Class 9 Science Chapter 10 – ध्वनि तरंगें: विशेषताएँ और अनुप्रयोग | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या
NCERT Exploration Class 9 Science Chapter 10 Sound Waves हिंदी में – ध्वनि उत्पादन, संचरण, तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, आयाम, गति, प्रतिध्वनि, अनुनाद, पराश्रव्य तरंगें, सोनार और सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर एवं FAQ।
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अध्याय 10: ध्वनि तरंगें – परिचय
ध्वनि एक ऐसा संवेदी अनुभव है जो हमें अपने परिवेश से जोड़ता है। मानव आवाज़, पक्षियों का चहचहाना, बिजली की कड़क, वाहनों का हॉर्न — ये सभी ध्वनि के रूप हैं। अध्याय 7 में पढ़ा था कि ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है। इस अध्याय में हम जानेंगे — ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है, कैसे संचरित होती है, इसकी विशेषताएँ क्या हैं और इसके क्या-क्या उपयोग हैं।
NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक: NCERT Exploration Class 9 Science Chapter 10
10.1 ध्वनि का उत्पादन (Production of Sound)
ध्वनि कंपन (Vibration) से उत्पन्न होती है। जब तक वस्तु कंपन करती है, ध्वनि आती है; कंपन बंद होते ही ध्वनि भी बंद।
कंपन (Vibration): किसी वस्तु की आगे-पीछे की आवधिक गति (Periodic to and fro motion / Oscillations)।
ध्वनि उत्पन्न करने के तरीके
- तनी हुई डोरी या तार को छेड़ना (Guitar, Sitar)
- धातु की वस्तु को ठोकना (Taal, Ghanta)
- बाँसुरी में हवा फूँकना → नली में वायु स्तम्भ का कंपन
- झिल्ली (Membrane) को कंपित करना (Tabla, Drum)
- मनुष्यों में: स्वरयंत्र (Larynx) में स्थित स्वर तंतुओं (Vocal Cords) का कंपन
- टिड्डी और झींगुर: पंखों या पैरों को रगड़कर
ध्वनि स्रोत (Sound Source): ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु।
10.1.1 ट्यूनिंग फोर्क (Tuning Fork)
ट्यूनिंग फोर्क U-आकार की इस्पात या एल्युमीनियम की छड़ होती है जिसमें एक स्टेम (Stem) और दो प्रांग (Prongs/Tines) होते हैं। रबड़ पैड पर ठोकने से प्रांग कंपन करते हैं। कंपित प्रांग को पानी की सतह से छुआने पर तरंगें बनती हैं — यह सिद्ध करता है कि वस्तु वास्तव में कंपन कर रही है।
10.2 ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound)
ध्वनि ठोस, द्रव और गैस — तीनों माध्यमों में संचरित होती है।
- ठोस में: मेज़ पर कान रखकर सुनना → मेज़ से ध्वनि स्पष्ट सुनाई देती है।
- द्रव में: पानी में डूबे दो चम्मचों को ठोकने पर ध्वनि सुनाई देती है।
- गैस में: हवा में सामान्यतः ध्वनि सुनाई देती है।
जिस पदार्थ से ध्वनि संचरित होती है उसे माध्यम (Medium) कहते हैं।
10.2.1 ध्वनि संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है
वैक्यूम बेल जार प्रयोग: एक बेल जार में इलेक्ट्रिक बेल रखकर चालू करें। वायु पम्प से धीरे-धीरे वायु निकालें → ध्वनि धीमी होती जाती है। पूर्ण निर्वात (Vacuum) पर ध्वनि बंद — बेल दिखती रहती है लेकिन सुनाई नहीं देती। वायु वापस भरने पर ध्वनि फिर सुनाई देती है।
निष्कर्ष: ध्वनि को संचरित होने के लिए माध्यम आवश्यक है। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती।
अंतरिक्ष में लगभग निर्वात है, इसलिए Spacewalk करने वाले अंतरिक्षयात्री एक-दूसरे की आवाज़ सीधे नहीं सुन सकते — वे स्पेससूट में लगे विशेष उपकरणों से संचार करते हैं।
10.3 ध्वनि तरंगें (Sound Waves)
ध्वनि माध्यम में कैसे संचरित होती है? इसे समझने के लिए स्लिंकी (Slinky) उपमा उपयोगी है।
जब स्लिंकी के एक सिरे को धक्का देते और खींचते हैं तो उसमें क्षेत्र बनते हैं जहाँ turns करीब (संपीडन) और दूर (विरलन) होते हैं। यह विक्षोभ आगे बढ़ता है, लेकिन turns स्वयं अपनी जगह पर आगे-पीछे हिलते हैं — दूर नहीं जाते।
संपीडन और विरलन (Compression and Rarefaction)
मान लें एक नली में हवा है और एक सिरे पर पिस्टन है:
- जब पिस्टन आगे जाता है: पास की वायु संकुचित होती है → घनत्व बढ़ता है → संपीडन (Compression, C) बनता है।
- जब पिस्टन पीछे जाता है: पास की वायु विरल होती है → घनत्व घटता है → विरलन (Rarefaction, R) बनता है।
- पिस्टन दोलन करता रहे → C और R बारी-बारी बनते और आगे बढ़ते जाते हैं।
ध्वनि तरंग (Sound Wave): माध्यम में एकांतर संपीडन और विरलन की श्रृंखला जो माध्यम के कणों के वास्तविक प्रवाह के बिना संचरित होती है।
महत्वपूर्ण नोट: माध्यम के कण तरंग के साथ आगे नहीं बढ़ते — वे केवल अपनी माध्य स्थिति (Mean Position) के आसपास कंपन करते हैं। तरंग में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, कणों का नहीं।
अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave)
ध्वनि तरंग में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर (Parallel) कंपन करते हैं। ऐसी तरंग को अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) कहते हैं।
इसके विपरीत अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) में कण संचरण दिशा के लम्बवत (Perpendicular) कंपन करते हैं (जैसे — प्रकाश तरंग)।
ध्वनि तरंग एक यांत्रिक तरंग (Mechanical Wave) है — इसके लिए माध्यम आवश्यक है। प्रकाश तरंग यांत्रिक नहीं है — निर्वात में भी चलती है।
10.4 ध्वनि तरंगों की ऊर्जा (Energy of Sound Waves)
जब किसी कंटेनर की झिल्ली के ऊपर चावल या नमक रखें और पास में तेज़ ध्वनि उत्पन्न करें, तो दाने हिलते हैं — बिना स्रोत को छुए! यह सिद्ध करता है कि ध्वनि ऊर्जा है।
जब ध्वनि स्रोत कंपन करता है → माध्यम के कणों को ऊर्जा देता है → माध्यम में कण-टकराहट से ऊर्जा आगे स्थानांतरित होती है।
माइक्रोफोन: ध्वनि ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा। स्पीकर: विद्युत ऊर्जा → ध्वनि ऊर्जा।
10.5 ध्वनि तरंग का आलेखीय निरूपण (Graphical Representation)
ध्वनि तरंग का ग्राफ घनत्व (Y-axis) बनाम दूरी (X-axis) पर खींचते हैं:
- शिखर (Crest): ग्राफ का उच्चतम बिंदु → संपीडन का क्षेत्र (अधिकतम घनत्व)
- गर्त (Trough): ग्राफ का निम्नतम बिंदु → विरलन का क्षेत्र (न्यूनतम घनत्व)
- बिंदुरेखा (Dashed line) = औसत घनत्व
10.6 ध्वनि तरंग की विशेषताएँ (Characteristics of Sound Wave)
10.6.1 तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति और आवर्तकाल
तरंगदैर्ध्य (Wavelength – λ)
दो क्रमागत शिखरों या दो क्रमागत गर्तों के बीच की दूरी। प्रतीक: λ (lambda)। SI इकाई: मीटर (m)।
एक संपीडन + एक विरलन = एक तरंगदैर्ध्य।
आवृत्ति (Frequency – ν)
किसी निश्चित बिंदु पर प्रति सेकंड होने वाले घनत्व दोलनों की संख्या। प्रतीक: ν (nu)। SI इकाई: हर्ट्ज़ (Hz) = s⁻¹।
आवर्तकाल (Time Period – T)
एक पूर्ण घनत्व दोलन में लगा समय। प्रतीक: T। SI इकाई: सेकंड (s)।
ν = 1/T ...(समीकरण 10.1)
आवृत्ति और आवर्तकाल व्युत्क्रमानुपाती हैं। अधिक आवृत्ति → कम आवर्तकाल।
उदाहरण 10.1
10 घनत्व दोलन 2 सेकंड में → आवृत्ति = 10/2 = 5 Hz; आवर्तकाल = 2/10 = 0.2 s
10.6.2 आयाम और तीव्रता (Amplitude and Intensity)
आयाम (Amplitude): संपीडन (या विरलन) में घनत्व का औसत घनत्व से अधिकतम परिवर्तन। बड़ा आयाम → अधिक ऊर्जा → तेज़ ध्वनि।
तीव्रता (Intensity): ध्वनि संचरण दिशा के लम्बवत इकाई क्षेत्रफल से प्रति इकाई समय में गुज़रने वाली ध्वनि ऊर्जा की मात्रा।
स्रोत से दूरी बढ़ने पर ऊर्जा बड़े क्षेत्र में फैलती है → तीव्रता घटती है।
10.6.3 ध्वनि की गति (Speed of Sound)
ध्वनि की गति = तरंग पर कोई बिंदु (जैसे शिखर) एक सेकंड में जितनी दूरी तय करे।
v = λ × ν ...(समीकरण 10.2)
अर्थात: गति = तरंगदैर्ध्य × आवृत्ति
माध्यम के अनुसार ध्वनि की गति
| अवस्था | माध्यम | अनुमानित गति (15°C पर) |
|---|---|---|
| ठोस | इस्पात (Steel) | 5000 m s⁻¹ |
| द्रव | जल (Water) | 1500 m s⁻¹ |
| गैस | वायु (Air) | 340 m s⁻¹ |
ध्वनि सबसे तेज़ ठोस में, उससे धीमी द्रव में, और सबसे धीमी गैस में चलती है। वायु में गति तापमान और आर्द्रता बढ़ने पर बढ़ती है।
0°C पर शुष्क वायु में ≈ 331 m s⁻¹, 22°C पर ≈ 344 m s⁻¹।
ध्यान: एक ही माध्यम में ध्वनि की गति आवृत्ति पर निर्भर नहीं करती। यदि आवृत्ति बदले तो तरंगदैर्ध्य बदल जाता है, गति नहीं।
उदाहरण 10.2: मानव श्रव्य परास में तरंगदैर्ध्य
v = 344 m s⁻¹
(i) ν = 20 Hz: λ = 344/20 = 17.2 m
(ii) ν = 20000 Hz: λ = 344/20000 = 0.0172 m = 1.72 cm
उदाहरण 10.3: बिजली और बादल की कड़क
समय अंतराल = 5 s, v = 340 m s⁻¹
दूरी = v × t = 340 × 5 = 1700 m = 1.7 km
उदाहरण 10.4: Steel में ध्वनि तरंग (Fig 10.22)
ग्राफ से λ = 50 m, v = 5000 m s⁻¹
ν = v/λ = 5000/50 = 100 Hz
T = 1/ν = 1/100 = 0.01 s
10.6.4 ध्वनि की मानव-अनुभूति (Human Perception)
तारत्व (Pitch)
आवृत्ति को मानव जिस रूप में अनुभव करता है वह तारत्व (Pitch) है। उच्च आवृत्ति → उच्च तारत्व (तीखी ध्वनि जैसे सीटी)। निम्न आवृत्ति → निम्न तारत्व (गहरी ध्वनि जैसे बादल की कड़क)।
श्रव्य परास (Audible Range)
मनुष्य 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz) की आवृत्ति वाली ध्वनि सुन सकता है।
- अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic Waves): 20 Hz से कम आवृत्ति — हाथी सुन सकते हैं।
- पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves): 20 kHz से अधिक आवृत्ति — कुत्ते, बिल्लियाँ, चमगादड़, डॉल्फिन सुन सकते हैं।
प्रबलता (Loudness)
मनुष्य आयाम को प्रबलता (Loudness) के रूप में अनुभव करता है। बड़ा आयाम → तेज़ ध्वनि। दूरी बढ़ने पर प्रबलता घटती है।
प्रबलता की इकाई डेसिबल (dB) है। पत्तों की सरसराहट ≈ कुछ dB, सामान्य बातचीत ≈ 60 dB, पटाखे > 100 dB।
अनावश्यक या हानिकारक ध्वनि को शोर (Noise) कहते हैं। लम्बे समय तक तेज़ ध्वनि से श्रवण हानि हो सकती है।
तीव्रता बनाम प्रबलता
तीव्रता एक भौतिक मापयोग्य राशि है। प्रबलता श्रोता की श्रव्य क्षमता पर निर्भर करती है — यह व्यक्तिनिष्ठ (Subjective) है।
टिम्ब्रे (Timbre)
जब बाँसुरी, सितार और तबला एक ही स्वर पर समान प्रबलता में बजाएँ तो भी अलग-अलग लगते हैं — यह अंतर टिम्ब्रे है जो उनके आकार, सामग्री और संरचना से आता है।
10.7 ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)
ध्वनि तरंगें ठोस या द्रव सतहों से परावर्तित होती हैं। परावर्तन के नियम प्रकाश जैसे ही हैं — आपातन कोण = परावर्तन कोण।
10.7.1 प्रतिध्वनि (Echo)
किसी पहाड़, दीवार या लम्बे गलियारे के पास आवाज़ लगाने पर अपनी आवाज़ कुछ समय बाद वापस सुनाई देती है — यह प्रतिध्वनि (Echo) है।
प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी
दो ध्वनियों के बीच कम से कम 0.1 सेकंड का अंतर होना चाहिए तभी उन्हें अलग-अलग सुना जा सकता है।
0.1 s में ध्वनि की दूरी = 340 × 0.1 = 34 m (स्रोत → दीवार → वापस)
न्यूनतम दूरी = 34/2 = 17 m
प्रतिध्वनि कठोर, चिकनी सतहों से अधिक स्पष्ट होती है। मुलायम सतहें ध्वनि अवशोषित करती हैं।
उदाहरण 10.5
Echo 0.5 s बाद, v = 340 m s⁻¹
दीवार से दूरी = (v × t)/2 = (340 × 0.5)/2 = 85 m
10.7.2 अनुनाद/प्रतिध्वनि-वर्धन (Reverberation)
बड़े हॉल में ध्वनि दीवारों से बार-बार परावर्तित होती है। ये परावर्तित ध्वनियाँ एक-दूसरे के बाद 0.05 s से कम अंतर में आती हैं → ध्वनि स्रोत बंद होने के बाद भी ध्वनि सुनाई देती रहती है — इसे अनुनाद (Reverberation) कहते हैं।
आधुनिक सभागारों में ध्वनि-अवशोषक पैनल, मुलायम कुर्सियाँ और पर्दे अनावश्यक अनुनाद कम करते हैं। गोल गुम्बज़ (Bijapur, Karnataka) की Whispering Gallery एक उत्कृष्ट ध्वनिकी उदाहरण है।
10.8 पराश्रव्य और अवश्रव्य तरंगें तथा उनके अनुप्रयोग
अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic, < 20 Hz)
- भूकम्प और ज्वालामुखी विस्फोट का पता लगाने में।
- भीषण तूफानों को दूर से पहचानने में।
पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic, > 20 kHz)
- आंतरिक अंगों की imaging — अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography)।
- गुर्दे की पथरी तोड़ने में।
- औद्योगिक सफाई और वेल्डिंग में।
- धातु के अंदर दोष खोजने में।
- वस्तुओं की स्थिति का पता लगाने में।
10.8.1 प्रतिध्वनि-स्थानीयकरण (Echolocation)
चमगादड़ अंधेरे में अल्ट्रासोनिक तरंगें छोड़ता है → वे वस्तुओं से परावर्तित होती हैं → परावर्तित प्रतिध्वनि से वस्तु की दिशा, दूरी पता चलती है। इसे प्रतिध्वनि-स्थानीयकरण (Echolocation) कहते हैं। डॉल्फिन, व्हेल और कुछ पक्षी भी इसका उपयोग करते हैं।
सोनार (SONAR – Sound Navigation And Ranging)
पनडुब्बियों/जहाज़ों से अल्ट्रासोनिक तरंगें पानी में भेजी जाती हैं। परावर्तित तरंगों के समय से दूरी, दिशा और गति का पता चलता है।
दूरी = (v × t)/2
उदाहरण 10.6
Echo 0.90 s में लौटी, v = 1530 m s⁻¹
समय (एक तरफ) = 0.90/2 = 0.45 s
दूरी = 1530 × 0.45 = 688.5 m
Pause and Ponder – सभी प्रश्नों के उत्तर
प्र. 1 और 2: ध्वनि उत्पादन के तरीके और संगीत वाद्ययंत्र
उत्तर: ध्वनि उत्पादन के तरीके: कंपित तार, कंपित झिल्ली, कंपित वायु स्तम्भ, वस्तु को ठोकना/रगड़ना।
वाद्ययंत्र और कंपित भाग: Guitar/Sitar → तार; Tabla/Drum → झिल्ली; Flute/Bansuri → वायु स्तम्भ; Taal/Ghanta → धातु पट्टी।
प्र. 3: Assertion-Reason (Vacuum Bell Jar)
उत्तर: (ii) दोनों A और R सत्य हैं, और R, A का सही कारण है।
A सत्य: वायु निकालने पर ध्वनि नहीं सुनाई देती। R सत्य: ध्वनि को माध्यम चाहिए। R ही A का कारण है — माध्यम के बिना ध्वनि नहीं चल सकती।
प्र. 4: Assertion-Reason (संपीडन और कण गति)
उत्तर: (iii) A सत्य है, R गलत है।
A सत्य: संपीडन और विरलन माध्यम में आगे बढ़ते हैं। R गलत: माध्यम के कण तरंग के साथ आगे नहीं जाते — वे केवल माध्य स्थिति के आसपास कंपन करते हैं।
प्र. 5: ट्यूनिंग फोर्क से कान तक क्या पहुँचता है?
उत्तर: (ii) ध्वनि तरंगों द्वारा ले जाई गई ऊर्जा।
कण अपनी जगह पर कंपन करते हैं — वे कान तक नहीं जाते। ऊर्जा का स्थानांतरण होता है।
प्र. 6: C और R लेबल करना
ग्राफ में जहाँ घनत्व औसत से ऊपर है वहाँ C (Compression), जहाँ नीचे है वहाँ R (Rarefaction) लिखें।
प्र. 7: पतला रबड़ बैंड बनाम मोटा
हाँ, पतला रबड़ बैंड अधिक तेज़ कंपन करता है → उच्च आवृत्ति → कम आवर्तकाल। पतले बैंड से उत्पन्न ध्वनि की तीखापन (pitch) अधिक होती है।
प्र. 8: 20 Hz आवृत्ति → प्रति मिनट दोलन
प्रति सेकंड 20 दोलन → प्रति मिनट = 20 × 60 = 1200 दोलन
प्र. 9: Fig 10.19 में आधी तरंगदैर्ध्य
ग्राफ में 0 से 3.0 cm पर एक पूर्ण तरंगदैर्ध्य दिखती है। आधी तरंगदैर्ध्य = 3.0/2 = 1.5 cm
प्र. 10: गति का अनुपात
(i) जल/वायु = 1500/340 ≈ 4.41 (जल में लगभग 4.4 गुना तेज़)
(ii) इस्पात/जल = 5000/1500 ≈ 3.33 (इस्पात में लगभग 3.3 गुना तेज़)
प्र. 11: Gunjan और Steel Fence (340 m)
इस्पात में समय = 340/5000 = 0.068 s
वायु में समय = 340/340 = 1.0 s
अंतर = 1.0 − 0.068 = 0.932 s
0.932 s >> 0.1 s → हाँ, Gunjan दोनों ध्वनियाँ अलग-अलग सुन सकती है।
प्र. 12: Echo 0.2 s बाद, v = 343 m s⁻¹
कुल दूरी = 343 × 0.2 = 68.6 m
न्यूनतम दूरी = 68.6/2 = 34.3 m
प्र. 13: Sonar 4 s में लौटा, v = 1500 m s⁻¹
गहराई = (1500 × 4)/2 = 3000 m = 3 km
Revise, Reflect, Refine – सभी प्रश्नों के हल
प्रश्न 1: ध्वनि यांत्रिक तरंग है — कौन-सा अवलोकन सिद्ध करता है?
उत्तर: (ii) ध्वनि को संचरित होने के लिए माध्यम आवश्यक है।
यांत्रिक तरंग की परिभाषा ही है — माध्यम आवश्यक। Vacuum bell jar प्रयोग इसे सिद्ध करता है।
प्रश्न 2: आवृत्ति बढ़ाने पर क्या बढ़ेगा?
उत्तर: (iii) प्रति सेकंड संपीडनों की संख्या बढ़ेगी।
v = λν; एक माध्यम में v स्थिर → ν बढ़ने पर λ घटेगा। आवर्तकाल T = 1/ν → घटेगा। गति नहीं बदलेगी। संपीडन प्रति सेकंड = आवृत्ति → बढ़ेगी।
प्रश्न 3: 20 संपीडन 4 सेकंड में
ν = 20/4 = 5 Hz → उत्तर (ii)
प्रश्न 4: परावर्तित ध्वनि 0.05 s बाद → Echo या Reverberation?
Echo के लिए न्यूनतम 0.1 s चाहिए। 0.05 s < 0.1 s → Echo नहीं।
Reverberation तब होता है जब परावर्तन 0.05 s से कम अंतर पर आएँ। यहाँ 0.05 s ठीक सीमा पर है।
उत्तर: Reverberation (प्रतिध्वनि-वर्धन) — क्योंकि 0.1 s से कम अंतर होने के कारण मस्तिष्क दोनों ध्वनियाँ अलग नहीं सुन सकता। ध्वनि मिश्रित लगेगी।
प्रश्न 5: Fig 10.30 — दो तरंगों की तुलना
(i) अधिक तरंगदैर्ध्य: (a) — ग्राफ में कम तरंगें हैं, यानी एक चक्र अधिक लम्बाई लेता है।
(ii) छोटा आयाम: (b) — ग्राफ (b) में शिखर-गर्त की ऊँचाई कम है।
प्रश्न 6: Fig 10.31 — A (अधिकतम आवृत्ति), B (मध्यम), C (न्यूनतम)
अधिक आवृत्ति = कम तरंगदैर्ध्य = ग्राफ में अधिक तरंगें।
A = सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य (सबसे अधिक तरंगें वाली वक्र)
B = मध्यम तरंगदैर्ध्य
C = सबसे बड़ी तरंगदैर्ध्य (सबसे कम तरंगें वाली वक्र)
प्रश्न 7: ग्राफ — आयाम 3 इकाई, तरंगदैर्ध्य 4 cm
X-अक्ष पर दूरी (cm), Y-अक्ष पर घनत्व। औसत घनत्व पर बिंदुरेखा। 0 से 4 cm तक एक पूर्ण तरंग (1 शिखर + 1 गर्त)। शिखर +3 इकाई, गर्त −3 इकाई पर।
प्रश्न 8: अंतरिक्ष में यान विस्फोट — फिल्म में क्या गलत?
त्रुटि 1: अंतरिक्ष में निर्वात है → ध्वनि नहीं चलती। विस्फोट की ध्वनि सुनाई नहीं देनी चाहिए।
त्रुटि 2: प्रकाश और ध्वनि एक साथ दिखाना गलत है। प्रकाश बहुत तेज़ है (3×10⁸ m s⁻¹) लेकिन ध्वनि वैसे भी वहाँ आ ही नहीं सकती।
प्रश्न 9: λ = 3.44 m, v = 344 m s⁻¹
ν = v/λ = 344/3.44 = 100 Hz
T = 1/ν = 1/100 = 0.01 s
प्रश्न 10: Sonar Echo 5 s बाद, v = 1525 m s⁻¹
गहराई = (v × t)/2 = (1525 × 5)/2 = 7625/2 = 3812.5 m ≈ 3813 m
प्रश्न 11: वाहन पार्किंग सेंसर, दूरी = 1.2 m, v = 345 m s⁻¹
कुल दूरी = 2 × 1.2 = 2.4 m
समय = 2.4/345 = 0.00696 s ≈ 6.96 × 10⁻³ s ≈ 7 ms
प्रश्न 12: 1720 m दूरी, 22°C → 0°C
22°C पर: t₁ = 1720/344 = 5.0 s
0°C पर: t₂ = 1720/331 = 5.196 s
अतिरिक्त समय = 5.196 − 5.0 = ≈ 0.2 s
प्रश्न 13: Fig 10.32 — λ = 8 cm, v = 340 m s⁻¹
λ = 8 cm = 0.08 m
ν = v/λ = 340/0.08 = 4250 Hz
प्रश्न 14: Fig 10.33 — दो तरंगें A और B, v = 345 m s⁻¹
ग्राफ में 0 से 5.0 cm तक की दूरी:
तरंग A: 5 cm में 2 चक्र → λ_A = 5.0/2 = 2.5 cm = 0.025 m
तरंग B: 5 cm में 1 चक्र → λ_B = 5.0 cm = 0.05 m
ν_A = 345/0.025 = 13800 Hz
ν_B = 345/0.05 = 6900 Hz
प्रश्न 15: ध्वनि A (हवा में), B (पानी में) — t_A = 4.5 × t_B
दोनों समान दूरी d तय करते हैं (स्रोत → चट्टान → वापस)।
t_A = 2d/v_air, t_B = 2d/v_water
t_A = 4.5 × t_B → 2d/v_air = 4.5 × 2d/v_water
1/v_air = 4.5/v_water → v_water = 4.5 × v_air
v_air : v_water = 1 : 4.5 = 2 : 9
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र. ध्वनि और प्रकाश में मूल अंतर क्या है?
ध्वनि: अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग, माध्यम आवश्यक, 340 m/s (वायु में)। प्रकाश: अनुप्रस्थ विद्युतचुम्बकीय तरंग, माध्यम की आवश्यकता नहीं, 3×10⁸ m/s।
प्र. ध्वनि ठोस में सबसे तेज़ क्यों चलती है?
ठोस में कण अत्यंत निकट और मजबूती से बंधे होते हैं → एक कण का कंपन तुरंत अगले कण को मिलता है → संचरण तेज़। गैस में कण दूर और ढीले → संचरण धीमा।
प्र. Echo और Reverberation में क्या फर्क है?
Echo: परावर्तित ध्वनि 0.1 s या अधिक बाद आती है → अलग से सुनाई देती है। Reverberation: परावर्तित ध्वनि 0.05 s से कम अंतर पर → मूल ध्वनि में मिल जाती है, ध्वनि लम्बी सुनाई देती है।
प्र. चमगादड़ अंधेरे में कैसे देखता है?
चमगादड़ अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्सर्जित करता है → वे वस्तुओं से परावर्तित होती हैं → परावर्तित तरंगों से वस्तु की दिशा, दूरी पता चलती है। इसे Echolocation कहते हैं।
प्र. v = λν सूत्र कैसे प्राप्त होता है?
एक आवर्तकाल T में तरंग एक तरंगदैर्ध्य λ की दूरी तय करती है। v = λ/T। चूँकि ν = 1/T → v = λν।
प्र. SONAR का फुल फॉर्म क्या है?
Sound Navigation And Ranging — पानी के अंदर वस्तुओं की दूरी, दिशा और गति मापने की तकनीक।
प्र. अल्ट्रासाउंड से पथरी कैसे टूटती है?
उच्च आवृत्ति और तीव्र पराश्रव्य तरंगें गुर्दे की पथरी पर केंद्रित की जाती हैं → पथरी कंपन से छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती है → टुकड़े मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाते हैं।
प्र. Lightning पहले दिखती है, Thunder बाद में क्यों?
प्रकाश की गति = 3×10⁸ m/s (लगभग तुरंत पहुँचती है)। ध्वनि की गति = 340 m/s (बहुत धीमी)। इसलिए पहले बिजली दिखती है, बाद में गड़गड़ाहट सुनाई देती है।
प्र. Decibel (dB) क्या है?
ध्वनि की प्रबलता मापने की इकाई। पत्तों की सरसराहट ≈ 10 dB, फुसफुसाहट ≈ 30 dB, बातचीत ≈ 60 dB, पटाखे > 100 dB। 85 dB से अधिक लम्बे समय तक सुनने पर श्रवण हानि का खतरा।
प्र. C.V. Raman का ध्वनिकी में क्या योगदान था?
सर C.V. Raman ने तबला और मृदंगम जैसे भारतीय ताल वाद्यों का अध्ययन किया। उन्होंने समझाया कि तबले के केंद्र पर स्याही (Syaahi) का लेप झिल्ली के कंपन को बदलकर समृद्ध और विविध ध्वनि उत्पन्न करता है।
प्र. मानव कान कैसे काम करता है?
ध्वनि तरंगें कान में प्रवेश करती हैं → कर्णपटह (Eardrum) कंपित होता है → छोटी हड्डियाँ कंपन को बढ़ाती हैं → कोक्लिया (Cochlea) इन्हें विद्युत संकेतों में बदलता है → मस्तिष्क इन्हें ध्वनि के रूप में पहचानता है। दो कान होने से ध्वनि की दिशा का पता चलता है।
अध्याय सारांश (At a Glance)
- ध्वनि कंपन से उत्पन्न होती है; कंपन बंद → ध्वनि बंद।
- ध्वनि एक अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग है; माध्यम आवश्यक; निर्वात में नहीं चलती।
- ध्वनि ठोस, द्रव और गैस में चलती है; सबसे तेज़ ठोस में।
- तरंग में ऊर्जा स्थानांतरित होती है, माध्यम के कण नहीं।
- λ = तरंगदैर्ध्य (m); ν = आवृत्ति (Hz); T = आवर्तकाल (s); ν = 1/T।
- v = λν; गति = तरंगदैर्ध्य × आवृत्ति।
- आयाम → प्रबलता; आवृत्ति → तारत्व।
- मानव श्रव्य परास: 20 Hz – 20 kHz।
- <20 Hz = अवश्रव्य; >20 kHz = पराश्रव्य।
- Echo: 0.1 s बाद परावर्तन; Reverberation: 0.05 s से कम।
- Echo के लिए न्यूनतम दूरी = 17 m।
- SONAR: दूरी = (v × t)/2।
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