NCERT Class 9 Sanskrit Chapter 9: Kritam Pratikritam Bhuyadesha Dharmah Sanatanah | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः की सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या

यह पोस्ट कक्षा 9 संस्कृत (शारदा) के नवम पाठ "कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः" की सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या प्रस्तुत करती है। इसमें महाभारत की बकासुर-वध कथा पर आधारित श्रीरङ्गनाथशर्मा रचित नाटक 'एकचक्रम्' का सारांश, माता कुन्ती और भीम का संवाद, शब्दार्थ, व्याकरण और महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर सरल भाषा में समझाए गए हैं।

Sep 05, 2026 - 23:25
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कक्षा 9 संस्कृत शारदा नवम पाठ के अध्ययन नोट्स का ग्राफिक, जिसमें बकासुर वध की कहानी, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, व्याकरण बिंदु और शिक्षाप्रद सारांश को बहुत ही सरल हिंदी में समझाया गया है।
यह चित्र कक्षा 9 संस्कृत के पाठ “कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः” को आकर्षक इन्फोग्राफिक रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें एकचक्रम्, बकासुर-वध, भीम, कुन्ती, प्रत्युपकार, वचन-पालन, मातृ-आज्ञा, वीरता और धर्म जैसे प्रमुख विषयों को सरल, व्यवस्थित और शैक्षिक शैली में दर्शाया गया है।

संस्कृत विषय में कक्षा 9 (शारदा) के नवम पाठ "कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः" का आधार महाभारत की प्रसिद्ध बकासुर-वध कथा है, जिसे विद्वान् महामहोपाध्याय श्रीरङ्गनाथशर्मा द्वारा रचित लघु-रूपक "एकचक्रम्" से लिया गया है। पाठ्य-पुस्तक में यह अंश उसी रूपक के तृतीय-चतुर्थ अंक से उद्धृत है। नीचे इस पाठ को कक्षा 9 के स्तर पर सरल भाषा में समझाया गया है — कथा का सारांश, संवादों का भावार्थ, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, व्याकरण-बिंदु और परीक्षा-उपयोगी प्रश्नोत्तर सहित।

पाठ का परिचय

रामायण और महाभारत — ये दोनों भारत के सबसे प्रसिद्ध इतिहास-ग्रन्थ माने जाते हैं। महाभारत की कथाओं पर आधारित होकर बाद के काल में भी अनेक संस्कृत रचनाएँ लिखी गईं, जिनमें से एक है श्रीरङ्गनाथशर्मा-रचित रूपक "एकचक्रम्"। इसी रूपक के एक अंश में बकासुर के वध की प्रसिद्ध कथा को नाटकीय संवाद-शैली में प्रस्तुत किया गया है। पाठ का शीर्षक स्वयं एक प्राचीन श्लोकांश से लिया गया है — "कृतं प्रतिकृतं भूयात्, एष धर्मः सनातनः" — अर्थात् किसी का उपकार जिस रूप में प्राप्त हो, उसी के अनुरूप प्रत्युपकार करना ही सनातन धर्म है।

कथा की पृष्ठभूमि

वनवास के समय पाण्डव एकचक्रा नामक नगर में एक ब्राह्मण-परिवार के घर में गुप्त रूप से निवास कर रहे थे। एक दिन उस घर से रुदन की ध्वनि सुनकर माता कुन्ती वहाँ पहुँचती हैं और कारण पूछती हैं। पता चलता है कि नगर के निकट पर्वत पर बकासुर नामक एक राक्षस रहता है, जिसके साथ नगरवासियों की यह संधि है कि प्रतिदिन बारी-बारी से किसी एक परिवार को उसके लिए भोजन (एक व्यक्ति सहित बहुत-सा अन्न) भेजना पड़ता है। आज उसी ब्राह्मण-परिवार की बारी है, इसीलिए वे शोकाकुल हैं। यह सुनकर कुन्ती उस असहाय परिवार की सहायता के लिए अपने ही एक पुत्र को बकासुर के पास भेजने की प्रतिज्ञा कर लेती हैं।

पाठ का सरल सारांश

कुन्ती अपने पुत्र भीम को बताती हैं कि उन्होंने पड़ोसी ब्राह्मण को कुछ सहायता देने का वचन दिया है। भीम इसे सहर्ष स्वीकार करते हैं, यह सोचकर कि उपकार करने वाले का आतिथ्य-धर्म निभाना कर्तव्य है। जब कुन्ती स्पष्ट करती हैं कि सामने पर्वत पर रहने वाले बकासुर नामक राक्षस के लिए ही यह भोजन-भेंट भेजी जानी है, और उस दुष्ट राक्षस के साथ भोजन में एक मनुष्य को भी भेजना पड़ता है, तब भीम बिना विचलित हुए स्वयं उस कार्य के लिए तैयार हो जाते हैं।

अगली सुबह की बारी तय होती है। कुन्ती भीम से कहती हैं कि मनुष्य-भक्षक राक्षस के पास स्वयं जाना खतरे से खाली नहीं, परन्तु वचन तो निभाना ही होगा। भीम माता को धैर्य बँधाते हुए एक प्रसिद्ध सूक्ति कहते हैं — भिक्षा देकर बहुत काल से नगरवासियों ने हमारा उपकार किया है, अतः जैसा उपकार मिला है वैसा ही प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है। भीम स्वयं बकासुर के पास जाने का निश्चय कर लेते हैं। कुन्ती ब्राह्मण-परिवार को सूचित करती हैं कि आज का भोजन उनके ही पुत्र भीम द्वारा भेजा जाएगा, और वे प्रसन्नतापूर्वक भरपूर भोजन तैयार करने को कहती हैं।

महाभारत की बकासुर वध कथा पर आधारित कक्षा 9 संस्कृत पाठ 9 'कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः' का मुख्य चित्र, जिसमें भीम और माता कुन्ती का संवाद दर्शाया गया है।

इसी बीच युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव वहाँ आते हैं और भीम को असाधारण रूप से प्रसन्न व उत्साहित देखकर आश्चर्यचकित होते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि आज भीम को बकासुर से युद्ध करने जाना है, तो युधिष्ठिर चिंतित होकर कुन्ती से प्रश्न करते हैं कि जिस भीम के बल पर सब पाण्डव निश्चिन्त रहते हैं, उसी को इस विपत्ति में क्यों भेजा गया। भीम स्वयं उत्तर देते हैं कि माता की आज्ञा का उल्लंघन उचित नहीं है और धर्म का पालन करना ही श्रेष्ठ है। अर्जुन साथ चलने का प्रस्ताव रखते हैं, पर भीम विनम्रतापूर्वक मना करते हुए अकेले ही प्रस्थान करते हैं, भोजन से भरी गाड़ी के साथ।

पर्वत पर पहुँचकर भीम स्वयं ही सारा भोजन खा जाते हैं और बकासुर को ललकारते हैं कि वह अब मनुष्यों को खाना बंद करे। क्रोधित बकासुर और भीम के बीच भीषण मल्लयुद्ध होता है, जिसमें अंततः भीम बकासुर का वध कर देते हैं। इस प्रकार पाठ हमें सिखाता है कि वचन-पालन, मातृ-आज्ञा का सम्मान और परोपकार के प्रति कृतज्ञता ही यहाँ मूल संदेश है — जिस प्रकार का उपकार हमें प्राप्त होता है, उसी अनुरूप उत्तर देना ही चिरकाल से चला आ रहा धर्म है।

संवादों का भावार्थ — मुख्य भाग

1. कुन्ती-भीम संवाद — प्रतिज्ञा और स्वीकृति

कुन्ती भीम को बताती हैं कि पड़ोसी ब्राह्मण के लिए कुछ प्रतिश्रुत किया गया है। भीम बिना किसी संकोच के इसे स्वीकार करते हैं और आतिथ्य-धर्म निभाने की बात कहते हैं।

आसान भाषा में समझें: दिया हुआ वचन निभाना ही सच्चा धर्म है, चाहे कार्य कितना भी कठिन क्यों न हो।

2. बकासुर की सत्यता और भीम का संकल्प

जब पता चलता है कि यह भोजन एक नरभक्षी राक्षस के लिए है, तो भीम स्वयं वहाँ जाने का निश्चय कर लेते हैं और अपनी सूक्ति द्वारा प्रत्युपकार के सिद्धान्त को समझाते हैं।

आसान भाषा में समझें: जो उपकार हमें मिला है, उसका ऋण चुकाना ही मनुष्य का कर्तव्य है — यही सनातन धर्म है।

3. भाइयों की चिंता और भीम का उत्तर

युधिष्ठिर आदि भाई भीम की इस विपत्ति भरी यात्रा पर चिंता व्यक्त करते हैं, परन्तु भीम माता की आज्ञा के पालन को अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं।

आसान भाषा में समझें: माता-पिता की आज्ञा का सम्मान करना और धर्म-पालन ही सबसे बड़ा कर्तव्य है।

4. भीम-बकासुर युद्ध और विजय

पर्वत पर पहुँचकर भीम बकासुर को ललकारते हैं, दोनों में भीषण मल्लयुद्ध होता है और अंततः बकासुर मारा जाता है।

आसान भाषा में समझें: सत्य और धर्म की रक्षा के लिए वीरता और साहस आवश्यक है।

मुख्य भावों की तुलनात्मक तालिका

मुख्य भाव सम्बन्धित पात्र सरल संदेश
प्रतिज्ञा और स्वीकृति कुन्ती, भीम दिया वचन अवश्य निभाना चाहिए
प्रत्युपकार का सिद्धान्त भीम जैसा उपकार मिले, वैसा ही लौटाना धर्म है
मातृ-आज्ञा का सम्मान युधिष्ठिर, भीम माता-पिता की आज्ञा सर्वोपरि है
वीरता और धर्म-रक्षा भीम, बकासुर अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़ा होना चाहिए

महत्वपूर्ण शब्दार्थ

संस्कृत शब्द सरल हिंदी अर्थ
प्रतिश्रुतम् प्रतिज्ञा किया हुआ / वचन दिया हुआ
आतिथेयः अतिथि की सेवा करने वाला
आयोधनम् युद्ध
उत्फुल्लाक्षः प्रसन्नता से खिली हुई आँखों वाला
औदरिकः केवल पेट भरने में रुचि रखने वाला
निषूदकः विनाशक
प्रतिवेशी पड़ोसी
प्रत्यादेशम् अवज्ञा / आज्ञा का उल्लंघन
मृष्टान्नम् स्वादिष्ट भोजन
मल्लयुद्धम् पहलवानों जैसा द्वन्द्व-युद्ध
श्रोत्रियः वेद-पाठी विद्वान् ब्राह्मण
हुताशनः अग्नि

व्याकरण सम्बन्धी बिंदु

पाठ के अभ्यास में मुख्यतः चार व्याकरण-कौशल परीक्षित किए जाते हैं — सन्धि-विच्छेद, समस्त-पद (समास), पर्यायवाची व विलोम शब्द, तथा कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में रूपान्तरण। नीचे एक-एक उदाहरण से इन्हें समझाया गया है:

व्याकरण-बिंदु उदाहरण स्पष्टीकरण
सन्धि-विच्छेद न चैतावत् = न + च + एतावत् वृद्धि-सन्धि का उदाहरण
समस्त-पद मृष्टम् अन्नम् = मृष्टान्नम् कर्मधारय समास
पर्यायवाची विप्रः = ब्राह्मणः समान अर्थ वाले शब्द
विलोम शब्द पीवरः ↔ कृशः मोटा ↔ पतला
वाच्य-परिवर्तन भवत्या प्रतिश्रुतम् → भवती प्रतिश्रुतवती कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में परिवर्तन

पाठ का केन्द्रीय श्लोक

भैक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृता वयम्।
कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः॥

आसान भाषा में समझें: भिक्षा देकर नगरवासियों ने बहुत काल से हमारा उपकार किया है, अतः जैसा उपकार हमें मिला है, वैसा ही प्रत्युपकार करना — यही चिरकाल से चला आ रहा धर्म है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • पाठ का शीर्षक है — कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः, जो एक प्राचीन श्लोकांश पर आधारित है।
  • यह अंश "एकचक्रम्" नामक लघु-रूपक से लिया गया है, जिसके रचयिता हैं महामहोपाध्याय श्रीरङ्गनाथशर्मा।
  • कथावस्तु महाभारत की बकासुर-वध कथा पर आधारित है; पाठ्य-भाग तृतीय-चतुर्थ अंक से उद्धृत है।
  • पाण्डव वनवास काल में एकचक्रा नगर में एक ब्राह्मण-परिवार के घर रहते थे।
  • बकासुर के साथ नगरवासियों की यह संधि थी कि प्रतिदिन बारी-बारी से एक परिवार भोजन (व्यक्ति सहित) भेजे।
  • कुन्ती ने ब्राह्मण-परिवार की सहायता हेतु अपने पुत्र भीम को बकासुर के पास भेजने की प्रतिज्ञा की।
  • भीम के अनुसार, माता की आज्ञा का उल्लंघन उचित नहीं है — धर्म-पालन ही सर्वोपरि है।
  • भीम ने पर्वत पर बकासुर से मल्लयुद्ध कर उसका वध किया।
  • केन्द्रीय श्लोक का सार है — जैसा उपकार मिले, वैसा ही प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है।

इस पाठ से हमें क्या सीख मिलती है?

यह पाठ हमें सिखाता है कि दिया हुआ वचन निभाना, माता-पिता की आज्ञा का सम्मान करना, तथा जिस उपकार से हम लाभान्वित हुए हैं उसके प्रति कृतज्ञ रहकर प्रत्युपकार करना — यही सच्चे मनुष्य का धर्म है। साथ ही यह भी सिखाता है कि अन्याय व अधर्म का सामना साहसपूर्वक करना चाहिए, चाहे इसके लिए कितना भी बड़ा जोखिम क्यों न उठाना पड़े।

पाठ में निहित मूल्य विद्यार्थी इससे क्या सीख सकता है
वचन-पालन दिया हुआ वचन कठिन परिस्थिति में भी निभाना चाहिए
कृतज्ञता जिससे उपकार मिला हो, उसका प्रत्युपकार करना
मातृ-आज्ञा का सम्मान बड़ों की आज्ञा का पालन करना कर्तव्य है
साहस और वीरता अन्याय के विरुद्ध निर्भय होकर खड़ा होना

लेखक-परिचय

इस रूपक "एकचक्रम्" के रचयिता महामहोपाध्याय श्री एन्. रङ्गनाथशर्मा कर्नाटक के शिवमोग्गा मण्डल के नडळल्ली ग्राम में जन्मे विख्यात संस्कृत विद्वान् थे। वे व्याकरण-शास्त्र, अलङ्कार-शास्त्र और अद्वैत-वेदान्त के प्रकाण्ड पण्डित माने जाते थे और बेंगलुरु के चामराजेन्द्र संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण के प्राध्यापक रहे। उन्होंने बाहुबलिविजयम्, एकचक्रम्, कुसुमाञ्जलिः, श्रीशङ्करचरितामृतम् जैसी अनेक संस्कृत कृतियाँ रचीं तथा राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर सम्मानित हुए।

कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः — प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: पाठ की मूल कथा किस ग्रन्थ पर आधारित है?

उत्तर: पाठ की मूल कथा महाभारत की बकासुर-वध कथा पर आधारित है, जिसे श्रीरङ्गनाथशर्मा-रचित रूपक "एकचक्रम्" से लिया गया है।

प्रश्न 2: पाण्डव एकचक्रा नगर में कहाँ निवास कर रहे थे?

उत्तर: पाण्डव वनवास के समय एकचक्रा नगर में एक ब्राह्मण-परिवार के घर में गुप्त रूप से निवास कर रहे थे।

प्रश्न 3: नगरवासियों और बकासुर के बीच क्या संधि थी?

उत्तर: संधि के अनुसार, प्रतिदिन बारी-बारी से नगर का कोई एक परिवार बकासुर के लिए भोजन (एक व्यक्ति सहित प्रचुर अन्न) भेजता था।

प्रश्न 4: कुन्ती ने क्या प्रतिज्ञा की?

उत्तर: कुन्ती ने प्रतिज्ञा की कि वे अपने पुत्रों में से एक को उस असहाय ब्राह्मण-परिवार के स्थान पर बकासुर के पास भेजेंगी।

प्रश्न 5: भीम ने बकासुर के पास जाने का निर्णय क्यों लिया?

उत्तर: भीम मानते थे कि नगरवासियों ने भिक्षा देकर उनका दीर्घकाल से उपकार किया है, अतः प्रत्युपकार करना धर्म है; साथ ही माता की आज्ञा का पालन भी आवश्यक था।

प्रश्न 6: युधिष्ठिर ने भीम को भेजे जाने पर क्या चिंता व्यक्त की?

उत्तर: युधिष्ठिर ने कहा कि जिस भीम के भुजबल पर सब पाण्डव निश्चिन्त रहते हैं, उसे ही ऐसे संकट में भेजना उचित प्रतीत नहीं होता।

प्रश्न 7: भीम ने युधिष्ठिर को क्या उत्तर दिया?

उत्तर: भीम ने कहा कि धर्म का पालन करना आवश्यक है और माता की आज्ञा का उल्लंघन करना उचित नहीं है।

प्रश्न 8: पर्वत पर पहुँचकर भीम ने क्या किया?

उत्तर: भीम ने स्वयं सारा भोजन खा लिया और बकासुर को ललकारा, जिसके बाद दोनों में भीषण मल्लयुद्ध हुआ और अंततः भीम ने बकासुर का वध कर दिया।

प्रश्न 9: "कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः" श्लोक का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि जैसा उपकार हमें प्राप्त हुआ है, वैसा ही प्रत्युपकार करना चाहिए — यही चिरकाल से चला आ रहा सनातन धर्म है।

प्रश्न 10: "एकचक्रम्" के रचयिता कौन थे?

उत्तर: "एकचक्रम्" रूपक के रचयिता महामहोपाध्याय श्री एन्. रङ्गनाथशर्मा थे, जो व्याकरण, अलङ्कार-शास्त्र और अद्वैत-वेदान्त के विद्वान् थे।

एक नज़र में पूरा पाठ

"कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः" महाभारत की बकासुर-वध कथा पर आधारित एक नाटकीय संवाद-शैली का पाठ है, जो श्रीरङ्गनाथशर्मा-रचित रूपक "एकचक्रम्" से लिया गया है। इसमें कुन्ती द्वारा दिए गए वचन को निभाने के लिए भीम स्वयं बकासुर के पास जाते हैं और उसका वध कर एक असहाय ब्राह्मण-परिवार की रक्षा करते हैं। पाठ का केन्द्रीय संदेश है — "जैसा उपकार मिले, वैसा ही प्रत्युपकार करना ही सनातन धर्म है" — अर्थात् कृतज्ञता, वचन-पालन और मातृ-आज्ञा का सम्मान ही मानव-जीवन के आधारभूत मूल्य हैं। परीक्षा में इस पाठ से शब्दार्थ, सन्धि-विच्छेद, समास, वाच्य-परिवर्तन और कथा-आधारित प्रश्न विशेष रूप से पूछे जाते हैं।

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Frequently Asked Questions

यह पाठ महाभारत की प्रसिद्ध बकासुर-वध कथा पर आधारित है, जिसे विद्वान् महामहोपाध्याय श्रीरङ्गनाथशर्मा द्वारा रचित लघु-रूपक "एकचक्रम्" से लिया गया है।

कुन्ती ने ब्राह्मण परिवार के रोने का कारण जानकर यह प्रतिज्ञा की थी कि उस असहाय परिवार की रक्षा के लिए वे अपने एक पुत्र (भीम) को बकासुर के पास भेजेंगी।

भीम का मानना था कि एकचक्रा नगर के निवासियों ने भिक्षा देकर उनका लंबे समय तक उपकार किया है। उनका प्रत्युपकार करना और माता की आज्ञा का पालन करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि जिस प्रकार का उपकार हमें प्राप्त होता है, अवसर आने पर उसी अनुरूप उसका प्रत्युपकार (बदला चुकाना) करना ही सनातन धर्म है। साथ ही अन्याय का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए।
Vivek kumar

Vivek Kumar is an Editorial Intern at Aapbiti, specializing in publishing and managing education-focused news articles. Operating under the direct mentorship and guidance of Shakti Rao Mani, the Product Owner of aapbiti.com, Vivek is dedicated to delivering accurate, timely, and engaging academic updates. His role focuses on keeping readers informed about educational trends, exams, admissions, and key academic policies.

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