अध्याय 3 — धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) | कक्षा 10 विज्ञान बोर्ड नोट्स

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 "धातु एवं अधातु" के विस्तृत हिंदी नोट्स — भौतिक व रासायनिक गुणधर्म, सक्रियता श्रेणी, मिश्रातु, संक्षारण और बोर्ड परीक्षा के हल सहित प्रश्न।

Sep 16, 2026 - 11:53
Updated: 1 hour ago
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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 "धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)" का फीचर्ड इमेज — गहरे नीले-टील ग्रेडिएंट बैकग्राउंड पर एटम/परमाणु संरचना का आइकन (इलेक्ट्रॉन कक्षाओं सहित), ऊपर लाल बैज में "कक्षा 10 · विज्ञान" लिखा है, बीच में सुनहरे रंग में "अध्याय 3" और सफेद बड़े अक्षरों में "धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)" शीर्षक है, नीचे उपशीर्षक "बोर्ड परीक्षा हेतु विस्तृत नोट्स — परिभाषा, गुणधर्म, समीकरण व हल सहित", और सबसे नीचे ब्रांड स्ट्रिप में "aapbiti.com" व "Bhanu Classes, Bhogpur" लिखा है।

✦ अध्याय 3 ✦

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)

? बोर्ड परीक्षा (विस्तृत नोट्स) — परिभाषा, विशेषताएँ, समीकरण, असली पाठ्यपुस्तक चित्र एवं हल सहित

? नौवीं कक्षा में आपने पढ़ा था कि तत्वों को उनके गुणधर्मों के आधार पर धातु एवं अधातु में वर्गीकृत किया जाता है। इस अध्याय में हम धातु व अधातु के भौतिक गुणधर्म, रासायनिक गुणधर्म (ऑक्सीजन, जल, अम्ल व लवण विलयन के साथ अभिक्रिया), सक्रियता श्रेणी, आयनिक यौगिकों का निर्माण, धातुओं की प्राप्ति (धातुकर्म), संक्षारण एवं मिश्रातु के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे — यह अध्याय बोर्ड परीक्षा में बहुत महत्वपूर्ण है।

? पिछले अध्यायों के नोट्स भी पढ़ें — अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण और अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण

? 1. धातुओं के भौतिक गुणधर्म

परिभाषा

वे तत्व जो सामान्यतः चमकदार, कठोर, आघातवर्ध्य, तन्य होते हैं तथा ऊष्मा एवं विद्युत के सुचालक होते हैं, धातु कहलाते हैं। उदाहरण: आयरन, कॉपर, एल्युमिनियम, मैग्नीशियम, सोडियम, लेड, जिंक आदि।

(क) धात्विक चमक (Metallic Lustre)

शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है। धातु के इस गुणधर्म को धात्विक चमक कहते हैं। रेगमाल से रगड़कर सतह साफ करने पर यह चमक स्पष्ट दिखाई देती है।

(ख) कठोरता (Hardness)

धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं, परंतु प्रत्येक धातु की कठोरता अलग-अलग होती है। सोडियम व पोटैशियम जैसी क्षारीय धातुएँ इतनी मुलायम होती हैं कि इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।

(ग) आघातवर्ध्यता (Malleability)

धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाने की क्षमता को आघातवर्ध्यता कहते हैं। सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं।

(घ) तन्यता (Ductility)

धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है — एक ग्राम सोने से लगभग 2 km लंबा तार बनाया जा सकता है। आघातवर्ध्यता तथा तन्यता के कारण ही धातुओं को हमारी आवश्यकता के अनुसार विभिन्न आकार दिए जा सकते हैं।

(ङ) ऊष्मा की सुचालकता

चित्र 3.1 — धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.1 — धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं तथा इनका गलनांक बहुत अधिक होता है। सिल्वर तथा कॉपर ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक हैं। इनकी तुलना में लेड तथा मर्करी ऊष्मा के कुचालक हैं

(च) विद्युत की सुचालकता

चित्र 3.2 — धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.2 — धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

धातुएँ विद्युत की भी सुचालक होती हैं — यही कारण है कि हमारे घर तक बिजली पहुँचाने वाले तारों पर PVC या रबड़ जैसी विद्युत-रोधी सामग्री की परत चढ़ी होती है।

(छ) ध्वानिकता (Sonorous)

जो धातुएँ किसी कठोर सतह से टकराने पर आवाज़ उत्पन्न करती हैं, उन्हें ध्वानिक (सोनोरस) कहते हैं। इसी गुणधर्म के कारण स्कूल की घंटी धातु की बनाई जाती है।

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? 2. अधातुओं के भौतिक गुणधर्म

परिभाषा

वे तत्व जिनमें सामान्यतः धातुओं के विपरीत गुणधर्म पाए जाते हैं — जो न तो आघातवर्ध्य होते हैं, न तन्य — अधातु कहलाते हैं। उदाहरण: कार्बन, सल्फर, आयोडीन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन आदि। धातुओं की तुलना में अधातुओं की संख्या कम है। ब्रोमीन एक ऐसी अधातु है जो द्रव अवस्था में पाई जाती है; इसके अलावा सभी अधातुएँ या तो ठोस या गैस होती हैं। ग्रेफाइट के अलावा सभी अधातुएँ ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं — ग्रेफाइट विद्युत का चालक होता है।

गुणधर्मधातुअधातु
चमकचमकदार (धात्विक चमक)प्रायः चमकहीन (आयोडीन अपवाद)
अवस्थाप्रायः ठोस (मर्करी द्रव)ठोस/गैस (ब्रोमीन द्रव)
आघातवर्ध्यता/तन्यताहाँनहीं (भंगुर)
ऊष्मा/विद्युत चालकतासुचालककुचालक (ग्रेफाइट अपवाद)
ध्वानिकताहाँनहीं

महत्वपूर्ण अपवाद (Exceptions) — बोर्ड परीक्षा हेतु याद रखें

  • मर्करी को छोड़कर सारी धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस होती हैं, परंतु गैलियम व सीज़ियम का गलनांक इतना कम होता है कि हथेली पर रखने से ये पिघलने लगती हैं
  • आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीला होता है।
  • कार्बन के विभिन्न अपररूप (allotropes) होते हैं — हीरा कार्बन का अपररूप है, जो सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है व जिसका गलनांक-क्वथनांक बहुत अधिक है; ग्रेफाइट कार्बन का एक अन्य अपररूप है, जो विद्युत का सुचालक है।
  • क्षारीय धातुएँ (लीथियम, सोडियम, पोटैशियम) इतनी मुलायम होती हैं कि इन्हें चाकू से काटा जा सकता है — इनके घनत्व व गलनांक कम होते हैं।

इन अपवादों के कारण केवल भौतिक गुणधर्मों के आधार पर तत्वों का वर्गीकरण पूर्ण रूप से सही नहीं होता — अतः रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर अधिक स्पष्टता से धातु व अधातु में वर्गीकरण किया जाता है।

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? 3. धातुओं के रासायनिक गुणधर्म

3.1 धातुओं का वायु/ऑक्सीजन में दहन

लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर संगत धातु के ऑक्साइड बनाती हैं। अधिकतर धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड प्रदान करती हैं।

धातु + ऑक्सीजन ➜ धातु ऑक्साइड
2Cu + O₂ ➜ 2CuO (काले रंग का कॉपर ऑक्साइड)
4Al + 3O₂ ➜ 2Al₂O₃ (एल्युमिनियम ऑक्साइड)

उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides)

परिभाषा

ऐसे धातु ऑक्साइड, जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल प्रदान करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं। उदाहरण: एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO)

Al₂O₃ + 6HCl ➜ 2AlCl₃ + 3H₂O
Al₂O₃ + 2NaOH ➜ 2NaAlO₂ (सोडियम एेलुमिनेट) + H₂O

अधिकांश धातु ऑक्साइड जल में अघुलनशील हैं, लेकिन सोडियम व पोटैशियम ऑक्साइड जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं:

Na₂O(s) + H₂O(l) ➜ 2NaOH(aq)   |   K₂O(s) + H₂O(l) ➜ 2KOH(aq)

अभिक्रियाशीलता क्रम (ऑक्सीजन के साथ)

पोटैशियम व सोडियम इतनी तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं कि खुले में रखने पर आग पकड़ लेते हैं — इसलिए इन्हें किरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है। मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, जिंक, लेड की सतह पर सामान्य ताप पर ऑक्साइड की पतली सुरक्षात्मक परत चढ़ जाती है, जो धातु को आगे के ऑक्सीकरण से बचाती है। आयरन का सीधा दहन नहीं होता, परंतु लौह चूर्ण बर्नर की ज्वाला में तेज़ी से जलता है। कॉपर का दहन नहीं होता, पर गर्म धातु पर काले CuO की परत चढ़ जाती है। सिल्वर व गोल्ड अत्यंत उच्च ताप पर भी ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं करते।

क्या आप जानते हैं? एेनोडीकरण (Anodising) एल्युमिनियम पर मोटी ऑक्साइड परत बनाने की प्रक्रिया है, जो इसे संक्षारण से बचाती है व रंगकर आकर्षक वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।

3.2 धातुओं की जल से अभिक्रिया

चित्र 3.3 — धातु पर भाप की क्रिया (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.3 — धातु पर भाप की क्रिया (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

धातु + जल ➜ धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन   |   धातु ऑक्साइड + जल ➜ धातु हाइड्रॉक्साइड
पोटैशियम व सोडियम — ठंडे जल से अत्यंत तेज़ी व ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया, उत्सर्जित H₂ तत्काल जल उठती है
2K + 2H₂O ➜ 2KOH + H₂ + ऊष्मा
2Na + 2H₂O ➜ 2NaOH + H₂ + ऊष्मा
कैल्सियम — धीमी अभिक्रिया, ऊष्मा H₂ जलाने के लिए पर्याप्त नहीं; H₂ बुलबुले सतह से चिपकने के कारण कैल्सियम तैरने लगता है
Ca + 2H₂O ➜ Ca(OH)₂ + H₂
मैग्नीशियम — शीतल जल से नहीं, पर गर्म जल से अभिक्रिया कर तैरने लगता है
एल्युमिनियम, आयरन, जिंक — शीतल व गर्म जल से नहीं, केवल भाप से अभिक्रिया
2Al + 3H₂O(g) ➜ Al₂O₃ + 3H₂
3Fe + 4H₂O(g) ➜ Fe₃O₄ + 4H₂

लेड, कॉपर, सिल्वर, गोल्ड जैसी धातुएँ जल के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करतीं।

3.3 धातुओं की अम्लों से अभिक्रिया

धातु + तनु अम्ल ➜ लवण + हाइड्रोजन

क्रियाकलाप में देखा गया कि बुलबुले बनने की दर मैग्नीशियम के साथ सबसे अधिक थी (अभिक्रिया सर्वाधिक ऊष्माक्षेपी)। अभिक्रियाशीलता का क्रम: Mg > Al > Zn > Feकॉपर तनु HCl के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करता (न बुलबुले बनते हैं, न ताप परिवर्तन)।

नाइट्रिक अम्ल का विशेष व्यवहार

धातुओं की HNO₃ के साथ अभिक्रिया में सामान्यतः हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं होती, क्योंकि HNO₃ एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो उत्पन्न H₂ को ऑक्सीकृत कर जल में बदल देता है तथा स्वयं नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड (N₂O, NO, NO₂) में अपचयित हो जाता है। अपवाद: मैग्नीशियम व मैंगनीज, अति तनु HNO₃ के साथ H₂ गैस उत्सर्जित करते हैं।

क्या आप जानते हैं? एक्वा रेजिया (Aqua regia): सांद्र HCl व सांद्र HNO₃ का 3:1 अनुपात में ताज़ा मिश्रण, जो गोल्ड व प्लैटिनम को भी गला सकता है — जबकि अकेले किसी अम्ल में यह क्षमता नहीं होती।

3.4 धातुओं की अन्य धातु लवणों के विलयन से अभिक्रिया

चित्र 3.4 — धातु की लवण विलयन के साथ अभिक्रिया (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.4 — धातु की लवण विलयन के साथ अभिक्रिया (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक के विलयन या गलित अवस्था से विस्थापित कर देती है। इसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।

धातु (A) + (B) का लवण विलयन ➜ (A) का लवण विलयन + धातु (B)

प्रयोग: आयरन की कील को कॉपर सल्फेट विलयन में तथा कॉपर तार को आयरन सल्फेट विलयन में डालने पर — आयरन की कील पर कॉपर की भूरी परत जम जाती है (आयरन कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है), जबकि कॉपर तार पर कोई परिवर्तन नहीं होता।

Fe(s) + CuSO₄(aq) ➜ FeSO₄(aq) + Cu(s)
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? 4. सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)

परिभाषा

धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम (घटते क्रम) में व्यवस्थित करने वाली सूची को सक्रियता श्रेणी कहते हैं। यह विस्थापन अभिक्रियाओं के प्रयोगों के आधार पर विकसित की गई है।

सारणी 3.2 — सक्रियता श्रेणी: धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलताएँ (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

सारणी 3.2 — सक्रियता श्रेणी: धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलताएँ (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

महत्वपूर्ण बिंदु: सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन के ऊपर स्थित धातुएँ तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती हैं; नीचे स्थित धातुएँ (जैसे Cu, Hg, Ag, Au) ऐसा नहीं कर पातीं।

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? 5. धातु एवं अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं? — आयनिक यौगिक

सिद्धांत

तत्वों की अभिक्रियाशीलता को संयोजकता कोश को पूर्ण (अष्टक) करने की प्रवृत्ति के रूप में समझा जा सकता है (उत्कृष्ट गैसों की संयोजकता कोश पूर्ण होने से इनकी रासायनिक अभिक्रियाएँ बहुत कम होती हैं)।

सारणी 3.3 — कुछ तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

सारणी 3.3 — कुछ तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण

सोडियम के बाह्यतम कोश में केवल 1 इलेक्ट्रॉन है — इसे त्यागकर यह स्थायी अष्टक प्राप्त कर Na⁺ धनायन बनाता है। क्लोरीन के बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं — एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर यह Cl⁻ ऋणायन बनाता है।

Na ➜ Na⁺ + e⁻  (2,8,1 ➜ 2,8)   |   Cl + e⁻ ➜ Cl⁻  (2,8,7 ➜ 2,8,8)
चित्र 3.5 — सोडियम क्लोराइड का निर्माण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.5 — सोडियम क्लोराइड का निर्माण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

विपरीत आवेश के कारण Na⁺ व Cl⁻ आयन परस्पर आकर्षित होकर मजबूत स्थिर वैद्युत बल से बँधकर NaCl बनाते हैं। ध्यान दें — सोडियम क्लोराइड अणु के रूप में नहीं, बल्कि विपरीत आयनों के समुच्चय के रूप में पाया जाता है।

मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl₂) का निर्माण

Mg ➜ Mg²⁺ + 2e⁻  (2,8,2 ➜ 2,8)   |   2×[Cl + e⁻ ➜ Cl⁻]  (2,8,7 ➜ 2,8,8)
चित्र 3.6 — मैग्नीशियम क्लोराइड का निर्माण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.6 — मैग्नीशियम क्लोराइड का निर्माण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण से बने यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युत संयोजक यौगिक कहा जाता है।

5.1 आयनिक यौगिकों के गुणधर्म

चित्र 3.7 — स्पैचुला पर लवण के नमूने को गर्म करना (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.7 — स्पैचुला पर लवण के नमूने को गर्म करना (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.8 — लवण के विलयन की चालकता की जाँच (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.8 — लवण के विलयन की चालकता की जाँच (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

(i) भौतिक प्रकृति: धन-ऋण आयनों के मजबूत आकर्षण बल के कारण ठोस, थोड़े कठोर व भंगुर (दाब डालने पर टुकड़ों में टूटते हैं)
(ii) गलनांक/क्वथनांक: बहुत अधिक — मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए
(iii) घुलनशीलता: जल में घुलनशील, किरोसिन/पेट्रोल जैसे विलायकों में अविलेय
(iv) विद्युत चालकता: ठोस अवस्था में चालन नहीं (आयन गति नहीं कर सकते), परंतु जलीय विलयन व गलित अवस्था में चालन करते हैं (आयन स्वतंत्र रूप से गति करते हैं)
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? 6. धातुओं की प्राप्ति (Occurrence and Extraction)

खनिज (Mineral): पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व या यौगिक।
अयस्क (Ore): वे खनिज, जिनमें कोई विशेष धातु पर्याप्त मात्रा में उपस्थित हो तथा जिनसे धातु निकालना लाभकारी हो।
गैंग (Gangue): अयस्क में उपस्थित मिट्टी, रेत आदि अशुद्धियाँ।

6.1 अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं के तीन वर्ग

चित्र 3.9 — सक्रियता श्रेणी एवं संबंधित धातुकर्म (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.9 — सक्रियता श्रेणी एवं संबंधित धातुकर्म (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

निम्न अभिक्रियाशील धातुएँ (Cu, Ag, Au आदि) — प्राकृतिक अवस्था में मुक्त रूप में पाई जाती हैं। केवल गर्म करने से धातु प्राप्त हो जाती है।
2HgS + 3O₂ ➜ 2HgO + 2SO₂
2HgO ➜ 2Hg + O₂
मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (Zn, Fe, Pb, Cu आदि) — सल्फाइड/कार्बोनेट अयस्क के रूप में; पहले भर्जन/निस्तापन द्वारा ऑक्साइड में बदलकर फिर कार्बन से अपचयन
उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ (K, Na, Ca, Mg, Al) — विद्युत अपघटनी अपचयन द्वारा गलित लवण से प्राप्त

6.2 अयस्क से धातु निष्कर्षण के चरण

चित्र 3.10 — अयस्क से धातु निष्कर्षण में प्रयुक्त चरण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.10 — अयस्क से धातु निष्कर्षण में प्रयुक्त चरण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

(क) अयस्कों का समृद्धीकरण

धातु के निष्कर्षण से पहले अयस्क से गैंग (अशुद्धियाँ) हटाना आवश्यक होता है — यह अयस्क व गैंग के भौतिक/रासायनिक गुणधर्मों पर आधारित विभिन्न तकनीकों से किया जाता है।

(ख) भर्जन एवं निस्तापन

भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में बदल जाता है।
निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में बदल जाता है।

भर्जन: 2ZnS + 3O₂ ➜ 2ZnO + 2SO₂
निस्तापन: ZnCO₃ ➜ ZnO + CO₂
कार्बन द्वारा अपचयन: ZnO + C ➜ Zn + CO

(ग) विस्थापन अभिक्रिया द्वारा अपचयन — थर्मिट अभिक्रिया

अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं (सोडियम, कैल्सियम, एल्युमिनियम) को अपचायक के रूप में उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि ये कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर सकती हैं। यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है, जिससे धातु गलित अवस्था में प्राप्त होती है।

Fe₂O₃(s) + 2Al(s) ➜ 2Fe(l) + Al₂O₃(s) + ऊष्मा  (थर्मिट अभिक्रिया)
चित्र 3.11 — रेल पटरियों को संधित करने के लिए थर्मिट प्रक्रम (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.11 — रेल पटरियों को संधित करने के लिए थर्मिट प्रक्रम (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

इस अभिक्रिया का उपयोग रेल की पटरियों व मशीनी पुर्जों की दरारों को जोड़ने (संधित करने) के लिए किया जाता है।

(घ) विद्युत अपघटनी अपचयन

सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं (K, Na, Mg, Ca, Al) को उनके गलित क्लोराइडों/ऑक्साइड के विद्युत अपघटन से प्राप्त किया जाता है। कैथोड पर धातु निक्षेपित होती है, ऐनोड पर क्लोरीन मुक्त होती है।

कैथोड पर: Na⁺ + e⁻ ➜ Na   |   ऐनोड पर: 2Cl⁻ ➜ Cl₂ + 2e⁻

6.3 धातुओं का परिष्करण — विद्युत अपघटनी परिष्करण

चित्र 3.12 — ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.12 — ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

कॉपर, जिंक, टिन, निकैल, सिल्वर, गोल्ड जैसी धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है। अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है; धातु के लवण विलयन का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में होता है। धारा प्रवाहित करने पर अशुद्ध धातु ऐनोड से घुलकर शुद्ध धातु कैथोड पर निक्षेपित होती है। अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड तली पर बैठ जाती हैं, जिसे ऐनोड पंक कहते हैं।

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? 7. संक्षारण (Corrosion)

परिभाषा

लंबे समय तक आर्द्र वायु के संपर्क में रहने से धातुओं की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है।

  • सिल्वर — वायु में उपस्थित सल्फर के साथ अभिक्रिया कर काली सिल्वर सल्फाइड परत बनाता है
  • कॉपर — आर्द्र CO₂ के साथ अभिक्रिया कर हरे रंग की बेसिक कॉपर कार्बोनेट परत बनाता है
  • लोहा — आर्द्र वायु में भूरे रंग के पदार्थ की परत चढ़ जाती है, जिसे जंग (Rust) कहते हैं
चित्र 3.13 — लोहे पर जंग लगने की स्थिति की जाँच (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

चित्र 3.13 — लोहे पर जंग लगने की स्थिति की जाँच (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

प्रयोग निष्कर्ष: लोहे पर जंग लगने के लिए वायु (ऑक्सीजन) तथा जल दोनों की उपस्थिति आवश्यक है — केवल जल या केवल शुष्क वायु से जंग नहीं लगता।

7.1 संक्षारण से सुरक्षा

पेंट लगाकर
तेल लगाकर
ग्रीज़ लगाकर
यशदलेपन (जस्ते की परत)
क्रोमियम लेपन
एेनोडीकरण
मिश्रातु बनाकर

यशदलेपन (Galvanisation): लोहे व इस्पात पर जस्ते (जिंक) की पतली परत चढ़ाने की विधि। जस्ते की परत नष्ट होने के बाद भी यशदलेपित वस्तु सुरक्षित रहती है, क्योंकि जिंक स्वयं पहले संक्षारित होकर लोहे की रक्षा करता है (बलिदानी संरक्षण)।

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? 8. मिश्रातु (Alloys)

परिभाषा

दो या दो से अधिक धातुओं (अथवा एक धातु व एक अधातु) के समांगी मिश्रण को मिश्रातु कहते हैं। यदि मिश्रातु में एक धातु पारद (मर्करी) हो, तो उसे अमलगम कहते हैं। शुद्ध धातु की अपेक्षा मिश्रातु की विद्युत चालकता तथा गलनांक कम होता है, परंतु इसके यांत्रिक गुणधर्म (कठोरता, प्रबलता) बेहतर हो जाते हैं।

मिश्रातुसंघटनविशेषता/उपयोग
स्टेनलेस इस्पातलोहा + निकैल + क्रोमियमकठोर, जंग-रोधी
पीतल (Brass)ताँबा + जस्ता (Cu+Zn)विद्युत का कुचालक
काँसा (Bronze)ताम्र + टिन (Cu+Sn)विद्युत का कुचालक
सोल्डरसीसा + टिन (Pb+Sn)कम गलनांक — तारों की वेल्डिंग में

क्या आप जानते हैं? शुद्ध सोना 24 कैरट कहलाता है व बहुत नर्म होता है, इसलिए आभूषण के लिए इसमें चाँदी/ताँबा मिलाकर 22 कैरट सोना (22 भाग शुद्ध सोना + 2 भाग ताँबा/चाँदी) बनाया जाता है।

दिल्ली स्थित लौह स्तंभ (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

दिल्ली स्थित लौह स्तंभ (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

प्राचीन भारतीय धातुकर्म का चमत्कार: लगभग 1600 वर्ष पूर्व भारत के लौह कर्मियों ने दिल्ली में एक लौह स्तंभ बनाया, जो आज भी जंग-रोधी है। यह स्तंभ कुतुबमीनार के निकट स्थित है, इसकी ऊँचाई 8 m तथा भार 6 टन (6000 kg) है।

✨ याद रखें: "धातु = इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन, अधातु = इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन"

end page 1 ========================= PAGE 2: In-chapter Questions =========================

✎ पाठ्य-प्रश्न हल

(अध्याय के बीच में आए "प्रश्न" बॉक्स के विस्तृत उत्तर)

? सेट 1 (भौतिक गुणधर्मों के बाद)

प्र.1 — ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो — (i) कमरे के ताप पर द्रव (ii) चाकू से आसानी से काटी जा सके (iii) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक (iv) ऊष्मा की कुचालक हो।

उत्तर: (i) मर्करी (पारद) — कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाने वाली एकमात्र धातु।
(ii) सोडियम/पोटैशियम — क्षारीय धातुएँ इतनी मुलायम होती हैं कि चाकू से आसानी से काटी जा सकती हैं।
(iii) सिल्वर या कॉपर — ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक हैं।
(iv) लेड या मर्करी — ऊष्मा के कुचालक (अन्य धातुओं की तुलना में)।

प्र.2 — आघातवर्ध्य तथा तन्य का अर्थ बताइए।

उत्तर: आघातवर्ध्यता: धातुओं को पीटकर पतली चादर में बदलने की क्षमता।
तन्यता: धातु को पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता।

? सेट 2 (सक्रियता श्रेणी के बाद)

प्र.1 — सोडियम को किरोसिन में डुबोकर क्यों रखा जाता है?

उत्तर: सोडियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, जो वायु व नमी के संपर्क में आते ही तेज़ी से अभिक्रिया करके आग पकड़ सकती है। दुर्घटना व अनियंत्रित आग को रोकने के लिए इसे सुरक्षित रूप से किरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है।

प्र.2 — समीकरण लिखिए — (i) भाप के साथ आयरन (ii) जल के साथ कैल्सियम तथा पोटैशियम।

उत्तर: (i) 3Fe(s) + 4H₂O(g) ➜ Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)
(ii) Ca(s) + 2H₂O(l) ➜ Ca(OH)₂(aq) + H₂(g)
2K(s) + 2H₂O(l) ➜ 2KOH(aq) + H₂(g) + ऊष्मीय ऊर्जा

प्र.3 — A, B, C, D चार धातुओं को FeSO₄, CuSO₄, ZnSO₄, AgNO₃ में डालने पर प्राप्त परिणाम की सारणी के आधार पर उत्तर दीजिए।

(i) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु — B (यह FeSO₄ से भी Fe को विस्थापित कर देती है, जो एक कठिन विस्थापन है)।
(ii) यदि धातु B को CuSO₄ विलयन में डाला जाए, तो विस्थापन अभिक्रिया अवश्य होगी (चूँकि B, Fe से भी अधिक अभिक्रियाशील है, और Cu, Fe से कम अभिक्रियाशील है)।
(iii) अभिक्रियाशीलता का घटता क्रम: B > A > C > D
(B ने FeSO₄ से Fe विस्थापित किया — सर्वाधिक अभिक्रियाशील; A ने केवल CuSO₄ से Cu विस्थापित किया — Fe से कम पर सामान्य; C ने केवल AgNO₃ से Ag विस्थापित किया — सबसे कम में से अधिक; D ने किसी से भी विस्थापन नहीं किया — सबसे कम अभिक्रियाशील)

प्र.4 — अभिक्रियाशील धातु को तनु HCl में डालने पर कौन सी गैस निकलती है? आयरन के साथ तनु H₂SO₄ की अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर: हाइड्रोजन गैस (H₂) निकलती है।
Fe + H₂SO₄(तनु) ➜ FeSO₄ + H₂↑

प्र.5 — जिंक को आयरन(II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होता है? रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर: जिंक, आयरन से अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण आयरन को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देता है (विस्थापन अभिक्रिया) —
Zn(s) + FeSO₄(aq) ➜ ZnSO₄(aq) + Fe(s)

? सेट 3 (आयनिक यौगिकों के गुणधर्म के बाद)

प्र.1 — (i) Na, O, Mg के इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना (ii) Na₂O व MgO का निर्माण (iii) इनमें कौन से आयन उपस्थित हैं?

उत्तर: (i) सोडियम (Na) के बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन (1 बिंदु), ऑक्सीजन (O) में 6 इलेक्ट्रॉन (6 बिंदु), मैग्नीशियम (Mg) में 2 इलेक्ट्रॉन (2 बिंदु) होते हैं।
(ii) Na₂O: 2Na ➜ 2Na⁺ + 2e⁻; O + 2e⁻ ➜ O²⁻; संयोजन: 2Na⁺ + O²⁻ ➜ Na₂O
MgO: Mg ➜ Mg²⁺ + 2e⁻; O + 2e⁻ ➜ O²⁻; संयोजन: Mg²⁺ + O²⁻ ➜ MgO
(iii) Na₂O में Na⁺ (सोडियम धनायन)O²⁻ (ऑक्साइड ऋणायन); MgO में Mg²⁺ (मैग्नीशियम धनायन)O²⁻ (ऑक्साइड ऋणायन) उपस्थित हैं।

प्र.2 — आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है?

उत्तर: आयनिक यौगिकों में धनायन व ऋणायन के बीच प्रबल स्थिर वैद्युत आकर्षण बल होता है। इस मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण को तोड़कर आयनों को स्वतंत्र करने के लिए पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा (उच्च ताप) की आवश्यकता होती है, इसीलिए इनका गलनांक उच्च होता है।

? सेट 4 (धातुओं की प्राप्ति खंड के बाद)

प्र.1 — परिभाषा दीजिए — (i) खनिज (ii) अयस्क (iii) गैंग

उत्तर: (i) खनिज: पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व या यौगिक।
(ii) अयस्क: वे खनिज, जिनमें कोई विशेष धातु पर्याप्त मात्रा में हो और जिनसे धातु निकालना लाभकारी हो।
(iii) गैंग: खनित अयस्कों में उपस्थित मिट्टी, रेत आदि अशुद्धियाँ।

प्र.2 — दो धातुओं के नाम बताइए, जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।

उत्तर: गोल्ड (सोना) तथा सिल्वर (चाँदी) — (प्लैटिनम व कॉपर भी उदाहरण हैं)।

प्र.3 — धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?

उत्तर: अपचयन (Reduction) प्रक्रम — कार्बन के उपयोग से अपचयन अथवा अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं के लिए विद्युत अपघटनी अपचयन।

? सेट 5 (संक्षारण से पहले, मिश्रातु से पहले)

प्र.1 — जिंक, मैग्नीशियम, कॉपर के ऑक्साइडों को इन्हीं धातुओं के साथ गर्म किया गया — किस स्थिति में विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी?

उत्तर: अभिक्रियाशीलता क्रम: Mg > Zn > Cu। विस्थापन तभी होगा जब गर्म की जाने वाली धातु, ऑक्साइड वाली धातु से अधिक अभिक्रियाशील हो:
• जिंक ऑक्साइड + मैग्नीशियम ➜ विस्थापन होगा (Mg>Zn)
• मैग्नीशियम ऑक्साइड + जिंक ➜ विस्थापन नहीं होगा (Zn• मैग्नीशियम ऑक्साइड + कॉपर ➜ विस्थापन नहीं होगा (Cu• कॉपर ऑक्साइड + जिंक ➜ विस्थापन होगा (Zn>Cu)
• कॉपर ऑक्साइड + मैग्नीशियम ➜ विस्थापन होगा (Mg>Cu)
• जिंक ऑक्साइड + कॉपर ➜ विस्थापन नहीं होगा (Cu

प्र.2 — कौन सी धातु आसानी से संक्षारित नहीं होती है?

उत्तर: गोल्ड, सिल्वर, प्लैटिनम जैसी सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे की (निम्न अभिक्रियाशील) धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होतीं।

प्र.3 — मिश्रातु क्या होते हैं?

उत्तर: दो या दो से अधिक धातुओं (अथवा एक धातु व एक अधातु) के समांगी मिश्रण को मिश्रातु कहते हैं।

end page 2 ========================= PAGE 3: EXERCISE (अभ्यास) SOLUTIONS =========================

✎ अभ्यास हल

(अध्याय के अंत में दिए गए सभी 16 प्रश्नों के विस्तृत उत्तर)

प्र.1 — कौन सा युगल विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है? (a) NaCl+Cu (b) MgCl₂+Al (c) FeSO₄+Ag (d) AgNO₃+Cu

उत्तर: (d) — कॉपर, सिल्वर से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह AgNO₃ विलयन से Ag को विस्थापित कर देगा: Cu + 2AgNO₃ ➜ Cu(NO₃)₂ + 2Ag

प्र.2 — लोहे के फ्राइंग पैन को जंग से बचाने के लिए उपयुक्त विधि? (a) ग्रीज़ (b) पेंट (c) जिंक परत (d) उपरोक्त सभी

उत्तर: (d) ऊपर के सभी — ये सभी विधियाँ धातु की सतह को वायु व नमी के सीधे संपर्क से बचाकर संक्षारण रोकती हैं।

प्र.3 — कोई धातु ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला जल-विलेय यौगिक बनाती है। यह तत्व क्या हो सकता है? (a) कैल्सियम (b) कार्बन (c) सिलिकन (d) लोहा

उत्तर: (a) कैल्सियम — यह धातु है, अतः आयनिक (उच्च गलनांक) ऑक्साइड CaO बनाती है, जो जल में घुलकर Ca(OH)₂ (चूने का पानी) बनाता है।

प्र.4 — खाद्य डिब्बों पर जिंक की बजाय टिन का लेप क्यों? (a) टिन महँगा (b) टिन का गलनांक अधिक (c) जिंक अधिक अभिक्रियाशील (d) जिंक कम अभिक्रियाशील

उत्तर: (c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है — इसलिए खाद्य पदार्थों के साथ अभिक्रिया करने से बचाने के लिए कम अभिक्रियाशील टिन का लेप किया जाता है।

प्र.5 — हथौड़ा, बैटरी, बल्ब, तार, स्विच से (a) धातु-अधातु में विभेद कैसे करें? (b) उपयोगिता का आकलन कीजिए।

उत्तर: (a) हथौड़े से पीटकर आघातवर्ध्यता जाँची जा सकती है — धातुएँ चपटी होकर चादर बनेंगी, अधातुएँ भंगुर होने से टूट जाएँगी। बैटरी-बल्ब-तार-स्विच से परिपथ बनाकर विद्युत चालकता जाँची जा सकती है — नमूना धातु होगा तो बल्ब जलेगा (सुचालक), अधातु होगा तो बल्ब नहीं जलेगा (कुचालक)।
(b) यह परीक्षण सामान्यतः उपयोगी हैं, परंतु पूर्ण विश्वसनीय नहीं — क्योंकि ग्रेफाइट (अधातु) विद्युत का सुचालक है, तथा आयोडीन (अधातु) चमकीला होता है। अतः निश्चित वर्गीकरण के लिए रासायनिक गुणधर्मों की जाँच भी आवश्यक है।

प्र.6 — उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर: वे धातु ऑक्साइड, जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण व जल देते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं। उदाहरण: एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO)

प्र.7 — दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करेंगी तथा दो जो नहीं करेंगी।

उत्तर: विस्थापित करने वाली: मैग्नीशियम, जिंक (या एल्युमिनियम, आयरन)।
न करने वाली: कॉपर, सिल्वर (सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे होने के कारण)।

प्र.8 — धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में ऐनोड, कैथोड व विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?

उत्तर: ऐनोड = अशुद्ध धातु M की मोटी छड़/पट्टी
कैथोड = शुद्ध धातु M की पतली पट्टी
विद्युत अपघट्य = धातु M के लवण का जलीय विलयन (उदाहरण: यदि M ताँबा है, तो अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन)

प्र.9 — प्रत्यूष ने सल्फर चूर्ण गर्म कर गैस एकत्र की। (a) गैस की क्रिया — (i) सूखे लिटमस पर? (ii) आर्द्र लिटमस पर? (b) संतुलित समीकरण लिखिए।

गैस एकत्र करना (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

गैस एकत्र करना (NCERT पाठ्यपुस्तक से)

(a)(i) सूखे लिटमस पत्र पर कोई परिवर्तन नहीं होगा (जल के बिना आयन नहीं बनते)।
(a)(ii) आर्द्र (नम) लिटमस पत्र पर गैस अम्लीय होने के कारण नीले लिटमस को लाल कर देगी
(b) S + O₂ ➜ SO₂
SO₂ + H₂O ➜ H₂SO₃ (सल्फ्यूरस अम्ल)

प्र.10 — लोहे को जंग से बचाने के दो तरीके बताइए।

उत्तर: (1) पेंट लगाकर तथा (2) यशदलेपन (जस्ते की परत चढ़ाकर — गैल्वनीकरण)

प्र.11 — ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ कैसा ऑक्साइड बनाती हैं?

उत्तर: अधातुएँ अम्लीय अथवा उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं (क्षारकीय नहीं)।

प्र.12 — कारण बताइए —

(a) प्लैटिनम, सोना, चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।

उत्तर: ये सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे की अत्यंत निम्न अभिक्रियाशील धातुएँ हैं, जो वायु व नमी से आसानी से संक्षारित नहीं होतीं तथा इनमें प्राकृतिक चमक व आघातवर्ध्यता/तन्यता होती है, जिससे सुंदर आभूषण बनाए जा सकते हैं।

(b) सोडियम, पोटैशियम, लीथियम को तेल के अंदर संग्रहीत किया जाता है।

उत्तर: ये अत्यंत अभिक्रियाशील धातुएँ हैं, जो वायु/नमी के संपर्क में आते ही तीव्रता से अभिक्रिया कर आग पकड़ सकती हैं, इसलिए सुरक्षा हेतु इन्हें तेल में डुबोकर रखा जाता है।

(c) एल्युमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील होते हुए भी खाना बनाने के बर्तन बनाने में उपयोग होता है।

उत्तर: एल्युमिनियम की सतह पर वायु के संपर्क में आते ही ऑक्साइड (Al₂O₃) की एक मज़बूत, पतली सुरक्षात्मक परत तुरंत बन जाती है, जो धातु को आगे के संक्षारण से बचाती है, इसलिए यह बर्तन बनाने के लिए सुरक्षित रहता है।

(d) निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में बदला जाता है।

उत्तर: धातु ऑक्साइड से धातु का अपचयन, कार्बोनेट या सल्फाइड की तुलना में कार्बन द्वारा कहीं अधिक आसान होता है, इसलिए निस्तापन/भर्जन द्वारा पहले इन्हें ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।

प्र.13 — ताँबे के मलीन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करना क्यों प्रभावी है?

उत्तर: नींबू/इमली के रस में सिट्रिक अम्ल/टार्टरिक अम्ल होता है, जो ताँबे की सतह पर जमी क्षारकीय संक्षारण परत (बेसिक कॉपर कार्बोनेट, हरे रंग की) से अभिक्रिया कर उसे घोल देता है, जिससे बर्तन की चमक वापस आ जाती है।

प्र.14 — रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए।

धातुएँ
• इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं (विद्युत धनात्मक)
• क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं
• तनु अम्ल से H₂ गैस मुक्त करती हैं
• लवण विलयन से कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित करती हैं
अधातुएँ
• इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाती हैं (विद्युत ऋणात्मक)
• अम्लीय/उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं
• तनु अम्ल से H₂ विस्थापित नहीं करतीं
• हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाती हैं

प्र.15 — सुनार ने कंगन विशेष विलयन में डाले — चमके पर वजन कम हो गया। विलयन की प्रकृति बताइए।

उत्तर: वह विलयन अवश्य एक प्रबल अम्ल (जैसे सांद्र नाइट्रिक अम्ल या एेसा ही संक्षारक मिश्रण) रहा होगा, जिसने सोने की ऊपरी परत को धीरे-धीरे घोल दिया। इससे कंगन की सतह नई जैसी चमकदार तो दिखी, परंतु धातु घुलने से उनका वजन कम हो गया — वास्तव में सुनार ने चालाकी से सोने का कुछ भाग विलयन में घोलकर चुरा लिया।

प्र.16 — गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है, इस्पात का नहीं — कारण बताइए।

उत्तर: ताँबा सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित है, इसलिए यह जल/भाप के साथ अभिक्रिया नहीं करता और आसानी से संक्षारित नहीं होता। इसके विपरीत, इस्पात (लोहे की मिश्रातु) गर्म जल/भाप के साथ अभिक्रिया करके जंग लगा सकता है, इसलिए गर्म जल का टैंक बनाने के लिए ताँबा अधिक उपयुक्त व टिकाऊ है।

✨ बोर्ड परीक्षा टिप: सक्रियता श्रेणी (सारणी 3.2) याद रखना अत्यंत आवश्यक है — इससे जुड़े प्रश्न लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं। मूल NCERT पाठ्यपुस्तक यहाँ से डाउनलोड करें। समीकरण लिखते समय अवस्था (s, l, g, aq) लिखना न भूलें।

? संबंधित लिंक्स

अध्याय 1 नोट्स — रासायनिक अभिक्रिया एवं समीकरण
अध्याय 2 नोट्स — अम्ल, क्षारक एवं लवण
NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक (PDF)
Bhanu Classes, Bhogpur — Free Notes, Quiz व Activity

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