अपार आईडी: देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर की प्रगति सबसे कम

समग्र शिक्षा उत्तराखंड ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर में अपार आईडी की धीमी प्रगति पर 24 अगस्त तक ब्लॉकवार रिपोर्ट मांगी है। जानें 15 प्रमुख कारण व समाधान।

Aug 22, 2026 - 22:02
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Uttarakhand Districts Told to Fix Slow APAAR ID Progress

उत्तराखंड में अपार आईडी यानी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR ID) बनाने की प्रक्रिया तय रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पा रही है। समग्र शिक्षा, उत्तराखंड के राज्य परियोजना कार्यालय ने पत्रांक रा0प0का0/904/नियोजन-यू-डायस/2025-26, दिनांक 21 अगस्त 2026 के माध्यम से देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंहनगर जनपदों की अपार आईडी सृजन प्रगति को अन्य जनपदों की तुलना में "अत्यंत न्यून" बताते हुए तीनों जिला परियोजना अधिकारियों को तत्काल समीक्षा के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी/जिला परियोजना अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने 22 अगस्त 2026 को अपने पत्रांक जि0परि0का0/362/UDISE+/2026-27 के जरिए जनपद के समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारियों तथा उपशिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने विकासखण्ड का ब्योरा अनिवार्य रूप से कार्यालय को भेजें।

यह पूरा घटनाक्रम 21 अगस्त 2026 को सचिव, विद्यालयी शिक्षा की अध्यक्षता में जनपदों के साथ हुई समीक्षा बैठक से जुड़ा है। बैठक में अन्य महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं के साथ-साथ अपार आईडी सृजन की जनपदवार समीक्षा भी की गई, जिसमें उपरोक्त तीन जनपदों का प्रदर्शन शेष उत्तराखंड की तुलना में सबसे कमजोर पाया गया।

अपार आईडी क्या है और अभी क्यों अहम हो गई है

अपार आईडी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शुरू की गई 12 अंकों की विशिष्ट डिजिटल पहचान है, जिसे "वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी" पहल के रूप में लागू किया जा रहा है। प्री-प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक, हर छात्र की मार्कशीट, प्रमाण-पत्र, छात्रवृत्ति और सह-शैक्षणिक उपलब्धियां इसी एक स्थायी नंबर के तहत डिजिटल रूप से दर्ज होती जाती हैं। यह नंबर छात्र के एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) खाते से भी जुड़ा रहता है, जिससे स्कूल या कॉलेज बदलने पर अंकों व क्रेडिट का हस्तांतरण आसान हो जाता है और फर्जी प्रमाण-पत्रों की गुंजाइश कम होती है। अपार आईडी की पूरी जानकारी इसकी आधिकारिक वेबसाइट apaar.education.gov.in पर उपलब्ध है, जबकि आईडी बन जाने के बाद उसे डिजिलॉकर के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकता है।

समीक्षा की गति तेज होने की एक बड़ी वजह राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सख्ती भी है। सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बोर्ड परीक्षा पंजीकरण यानी लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (एलओसी) के लिए अपार आईडी को पूर्ण रूप से अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड के अपने आंकड़ों के अनुसार सत्र 2025-26 तक संबद्ध विद्यालयों के 50 प्रतिशत से भी कम छात्रों की अपार आईडी बन पाई थी, जिसके बाद यह सख्ती लागू की गई। कई राज्यों की प्रवेश परीक्षाओं के पंजीकरण फॉर्म में भी अब अपार आईडी का अलग कॉलम जोड़ा जाने लगा है। यही वजह है कि स्कूली शिक्षा विभाग अब हर जनपद और विकासखंड से प्रगति का ब्योरा तेजी से मांग रहा है, ताकि नए सत्र से पहले अधिकतम छात्रों की आईडी तैयार हो सके।

जनपदवार प्रगति: देहरादून, हरिद्वार व उधमसिंहनगर सबसे पीछे

राज्य कार्यालय के पत्र में तीनों जनपदों की अपार आईडी सृजन प्रगति इस प्रकार दर्ज है —

जनपद अपार आईडी सृजन प्रगति
देहरादून 68.57%
हरिद्वार 64.27%
उधमसिंहनगर 67.42%

पत्र के अनुसार यह तीनों आंकड़े राज्य के शेष जनपदों की तुलना में काफी कम आंके गए हैं, इसीलिए इन तीन जनपदों को अलग से पत्र भेजकर तत्काल समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलवार व ब्लॉकवार यू-डायस डेटा यू-डायस प्लस पोर्टल (udiseplus.gov.in) पर दर्ज किया जाता है, और अपार आईडी सृजन की स्थिति भी इसी पोर्टल के आंकड़ों से जुड़ी होती है। यही कारण है कि विभाग अब विद्यालय स्तर तक सटीक कारण जानना चाहता है, ताकि आंकड़ों में सुधार सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि वास्तविक धरातल पर भी दिखे।

देरी के पीछे 15 प्रमुख कारण, विभाग ने पहले ही कर ली पहचान

पत्र के साथ संलग्न तालिका में विभाग ने वे 15 सामान्य समस्याएं पहले से ही सूचीबद्ध कर दी हैं, जिनकी वजह से विद्यालयों में अपार आईडी सृजन अटका हुआ है। ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को अब इन्हीं 15 बिंदुओं के आधार पर अपने-अपने विकासखंड की संख्या भरकर भेजनी है। इन्हें मोटे तौर पर चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है — नाम, जन्मतिथि व लिंग का बेमेल; आधार की अनुपलब्धता; अभिभावकों की सहमति व नए आवेदन से जुड़ी समस्या; और पोर्टल या सत्यापन की तकनीकी अड़चनें।

क्रम समस्या का प्रकार विस्तृत विवरण
1 नाम बेमेल छात्र का नाम आधार में सही है, परंतु यू-डायस में गलत दर्ज है
2 जन्मतिथि बेमेल जन्मतिथि आधार में गलत अंकित है
3 लिंग बेमेल आधार में लिंग (जेंडर) गलत दर्ज है
4 नाम बेमेल अपार आईडी बन जाने के बाद आधार में नाम बदला गया
5 नाम बेमेल विद्यालय पंजिका में दर्ज नाम आधार से अलग है
6 आधार अनुपलब्ध विदेशी, नेपाली मूल के छात्रों के पास आधार उपलब्ध नहीं
7 नाम व जन्मतिथि बेमेल छात्र का नाम और जन्मतिथि, दोनों में अंतर है
8 आधार अनुपलब्ध कुछ छात्रों के पास आधार कार्ड ही नहीं है
9 सहमति अनुपलब्ध अभिभावकों ने विद्यालय को सहमति पत्र (कंसेंट फॉर्म) उपलब्ध नहीं कराया
10 नया आवेदन नए आधार कार्ड के लिए आवेदन किया जा चुका है
11 पोर्टल समस्या अपार हेतु आवेदन किया गया, परंतु पोर्टल पर प्रक्रिया असफल रही
12 सत्यापन लंबित आधार सत्यापन (वेरिफिकेशन) लंबित है
13 सत्यापन असफल आधार सत्यापन असफल रहा
14 नाम बेमेल यू-डायस में नाम सही है, परंतु आधार में गलत है
15 आधार अपडेट नहीं आधार कार्ड अद्यतन (अपडेट) नहीं कराया गया है

सूची पर गौर करें तो साफ है कि इन 15 में से आधे से अधिक समस्याएं सीधे नाम, जन्मतिथि या लिंग के बेमेल से जुड़ी हैं — यानी विद्यालय के यू-डायस अभिलेख और आधार कार्ड की जानकारी में अंतर ही देरी की सबसे बड़ी वजह है। इसके बाद सबसे अधिक मामले सहमति पत्र न मिलने और पोर्टल या सत्यापन से जुड़ी तकनीकी अड़चनों के हैं।

ब्लॉक स्तर तक निर्देश, दो चरणों की डेडलाइन

राज्य कार्यालय के निर्देश पर देहरादून जिला परियोजना कार्यालय ने अपने पत्र में सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों/उपशिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने विकासखण्ड में न्यून प्रगति के कारणों की तत्काल समीक्षा करते हुए एक संरचनात्मक ट्रैकर प्रणाली विकसित करें, और उपरोक्त तालिका के अनुसार संकलित सूचना 24 अगस्त 2026 की पूर्वाह्न तक अनिवार्य रूप से कार्यालय को उपलब्ध कराएं। इसके बाद जिला कार्यालय को यही संकलित आंकड़े जनपदवार रूप में 24 अगस्त 2026 की सायं तक राज्य परियोजना कार्यालय को भेजने हैं — यानी ब्लॉक से जिला और जिला से राज्य तक, एक ही दिन में दो चरणों की रिपोर्टिंग पूरी करनी है। पत्र की एक प्रतिलिपि सूचनार्थ राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, उत्तराखंड को भी भेजी गई है। देहरादून का पत्र मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल के हस्ताक्षर से जारी हुआ है, जबकि राज्य कार्यालय का मूल पत्र अपर राज्य परियोजना निदेशक के0एस0 रावत द्वारा जारी किया गया था। राज्य कार्यालय का मूल पत्र तीनों जनपदों को संयुक्त रूप से संबोधित था, इसलिए हरिद्वार व उधमसिंहनगर के जिला कार्यालयों से भी इसी तर्ज पर अपने-अपने विकासखंडों को निर्देश भेजे जाने की प्रक्रिया अपेक्षित है।

अभिभावकों और विद्यालयों के लिए जरूरी बातें

  • बच्चे के आधार कार्ड में दर्ज नाम, जन्मतिथि व लिंग की जांच यू-डायस/स्कूल रिकॉर्ड से मिलाकर करें; कोई भी अंतर मिलने पर आधार सेवा केंद्र या स्कूल के माध्यम से तुरंत सुधार कराएं।
  • यदि विद्यालय की ओर से सहमति पत्र (कंसेंट फॉर्म) मांगा गया है तो उसे बिना देरी भरकर जमा करें, क्योंकि नाबालिग छात्रों के लिए अपार आईडी अभिभावक की लिखित सहमति के बिना नहीं बनाई जा सकती।
  • जिन छात्रों के पास आधार नहीं है या जो विदेशी/नेपाली मूल के हैं, वे विकल्प के तौर पर विद्यालय से वैकल्पिक सत्यापन प्रक्रिया की जानकारी लें।
  • पोर्टल पर आवेदन असफल होने या सत्यापन लंबित/असफल रहने की स्थिति में स्कूल प्रशासन से संपर्क कर स्थिति की दोबारा जांच कराएं, क्योंकि कई बार यह गड़बड़ी दोबारा प्रयास करने पर ही ठीक होती है।
  • नया आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में हैं तो उसकी पावती (रसीद) संभालकर रखें और आधार बन जाते ही तुरंत स्कूल को सूचित करें, ताकि अपार आईडी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
  • अपार आईडी बन जाने के बाद उसे डिजिलॉकर (digilocker.gov.in) से डाउनलोड कर सुरक्षित रखें, क्योंकि आगे कक्षा 9 और 11 के पंजीकरण तथा बोर्ड परीक्षा की एलओसी में इसकी आवश्यकता पड़ेगी।

यह सिर्फ उत्तराखंड की समस्या नहीं

देशभर में अपार आईडी को लेकर करीब-करीब यही उलझनें सामने आ रही हैं। सीबीएसई ने अपने संबद्ध विद्यालयों के लिए पहले ही एक अलग अपार आईडी मॉनिटरिंग (एआईएम) पोर्टल विकसित कर रखा है, जिस पर स्कूलों को नियमित रूप से प्रगति दर्ज करनी होती है। बोर्ड ने विद्यालयों को अभिभावक-शिक्षक बैठकों (पीटीएम) के जरिए अपार आईडी की जानकारी देने तथा सहमति पत्र पर हस्ताक्षर लेने के निर्देश भी दिए हैं। महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने भी अपनी सामान्य प्रवेश परीक्षाओं के पंजीकरण के लिए आधार के साथ अपार आईडी को जरूरी शर्त बना दिया है। ऐसे में उत्तराखंड में जो दिक्कतें सामने आ रही हैं — नाम-जन्मतिथि का बेमेल, सहमति पत्र में देरी, पोर्टल की तकनीकी अड़चनें — करीब वही समस्याएं देश के अधिकतर राज्यों के स्कूलों के सामने भी आ रही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उत्तराखंड सरकार अब इसे ब्लॉक स्तर तक ट्रैक करने की संरचना बना रही है, ताकि हर विकासखंड की जवाबदेही तय हो सके।

आगे क्या

तीनों जनपदों को 24 अगस्त तक जो आंकड़े जुटाने हैं, उनसे राज्य कार्यालय को यह स्पष्ट तस्वीर मिलेगी कि किस विकासखंड में किस तरह की समस्या सबसे अधिक है, ताकि आगे लक्षित कार्ययोजना बनाई जा सके। जिन जनपदों की प्रगति संतोषजनक रही है, वहां अपनाई गई कार्यप्रणाली को कमजोर प्रगति वाले विकासखंडों में भी लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। समग्र शिक्षा उत्तराखंड की सूचनाएं व आदेश आधिकारिक वेबसाइट ssa.uk.gov.in पर नियमित रूप से अपलोड होते हैं, जहां से अभिभावक व विद्यालय आगे की अपडेट देख सकते हैं। आपबीती आगे भी इस विषय से जुड़ी हर अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अपार आईडी क्या है?

अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत हर छात्र को दी जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल पहचान है। यह "वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी" पहल का हिस्सा है और छात्र की मार्कशीट, प्रमाण-पत्र व एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) खाते से जुड़ी रहती है।

देहरादून, हरिद्वार व उधमसिंहनगर को अपार आईडी का ब्योरा कब तक जमा करना है?

विकासखंडों को यह आंकड़ा 24 अगस्त 2026 की पूर्वाह्न तक अपने जिला कार्यालय को देना है, और जिला कार्यालयों को उसी दिन सायं तक राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा उत्तराखंड को संकलित रिपोर्ट भेजनी है।

बच्चे के आधार और यू-डायस में नाम अलग-अलग हो तो क्या करें?

सबसे पहले विद्यालय को सूचित करें और यू-डायस पोर्टल पर सही विवरण दर्ज कराएं; आधार में गलती हो तो नजदीकी आधार सेवा केंद्र से सुधार कराएं। दोनों दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि व लिंग पूरी तरह मेल खाने पर ही अपार आईडी सफलतापूर्वक बन पाती है।

क्या अपार आईडी के बिना 2026-27 में बोर्ड परीक्षा में बैठ सकते हैं?

सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 व 11 के पंजीकरण और कक्षा 10, 12 की एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स) के लिए अपार आईडी अनिवार्य कर दी है, इसलिए समय रहते आईडी बनवाना जरूरी है। अन्य राज्यों के बोर्ड भी धीरे-धीरे यही नियम लागू कर रहे हैं।

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Shakti Rao Mani

Shakti Rao Mani शिक्षा नीति, सरकारी योजनाओं और उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा तंत्र पर विशेष रूप से लिखते हैं। Aapbiti के Education Unit से जुड़े हैं और अभिभावकों व छात्रों तक सटीक एवं उपयोगी जानकारी पहुँचाना उनकी प्राथमिकता है।

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