निरंकारी संत समागम 2026: दूसरे दिन ‘जागृति’ का संदेश
समलखां में 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के दूसरे दिन सतगुरु माता सुदीक्षा जी ने ‘जागृति’ पर संदेश दिया। प्रदर्शनी और ग्लोबल पीस अवॉर्ड की जानकारी।
समलखां (हरियाणा), 25 अक्टूबर 2026: 79वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के दूसरे दिन निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति ही वास्तविक जीवन का आधार है। समागम का मुख्य विषय ‘जागृति’ (The Awakening) है। 23 से 26 अक्टूबर तक चलने वाले इस चार दिवसीय आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु एवं भक्त एकत्रित हुए हैं।
समागम एक नज़र में
79वां वार्षिक निरंकारी सन्त समागम हरियाणा के पानीपत जिले में जी.टी. रोड पर स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समलखां में आयोजित हो रहा है। संत निरंकारी मिशन के अनुसार समागम 23 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2026 तक चलेगा और इसके बाद 27 अक्टूबर को गुरु वंदना होगी। समागम से जुड़े मुख्य तथ्य नीचे तालिका में दिए गए हैं।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आयोजन | 79वां वार्षिक निरंकारी सन्त समागम |
| तिथि | 23 से 26 अक्टूबर 2026 (गुरु वंदना 27 अक्टूबर को) |
| स्थान | संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, जी.टी. रोड, समलखां, जिला पानीपत, हरियाणा |
| मुख्य विषय | जागृति (The Awakening) |
| अपेक्षित उपस्थिति | लगभग 10 लाख श्रद्धालु (मिशन के सचिव के अनुसार) |
| सेवादार | एक लाख से अधिक |
| समागम स्थल | लगभग 650 एकड़ में फैला परिसर |
समागम के दूसरे दिन क्या हुआ
समागम के दूसरे दिन निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने उपस्थित विशाल मानव परिवार को संबोधित किया। उनके संबोधन से पहले निरंकारी राजपिता रमित जी ने अपने विचार रखे। इसी अवसर पर चिश्ती फाउंडेशन ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया।
आयोजकों द्वारा जारी जानकारी के अनुसार विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों से आए श्रद्धालुओं का यह प्रेमपूर्ण मिलन सौहार्द, सद्भावना और विश्वबंधुत्व की अनुपम छवि प्रस्तुत कर रहा है। समागम का वातावरण आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और आपसी प्रेम के भावों से परिपूर्ण है। समागम के कार्यक्रम में प्रतिदिन सत्संग और सतगुरु माता जी का प्रवचन शामिल है।
सतगुरु माता जी का संदेश: जागृति का वास्तविक अर्थ
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने आध्यात्मिक ‘जागृति’ के वास्तविक भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि जागृति का अर्थ केवल बाहरी सजगता नहीं है। उन्होंने फरमाया:
“जागरूकता केवल बाहरी सजगता तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों, व्यवहार और भावनाओं में भी चेतन रहना आवश्यक है।”
विचार, व्यवहार और भावना: जागृति के तीन आयाम
सतगुरु माता जी के इस कथन में जागृति के तीन आयाम सामने आते हैं। पहला आयाम विचार का है, यानी मन में उठने वाले विचारों के प्रति सजग रहना। दूसरा आयाम व्यवहार का है, यानी दूसरों के साथ किए जाने वाले आचरण में सजगता। तीसरा आयाम भावनाओं का है, यानी क्रोध, ईर्ष्या या अहंकार जैसी भावनाओं के प्रति जागरूक रहना। संदेश का सार यह है कि सजगता केवल बाहरी दिखावे या सामाजिक व्यवहार तक सीमित न रहे, बल्कि भीतर तक उतरे।
समागम के पहले दिन भी सतगुरु माता जी ने ‘मानवता के नाम संदेश’ में जागृति के इसी भाव पर बल दिया था। द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा था कि सच्ची जागृति तब आती है, जब मनुष्य हर क्षण परमात्मा की उपस्थिति का अनुभव करते हुए जीवन में अध्यात्म को अपनाता है। इसका सीधा संबंध इस बात से है कि जीवन का हर पल पूरी चेतना के साथ जिया जाए।
सच्ची भक्ति के बारे में सतगुरु माता जी ने क्या कहा?
सतगुरु माता जी के अनुसार सच्ची भक्ति किसी बाहरी पहचान की मोहताज नहीं है। वह प्रेम, विनम्रता, सहनशीलता और सत्य को जीवन में अपनाने से सार्थक होती है।
भक्ति की महत्ता को प्रकाशित करते हुए इस कथन का आशय यह है कि भक्ति की पहचान बाहरी चिह्नों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के स्वभाव और आचरण से होती है। जो व्यक्ति प्रेम से बात करता है, विनम्र रहता है, कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखता है और सत्य के मार्ग पर चलता है, उसी की भक्ति सार्थक मानी जाती है।
बदलते समय में सत्य ही आधार
सतगुरु माता जी ने कहा कि समय के साथ जीवनशैली में बदलाव स्वीकार करते हुए भी सत्य को अपना आधार बनाए रखना चाहिए। इस कथन का आशय यह है कि बदलते दौर में रहन-सहन, तकनीक और जीवन के तरीके भले ही बदलें, पर सत्य और मानवीय मूल्य अपनी जगह स्थिर रहने चाहिए।
सत्संग की सार्थकता और आत्मसुधार
सत्संग की सार्थकता पर बल देते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि सत्संग तभी सार्थक है, जब वहां प्राप्त शिक्षाओं को अपने आचरण में उतारा जाए और आत्मसुधार की भावना निरंतर बनी रहे। अर्थात सत्संग में केवल उपस्थित होना या प्रवचन सुन लेना पर्याप्त नहीं माना गया। असली कसौटी यह है कि सुनी हुई बातों का असर व्यक्ति के घर-परिवार, कार्यस्थल और समाज में उसके व्यवहार में दिखाई दे।
निरंकारी राजपिता रमित जी का संबोधन
सतगुरु माता जी के संबोधन से पूर्व निरंकारी राजपिता रमित जी ने दृष्टिहीन व्यक्ति और लालटेन के उदाहरण से आध्यात्मिक जागृति का भाव समझाया। उन्होंने कहा कि केवल गुरमुख का बाहरी स्वरूप धारण करना ही पर्याप्त नहीं है। जीवन में ब्रह्मज्ञान, प्रेम और समर्पण का प्रकाश निरंतर जागृत रहना चाहिए।
लालटेन के उदाहरण का भाव यह निकलता है कि प्रकाश का साधन हाथ में होना और उस प्रकाश को वास्तव में देख पाना, दोनों अलग बातें हैं। उसी प्रकार गुरमुख का रूप धारण करना बाहरी स्वरूप है, जबकि ब्रह्मज्ञान के प्रकाश को जीवन में अनुभव करना और उसे आचरण में उतारना भीतर की जागृति है।
सेवा, सुमिरन और सत्संग
राजपिता जी ने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और आचरण को निरंतर निखारना ही सच्ची आध्यात्मिक जागृति है। निरंकारी मिशन की शिक्षाओं में ये तीनों साधन केंद्र में माने जाते हैं। सेवा का अर्थ निःस्वार्थ भाव से दूसरों के लिए कार्य करना है, सुमिरन का अर्थ परमात्मा को निरंतर याद रखना है और सत्संग का अर्थ संतों की संगत में बैठकर ज्ञान को ग्रहण करना है।
चिश्ती फाउंडेशन ने दिया ग्लोबल पीस अवॉर्ड
चिश्ती फाउंडेशन ने समागम के दूसरे दिन निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया।
समागम के कार्यक्रम की रूपरेखा
संत निरंकारी मिशन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार समागम के दिनों में सुबह से रात तक सत्संग, सेवा और अन्य आयोजन चलते हैं। 24 और 25 अक्टूबर का कार्यक्रम इस प्रकार है।
| तारीख | कार्यक्रम | समय |
|---|---|---|
| 24 अक्टूबर | सेवादल रैली | सुबह 11:00 से दोपहर 1:00 बजे तक |
| 24 अक्टूबर | सत्संग कार्यक्रम | दोपहर 3:00 से रात 8:30 बजे तक |
| 24 अक्टूबर | सतगुरु माता जी का प्रवचन | रात 8:30 बजे से |
| 25 अक्टूबर | सत्संग कार्यक्रम | दोपहर 1:00 से रात 8:30 बजे तक |
| 25 अक्टूबर | सतगुरु माता जी का प्रवचन | रात 8:30 बजे से |
एक लाख से अधिक सेवादार, 650 एकड़ में फैला समागम स्थल
संत निरंकारी मिशन के सचिव जोगिंदर सुखीजा ने आईएएनएस को बताया कि समागम लगभग 650 एकड़ क्षेत्र में आयोजित हो रहा है और करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। उनके अनुसार मिशन के एक लाख से अधिक सेवादार समागम स्थल पर अलग-अलग स्थानों पर सेवा दे रहे हैं।
श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाएं
- भोजन के लिए चार बड़े सामुदायिक रसोई हॉल, चार पाक क्षेत्र और छह भोजन वितरण क्षेत्र बनाए गए हैं।
- समागम परिसर में 22 शौचालय खंड और पेयजल के कई केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
- श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं।
सेवादारों की यह भागीदारी समागम की उस भावना को भी दर्शाती है, जिसमें सत्संग के साथ निःस्वार्थ सेवा को बराबर महत्व दिया जाता है। मिशन के अनुसार इस वर्ष के समागम का उद्देश्य लोगों को मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य की पहचान कराना, आपसी प्रेम को मजबूत करना और सेवा तथा आतिथ्य जैसे मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
निरंकारी प्रदर्शनी: ज्ञान, जागृति और मानव कल्याण का प्रेरणादायी संगम
सन्त समागम में आधुनिक तकनीक, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों से सुसज्जित निरंकारी प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनी हुई है। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं विभिन्न आयु वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसे तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है: मुख्य प्रदर्शनी, बाल प्रदर्शनी तथा सन्त निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन (एस.एन.सी.एफ.) प्रदर्शनी।
| प्रदर्शनी | मुख्य विषय |
|---|---|
| मुख्य प्रदर्शनी | मिशन का इतिहास, आध्यात्मिक यात्रा, सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी की मानव कल्याण यात्राएं; तीन विशेष मॉडलों के माध्यम से समागम के विषय ‘जागृति’ की प्रस्तुति |
| बाल प्रदर्शनी | बच्चों का मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास; अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और जीवनोपयोगी शिक्षाएं |
| एस.एन.सी.एफ. प्रदर्शनी | संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन की सामाजिक कल्याण एवं समाज सुधार संबंधी गतिविधियां |
मुख्य प्रदर्शनी
इस प्रदर्शनी में मिशन के इतिहास, आध्यात्मिक यात्रा तथा सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी की मानव कल्याण यात्राओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। तीन विशेष मॉडलों के माध्यम से समागम के मुख्य विषय ‘जागृति’ को दर्शाते हुए आत्मचिंतन, आध्यात्मिक समझ एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि अपनाने की प्रेरणा दी गई है।
बाल प्रदर्शनी
यह प्रदर्शनी बच्चों के मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास पर केंद्रित है। रोचक प्रस्तुतियों के माध्यम से अच्छे संस्कारों, नैतिक मूल्यों एवं जीवनोपयोगी शिक्षाओं को अपनाने का संदेश दिया गया है, ताकि बच्चे शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी अपने जीवन में स्थान दे सकें। प्रदर्शनी में पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों को भी महत्व दिया गया है।
एस.एन.सी.एफ. प्रदर्शनी
इस प्रदर्शनी में संत निरंकारी मिशन की सामाजिक कल्याण एवं समाज सुधार से जुड़ी गतिविधियों को दर्शाया गया है। इसमें रक्तदान, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक जागरूकता तथा सादे एवं सामूहिक विवाह जैसे प्रयासों के माध्यम से निःस्वार्थ सेवा, मानवता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा प्रदान की गई।
संत निरंकारी मिशन: संक्षिप्त पृष्ठभूमि
विकिपीडिया में दर्ज जानकारी के अनुसार संत निरंकारी मिशन की औपचारिक शुरुआत 25 मई 1929 को हुई थी। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज मिशन की छठी आध्यात्मिक प्रमुख हैं और उन्होंने यह दायित्व 17 जुलाई 2018 को संभाला था। वर्तमान समागम उनकी उपस्थिति में तथा निरंकारी राजपिता रमित जी के सान्निध्य में आयोजित हो रहा है।
वार्षिक संत समागम में हर वर्ष देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। पिछले वर्ष के 78वें समागम का विषय ‘आत्म मंथन’ था, जबकि इस वर्ष का विषय ‘जागृति’ है।
एकत्व और विश्वबंधुत्व का संदेश
समागम में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस बात का उदाहरण मानी जा रही है कि भाषा, क्षेत्र और संस्कृति की भिन्नता के बावजूद लोग एक मंच पर एकत्व की भावना के साथ जुड़ सकते हैं। आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार समागम का उद्देश्य लोगों को पूर्वाग्रहों से ऊपर उठने और दूसरों के प्रति अधिक करुणामय दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।
सतगुरु माता जी का ‘जागृति’ पर संदेश इसी भाव से जुड़ता है। जब व्यक्ति अपने विचारों, व्यवहार और भावनाओं के प्रति सजग होता है, तब उसके संबंध परिवार, पड़ोस और समाज में अधिक संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण बनते हैं। राजपिता जी द्वारा बताई गई सेवा, सुमिरन और सत्संग की त्रयी भी व्यक्ति को अहंकार से मुक्त कर मानवता से जोड़ने का मार्ग बताई गई है।
समागम की झलकियां
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समागम की झलक -
समागम की झलक
आगे का कार्यक्रम
चार दिवसीय समागम 26 अक्टूबर तक चलेगा। मिशन के कार्यक्रम के अनुसार 27 अक्टूबर 2026 को गुरु वंदना का आयोजन होगा। समागम के शेष दिनों में भी सत्संग कार्यक्रम होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
79वें निरंकारी सन्त समागम का मुख्य विषय क्या है?
79वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम का मुख्य विषय ‘जागृति’ (The Awakening) है। इसमें विचारों, व्यवहार और भावनाओं में चेतन रहने तथा प्रेम, करुणा और निःस्वार्थ सेवा को अपनाने पर बल दिया गया है।
79वां निरंकारी सन्त समागम कब और कहां हो रहा है?
79वां वार्षिक निरंकारी सन्त समागम 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, जी.टी. रोड, समलखां (पानीपत, हरियाणा) में आयोजित हो रहा है। 27 अक्टूबर को गुरु वंदना होगी।
चिश्ती फाउंडेशन ने ग्लोबल पीस अवॉर्ड से किसे सम्मानित किया?
चिश्ती फाउंडेशन ने निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया।
समागम में कितने श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है?
संत निरंकारी मिशन के सचिव के अनुसार समागम में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जबकि एक लाख से अधिक सेवादार व्यवस्थाओं में लगे हैं।
निरंकारी प्रदर्शनी कितने भागों में बांटी गई है?
निरंकारी प्रदर्शनी तीन भागों में बांटी गई है: मुख्य प्रदर्शनी, बाल प्रदर्शनी तथा सन्त निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन (एस.एन.सी.एफ.) प्रदर्शनी।
सतगुरु माता जी ने सच्ची भक्ति के बारे में क्या कहा?
सतगुरु माता जी ने कहा कि सच्ची भक्ति किसी बाहरी पहचान की मोहताज नहीं है, बल्कि प्रेम, विनम्रता, सहनशीलता और सत्य को जीवन में अपनाने से सार्थक होती है।
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