कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 7: द्रव्य की कणीय प्रकृति नोट्स (हल सहित)
कक्षा 8 विज्ञान (जिज्ञासा) अध्याय 7 "द्रव्य की कणीय प्रकृति" के हस्तलिखित नोट्स। घटक कण, गलनांक, क्वथनांक, वाष्पन की परिभाषाएँ, सभी चित्र, क्रियाकलाप 7.1 से 7.9 और अभ्यास के सभी 10 प्रश्नों के हल एक ही पोस्ट में।
अध्याय 7 — द्रव्य की कणीय प्रकृति
जिज्ञासा | कक्षा 8 विज्ञान | हस्तलिखित नोट्स ✍️
? सारे महत्वपूर्ण शब्द (Quick Definitions)
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घटक कण — वे मूल इकाइयाँ जिनसे किसी पदार्थ या सामग्री के बड़े टुकड़े का निर्माण होता है।
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अंतराकणीय स्थान — कणों के बीच के रिक्त स्थान (इनमें कुछ भी नहीं होता)।
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अंतराकणीय आकर्षण — द्रव्य के घटक कणों को आपस में जोड़े रखने वाला आकर्षण बल।
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गलनांक — वायुमंडलीय दाब पर वह न्यूनतम तापमान जिस पर ठोस पिघलकर द्रव में बदल जाता है।
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क्वथनांक — वायुमंडलीय दाब पर वह तापमान जिस पर द्रव उबलकर वाष्प में बदलता है।
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वाष्पन — क्वथनांक से कम तापमान पर सतह पर धीरे-धीरे वाष्प बनने की धीमी प्रक्रिया।
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तरल — प्रवाहित होने वाले पदार्थ (द्रव और गैस), जिनकी निश्चित आकृति नहीं होती।
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असंपीड्य — जिसे दाब लगाकर संपीडित (दबाकर आयतन कम) न किया जा सके, जैसे जल।
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निलंबित कणीय द्रव्य — वायु में तैरते धूल के सूक्ष्म कण (वायु प्रदूषण में प्रयुक्त पद)।
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परमाणु — द्रव्य के सूक्ष्म कण, जैसे लोहे का टुकड़ा लोहे के परमाणुओं से बना है।
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अणु — एक ही तत्व के निश्चित संख्या में परमाणु जुड़कर बने स्थायी कण (H₂ के 2 परमाणु = 1 अणु; जल = 2 H + 1 O)।
? भूमिका: अपरदन से पर्वतों की चट्टानें टूटती हैं, नदियाँ उन टुकड़ों को बहाकर कंकड़, पत्थर और रेत बनाती हैं। अंततः चट्टानें रेत और मिट्टी के महीन कणों में बदल जाती हैं — ये कण भी और तोड़े जा सकते हैं।
7.1 द्रव्य किससे बना होता है?
क्रियाकलाप 7.1 — चॉक को तोड़ना और पीसना
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चॉक का टुकड़ा लें और बार-बार तोड़ें जब तक हाथ से तोड़ना कठिन न हो।
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छोटे टुकड़ों को ओखल-मूसल में पीसकर चूर्ण बनाएँ।
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चूर्ण को आवर्धक लेंस से देखें।
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चॉक पीसना भौतिक परिवर्तन है — कोई नया पदार्थ नहीं बनता, केवल कणों का आकार छोटा होता है।
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पीसना जारी रखें तो ऐसी स्थिति आएगी जब कण और नहीं टूटेंगे — वही चॉक के घटक कण हैं।
चित्र 7.1 — चॉक: (क) टुकड़ा (ख) दो भाग (ग) चूर्ण (घ) लेंस से अवलोकन
परिभाषा — घटक कण
वे मूल इकाइयाँ जिनसे किसी पदार्थ के बड़े टुकड़े का निर्माण होता है। रेत और मिट्टी के कण चट्टान की सबसे छोटी इकाई नहीं हैं; चट्टान इनके घटक कणों की बहुत बड़ी संख्या से बनी है।
क्रियाकलाप 7.2 — जल में चीनी घोलना
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गिलास में पेय जल लें, दो चम्मच चीनी डालें, बिना हिलाए ऊपरी सतह का जल चखें — हल्का मीठा।
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अब चीनी पूरी तरह घुलने तक हिलाएँ, फिर चखें — पूरा विलयन मीठा लगता है।
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चीनी के कण दिखाई नहीं देते, पर स्वाद से उनके होने का पता चलता है।
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चीनी घुलकर अपने घटक कणों में टूट जाती है; ये कण जल के कणों के बीच उपलब्ध स्थानों में चले जाते हैं।
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चीनी का एक छोटा दाना भी लाखों घटक कणों से बना है।
चित्र 7.2 — जल में चीनी का घुलन
निष्कर्ष
द्रव्य अति सूक्ष्म कणों की बहुत अधिक संख्या से बना है। ये कण इतने छोटे हैं कि सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं दिखते। कणों के बीच के स्थान को अंतराकणीय स्थान कहते हैं।
7.2 द्रव्य की विभिन्न अवस्थाएँ कैसे निर्धारित होती हैं?
द्रव्य के घटक कण अंतराकणीय आकर्षण बल से जुड़े होते हैं। इस बल की प्रबलता पदार्थ की प्रकृति और कणों के बीच की दूरी पर निर्भर है। दूरी थोड़ी भी बढ़े तो बल बहुत घट जाता है। इसी बल की प्रबलता से पदार्थ की भौतिक अवस्था तय होती है।
?? हमारी वैज्ञानिक परंपरा
प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य कणाद ने सर्वप्रथम परमाणु की अवधारणा बताई। उनके अनुसार द्रव्य सूक्ष्म, अविभाज्य, शाश्वत कणों से बना है जिन्हें परमाणु कहा गया। यह विचार उनके ग्रंथ वैशेषिक सूत्र में है।
7.2.1 ठोस अवस्था
क्रियाकलाप 7.3: लोहे की कील, सेंधा नमक, पत्थर, लकड़ी का गुटका, चाबी, ऐलुमिनियम का टुकड़ा इकट्ठा कर उनका आकार देखें और हथौड़े से पीटें — सभी की निश्चित आकृति और आयतन है।
चित्र 7.3 — कुछ ठोस वस्तुएँ
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ठोस में कण दृढ़ता से संकुलित होते हैं।
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अंतराकणीय आकर्षण अत्यंत प्रबल; अंतराकणीय स्थान न्यूनतम।
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कण अपनी जगह पर केवल कंपन/दोलन कर सकते हैं, स्थान नहीं बदल सकते।
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इसलिए ठोस की निश्चित आकृति और निश्चित आयतन होता है।
गरम करने पर: कण अधिक तीव्रता से कंपन करते हैं → कंपन इतना तीव्र कि कण स्थान छोड़ने लगते हैं → अंतराकणीय बल दुर्बल → ठोस द्रव बन जाता है।
चित्र 7.4 — ठोस के पिघलने पर कणों की व्यवस्था: (क) ठोस (ख) उच्च कंपन करते कण (ग) द्रव
परिभाषा — गलनांक
वायुमंडलीय दाब पर वह न्यूनतम तापमान जिस पर कोई ठोस पिघलकर द्रव में बदलता है। द्रव में कण ठोस की तुलना में कुछ अधिक दूरी पर होते हैं (अपवाद: बर्फ, जिसके कण जल से अधिक दूर होते हैं)। जिन ठोसों में आकर्षण दुर्बल है उनका गलनांक निम्न और प्रबल वालों का उच्च होता है।
| क्र.सं. | सामग्री | गलनांक |
|---|---|---|
| 1 | बर्फ | 0 °C |
| 2 | यूरिया | 133 °C |
| 3 | लोहा | 1538 °C |
तालिका 7.1 — कुछ ठोस वस्तुओं के गलनांक
7.2.2 द्रव अवस्था
क्रियाकलाप 7.4: तीन अलग आकृति के पात्र (अ, ब, स) पर 200 mL का निशान लगाएँ। जल को अ → ब → स में बारी-बारी डालें।
चित्र 7.5 — विभिन्न आकृतियों के पात्रों में रखा जल
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जल हर पात्र की आकृति ले लेता है → द्रव की आकृति निश्चित नहीं, क्योंकि कण गति करने को स्वतंत्र हैं।
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जल का स्तर हर पात्र में 200 mL रहता है → द्रव का आयतन निश्चित होता है।
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(पात्र गंदा हो तो कुछ बूँदें चिपककर स्तर थोड़ा कम कर सकती हैं।)
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द्रव के कण स्वतंत्र गति करते हैं, पर केवल सीमित स्थान के भीतर।
चित्र 7.6 — जल में अँगुली घुमाना
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अँगुली जल में आसानी से घूमती है पर ठोस में नहीं — जल को अस्थायी रूप से विस्थापित करती है, हटाते ही जल पूर्व स्थिति में आ जाता है।
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अतः द्रव में आकर्षण ठोस की अपेक्षा दुर्बल, फिर भी इतना प्रबल कि कणों को पास रखे।
परिभाषा — क्वथनांक और वाष्पन
क्वथनांक: वायुमंडलीय दाब पर वह तापमान जिस पर द्रव उबलकर वाष्प में बदलता है। इस पर कणों की गति इतनी तीव्र हो जाती है कि वे दूर जाने लगते हैं, आकर्षण घटता है और वाष्प/गैस बनती है। क्वथनांक पर वाष्प सतह और द्रव के भीतर (बुलबुलों के रूप में) बनती है।
वाष्पन: क्वथनांक से कम तापमान पर, किसी भी तापमान पर, केवल सतह पर धीरे-धीरे वाष्प बनना। (छलका जल कुछ समय बाद लुप्त हो जाना।)
वाष्पन: क्वथनांक से कम तापमान पर, किसी भी तापमान पर, केवल सतह पर धीरे-धीरे वाष्प बनना। (छलका जल कुछ समय बाद लुप्त हो जाना।)
7.2.3 गैसीय अवस्था
क्रियाकलाप 7.5: जार (अ) को जलती अगरबत्ती के धुएँ पर उलटा पकड़कर धुआँ भरें, काँच के ढक्कन से ढकें, उस पर जार (ब) उलटा रखें, ढक्कन हटाएँ। धुआँ जार (ब) में भी फैल जाता है।
चित्र 7.7 — धुआँ गैस जारों के भीतर स्वतंत्र रूप से फैलता है
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धुआँ उपलब्ध पूरे स्थान में फैलता है → गैस का आयतन निश्चित नहीं।
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गैस पात्र की आकृति ले लेती है → आकृति निश्चित नहीं।
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कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र गति करते हैं; अंतराकणीय आकर्षण नगण्य; अंतराकणीय स्थान अधिकतम।
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वायु के अदृश्य कण धुएँ के कणों से टकराते हैं, इसलिए धुएँ की गति से गैस-कणों की गति का पता चलता है।
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यही प्रयोग आयोडीन वाष्प से भी किया जा सकता है (सावधानी: वाष्प से जलन हो सकती है)।
चित्र 7.8 — गैस जार में फैलती आयोडीन वाष्प
परिभाषा — तरल
द्रव और गैस दोनों प्रवाहित होते हैं और इनकी निश्चित आकृति नहीं होती, इसलिए ठोस से अलग इन्हें तरल कहा जाता है।
7.3 अवस्थाओं में अंतराकणीय स्थान कैसे भिन्न?
क्रियाकलाप 7.6 — सिरिंज में वायु दबाना
चित्र 7.9 — विभिन्न स्थितियों में सिरिंज का प्लंजर
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बिना सुई की सिरिंज में प्लंजर बाहर खींचें, अँगूठे से मुँह बंद करें, प्लंजर को धीरे-धीरे अंदर दबाएँ।
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वायु का आयतन कम हो जाता है → गैस-कणों के बीच बहुत स्थान है, जो बाहरी दाब से घटाया जा सकता है (गैस संपीड्य)।
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दाब हटाने पर कण फैलते हैं, प्लंजर मूल स्थिति में आ जाता है।
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जल से यही करने पर पता चलता है कि जल असंपीड्य है।
क्रियाकलाप 7.7 — जल में चीनी/नमक/रेत
चित्र 7.10 — जलस्तरों में परिवर्तन
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चीनी डालने पर स्तर थोड़ा बढ़ता है (निशान ब)।
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घुलने के बाद स्तर कुछ घट जाता है (निशान स)।
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विलयन का आयतन जल + चीनी के आयतनों के योग से कम होता है।
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अतः जल के कणों के बीच रिक्त स्थान होते हैं, घुले पदार्थ के कण इन्हीं स्थानों में चले जाते हैं।
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साधारण नमक, ग्लूकोस भी घुलते हैं; रेत और पत्थर अघुलनशील हैं — रेत जल में नीचे बैठकर स्थान घेरती है और कुल आयतन बढ़ जाता है।
चित्र 7.11 — जल में चीनी के कणों का वितरण
चित्र 7.12 — तीन अवस्थाओं में अंतराकणीय स्थान: (क) ठोस (ख) द्रव (ग) गैस
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ठोस: कण सुसंकुलित, फिर भी कुछ स्थान रिक्त।
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इन स्थानों में वायु नहीं होती — वहाँ कुछ भी नहीं होता।
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द्रव: ठोस से कुछ अधिक स्थान।
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गैस: सबसे अधिक स्थान।
⬆ एक सोपान ऊपर — "कण" शब्द के अर्थ
वायु प्रदूषण में प्रयुक्त निलंबित कणीय द्रव्य वायु में तैरते धूल के सूक्ष्म कण हैं, ये द्रव्य के घटक कण नहीं हैं (घटक कण इनसे भी अत्यंत सूक्ष्म होते हैं)। ये धूल कण भी परमाणुओं और अणुओं की बहुत बड़ी संख्या से बने हैं।
7.4 अवस्थाओं में कणों की गति
क्रियाकलाप 7.8 — जल में पोटैशियम परमैंगनेट
चित्र 7.13 — (क) गुलाबी रंग की फैलती धारियाँ (ख) एकसमान बैंगनी रंग
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जल में पोटैशियम परमैंगनेट के दाने डालने पर गुलाबी धारियाँ फैलती हैं, फिर पूरा जल एकसमान रंगीन हो जाता है।
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जल के कण परमैंगनेट के कणों को खींचते हैं, टकराकर पूरे द्रव में फैला देते हैं।
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रेत जैसे पदार्थ में कण प्रबलता से जुड़े होते हैं, जल के कण उन्हें अलग नहीं कर पाते, इसलिए वह अघुलनशील है।
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सुरक्षा: पोटैशियम परमैंगनेट को हाथ से न छुएँ, चम्मच/स्पैचुला से डालें।
वैज्ञानिक की भाँति सोचें
गरम, कक्ष-ताप और ठंडे (बर्फीले) जल में परमैंगनेट डालने पर गरम जल में सबसे तेज़, कक्ष-ताप में कम और ठंडे में सबसे धीरे फैलता है। निष्कर्ष: ऊष्मा देने पर कणों की गति बढ़ती है।
क्रियाकलाप 7.9 — अगरबत्ती की सुगंध
चित्र 7.14 — अगरबत्ती का जलना
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कक्ष के कोने में अगरबत्ती जलाने पर पहले सुगंध पास में आती है, फिर पूरे कक्ष में फैल जाती है।
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वायु के कण निरंतर गति करते हैं, सुगंध के कणों से टकराकर उन्हें चारों ओर फैलाते हैं।
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इत्र की सुगंध भी इसी प्रकार हम तक पहुँचती है।
चित्र 7.15 — साबुन के कण सफाई में सहायता करते हैं
क्या आपके संज्ञान में है…
साबुन के कण का एक सिरा तेल के कण से और दूसरा सिरा जल से जुड़ता है। इससे तेल बाहर निकलता है और कपड़े साफ हो जाते हैं।
? सारांश — द्रव्य की तीन अवस्थाएँ
द्रव्य की तीन अवस्थाओं की कणीय प्रकृति
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| अंतराकणीय स्थान | न्यूनतम | ठोस से कुछ अधिक | अधिकतम |
| कणों की व्यवस्था | सुसंकुलित | विरल संकुलित | स्वतंत्र |
| आकर्षण बल | अधिकतम | कुछ दुर्बल | नगण्य |
| कणों की गति | केवल कंपन | सीमित स्थान तक | पूरे स्थान में |
| आकृति | निश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | अनिश्चित |
? स्मरणीय बिंदु
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द्रव्य का निर्माण अत्यंत सूक्ष्म कणों से होता है।
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कण अंतराकणीय आकर्षण बलों से जुड़े रहते हैं।
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आकर्षण: ठोस में प्रबलतम, द्रव में कुछ दुर्बल, गैस में दुर्बलतम।
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कणों की ऊष्मीय ऊर्जा ही द्रव्य की भौतिक अवस्था निर्धारित करती है।
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ठोस: आकृति और आयतन निश्चित। द्रव: आयतन निश्चित, आकृति नहीं। गैस: दोनों नहीं।
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गलनांक पर ऊष्मा से ठोस के कणों का आकर्षण कमज़ोर पड़ता है; गैसीय अवस्था में कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र हो जाते हैं।
✅ अभ्यास — जिज्ञासा बनाए रखें (हल सहित)
प्र.1 ठोस पदार्थों और द्रवों में मूल अंतर यह है कि घटक कण…
उत्तर: (घ) ठोस पदार्थों में सुसंकुलित होते हैं और द्रवों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं।
प्र.2 सत्य/असत्य कथन पहचानिए।
उत्तर: (क) सत्य (ख) सत्य (ग) सत्य (घ) सत्य (ङ) सत्य (च) असत्य।
सही कथन (च): कपूर को गरम करने पर हम उसे ऊष्मीय ऊर्जा देते हैं जिससे उसके कणों की गति बढ़ती है और वे वाष्प बनकर फैल जाते हैं; ऊर्जा गंध के रूप में मुक्त नहीं होती।
सही कथन (च): कपूर को गरम करने पर हम उसे ऊष्मीय ऊर्जा देते हैं जिससे उसके कणों की गति बढ़ती है और वे वाष्प बनकर फैल जाते हैं; ऊर्जा गंध के रूप में मुक्त नहीं होती।
प्र.3 यदि हम किसी कुर्सी से सभी घटक कण हटा पाते तो क्या होता?
उत्तर: (ग) कुर्सी का कुछ भी नहीं बचता। (कुर्सी घटक कणों से ही बनी है, कण हटते ही पदार्थ शेष नहीं रहेगा।)
प्र.4 गैसें सरलतापूर्वक क्यों मिश्रित हो जाती हैं जबकि ठोस नहीं?
उत्तर: गैसों में अंतराकणीय आकर्षण नगण्य होता है, कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र गति करते हैं और उनके बीच बहुत अधिक स्थान होता है, इसलिए वे एक-दूसरे के कणों के बीच फैलकर आसानी से मिल जाती हैं (जैसे सुगंध)। ठोस में कण प्रबल बल से बँधे हैं, केवल कंपन करते हैं, स्थान नहीं बदल सकते, इसलिए ठोस आपस में मिश्रित नहीं होते।
प्र.5 दूध छलककर मेज़ पर बहता और फैलता है, पर गिलास की आकृति वही रहती है — सत्यापित कीजिए।
उत्तर: दूध द्रव है। द्रव की निश्चित आकृति नहीं होती, इसकी कण स्वतंत्र गति करते हैं, इसलिए वह बहकर फैल जाता है। काँच ठोस है जिसके कण दृढ़ता से संकुलित, प्रबल आकर्षण से जुड़े होते हैं, इसलिए उसकी आकृति नहीं बदलती।
प्र.6 बर्फ → जल → जल वाष्प में कणों की व्यवस्था का चित्र।
उत्तर:
पिघलने पर कणों के बीच दूरी बढ़ती है; उबलने/वाष्प बनने पर और अधिक बढ़ती है, आकर्षण घटता जाता है।
बर्फ (ठोस): सुसंकुलित, केवल कंपन
जल (द्रव): विरल, सीमित स्थान में गति
जल वाष्प (गैस): दूर-दूर, स्वतंत्र गति
प्र.7 कणों का निरूपण: (क) ऐलुमिनियम पर्णिका (ख) ग्लिसरीन (ग) मेथेन गैस
उत्तर:
(क) ऐलुमिनियम पर्णिका — ठोस
(ख) ग्लिसरीन — द्रव
(ग) मेथेन — गैस
चित्र 7.16 — (क) बुझी मोमबत्ती (ख) तीन अवस्थाओं में कणों की व्यवस्था
प्र.8 मोम की विभिन्न अवस्थाएँ पहचानकर चित्र 7.16 (ख) से मिलान कीजिए।
उत्तर: जमा हुआ मोम (ठोस) → पहला चित्र (सुसंकुलित, कण पास-पास)।
पिघला हुआ मोम (द्रव) → दूसरा चित्र (विरल, कण गति कर सकते हैं)।
बत्ती के पास मोम की वाष्प/गैस (जो जलती है) → तीसरा चित्र (कण दूर-दूर, स्वतंत्र)।
पिघला हुआ मोम (द्रव) → दूसरा चित्र (विरल, कण गति कर सकते हैं)।
बत्ती के पास मोम की वाष्प/गैस (जो जलती है) → तीसरा चित्र (कण दूर-दूर, स्वतंत्र)।
प्र.9 समुद्र का जल नमकीन क्यों होता है जबकि नमक दिखाई नहीं देता?
उत्तर: नमक जल में घुलकर अपने घटक कणों में टूट जाता है। ये अति सूक्ष्म कण जल के कणों के बीच के अंतराकणीय स्थानों में चले जाते हैं, इसलिए दिखते नहीं, पर पूरे जल में फैले होने से स्वाद नमकीन लगता है।
प्र.10 चावल के दाने और आटा पात्र का आकार ले लेते हैं — ठोस हैं या द्रव?
उत्तर: दोनों ठोस हैं। चावल का प्रत्येक दाना और आटे का प्रत्येक कण स्वयं ठोस है जिसकी अपनी निश्चित आकृति और आयतन है। ढेर में दानों/कणों के बीच स्थान होता है, इसलिए वे खिसककर पात्र का आकार ले लेते हैं, पर इससे प्रत्येक कण की आकृति नहीं बदलती — यह द्रव का गुण नहीं है।
? खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें
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बोतल के मुँह पर गुब्बारा लगाकर गरम जल में रखें — वायु गरम होकर फैलती है (कणों की गति और दूरी बढ़ती है), गुब्बारा फूल जाता है।
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मिट्टी की गोलियों/मोतियों से ठोस, द्रव, गैस का मॉडल बनाएँ।
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अलग-अलग तापमान पर कणों का नाटक/नृत्य करें।
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चर्चा: गैस का सब जगह फैलना — लाभ: सुगंध फैलना, साँस लेना; हानि: प्रदूषक और जहरीली गैसों का फैलना।
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