NCERT Class 9 Geography Chapter 2 Notes in Hindi: Shaping of the Earth's Surface
NCERT कक्षा 9 भूगोल अध्याय 2 'Shaping of the Earth's Surface' (पृथ्वी की सतह का निर्माण) के इस लेख में अंतर्जनित व बहिर्जनित बलों, प्लेट विवर्तनिकी, अपक्षय और अपरदन की आसान व्याख्या दी गई है।
NCERT ने कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान की नई किताब "Understanding Society: India and Beyond – Part 1" के अध्याय 2 — Shaping of the Earth's Surface (पृथ्वी की सतह का निर्माण) में यह समझाया गया है कि पृथ्वी की भूआकृतियाँ — पर्वत, पठार, मैदान — किस तरह अंतर्जनित (endogenic) और बहिर्जनित (exogenic) बलों के लगातार टकराव से बनती हैं। इस पृष्ठ पर पूरे अध्याय की चरणबद्ध और गहराई से हिंदी व्याख्या दी गई है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कक्षा | 9 |
| अध्याय | 2 — Shaping of the Earth's Surface (पृथ्वी की सतह का निर्माण) |
| पाठ्यपुस्तक | Understanding Society: India and Beyond – Part 1 (NCERT नई किताब) |
| विषय क्षेत्र | भूगोल (Geography) |
| मुख्य अवधारणाएं | अंतर्जनित बल, बहिर्जनित बल, प्लेट विवर्तनिकी, अपक्षय, अपरदन |
| परीक्षा महत्व | प्रक्रिया व भू-आकृति आधारित 3–5 अंक |
इस अध्याय को कैसे पढ़ें? पहले यह समझें कि पृथ्वी की सतह स्थिर नहीं बल्कि गतिशील है। फिर अंतर्जनित बल (जो सतह के अंदर से काम करते हैं) और बहिर्जनित बल (जो सतह के बाहर से काम करते हैं) के बीच का अंतर स्पष्ट करें। अंत में नदी, हवा, हिमनद और लहरों जैसे कारकों से बनने वाली भू-आकृतियों को उदाहरण सहित याद करें, क्योंकि परीक्षा में यहीं से सबसे ज़्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं।
पृथ्वी की सतह हमेशा एक जैसी क्यों नहीं रहती?
ज़रा सोचिए — हिमालय जैसे ऊँचे पर्वत कैसे बने? गंगा का मैदान इतना समतल क्यों है? समुद्र किनारे चट्टानें क्यों टूटती दिखाई देती हैं? इन सब सवालों का जवाब एक ही तथ्य में छिपा है — पृथ्वी की सतह लगातार बदल रही है। यह बदलाव इतना धीमा होता है कि हमें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दिखाई नहीं देता, लेकिन लाखों वर्षों में यही धीमा बदलाव पर्वत खड़े कर देता है और चट्टानों को मिट्टी में बदल देता है।
इन बदलावों के पीछे दो तरह के बल काम करते हैं, जो लगातार एक-दूसरे के विपरीत दिशा में सक्रिय रहते हैं — एक सतह को ऊपर उठाता और बनाता है, दूसरा उसे तोड़कर समतल करता है। इन्हीं दोनों बलों के संतुलन और टकराव से पृथ्वी की मौजूदा भू-आकृतियाँ बनती हैं।
अंतर्जनित बल (Endogenic Forces)
अंतर्जनित बल वे शक्तियाँ हैं जो पृथ्वी के भीतर से उत्पन्न होती हैं और सतह को ऊपर उठाती हैं, मोड़ती हैं या तोड़ती हैं। इनका स्रोत पृथ्वी के आंतरिक भाग में मौजूद ताप और दबाव है।
पृथ्वी की आंतरिक संरचना
अंतर्जनित बलों को समझने के लिए पहले पृथ्वी की तीन मुख्य परतों को जानना ज़रूरी है।
| परत | विशेषता |
|---|---|
| भूपर्पटी (Crust) | सबसे ऊपरी और सबसे पतली परत, जिस पर हम रहते हैं |
| मैंटल (Mantle) | क्रस्ट के नीचे स्थित मोटी परत, अत्यधिक गर्म और अर्ध-तरल चट्टानों से बनी |
| क्रोड (Core) | पृथ्वी का केंद्रीय भाग, मुख्यतः लोहे और निकल से बना, सबसे अधिक तापमान वाला |
प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics)
भूपर्पटी कोई एक ठोस टुकड़ा नहीं है, बल्कि कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में बँटी हुई है, जो मैंटल के ऊपर बहुत धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। यही खिसकाव पृथ्वी की अधिकांश बड़ी भू-आकृतियों का कारण बनता है।
- जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो चट्टानें मुड़कर ऊपर उठ जाती हैं और पर्वत बनते हैं — जैसे हिमालय, जो भारतीय और यूरेशियन प्लेट की टक्कर से बना।
- जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर खिसकती हैं, तो दरारें बनती हैं और नई भूपर्पटी बनती है।
- जब प्लेटें एक-दूसरे के साथ-साथ खिसकती हैं, तो भूकंप जैसी घटनाएँ होती हैं।
अंतर्जनित बलों के प्रमुख परिणाम
- भूकंप — भूपर्पटी में अचानक हलचल से उत्पन्न कंपन।
- ज्वालामुखी — पृथ्वी के भीतर से पिघली चट्टान (मैग्मा) का सतह पर आना।
- पर्वत निर्माण — प्लेटों की टक्कर से चट्टानों का मुड़ना और ऊपर उठना।
- दरार घाटी (Rift Valley) — प्लेटों के दूर खिसकने से बनी गहरी घाटियाँ।
बहिर्जनित बल (Exogenic Forces)
बहिर्जनित बल वे शक्तियाँ हैं जो पृथ्वी की सतह के बाहर से काम करती हैं — जैसे सूर्य की गर्मी, वर्षा, हवा, नदी, हिमनद और समुद्री लहरें। ये बल अंतर्जनित बलों द्वारा बनाई गई ऊँची भू-आकृतियों को धीरे-धीरे तोड़कर समतल करने का काम करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को मुख्यतः दो चरणों में बाँटा जाता है — अपक्षय और अपरदन।
अपक्षय (Weathering)
अपक्षय वह प्रक्रिया है जिसमें चट्टानें अपने ही स्थान पर टूटती और बिखरती हैं, बिना किसी परिवहन (transport) के। यह तीन तरह से होता है।
| प्रकार | कारण |
|---|---|
| भौतिक अपक्षय | तापमान में बदलाव, बर्फ के जमने-पिघलने से चट्टानों में दरार पड़ना |
| रासायनिक अपक्षय | पानी और हवा में मौजूद रसायनों की चट्टानों के खनिजों से अभिक्रिया |
| जैविक अपक्षय | पेड़-पौधों की जड़ों और जीव-जंतुओं की गतिविधियों से चट्टानों का टूटना |
अपरदन (Erosion)
अपरदन में टूटी हुई चट्टानों और मिट्टी के कणों को नदी, हवा, हिमनद या लहरों द्वारा एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है और अंततः किसी अन्य स्थान पर जमा (निक्षेपण) कर दिया जाता है। अपरदन के मुख्य कारक और उनसे बनने वाली भू-आकृतियाँ इस प्रकार हैं।
नदी द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ
नदियाँ पहाड़ों से मैदानों तक बहते हुए भूमि को लगातार तराशती रहती हैं। इनके ऊपरी, मध्य और निचले प्रवाह में अलग-अलग भू-आकृतियाँ बनती हैं।
- V-आकार की घाटी — पहाड़ी क्षेत्र में नदी के तेज़ बहाव से बनती है।
- जलप्रपात (Waterfall) — जब नदी अचानक ऊँचाई से नीचे गिरती है।
- मैदानी क्षेत्र और डेल्टा — जब नदी मैदान में पहुँचकर धीमी गति से बहती है और मिट्टी जमा करती है, जैसे गंगा डेल्टा।
हवा द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ
रेगिस्तानी क्षेत्रों में हवा अपरदन और निक्षेपण का सबसे प्रमुख कारक होती है।
- बालू के टीले (Sand Dunes) — हवा द्वारा रेत के कणों के जमा होने से बनते हैं, जैसे थार मरुस्थल।
- मशरूम रॉक — हवा में मौजूद रेत के कणों के लगातार घर्षण से चट्टानों का आकार बदलना।
हिमनद द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ
ऊँचे पर्वतीय और ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ की विशाल चादरें (हिमनद) बहुत धीरे-धीरे खिसकती हुई चट्टानों को तराशती हैं।
- U-आकार की घाटी — हिमनद के खिसकने से चौड़ी और गहरी घाटी बनती है।
- सर्क (Cirque) — पर्वत की चोटी के पास कटोरे के आकार का गड्ढा।
समुद्री लहरों द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ
समुद्र तटीय क्षेत्रों में लहरें चट्टानों से लगातार टकराकर उन्हें तराशती हैं।
- सागरीय भृगु (Sea Cliff) — लहरों के टकराव से तट पर बनी खड़ी दीवार जैसी चट्टान।
- बालू तट (Beach) — लहरों द्वारा रेत के जमा होने से बना समतल तटीय क्षेत्र।
भू-आकृतियों के तीन मुख्य प्रकार
अंतर्जनित और बहिर्जनित बलों की संयुक्त क्रिया से पृथ्वी की सतह मुख्यतः तीन तरह की भू-आकृतियों में बँटती है।
| भू-आकृति | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| पर्वत (Mountains) | आसपास की भूमि से काफ़ी ऊँचे, ढालू भाग वाले | हिमालय |
| पठार (Plateaus) | ऊँचे लेकिन ऊपरी सतह अपेक्षाकृत समतल | दक्कन का पठार |
| मैदान (Plains) | समतल या हल्की ढाल वाली निचली भूमि, अक्सर उपजाऊ | गंगा का मैदान |
Let's Analyse — कक्षा गतिविधि
अपने आस-पास किसी नदी, पहाड़ी या तटीय क्षेत्र की पहचान कीजिए। समूह में चर्चा कीजिए कि वहाँ किस तरह का अपक्षय या अपरदन दिखाई देता है, इसका कारण क्या हो सकता है, और यह भू-आकृति आने वाले वर्षों में कैसे बदल सकती है। एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार करके कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
अंतर्जनित और बहिर्जनित बलों में क्या अंतर है?
अंतर्जनित बल पृथ्वी की सतह को ऊपर उठाकर नई भू-आकृतियाँ बनाते हैं, जबकि बहिर्जनित बल उन्हीं भू-आकृतियों को तोड़कर समतल करने का काम करते हैं। दोनों बल एक साथ, लेकिन विपरीत दिशा में काम करते रहते हैं — यही निरंतर संघर्ष पृथ्वी की सतह को लगातार बदलता रहता है।
| बिंदु | अंतर्जनित बल | बहिर्जनित बल |
|---|---|---|
| स्रोत | पृथ्वी के भीतर से | पृथ्वी के बाहर से (सूर्य, वायु, जल) |
| प्रभाव | सतह को ऊपर उठाना, मोड़ना | सतह को तोड़कर समतल करना |
| उदाहरण | भूकंप, ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण | अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण |
यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
पृथ्वी की सतह का निर्माण समझना केवल भू-आकृतियों के नाम याद करने तक सीमित नहीं है। यह यह समझने में मदद करता है कि कोई क्षेत्र भूकंप-प्रवण क्यों है, कहीं उपजाऊ मैदान क्यों बना और कहीं रेगिस्तान क्यों फैला हुआ है। यह ज्ञान कृषि, शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में सीधे काम आता है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएं (Quick Revision)
| पारिभाषिक शब्द | अर्थ |
|---|---|
| Endogenic Forces | पृथ्वी के भीतर से उत्पन्न होने वाले बल, जो सतह को ऊपर उठाते हैं |
| Exogenic Forces | पृथ्वी के बाहर से काम करने वाले बल, जो सतह को समतल करते हैं |
| Weathering (अपक्षय) | चट्टानों का अपने ही स्थान पर टूटना |
| Erosion (अपरदन) | टूटी चट्टानों और मिट्टी का एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन |
| Deposition (निक्षेपण) | परिवहन किए गए पदार्थों का किसी स्थान पर जमा होना |
| Plate Tectonics | भूपर्पटी की प्लेटों के धीरे-धीरे खिसकने का सिद्धांत |
Aapbiti News Experts ki Salah
- अंतर्जनित और बहिर्जनित बलों को याद करते समय हमेशा "बनाने वाला बल" और "तोड़ने वाला बल" के रूप में जोड़कर याद करें, बोर्ड परीक्षा में यही तरीका सबसे ज़्यादा काम आता है।
- नदी, हवा, हिमनद और लहरों से बनने वाली भू-आकृतियों को उनके आकार (V-आकार, U-आकार) के साथ जोड़कर याद करें ताकि भ्रम न हो।
- अपक्षय और अपरदन के बीच का अंतर परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है — याद रखें कि अपक्षय में स्थान नहीं बदलता, अपरदन में बदलता है।
- पर्वत, पठार और मैदान की परिभाषा के साथ-साथ भारत का एक-एक उदाहरण ज़रूर लिखें, इससे अतिरिक्त अंक मिलते हैं।
- "Let's Analyse" जैसी गतिविधियों पर आधारित प्रोजेक्ट-शैली प्रश्न भी बोर्ड में पूछे जा सकते हैं, इसलिए स्थानीय उदाहरण तैयार रखें।
अध्याय 2 सारांश — त्वरित दोहराई
| अवधारणा | मुख्य बात |
|---|---|
| अंतर्जनित बल | पृथ्वी के भीतर से उत्पन्न, सतह को ऊपर उठाते हैं |
| बहिर्जनित बल | पृथ्वी के बाहर से काम करते हैं, सतह को समतल करते हैं |
| पृथ्वी की परतें | भूपर्पटी, मैंटल, क्रोड |
| प्लेट विवर्तनिकी | प्लेटों के खिसकने से पर्वत, भूकंप और ज्वालामुखी बनते हैं |
| अपक्षय | भौतिक, रासायनिक, जैविक — तीन प्रकार |
| अपरदन के कारक | नदी, हवा, हिमनद, समुद्री लहरें |
| भू-आकृतियाँ | पर्वत, पठार, मैदान |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: अंतर्जनित और बहिर्जनित बल में क्या अंतर है?
अंतर्जनित बल पृथ्वी के भीतर से उत्पन्न होकर सतह को ऊपर उठाते हैं, जबकि बहिर्जनित बल सतह के बाहर से काम करते हुए उसे तोड़कर समतल करते हैं।
प्रश्न: अपक्षय और अपरदन में क्या फ़र्क है?
अपक्षय में चट्टानें अपने ही स्थान पर टूटती हैं, जबकि अपरदन में टूटी हुई चट्टानों और मिट्टी को नदी, हवा या हिमनद द्वारा दूसरी जगह ले जाया जाता है।
प्रश्न: हिमालय पर्वत कैसे बना?
हिमालय भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की आपस में टक्कर से बना, जिससे चट्टानें मुड़कर ऊपर उठ गईं।
प्रश्न: पृथ्वी की तीन मुख्य परतें कौन-सी हैं?
भूपर्पटी (Crust), मैंटल (Mantle) और क्रोड (Core) — पृथ्वी की तीन मुख्य परतें हैं।
प्रश्न: भू-आकृतियों के तीन मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
पर्वत, पठार और मैदान — भू-आकृतियों के तीन मुख्य प्रकार हैं, जो अंतर्जनित और बहिर्जनित बलों की संयुक्त क्रिया से बनते हैं।
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