RTE Uttarakhand Admission 2026-27: दूसरे और तीसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया रुकी, जानें क्या है बड़ी वजह
उत्तराखंड में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत सत्र 2026-27 के लिए दूसरे और तीसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है। सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग पुराने वर्षों के लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति मामलों के निपटारे और निजी विद्यालयों की संबद्धता के भौतिक सत्यापन में व्यस्त है, जिसके कारण यह प्रक्रिया टली हुई है।
उत्तराखंड में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया इस वर्ष 2026-27 के लिए दूसरे और तीसरे चरण में आगे नहीं बढ़ाई जा रही है। Aapbiti को RTE कार्यालय, देहरादून से जुड़े सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि विभाग इस समय पुराने वर्षों के लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति (फीस रीइंबर्समेंट) मामलों और विद्यालयों की RTE संबद्धता (एफिलिएशन) के सत्यापन में व्यस्त है, जिसके चलते अगले चरणों की प्रक्रिया फिलहाल टली हुई है।
क्या है पूरा मामला
सूत्रों के अनुसार, RTE उत्तराखंड कार्यालय इस समय दो बड़े कार्यों में जुटा है। पहला, शैक्षणिक सत्र 2025-26 और उससे पहले के वर्षों में RTE के तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की फीस का निजी विद्यालयों को भुगतान (सेटलमेंट) किया जाना है, जो अभी अटका हुआ बताया जा रहा है। दूसरा, राज्य के जिन निजी विद्यालयों को RTE के तहत मान्यता या संबद्धता दी गई थी, उनका दोबारा सत्यापन किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी सूचीबद्ध विद्यालय नियमों के अनुरूप हैं।
इन्हीं दो कारणों से विभाग का पूरा प्रशासनिक ध्यान फिलहाल पुराने मामलों को निपटाने पर केंद्रित है, जिस वजह से इस वर्ष दूसरे और तीसरे चरण की नई प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही। यह जानकारी अभी तक विभाग की ओर से किसी सार्वजनिक अधिसूचना या प्रेस विज्ञप्ति के रूप में जारी नहीं हुई है, इसलिए अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे इसे प्रारंभिक जानकारी के तौर पर लें और आधिकारिक पुष्टि के लिए विभाग से सीधे संपर्क करें।
RTE प्रवेश प्रक्रिया: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी) के तहत देश के सभी निजी गैर-अनुदानित विद्यालयों को अपनी कुल सीटों में से कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। उत्तराखंड में इस प्रावधान को समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत लागू किया जाता है, और राज्य स्तर पर इसकी पूरी प्रक्रिया rteonline.uk.gov.in पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित होती है।
सामान्यतः हर वर्ष यह प्रक्रिया फरवरी-मार्च में आवेदन आमंत्रित करने से शुरू होती है। इसके बाद खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय स्तर पर दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन होता है, फिर कंप्यूटरीकृत लॉटरी के जरिए सीटें आवंटित की जाती हैं। पहले चरण में जिन बच्चों को सीट नहीं मिल पाती, उन्हें अगले चरणों में मौका देने के लिए विभाग रिक्त सीटों की सूची जारी करता रहा है। यही परंपरागत ढांचा है, जिसके आधार पर अभिभावक हर वर्ष दूसरे और तीसरे चरण की उम्मीद करते हैं।
पहला चरण अब भी वैध, आगे क्या स्थिति
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए RTE के तहत पहले चरण की प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। इसमें आवेदन, दस्तावेज सत्यापन, लॉटरी और परिणाम की प्रक्रिया राज्य के पोर्टल के माध्यम से संपन्न हुई थी, और जिन विद्यार्थियों का चयन हुआ, उन्हें संबंधित विद्यालयों में प्रवेश भी मिल चुका है। दिक्कत उन आवेदकों के लिए है जो पहले चरण की लॉटरी में चयनित नहीं हो पाए और दूसरे या तीसरे चरण में दोबारा मौके की उम्मीद कर रहे थे।
पिछले शैक्षणिक वर्षों में सामान्यतः यह देखा गया है कि पहले चरण के बाद खाली रह गई सीटों को भरने के लिए अप्रैल से जुलाई के बीच दूसरा और तीसरा चरण आयोजित किया जाता रहा है। इस बार, विभागीय व्यस्तता के कारण, यह प्रक्रिया रुकी हुई प्रतीत हो रही है, हालांकि इसे लेकर कोई औपचारिक आदेश या समय-सीमा अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
फीस सेटलमेंट में देरी क्यों बनी बड़ी वजह
RTE अधिनियम की धारा 12(2) के तहत, निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश पाने वाले बच्चों की फीस राज्य सरकार द्वारा संबंधित विद्यालय को प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाती है। यह भुगतान हर वर्ष कई चरणों और स्तरों की जांच से गुजरने के बाद जारी होता है, जिसमें विद्यार्थियों की उपस्थिति, दाखिले की पुष्टि और विद्यालय के दावों का सत्यापन शामिल है।
सूत्रों की मानें तो सत्र 2025-26 और उससे पहले के कुछ वर्षों की फीस अभी भी कई विद्यालयों को पूरी तरह जारी नहीं हो पाई है। इस बकाया राशि के निपटारे के लिए विभाग को हर विद्यालय के रिकॉर्ड, विद्यार्थियों की सूची और उपस्थिति डेटा का दोबारा मिलान करना पड़ रहा है, जो एक समय-साध्य प्रक्रिया है। जब तक यह मिलान पूरा नहीं होता, तब तक नए सिरे से बड़े पैमाने पर प्रवेश चरण चलाना विभाग के लिए प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
विद्यालयों की संबद्धता सत्यापन का पहलू
दूसरा बड़ा कारण विद्यालयों की RTE संबद्धता का सत्यापन है। समय के साथ कुछ विद्यालयों की मान्यता की स्थिति, संचालन और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि RTE पोर्टल पर सूचीबद्ध सभी निजी विद्यालय वास्तव में मान्यता प्राप्त हैं और तय मानकों को पूरा करते हैं।
यह सत्यापन प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसका सीधा असर आने वाले प्रवेश चक्रों की पारदर्शिता पर पड़ेगा। यदि कोई विद्यालय सत्यापन में मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे RTE सूची से हटाया जा सकता है, जिससे भविष्य में गलत या अपात्र विद्यालयों में सीटें आवंटित होने का जोखिम कम होगा।
पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष की स्थिति
| बिंदु | पिछले वर्ष (2025-26) | इस वर्ष (2026-27, अब तक की स्थिति) |
|---|---|---|
| पहला चरण | समय पर आयोजित | पूरा हो चुका |
| दूसरा चरण | जून-जुलाई में आयोजित | सूत्रों के अनुसार फिलहाल स्थगित |
| तीसरा चरण | सीमित मामलों में आयोजित | सूत्रों के अनुसार फिलहाल स्थगित |
| फीस भुगतान | सामान्य प्रक्रिया के तहत जारी | पुराने बकाया मामलों का सत्यापन जारी |
| विद्यालय संबद्धता जांच | नियमित समीक्षा | विस्तृत पुनः सत्यापन जारी |
यह तालिका केवल Aapbiti को मिली सूत्रों की जानकारी पर आधारित है। इसे आधिकारिक अधिसूचना नहीं माना जाना चाहिए और वास्तविक स्थिति के लिए विभाग की पुष्टि आवश्यक है।
अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है
जिन अभिभावकों के बच्चे पहले चरण की लॉटरी में चयनित नहीं हो सके, उनके लिए फिलहाल प्रतीक्षा के अलावा कोई स्पष्ट विकल्प सामने नहीं है। ऐसे अभिभावकों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- आधिकारिक पोर्टल पर नियमित रूप से नई सूचनाओं और अपडेट की जांच करते रहें।
- अपने आवेदन नंबर और दस्तावेजों की प्रति सुरक्षित रखें, ताकि यदि दूसरा या तीसरा चरण बाद में शुरू हो तो प्रक्रिया में देरी न हो।
- संबंधित खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय या जिला शिक्षा कार्यालय से समय-समय पर स्थिति की जानकारी लेते रहें।
- किसी भी अपुष्ट सूचना या सोशल मीडिया संदेश पर आधारित होकर विद्यालय बदलने या निर्णय लेने से बचें।
व्यापक असर: पारदर्शिता की दिशा में कदम
शिक्षा विभाग के इस रुख को कुछ जानकार दीर्घकालिक दृष्टि से एक सकारात्मक कदम भी मान रहे हैं। यदि पुराने बकाया मामलों का पूरी तरह निपटारा हो जाता है और विद्यालयों की संबद्धता का सत्यापन ठीक ढंग से पूरा होता है, तो आने वाले वर्षों में RTE प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकती है। इससे उन शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है, जिनमें अभिभावक फीस भुगतान में देरी या विद्यालयों की मान्यता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
दूसरी ओर, इस पूरी कवायद का अल्पकालिक असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो प्रवेश के अगले अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में विभाग के लिए यह जरूरी होगा कि वह जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करते हुए आधिकारिक कार्यक्रम या समय-सीमा सार्वजनिक करे, ताकि अभिभावकों में अनिश्चितता की स्थिति न बने।
विद्यालयों के लिए स्थिति
जिन निजी विद्यालयों को RTE के तहत पूर्व में मान्यता मिली है, उनके लिए भी यह समय महत्वपूर्ण है। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान विद्यालयों से अपने दस्तावेज, उपस्थिति रिकॉर्ड और पूर्व वर्षों के दाखिला विवरण अद्यतन रखने की अपेक्षा की जा रही है। जिन विद्यालयों की फीस प्रतिपूर्ति अब तक लंबित है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के शिक्षा कार्यालय से संपर्क कर अपने दावों की स्थिति स्पष्ट कराएं, ताकि सत्यापन पूरा होने पर भुगतान में और देरी न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह जानकारी विभाग की आधिकारिक अधिसूचना है?
नहीं। यह जानकारी Aapbiti को RTE कार्यालय, देहरादून से जुड़े सूत्रों के माध्यम से मिली है। विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई सार्वजनिक आदेश, प्रेस नोट या पोर्टल अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
क्या दूसरा और तीसरा चरण पूरी तरह रद्द कर दिया गया है?
सूत्रों के अनुसार फिलहाल इन चरणों को आयोजित नहीं किया जा रहा है, लेकिन इसे स्थायी रूप से रद्द किए जाने की कोई पुष्टि नहीं है। स्थिति फीस सेटलमेंट और संबद्धता सत्यापन पूरा होने पर बदल सकती है।
जिन बच्चों का चयन पहले चरण में हुआ था, क्या उनके प्रवेश पर कोई असर पड़ेगा?
नहीं। जिन विद्यार्थियों को पहले चरण की लॉटरी में सीट मिल चुकी है और जिन्होंने प्रवेश ले लिया है, उनकी पढ़ाई और प्रवेश की स्थिति पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह मामला केवल आगे के चरणों से जुड़ा है।
अभिभावकों को अगला कदम क्या उठाना चाहिए?
अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने दस्तावेज तैयार रखें, आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखें और किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय सीधे संबंधित शिक्षा कार्यालय से जानकारी लें।
आधिकारिक पुष्टि के लिए कहां संपर्क करें
चूंकि यह जानकारी अभी तक विभाग की किसी आधिकारिक अधिसूचना का हिस्सा नहीं है, इसलिए अभिभावकों और विद्यालयों दोनों को सलाह दी जाती है कि वे आगे की स्पष्ट जानकारी और अद्यतन स्थिति के लिए सीधे संबंधित कार्यालयों से संपर्क करें।
- आधिकारिक RTE उत्तराखंड पोर्टल: rteonline.uk.gov.in
- समग्र शिक्षा उत्तराखंड, राज्य परियोजना कार्यालय, नानूरखेड़ा, तपोवन मार्ग, रायपुर, देहरादून — फोन: 0135-2781942, टोल-फ्री: 1800-180-4132
- ईमेल: spd-ssa-uk@nic.in
Aapbiti आगे भी इस विषय पर विभाग की किसी भी आधिकारिक अधिसूचना, नई तारीख या स्पष्टीकरण पर नजर बनाए रखेगा और नई जानकारी मिलते ही पाठकों को अपडेट करेगा।


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