कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 2 नोट्स — पदार्थों का अन्वेषण: अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन (Handwritten Notes)
NCERT कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 2 "पदार्थों का अन्वेषण — अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन" के हस्तलिखित नोट्स, मुख्य बिंदु, क्रियाकलाप 2.1 से 2.7 के उत्तर और सभी अभ्यास प्रश्नों के हल — मुफ्त में पढ़ें व डाउनलोड करें।
पदार्थों का अन्वेषण
अध्याय 2 — अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन पदार्थ
कहानी की शुरुआत — राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी) पर विद्यालय के विज्ञान मेले में अश्विन और कीर्ति को एक श्वेत कागज दिया गया। जब उस पर एक द्रव पदार्थ छिड़का गया तो कागज पर "विज्ञान के अद्भुत जगत में आपका स्वागत है" लिखा हुआ दिखने लगा। यही जिज्ञासा उन्हें 'पदार्थों के रंगीन संसार' नामक स्टॉल तक ले गई — जहाँ से यह पूरा अध्याय शुरू होता है।
नहीं — जरूरी शब्दावली (परिभाषाएँ)
(हर शब्द एक स्टिकी-नोट में)वे पदार्थ जो नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं। स्वाद में खट्टे होते हैं। उदा. — नींबू का रस, सिरका, इमली का पानी।
वे पदार्थ जो लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं। छूने पर साबुन जैसे चिकने और स्वाद में कड़वे होते हैं। उदा. — बेकिंग सोडा, चूने का पानी, साबुन का विलयन।
वे पदार्थ जो न तो नीले और न ही लाल लिटमस पत्र का रंग बदलते हैं। उदा. — नल का पानी, चीनी का विलयन, नमक का विलयन।
ऐसा पदार्थ जो अम्लीय व क्षारीय विलयनों में भिन्न-भिन्न रंग दर्शाता है, अम्ल-क्षार सूचक कहलाता है। उदा. — लिटमस, हल्दी, लाल गुलाब का अर्क।
लाइकेन (कवक + शैवाल की सहजीविता) से प्राप्त एक प्राकृतिक पदार्थ, जो नीले व लाल रंग की पट्टियों के रूप में उपलब्ध होता है।
ऐसे पदार्थ जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है। उदा. — प्याज़, वैनिला।
जब अम्ल व क्षार आपस में मिलकर एक-दूसरे के गुण को समाप्त कर लवण + जल + ऊष्मा बनाते हैं।
अम्ल + क्षार → लवण + जल + ऊष्मा
2.1 प्रकृति — हमारी विज्ञान प्रयोगशाला
2.1.1 लिटमस एक सूचक के रूप में
क्रियाकलाप 2.1 में विभिन्न प्रतिदर्शों (नींबू रस, साबुन विलयन, आँवले का रस आदि) की एक-एक बूँद नीले व लाल लिटमस पत्र के टुकड़ों पर डाली गई और रंग-परिवर्तन देखा गया।
डायग्राम — लिटमस परीक्षणचूने का पानी कैसे बनाएँ? चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) को पानी में मिलाकर लगभग 1 घंटे अबाधित रखें, फिर छान लें — यह चूने का पानी (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन) है।
तालिका 2.1 व 2.2 (हल की गई)2.1.2 लाल गुलाब एक सूचक के रूप में
लाल गुलाब की पंखुड़ियों को कूटकर गर्म पानी में डाला गया, 5–10 मिनट बाद छान लिया गया — यही गुलाब का अर्क एक प्राकृतिक अम्ल-क्षार सूचक है।
2.1.3 हल्दी एक सूचक के रूप में
हल्दी का लेप बनाकर फिल्टर पेपर को डुबोया गया, सुखाकर पतली पट्टियाँ बनाई गईं — यह हल्दी-पत्र है।
निष्कर्ष: हल्दी-पत्र केवल क्षारीय पदार्थों की पहचान कर सकता है (लाल होकर), पर यह अम्लीय व उदासीन में भेद नहीं कर पाता — दोनों में ही रंग पीला रहता है।
घ्राण सूचक (क्रियाकलाप 2.6): कटे हुए प्याज़ में भिगोई कपड़े/पत्र की पट्टी पर इमली का पानी (अम्ल) व बेकिंग सोडा विलयन (क्षार) डालने पर प्याज़ की गंध बदल जाती है — निष्कर्ष: प्याज़ भी एक घ्राण सूचक की तरह कार्य करता है।
2.2 अम्ल + क्षार मिश्रित करने पर क्या होता है?
क्रियाकलाप 2.7 का सार: नींबू रस के तनु विलयन में नीला लिटमस डालने पर रंग लाल हुआ। फिर बूँद-बूँद कर चूने का पानी मिलाने पर रंग धीरे-धीरे नीला हो गया — अर्थात् चूने के पानी ने अम्ल के प्रभाव को समाप्त (उदासीन) कर दिया। पुनः नींबू रस डालने पर रंग वापस लाल हो जाता है।
इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralisation Reaction) कहते हैं।
रासायनिक समीकरण (उदाहरण)HCl + NaOH → NaCl + H₂O + ऊष्मा
(हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → साधारण नमक + जल + ऊष्मा)
2.3 दैनिक जीवन में उदासीनीकरण
चींटी त्वचा में फॉर्मिक अम्ल (अम्लीय) छोड़ती है। नम बेकिंग सोडा (क्षारीय) लगाने से अम्ल उदासीन हो जाता है और दर्द से राहत मिलती है।
HCOOH + NaHCO₃ → HCOONa + H₂O + CO₂
अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों से मृदा अम्लीय हो जाती है। इसका उपचार चूना (क्षारीय) मिलाकर किया जा सकता है। क्षारीय मृदा को जैविक खाद/कम्पोस्ट (कार्बनिक पदार्थ, जो अम्ल छोड़ते हैं) से उपचारित किया जाता है।
औद्योगिक अम्लीय अपशिष्ट झील में मछलियों को नुकसान पहुँचाता है। झील में छोड़ने से पहले उसमें क्षारीय पदार्थ मिलाकर उदासीन किया जा सकता है।
संक्षेप में
- पदार्थों को उनकी प्रकृति के आधार पर अम्लीय, क्षारीय व उदासीन में वर्गीकृत किया जाता है।
- लाइकेन, लाल गुलाब, हल्दी आदि के अर्क अम्ल-क्षार सूचक की तरह प्रयोग होते हैं।
- अम्ल — नीला लिटमस लाल करता है। क्षार — लाल लिटमस नीला करता है।
- गुलाब अर्क: अम्ल में लाल, क्षार में हरा। हल्दी: क्षार में लाल, अम्ल/उदासीन में अपरिवर्तित।
- अम्ल + क्षार → लवण + जल + ऊष्मा (उदासीनीकरण)।
- चींटी का काटना, मृदा उपचार, कारखाने के अपशिष्ट — सभी उदासीनीकरण के दैनिक उदाहरण हैं।
आइए, और अधिक सीखें (हल सहित)
- लाल लिटमस को नीला करने वाला विलयन क्षारीय है। इसे उत्क्रमित करने के लिए एक अम्ल चाहिए।
उत्तर: (iii) सिरका — यह अम्लीय है, अधिक मात्रा में मिलाने पर क्षार का प्रभाव पलट देगा। - 'क' में लाल लिटमस नीला हुआ ⇒ क्षारीय। 'ख' में हल्दी लाल हुई ⇒ क्षारीय (क्योंकि हल्दी केवल क्षार से लाल होती है)। 'ग' में गुलाब अर्क हरा हुआ ⇒ क्षारीय।
उत्तर: (iv) क्षारीय, क्षारीय और क्षारीय - गुलाब-अर्क में भिगोई पट्टी: हरा रंग = क्षारीय विलयन, चटक लाल रंग = अम्लीय विलयन, मूल गुलाबी रंग (अपरिवर्तित) = उदासीन विलयन। दिए गए तीन चित्रों में रंग की तुलना इसी नियम से कीजिए।
- लाल लिटमस: कोई परिवर्तन नहीं (अपेक्षित, अम्ल इसे प्रभावित नहीं करता)। नीला लिटमस: लाल हुआ (अम्ल का लक्षण)। हल्दी: कोई परिवर्तन नहीं (अम्ल/उदासीन दोनों में ऐसा ही होता है)।
उत्तर: द्रव अम्लीय है। - आँख बंद होने से रंग देखना संभव नहीं, इसलिए घ्राण सूचक (जैसे प्याज़ का अर्क) उपयोग करना चाहिए — गंध में बदलाव से अम्ल/क्षार की पहचान हो जाएगी।
- संभावित संयोजन —
- गुलाब अर्क + अंगूर रस = हल्का लाल ⇒ अंगूर का रस अम्लीय है। इसमें बेकिंग सोडा (क्षारीय) मिलाने पर अम्ल उदासीन होगा और अधिक क्षार डालने पर मिश्रण का रंग हरा हो जाएगा।
- संतरे का रस अम्लीय होता है, अतः दादी को नीले लिटमस विलयन का छिड़काव करना चाहिए — अम्ल के संपर्क में यह लाल होकर गुप्त संदेश दृश्यमान कर देगा।
- प्राकृतिक सूचक बनाने की विधि: ताज़ी पंखुड़ियाँ/पत्तियाँ एकत्रित करें → कूटें → गर्म पानी में डालें → ढककर 5-10 मिनट रखें → छान लें। यह अर्क अम्ल-क्षार सूचक की तरह प्रयोग होता है (उदा. गुलाब अर्क बनाना)।
- हल्दी-पत्र से: सिरका (अम्लीय) व चीनी विलयन (उदासीन) दोनों पर कोई परिवर्तन नहीं दिखेगा, केवल बेकिंग सोडा (क्षारीय) पर लाल होगा। अतः हल्दी-पत्र केवल बेकिंग सोडा को पहचान सकता है, सिरके व चीनी विलयन में भेद नहीं कर सकता।
- द्रव X गुलाब अर्क को हरा करता है ⇒ X क्षारीय है। इसमें आँवले का रस (अम्लीय) अधिक मात्रा में मिलाने पर उदासीनीकरण होगा और अंततः अम्ल की अधिकता से मिश्रण फिर से लाल हो जाएगा।
- प्रवाह चित्र पूर्ण करें:
- मृदा की प्रकृति अम्लीय हो सकती है / मृदा की प्रकृति क्षारीय हो सकती है।
- सूचक: लिटमस पत्र (नीला व लाल) या प्राकृतिक सूचक (गुलाब अर्क/हल्दी-पत्र)।
- अम्लीय मृदा का उपचार चूने से किया जा सकता है।
- क्षारीय मृदा का उपचार जैविक खाद/कम्पोस्ट से किया जा सकता है।
गहन चिंतन
अंडे के छिलके व संगमरमर में कैल्शियम कार्बोनेट होता है, जो सिरके (अम्ल) के साथ क्रिया कर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है — इसी से बुलबुले दिखते हैं। साबुन का विलयन क्षारीय है, और क्षार कैल्शियम कार्बोनेट के साथ इस प्रकार क्रिया नहीं करता, इसलिए बुलबुले नहीं बनते।
CaCO₃ + 2CH₃COOH → (CH₃COO)₂Ca + H₂O + CO₂↑
(कैल्शियम कार्बोनेट + एसिटिक अम्ल → कैल्शियम एसिटेट + जल + कार्बन डाइऑक्साइड गैस — यही गैस बुलबुलों के रूप में निकलती है)
अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ (करने योग्य)
- प्राकृतिक सूचकों व अम्लीय/क्षारीय पदार्थों का उपयोग करके रंगोली बनाना।
- वर्षा, नल व नदी के जल के प्रतिदर्शों की अम्लीय/क्षारीय/उदासीन प्रकृति की जाँच करना।
- अपने क्षेत्र की मृदा एकत्रित कर उसकी प्रकृति का परीक्षण करना।
संबंधित लिंक
- कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 1 के नोट्स यहाँ पढ़ें: विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार — नोट्स
- और free notes, quiz व activities के लिए देखें: Bhanu Classes Bhogpur — Free Notes, Quiz & Activity
- मूल NCERT पाठ्यपुस्तक (आधिकारिक) यहाँ पढ़ें: NCERT Official Textbook Page
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