Class 8 संस्कृत पाठ 9: कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्? (दीपकम्)
कक्षा 8 की संस्कृत पुस्तक "दीपकम्" के नौवें पाठ "कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?" की कहानी, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, 'हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्' का अर्थ और पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के सरल हल।
कक्षा 8 की संस्कृत पुस्तक "दीपकम्" का नौवाँ पाठ "कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?" आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित एक रोचक कथा है, जिसमें भगवान धन्वन्तरि और वैद्य वाग्भट का प्रसंग है। इस लेख में पाठ की पूरी कहानी, शब्दार्थ, श्लोकों का भावार्थ, व्याकरण-बिंदु और सभी अभ्यास प्रश्नों के हल सरल भाषा में दिए गए हैं।
पाठ का उद्देश्य क्या है?
इस पाठ का उद्देश्य छात्रों को आयुर्वेद के स्वास्थ्य-सिद्धांतों से परिचित कराना है — विशेष रूप से "हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्" के सिद्धांत से, जिसका अर्थ है हितकर भोजन करना, संयमित मात्रा में खाना, और ऋतु के अनुसार आहार लेना। पाठ बताता है कि सच्चा स्वास्थ्य केवल दवा से नहीं, बल्कि सही खान-पान और नियमित दिनचर्या से बना रहता है। "कोऽरुक्" शीर्षक का अर्थ है — "कौन निरोग/स्वस्थ है?" — जो विसर्ग संधि का उदाहरण भी है (कः + अरुक्)।
पाठ की शुरुआत — माँ-बेटी का संवाद
पाठ की शुरुआत माँ-बेटी के संवाद से होती है। बेटी को भूख लगी है और वह जल्दी भोजन माँगती है, पर माँ बताती है कि भोजन अभी बहुत गर्म है — "अत्यधिक गर्म भोजन मुँह में जलन पैदा करता है और हितकर भी नहीं होता, यह आयुर्वेद का उपदेश है।" बेटी बताती है कि उसके शिक्षक भी आयुर्वेद के आहार-नियमों की बात करते हैं। तब माँ भोजन से जुड़ा एक रोचक प्रसंग सुनाने लगती है, जो आगे पूरे पाठ की मुख्य कथा बनती है।
कथा सरल शब्दों में
प्राचीन काल में यह जानने के लिए कि भारतवर्ष में वैद्य विभिन्न रोगों का उपचार कैसे करते हैं, भगवान धन्वन्तरि (आयुर्वेद के देवता) एक सुंदर तोते का रूप धारण करके गाँव-गाँव घूमने लगे। हर प्रसिद्ध वैद्य के घर के पास वृक्ष पर बैठकर वे "कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?" (कौन निरोग है?) की ध्वनि करते, पर किसी वैद्य ने इस पक्षी की आवाज़ पर ध्यान नहीं दिया।
अंत में वे वैद्य वाग्भट की कुटिया पहुँचे और आँगन के फूलों के वृक्ष पर बैठकर मधुर स्वर में वही प्रश्न दोहराया। वाग्भट ने बाहर आकर उस असाधारण तोते को देखा और समझ गए कि यह कोई साधारण पक्षी नहीं, बल्कि कोई देवता है। उन्होंने तोते को फल दिए, पर तोते ने फल न खाकर फिर वही प्रश्न दोहराया। तब वाग्भट को एहसास हुआ कि तोता अपने प्रश्न का उत्तर चाहता है। उन्होंने तुरंत तीन शब्दों में उत्तर दिया — "हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्" — अर्थात् जो हितकर, संयमित और ऋतु के अनुकूल भोजन करता है, वही सदा स्वस्थ रहता है। यह सुनकर तोता अत्यंत प्रसन्न हुआ और फल खा लिया।
तब तोते के रूप में धन्वन्तरि ने अपना असली परिचय दिया — "मैं धन्वन्तरि हूँ, उत्तम वैद्य की खोज में सारे भारतवर्ष में घूम रहा था। तुम्हारे आयुर्वेद-ज्ञान से मैं अत्यंत संतुष्ट हूँ। तुम अवश्य आयुर्वेद के आठों अंगों का सार-ग्रंथ रचो" — यह कहकर वे अंतर्ध्यान हो गए। यह सब दूर से देख रहे वाग्भट के शिष्यों ने पूछा कि "हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्" का क्या अर्थ है। वाग्भट ने महर्षि चरक के श्लोकों के आधार पर समझाया कि हितभुक् का अर्थ है वह आहार लेना जो स्वास्थ्य की रक्षा करे और रोग न होने दे; मितभुक् का अर्थ है उचित मात्रा में खाना — भारी पदार्थ भी कम मात्रा में हितकर होते हैं और हल्के पदार्थ भी अधिक मात्रा में हानिकारक हो सकते हैं; और ऋतुभुक् का अर्थ है ऋतु के अनुसार भोजन करना, जिससे बल, वर्ण (कांति) और आयु बढ़ती है। अंत में वाग्भट शिष्यों को धन्वन्तरि का दिया संदेश सुनाते हैं — प्रतिदिन सुबह उठकर व्यायाम करना, दाँत साफ करना, स्वच्छ जल से स्नान करना और भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। पाठ का समापन एक प्रसिद्ध प्रार्थना श्लोक से होता है — "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" (सब सुखी हों, सब नीरोग हों)।
मुख्य श्लोक और भावार्थ
| श्लोक | सरल भावार्थ |
|---|---|
| तच्च नित्यं प्रयुञ्जीत स्वास्थ्यं येनानुवर्तते। अजातानां विकाराणामनुत्पत्तिकरं च यत्॥ (हितभुक्) |
जिस आहार से स्वास्थ्य बना रहे और नए रोग पैदा न हों, ऐसा भोजन ही नित्य करना चाहिए। |
| अल्पादाने गुरूणां च लघूनां चातिसेवने। मात्राकारणमुद्दिष्टं द्रव्याणां गुरुलाघवे॥ (मितभुक्) |
भारी पदार्थ कम मात्रा में खाने से पचते हैं, हल्के पदार्थ भी अधिक खाने से हानि पहुँचाते हैं — इसलिए भोजन में मात्रा (परिमाण) का ध्यान रखना चाहिए। |
| तस्याशिताद्यादाहारात् बलं वर्णश्च वर्धते। तस्यर्तुसात्म्यं विदितं चेष्टाहारव्यपाश्रयम्॥ (ऋतुभुक्) |
जो ऋतु के अनुकूल भोजन करता है, उसका बल और तेज (कांति) बढ़ता है — यह ऋतु-अनुसार आहार का ज्ञान आवश्यक है। |
| व्यायामः प्रातरुत्थाय नित्यं दन्तविशोधनम्। स्वच्छजलेन सुस्नानं, बुभुक्षायाञ्च भोजनम्॥ |
प्रतिदिन सुबह उठकर व्यायाम करना, दाँत साफ करना, स्वच्छ जल से स्नान करना और भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। |
| सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥ |
सब सुखी हों, सब नीरोग रहें, सब कल्याण देखें, कोई भी दुःखी न हो — यह प्रसिद्ध शांति-प्रार्थना है। |
महत्वपूर्ण शब्दार्थ
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| अरुक् | नीरोग, स्वस्थ |
| बुभुक्षा | भूख |
| शुकः | तोता |
| हितभुक् | हितकर भोजन करने वाला |
| मितभुक् | संयमित मात्रा में खाने वाला |
| ऋतुभुक् | ऋतु के अनुसार खाने वाला |
| विकाराः | रोग/दोष |
| गुरुलाघवम् | भारी और हल्का (भोजन) |
| निरामयाः | नीरोग लोग |
| दन्तविशोधनम् | दाँतों की सफाई |
व्याकरण: प्रकृति-प्रत्यय और लकार
| शब्द | प्रकृति + प्रत्यय |
|---|---|
| श्रुत्वा | श्रु + क्त्वा |
| खादितव्यम् | खाद् + तव्यत् |
| प्रदत्तवान् | प्र + दा + क्तवतु |
| भ्रमन् | भ्रम् + शतृ |
| आरुह्य | आ + रुह् + ल्यप् |
लकार पहचान: "भवेत्" में विधिलिङ् लकार (संभावना/चाहिए के भाव में) है, और "उत्थाय" में ल्यप् प्रत्यय है।
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — सभी प्रश्नों के हल
प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरं लिखत
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| शुकरूपं कः धृतवान्? | भगवान् धन्वन्तरिः |
| आयुर्वेदस्य देवता कः अस्ति? | धन्वन्तरिः |
| शुकः केषां भवनपार्श्वस्थे ध्वनिम् अकरोत्? | वैद्यानाम् |
| वाग्भटः कस्मै मधुराणि फलानि समर्पितवान्? | शुकाय |
| वाग्भटः प्रश्नानां कति उत्तराणि अददात्? | त्रीणि |
| आहारस्य सेवनेन कस्य रक्षणं भवेत्? | स्वास्थ्यस्य |
| भारतवर्षे कति ऋतवः सन्ति? | षड् |
प्रश्न 2: पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत
- शुकः 'कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?' इति ध्वनिम् अकरोत्।
- वाग्भटः 'हितभुक्', 'मितभुक्', 'ऋतुभुक्' इति उत्तराणि अददात्।
- वाग्भटस्य उत्तराणि श्रुत्वा शिष्याः विस्मिताः जाताः।
- छात्राः अपृच्छन् — शुकः 'कोऽरुक्' इति उक्तवान्, तस्य कोऽर्थः?
- यस्य आहारस्य सेवनेन स्वास्थ्यस्य रक्षणं भवेत् तादृशः आहारः सेवनीयः — इति हितभुक् अर्थः।
- मात्रानुसारम् एव खादितव्यम् — इति मितभुक् अर्थः।
- ऋतूनाम् अनुकूलं स्वास्थ्यप्रदम् आहारसेवनम् — इति ऋतुभुक् अर्थः।
प्रश्न 3: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
| प्रश्न | सही उत्तर |
|---|---|
| शुकस्य रूपे कः भवति? | धन्वन्तरिः |
| वाग्भटः किम् आसीत्? | वैद्यः |
| 'नायं लौकिकः खगः' इति कः चिन्तितवान्? | वाग्भटः |
| हितभुक् विषये वाग्भटः कस्य विचारं अवदत्? | चरकस्य |
| 'द्रव्याणां' पद में कौन-सी विभक्ति है? | षष्ठी |
| 'भवेत्' पद में कौन-सा लकार है? | विधिलिङ् |
| 'उत्थाय' पद में कौन-सा प्रत्यय है? | ल्यप् |
प्रश्न 4: रिक्तस्थान पूर्ति (मञ्जूषा से)
मञ्जूषा: शुकरूपं, कुटीरसमीपं, खादितव्यम्, प्रातरुत्थाय, निरामयाः
| अपूर्ण वाक्य | सही शब्द |
|---|---|
| भगवान् धन्वन्तरिः मनोहरं ______ धृत्वा प्रतिग्रामम् अभ्रमत्। | शुकरूपं |
| अन्ते सः वाग्भटस्य ______ गतवान्। | कुटीरसमीपं |
| अतः मात्रानुसारम् एव ______। | खादितव्यम् |
| व्यायामः ______ नित्यं दन्तविशोधनम्। | प्रातरुत्थाय |
| सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु ______। | निरामयाः |
प्रश्न 5: रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न-निर्माण
| वाक्य | प्रश्नवाचक शब्द |
|---|---|
| खगः भोजनं न वाञ्छति। | किम् |
| शुकः वाग्भटस्य कुटीरसमीपं गतवान्। | कस्य |
| वाग्भटः शिष्याणां जिज्ञासाम् उपशमयति। | केषाम् |
| धन्वन्तरिः वाग्भटस्य आयुर्वेदज्ञानेन सन्तुष्टः भवति। | कः |
| सर्वं दूरात् पश्यन्तः शिष्याः विस्मिताः। | के |
प्रश्न 6: प्रकृति-प्रत्यय अलग कीजिए
| पद | प्रकृति + प्रत्यय |
|---|---|
| श्रुत्वा | श्रु + क्त्वा |
| खादितव्यम् | खाद् + तव्यत् |
| प्रदत्तवान् | प्र + दा + क्तवतु |
| भ्रमन् | भ्रम् + शतृ |
| आरुह्य | आ + रुह् + ल्यप् |
परियोजनाकार्यम्
- अपने दैनिक जीवन में हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् — इन तीनों नियमों का पालन कैसे करेंगे, इस पर एक अनुच्छेद लिखें।
- अपनी दिनचर्या (व्यायाम, स्नान, भोजन का समय) को संस्कृत में पाँच वाक्यों में लिखें।
परीक्षा हेतु त्वरित सुझाव
- "हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्" — तीनों शब्दों का अर्थ और उनसे जुड़े श्लोक अच्छी तरह याद रखें।
- कहानी का क्रम (धन्वन्तरि का भ्रमण → वाग्भट से भेंट → उत्तर → वरदान → शिष्यों की जिज्ञासा) समझ लें।
- अंतिम प्रार्थना श्लोक "सर्वे भवन्तु सुखिनः..." अर्थ सहित कंठस्थ करें — यह अक्सर पूछा जाता है।
- "कोऽरुक्" शब्द का संधि-विच्छेद (कः + अरुक्) अवश्य याद रखें।
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