हमारे आस-पास के पदार्थ - कक्षा 9 विज्ञान नोट्स | Matter in Our Surroundings Class 9
कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 1 "हमारे आस-पास के पदार्थ" के पूरे नोट्स — पदार्थ की परिभाषा, कणीय प्रकृति, ठोस-द्रव-गैस, अवस्था परिवर्तन, केल्विन स्केल और अभ्यास प्रश्नों सहित, मुफ्त PDF व क्विज़ के साथ।
कणीय प्रकृति
(ठोस/द्रव/गैस)
(ताप व दाब)
हमारे चारों ओर जो कुछ भी दिखाई देता है और जिसका द्रव्यमान (भार) तथा आयतन होता है तथा जो स्थान घेरता है, वह पदार्थ (द्रव्य) कहलाता है। जैसे — वायु, जल, कुर्सी, पुस्तक, पत्थर आदि सभी पदार्थ हैं।
- पदार्थ बहुत छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें परमाणु व अणु कहते हैं।
- ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें सामान्य आँखों से नहीं देखा जा सकता।
- वर्ष 1981 में स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप (STM) के आविष्कार के बाद पदार्थ के कणों को देखा जा सका।
- कणों के बीच रिक्त स्थान (space) होता है।
- कण निरंतर व यादृच्छिक (random) रूप से गतिशील रहते हैं — गतिज ऊर्जा पाई जाती है, ताप बढ़ाने पर गति तेज़ होती है।
- कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं — यह आकर्षण बल विभिन्न पदार्थों में भिन्न-भिन्न होता है।
दो भिन्न पदार्थों के कणों का आपस में अपने-आप मिल जाना विसरण कहलाता है। इसी कारण इत्र या अगरबत्ती की खुशबू दूर बैठे व्यक्ति तक भी पहुँच जाती है — गैस के कण तीव्र गति से वायुमंडल में फैल जाते हैं। ताप बढ़ाने पर विसरण की दर भी बढ़ जाती है।
कणों के बीच रिक्त स्थान, कणों की गति व आकर्षण बल की मात्रा के आधार पर पदार्थ को तीन अवस्थाओं में बाँटा गया है: ठोस, द्रव व गैस।
(निश्चित आकार व आयतन)
(निश्चित आयतन)
(दोनों अनिश्चित)
ठोस अवस्था: कणों के बीच आकर्षण बल सबसे अधिक व रिक्त स्थान सबसे कम — आकार व आयतन दोनों निश्चित। जैसे — लोहा, प्लास्टिक, बर्फ, लकड़ी।
द्रव अवस्था: आकर्षण बल ठोस से कम, रिक्त स्थान अधिक — आयतन निश्चित परंतु आकार अनिश्चित (पात्र के अनुसार)। जैसे — जल, दूध, तेलीय पदार्थ।
गैस अवस्था: आकर्षण बल नगण्य, रिक्त स्थान सबसे अधिक — आकार व आयतन दोनों अनिश्चित। गैस अपने पात्र में सभी दिशाओं में समान दाब डालती है। जैसे — CNG, LPG।
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| आकार | निश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | अनिश्चित |
| तरलता | नहीं बहते | ऊपर से नीचे बहते | हर दिशा में बहती |
| संपीड्यता | बहुत कम | ठोस से अधिक | सबसे अधिक |
| कण गतिशीलता | सबसे कम | ठोस से अधिक | सबसे अधिक |
| कणों की ऊर्जा | सबसे कम | ठोस से अधिक | सबसे अधिक |
| रिक्त स्थान | सबसे कम | ठोस से अधिक | सबसे अधिक |
| आकर्षण बल | सबसे अधिक | ठोस से कम | सबसे कम/नगण्य |
(अ) ताप परिवर्तन का प्रभाव
ठोस का तापमान बढ़ाने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, कण तेज़ी से कंपन करने लगते हैं। ऊष्मा से मिली ऊर्जा आकर्षण बल को पार कर लेती है, जिससे ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है। इसी प्रकार द्रव को गर्म करने पर वह गैस में बदल जाता है।
गलन/हिमांकन
वाष्पन/संघनन
अवस्था-परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर रहता है, फिर भी ऊष्मा दी जाती रहती है — इसे गुप्त ऊष्मा कहते हैं। यह कणों के बीच आकर्षण बल को कम करने में प्रयुक्त होती है, तापमान बढ़ाने में नहीं।
- गलन की गुप्त ऊष्मा — 1 kg ठोस को गलनांक पर पूर्णतः द्रव बनाने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
- वाष्पन की गुप्त ऊष्मा — 1 kg द्रव को क्वथनांक पर पूर्णतः वाष्प बनाने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
- दाब बढ़ाने से गैस का आयतन कम हो जाता है।
- दाब बढ़ाने से द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है।
- दाब बढ़ाने से अधिकांश ठोसों का गलनांक बढ़ता है, परंतु बर्फ जैसे अपवादों में घट जाता है।
- उचित दाब व निम्न ताप के संयोजन से गैस को द्रव/ठोस बनाया जा सकता है। जैसे — शुष्क बर्फ (ठोस CO₂), जो दाब हटाते ही सीधे गैस में बदल (ऊर्ध्वपातित हो) जाती है।
क्वथनांक से कम तापमान पर द्रव के वाष्प में बदलने की प्रक्रिया वाष्पीकरण कहलाती है। यह द्रव की सतह पर होने वाली एक सतत प्रक्रिया है।
- सतह के क्षेत्रफल में वृद्धि → वाष्पीकरण तेज़
- तापमान में वृद्धि → वाष्पीकरण तेज़
- आर्द्रता (नमी) में कमी → वाष्पीकरण तेज़
- वायु की गति में वृद्धि → वाष्पीकरण तेज़
वाष्पीकरण के कारण शीतलता: वाष्पीकरण के दौरान कणों को ऊर्जा चाहिए, जो वे आस-पास से अवशोषित कर लेते हैं — इसीलिए मिट्टी के घड़े का पानी ठंडा रहता है व पसीना सूखने पर शरीर को ठंडक मिलती है।
ऊर्ध्वपातन (Sublimation): ठोस से सीधे गैस अवस्था में बदलना (द्रव अवस्था में गए बिना)। जैसे — कपूर, नैफ्थेलीन, अमोनियम क्लोराइड, आयोडीन, शुष्क बर्फ।
निक्षेपण (Deposition): गैस से सीधे ठोस अवस्था में बदलना — यह ऊर्ध्वपातन की विपरीत प्रक्रिया है।
0°C = 273 K को परम शून्य (Absolute Zero) कहते हैं।
| Given | गणना | उत्तर |
|---|---|---|
| 300 K को °C | 300 − 273 | 27°C |
| 573 K को °C | 573 − 273 | 300°C |
| 25°C को K | 25 + 273 | 298 K |
| 373°C को K | 373 + 273 | 646 K |
क्वथनांक: जिस तापमान पर द्रव उबलने लगता है (जल = 100°C/373K)।
गलनांक: जिस न्यूनतम तापमान पर ठोस पिघलकर द्रव बनता है (बर्फ = 0°C/273K)।
हिमांक: जिस तापमान पर द्रव जमना शुरू करता है (जल = 0°C/273K)। शुद्ध जल के लिए गलनांक व हिमांक दोनों समान (0°C) होते हैं।
| राशि | मात्रक | प्रतीक |
|---|---|---|
| तापमान | केल्विन | K |
| लंबाई | मीटर | m |
| संहति | किलोग्राम | kg |
| भार | न्यूटन | N |
| आयतन | घन मीटर | m³ |
| घनत्व | kg/m³ | kg/m³ |
(परम शून्य के निकट)
(अति उच्च ताप)
प्लाज्मा (Plasma): गैस को अत्यधिक उच्च ताप देने या विद्युत क्षेत्र से गुजारने पर परमाणु आयनित हो जाते हैं — इलेक्ट्रॉन परमाणु से अलग हो जाते हैं। इस गर्म, चमकीले मिश्रण को प्लाज्मा कहते हैं। यह विद्युत चालक व चुंबकीय क्षेत्र से प्रभावित होता है। उदाहरण — सूर्य व तारों का पदार्थ, ट्यूबलाइट/नियॉन साइन बोर्ड की गैस।
बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC): अत्यंत निम्न घनत्व की गैस को परम शून्य (0K) के निकट ठंडा करने पर बनने वाली अवस्था। इसकी भविष्यवाणी भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस व अल्बर्ट आइंस्टीन ने की थी। वर्ष 2001 में एरिक कॉर्नेल, कार्ल वीमन व वोल्फगैंग केटरले को इसकी खोज हेतु भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
प्र.1 निम्नलिखित तापमानों को सेल्सियस में बदलें: (i) 300 K (ii) 573 K
उ. (i) 27°C (ii) 300°C
प्र.2 निम्नलिखित तापमानों को केल्विन में बदलें: (i) 25°C (ii) 373°C
उ. (i) 298 K (ii) 646 K
प्र.3(a) नैफ्थलीन की गोलियाँ बिना ठोस अवशेष छोड़े क्यों गायब हो जाती हैं?
उ. नैफ्थलीन ऊर्ध्वपातन दर्शाती है — यह द्रव बने बिना सीधे गैस में बदल जाती है।
प्र.3(b) दूर बैठे होने पर भी इत्र की गंध क्यों मिल जाती है?
उ. इत्र के कण तीव्र गति से वायुमंडल में विसरित हो जाते हैं।
प्र.4 जल, चीनी, ऑक्सीजन को बढ़ते आकर्षण बल के अनुसार व्यवस्थित करें।
उ. ऑक्सीजन < जल < चीनी
प्र.5 25°C, 0°C, 100°C पर जल की भौतिक अवस्था?
उ. 25°C → द्रव | 0°C → ठोस (बर्फ व जल साथ) | 100°C → द्रव व गैस साथ
प्र.6 जल कमरे के तापमान पर द्रव क्यों है? लोहे की अलमारी ठोस क्यों?
उ. कमरे का तापमान (~25°C) जल के गलनांक (0°C) व क्वथनांक (100°C) के बीच है इसलिए जल द्रव रहता है। लोहे का गलनांक (~1536°C) बहुत अधिक है, इतना ताप न मिलने से वह ठोस रहता है।
प्र.7 273K पर बर्फ व जल में से कौन अधिक ठंडा करता है?
उ. बर्फ — क्योंकि उसे पिघलने हेतु गलन की गुप्त ऊष्मा अतिरिक्त रूप से आस-पास से लेनी पड़ती है।
प्र.8 उबलते जल या भाप — किससे जलन अधिक होती है?
उ. भाप से — इसमें वाष्पन की गुप्त ऊष्मा अतिरिक्त रूप से संचित रहती है।
प्र.9 A–F अवस्था परिवर्तन नामांकित करें (ठोस⇌द्रव⇌गैस चित्र)।
उ. A: गलन | B: हिमांकन | C: वाष्पीकरण | D: संघनन | E: ऊर्ध्वपातन | F: निक्षेपण
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