कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 4 नोट्स — धातुओं और अधातुओं का संसार (Handwritten Notes)

NCERT कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 4 "धातुओं और अधातुओं का संसार" के हस्तलिखित नोट्स, सभी परिभाषाएँ (आघातवर्धनीयता, तन्यता, ध्वानिकता, संक्षारण आदि), जंग व गैल्वेनाइजेशन की जानकारी और सभी अभ्यास प्रश्नों के हल — मुफ्त में पढ़ें व डाउनलोड करें।

Aug 20, 2026 - 14:38
Updated: 7 hours ago
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NCERT कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 4 "धातुओं और अधातुओं का संसार" के नोट्स पोस्ट के लिए तैयार किया गया है।
?️ अध्याय 4 — धातुओं और अधातुओं का संसार (परिभाषाएँ)
? धातु (Metal): वे तत्व जो सामान्यतः कठोर, चमकदार (द्युतिमय), आघातवर्धनीय एवं तन्य होते हैं, तथा जो ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं, धातु कहलाते हैं। उदाहरण — लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, सोना, चाँदी।
? अधातु (Non-metal): वे तत्व जो सामान्यतः नरम और द्युतिहीन होते हैं, जो न आघातवर्धनीय, न तन्य, न ध्वानिक होते हैं, तथा जो ऊष्मा और विद्युत के कुचालक होते हैं, अधातु कहलाते हैं। उदाहरण — ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस।
? आघातवर्धनीयता (Malleability): सामग्रियों का वह गुण जिसके द्वारा उन्हें पीटकर पतली चादरों में परिवर्तित किया जा सकता है, आघातवर्धनीयता कहलाता है। सोना व चाँदी सर्वाधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।
? भंगुर (Brittle): वे पदार्थ जो हथौड़े से पीटने पर छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं, भंगुर कहलाते हैं। उदाहरण — कोयला, सल्फर।
? तन्यता (Ductility): सामग्रियों का वह गुण जिसके द्वारा उन्हें तार में खींचा जा सकता है, तन्यता कहलाता है। यह गुण मुख्यतः धातुओं में पाया जाता है। सोना सबसे अधिक तन्य है।
? ध्वानिकता (Sonorous Nature): धातुओं का वह गुण जिसके कारण वे टकराने पर निनाद (तेज़/स्पष्ट) ध्वनि उत्पन्न करती हैं, ध्वानिकता कहलाती है, और धातुओं को ध्वानिक प्रकृति का कहा जाता है। उदाहरण — घंटी, घुँघरू की आवाज़।
? ऊष्मा-चालन (Heat Conduction): किसी सामग्री में एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ऊष्मा के स्थानांतरण को ऊष्मा-चालन कहा जाता है, तथा ऊष्मा को स्थानांतरित करने वाली सामग्री चालक कहलाती है। धातुएँ ऊष्मा की सुचालक; लकड़ी कुचालक होती है।
? विद्युत सुचालक व कुचालक: जो सामग्रियाँ सरलता से विद्युत प्रवाहित करती हैं, उन्हें विद्युत का सुचालक कहा जाता है। जो विद्युत प्रवाहित नहीं करतीं, उन्हें विद्युत का कुचालक कहा जाता है। धातुएँ सुचालक; रबड़, प्लास्टिक कुचालक होते हैं।
? जंग (Rust) / जंग लगना (Rusting): लोहे से बनी वस्तुओं पर विकसित भूरे रंग के निक्षेप को जंग कहते हैं, और लोहे पर जंग लगने की प्रक्रिया को जंग लगना कहते हैं। जंग लगने के लिए वायु व जल दोनों की उपस्थिति आवश्यक है (नम वायु)।
? संक्षारण (Corrosion): जल, वायु अथवा अन्य पदार्थों के कारण धातुओं की सतह का धीरे-धीरे क्षय होना, संक्षारण कहलाता है। ताँबे पर हरी परत, चाँदी पर काली परत — संक्षारण के उदाहरण।
? गैल्वेनाइजेशन (Galvanization): लोहे को जंग से बचाने हेतु उस पर जिंक धातु की सुरक्षात्मक परत चढ़ाने की प्रक्रिया को गैल्वेनाइजेशन कहते हैं।
? तत्व (Element): वह पदार्थ जिसे और सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता, तत्व कहलाता है। अब तक 118 तत्व ज्ञात हैं — इन्हें ही धातु व अधातु में वर्गीकृत किया जाता है।
? मिश्रधातु (Alloy): दो अथवा दो से अधिक धातुओं के मिश्रण से, अथवा एक धातु व एक अधातु के मिश्रण से बनी सामग्री, मिश्रधातु कहलाती है। उदाहरण — स्टील (लोहा + कार्बन)।
✏️ अभ्यास प्रश्न (Exercise)
Q1. खाद्य पदार्थों के संवेष्टन (पैकेजिंग) हेतु कौन-सी धातु सामान्यतः उपयोग की जाती है? उत्तर: (i) ऐलुमिनियम — यह सस्ती है और पतली चादरों में सरलता से मोड़ी जा सकती है।
Q2. कौन-सी धातु जल के संपर्क में आने पर आग पकड़ लेती है? उत्तर: (iv) सोडियम
Q3. सत्य/असत्य बताइए: (i) ऐलुमिनियम व ताँबा अधातु के उदाहरण हैं। असत्य (ये धातु हैं) (ii) धातु ऑक्साइड नीले लिटमस को लाल करते हैं। असत्य (धातु ऑक्साइड क्षारीय होते हैं) (iii) श्वसन के लिए ऑक्सीजन अनिवार्य अधातु है। सत्य (iv) ताँबे के पात्र विद्युत-सुचालकता के कारण जल उबालने में प्रयुक्त होते हैं। असत्य (यह ऊष्मा-सुचालकता के कारण है)
Q4. आभूषण बनाने के लिए केवल कुछ धातुएँ ही उपयुक्त क्यों हैं? उत्तर: सोना, चाँदी अत्यधिक आघातवर्धनीय व तन्य, चमकदार होती हैं और आसानी से संक्षारित नहीं होतीं, इसलिए बारीक व टिकाऊ डिज़ाइन में ढाली जा सकती हैं।
Q6. ऑक्सीजन, मैग्नीशियम व सल्फर के साथ अभिक्रिया करने पर क्या होता है? उत्तर: मैग्नीशियम+ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड (क्षारीय)। सल्फर+ऑक्सीजन → सल्फर डाइऑक्साइड (अम्लीय)। धातु ऑक्साइड क्षारीय, अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
Q8. जल उबालने हेतु पात्र बनाने के लिए कौन-सी सामग्री उपयुक्त है और क्यों? उत्तर: लोहा या ताँबा — ये ऊष्मा की सुचालक धातुएँ हैं, कठोर व उच्च गलनांक वाली हैं, अतः जल को तेज़ी से गरम कर सकती हैं।
Q9. तेल, जल व सिरके में डूबी कीलों में से किसमें जंग नहीं लगेगा? उत्तर: तेल में डूबी कील में जंग नहीं लगेगा — तेल की परत वायु के संपर्क को रोकती है, और जंग के लिए वायु व जल दोनों आवश्यक हैं।
Q10. धातु व अधातु के गुणों के आधार पर उनके उपयोग कैसे निर्धारित होते हैं? उत्तर: उच्च चालकता वाली धातुएँ (ताँबा, ऐलुमिनियम) तारों में; आघातवर्धनीय-तन्य धातुएँ (सोना, चाँदी) आभूषणों में; ऊष्मा-सुचालक धातुएँ खाना पकाने में; कुचालक अधातुएँ (रबड़, प्लास्टिक) सुरक्षा उपकरणों में उपयोग होती हैं।
Q11. क्या सल्फर की परत लोहे को जंग से बचाने हेतु (जिंक की जगह) उपयोग हो सकती है? उत्तर: नहीं। सल्फर धातु नहीं है — भंगुर है, आघातवर्धनीय नहीं, अतः पतली परत नहीं चढ़ाई जा सकती। वायु में जलकर यह अम्लीय गैस भी बना सकता है।
Q12. लोहार उपकरण बनाने से पूर्व लोहे को गरम क्यों करता है? उत्तर: गरम करने से लोहा नरम व अधिक आघातवर्धनीय हो जाता है, जिससे हथौड़े से पीटकर मनचाहा आकार दिया जा सकता है।
? याद रखें: धातु के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, अधातु के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं। ? संबंधित लिंक (Reference Links)

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