Class 9 Science Chapter 8 – परमाणु की अंदरूनी यात्रा | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या, प्रश्नोत्तर एवं FAQ
NCERT Exploration Class 9 Science Chapter 8 Journey Inside the Atom हिंदी में – थॉमसन, रदरफोर्ड, बोर मॉडल, परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक, समभारिक सहित सभी Pause and Ponder व Revise Reflect Refine प्रश्नों के विस्तृत उत्तर और FAQ।
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अध्याय 8: परमाणु की अंदरूनी यात्रा – परिचय
हमारे चारों ओर जो कुछ भी दिखता है, महसूस होता है — सब कुछ पदार्थ (Matter) है। और यह पदार्थ बना है परमाणुओं (Atoms) से। लेकिन क्या परमाणु सबसे छोटी इकाई है? क्या इसे और तोड़ा जा सकता है? इसी प्रश्न की खोज में वैज्ञानिकों ने परमाणु के अंदर की अद्भुत दुनिया खोजी। इस अध्याय में हम परमाणु संरचना के विभिन्न मॉडलों, उप-परमाणु कणों, परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, संयोजकता, समस्थानिक और समभारिक का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
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8.1 परमाणु सिद्धांत की जड़ों की पुनः खोज
आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व भारत और यूनान (Greece) दोनों देशों के विचारकों ने एक ही प्रश्न सोचा — "पदार्थ किससे बना है?"
आचार्य कणाद (Acharya Kanada) – भारत
आचार्य कणाद ने कहा कि यदि पदार्थ (द्रव्य) को बार-बार तोड़ते रहें, तो एक ऐसी अवस्था आएगी जहाँ सबसे छोटे कण मिलेंगे जिन्हें आगे नहीं तोड़ा जा सकता। उन्होंने इन्हें परमाणु (Parmanus) कहा। यह विचार संस्कृत ग्रंथ वैशेषिक सूत्र में लिखा है। दो परमाणुओं के समूह को द्वयाद (Dyad) और तीन परमाणुओं के समूह को त्रयाद (Triad) कहा। यही संयोजन सृष्टि की रचना करते हैं।
लूसीपस और डेमोक्रिटस (Leucippus and Democritus) – यूनान
इन यूनानी दार्शनिकों ने भी इन अविभाज्य कणों को atomos (यूनानी में = अविभाज्य) कहा। यहीं से "atom" शब्द आया।
महत्वपूर्ण: ये सभी विचार कल्पना पर आधारित थे, प्रयोगों पर नहीं।
जॉन डाल्टन (John Dalton) – 1808
डाल्टन ने 1808 में वैज्ञानिक प्रयोगों के आधार पर परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार:
- सभी पदार्थ अविभाज्य कणों — परमाणुओं — से बने हैं।
- परमाणु पदार्थ के मूल निर्माण खंड हैं जिन्हें और नहीं तोड़ा जा सकता।
यह परमाणु संरचना की समझ का पहला वैज्ञानिक आधार बना।
8.2 परमाणु मॉडलों की ऐतिहासिक यात्रा
19वीं सदी के अंत तक परमाणु को अविभाज्य माना जाता था। लेकिन जब वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ तत्व रेडियोधर्मिता (Radioactivity) — अदृश्य ऊर्जा और कण — उत्सर्जित करते हैं, तो यह स्पष्ट हो गया कि परमाणु के अंदर भी कुछ है।
8.2.1 थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson's Plum Pudding Model)
1897 में जे.जे. थॉमसन ने कैथोड रे ट्यूब में प्रयोग किए। उन्होंने एक काँच की नली में दो इलेक्ट्रोड लगाए और उच्च वोल्टेज प्रवाहित की। उन्होंने पाया कि ऋणात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) से धनात्मक इलेक्ट्रोड (एनोड) की ओर किरणें (cathode rays) चलती हैं। ये किरणें:
- ऋणात्मक आवेश वाले कणों की धाराएँ हैं।
- परमाणु से बहुत छोटे द्रव्यमान की हैं।
- कैथोड के पदार्थ से स्वतंत्र हैं — हर तत्व में ये मिलते हैं।
इन कणों को बाद में इलेक्ट्रॉन (Electron) कहा गया। इलेक्ट्रॉन का आवेश = −1.602 × 10⁻¹⁹ C (सुविधा के लिए −1 मानते हैं)।
अब थॉमसन के सामने प्रश्न था — परमाणु तो उदासीन है, तो धनात्मक आवेश कहाँ है? उन्होंने प्लम पुडिंग मॉडल प्रस्तुत किया:
- परमाणु एक धनात्मक गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन जड़े हुए हैं।
- जैसे तरबूज में काले बीज — लाल गूदा = धनात्मक पदार्थ, बीज = इलेक्ट्रॉन।
नोट: थॉमसन को 1906 में नोबेल पुरस्कार मिला। वे Cavendish Laboratory के प्रमुख थे जहाँ रदरफोर्ड ने भी काम किया।
8.2.2 गोल्ड फॉयल प्रयोग – थॉमसन मॉडल की परीक्षा
1911 में गाइगर और मार्सडन ने रदरफोर्ड के निर्देशन में प्रसिद्ध स्वर्ण पत्र प्रयोग (Gold Foil Experiment) किया। वे अत्यंत पतली सोने की पत्ती पर अल्फा कणों (α-particles) की किरण डालते थे। अल्फा कण धनात्मक आवेश वाले, छोटे भारी कण हैं (हीलियम नाभिक = 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन)।
थॉमसन मॉडल के अनुसार अपेक्षा: धनात्मक आवेश पूरे परमाणु में फैला है, इसलिए अल्फा कण सीधे निकल जाएँगे या बहुत कम विक्षेपित होंगे।
वास्तविक परिणाम (चौंकाने वाले):
- अधिकांश अल्फा कण सीधे निकल गए → परमाणु में अधिकांश भाग रिक्त (Empty) है।
- कुछ अल्फा कण बड़े कोण पर विक्षेपित हुए → अंदर कोई सघन वस्तु है।
- कुछ अल्फा कण सीधे वापस उछले → बहुत छोटे, बहुत सघन, धनावेशित केंद्र है।
इस विक्षेपण को प्रकीर्णन (Scattering) कहते हैं। इसी कारण इसे α-किरण प्रकीर्णन प्रयोग भी कहते हैं। थॉमसन का मॉडल इन परिणामों को समझाने में विफल रहा।
A. रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Planetary Model)
गोल्ड फॉयल प्रयोग के आधार पर रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाले:
- परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है।
- परमाणु के केंद्र में एक अत्यंत सघन, छोटा, धनात्मक आवेशित क्षेत्र है — नाभिक (Nucleus)।
- परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान नाभिक में है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं — जैसे ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इसीलिए इसे ग्रहीय मॉडल (Planetary Model) कहते हैं।
नाभिक का आकार: परमाणु का व्यास ≈ 10⁻¹⁰ m, नाभिक का व्यास ≈ 10⁻¹⁵ m। नाभिक परमाणु से 10⁵ (एक लाख) गुना छोटा है।
सरल उपमा: यदि परमाणु एक क्रिकेट मैदान (100 m) हो, तो नाभिक काली मिर्च के दाने (कुछ mm) जितना होगा।
B. रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ (Limitations)
रदरफोर्ड का मॉडल नाभिक की खोज में महत्वपूर्ण था, लेकिन इसमें एक गंभीर कमी थी — यह परमाणु की स्थिरता नहीं समझा सका।
अध्याय 4 में पढ़ा था कि वृत्तीय पथ पर चलने वाला कण निरंतर त्वरित (Accelerating) होता है। यदि ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन त्वरित होता रहे, तो उसे ऊर्जा खोनी चाहिए → ऊर्जा खोने पर वह सर्पिल (Spiral) पथ में नाभिक की ओर गिर जाना चाहिए। लेकिन परमाणु वास्तव में स्थिर हैं! इसलिए रदरफोर्ड का मॉडल पूर्ण सत्य नहीं था।
C. प्रोटॉन की खोज (Discovery of Proton)
रदरफोर्ड ने यह भी सिद्ध किया कि नाभिक का धनात्मक आवेश प्रोटॉनों (Protons) से आता है।
- प्रोटॉन का आवेश = +1 (इलेक्ट्रॉन के बराबर लेकिन विपरीत)
- प्रोटॉन इलेक्ट्रॉन से बहुत भारी होते हैं।
- परमाणु उदासीन होने के लिए: प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या
8.2.3 बोर का परमाणु मॉडल (Bohr's Model) – 1913
परमाणु की स्थिरता समझाने के लिए नील्स बोर ने 1913 में नया मॉडल प्रस्तुत किया:
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्तीय पथों में चलते हैं जिन्हें कक्षाएँ (Orbits), कोश (Shells) या स्थायी अवस्थाएँ (Stationary States) कहते हैं।
- प्रत्येक कोश में इलेक्ट्रॉन की निश्चित ऊर्जा होती है, इसलिए इन्हें ऊर्जा स्तर (Energy Levels) भी कहते हैं।
- कोशों को K, L, M, N... या n = 1, 2, 3, 4... से दर्शाते हैं।
- इलेक्ट्रॉन केवल इन्हीं कोशों में रह सकते हैं, बीच में नहीं।
- निश्चित कोश में चलते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं खोते — यही परमाणु की स्थिरता का कारण है।
- K कोश (n=1) नाभिक के सबसे निकट, सबसे कम ऊर्जा। नाभिक से दूरी बढ़ने पर ऊर्जा बढ़ती है।
- इलेक्ट्रॉन एक कोश से दूसरे में जाने के लिए निश्चित ऊर्जा अवशोषित या उत्सर्जित करते हैं।
- प्रत्येक कोश में अधिकतम निश्चित संख्या में ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
K, L, M, N नाम क्यों? भौतिकविद Charles Barkla ने X-ray प्रयोगों में पहली लाइन को K कहा। A से शुरू न करने का कारण था — पहले की कोई श्रृंखला मिल सकती है, इसके लिए स्थान छोड़ा। बोर ने यही नामकरण अपनाया।
नोट: बोर को 1922 में नोबेल पुरस्कार मिला।
8.3 परमाणु के द्रव्यमान में योगदान
एक पहेली थी — हीलियम में 2 प्रोटॉन हैं, लेकिन उसका द्रव्यमान हाइड्रोजन का 4 गुना है, 2 गुना नहीं। यानी नाभिक में प्रोटॉनों के अलावा कुछ और भी है जो द्रव्यमान देता है लेकिन आवेश नहीं।
8.3.1 न्यूट्रॉन की खोज (Discovery of Neutron) – 1932
जेम्स चैडविक (रदरफोर्ड के शिष्य) ने 1932 में एक नए उप-परमाणु कण की खोज की जिसका:
- द्रव्यमान ≈ प्रोटॉन के बराबर
- आवेश = शून्य (0)
इसे न्यूट्रॉन (n⁰) कहा गया। न्यूट्रॉन सभी परमाणुओं के नाभिक में होता है, हाइड्रोजन को छोड़कर। परमाणु का द्रव्यमान मुख्यतः प्रोटॉन + न्यूट्रॉन से आता है।
तीन उप-परमाणु कण – एक नजर में
| क्र. | कण | संकेत | सापेक्ष आवेश | स्थान |
|---|---|---|---|---|
| 1 | इलेक्ट्रॉन (Electron) | e⁻ | −1 | नाभिक के बाहर कोशों में |
| 2 | प्रोटॉन (Proton) | p⁺ | +1 | नाभिक में |
| 3 | न्यूट्रॉन (Neutron) | n⁰ | 0 | नाभिक में |
न्यूट्रॉन की भूमिका: नाभिक में सभी प्रोटॉन एक दूसरे को विकर्षित करते हैं (सजातीय आवेश)। न्यूट्रॉन प्रोटॉनों के बीच दूरी बढ़ाते हैं और नाभिकीय बल (Nuclear Force) को मजबूत करते हैं जिससे नाभिक स्थिर रहता है।
चैडविक को 1935 में नोबेल पुरस्कार मिला।
8.4 तत्वों के प्रतीक (Symbols of Elements)
डाल्टन ने 1803 में तत्वों के लिए चित्रात्मक प्रतीक दिए। 1813 में बर्जेलियस ने सुझाया कि प्रतीक तत्वों के लैटिन नामों से होने चाहिए। आज IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) नाम और प्रतीक स्वीकृत करता है।
प्रतीक लिखने के नियम
- प्रतीक का पहला अक्षर बड़ा (Capital) और दूसरा (यदि हो) छोटा (Lowercase) होता है। जैसे: Al (सही), AL (गलत)।
- कुछ प्रतीक तत्व के नाम के पहले एक या दो अक्षरों से बनते हैं: H (Hydrogen), He (Helium)।
- कुछ प्रतीक लैटिन, यूनानी या जर्मन नाम से: Fe (Ferrum = Iron), Hg (Hydrargyros = Mercury), W (Wolfram = Tungsten), Na (Natrium = Sodium), K (Kalium = Potassium), Au (Aurum = Gold), Ag (Argentum = Silver), Cu (Cuprum = Copper), Pb (Plumbum = Lead)।
8.5 परमाणु क्रमांक (Atomic Number)
किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को उसका परमाणु क्रमांक कहते हैं। इसे Z से दर्शाते हैं।
चूँकि परमाणु उदासीन होता है: Z = प्रोटॉन संख्या = इलेक्ट्रॉन संख्या
- Hydrogen: Z = 1 (1 प्रोटॉन, 1 इलेक्ट्रॉन)
- Helium: Z = 2 (2 प्रोटॉन, 2 इलेक्ट्रॉन)
- Lithium: Z = 3 (3 प्रोटॉन, 3 इलेक्ट्रॉन)
परमाणु क्रमांक किसी तत्व की पहचान और रासायनिक व्यवहार निर्धारित करता है।
8.6 द्रव्यमान संख्या (Mass Number)
नाभिक में उपस्थित कुल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या को द्रव्यमान संख्या कहते हैं। इसे A से दर्शाते हैं। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों को मिलाकर न्यूक्लिऑन (Nucleons) कहते हैं।
A = प्रोटॉन संख्या (Z) + न्यूट्रॉन संख्या (N)
इसलिए: न्यूट्रॉन संख्या = A − Z
परमाणु का मानक संकेतन
किसी तत्व X का संकेतन: ᴬ Z X (A ऊपर बाईं ओर, Z नीचे बाईं ओर)
उदाहरण: Carbon → ¹²₆C (A=12, Z=6, न्यूट्रॉन=12−6=6)
उदाहरण तालिका
| तत्व | प्रोटॉन (Z) | न्यूट्रॉन (N) | द्रव्यमान संख्या (A) |
|---|---|---|---|
| Hydrogen | 1 | 0 | 1 |
| Helium | 2 | 2 | 4 |
| Lithium | 3 | 4 | 7 |
8.7 विभिन्न ऊर्जा स्तरों में इलेक्ट्रॉनों का वितरण
बोर-बरी नियम (Bohr-Bury Rules):
- किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन संख्या = 2n² (n = कोश क्रमांक)
| कोश | n | अधिकतम इलेक्ट्रॉन (2n²) |
|---|---|---|
| K | 1 | 2×1² = 2 |
| L | 2 | 2×2² = 8 |
| M | 3 | 2×3² = 18 |
| N | 4 | 2×4² = 32 |
- सबसे बाहरी कोश में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं (पहले कोश में 2)।
- इलेक्ट्रॉन K → L → M → N क्रम में भरे जाते हैं।
8.7.1 परमाणुओं का निर्माण (Electronic Configuration)
प्रथम 18 तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
| तत्व | Z | p | n | e | K | L | M |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| H | 1 | 1 | 0 | 1 | 1 | − | − |
| He | 2 | 2 | 2 | 2 | 2 | − | − |
| Li | 3 | 3 | 4 | 3 | 2 | 1 | − |
| Be | 4 | 4 | 5 | 4 | 2 | 2 | − |
| B | 5 | 5 | 6 | 5 | 2 | 3 | − |
| C | 6 | 6 | 6 | 6 | 2 | 4 | − |
| N | 7 | 7 | 7 | 7 | 2 | 5 | − |
| O | 8 | 8 | 8 | 8 | 2 | 6 | − |
| F | 9 | 9 | 10 | 9 | 2 | 7 | − |
| Ne | 10 | 10 | 10 | 10 | 2 | 8 | − |
| Na | 11 | 11 | 12 | 11 | 2 | 8 | 1 |
| Mg | 12 | 12 | 12 | 12 | 2 | 8 | 2 |
| Al | 13 | 13 | 14 | 13 | 2 | 8 | 3 |
| Si | 14 | 14 | 14 | 14 | 2 | 8 | 4 |
| P | 15 | 15 | 16 | 15 | 2 | 8 | 5 |
| S | 16 | 16 | 16 | 16 | 2 | 8 | 6 |
| Cl | 17 | 17 | 18 | 17 | 2 | 8 | 7 |
| Ar | 18 | 18 | 22 | 18 | 2 | 8 | 8 |
8.8 परमाणु की संयोजन क्षमता: संयोजकता (Valency)
किसी तत्व का एक परमाणु जितने हाइड्रोजन या क्लोरीन परमाणुओं से संयोग करता है, वह उसकी संयोजन क्षमता (Combining Capacity) है।
- H₂O में O की संयोजन क्षमता = 2
- NH₃ में N की संयोजन क्षमता = 3
- MgCl₂ में Mg की संयोजन क्षमता = 2
संयोजकता (Valency) कैसे तय होती है?
- परमाणु का सबसे बाहरी कोश = संयोजकता कोश (Valence Shell)
- उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन = संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons)
- यदि बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हों = अष्टक (Octet) — स्थिर और अक्रियाशील
- अपूर्ण बाहरी कोश वाले परमाणु इलेक्ट्रॉन खोकर, पाकर या साझा करके अष्टक पूरा करते हैं।
- संयोजकता = अष्टक पूरा करने के लिए खोए/पाए/साझा किए इलेक्ट्रॉनों की संख्या
उदाहरण
- Na (2,8,1): 1 इलेक्ट्रॉन खोकर अष्टक पूरा → संयोजकता = 1
- O (2,6): 2 इलेक्ट्रॉन पाकर अष्टक पूरा → संयोजकता = 2
- C (2,4): 4 इलेक्ट्रॉन साझा → संयोजकता = 4
- Ne (2,8): पहले से अष्टक पूरा → संयोजकता = 0 (अक्रियाशील)
8.9 परमाणु संरचना में गहरी दृष्टि
8.9.1 समस्थानिक (Isotopes)
एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या (Z) समान हो लेकिन द्रव्यमान संख्या (A) भिन्न हो, समस्थानिक कहलाते हैं। इनमें न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होती है।
हाइड्रोजन के समस्थानिक
| नाम | संकेत | प्रोटॉन | न्यूट्रॉन | इलेक्ट्रॉन | प्रचुरता |
|---|---|---|---|---|---|
| प्रोटियम (Protium) | ¹₁H | 1 | 0 | 1 | ~99.98% |
| ड्यूटेरियम (Deuterium) | ²₁H | 1 | 1 | 1 | ~0.015% |
| ट्रिटियम (Tritium) | ³₁H | 1 | 2 | 1 | अल्प मात्रा |
कार्बन के समस्थानिक
¹²₆C (सर्वाधिक प्रचुर), ¹³₆C, ¹⁴₆C — सभी में 6 प्रोटॉन और 6 इलेक्ट्रॉन, केवल न्यूट्रॉन भिन्न।
रासायनिक गुण समान क्यों? क्योंकि इलेक्ट्रॉन संख्या और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान है। भौतिक गुण (गलनांक, क्वथनांक) भिन्न होते हैं।
समस्थानिकों के उपयोग
- ²³⁵₉₂U: परमाणु रिएक्टर में ईंधन — विद्युत उत्पादन।
- ⁶⁰₂₇Co: कैंसर के विकिरण उपचार में।
- ¹³¹₅₃I: गलगंड (Goitre) और थायरॉइड कैंसर के उपचार में।
- ¹⁴₆C: पुरातत्व में प्राचीन जीवाश्मों की आयु निर्धारित करने में (Carbon Dating)।
औसत परमाणु द्रव्यमान (Average Atomic Mass)
क्लोरीन के दो समस्थानिक: ³⁵Cl (75%) और ³⁷Cl (25%)।
सरल औसत = (35+37)/2 = 36 u (लेकिन यह सटीक नहीं।)
भारित औसत = (35 × 75/100) + (37 × 25/100) = 26.25 + 9.25 = 35.5 u
इसका अर्थ यह नहीं कि किसी एक परमाणु का द्रव्यमान 35.5 u है। यह दर्शाता है कि यदि 10 लाख Cl परमाणु लें तो उनका भारित औसत 35.5 u होगा।
8.9.2 समभारिक (Isobars)
वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (A) समान हो लेकिन परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न हो, समभारिक कहलाते हैं।
उदाहरण: Ca (Z=20, A=40), K (Z=19, A=40), Ar (Z=18, A=40) — तीनों का A=40 लेकिन ये अलग-अलग तत्व हैं।
परमाणु मॉडलों का विकास क्रम
डाल्टन (अविभाज्य कण) → थॉमसन (प्लम पुडिंग) → रदरफोर्ड (नाभिकीय मॉडल) → बोर (ऊर्जा स्तर) → आधुनिक क्वांटम मैकेनिकल मॉडल (अभी भी खोजा जा रहा है)।
Pause and Ponder – सभी प्रश्नों के उत्तर
प्र. 1(i): यदि मिट्टी का धनात्मक आवेश मनकों के ऋणात्मक आवेश से कम हो?
उत्तर: परमाणु उदासीन नहीं रहेगा — वह नेट ऋणात्मक आवेशित हो जाएगा। थॉमसन का मॉडल तभी सार्थक है जब धन और ऋण आवेश बराबर हों।
प्र. 1(ii): यदि मिट्टी स्वयं ऋणात्मक आवेशित हो?
उत्तर: नहीं, यह मॉडल उदासीन परमाणु को नहीं दर्शाएगा। कुल आवेश ऋणात्मक होगा।
प्र. 2: संतरा या नींबू थॉमसन मॉडल की अच्छी उपमा है?
उत्तर: हाँ, आंशिक रूप से — बीज (इलेक्ट्रॉन) गूदे (धनावेशित पदार्थ) में धँसे हैं — यह मेल खाता है। लेकिन कमी: संतरे का आकार, बनावट, और बीजों की संख्या वास्तविक परमाणु से बिल्कुल भिन्न है।
प्र. 3: थॉमसन ने क्यों निष्कर्ष निकाला कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं में हैं?
उत्तर: कैथोड किरणों की प्रकृति कैथोड के पदार्थ और नली में भरी गैस से स्वतंत्र थी — हर पदार्थ से समान ऋणात्मक कण निकले। इसलिए निष्कर्ष: इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं का मूल घटक है।
प्र. 4: यदि α-कणों की जगह ऋणात्मक कण उपयोग किए जाते?
उत्तर: ऋणात्मक कण धनावेशित नाभिक की ओर आकर्षित होते — वे वापस नहीं उछलते बल्कि नाभिक की ओर मुड़ते। इससे बड़े विक्षेपण तो होते लेकिन पीछे उछलना नहीं।
प्र. 5: कुछ α-कणों का वापस उछलना थॉमसन मॉडल को कैसे नकारता है?
उत्तर: थॉमसन मॉडल में धनात्मक आवेश पूरे परमाणु में फैला है, इसलिए कोई भारी सघन केंद्र नहीं। लेकिन α-कण वापस तभी उछलते हैं जब कोई बहुत भारी, सघन, धनात्मक केंद्र हो। यह सीधे नाभिक के अस्तित्व को सिद्ध करता है।
प्र. 7: Assertion-Reason (रदरफोर्ड का निष्कर्ष)
उत्तर: (ii) दोनों A और R सत्य हैं, लेकिन R, A का सही कारण नहीं है।
A सत्य है (रदरफोर्ड ने नाभिक की खोज की)। R भी सत्य है (थॉमसन का मॉडल सही है), लेकिन थॉमसन का मॉडल रदरफोर्ड के निष्कर्ष का कारण नहीं — बल्कि रदरफोर्ड ने थॉमसन मॉडल को गलत सिद्ध किया।
प्र. 8 (नये तत्व का नाम और प्रतीक – IUPAC नियम)
उत्तर (उदाहरण): मैं अपने नाम पर इस तत्व का नाम "Anujium (Anj)" रखूँगा। IUPAC नियम: पहला अक्षर बड़ा (A), दूसरा छोटा (n), तीसरा छोटा (j) — सही है।
प्र. 9: अलग-अलग प्रतीक होने से क्या समस्याएँ?
उत्तर: वैज्ञानिक संचार में भ्रम, अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान में बाधा, रासायनिक समीकरणों में गलतियाँ, और रसायन उद्योग में खतरनाक भूलें हो सकती थीं।
प्र. 10: Z=26, A=56 → इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन
प्रोटॉन = Z = 26, इलेक्ट्रॉन = 26, न्यूट्रॉन = A−Z = 56−26 = 30
प्र. 11: Z=20, A=41 → न्यूट्रॉन
न्यूट्रॉन = A−Z = 41−20 = 21
प्र. 12: न्यूट्रॉन=18, Z=17 → द्रव्यमान संख्या
A = Z + n = 17 + 18 = 35
प्र. 13: ²³A में 11 इलेक्ट्रॉन → न्यूट्रॉन
इलेक्ट्रॉन = 11 → Z = 11, A = 23, न्यूट्रॉन = 23−11 = 12
प्र. 14: बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन
(i) ¹²₆C: Z=6, विन्यास = 2,4 → बाहरी कोश = 4 इलेक्ट्रॉन
(ii) ¹⁹₉F: Z=9, विन्यास = 2,7 → बाहरी कोश = 7 इलेक्ट्रॉन
(iii) ²⁸₁₄Si: Z=14, विन्यास = 2,8,4 → बाहरी कोश = 4 इलेक्ट्रॉन
प्र. 15: Z=12, 16, 18 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
Z=12 (Mg): 2, 8, 2
Z=16 (S): 2, 8, 6
Z=18 (Ar): 2, 8, 8
प्र. 16: पहेली – द्रव्यमान 23, 11 प्रोटॉन, पानी से क्रिया
उत्तर: सोडियम (Na)। Z=11, A=23, न्यूट्रॉन = 23−11 = 12। Na एक मुलायम धातु है जो पानी से तीव्र क्रिया करती है।
प्र. 17: दोनों में 11 प्रोटॉन, एक में 12 और दूसरे में 13 न्यूट्रॉन
उत्तर: दोनों का Z = 11 (समान) → एक ही तत्व Sodium (Na)। द्रव्यमान संख्याएँ A₁ = 11+12 = 23, A₂ = 11+13 = 24 (भिन्न)। ये समस्थानिक (Isotopes) हैं।
प्र. 18: ब्रोमीन का औसत परमाणु द्रव्यमान
⁷⁹Br (49.7%) और ⁸¹Br (50.3%)
औसत = (79 × 49.7/100) + (81 × 50.3/100) = 39.263 + 40.743 = 80.006 ≈ 80 u
Revise, Reflect, Refine – सभी प्रश्नों के हल
प्रश्न 1: गोल्ड फॉयल प्रयोग – सही विकल्प चुनिए और कारण दीजिए
- (i) गलत। गोल्ड फॉयल प्रयोग ने न्यूट्रॉन का अस्तित्व नहीं दिखाया। न्यूट्रॉन की खोज 1932 में चैडविक ने की।
- (ii) सही। परिणामों ने प्लम पुडिंग मॉडल को गलत सिद्ध किया और नाभिक के अस्तित्व की जानकारी दी।
- (iii) सही। कुछ α-कणों का तीव्र विक्षेपण और वापस उछलना यही सिद्ध करता है कि परमाणु के केंद्र में सघन धनावेशित नाभिक है।
- (iv) गलत। α-कणों के विक्षेपण से इलेक्ट्रॉनों की गति का पता नहीं चला। α-कण भारी धनावेशित हैं; हल्के इलेक्ट्रॉन इनके पथ को प्रभावित नहीं कर सकते।
प्रश्न 2: बोर मॉडल के अनुसार सही/गलत कथन
- (i) गलत। बोर के मॉडल में इलेक्ट्रॉन निश्चित कोशों में रहने पर ऊर्जा नहीं खोते।
- (ii) गलत। इलेक्ट्रॉन नाभिक के आसपास कहीं भी नहीं रह सकते, बल्कि निश्चित ऊर्जा स्तरों में रहते हैं।
- (iii) सही। यही बोर के मॉडल का मूल सिद्धांत है — स्थायी अवस्था में ऊर्जा स्थिर रहती है।
- (iv) गलत। इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तरों के बीच नहीं रह सकते।
प्रश्न 3: X (18p, 19n), Y (17p, 18n), Z (17p, 20n)
(i) Y और Z का सम्बन्ध: दोनों के प्रोटॉन = 17 (Z समान), न्यूट्रॉन भिन्न → समस्थानिक (Isotopes) हैं। दोनों क्लोरीन (Cl) के परमाणु हैं। Y की A = 35, Z की A = 37।
(ii) Z और X का सम्बन्ध: X के प्रोटॉन = 18, Z के प्रोटॉन = 17 → भिन्न तत्व। X की A = 18+19 = 37, Z की A = 17+20 = 37 → द्रव्यमान संख्या समान → समभारिक (Isobars) हैं।
प्रश्न 4: रदरफोर्ड का नाभिक के बारे में निष्कर्ष
कुछ α-कणों के तीव्र विक्षेपण और कुछ के वापस उछलने से रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला:
- परमाणु का धनात्मक आवेश एक अत्यंत छोटे, अत्यधिक सघन क्षेत्र — नाभिक — में केंद्रित है।
- नाभिक परमाणु के आकार की तुलना में बहुत छोटा है (10⁵ गुना)।
- परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान नाभिक में है।
प्रश्न 5: परमाणु मॉडलों का कालक्रम
सही क्रम: (iv) डाल्टन → (ii) थॉमसन → (iii) रदरफोर्ड → (i) बोर
- (iv) डाल्टन (1808): परमाणु अविभाज्य कण हैं।
- (ii) थॉमसन (1897): प्लम पुडिंग मॉडल — धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉन।
- (iii) रदरफोर्ड (1911): नाभिकीय मॉडल — केंद्र में सघन नाभिक।
- (i) बोर (1913): ऊर्जा स्तर मॉडल — इलेक्ट्रॉन निश्चित कोशों में।
प्रश्न 6: इलेक्ट्रॉन परमाणु से बाहर क्यों नहीं जाते?
इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेशित हैं और नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन धनात्मक आवेशित हैं। इनके बीच विद्युत स्थैतिक आकर्षण बल (Electrostatic Attraction) कार्य करता है जो इलेक्ट्रॉन को नाभिक की ओर खींचता रहता है। बोर के अनुसार निश्चित कोशों में परिक्रमा करते समय यह बल अपकेंद्री प्रवृत्ति को संतुलित करता है।
प्रश्न 7: Assertion-Reason
उत्तर: (ii) दोनों A और R सत्य हैं, लेकिन R, A का सही कारण नहीं है।
A सत्य है — उप-परमाणु कणों की खोज से परमाणु संरचना समझी। R भी सत्य है — परमाणु में प्रोटॉन = इलेक्ट्रॉन। लेकिन R, A का कारण नहीं — R केवल उदासीनता बताता है, संरचना की पूरी समझ नहीं।
प्रश्न 8: Magnesium (A=24, Z=12)
(i) प्रोटॉन = Z = 12
(ii) न्यूट्रॉन = A−Z = 24−12 = 12
(iii) इलेक्ट्रॉन = Z = 12
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 2 (K=2, L=8, M=2)
प्रश्न 9: Fig 8.17 के चार परमाणु (a, b, c, d)
| जानकारी | (a) Li | (b) O | (c) P | (d) F |
|---|---|---|---|---|
| नाम | Lithium | Oxygen | Phosphorus | Fluorine |
| प्रतीक | Li | O | P | F |
| कुल इलेक्ट्रॉन | 3 | 8 | 15 | 9 |
| संयोजकता इलेक्ट्रॉन | 1 | 6 | 5 | 7 |
| संयोजकता | 1 | 2 | 3 | 1 |
| प्रोटॉन | 3 | 8 | 15 | 9 |
| परमाणु क्रमांक | 3 | 8 | 15 | 9 |
प्रश्न 10: रदरफोर्ड का मॉडल अस्थिरता क्यों दिखाता था, बोर का नहीं?
रदरफोर्ड के मॉडल में इलेक्ट्रॉन वृत्तीय पथ में त्वरित होते हैं → विद्युत चुंबकीय सिद्धांत के अनुसार त्वरित आवेशित कण ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं → इलेक्ट्रॉन सर्पिल पथ में नाभिक में गिर जाते → परमाणु नष्ट हो जाता।
बोर ने एक नई postulate दी — स्थायी अवस्था में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं खोते, यह गणितीय प्रमाण नहीं बल्कि एक अभिगृहीत (postulate) था जो प्रायोगिक परिणामों से मेल खाता था।
प्रश्न 11: ⁷⁰X में 31 इलेक्ट्रॉन → न्यूट्रॉन
इलेक्ट्रॉन = 31 → Z = 31 (Gallium), A = 70
न्यूट्रॉन = A − Z = 70 − 31 = 39
प्रश्न 12: 79 प्रोटॉन, A = 197
(i) न्यूट्रॉन = 197 − 79 = 118
(ii) इलेक्ट्रॉन = Z = 79 (यह Gold/Au है)
प्रश्न 13: तालिका पूर्ण करिए
| Z | A | n | p | e | तत्व |
|---|---|---|---|---|---|
| 5 | 11 | 6 | 5 | 5 | Boron (B) |
| 7 | 14 | 7 | 7 | 7 | Nitrogen (N) |
| 12 | 24 | 12 | 12 | 12 | Magnesium (Mg) |
| 15 | 31 | 16 | 15 | 15 | Phosphorus (P) |
| 1 | 1 | 0 | 1 | 1 | Hydrogen (H) |
प्रश्न 14: तत्व X, A=35, न्यूट्रॉन=18
(i) Z = A − n = 35 − 18 = 17 → प्रोटॉन = 17, इलेक्ट्रॉन = 17
(ii) परमाणु क्रमांक = 17
(iii) तत्व X = क्लोरीन (Cl)
(iv) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 7
(v) संयोजकता इलेक्ट्रॉन = 7, संयोजकता = 1 (1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा)
(vi) 2 न्यूट्रॉन जोड़ने पर A = 35 + 2 = 37
(vii) नया परमाणु ³⁷Cl → X (³⁵Cl) और नया परमाणु (³⁷Cl) समस्थानिक (Isotopes) हैं।
प्रश्न 15: 12p, 12n; इलेक्ट्रॉनों को 500 गुने भारी कणों से बदलें
(i) परमाणु क्रमांक (Z): अपरिवर्तित = 12 (Z नाभिक के प्रोटॉनों पर निर्भर है, इलेक्ट्रॉन पर नहीं)
(ii) परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass): बढ़ेगा क्योंकि 12 नए भारी कण (mass = 500 × mₑ प्रत्येक) मिलाए जाएँगे। सामान्यतः इलेक्ट्रॉन की mass negligible मानते हैं, लेकिन 500 गुना भारी होने पर कुछ वृद्धि दिखेगी।
(iii) द्रव्यमान संख्या (Mass Number): अपरिवर्तित = 24 (mass number केवल प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = 12+12=24 पर आधारित)
(iv) कुल आवेश: शून्य (उदासीन) — नए कणों का आवेश इलेक्ट्रॉन जैसा (−1 प्रत्येक) है, प्रोटॉनों के +1 × 12 को संतुलित करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र. परमाणु मॉडल बार-बार क्यों बदले गए?
विज्ञान प्रयोगों पर आधारित है। जब नए प्रयोगों के परिणाम पुराने मॉडल से मेल नहीं खाए, तो वैज्ञानिकों ने मॉडल को सुधारा। यही विज्ञान की प्रगति का तरीका है।
प्र. परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या में क्या अंतर है?
परमाणु क्रमांक (Z) = केवल प्रोटॉनों की संख्या। द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन। Z तत्व की पहचान बताता है; A उसके द्रव्यमान का अनुमान।
प्र. इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरते?
बोर के मॉडल में इलेक्ट्रॉन निश्चित कोशों में रहते हैं जहाँ ऊर्जा स्थिर रहती है। आधुनिक क्वांटम मैकेनिकल मॉडल बताता है कि इलेक्ट्रॉन एक क्षेत्र (electron cloud) में होते हैं — नाभिक के करीब उनकी ऊर्जा इस तरह होती है कि वे स्थिर रहते हैं।
प्र. समस्थानिक और समभारिक में क्या फर्क है?
समस्थानिक में Z समान, A भिन्न; एक ही तत्व के परमाणु। समभारिक में A समान, Z भिन्न; अलग-अलग तत्वों के परमाणु।
प्र. संयोजकता 0 (शून्य) कब होती है?
जब बाहरी कोश पूर्ण अष्टक (8) या हीलियम की तरह 2 इलेक्ट्रॉन हो। ऐसे तत्व अक्रियाशील होते हैं — He, Ne, Ar (Noble Gases)।
प्र. न्यूट्रॉन नाभिक को कैसे स्थिर रखते हैं?
प्रोटॉन एक-दूसरे को धकेलते हैं (समान आवेश विकर्षण)। न्यूट्रॉन प्रोटॉनों के बीच दूरी बढ़ाते हैं और नाभिकीय बल को मजबूत करते हैं।
प्र. Carbon Dating क्या है?
¹⁴₆C रेडियोधर्मी है और धीरे-धीरे क्षय होता है। जीवित प्राणियों में ¹²C और ¹⁴C का अनुपात स्थिर रहता है। मृत्यु के बाद ¹⁴C कम होता जाता है। इस अनुपात को मापकर पुरातत्वविद वस्तु की आयु बताते हैं।
प्र. बोर के शेल K, L, M, N से शुरू क्यों होते हैं A, B, C से क्यों नहीं?
Charles Barkla ने X-ray प्रयोगों में पहली श्रृंखला को K नाम दिया। उन्होंने A से शुरू नहीं किया क्योंकि K से पहले कोई अन्य श्रृंखला मिल सकती थी (हालाँकि कभी नहीं मिली)। बोर ने यही नामकरण अपनाया।
प्र. BARC का परमाणु विज्ञान में क्या योगदान है?
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई — Dhruva रिएक्टर द्वारा न्यूट्रॉन प्रकीर्णन प्रयोग करता है जो सुपरकंडक्टर, बैटरी इलेक्ट्रोड, और दवा अणुओं की संरचना समझने में सहायक है। होमी जहाँगीर भाभा ने इसकी स्थापना की।
प्र. क्लोरीन का परमाणु द्रव्यमान 35 या 37 क्यों नहीं बल्कि 35.5 है?
क्योंकि प्रकृति में ³⁵Cl (75%) और ³⁷Cl (25%) दोनों मिलते हैं। कोई भी एकल परमाणु 35.5 द्रव्यमान का नहीं होता — यह प्राकृतिक मिश्रण का भारित औसत है।
अध्याय सारांश (At a Glance)
- परमाणु पदार्थ के निर्माण खंड हैं।
- थॉमसन का प्लम पुडिंग मॉडल: धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉन।
- रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल: केंद्र में नाभिक, इलेक्ट्रॉन परिक्रमा करते हैं।
- बोर का मॉडल: इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा स्तरों (K,L,M,N) में रहते हैं।
- तीन उप-परमाणु कण: इलेक्ट्रॉन (−1), प्रोटॉन (+1), न्यूट्रॉन (0)।
- परमाणु क्रमांक Z = प्रोटॉन संख्या; द्रव्यमान संख्या A = p + n।
- कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²; बाहरी कोश में अधिकतम 8।
- संयोजकता = अष्टक पूरा करने के लिए खोए/पाए/साझा इलेक्ट्रॉन।
- समस्थानिक: Z समान, A भिन्न; समभारिक: A समान, Z भिन्न।
- औसत परमाणु द्रव्यमान = समस्थानिकों का भारित औसत।


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