दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात – Class 8 Science Chapter 6 Notes (Hindi)

कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 6 "दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात" के सभी टॉपिक्स की परिभाषाएँ, डायग्राम और हल किए गए एक्सरसाइज़ प्रश्न — नोटबुक स्टाइल नोट्स हिंदी में।

Sep 26, 2026 - 06:21
Updated: 14 hours ago
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"Class 8 Science Chapter 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात notes cover image with cyclone diagram – NCERT Jigyasa textbook"

अध्याय 6 — दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात
? परिभाषाएँ, चित्र एवं हल किए गए प्रश्न — Notebook Notes
? 6.1 दाब (Pressure)
परिभाषा: किसी पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लंबवत लगने वाले बल को दाब कहते हैं।
दाब = बल / क्षेत्रफल
? SI मात्रक: न्यूटन/मीटर² (N/m²) — इसे पास्कल (Pa) भी कहते हैं।
? कम क्षेत्रफल पर बल लगे तो दाब अधिक; अधिक क्षेत्रफल पर वही बल लगे तो दाब कम होता है। इसी कारण कील को नुकीले सिरे से ठोका जाता है और चाकू की तेज़ धार से काटना आसान होता है।
चित्र 6.1 — बैग की पट्टियाँ
चित्र 6.2 — चौड़े व संकरे हत्थों वाली बाल्टियाँ
चित्र 6.3 — भार वहन
? द्रव द्वारा दाब (Liquid Pressure)
परिभाषा: द्रव अपने पात्र के तल तथा दीवारों पर सभी दिशाओं में दाब डालता है। किसी पात्र में द्रव द्वारा लगाया गया दाब द्रव-स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है, पात्र की चौड़ाई पर नहीं।
? इसीलिए जल की टंकियाँ ऊँचाई पर रखी जाती हैं जिससे नल में जल का दाब व प्रवाह बढ़ जाए।
? द्रव दीवारों पर भी दाब डालता है — इसी कारण बाँध का आधार ऊपरी भाग से अधिक चौड़ा बनाया जाता है।
चित्र 6.4 — उपरिवर्ती टंकी
चित्र 6.5 — समान ऊँचाई ⇒ समान फैलाव
चित्र 6.6 — अधिक ऊँचाई ⇒ अधिक फैलाव
चित्र 6.7 — दीवार पर दाब
चित्र 6.8 — बाँध (चौड़ा आधार)
? 6.2 वायु द्वारा आरोपित दाब
वायुमंडल: पृथ्वी के चारों ओर वायु के आवरण को वायुमंडल कहते हैं (नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, CO₂ आदि गैसों से मिलकर बना)।
वायुमंडलीय दाब: हमारे चारों ओर वायु द्वारा डाला गया दाब वायुमंडलीय दाब कहलाता है। वायु सभी दिशाओं में दाब आरोपित करती है।
? 15cm×15cm क्षेत्रफल पर वायु-स्तंभ का बल ≈ 225 kg भार (2250 N) के बराबर होता है। शरीर के भीतर का दाब बाहरी दाब को संतुलित करता है, इसलिए हम दबते नहीं।
? प्रायोगिक मात्रक: मिलीबार (mb) / हैक्टोपास्कल (hPa) = 100 Pa
6.9(क) प्लेट पर छड़
6.9(ख) मुड़ा चार्ट
6.9(ग) बिना मुड़ा चार्ट
चित्र 6.10 — गुब्बारा फुलाना
चित्र 6.11 — रबड़ का चूषक
? 6.3 पवन का बनना (Formation of Wind)
पवन (Wind): गतिशील वायु को पवन कहते हैं।
नियम: वायु सदैव उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है — यही पवन के बनने का मुख्य कारण है।
? स्थल समीर व समुद्र समीर: दिन में स्थल जल्दी गरम होकर निम्न दाब बनाता है ⇒ समुद्र से स्थल की ओर हवा (समुद्र समीर)। रात में जल अधिक गरम रहता है ⇒ स्थल से समुद्र की ओर हवा (स्थल समीर)।
चित्र 6.12 — उच्च दाब→निम्न दाब
? 6.4 तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है
नियम (बरनौली सिद्धांत जैसा प्रभाव): जहाँ वायु तेज़ गति से बहती है, वहाँ वायुदाब कम हो जाता है।
? जब तीव्र पवन घर की छत के ऊपर से गुज़रती है तो छत के ऊपर दाब कम व नीचे (घर के भीतर) दाब अधिक हो जाता है — इस दाब-अंतर के कारण झंझावात में छतें उड़ जाती हैं। इसीलिए तूफान के समय दरवाजे-खिड़कियाँ खुली रखनी चाहिए, ताकि भीतर-बाहर दाब बराबर रहे।
6.14(क) छत उड़ते हुए
6.14(ख) छत यथावत
? 6.5 झंझावात, तड़ितझंझा और तड़ित
झंझावात (Storm): तीव्र वायु के साथ होने वाली वर्षा को झंझावात कहते हैं। गरम स्थल पर आर्द्र वायु ऊपर उठकर संघनित होती है, बादल बनते हैं और वर्षा/ओले/हिम गिरते हैं।
तड़ित (Lightning): बादलों में ऊर्ध्वगामी-अधोगामी वायु के घर्षण से धनावेश व ऋणावेश अलग हो जाते हैं। जब आवेश अत्यधिक हो जाता है तो वायु का विद्युतरोधी गुण टूट जाता है और आवेशों के अचानक प्रवाह से उत्पन्न चमक को तड़ित कहते हैं।
गर्जन (Thunder): तड़ित के कारण आस-पास की वायु तीव्रता से गरम व फैलती है, जिससे उत्पन्न तीव्र ध्वनि गर्जन कहलाती है।
तड़ित-झंझावात: तड़ित व गर्जन के साथ आने वाला झंझावात।
तड़ित चालक: भवन की दीवार से लगी नुकीले सिरे वाली धातु की छड़, जो वैद्युत आवेश को सुरक्षित रूप से भूमि में पहुँचा देती है।
चित्र 6.15 — ऊपर-नीचे जाती वायु
चित्र 6.16 — तड़ित
चित्र 6.17 — सुरक्षित स्थिति
चित्र 6.18 — तड़ित चालक
? 6.6 चक्रवात (Cyclone)
परिभाषा: महासागर के गरम जल के ऊपर बनने वाले बड़े झंझावात को चक्रवात कहते हैं। गरम, आर्द्र वायु ऊपर उठकर निम्न दाब क्षेत्र बनाती है; पृथ्वी के घूर्णन के कारण वायु चक्रण करती है और चारों ओर तीव्रगामी पवन का चक्र बन जाता है।
चक्रवात अक्षि (Eye of cyclone): चक्रवात के केंद्र में अत्यधिक निम्न दाब का शांत क्षेत्र, जबकि आस-पास तीव्र वायु व भारी वर्षा होती है।
? स्थल पर पहुँचते ही नम वायु का स्रोत टूटने से चक्रवात क्षीण होने लगता है, परंतु पीछे विनाशकारी प्रभाव छोड़ जाता है (उदा. वर्ष 2020 का अम्फान चक्रवात — गति 270 km/h)।
चित्र 6.19 — दाब वलय
चित्र 6.20 — चक्रवात संरचना
⭐ स्मरणीय बिंदु (सार)
✔ दाब = बल/क्षेत्रफल; SI मात्रक N/m² (पास्कल)
✔ द्रव व गैस पात्र की दीवारों पर भी दाब डालते हैं
✔ वायुदाब में अंतर से पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है
✔ तीव्र वायु से दाब घटता है (छत उड़ना)
✔ आर्द्र व तीव्र वायु से तड़ित-झंझावात बनते हैं; बादलों में आवेश-पृथक्करण से तड़ित
✔ गरम सागर जल के ऊपर चक्रवात बनते हैं; केंद्र में शांत 'चक्रवात अक्षि'
✏️ जिज्ञासा बनाए रखें — हल सहित
प्र.1 सही विकल्प चुनिए —
(i) पात्र 'ग' में जल भरा जा रहा है। भरना रोकने पर पात्रों में जलस्तर होगा —
(क) पात्र 'क' में उच्चतम (ख) पात्र 'ख' में उच्चतम
(ग) पात्र 'ग' में उच्चतम ✅ (घ) सभी पात्रों में समान
? कारण: तीनों पात्र आपस में जुड़े हैं, अतः द्रव-स्तंभ की ऊँचाई (दाब) सब में बराबर होकर समान स्तर पर टिकती है (संचारी पात्रों का सिद्धांत)।
(ii) रबर चूषक 'क' समतल चिकने पृष्ठ पर तथा समान चूषक 'ख' खुरदरे पृष्ठ पर दबाया गया —
✅ (ग) 'क' चिपक जाएगा परंतु 'ख' नहीं चिपकेगा (घ) उल्टा
? कारण: खुरदरे पृष्ठ पर हवा के रिसने के रास्ते रह जाते हैं, अतः भीतर व बाहर के दाब में अंतर नहीं बन पाता।
(iii) टंकी को H ऊँचाई पर रखा है, भूतल पर अधिक दाब पाने के लिए —
✅ (क) ऊँचाई H को बढ़ा दिया जाए
? कारण: दाब द्रव-स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है — ऊँचाई जितनी अधिक, दाब उतना अधिक।
(iv) दो पात्र 'क','ख' में समान स्तर तक जल भरा (क्षेत्रफल भिन्न) —
✅ (ख) Pक = Pख, Fक < Fख
? कारण: समान ऊँचाई ⇒ दाब समान, पर अधिक क्षेत्रफल वाले पात्र 'ख' में कुल बल (F=दाब×क्षेत्रफल) अधिक होगा।
प्र.2 सत्य/असत्य बताइए —
(i) वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है। ✅ सत्य
(ii) द्रव केवल पात्र के तल पर दाब डालते हैं। ❌ असत्य (दीवारों पर भी डालते हैं)
(iii) चक्रवात अक्षि में मौसम झंझावाती होता है। ❌ असत्य (अक्षि में मौसम शांत होता है)
(iv) तड़ित-झंझा के समय हम कार में सुरक्षित रहते हैं। ✅ सत्य
प्र.3 रेतीली सतह पर लड़का लेटा (6.23-क) या खड़ा (6.23-ख) — किसमें अधिक धँसेगा?
6.23(क) लेटा हुआ
6.23(ख) खड़ा हुआ
उत्तर: खड़े होने की स्थिति (ख) में लड़का रेत में अधिक धँसेगा।
? कारण: खड़े होने पर शरीर का भार पैरों के बहुत कम क्षेत्रफल पर पड़ता है जिससे दाब अधिक हो जाता है, जबकि लेटने पर वही भार अधिक क्षेत्रफल पर फैल जाता है और दाब कम हो जाता है।
प्र.4 हाथी के एक पैर का क्षेत्रफल 0.25 m², भार 20000 N। स्थल पर दाब ज्ञात कीजिए (चारों पैरों पर खड़ा)।
कुल क्षेत्रफल = 4 × 0.25 m² = 1 m²
दाब = बल / क्षेत्रफल = 20000 N / 1 m² = 20000 N/m² (Pa)
प्र.5 नाव 'क': आधार क्षेत्रफल 7 m², 5 लोग। नाव 'ख': आधार क्षेत्रफल 3.5 m², 3 लोग। प्रत्येक व्यक्ति का भार 700 N। किस नाव पर अधिक दाब लगेगा?
नाव 'क': बल = 5×700 = 3500 N ⇒ दाब = 3500/7 = 500 N/m²
नाव 'ख': बल = 3×700 = 2100 N ⇒ दाब = 2100/3.5 = 600 N/m²
अतः नाव 'ख' पर 600 N/m² दाब लगेगा, जो नाव 'क' (500 N/m²) से 100 N/m² अधिक है।
प्र.6 यदि वायु और बादल दोनों विद्युत के सुचालक होते तो क्या तड़ित उत्पन्न होती?
उत्तर: नहीं। वायु का विद्युतरोधी गुण ही बादलों में धनावेश व ऋणावेश को अलग-अलग जमा होने देता है। यदि वायु व बादल सुचालक होते तो आवेश तुरंत बहकर बराबर हो जाते और कोई आवेश-पृथक्करण या अचानक विसर्जन (तड़ित) नहीं होता।
प्र.7 बोतल में जल भरकर दो समान गुब्बारे 'क','ख' पर क्या प्रभाव पड़ेगा (चित्र 6.24)?
उत्तर: हाँ, दोनों गुब्बारे फूलेंगे और समान रूप से फूलेंगे।
? कारण: दोनों गुब्बारे बोतल में समान ऊँचाई पर हैं, अतः जल-स्तंभ की ऊँचाई दोनों तरफ बराबर है और द्रव दाब ऊँचाई पर ही निर्भर करता है, दिशा या नली के आकार पर नहीं।
प्र.8 झंझावात चक्रवात में किस प्रकार परिवर्तित हो जाता है?
जब झंझावात गरम महासागरीय जल के ऊपर विकसित होता है, तो लगातार आर्द्र-गरम वायु ऊपर उठकर निम्न दाब क्षेत्र बनाती रहती है और पृथ्वी के घूर्णन के कारण यह वायु चक्रण करने लगती है। यह चक्रण बार-बार होने से चारों ओर तीव्रगामी घूमने वाली वायु का एक बड़ा तंत्र बन जाता है, जो चक्रवात कहलाता है — अर्थात उपयुक्त परिस्थितियों (गरम सागर, निरंतर आर्द्र वायु आपूर्ति, पृथ्वी का घूर्णन) में स्थानीय झंझावात बड़े संगठित चक्रवात का रूप ले लेता है।
प्र.9 गर्मियों की दोपहर, समुद्र तट पर पेड़ झुके हुए — 'क' या 'ख' में स्थल किस ओर है?
उत्तर: पेड़ 'ख' की ओर से 'क' की ओर झुके दिख रहे हैं अर्थात हवा 'ख' से 'क' की ओर बह रही है। दोपहर में स्थल जल्दी गरम होकर निम्न दाब बनाता है, इसलिए समुद्र (उच्च दाब) से स्थल (निम्न दाब) की ओर हवा चलती है (समुद्र समीर)। अतः 'ख' की ओर समुद्र तथा 'क' की ओर स्थल है (हवा जिस ओर बह रही है वह स्थल है)।
प्र.10 कोई ऐसा क्रियाकलाप बताइए जो दर्शाए कि वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है।
दो गुब्बारों को फुलाकर एक नली से जोड़ दें (क्रियाकलाप 6.5 जैसा)। एक गुब्बारे को अधिक व दूसरे को कम फुलाकर मुँह छोड़ दें — अधिक फूले गुब्बारे (उच्च दाब) से हवा नली द्वारा कम फूले गुब्बारे (निम्न दाब) में जाने लगती है, जब तक दोनों में दाब बराबर न हो जाए। यह दर्शाता है कि वायु सदैव उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है।
प्र.11 तड़ित-झंझा क्या है? इसकी निर्माण प्रक्रिया समझाइए।
तड़ित (चमक) एवं गर्जन के साथ आने वाले झंझावात को तड़ित-झंझा कहते हैं।
निर्माण: गरम स्थल पर आर्द्र गरम वायु हल्की होकर ऊपर उठती है, निम्न दाब बनता है; आस-पास से ठंडी वायु आकर उसे घेरती व गरम होकर ऊपर उठती है — यह चक्र बार-बार चलता है। ऊपर उठती वायु ठंडी होकर संघनित होती है और जल की बूँदें/बादल बनते हैं। ऊर्ध्वगामी-अधोगामी तीव्र वायु के घर्षण से बादलों में धन व ऋण आवेश अलग हो जाते हैं, जिससे तड़ित व गर्जन उत्पन्न होते हैं और भारी वर्षा/ओले गिरते हैं।
प्र.12 उस प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए जिसके कारण तड़ित उत्पन्न होती है।
तीव्र ऊर्ध्वगामी व अधोगामी वायु से बादल के भीतर हिम-कणों व जल-बूँदों में घर्षण होता है, जिससे बादलों में स्थिर वैद्युत आवेश उत्पन्न होता है। हल्के धनावेशित कण बादल के ऊपरी भाग में तथा भारी ऋणावेशित बूँदें निचले भाग में जमा होती हैं (आवेश-पृथक्करण)। जब यह आवेश बहुत अधिक हो जाता है तो वायु का विद्युतरोधी गुण टूट जाता है और आवेशों का वायु में अचानक प्रवाह होता है — इस क्षणिक चमकीले प्रकाश को तड़ित कहते हैं।
प्र.13 प्रदर्शपट्ट (बैनर) व विज्ञापन पट्ट (होर्डिंग्स) में छिद्र क्यों बनाए जाते हैं?
बड़े बैनर/होर्डिंग्स पर तेज़ हवा लगने से उनके दोनों ओर दाब-अंतर बनता है और हवा का पूरा बल पट्ट पर एक बड़े क्षेत्रफल में साबुत सतह की तरह लगता है, जिससे वे उखड़ या फट सकते हैं। छिद्र बनाने से हवा उन छिद्रों से होकर पार निकल जाती है, जिससे आगे-पीछे का दाब-अंतर कम हो जाता है और हवा का प्रभावी बल घट जाता है — इस प्रकार पट्ट सुरक्षित रहता है।
✍️ Notebook style notes • जिज्ञासा — कक्षा 8 विज्ञान • अध्याय 6

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