CBSE त्रि-भाषा नीति 2026-27: कक्षा 6 से 10 के लिए नए नियम और बोर्ड परीक्षा में बदलाव की पूरी जानकारी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सत्र 2026-27 से त्रि-भाषा नीति लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस लेख में जानें कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए भाषा चयन के नए नियम, भारतीय भाषाओं की अनिवार्यता और R3 बोर्ड परीक्षा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।

Jul 15, 2026 - 13:22
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CBSE Three-Language Policy 2026-27 Class 6 to 10 Rules
यह एक शैक्षणिक इन्फोग्राफिक है जिसका शीर्षक "CBSE Three-Language Policy 2026-27: What Changes for Students" (सीबीएसई त्रि-भाषा नीति 2026-27: छात्रों के लिए क्या बदलाव हैं) है। इस ग्राफ़िक को एक आधुनिक वेक्टर इलस्ट्रेशन शैली में डिज़ाइन किया गया है, जो रास्तों (pathways), टेक्स्ट बॉक्स और आइकन के ज़रिए आगामी शैक्षणिक बदलावों को स्पष्ट रूप से समझाता है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 29 जून 2026 को त्रि-भाषा नीति (three-language policy) लागू करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह नियम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से सभी CBSE स्कूलों में लागू होगा, और कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए अलग-अलग व्यवस्था तय की गई है, ताकि किसी भी बैच को अचानक बदलाव का सामना न करना पड़े।

संक्षेप में समझें

  • कक्षा 10 (2026-27): कोई बदलाव नहीं, पुरानी दो-भाषा प्रणाली जारी।
  • कक्षा 9: तीन भाषाएं अनिवार्य, पर R3 की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
  • कक्षा 7-8: दो विदेशी भाषा वाले छात्रों को एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी।
  • कक्षा 6 (2026-27) से आगे: पूरी नीति लागू, कक्षा 10 पर R3 की बोर्ड परीक्षा भी होगी।
  • दिव्यांग छात्रों और विदेश से जुड़े छात्रों को छूट दी गई है।

विषय-सूची

क्या बदला और क्यों

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में सिफारिश थी कि हर छात्र तीन भाषाएं सीखे, जिनमें कम से कम दो भारत की अपनी भाषाएं हों। CBSE का नया परिपत्र इसे लागू करने का तरीका बताता है। नए ढांचे में, छात्र जो तीन भाषाएं चुनें उनमें दो भारतीय भाषा (Bhartiya Bhasha) होना अनिवार्य है। कोई विदेशी भाषा केवल तीसरी भाषा (R3) के रूप में ली जा सकती है, बशर्ते बाकी दो भारतीय भाषाएं हों।

भारतीय भाषाओं में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओड़िया और असमिया शामिल हैं, जबकि अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश विदेशी भाषाओं के उदाहरण हैं। बोर्ड के अनुसार यह बदलाव सिर्फ नियम-पालन नहीं, बल्कि भाषा सीखने को अधिक सार्थक बनाने के लिए किया गया है।

कक्षा-वार नई व्यवस्था

कक्षा 10 (2026-27)

इस बैच पर नई नीति का कोई असर नहीं। पुरानी दो-भाषा प्रणाली जारी रहेगी, तीसरी भाषा की जरूरत नहीं।

कक्षा 9 (2026-27)

हर छात्र को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, कम से कम दो भारतीय। दो भारतीय भाषा वाले छात्र (जैसे हिंदी-तमिल) तीसरी भाषा में कोई भी भारतीय या विदेशी भाषा चुन सकते हैं। एक भारतीय-एक विदेशी भाषा वाले छात्रों (जैसे तमिल-अंग्रेज़ी) को तीसरी भाषा में कोई भारतीय भाषा जोड़नी होगी। दो विदेशी भाषा वाले छात्रों (जैसे अंग्रेज़ी-फ्रेंच) को एक बार की छूट में दोनों जारी रखने और एक भारतीय भाषा जोड़ने की अनुमति है। इसका मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा, कक्षा 10 (2027-28) में भी बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

कक्षा 7-8 (2026-27)

पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे छात्रों को एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी और कक्षा 10 तक जारी रखनी होगी। मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही होगा।

कक्षा 6 (2026-27) और आगे

यह पहला बैच है जिस पर नीति पूरी तरह लागू होगी—तीन में से दो भाषाएं भारतीय होंगी, और कक्षा 10 पहुंचने पर R3 की बोर्ड परीक्षा भी होगी। कक्षा 6 की R3 पाठ्यपुस्तकें 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

छात्रों के लिए फायदे

इस नीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी मौजूदा छात्र को अचानक बदलाव नहीं झेलना पड़ेगा। कक्षा 9, 7 और 8 में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा न रखकर परीक्षा का दबाव कम किया गया है, जिससे भाषा सीखना तनाव के बजाय सहज अनुभव बनेगा। कई भारतीय भाषाओं से परिचय छात्रों को देश की सांस्कृतिक विविधता से जोड़ता है और बहुभाषी दक्षता बढ़ाता है, जो आगे बेहतर संचार कौशल और रोजगार के अवसरों में सहायक हो सकती है। दिव्यांग, विदेशी स्कूल और लौटे छात्रों को छूट देकर बोर्ड ने सुनिश्चित किया है कि कोई छात्र नुकसान में न रहे।

तुलना तालिका

बैच (2026-27) भाषाएं R3 बोर्ड परीक्षा
कक्षा 10 दो भाषाएं, कोई बदलाव नहीं नहीं
कक्षा 9 तीन भाषाएं, कम से कम 2 भारतीय नहीं
कक्षा 7-8 तीन भाषाएं, छूट के साथ नहीं
कक्षा 6 व आगे तीन भाषाएं, कम से कम 2 भारतीय हां, कक्षा 10 में

किसे मिलेगी छूट

  • दिव्यांग छात्र (CwSN): RPwD अधिनियम 2016 के तहत छूट।
  • विदेश स्थित CBSE स्कूल: भारतीय भाषा को R3 बनाने से पूर्ण छूट।
  • विदेश से लौटे छात्र: इन्हें भी यही छूट मिलती है।

राज्य बदलने पर छात्र अपनी पहले चुनी R3 भाषा जारी रख सकता है; स्कूल को इसके संसाधन देने होंगे। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए स्कूल मौजूदा, सेवानिवृत्त व स्नातकोत्तर शिक्षकों तथा सहोदय क्लस्टर का उपयोग कर सकते हैं।

मुख्य बातें

  • त्रि-भाषा नीति 2026-27 सत्र से लागू, NEP 2020 पर आधारित।
  • कक्षा 10 अप्रभावित; कक्षा 9, 7-8 को राहत के साथ लागू।
  • केवल कक्षा 6 (2026-27) से आगे के बैच R3 की बोर्ड परीक्षा देंगे।
  • दिव्यांग व विदेशी छात्रों को छूट है।
  • छात्रों को बिना परीक्षा दबाव के बहुभाषी बनने का मौका मिलेगा।

निष्कर्ष

CBSE की यह नीति भाषा सीखने को परीक्षा के दबाव से मुक्त रखते हुए छात्रों को धीरे-धीरे बहुभाषी बनाने की दिशा में एक कदम है। कक्षा 10 को पूर्ण छूट, कक्षा 7-9 को राहत और कक्षा 6 से नियम की पूर्ण शुरुआत यह दिखाती है कि बोर्ड ने छात्र-हित को प्राथमिकता दी है। अभिभावकों को अपने स्कूल से भाषा विकल्प जरूर पुष्ट करने चाहिए।

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आधिकारिक संदर्भ

  • CBSE प्रेस विज्ञप्ति, नई दिल्ली, 29 जून 2026 (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार)
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
  • NCERT आधिकारिक वेबसाइट (www.ncert.nic.in)

Frequently Asked Questions

नहीं, 2026-27 शैक्षणिक सत्र में कक्षा 10 के छात्रों पर कोई बदलाव लागू नहीं होगा। वे पुरानी दो-भाषा प्रणाली (two-language system) का ही पालन करेंगे और उन्हें तीसरी भाषा पढ़ने या उसकी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है।

नए नियमों के अनुसार, छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं (जैसे हिंदी, संस्कृत, तमिल आदि) होना अनिवार्य है। आप विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) केवल तीसरी भाषा (R3) के रूप में चुन सकते हैं, बशर्ते पहली दो भाषाएं भारतीय हों।

R3 की बोर्ड परीक्षा सबसे पहले उस बैच के लिए अनिवार्य होगी जो 2026-27 सत्र में कक्षा 6 में प्रवेश लेगा। जब यह बैच 2030-31 में कक्षा 10 में पहुंचेगा, तब उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी होगी।

नहीं, कक्षा 9 (सत्र 2026-27) के छात्रों को तीन भाषाएं तो पढ़नी होंगी, लेकिन उनकी तीसरी भाषा (R3) का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर ही होगा। उन्हें कक्षा 10 में इसके लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

बोर्ड ने दिव्यांग छात्रों (CwSN), विदेश में स्थित सीबीएसई स्कूलों के छात्रों और हाल ही में विदेश से लौटे छात्रों को इस नीति से छूट दी है। इसके अलावा, यदि कोई छात्र राज्य बदलता है, तो उसे अपनी पुरानी चुनी हुई तीसरी भाषा जारी रखने की अनुमति दी जाएगी।
Yash Kumar

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