NCERT कक्षा 9 की नई किताब: सेंगोल, राम राज्य और सत्यमेव जयते
NCERT की कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पुस्तक भाग 2 में सेंगोल, राम राज्य, राजधर्म और आदर्श वाक्यों का उल्लेख। जानें अध्याय में क्या है और विवाद क्यों।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – भाग 2' 29 सितंबर 2026 को जारी की है। इस पुस्तक के 'शासन और लोकनीति' अध्याय में राम राज्य, राजधर्म, उपनिषद और महाभारत के साथ-साथ सेंगोल का भी उल्लेख है। द हिंदू की रिपोर्ट में सेंगोल से जुड़े इस ऐतिहासिक दावे को बहस योग्य बताया गया है, जिसके बाद यह किताब शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गई है।
नई पाठ्यपुस्तक क्या है और कब जारी हुई
'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – भाग 2' कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का दूसरा भाग है। रिपोर्टों के अनुसार इसका पहला भाग जून में आ चुका था, जबकि दूसरा भाग नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के लगभग छह महीने बाद जारी हुआ है।
यह पुस्तक स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कक्षा 9 की पाठ्य सामग्री में हो रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है। NCERT के प्रकाशित पाठ्यक्रम में इस भाग के छह अध्याय हैं, जो इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को जोड़ते हैं। पुस्तक की भूमिका में NCERT ने कहा है कि इन बदलावों से सीखने का अनुभव अधिक सुसंगत, आयु के अनुरूप और आपस में जुड़ा हुआ बनेगा।
पुस्तक की भूमिका में दर्ज बदलावों में एक यह भी है कि पहले की योजना में शामिल 'सत्ता' अध्याय की जगह अब 'शासन और लोकनीति' अध्याय रखा गया है। इसके अलावा 'भारत और विश्व-1' को कक्षा 10 में स्थानांतरित कर दिया गया है।
शासन और लोकनीति अध्याय में क्या कहा गया है
पुस्तक का सबसे चर्चित हिस्सा 'शासन और लोकनीति' अध्याय है, जिसमें भारत में शासन की अवधारणा के विकास और आधुनिक संस्थाओं पर औपनिवेशिक अनुभव तथा पुरानी भारतीय परंपराओं, दोनों के प्रभाव की चर्चा की गई है।
अध्याय के अनुसार भारत उपनिवेशवाद की ऐतिहासिक विरासत का अपवाद नहीं है, किंतु दो मायनों में अलग दिखता है। पुस्तक में कहा गया है कि भारत ने औपनिवेशिक शासन झेलने वाले कई अन्य समाजों के विपरीत अपनी पूर्व-औपनिवेशिक संस्थाओं और शासन परंपराओं की अधिकांश जानकारी ग्रंथों और प्रथाओं के माध्यम से सुरक्षित रखी। साथ ही यह भी लिखा गया है कि स्वतंत्र भारत के नेताओं ने संविधान को देश के अपने मूल्यों और आदर्शों की भावना के अनुरूप गढ़ा।
राम राज्य और महात्मा गांधी का दृष्टिकोण
पाठ्यपुस्तक में महात्मा गांधी के राम राज्य संबंधी विचार का उल्लेख है। इसके अनुसार राम राज्य की जड़ें ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा, कल्याण और जनोन्मुखी शासन जैसे सिद्धांतों में हैं। अध्याय गांधी के इन विचारों को रामायण और सोलहवीं शताब्दी के ग्रंथ रामचरितमानस में दर्ज उस सामूहिक कल्पना से जोड़ता है, जिसमें राम राज्य को अच्छे शासन और अच्छे सामूहिक जीवन का श्रेष्ठ उदाहरण माना गया है।
राजधर्म और शासन की अवधारणा
पुस्तक वैदिक काल से लेकर रामायण और महाभारत तक की परंपरा के हवाले से कहती है कि शासन को केवल सत्ता के प्रयोग का साधन नहीं, बल्कि समाज के प्रति पवित्र उत्तरदायित्व माना गया। अध्याय के अनुसार अच्छे शासन की कसौटी केवल शासक का अधिकार नहीं, बल्कि समाज में शांति, समृद्धि, न्याय और कल्याण भी थी। इसी संदर्भ में राजधर्म की अवधारणा समझाई गई है।
राष्ट्रीय आदर्श वाक्य और सर्वोच्च न्यायालय का ध्येय वाक्य
पाठ्यपुस्तक में आधुनिक भारतीय संस्थाओं के आदर्श वाक्यों को पारंपरिक ग्रंथों से जोड़ा गया है। यह जुड़ाव अध्याय के उस तर्क का हिस्सा है कि स्वतंत्रता के बाद भारतीय संस्थाओं ने शासन के पारंपरिक विचारों और मूल्यों को आधुनिक लोकतंत्र की जरूरतों के अनुसार ढाला।
| आदर्श वाक्य | किस संस्था से जुड़ा | पाठ्यपुस्तक में बताया गया स्रोत | अर्थ |
|---|---|---|---|
| सत्यमेव जयते | भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य | मुंडकोपनिषद | सत्य की ही विजय होती है |
| यतो धर्मस्ततो जयः | भारत का सर्वोच्च न्यायालय | महाभारत | जहां धर्म (कर्तव्य) है, वहां विजय है |
पुस्तक में ब्रिटिश काल के 'ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इंडिया' का उदाहरण भी दिया गया है, जिसका ध्येय वाक्य 'हेवेन्स लाइट, अवर गाइड' था। पुस्तक के अनुसार स्वतंत्रता के बाद भारत ने इसके स्थान पर मुंडकोपनिषद से लिया गया 'सत्यमेव जयते' अपनाया। उल्लेखनीय है कि सत्यमेव जयते को मुंडकोपनिषद (3.1.6) का मंत्र माना जाता है और यह भारत के राजकीय चिह्न का हिस्सा है, जिसे 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया था।
सेंगोल: पाठ्यपुस्तक में क्या लिखा है
पुस्तक में सेंगोल को शासन और सुशासन का सांस्कृतिक प्रतीक बताया गया है। अध्याय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में इसे नए संसद भवन में स्थापित किया। पुस्तक यह भी कहती है कि धर्मपूर्ण शासन के प्रतीक के रूप में सेंगोल के प्रयोग की परंपरा एक हजार वर्ष से भी पहले चोल राजवंश के शासनकाल में शुरू हुई थी।
स्वतंत्रता के क्षण से इसे जोड़ते हुए पुस्तक में लिखा गया है कि 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को तमिलनाडु के अधीनम संतों (एक प्राचीन शैव परंपरा) से सेंगोल प्राप्त हुआ। द हिंदू की रिपोर्ट के शीर्षक में कहा गया है कि पुस्तक ने नेहरू को सौंपे गए सेंगोल के बारे में एक बहस योग्य सिद्धांत को फिर से सामने रखा है।
सेंगोल क्या है
सेंगोल या चेंकोल एक राजदंड है, जो राजसत्ता, धर्मनिष्ठा, न्याय और अधिकार का प्रतीक माना जाता है। ऐतिहासिक संदर्भ में इसे धर्मपूर्ण राजत्व का चिह्न बताया जाता है। मदुरै के नायक शासकों के संदर्भ में यह उल्लेख मिलता है कि सेंगोल को मीनाक्षी देवी के मंदिर में देवी के सम्मुख रखकर फिर राजसिंहासन कक्ष तक ले जाया जाता था।
सेंगोल पर विवाद की पृष्ठभूमि
सेंगोल को लेकर बहस नई नहीं है। मई 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन से पहले केंद्र सरकार ने दावा किया था कि 1947 में थिरुवावदुथुरै अधीनम के संतों द्वारा नेहरू को सौंपा गया सेंगोल अंग्रेजों से भारत को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक था। सरकार के अनुसार यह सुझाव सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) ने दिया था।
उस समय कई समाचार संस्थानों और इतिहास के जानकारों ने इन दावों पर सवाल उठाए थे। द वायर और द न्यूज मिनट की रिपोर्टों के अनुसार यह तो दर्ज है कि अधीनम ने नेहरू को सेंगोल भेंट किया, पर सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में इसके प्रयोग या लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा इसे सौंपे जाने के समकालीन प्रमाण नहीं मिलते। वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने भी कहा था कि अधीनम द्वारा सेंगोल दिया जाना और नेहरू का उसे स्वीकार करना तथ्य है, लेकिन वह उस दिन मिले अनेक उपहारों में से एक था।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से जारी दस्तावेज में अगस्त 1947 के समाचार पत्रों की उन रिपोर्टों का हवाला दिया गया था, जिनमें अधीनम द्वारा नेहरू को सेंगोल भेंट किए जाने का उल्लेख है। इन रिपोर्टों में सेंगोल को अधीनम की ओर से सद्भावना के उपहार के रूप में दर्ज किए जाने की बात आलोचकों ने उठाई है।
यानी विवाद का मूल प्रश्न यह नहीं है कि नेहरू को सेंगोल मिला या नहीं। बहस इस पर है कि क्या यह भेंट औपचारिक रूप से सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक थी। पाठ्यपुस्तक में आए ताजा उल्लेख के बाद यही प्रश्न एक बार फिर चर्चा में है।
| बिंदु | पाठ्यपुस्तक और सरकारी पक्ष | आलोचकों और इतिहास के जानकारों का पक्ष |
|---|---|---|
| नेहरू को सेंगोल मिलना | अधीनम संतों से 15 अगस्त 1947 को प्राप्त हुआ | अधीनम से भेंट के रूप में मिलना स्वीकार्य तथ्य |
| परंपरा का आधार | चोल काल से सुशासन के प्रतीक के रूप में प्रयोग | सत्ता हस्तांतरण में प्रयोग का समकालीन प्रमाण नहीं |
| माउंटबेटन की भूमिका | 2023 में सरकार ने इसका दावा किया था | इसका उल्लेख समकालीन रिकॉर्ड में नहीं मिलता |
इतिहास अध्याय: प्रतिरोध और सहनशीलता (1000-1700 ई.)
पुस्तक का इतिहास खंड 'प्रतिरोध और सहनशीलता (1000-1700 ई.)' शीर्षक से है। यह प्रतिरोध, गठबंधन, क्षेत्रीय राज्यों, सांस्कृतिक विकास, भक्ति परंपरा, किलों और अर्थव्यवस्था तथा राज्य के विस्तार जैसे विषयों पर केंद्रित है। रिपोर्टों के अनुसार इसमें महाराणा प्रताप, सराईघाट में लचित बरफूकन की विजय और पुर्तगालियों के विरुद्ध रानी अब्बक्का चौटा के प्रतिरोध की चर्चा है।
द हिंदू के वीडियो में दिखाए गए पुस्तक के अंश के अनुसार इस अध्याय में यह भी लिखा है कि कुछ शासकों के बारे में परंपरागत रूप से मान्यता रही है कि उन्हें देवी से तलवार मिली थी। इसमें विजयनगर के कुमार कम्पन द्वारा मदुरै में सुल्तानी सेनाओं के विरुद्ध देवी प्रदत्त तलवार के प्रयोग और छत्रपति शिवाजी द्वारा देवी तुलजा भवानी से तलवार प्राप्त करने की मान्यता का उल्लेख है। मीडिया रिपोर्टों में पुस्तक के उन संदर्भों की भी चर्चा है, जहां शासकों और दैवीय शक्तियों से जुड़े पारंपरिक वृत्तांत दिए गए हैं।
साथ ही अध्याय में विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग का भी उल्लेख है और सूफी तथा भक्ति परंपरा के योगदानकर्ताओं की चर्चा है। इस कालखंड को संघर्ष और सहयोग, दोनों से युक्त बताया गया है।
अर्थशास्त्र खंड: कर, बीमा और उद्यमिता
पुस्तक में अर्थशास्त्र को व्यावहारिक ढंग से पेश किया गया है। विद्यार्थियों को आयकर की गणना, उधार और निवेश के जोखिम, बीमा तथा व्यवसाय नियोजन जैसे विषयों से परिचित कराया गया है। उदाहरणों में आयुष्मान भारत, लिज्जत पापड़ और होटल व्यवसायी मोहन सिंह ओबेरॉय शामिल हैं।
अभ्यास में विद्यार्थियों से घरेलू बजट का विश्लेषण करने, आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया समझने और व्यावसायिक योजना बनाने को कहा गया है। कर चुकाने को नागरिक दायित्व के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए मुख्य बातें
- किताब का नाम 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – भाग 2' है और यह कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक है।
- किताब का सबसे नया अध्याय 'शासन और लोकनीति' है, जिसने पहले की योजना के 'सत्ता' अध्याय की जगह ली है।
- सत्यमेव जयते को मुंडकोपनिषद से और सर्वोच्च न्यायालय के ध्येय वाक्य को महाभारत से जोड़ा गया है।
- सेंगोल का उल्लेख चोल परंपरा और 15 अगस्त 1947 से जोड़कर किया गया है, जिस पर इतिहासकारों और मीडिया में मतभेद रहा है।
- अर्थशास्त्र खंड में कर, बीमा और उद्यमिता जैसे व्यावहारिक विषय जोड़े गए हैं।
- कक्षा 9 के विद्यार्थी आपबीती पर कक्षा 9 के NCERT समाधान और कक्षा 9 विज्ञान की नई पुस्तक के अध्यायवार समाधान देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NCERT की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक कब जारी हुई?
'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – भाग 2' 29 सितंबर 2026 को जारी हुई। इसका पहला भाग जून में आ चुका था।
नई NCERT पुस्तक में सेंगोल के बारे में क्या लिखा है?
पुस्तक सेंगोल को शासन और सुशासन का सांस्कृतिक प्रतीक बताती है, इसकी परंपरा को चोल काल से जोड़ती है और कहती है कि 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को नेहरू को यह अधीनम संतों से मिला।
पुस्तक में सत्यमेव जयते का स्रोत क्या बताया गया है?
पुस्तक के अनुसार भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय का ध्येय वाक्य यतो धर्मस्ततो जयः महाभारत से है।
सेंगोल पर विवाद क्यों है?
नेहरू को अधीनम से सेंगोल मिलना सभी पक्ष मानते हैं। विवाद इस बात पर है कि क्या यह सत्ता हस्तांतरण का औपचारिक प्रतीक था, जिसके समकालीन प्रमाण को लेकर आलोचक प्रश्न उठाते रहे हैं।
Comments (0)