Class 8 संस्कृत पाठ 10: सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः) (दीपकम्)

कक्षा 8 की संस्कृत पुस्तक "दीपकम्" के दसवें पाठ "सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः)" का सारांश, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, व्याकरण नियम और पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के सरल हल।

Sep 11, 2026 - 16:38
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कक्षा 8 की संस्कृत पुस्तक "दीपकम्" का दसवाँ पाठ "सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः)" हितोपदेश की प्रसिद्ध कथा से लिया गया है, जो राजपुत्र वीरवर की कर्तव्यनिष्ठा और स्वामिभक्ति की प्रेरक कहानी है। इस लेख में पाठ का सार, शब्दार्थ, व्याकरण-बिंदु और सभी अभ्यास प्रश्नों के हल सरल भाषा में दिए गए हैं।

पाठ का उद्देश्य क्या है?

इस पाठ का उद्देश्य छात्रों को कर्तव्यनिष्ठा, स्वामिभक्ति और त्याग के महत्व से परिचित कराना है। यह कथा हितोपदेश से ली गई है और राजपुत्र वीरवर के माध्यम से दिखाती है कि सच्चा सेवक अपने राजा और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण तक अर्पित करने को तैयार रहता है। पाठ शीर्षक "सन्निमित्ते वरं त्यागः" का अर्थ है — "उचित कारण के लिए त्याग श्रेष्ठ है।" यह कथा दो भागों में विभाजित है; यह पहला भाग (क-भागः) है।

कथा सरल शब्दों में

शोभावती नामक नगरी में शूद्रक नामक महापराक्रमी, अनेक शास्त्रों के ज्ञाता और पवित्र चरित्र वाले राजा राज्य करते थे। एक दिन वीरवर नामक राजकुमार अपनी पत्नी वेदरता, पुत्र शक्तिधर और पुत्री वीरवती के साथ आजीविका की तलाश में राजा शूद्रक के दरबार में आया। राजा से मिलकर वीरवर ने कहा कि यदि उसे सेवा में रखा जाए तो वह श्रद्धापूर्वक हर आदेश का पालन करेगा।

जब राजा ने वेतन के बदले उसकी योग्यता पूछी, तो वीरवर ने उत्तर दिया — "ये दो भुजाएँ और यह तलवार ही मेरी सामग्री हैं," और प्रतिदिन चार सौ स्वर्ण-मुद्राओं का वेतन माँगा। राजा को यह असंभव लगा, पर मंत्री की सलाह पर चार दिन परखने के लिए वीरवर को नियुक्त कर लिया गया। वीरवर प्रतिदिन प्रातः राजदर्शन के बाद अपने वेतन का आधा भाग देवताओं को अर्पित करता, शेष का आधा निर्धनों को दान करता, और बचा हुआ भाग घर-खर्च के लिए पत्नी को देता था। इसके बाद वह शस्त्र धारण करके दिन-रात राजद्वार की रखवाली करता।

एक बार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की आधी रात में राजा को किसी के करुण रुदन की आवाज़ सुनाई दी। राजा ने वीरवर को उस रुदन के स्रोत का पता लगाने भेजा, और स्वयं भी गुप्त रूप से तलवार लेकर उसके पीछे-पीछे चल पड़े। नगर के बाहर वीरवर को एक दिव्य आभूषणों से सजी, रोती हुई स्त्री मिली। पूछने पर उसने बताया कि वह स्वयं राजा शूद्रक की राजलक्ष्मी है, और रानी के किसी अपराध के कारण आज से तीसरे दिन राजा की मृत्यु निश्चित है — जिससे वह अनाथ हो जाएगी। वीरवर ने विनम्रता से पूछा कि क्या कोई उपाय है जिससे राजा का जीवन बच सके। राजलक्ष्मी ने बताया कि एक ही उपाय है, पर वह अत्यंत कठिन है — यह कहकर वह अचानक अदृश्य हो गई, और कथा यहीं रहस्य के साथ रुक जाती है (आगे का भाग अगले पाठ में)।

महत्वपूर्ण शब्दार्थ

संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
महीपतिः राजा
वृत्त्यर्थम् आजीविका के लिए
वर्तनम् वेतन
खड्गः तलवार
अहर्निशम् दिन-रात
तिमिरे अंधकार में
अनाथा स्वामी-रहित
पञ्चत्वम् मृत्यु
दुःसाध्या कठिन (उपाय)
एकाकी अकेला

व्याकरण एवं विशेष बिंदु

संधि: वृत्त्यर्थं — यण् संधि (वृत्ति + अर्थम्)। तदाहम् — तत् + अहम् (व्यंजन संधि)।

समास: महीपतिः — तत्पुरुष समास (महीः पतिः)।

लकार: "अनयत्" में लङ् लकार (सामान्य भूतकाल) है — यह बताता है कि क्रिया अतीत में हो चुकी है।

उपसर्ग: "प्रवृत्तिः" में "प्र" उपसर्ग है।

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — सभी प्रश्नों के हल

प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरं लिखत

प्रश्न उत्तर
शोभावती नगर्याः राज्ञः नाम किम्? शूद्रकः
शूद्रकस्य समीपं वृत्त्यर्थं कः आगच्छत्? वीरवरः
वीरवरस्य पत्न्याः नाम किम्? वेदरता
वीरवरः प्रतिदिनं कति वेतनम् इच्छति? सुवर्णशतचतुष्टयम्
अवशिष्टं वेतनं भोज्यविलासार्थं कस्याः हस्ते ददाति? पत्न्याः
सा महिला कस्य राजलक्ष्मीः अस्ति? शूद्रकस्य
राजलक्ष्मी कति प्रवृत्ति-विषये अवदत्? एकाम्

प्रश्न 2: पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

  • वीरवरः स्ववेतनस्य अर्धं देवेभ्यः यच्छति, शेषस्य अर्धं दरिद्रेभ्यः ददाति, अवशिष्टं भोज्यविलासव्ययार्थं पत्न्याः हस्ते ददाति।
  • यदा राजा स्वयम् आदिशति तदा वीरवरः याति स्वगृहम्।
  • करुण-रोदनध्वनिं नृपः कृष्णचतुर्दश्याम् अर्धरात्रे श्रुतवान्।
  • वीरवरस्य रोदनस्वरम् अनुसरन् प्रचलिते तदा नृपः अपि तस्य पृष्ठतः अगच्छत्।
  • रोदनध्वनिः शूद्रकस्य राजलक्ष्म्याः आसीत्।
  • नृपः शूद्रकः महापराक्रमी, नानाशास्त्रवित्, पूतचरित्रः च आसीत्।
  • वीरवरः नृपस्य शूद्रकस्य समीपं वृत्त्यर्थम् अगच्छत्।
  • राजलक्ष्म्याः वार्तां श्रुत्वा वीरवरः अपृच्छत् यत् अस्ति कश्चित् उपायः येन भगवत्याः पुनः चिरवासः भवति, स्वामी च सुचिरं जीवति।

प्रश्न 3: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न सही उत्तर
वीरवरस्य पुत्रः नाम किम्? शक्तिधरः
दौवारिकः कस्य समीपम् अगच्छत्? शूद्रकस्य (राजा के पास वीरवर को ले गया)
राजलक्ष्म्यानुसारं शूद्रकस्य जीवनस्य कति दिनानि शेषम्? त्रीणि
'सेवायां' पद में कौन-सी विभक्ति है? सप्तमी
'वृत्त्यर्थं' में कौन-सी संधि है? यण् संधि
'महीपतिः' में कौन-सा समास है? तत्पुरुष
'अनयत्' में कौन-सा लकार है? लङ् लकार
'सुखदुःखयोः' में कौन-सा समास है? द्वंद्व समास

प्रश्न 4: रिक्तस्थान पूर्ति (मञ्जूषा से)

मञ्जूषा: राजपुत्रः, राजानं, श्रुतवान्, एकाकी, दुःसाध्यः

अपूर्ण वाक्य सही शब्द
एकदा वीरवरनामा ______ आसीत्। राजपुत्रः
वीरवरः ______ प्रणम्य राजसभातः निर्गतः। राजानं
राजा ______ करुणरोदनध्वनिं कञ्चन। श्रुतवान्
नैष गन्तुमर्हति राजपुत्रः ______ सूचिभेद्ये तिमिरेऽस्मिन्। एकाकी
कः सः उपायः ______? दुःसाध्यः

प्रश्न 5: रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न-निर्माण

वाक्य प्रश्नवाचक शब्द
शोभावती नाम काचन नगरी आसीत्। का
वीरवरेण सह वेदरता नाम तस्य पत्नी अस्ति। केन
वीरवरः राजद्वारम् अहर्निशं सेवते। कम्
अहं भूपालस्य राजलक्ष्मीः अस्मि। कस्य
त्वं स्वस्य सर्वतः प्रियं वस्तु भगवत्यै उपहारः कुरु। कस्यै

प्रश्न 6: हाँ/नहीं (आम्/न) में उत्तर दीजिए

कथन उत्तर
किं राज्ञः शूद्रकस्य नगर्याः नाम शोभावती आसीत्? आम्
किं वीरवरः अनेकशास्त्राणां ज्ञाता आसीत्?
किं वीरवरः राजपुत्रः आसीत्? आम्

परियोजनाकार्यम्

  • वीरवर के चरित्र से आपको कौन-से तीन गुण सबसे प्रेरक लगे — संस्कृत या हिंदी में लिखें।
  • अनुमान लगाइए कि आगे की कहानी (ख-भागः) में वीरवर क्या त्याग करता है, और अपने अनुमान का कारण लिखें।

परीक्षा हेतु त्वरित सुझाव

  • कथा का क्रम याद रखें — वीरवर की नियुक्ति → वेतन का बँटवारा → अर्धरात्रि का रुदन → राजलक्ष्मी से भेंट → रहस्यमय उपाय।
  • वीरवर के वेतन-बँटवारे का क्रम (आधा देवताओं को, शेष का आधा निर्धनों को, बचा हुआ घर के लिए) ठीक से याद करें — यह अक्सर पूछा जाता है।
  • राजलक्ष्मी के संवाद और "पञ्चत्वं यास्यति" जैसे मुहावरेदार प्रयोग समझ लें।
  • यह पाठ दो भागों में है — भाग (ख) में आगे क्या होता है, यह पढ़ने के लिए उत्सुक रहें, परीक्षा में जोड़ा जा सकता है।

Naina Saini

"Naina Saini is an Editorial Intern at Aapbiti, specializing in publishing and managing education-focused news articles. Operating under the direct mentorship and guidance of Shakti Rao Mani, the Product Owner of aapbiti.com, Naina is dedicated to delivering accurate, timely, and engaging academic updates. Her role focuses on keeping readers informed about educational trends, exams, admissions, and key academic policies."

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