Title: कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 8 नोट्स: समय एवं गति का मापन (हस्तलिखित नोट्स + NCERT प्रश्न-उत्तर)

कक्षा 7 विज्ञान (जिज्ञासा) अध्याय 8 "समय एवं गति का मापन" के सरल हस्तलिखित नोट्स। इसमें समय का मापन (धूप-घड़ी, जल-घड़ी, रेत-घड़ी, मोमबत्ती-घड़ी), चाल, एकसमान एवं असमान गति, औसत चाल, दूरी-समय तालिका व ग्राफ़ तथा सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के हल शामिल हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ़्त नोट्स।

Oct 16, 2026 - 11:52
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Title: कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 8 नोट्स: समय एवं गति का मापन (हस्तलिखित नोट्स + NCERT प्रश्न-उत्तर)
1200×720 px का बैनर: ऊपर गहरे नीले रंग की पट्टी में मोटे अक्षरों में "समय एवं गति का मापन", नीचे "कक्षा 7 • विज्ञान (जिज्ञासा) • अध्याय 8"। पृष्ठभूमि पर हल्की नीली रेखाओं वाला कॉपी का पन्ना। बाईं ओर धूप-घड़ी और रेत-घड़ी, दाईं ओर स्टॉपवॉच और तेज़ चलती कार का चित्र। नीचे "हस्तलिखित नोट्स + प्रश्न-उत्तर" का पीला बैज। रंग: नीला, नारंगी, पीला।
? अध्याय 8 : समय एवं गति का मापन
कक्षा 7 • विज्ञान (जिज्ञासा) • हस्तलिखित नोट्स
8.1 समय का मापन
बहुत पहले से मनुष्य की रुचि बीतते समय को जानने में रही है। उसने देखा कि प्रकृति में कई घटनाएँ एक निश्चित समयावधि के बाद दोहराई जाती हैं।
✦सूर्य का उदय एवं अस्त होना
✦चंद्रमा की कलाओं का बदलना
✦ऋतुओं का परिवर्तित होना
✦सबसे पहले पंचांग (कैलेंडर) बनाए गए।
✦सूर्य के उदय-अस्त के चक्र से एक दिन परिभाषित हुआ।
✦फिर दिन के छोटे समय-अंतरालों को मापने के लिए यंत्र बने — धूप-घड़ी, जल-घड़ी, रेत-घड़ी, मोमबत्ती-घड़ी।
➤ (1) धूप-घड़ी
चित्र 8.1 — धूप-घड़ी
✏️ चित्र 8.1 — धूप-घड़ी
? परिभाषा – धूप-घड़ी: वह घड़ी जिसमें दिन के समय का निर्धारण सूर्य के प्रकाश से बनी किसी वस्तु की परछाई की बदलती स्थिति के आधार पर किया जाता है।
यह केवल दिन में, धूप होने पर ही काम करती है।
जंतर-मंतर, जयपुर — सम्राट यंत्र
✏️ जंतर-मंतर, जयपुर — सम्राट यंत्र
? रोचक तथ्य — सम्राट यंत्र
✦पत्थर से बनी सबसे बड़ी धूप-घड़ी, लगभग 300 वर्ष पहले जयपुर (राजस्थान) के जंतर-मंतर में बनी।
✦जंतर-मंतर UNESCO विश्व धरोहर स्थल है।
✦प्रभावी ऊँचाई 27 m; छाया प्रति सेकंड ≈ 1 mm खिसकती है।
✦यह 2 सेकंड तक का समय माप सकती है।
✦यह स्थानीय/सौर समय बताती है; भारतीय मानक समय के लिए संशोधन करना पड़ता है।
➤ (2) जल-घड़ी
चित्र 8.2 — जल-घड़ी: (क) जल-निष्क्रमण प्रकार (ख) प्लवमान पात्र प्रकार
✏️ चित्र 8.2 — जल-घड़ी: (क) जल-निष्क्रमण प्रकार (ख) प्लवमान पात्र प्रकार
? परिभाषा – जल-घड़ी: वह घड़ी जिसमें समय मापन के लिए किसी पात्र के भीतर से बाहर या बाहर से भीतर होने वाले जल-प्रवाह का उपयोग किया जाता है।
✦(क) जल-निष्क्रमण प्रकार: पात्र में जल भरा रहता है, उस पर समय के अंकन होते हैं और जल उसमें से बाहर बहता है।
✦(ख) प्लवमान पात्र प्रकार (घटिका यंत्र): कटोरे की तली के बीच छिद्र होता है। इसे जल पर तैराते हैं; निश्चित समय में यह भरकर डूब जाता है, फिर निकालकर दोबारा तैराते हैं।
➤ (3) रेत-घड़ी और (4) मोमबत्ती-घड़ी
चित्र 8.3 — रेत-घड़ी, चित्र 8.4 — मोमबत्ती-घड़ी
✏️ चित्र 8.3 — रेत-घड़ी, चित्र 8.4 — मोमबत्ती-घड़ी
? परिभाषा – रेत-घड़ी: इसमें समय का मापन एक बल्ब से दूसरे बल्ब में रेत के प्रवाह के आधार पर होता है।
? परिभाषा – मोमबत्ती-घड़ी: इसमें मोमबत्ती पर अंशांकन (निशान) होते हैं जो बताते हैं कि जलने में कितना समय बीत चुका है।
? रोचक तथ्य — प्राचीन भारत में समय मापन
✦छाया-आधारित समय मापन का सबसे प्राचीन उल्लेख कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मिलता है।
✦सामान्य संवत 530 के आसपास वराहमिहिर ने ऊर्ध्वाधर छड़ी की छाया से समय ज्ञात करने का व्यंजक दिया।
✦जल-निष्क्रमण घड़ी यथार्थ नहीं थी, क्योंकि जल का स्तर घटने पर प्रवाह की दर कम हो जाती थी। इसलिए प्लवमान पात्र (घटिका यंत्र) बना; इसका पहला उल्लेख आर्यभट्ट ने किया।
✦घटिका यंत्र के पात्र को भरने और डूबने में 24 मिनट लगते थे। यह समय एक मात्रक घटिका/घटी कहलाया, अतः 24 घंटे का दिन = 60 घटियाँ।
✦पात्र डूबने पर ढोल, शंख या घंटा बजाकर घोषणा होती थी। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक लोलक घड़ियों ने इनकी जगह ले ली।
➤ क्रियाकलाप 8.1 — साधारण जल-घड़ी बनाना
चित्र 8.5 — साधारण जल-घड़ी का निर्माण
✏️ चित्र 8.5 — साधारण जल-घड़ी का निर्माण
✦पारदर्शी प्लास्टिक की (½ L या बड़ी) ढक्कन सहित बोतल लें।
✦उसे बीच से काटकर दो भागों में बाँटें (क)।
✦ड्राइंग-पिन से ढक्कन के बीच छोटा छिद्र बनाएँ (ख)।
✦ऊपरी भाग को उल्टा करके निचले भाग पर रखें (ग)।
✦ऊपरी भाग में स्याही/रंग मिला जल भरें (घ)।
✦जल बूँद-बूँद गिरेगा; घड़ी से हर मिनट बाद जल-स्तर पर निशान लगाएँ।
✦उपयोग: जल को ऊपर उड़ेलें; जब जल-स्तर हर अगले निशान तक पहुँचे तो 1 मिनट बीता।
➤ लोलक घड़ी
चित्र 8.6 — हाइगेन्स की लोलक घड़ी
✏️ चित्र 8.6 — हाइगेन्स की लोलक घड़ी
✦मानव सभ्यता के विकास और दूर यात्राओं के कारण समय मापन महत्त्वपूर्ण हुआ।
✦14वीं शताब्दी के बाद भारों, गियरों व कमानियों से चलने वाली यांत्रिक घड़ियाँ बनने लगीं।
✦17वीं शताब्दी में लोलक घड़ी का आविष्कार यांत्रिक समय-मापन की प्रमुख खोज माना गया।
?‍? वैज्ञानिक से परिचय
✦लोलक घड़ी: सा.सं. 1656 में आविष्कार, 1657 में क्रिश्चियन हाइगेन्स (1629–1695) द्वारा पेटेंट।
✦प्रेरणा: गैलीलियो गैलिली (1564–1642) के लोलक-प्रयोग।
✦कहते हैं गिरजाघर में छत से लटके दोलन करते लैंप को देख, नाड़ी से समय नापकर गैलीलियो ने पाया कि हर दोलन में समय समान था। निष्कर्ष: निश्चित लंबाई के लोलक का एक दोलन का समय सदैव समान रहता है।
8.1.1 सरल लोलक
चित्र 8.7 — सरल लोलक (क) बनावट (ख) माध्य एवं चरम स्थितियाँ
✏️ चित्र 8.7 — सरल लोलक (क) बनावट (ख) माध्य एवं चरम स्थितियाँ
? परिभाषा – सरल लोलक: एक छोटी धातु की गेंद (गोलक) जो एक लंबे धागे से किसी दृढ़ आधार से लटकी होती है।
? मुख्य शब्द
शब्द परिभाषा / अर्थ
गोलक लोलक की छोटी धातु की गेंद (लटकने वाला भार)
माध्य स्थिति (अ) विरामावस्था में लोलक की स्थिति — बीच में
चरम स्थितियाँ (ब, स) दोनों ओर वे अधिकतम दूरी वाले सिरे जहाँ गोलक दिशा बदलता है
दोलन गति गोलक को एक ओर हटाकर छोड़ने पर उसका आगे-पीछे चलना
आवर्ती गति वह गति जो अपने पथ को निश्चित समयावधि के बाद दोहराती है
एक दोलन अ → ब → अ → स → अ (या) ब → स → ब
दोलनकाल लोलक को एक दोलन पूरा करने में लगा समय
? परिभाषा – दोलनकाल: किसी लोलक द्वारा एक दोलन पूरा करने में लगा समय।
? परिभाषा – आवर्ती गति: ऐसी गति जो एक निश्चित समयावधि के पश्चात अपने पथ को दोहराती है।
➤ क्रियाकलाप 8.2 — दोलनकाल मापना
✦लगभग 150 cm डोरी, भारी गेंद/पत्थर (गोलक), विराम-घड़ी और मापक लें।
✦गोलक को डोरी के एक सिरे पर बाँधें; दूसरा सिरा दृढ़ आधार से बाँधें ताकि डोरी की लंबाई ≈ 100 cm रहे।
✦गोलक को हल्के से एक ओर हटाकर छोड़ें — झटका न लगे, डोरी तनी रहे।
✦10 दोलनों का समय मापें; क्रियाकलाप 3–4 बार दोहराएँ।
✦दोलनकाल = 10 दोलनों का समय ÷ 10
दोलनकाल = 10 दोलनों में लगा समय ÷ 10
तालिका 8.1 — सरल लोलक का दोलनकाल (डोरी = 100 cm)
क्र.सं. 10 दोलनों में लिया गया समय (s) दोलनकाल (s)
1
2
3
✅ निष्कर्ष
✦निश्चित लंबाई के लोलक का एक ही स्थान पर दोलनकाल लगभग अचर रहता है।
✦दोलनकाल लोलक की लंबाई पर निर्भर करता है, गोलक के द्रव्यमान पर नहीं।
✦एक स्थान पर एक ही लंबाई के सभी लोलकों का दोलनकाल समान होता है।
✦इसी गुण से लोलक घड़ियाँ समय मापती हैं।
? एक वैज्ञानिक की तरह सोचिए
अलग-अलग लंबाई के लोलक बनाकर और एक नियत लंबाई में अलग-अलग द्रव्यमान के गोलक लगाकर क्रियाकलाप 8.2 दोहराएँ और दोलनकाल की तुलना करें।
सभी घड़ियाँ (पुरानी या नई) किसी न किसी सतत आवर्ती प्रक्रम पर आधारित होती हैं जिससे समान समयावधियाँ अंकित की जा सकें।
आधुनिक घड़ियाँ
चित्र 8.8 — सामान्यतः प्रयोग में आने वाली कुछ घड़ियाँ
✏️ चित्र 8.8 — सामान्यतः प्रयोग में आने वाली कुछ घड़ियाँ
✦आधुनिक घड़ियों में भी वही सिद्धांत है — निश्चित अवधि के बाद दोहराया जाने वाला प्रक्रम।
✦क्वार्ट्ज घड़ी: क्वार्ट्ज मणिभ के सूक्ष्म व अत्यंत द्रुत कंपनों का उपयोग।
✦परमाणु घड़ी: किसी विशिष्ट परमाणु के कंपनों का उपयोग।
✦हाइगेन्स की लोलक घड़ी प्रतिदिन ≈ 10 s आगे/पीछे हो सकती थी; परमाणु घड़ी लाखों वर्षों में केवल 1 s का अंतर करती है।
✦विराम घड़ी दौड़ में समय मापने के लिए प्रयुक्त होती है।
8.1.2 समय का SI मात्रक
? परिभाषा – समय का SI मात्रक: समय का SI मात्रक सेकंड है, इसका प्रतीक s है।
60 सेकंड = 1 मिनट (min) | 60 मिनट = 1 घंटा (h)
✍️ मात्रक लिखने के नियम
✦अंग्रेज़ी में मात्रकों के नाम (second, minute, hour) छोटे अक्षरों में लिखे जाते हैं; वाक्य के आरंभ में हों तो पहला अक्षर बड़ा।
✦प्रतीक s, min, h सदैव छोटे अक्षर में और एकवचन में लिखें।
✦वाक्य के अंत के अतिरिक्त प्रतीक के बाद बिंदु (.) न लगाएँ।
✦संख्या और मात्रक के बीच एक अक्षर जितना रिक्त स्थान छोड़ें (जैसे 5 s)।
✦सेकंड के लिए "से." या "sec" और घंटे के लिए "घं." या "hrs" लिखना सही नहीं है।
चित्र 8.9 — दीवार घड़ी
✏️ चित्र 8.9 — दीवार घड़ी
क्रियाकलाप 8.3: इस घड़ी से मापा जा सकने वाला न्यूनतम समय-अंतराल = 1 सेकंड।
? विज्ञान एवं समाज
✦दौड़ में विजेता तय करने के लिए सेकंड के सौवें और हज़ारवें भाग (मिली सेकंड) तक मापे जाते हैं।
✦ECG मशीन हृदय स्पंदनों में मिली सेकंड के परिवर्तन मापती है।
✦डिजिटल संगीत में ध्वनि प्रति सेकंड हज़ारों बार रिकॉर्ड होती है।
✦स्मार्टफोन/कंप्यूटर में सिग्नल प्रक्रमण माइक्रोसेकंड (1 s का दस लाखवाँ भाग) में होता है।
8.2 धीमा या तेज
चित्र 8.10 — सीधे पथ पर दौड़ते धावक
✏️ चित्र 8.10 — सीधे पथ पर दौड़ते धावक
✦सभी धावक एक साथ दौड़ शुरू करते हैं, कुछ समय बाद आगे-पीछे हो जाते हैं।
✦जो धावक सबसे आगे है वही सबसे तेज़ दौड़ रहा है।
✦समान समय में जिसने अधिक दूरी तय की वह अधिक तेज़ है।
✦समान दूरी की दौड़ में कम समय लेने वाला तेज़ है; अलग दूरियों की तुलना के लिए चाल चाहिए।
8.3 चाल
? परिभाषा – चाल: किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में चली गई दूरी। (औसत चाल = कुल चली गई दूरी ÷ कुल समय)
चाल = चली गई कुल दूरी ÷ दूरी चलने में लगा कुल समय
? परिभाषा – चाल का SI मात्रक: मीटर/सेकंड (m/s)। अन्य मात्रक: किलोमीटर/घंटा (km/h)।
1 km/h = 5/18 m/s  |  1 m/s = 18/5 km/h = 3.6 km/h
➤ चाल, दूरी और समय में संबंध
चाल = दूरी ÷ समय
दूरी = चाल × समय
समय = दूरी ÷ चाल
? परिभाषा – औसत चाल: वस्तु द्वारा चली गई कुल दूरी को उसे चलने में लगे कुल समय से भाग देने पर प्राप्त चाल। (पुस्तक में "चाल" शब्द का अर्थ औसत चाल ही है, क्योंकि वस्तु कभी तेज़ और कभी धीमी चल सकती है।)
चालमापी (स्पीडोमीटर) व पथमापी (ओडोमीटर)
✏️ चालमापी (स्पीडोमीटर) व पथमापी (ओडोमीटर)
? परिभाषा – चालमापी (स्पीडोमीटर): वाहन की चाल मापकर km/h में दर्शाने वाला यंत्र।
? परिभाषा – पथमापी (ओडोमीटर): वाहन द्वारा चली गई दूरी को किलोमीटर में मापने वाला यंत्र।
➤ हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 8.1 — चाल m/s में
दूरी = 3.6 km = 3600 m, समय = 15 min = 900 s
चाल = 3600 ÷ 900 = 4 m/s
उदाहरण 8.2 — दूरी
चाल = 50 km/h, समय = 2 h
दूरी = 50 × 2 = 100 km
उदाहरण 8.3 — समय
दूरी = 360 km, चाल = 90 km/h
समय = 360 ÷ 90 = 4 h
क्रियाकलाप 8.4 (रेलगाड़ी की चाल)
रेलवे समय सारणी से दो स्टेशनों की दूरी व समय-अंतर निकालकर चाल = दूरी ÷ समय (km/h) ज्ञात करें। जिसकी चाल सबसे अधिक है वही सबसे तेज़ रेलगाड़ी है।
8.4 एकसमान एवं असमान रेखीय गति
? परिभाषा – सरल रेखीय गति: जब कोई वस्तु एक सरल रेखा के अनुदिश गति करती है।
चित्र 8.11 — सीधी पटरियों पर रेलगाड़ी
✏️ चित्र 8.11 — सीधी पटरियों पर रेलगाड़ी
✦क→ख: चाल बढ़ती है (असमान)।
✦ख→ग: नियत चाल (एकसमान रेखीय गति)।
✦ग→घ: चाल घटती है और स्टेशन पर रुकती है (असमान)।
? परिभाषा – एकसमान रेखीय गति: सरल रेखा में नियत (अपरिवर्तित) चाल से चलती वस्तु की गति। यह समान समय-अंतरालों में समान दूरियाँ तय करती है।
? परिभाषा – असमान रेखीय गति: सरल रेखा में चलती वस्तु की चाल बदलती रहे तो उसकी गति। यह समान समय-अंतरालों में भिन्न-भिन्न दूरियाँ तय करती है।
तालिका 8.3 — 10 min के समान अंतरालों में चली दूरियाँ
समय (पूर्वाह्न) X: स्थिति (km) X: दूरी (km) Y: स्थिति (km) Y: दूरी (km)
10:00 0 0 0 0
10:10 20 20 20 20
10:20 40 20 35 15
10:30 60 20 50 15
10:40 80 20 75 25
10:50 100 20 95 20
11:00 120 20 120 25
रेलगाड़ी X हर 10 min में 20 km चलती है → एकसमान गति। रेलगाड़ी Y की दूरियाँ 20, 15, 15, 25, 20, 25 km बदलती हैं → असमान गति।
⚖️ तुलना
आधार एकसमान गति असमान गति
चाल नियत रहती है बदलती रहती है
समान समय में दूरी समान भिन्न-भिन्न
उदाहरण राजमार्ग पर नियत चाल से कार शहर के यातायात में कार
? याद रखें
एकसमान रेखीय गति एक आदर्श अवधारणा है; दैनिक जीवन में लगभग सभी गतियाँ असमान होती हैं, इसीलिए हम औसत चाल का उपयोग करते हैं।
? रोचक तथ्य — समय क्या है?
समय हमारे ब्रह्मांड के सृजन के साथ आरंभ हुआ। हम समय को देख या अनुभव नहीं कर सकते, केवल दो घटनाओं के बीच के समय-अंतराल से इसका प्रवाह मापते हैं।
संक्षेप में (Quick Revision)
✦लोलक द्वारा एक दोलन पूरा करने में लगा समय = दोलनकाल।
✦किसी स्थान पर निश्चित लंबाई के लोलक का दोलनकाल अचर रहता है।
✦समय का SI मात्रक सेकंड (s)।
✦औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय; SI मात्रक m/s।
✦नियत चाल से सरल रेखा में गति = एकसमान; चाल बदलती रहे = असमान।
✏️ आइए, और अधिक सीखें — हल
प्रश्न 1. उस कार की चाल का परिकलन कीजिए जो 10 सेकंड में 150 मीटर चलती है। उत्तर km/h में दीजिए।
उत्तर: चाल = 150 ÷ 10 = 15 m/s
km/h में = 15 × 18/5 = 54 km/h
प्रश्न 2. एक धावक 50 s में 400 m तथा दूसरा यही दूरी 45 s में तय करता है। किसकी चाल अधिक है और कितनी अधिक?
उत्तर: पहला: 400 ÷ 50 = 8 m/s
दूसरा: 400 ÷ 45 ≈ 8.89 m/s
दूसरे धावक की चाल अधिक है, लगभग 8.89 − 8 = 0.89 m/s अधिक।
प्रश्न 3. रेलगाड़ी 25 m/s की चाल से 360 km दूरी तय करती है। कितना समय लगेगा?
उत्तर: दूरी = 360 km = 360000 m
समय = 360000 ÷ 25 = 14400 s = 14400 ÷ 3600 = 4 h
प्रश्न 4. रेलगाड़ी 3 घंटे में 180 km चलती है। चाल (i) km/h में (ii) m/s में (iii) समान चाल से 4 घंटे में दूरी?
उत्तर: (i) 180 ÷ 3 = 60 km/h
(ii) 60 × 5/18 = 16.67 m/s (≈ 50/3)
(iii) दूरी = 60 × 4 = 240 km
प्रश्न 5. घोड़े की अधिकतम चाल 18 m/s है। 72 km/h वाली रेलगाड़ी की तुलना में यह कम है या अधिक?
उत्तर: 72 km/h = 72 × 5/18 = 20 m/s
घोड़े की चाल 18 m/s < 20 m/s, अतः घोड़े की चाल रेलगाड़ी से कम है।
प्रश्न 6. यातायात-विहीन राजमार्ग पर चलती कार और शहर के यातायात में चलती कार से एकसमान व असमान गति में विभेद कीजिए।
उत्तर: राजमार्ग पर कार प्रायः नियत चाल से चलती है, समान समय में समान दूरी तय करती है → एकसमान गति।
शहर में रुकने, धीमा होने व तेज़ होने से चाल बदलती रहती है, समान समय में दूरियाँ भिन्न होती हैं → असमान गति।
प्रश्न 7. एकसमान गति के लिए तालिका की रिक्त जगह भरिए।
उत्तर: चाल = 8 ÷ 10 = 0.8 m/s (नियत)
समय (s) 0 10 20 30 40 50 60 70
दूरी (m) 0 8 16 24 32 40 48 56
(समय 40 s पर 32 m और 60 s पर 48 m; 20 s पर दूरी 16 m।)
प्रश्न 8. कार पहले घंटे में 60 km, दूसरे में 70 km, तीसरे में 50 km चलती है। क्या गति एकसमान है? औसत चाल?
उत्तर: समान समय (1 h) में दूरियाँ भिन्न (60, 70, 50 km) हैं, इसलिए गति एकसमान नहीं (असमान) है।
औसत चाल = (60+70+50) ÷ 3 = 180 ÷ 3 = 60 km/h
प्रश्न 9. दैनिक जीवन में सामान्यतः किस प्रकार की गति दिखती है? तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर: सामान्यतः असमान गति दिखती है। उदाहरण: (1) शहर में चलती बस/ऑटो जो रुकती-चलती रहती है, (2) स्टेशनों के बीच चलती रेलगाड़ी जो शुरू में धीमी, फिर तेज़, फिर रुकती है, (3) साइकिल चलाते या पैदल चलते व्यक्ति की चाल बदलती रहती है।
प्रश्न 10. तालिका के आधार पर बताइए गति एकसमान है या असमान, तथा औसत चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर: प्रत्येक 10 s में दूरियाँ: 6, 4, 6, 5, 8, 6, 7, 3, 10, 5 m — भिन्न हैं, अतः गति असमान है।
औसत चाल = 60 ÷ 100 = 0.6 m/s
प्रश्न 11. वाहन 2 km जाता है; पहले 500 m 10 m/s से, अगले 500 m 5 m/s से। शेष दूरी किस चाल से चले कि पूरी यात्रा 200 s में हो? पूरी यात्रा की औसत चाल?
उत्तर: कुल दूरी = 2000 m, कुल समय = 200 s
पहले 500 m में समय = 500 ÷ 10 = 50 s; अगले 500 m में = 500 ÷ 5 = 100 s
बचा समय = 200 − 150 = 50 s; बची दूरी = 2000 − 1000 = 1000 m
आवश्यक चाल = 1000 ÷ 50 = 20 m/s
औसत चाल = 2000 ÷ 200 = 10 m/s
? कक्षा 7 विज्ञान के अन्य नोट्स

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