्प को ठंडा करने पर सीधे ठोस बनना — निक्षेपण (Deposition) कहलाता है।
उदाहरण: कपूर, नेफ्थलीन, सूखी बर्फ (solid CO₂)।
उपयोग: कपूर + रेत का मिश्रण → गर्म करने पर कपूर वाष्प बनकर फनल की दीवारों पर जम जाता है, रेत नीचे रहती है।
Pause and Ponder 8 — ऊर्ध्वपातन बनाम वाष्पीकरण:
वाष्पीकरण में ठोस पहले द्रव बनता है, फिर वाष्प। ऊर्ध्वपातन में ठोस सीधे वाष्प बनता है — द्रव अवस्था नहीं आती। दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।
मिश्र धातु (Alloy)
दो या अधिक धातुओं का समांगी मिश्रण मिश्र धातु (Alloy) कहलाता है। इसे भौतिक विधियों से अलग नहीं किया जा सकता।
| मिश्र धातु | संघटन | गुण |
|---|---|---|
| पीतल (Brass) | ~80% Cu + ~20% Zn | कठोर, चमकीला |
| काँसा (Bronze) | ~80% Cu + ~20% Sn | मज़बूत, टिकाऊ |
| स्टेनलेस स्टील | Fe + C(0.03–0.8%) + Cr(16–18%) + Ni(10–14%) + Mo(2–3%) | जंगरोधी |
5.4.3 निलंबन (Suspensions)
विषमांगी मिश्रण जिसमें ठोस कण घुलते नहीं बल्कि माध्यम में तैरते रहते हैं — निलंबन कहलाते हैं। कण नग्न आँखों से दिखते हैं और कुछ समय बाद नीचे बैठ जाते हैं।
उदाहरण: कीचड़ पानी, बुरादा पानी, चाय की पत्तियाँ पानी में।
A. अपकेंद्रण (Centrifugation)
मिश्रण को ट्यूब में तेज़ गति से घुमाया जाता है। अपकेंद्री बल (Centrifugal Force) भारे कणों को बाहर (ट्यूब के पेंदे में) धकेलता है, हल्का द्रव ऊपर रहता है।
उपयोग: रक्त के घटकों का पृथक्करण (लाल रक्त कणिकाएँ + प्लाज्मा), रासायनिक उद्योग।
पेपरफ्यूज (Paperfuge): बिना बिजली के हाथ से चलने वाला अपकेंद्रण यंत्र — सुदूर क्षेत्रों में मलेरिया और रक्ताल्पता का पता लगाने में उपयोगी।
B. स्कंदन (Coagulation)
फिटकरी (alum) जैसे स्कंदक (Coagulant) मिलाने पर बारीक निलंबित कण आपस में जुड़कर बड़े गुच्छे बना लेते हैं → गुरुत्व से नीचे बैठ जाते हैं (अवसादन) → छानकर या ढाल कर अलग करते हैं।
रोज़मर्रा का उदाहरण: दूध में नींबू/सिरका मिलाने पर पनीर बनना — दूध के प्रोटीन स्कंदित होते हैं।
5.4.4 कोलॉइड (Colloids)
रक्त न तो विलयन है, न निलंबन — यह कोलॉइड है। कोलॉइड के कण नग्न आँखों से नहीं दिखते और समय के साथ नीचे नहीं बैठते।
| गुण | विलयन (Solution) | निलंबन (Suspension) | कोलॉइड (Colloid) |
|---|---|---|---|
| प्रकृति | समांगी | विषमांगी | दिखने में समांगी |
| कण आकार | < 1 nm | > 1000 nm | 1–1000 nm |
| दृश्यता | नहीं | हाँ (नग्न आँख) | नहीं (नग्न आँख) |
| फिल्टर से पृथक्करण | नहीं | हाँ | नहीं |
| अवसादन | नहीं | हाँ | नहीं |
| टिंडल प्रभाव | नहीं | हाँ | हाँ |
| उदाहरण | नमक-पानी, पीतल | रेत-पानी, कीचड़ | दूध, रक्त, धुआँ |
इमल्शन (Emulsion)
जब कोलॉइड के दोनों घटक द्रव हों — इमल्शन कहलाता है।
- Oil-in-Water: दूध, vanishing cream
- Water-in-Oil: मक्खन, body lotion, cold cream
5.5 टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect)
जब प्रकाश कोलॉइड या निलंबन से गुज़रता है, तो कण प्रकाश को बिखेर (scatter) देते हैं — जिससे प्रकाश का मार्ग दिखने लगता है। यह टिंडल प्रभाव है।
विलयन में टिंडल प्रभाव नहीं दिखता क्योंकि कण बहुत छोटे (<1 nm) होते हैं।
रोज़मर्रा के उदाहरण: घने पेड़ों के बीच से आती धूप की किरणें, किसी अंधेरे कमरे में छोटे छेद से आती रोशनी, स्टेडियम की floodlights में धुएँ या धूल का दिखना।
Pause and Ponder 9 — बादल: बादल सूक्ष्म जल बूँदों या बर्फ के कणों से बने होते हैं जो हवा में तैरते हैं। कण आकार कोलॉइड की सीमा में आता है → बादल कोलॉइड हैं।
Pause and Ponder 10: शहरों में धुआँ और धूल के कण हवा में निलंबित रहते हैं → टिंडल प्रभाव से प्रकाश बिखरता है → शहर धुंधला (hazy) दिखता है।
Chapter 5 के महत्वपूर्ण बिंदु
- मिश्रण → समांगी (विलयन) या विषमांगी।
- सांद्रता तीन तरीकों से: % m/m, % m/v, % v/v।
- क्रिस्टलीकरण → संतृप्त विलयन को ठंडा करके शुद्ध क्रिस्टल।
- आसवन → क्वथनांक अंतर ≥25°C वाले मिश्रणीय द्रवों का पृथक्करण।
- प्रभाजी आसवन → क्वथनांक अंतर <25°C।
- पेपर क्रोमैटोग्राफी → यौगिकों की गति की दर के अंतर पर।
- पृथक्करण कीप → अमिश्रणीय द्रवों का घनत्व अंतर पर।
- ऊर्ध्वपातन → ठोस → सीधे वाष्प (द्रव अवस्था बिना)।
- अपकेंद्रण → अपकेंद्री बल से भारे कण नीचे।
- स्कंदन → फिटकरी से कण जुड़कर नीचे बैठते हैं।
- टिंडल प्रभाव → कोलॉइड और निलंबन में प्रकाश बिखरना।
Revise, Reflect, Refine — सम्पूर्ण Exercise उत्तर (Step by Step)
प्रश्न 1: सही वर्गीकरण चुनें (समांगी Hm / विषमांगी Ht)
सही उत्तर: (iv) — कीचड़ पानी — Ht ✓, दूध — Ht ✓, रक्त — Ht ✓, पीतल — Hm ✓
स्पष्टीकरण:
(i) गलत — धुआँ Hm नहीं, Ht है (ठोस कण + हवा)
(ii) गलत — पीतल Hm है (मिश्र धातु = समांगी), सिरका Hm है (Ht नहीं), कीचड़ पानी Hm नहीं
(iii) गलत — दूध Hm नहीं, यह कोलॉइड = Ht दिखने में Hm
(iv) सही
प्रश्न 2: टिंडल प्रभाव कौन से मिश्रण दिखाते हैं?
सही उत्तर: (iii) a और c
(a) हवा + धूल कण → धूल कण कोलॉइड/निलंबन → टिंडल प्रभाव ✓
(b) CuSO₄ + पानी → पारदर्शी विलयन → टिंडल प्रभाव ✗
(c) स्टार्च + पानी → कोलॉइड → टिंडल प्रभाव ✓
(d) एसीटोन + पानी → पारदर्शी विलयन → टिंडल प्रभाव ✗
प्रश्न 3: Table 5.2 पूरी करें
| गुण/उदाहरण | विलयन | निलंबन | कोलॉइड |
|---|---|---|---|
| गुण 1 | छोटे कण (<1 nm), पारदर्शी | बड़े कण (>1000 nm), अवसादन होता है | मध्यम कण (1–1000 nm), कण समान रूप से वितरित |
| गुण 2 | छानने से अलग नहीं, टिंडल नहीं | छानने से अलग होता है, प्रकाश बिखेरता है | छानने से अलग नहीं, प्रकाश बिखेरता है |
| उदाहरण | नमक विलयन, पीतल | रेत-पानी, धुआँ, कीचड़ | दूध, मक्खन, रक्त |
प्रश्न 4(i): केक की सामग्री की सांद्रता
कुल मिश्रण = 75 + 420 + 5 = 500 g
% m/m चीनी = (75/500) × 100 = 15% m/m
% m/m आटा = (420/500) × 100 = 84% m/m
% m/m सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट = (5/500) × 100 = 1% m/m
प्रश्न 4(ii): पीतल में ताँबा और जस्ता
120 g पीतल में 70% ताँबा:
ताँबा = (70/100) × 120 = 84 g
जस्ता = 120 – 84 = 36 g
प्रश्न 5: खाना पकाने का तेल + पानी
तेल (घनत्व ≈ 0.91 g/mL) और पानी (1 g/mL) अमिश्रणीय हैं → अलग परतें बनेंगी।
तेल हल्का है → ऊपर रहेगा।
पृथक्करण विधि: पृथक्करण कीप (Separating Funnel) — नल खोलकर पहले पानी निकालें, फिर तेल।
प्रश्न 6: Assertion-Reason (टिंडल प्रभाव)
सही उत्तर: (iii) A सत्य है, R असत्य है।
विलयन में टिंडल प्रभाव नहीं होता — यह सत्य है। लेकिन कारण गलत है — विलयन के कण 1 nm से छोटे होते हैं (100 nm नहीं), इसलिए वे प्रकाश नहीं बिखेरते।
प्रश्न 7: Table 5.3 — मिश्रणों का पृथक्करण
| मिश्रण | विधि | कारण |
|---|---|---|
| कीचड़ से मिट्टी | अवसादन + निस्यंदन / स्कंदन | मिट्टी के कण भारे हैं, नीचे बैठते हैं; फिटकरी मिलाने से तेज़ी से |
| रक्त से प्लाज्मा | अपकेंद्रण (Centrifugation) | अपकेंद्री बल से भारी RBC नीचे, हल्का प्लाज्मा ऊपर |
| नेफ्थलीन और रेत | ऊर्ध्वपातन (Sublimation) | नेफ्थलीन ऊर्ध्वपातित होती है, रेत नहीं |
| चाक पाउडर और नमक | पानी में घोलें → छानें → वाष्पीकरण | नमक घुलता है, चाक नहीं। छानकर नमक को वाष्पीकरण से प्राप्त करें |
| नमक और पानी | वाष्पीकरण या आसवन | वाष्पीकरण से नमक, आसवन से पानी भी प्राप्त |
| तेल और पानी | पृथक्करण कीप | अमिश्रणीय, घनत्व अंतर |
| फूल के वर्णक | पेपर क्रोमैटोग्राफी | विभिन्न वर्णकों की गति दर अलग |
प्रश्न 8: A (क्वथनांक 60°C) + B (90°C)
दोनों मिश्रणीय द्रव, अंतर = 30°C (≥25°C) → आसवन (Distillation) विधि उपयुक्त है।
आसवन फ्लास्क में मिश्रण → गर्म करें → 60°C पर A वाष्पीकृत होगा → संघनित्र से ठंडा होकर शुद्ध A प्राप्त → B फ्लास्क में रहेगा।
प्रश्न 9: वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और आसवन की तुलना
| विधि | कब उपयोग करें | क्या प्राप्त होता है |
|---|---|---|
| वाष्पीकरण | जब विलेय चाहिए, विलायक नहीं | ठोस विलेय (जैसे नमक) |
| क्रिस्टलीकरण | जब शुद्ध ठोस क्रिस्टल चाहिए; दो ठोस अलग करने हों | शुद्ध क्रिस्टल |
| आसवन | जब विलायक भी चाहिए; या दो द्रव अलग करने हों | शुद्ध द्रव (Distillate) |
प्रश्न 10: रक्त एक कोलॉइड
(i) यदि रक्त सच्चा निलंबन होता → रक्त कणिकाएँ नीचे बैठ जाती → रक्त वाहिकाओं में प्रवाह रुक जाता → जीवन असंभव।
(ii) Dispersed phase (परिक्षेपित प्रावस्था) = रक्त कणिकाएँ (RBC, WBC, Platelets)
Dispersion medium (परिक्षेपण माध्यम) = प्लाज्मा (Plasma)
प्रश्न 11: रेत + नमक + नेफ्थलीन — सही क्रम
सही क्रम:
चरण 1 → ऊर्ध्वपातन (Sublimation, चित्र 1) — नेफ्थलीन वाष्पीकृत, रेत+नमक बचे।
चरण 2 → पानी में घोलें → निस्यंदन (चित्र 2) — नमक घुला, रेत छनी।
चरण 3 → वाष्पीकरण (चित्र 3) — नमक प्राप्त।
प्रश्न 12: एसीटोन-पानी के लिए आसवन क्यों?
एसीटोन (56°C) और पानी (100°C) — दोनों मिश्रणीय, क्वथनांक अंतर = 44°C (≥25°C)। गर्म करने पर पहले एसीटोन वाष्पीकृत होती है → संघनित्र से शुद्ध एसीटोन मिलती है। बड़ा क्वथनांक अंतर एक द्रव को पूरी तरह वाष्पीकृत होने देता है दूसरे से पहले।
प्रश्न 13(i): 50 g पानी में KNO₃ का संतृप्त विलयन 40°C पर
40°C पर KNO₃ की विलेयता = 62 g / 100 g पानी
50 g पानी के लिए = (62 × 50)/100 = 31 g KNO₃
प्रश्न 13(ii): KCl — 80°C पर संतृप्त → 25°C तक ठंडा
80°C पर KCl विलेयता = 54 g/100 g पानी
25°C पर ≈ 35–36 g/100 g पानी
अंतर ≈ 54 – 36 = 18 g KCl क्रिस्टल के रूप में अलग होगा।
छात्रा देखेगी कि ठंडा होने पर विलयन में सफेद ठोस क्रिस्टल बनने लगते हैं।
प्रश्न 13(iii): तापमान का विलेयता पर प्रभाव
सभी चार लवणों की विलेयता तापमान बढ़ने के साथ बढ़ती है।
| लवण | 10°C पर | 80°C पर | वृद्धि |
|---|---|---|---|
| KNO₃ | 21 | 167 | सबसे अधिक |
| NH₄Cl | 24 | 66 | मध्यम |
| KCl | 35 | 54 | कम |
| NaCl | 36 | 37 | सबसे कम (लगभग स्थिर) |
प्रश्न 14: चीनी विलयनों की सांद्रता
छात्र A: 20 g चीनी + 80 g पानी = 100 g विलयन
% m/m = (20/100) × 100 = 20% m/m
छात्र B: 20 g चीनी + 100 g पानी = 120 g विलयन
% m/m = (20/120) × 100 = 16.67% m/m
छात्र C: 30 g चीनी + 80 g पानी = 110 g विलयन
% m/m = (30/110) × 100 = 27.27% m/m
सबसे सांद्र विलयन = छात्र C (27.27%)। क्योंकि समान विलायक (80 g) में सबसे अधिक विलेय (30 g) घुला है।
प्रश्न 15: Fig. 5.26 — तकनीक 'S' की पहचान
(i) S = आसवन (Distillation)
(ii) A = आसवन फ्लास्क, B = जल संघनित्र, C = संग्रह फ्लास्क (conical flask)
(iii) Table 5.5 के क्वथनांक से जाँचें — अंतर ≥25°C हो:
- (a) पानी(100) – एसीटोन(56) = 44°C ✓ आसवन संभव
- (b) पानी(100) – नमक → नमक द्रव नहीं → आसवन नहीं, वाष्पीकरण
- (c) एसीटोन(56) – अल्कोहल(78) = 22°C <25°C → प्रभाजी आसवन चाहिए
- (d) रेत-नमक → ठोस-ठोस → आसवन नहीं
- (e) अल्कोहल(78) – क्लोरोफॉर्म(61) = 17°C <25°C → प्रभाजी आसवन
- (f) अल्कोहल(78) – बेन्ज़ीन(80) = 2°C → आसवन संभव नहीं
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FAQ
Q1. विलयन, निलंबन और कोलॉइड में मुख्य अंतर?
कण आकार: विलयन (<1 nm) < कोलॉइड (1–1000 nm) < निलंबन (>1000 nm)। निलंबन में कण नीचे बैठते हैं, कोलॉइड में नहीं।
Q2. टिंडल प्रभाव क्यों विलयन में नहीं दिखता?
विलयन के कण 1 nm से छोटे होते हैं — इतने छोटे कण प्रकाश को बिखेरने में असमर्थ हैं।
Q3. क्रिस्टलीकरण और वाष्पीकरण में क्या फ़र्क है?
वाष्पीकरण में विलायक उड़ जाता है, विलेय अशुद्धियों सहित बचता है। क्रिस्टलीकरण में संतृप्त विलयन को ठंडा करने पर शुद्ध क्रिस्टल अलग होते हैं।
Q4. आसवन और प्रभाजी आसवन में अंतर?
आसवन: क्वथनांक अंतर ≥25°C। प्रभाजी आसवन: <25°C — जैसे कच्चे तेल का शोधन।
Q5. ऊर्ध्वपातन और निक्षेपण क्या हैं?
ऊर्ध्वपातन = ठोस → सीधे वाष्प। निक्षेपण = वाष्प → सीधे ठोस। दोनों में द्रव अवस्था नहीं आती।
Q6. मिश्र धातु को क्यों अलग नहीं किया जा सकता?
मिश्र धातु समांगी मिश्रण है — दोनों धातुएँ उच्च तापमान पर पिघलकर एकरूप हो जाती हैं। भौतिक विधियाँ उन्हें अलग नहीं कर सकतीं।
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