सीबीएसई त्रि-भाषा नीति 2026: जानें नए नियम, एनसीईआरटी आर3 किताबें और बोर्ड परीक्षा के प्रावधान

सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाली त्रि-भाषा नीति के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, एनसीईआरटी पोर्टल पर 'आर3' (R3) श्रेणी की किताबें (जैसे कक्षा 6 व 9 के लिए हिंदी 'अलकनंदा') भी उपलब्ध करा दी गई हैं। जानें विभिन्न कक्षाओं के लिए नए नियम और बोर्ड परीक्षाओं पर इसका प्रभाव।

Aug 13, 2026 - 09:45
Updated: 14 hours ago
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सीबीएसई त्रि-भाषा नीति और एनसीईआरटी आर3 भाषा पुस्तकें
एक रचनात्मक ग्राफिक चित्र जिसमें पृष्ठभूमि में सीबीएसई (CBSE) और एनसीईआरटी (NCERT) के लोगो के साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं (जैसे हिंदी, तमिल, बंगाली) के अक्षरों और पुस्तकों को दर्शाया गया है, जो बहुभाषिक शिक्षा को प्रदर्शित करता है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 29 जून 2026 को त्रि-भाषा नीति (थ्री लैंग्वेज पॉलिसी) को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही एनसीईआरटी ने अपने पोर्टल पर आर3 (R3) भाषा शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जिसमें कक्षा 6 और कक्षा 9 के लिए हिंदी की अलकनंदा पुस्तक शामिल है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।

CBSE R3 policy

सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति: मुख्य बिंदु

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में तीन भाषाएं सीखने की सिफारिश की गई है, जिसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय (भारतीय भाषा) होनी चाहिए। सीबीएसई ने इसी सिफारिश के अनुपालन में दिशा-निर्देश तैयार किए हैं।

  • कक्षा 10 के मौजूदा बैच को नई भाषा नीति का पालन नहीं करना होगा।
  • कक्षा 7, 8 और 9 के मौजूदा बैचों को कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
  • जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे उन्हें जारी रखते हुए एक अतिरिक्त भारतीय भाषा जोड़ेंगे।
  • कक्षा-स्तर के अनुरूप शिक्षण सामग्री समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी।
  • भाषा शिक्षण को सार्थक, रोचक और समग्र विकास में सहायक बनाने पर जोर दिया गया है।

किस कक्षा के लिए क्या नियम लागू होगा

सीबीएसई ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग-अलग प्रावधान तय किए हैं। नीचे दी गई तालिका में यह स्पष्ट किया गया है कि किस बैच पर कौन-सा नियम लागू होगा।

कक्षा (सत्र 2026-27) लागू नियम
कक्षा 10 कोई बदलाव नहीं, पुरानी दो-भाषा प्रणाली जारी रहेगी
कक्षा 9 तीन भाषाएं अनिवार्य, कम से कम दो भारतीय भाषाएं
कक्षा 7 और 8 जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे एक भारतीय भाषा अतिरिक्त जोड़ेंगे
कक्षा 6 शुरुआत से ही तीन में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य, आर3 की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी

क्या कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा पढ़नी होगी?

नहीं। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि सत्र 2026-27 में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों के लिए कोई तीसरी भाषा अनिवार्य नहीं है और वे पुरानी दो-भाषा व्यवस्था के तहत ही परीक्षा देंगे।

कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन अलग-अलग स्थितियां

सीबीएसई ने कक्षा 9 (2026-27) के छात्रों की मौजूदा भाषा पसंद के आधार पर तीन स्थितियां स्पष्ट की हैं, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।

  • स्थिति 1: जो छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहे हैं (जैसे हिंदी और तमिल), वे तीसरी भाषा के रूप में कोई अन्य भारतीय भाषा या अंग्रेजी, फ्रेंच जैसी विदेशी भाषा चुन सकते हैं।
  • स्थिति 2: जो छात्र एक भारतीय और एक विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं (जैसे तमिल और अंग्रेजी), वे तीसरी भाषा के रूप में कोई भी भारतीय भाषा जोड़ेंगे।
  • स्थिति 3: जो छात्र दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं (जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच), उन्हें विशेष एकबारगी राहत देते हुए दोनों विदेशी भाषाएं जारी रखने और एक भारतीय भाषा तीसरी भाषा के रूप में जोड़ने की अनुमति दी गई है।

भारतीय भाषाओं के उदाहरणों में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओडिया और असमिया शामिल हैं, जबकि विदेशी भाषाओं में अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी भाषाएं आती हैं।

मूल्यांकन और बोर्ड परीक्षा को लेकर स्थिति

कक्षा 9 (2026-27) और कक्षा 7-8 के बैचों के लिए तीसरी भाषा (आर3) का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन के जरिए किया जाएगा। जब यह बैच कक्षा 10 (सत्र 2027-28) में पहुंचेगा, तब भी इस भाषा की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

हालांकि कक्षा 6 (2026-27) और इसके बाद के बैचों के लिए स्थिति अलग है। इन छात्रों को शुरुआत से ही तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी और जब यह बैच कक्षा 10 पर पहुंचेगा, तब आर3 की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

छूट किन छात्रों को मिलेगी?

दिव्यांग बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत तीसरी भाषा से छूट या राहत दी गई है। भारत से बाहर स्थित सीबीएसई स्कूलों को पूर्ण रूप से भारतीय भाषा की अनिवार्यता से छूट दी गई है। इसके अलावा भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को भी भारतीय भाषा पढ़ने से छूट दी गई है।

राज्य बदलने वाले छात्रों और स्कूलों के लिए प्रावधान

यदि किसी छात्र के माता-पिता या अभिभावक किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित होते हैं, तो वह छात्र कक्षा 9 में पहले से चुनी गई तीसरी भाषा के संयोजन को जारी रख सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित स्कूल को छात्र की पसंद के अनुसार जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।

शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर सीबीएसई ने स्कूलों को लचीलापन देते हुए मौजूदा शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, स्नातकोत्तर योग्यता वाले शिक्षकों और सहोदय क्लस्टर (अंतर-विद्यालय साझेदारी) के साथ-साथ वर्चुअल और हाइब्रिड शिक्षण की भी अनुमति दी है।

एनसीईआरटी आर3 लर्निंग रिसोर्सेज पोर्टल: क्या उपलब्ध है

एनसीईआरटी ने अपनी वेबसाइट पर आर3 लैंग्वेज लर्निंग रिसोर्सेज नाम से समर्पित पेज शुरू किया है, जहां से छात्र कक्षा, विषय और पुस्तक के शीर्षक के अनुसार भारतीय भाषाओं की पाठ्यसामग्री खोज सकते हैं। पोर्टल पर 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में कक्षा 6 के लिए तैयार आर3 पाठ्यपुस्तकें चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

कक्षा 6 और 9 के लिए हिंदी अलकनंदा पुस्तक

वर्तमान अपडेट के अनुसार, हिंदी विषय की अलकनंदा पुस्तक कक्षा 6 और कक्षा 9 दोनों के लिए एनसीईआरटी पोर्टल पर आर3 श्रेणी में उपलब्ध कराई गई है। जो छात्र या स्कूल हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ रहे हैं, वे इस पुस्तक को सीधे पोर्टल से देख या डाउनलोड कर सकते हैं। एनसीईआरटी ने संकेत दिया है कि अन्य भारतीय भाषाओं और कक्षाओं की सामग्री भी जल्द जोड़ी जाएगी।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए आगे क्या करना है

सीबीएसई ने स्कूलों से कहा है कि वे इन प्रावधानों की जानकारी शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों तक सकारात्मक तरीके से पहुंचाएं, ताकि बहुभाषी दक्षता और सांस्कृतिक जुड़ाव के दीर्घकालिक लाभों को समझा जा सके। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नीति का उद्देश्य रटंत ज्ञान नहीं, बल्कि वैचारिक स्पष्टता और आनंददायक भाषा शिक्षण है, और किसी भी छात्र को इस बदलाव से नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

पूरी दिशा-निर्देश पुस्तिका सीबीएसई की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध है, जिसे स्कूल और अभिभावक विस्तार से देख सकते हैं।

Frequently Asked Questions

हाँ। यदि कोई छात्र तीन अनिवार्य भाषाओं के अलावा कोई अन्य भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन जैसी कोई विदेशी भाषा) भी सीखना चाहता है, तो वह उसे एक अतिरिक्त (चौथे) विषय के रूप में चुन सकता है।

हाँ, संस्कृत एक अनुसूचित और प्रतिष्ठित भारतीय भाषा है। छात्र त्रि-भाषा नीति के तहत आवश्यक दो भारतीय भाषाओं में से एक के रूप में संस्कृत का चयन कर सकते हैं।

नहीं। सीबीएसई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, तीसरी भाषा में कमजोर प्रदर्शन या अनुत्तीर्ण होने के कारण किसी भी छात्र को मुख्य बोर्ड परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। स्कूल ऐसे छात्रों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करेंगे।

नहीं। त्रि-भाषा नीति के अंतर्गत कम से कम दो 'भारतीय भाषाओं' का चयन करना अनिवार्य है। छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा या रुचि के अनुसार हिंदी, संस्कृत, तमिल, बंगाली, मराठी आदि किसी भी अनुसूचित भारतीय भाषा का चयन कर सकते हैं। हिंदी को अलग से अनिवार्य नहीं किया गया है।
Naina Saini

"Naina Saini is an Editorial Intern at Aapbiti, specializing in publishing and managing education-focused news articles. Operating under the direct mentorship and guidance of Shakti Rao Mani, the Product Owner of aapbiti.com, Naina is dedicated to delivering accurate, timely, and engaging academic updates. Her role focuses on keeping readers informed about educational trends, exams, admissions, and key academic policies."

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