पदार्थ शुद्ध हैं (Is Matter Around Us Pure) — Class 9 Chapter 2 Complete Notes

NCERT Class 9 Science Chapter 2 "Is Matter Around Us Pure" ke complete Hindi notes — विलयन, निलंबन, कोलॉइड, टिंडल प्रभाव, तत्व-यौगिक-मिश्रण का वर्गीकरण, पृथक्करण की विधियाँ (आसवन, ऊर्ध्वपातन, क्रोमैटोग्राफी आदि), साथ ही in-text व अध्याय-अंत के सभी 11 exercise questions हल सहित।

Jul 18, 2026 - 18:32
Updated: 8 hours ago
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बीकर में नीला कोलॉइडी घोल है, जिसमें से रोशनी की किरण गुज़रते हुए बिखर (scatter) रही है — यह टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) दिखाता है। चारों ओर छोटे-छोटे अणु (molecule) जैसे कण (particles) तैरते हुए दिखाए गए हैं। ऊपर "Class 9 • Chapter 2" और नीचे अध्याय का शीर्षक "हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं" लिखा है, जो पूरे नोट्स की रंग-योजना (नेवी ब्लू, लाल, क्रीम) से मेल खाता है।

Chapter — 2

Is Matter Around Us Pure

(हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं)

NCERT Class 9th | Complete & Corrected Notes

0. पदार्थ का वर्गीकरण (Classification of Matter)

पदार्थ (ठोस, द्रव या गैस) शुद्ध पदार्थ मिश्रण (कोई नियत संघटन नहीं) तत्व यौगिक समांगी विषमांगी
तत्व यौगिक समांगी विषमांगी
परिभाषा — सरल पदार्थों में विभक्त नहीं किए जा सकते। परिभाषा — नियत संघटन; रासायनिक या वैद्युत रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा घटक तत्वों में विघटित किया जा सकता है। परिभाषा — समान संघटन (कोई दिखाई देने योग्य सीमा-रेखा नहीं)। परिभाषा — असमान संघटन (घटक अलग-अलग दिखाई देते हैं)।
उदा. — कॉपर, ऑक्सीजन, लोहा, हाइड्रोजन, पारा आदि। उदा. — जल, मीथेन, चीनी, नमक आदि। उदा. — जल में चीनी, जल में नमक, कार्बन डाइसल्फ़ाइड में सल्फ़र, जल तथा ऐल्कोहॉल आदि। उदा. — बालू तथा नमक, चीनी तथा नमक, लकड़ी, तेल में जल आदि।

यौगिक का संघटन पूरे पदार्थ में समान होता है, तथा यौगिक में मिले हुए तत्वों से गुण पूरी तरह भिन्न होते हैं।

# तत्व की परिभाषा (Definition of Element)

तत्व — वह शुद्ध पदार्थ, जिसे किसी भी रासायनिक अथवा वैद्युत रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा उससे सरल दो या दो से अधिक पदार्थों में विभाजित (तोड़ा) नहीं किया जा सकता, तत्व कहलाता है।
जैसे — कॉपर, ऑक्सीजन, लोहा, हाइड्रोजन, पारा आदि।

# यौगिक की परिभाषा (Definition of Compound)

यौगिक — दो या दो से अधिक तत्वों के एक नियत अनुपात (fixed ratio) में रासायनिक रूप से संयोजन से बना पदार्थ, जिसका गुण मिले हुए तत्वों से पूरी तरह भिन्न होता है तथा जिसे केवल रासायनिक या वैद्युत रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा ही अपने घटक तत्वों में तोड़ा जा सकता है, यौगिक कहलाता है।
जैसे — जल (H₂O), मीथेन (CH₄), चीनी, नमक (NaCl) आदि।

# समांगी मिश्रण की परिभाषा (Definition of Homogeneous Mixture)

समांगी मिश्रण — वह मिश्रण, जिसका संघटन तथा गुण पूरे मिश्रण में एक-समान (uniform) होते हैं, अर्थात जिसमें विभिन्न घटकों के बीच कोई दिखाई देने योग्य सीमा-रेखा (boundary of separation) नहीं होती, समांगी मिश्रण कहलाता है।
जैसे — जल में चीनी, जल में नमक, कार्बन डाइसल्फ़ाइड में सल्फ़र, जल तथा ऐल्कोहॉल आदि।

# विषमांगी मिश्रण की परिभाषा (Definition of Heterogeneous Mixture)

विषमांगी मिश्रण — वह मिश्रण, जिसका संघटन तथा गुण मिश्रण के विभिन्न भागों में असमान (non-uniform) होते हैं, अर्थात जिसमें घटक अलग-अलग दिखाई देते हैं और उनके बीच स्पष्ट सीमा-रेखा होती है, विषमांगी मिश्रण कहलाता है।
जैसे — बालू तथा नमक, चीनी तथा नमक, लकड़ी, तेल में जल आदि।

# मिश्रण की परिभाषा (Definition of Mixture)

मिश्रण — दो या दो से अधिक तत्वों अथवा यौगिकों को किसी भी अनुपात में मिलाने पर बना पदार्थ, जिसमें प्रत्येक घटक अपने मौलिक भौतिक व रासायनिक गुणों को बनाए रखता है तथा जिसके घटकों को भौतिक विधियों द्वारा सुगमता से पृथक् किया जा सकता है, मिश्रण कहलाता है। मिश्रण का कोई नियत संघटन नहीं होता।
जैसे — वायु (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि गैसों का मिश्रण), मिट्टी, चीनी का घोल, समुद्री जल आदि।

मिश्रण दो प्रकार के होते हैं — समांगी मिश्रण (जैसे विलयन) और विषमांगी मिश्रण (जैसे निलंबन)।

1. विलयन (Solution)

विलयन (Solution)

      
विलायक (Solvent)
विलेय (Solute)

# विलयन क्या है? परिभाषा लिखिए।

विलयन — दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी (homogeneous) मिश्रण विलयन कहलाता है।
जैसे — नींबू जल, सोडा जल, चीनी का घोल आदि।

विलयन दो भागों से मिलकर बना होता है —

  1. विलायक (Solvent)
  2. विलेय (Solute)
विलायक (Solvent) विलेय (Solute)
विलयन का वह घटक जिसकी मात्रा दूसरे घटक से अधिक होती है, जो दूसरे घटक को अपने अंदर घोलता (मिलाता) है, विलायक कहलाता है।
उदाहरण — जल, एल्कोहॉल आदि।
विलयन का वह घटक जो प्रायः कम मात्रा में होता है और विलायक में घुला रहता है, विलेय कहलाता है।
उदाहरण — नमक, चीनी आदि।
ध्यान दें (Correction): मूल नोट्स में विलेय की परिभाषा में "जो विलायक में घुला होता है" स्पष्ट किया गया है — यह सही है, बस भाषा को स्पष्ट किया गया है।

# मिश्र धातुएँ (Alloys)

मिश्र धातुएँ धातुओं के समांगी मिश्रण होते हैं, जिन्हें भौतिक क्रिया द्वारा अवयवों में पृथक् नहीं किया जा सकता, लेकिन फिर भी इन्हें मिश्रण माना जाता है क्योंकि ये अपने घटकों के गुणों को दर्शाती हैं और पृथक्-पृथक् संघटन रखती हैं।
उदाहरण — पीतल (Brass): जिंक (लगभग 30%) और कॉपर (लगभग 70%) का मिश्रण।

# विलयन के गुण

  1. विलयन एक समांगी मिश्रण है।
  2. विलयन के कण व्यास में 1 nm (10⁻⁹ मीटर) से भी छोटे होते हैं। इसीलिए वे आँख से नहीं देखे जा सकते।
  3. अपने छोटे आकार के कारण विलयन के कण, गुजर रही प्रकाश की किरण को फैलाते नहीं हैं; इसलिए विलयन में प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता (अर्थात यह टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाता)।
  4. छानने की विधि (Filtration) द्वारा विलेय के कणों को विलयन में से पृथक् नहीं किया जा सकता।
  5. विलयन को शांत छोड़ देने पर भी विलेय के कण नीचे नहीं बैठते, अर्थात विलयन स्थाई (Stable) है।

# विलयन की सांद्रता किसे कहते हैं?

विलायक की मात्रा (द्रव्यमान अथवा आयतन) में घुले हुए विलेय पदार्थ की मात्रा को विलयन की सांद्रता कहते हैं।

★ विलयन की सांद्रता को दर्शाने की बहुत सी विधियाँ हैं —

(i) द्रव्यमान / विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत = (विलेय पदार्थ का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
(ii) द्रव्यमान / विलयन के आयतन प्रतिशत = (विलेय पदार्थ का द्रव्यमान ÷ विलयन का आयतन) × 100
(iii) विलयन के आयतन / प्रतिशत आयतन = (विलेय का आयतन ÷ विलयन का आयतन) × 100

हल किया हुआ उदाहरण (Solved Example)

प्रश्न: एक विलयन के 320 g विलायक जल में 40 g साधारण नमक विलेय है। विलयन की सांद्रता (द्रव्यमान प्रतिशत) का परिकलन करें।
हल — विलेय पदार्थ (नमक) का द्रव्यमान = 40 g
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 320 g
हम जानते हैं, विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान
= 40 g + 320 g = 360 g

विलयन की सांद्रता (द्रव्यमान %) = (विलेय पदार्थ का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
= (40 ÷ 360) × 100 = 11.1 %

# विलयन की क्षमता (Solubility)

किसी निश्चित तापमान पर उतना ही विलेय पदार्थ घुल सकता है, जितनी विलयन की क्षमता होती है।

# संतृप्त विलयन और असंतृप्त विलयन में अंतर

संतृप्त विलयन (Saturated) असंतृप्त विलयन (Unsaturated)
निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ और नहीं घुलता है, तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं। यदि एक विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्तता से कम है, तो इसे असंतृप्त विलयन कहा जाता है।

# घुलनशील पदार्थ किसे कहते हैं?

विलेय पदार्थ की वह मात्रा, जो किसी निश्चित ताप पर संतृप्त विलयन में उपस्थित है, उसकी घुलनशीलता (Solubility) कहलाती है।

2. निलंबन (Suspension)

निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है, जिसमें ठोस पदार्थ के कण किसी द्रव (या गैस) में घुलते नहीं बल्कि पूरे माध्यम में परिक्षेपित (dispersed) रहते हैं। इसके कणों का आकार इतना बड़ा (>100 nm) होता है कि वे नंगी आँखों से दिखाई देते हैं।
जैसे — मिट्टी मिला जल, चूने का जल, आटे का घोल आदि।

# निलंबन के गुणधर्म

  • यह एक विषमांगी मिश्रण है।
  • इसके कण आँखों से देखे जा सकते हैं।
  • ये निलंबित कण प्रकाश की किरण को फैला देते हैं, जिससे उसका मार्ग दृष्टिगोचर हो जाता है (टिंडल प्रभाव दिखाता है)।
  • जब इसे शांत छोड़ दिया जाता है, तब ये कण नीचे की ओर बैठ जाते हैं, अर्थात निलंबन अस्थायी होता है।
  • छानने (Filtration) की विधि द्वारा इन कणों को मिश्रण से पृथक् किया जा सकता है।

3. कोलाइडी विलयन (Colloidal Solution)

कोलॉइड (कोलाइडी विलयन) एक ऐसा विषमांगी मिश्रण है, जिसमें एक पदार्थ के अत्यंत सूक्ष्म कण (जिनका आकार 1 nm से 100 nm के बीच होता है) दूसरे पदार्थ (माध्यम) में समान रूप से परिक्षेपित (dispersed) रहते हैं। निलंबन की अपेक्षा कणों का आकार बहुत छोटा होने के कारण यह मिश्रण देखने में समांगी प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में यह एक विषमांगी मिश्रण है।
जैसे — दूध, स्याही, कोहरा, साबुन का घोल। (कोलॉइड को उसके अवयवों में पृथक् करने के लिए अपकेंद्रन विधि (Centrifugation) प्रयोग होती है।)

# कोलाइडी विलयन के गुणधर्म

  • यह एक विषमांगी मिश्रण है।
  • कोलॉइड के कणों का आकार इतना छोटा होता है कि ये पृथक् रूप में आँखों से नहीं देखे जा सकते।
  • ये इतने बड़े होते हैं कि प्रकाश की किरण को फैलाते हैं तथा उसके मार्ग को दृश्य बनाते हैं (टिंडल प्रभाव)।
  • जब इनको शांत छोड़ दिया जाता है, तब ये कण तल पर नहीं बैठते, अर्थात ये स्थायी होते हैं।
  • ये सामान्य छानन विधि द्वारा मिश्रण से पृथक् नहीं किए जा सकते, किंतु एक विशेष विधि — अपकेंद्रीकरण तकनीक (Centrifugation) — द्वारा पृथक् किए जा सकते हैं।

# टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect)

जब प्रकाश की किरण किसी कोलॉइडी विलयन (या निलंबन) से होकर गुजरती है, तो उसमें उपस्थित बड़े आकार के कण उस प्रकाश को अवशोषित कर सभी दिशाओं में प्रकीर्णित (scatter) कर देते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग (पथ) चमकता हुआ स्पष्ट दिखाई देने लगता है। प्रकाश के इस प्रकीर्णन (प्रकाश-मार्ग के दृश्य होने) को टिंडल प्रभाव कहते हैं। सत्य विलयन (true solution) के कण इतने छोटे होते हैं कि वे प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं कर पाते, इसलिए उसमें टिंडल प्रभाव नहीं दिखाई देता।

★ इस प्रभाव की खोज वैज्ञानिक जॉन टिंडल (John Tyndall) ने सन् 1869 में की थी, इसीलिए इसे टिंडल प्रभाव कहा जाता है।

1. सत्य विलयन (नमक/चीनी का घोल) ✗ प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता (कण बहुत छोटे — प्रकीर्णन नहीं होता) 2. कोलॉइड / निलंबन (दूध, मिट्टी-जल) ✓ प्रकाश का मार्ग चमकता हुआ स्पष्ट दिखता है (बड़े कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं — टिंडल प्रभाव)
दैनिक जीवन में टिंडल प्रभाव के उदाहरण —
1. जब घने जंगल की छतरी (canopy) से होकर सूर्य की किरण गुजरती है, तो कोहरे/धुंध के सूक्ष्म जल-कणों (जो कोलॉइड कणों की तरह व्यवहार करते हैं) से टकराकर प्रकाश का मार्ग स्पष्ट दिखाई देता है।
2. किसी अँधेरे कमरे में छोटे छिद्र से आती प्रकाश किरण, हवा में मौजूद धूल व कार्बन के महीन कणों से टकराकर अपना मार्ग दृश्यमान बना देती है।

# विलयन, निलंबन एवं कोलॉइड में तुलना

गुण विलयन निलंबन कोलॉइड
प्रकृति समांगी विषमांगी विषमांगी (दिखने में समांगी)
कणों का आकार < 1 nm > 100 nm (दृश्य) 1 nm – 100 nm
टिंडल प्रभाव नहीं हाँ हाँ
स्थायित्व स्थायी अस्थायी स्थायी
पृथक्करण विधि पृथक् नहीं किया जा सकता फिल्टरीकरण अपकेंद्रन विधि

4. शुद्ध पदार्थ — तत्व के प्रकार (Types of Elements)

(शुद्ध पदार्थ, तत्व व यौगिक की परिभाषा तथा आरेख ऊपर अनुभाग "0. पदार्थ का वर्गीकरण" में दिए जा चुके हैं। यहाँ तत्व के तीन उप-प्रकारों — धातु, अधातु, उपधातु — की जानकारी दी गई है।)

  • तत्व शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग रॉबर्ट बॉयल ने सन् 1661 में किया।
  • तत्व की आधुनिक परिभाषा सर्वप्रथम एंटोनी लॉरेंट लवाइजिए (सन् 1743–1794) ने दी।
तत्व (Element)

     
धातु (Metal)
अधातु (Non-metal)
उपधातु (Metalloid)
धातु (Metal) अधातु (Non-metal) उपधातु (Metalloid)
वे सभी तत्व जो जल के साथ अभिक्रिया करने पर क्षारक (base) बनाते हैं, धातुएँ कहलाती हैं।
जैसे — लोहा, सोडियम आदि।
वे तत्व जो जल के साथ अभिक्रिया करने पर अम्ल (acid) देते हैं, अधातु कहलाते हैं।
जैसे — कार्बन, सल्फर आदि।
वे तत्व जो रासायनिक अभिक्रिया के दौरान आवश्यकतानुसार धातु और अधातु दोनों में से किसी के भी गुण प्रदर्शित करते हैं, उपधातु कहलाते हैं।
जैसे — बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम आदि।
ध्यान दें (Correction): मूल नोट्स में "जलायन देते हैं" लिखा था — इसे स्पष्ट कर "क्षारक (base) बनाते हैं" किया गया है, जो कि NCERT की सही परिभाषा है।

# धातुओं के गुणधर्म

  • ये चमकीली होती हैं (धात्विक चमक)।
  • ये ताप तथा बिजली की सुचालक होती हैं।
  • ये प्रतिध्वनिपूर्ण (Sonorous) होती हैं।
  • ये चाँदी जैसी सफेद या सोने की तरह पीले रंग की होती हैं।
  • ये तन्य (Ductile) होती हैं और इन्हें तार के रूप में खींचा जा सकता है।
  • ये आघातवर्ध्य (Malleable) होती हैं। इन्हें पीटकर महीन चादरों में ढाला जा सकता है।

# अधातुओं के गुण

  • ये विभिन्न रंगों की होती हैं।
  • ये चमकीली नहीं होती हैं।
  • ये प्रतिध्वनिपूर्ण नहीं होती हैं।
  • ये आघातवर्ध्य नहीं होती हैं।
  • ये ताप और विद्युत की कुचालक होती हैं।

# मिश्रण एवं यौगिक में अंतर

क्र.सं. मिश्रण (Mixture) यौगिक (Compound)
1. तत्व या यौगिक केवल मिश्रण बनाने के लिए मिलते हैं, किंतु किसी नए यौगिक का निर्माण नहीं करते। तत्व क्रिया करके नए यौगिक का निर्माण करते हैं।
2. मिश्रण का संघटन परिवर्तनीय होता है। नए पदार्थ का संघटन सदैव स्थायी होता है।
3. मिश्रण उसमें उपस्थित घटकों के गुणधर्मों को दर्शाता है। नए पदार्थ के गुणधर्म पूरी तरह से भिन्न होते हैं।
4. घटकों को भौतिक विधियों द्वारा सुगमता से पृथक् किया जा सकता है। घटकों को केवल रासायनिक या वैद्युत रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा ही पृथक् किया जा सकता है।

5. भौतिक और रासायनिक परिवर्तन (अतिरिक्त टॉपिक — Missing Topic Added)

# भौतिक परिवर्तन (Physical Change)

वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के केवल भौतिक गुण (आकार, अवस्था, रंग आदि) बदलते हैं, लेकिन कोई नया पदार्थ नहीं बनता तथा पदार्थ की रासायनिक संरचना अपरिवर्तित रहती है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है।
जैसे — बर्फ का पिघलना, जल का वाष्प बनना, कागज़ को फाड़ना, मोम का पिघलना।

# रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)

वह परिवर्तन जिसमें एक या एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं और यह परिवर्तन स्थायी तथा अधिकतर अनुत्क्रमणीय (irreversible) होता है, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।
जैसे — लोहे में जंग लगना, दूध का दही बनना, लकड़ी का जलना, भोजन का पचना।
भौतिक परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन
कोई नया पदार्थ नहीं बनता। नए पदार्थ का निर्माण होता है।
प्रायः उत्क्रमणीय (reversible) होता है। प्रायः अनुत्क्रमणीय (irreversible) होता है।
रासायनिक संघटन अपरिवर्तित रहता है। रासायनिक संघटन बदल जाता है।
ऊर्जा परिवर्तन प्रायः कम होता है। ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन अधिक होता है।

6. मिश्रणों के अवयवों को पृथक् करने की विधियाँ (अतिरिक्त टॉपिक)

मिश्रण के अवयव अपने भौतिक और रासायनिक गुणों को बनाए रखते हैं, इसलिए इन्हें भौतिक विधियों द्वारा पृथक् किया जा सकता है। मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं —

1. वाष्पीकरण (Evaporation)

द्रव को उसकी क्वथनांक तक गर्म करके वाष्प में बदलने की प्रक्रिया। इसका उपयोग किसी विलयन से वाष्पशील विलायक को अलग कर विलेय (ठोस) प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
जैसे — समुद्री जल से नमक प्राप्त करना।

2. आसवन (Distillation)

इस विधि में द्रव को गर्म कर वाष्प में बदला जाता है और फिर उस वाष्प को ठंडा करके पुनः द्रव में संघनित किया जाता है। इसका प्रयोग तब होता है जब विलायक को विलेय से अलग करके पुनः प्राप्त करना हो (जैसे सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक् करना)।

3. प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)

जब मिश्रण में दो या दो से अधिक मिश्रणीय द्रव हों जिनके क्वथनांक के बीच अंतर 25 K से कम हो, तो उन्हें पृथक् करने के लिए प्रभाजी स्तम्भ (fractionating column) की सहायता से आसवन किया जाता है।
जैसे — पेट्रोलियम उत्पादों का पृथक्करण, वायु के घटक गैसों को पृथक् करना।

4. ऊर्ध्वपातन (Sublimation)

वह प्रक्रिया जिसमें ठोस पदार्थ गर्म करने पर सीधे गैस में तथा ठंडा करने पर सीधे वापस ठोस में बदल जाता है (द्रव अवस्था में गए बिना)। इसका उपयोग ऊर्ध्वपातज पदार्थ को अऊर्ध्वपातज अशुद्धि से पृथक् करने में किया जाता है।
जैसे — अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड व अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करना; कपूर, नैफ्थलीन, आयोडीन को शुद्ध करना।

5. क्रिस्टलीकरण (Crystallization)

इस विधि में विलयन को गर्म करके सांद्रित किया जाता है और फिर ठंडा करने पर विलेय शुद्ध क्रिस्टल के रूप में पृथक् हो जाता है। यह वाष्पीकरण से बेहतर है क्योंकि इससे अत्यधिक शुद्ध पदार्थ प्राप्त होता है और ऊष्मा-संवेदनशील (heat-sensitive) पदार्थ भी विघटित होने से बच जाते हैं।
जैसे — अशुद्ध नमूने से शुद्ध फिटकरी (Alum) प्राप्त करना।

6. अपकेंद्रण (Centrifugation)

जब ठोस कण इतने महीन हों कि साधारण छानने की विधि से पृथक् न हो सकें, तो मिश्रण को तेज़ गति से घुमाया जाता है जिससे भारी कण नीचे और हल्के कण ऊपर आ जाते हैं।
जैसे — दूध से क्रीम अलग करना, कोलॉइडी कणों को पृथक् करना, मूत्र परीक्षण प्रयोगशालाओं में।

7. पृथक्कारी कीप विधि (Separating Funnel)

इसका प्रयोग दो अमिश्रणीय (immiscible) द्रवों को पृथक् करने में किया जाता है, जो घनत्व में भिन्न होने के कारण परतों में अलग हो जाते हैं।
जैसे — तेल और जल को पृथक् करना।

8. वर्णलेखन / क्रोमैटोग्राफी (Chromatography)

यह वह विधि है जिसमें किसी मिश्रण के उन घटकों को पृथक् किया जाता है जो एक ही विलायक में घुले हों (जैसे रंजक पदार्थ)। यह घटकों के विलायक में अलग-अलग घुलनशीलता पर आधारित है।
जैसे — स्याही के रंजकों को पृथक् करना, पुष्प की पंखुड़ियों के प्राकृतिक रंगों को पृथक् करना, रक्त से यूरिया को पृथक् करना।

9. निस्यंदन / फिल्टरीकरण (Filtration)

अघुलनशील ठोस कणों को द्रव से पृथक् करने की विधि, जिसमें छन्ने (filter) का प्रयोग किया जाता है।
जैसे — पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कणों को पृथक् करना।

10. चुम्बकीय पृथक्करण (Magnetic Separation)

जब मिश्रण के किसी घटक में चुम्बकीय गुण हों, तो चुम्बक की सहायता से उसे शेष मिश्रण से पृथक् किया जाता है।
जैसे — भूसे में से लोहे की पिनों को पृथक् करना।

11. फटकन विधि (Winnowing)

भारी और हल्के कणों को हवा की सहायता से पृथक् करने की विधि, जिसका प्रयोग किसान अनाज को भूसे से अलग करने में करते हैं।
जैसे — भूसे से गेहूँ के दानों को पृथक् करना।

★ पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न (In-text Questions)

ये प्रश्न अध्याय के अंदर, हर विषय के तुरंत बाद (पेज 15 व पेज 18 पर) दिए गए हैं — यह अध्याय के अंत वाले "अभ्यास" से अलग हैं।

पेज 15 के प्रश्न

प्र. 1. पदार्थ (Substance) से क्या तात्पर्य है?
उ. — वह पदार्थ जो केवल एक ही प्रकार के कणों से बना हो, अर्थात जिसके सभी अवयवी कणों की रासायनिक प्रकृति समान हो, शुद्ध पदार्थ (Substance) कहलाता है। इसे तत्व अथवा यौगिक में वर्गीकृत किया जा सकता है। जैसे — जल, सोना, चीनी आदि।
प्र. 2. समांगी तथा विषमांगी मिश्रणों में अंतर के बिंदु लिखिए।
उ. — समांगी मिश्रण: संघटन तथा गुण पूरे मिश्रण में एक-समान होते हैं; इसमें कोई दिखाई देने योग्य सीमा-रेखा नहीं होती। जैसे — नमक का जल में घोल।
विषमांगी मिश्रण: संघटन तथा गुण मिश्रण में असमान होते हैं; इसके अवयव अलग-अलग दिखाई देते हैं और उनके बीच स्पष्ट सीमा-रेखा होती है। जैसे — बालू और जल।

पेज 18 के प्रश्न

प्र. 3. उदाहरण देते हुए समांगी तथा विषमांगी मिश्रणों में विभेद कीजिए।
उ. — समांगी मिश्रण की बनावट पूरे मिश्रण में एक-जैसी रहती है (जैसे — नमक का जल में विलयन, वायु), जबकि विषमांगी मिश्रण के विभिन्न भागों की बनावट अलग-अलग होती है और उसमें भिन्न-भिन्न अवयव नज़र आते हैं (जैसे — बालू व लोहे के बुरादे का मिश्रण, तेल व जल)।
प्र. 4. सॉल (Sol), विलयन (Solution) तथा निलंबन (Suspension) एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उ. — विलयन के कण 1 nm से भी छोटे होते हैं, यह स्थायी होता है और टिंडल प्रभाव नहीं दिखाता।
सॉल (एक प्रकार का कोलॉइड, जिसमें ठोस कण द्रव माध्यम में परिक्षेपित रहते हैं) के कण 1 nm–100 nm के बीच होते हैं, यह स्थायी होता है और टिंडल प्रभाव दिखाता है।
निलंबन के कण 100 nm से बड़े (आँखों से दृश्य) होते हैं, यह अस्थायी होता है, कण नीचे बैठ जाते हैं और यह भी टिंडल प्रभाव दिखाता है।
प्र. 5. एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए 100 g जल में 293 K पर 36 g सोडियम क्लोराइड घोला गया। इस ताप पर विलयन की सांद्रता ज्ञात कीजिए।
उ. — विलेय (NaCl) का द्रव्यमान = 36 g; विलायक (जल) का द्रव्यमान = 100 g
विलयन का द्रव्यमान = 36 + 100 = 136 g
सांद्रता (द्रव्यमान %) = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100 = (36 ÷ 136) × 100 = 26.47%

★ अध्याय-अंत अभ्यास (Exercise) — 11 प्रश्न

प्र. 1. निम्नलिखित को पृथक् करने के लिए आप किन विधियों को अपनाएँगे?
(a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से — वाष्पीकरण / आसवन (Evaporation / Distillation)
(b) अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड व अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से — ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
(c) दही से मक्खन निकालने में — अपकेंद्रन (Centrifugation)
(d) धातु के छोटे टुकड़ों को कार के इंजन ऑयल से — छानन (Filtration)
(e) पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजकों को — क्रोमैटोग्राफी (Chromatography)
(f) चाय से चाय की पत्तियों को — छानन (Filtration)
(g) बालू को लोहे की पिनों से — चुम्बकीय पृथक्करण (Magnetic separation)
(h) भूसे से गेहूँ के दानों को — फटकन विधि (Winnowing)
(i) पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कणों को पानी से — छानन (Filtration)
(j) जल से तेल — पृथक्कारी कीप विधि (Separating funnel)
प्र. 2. चाय तैयार करने के लिए आप किन-किन चरणों का प्रयोग करेंगे? विलायक, विलेय, घुलना, घुलनशील, अघुलनशील, घुलेय (फ़िल्ट्रेट) तथा अवशेष शब्दों का प्रयोग करें।
उ. — 1. बर्तन में पानी (जो विलायक है) डालकर गर्म किया जाता है।
2. उसमें चायपत्ती और चीनी (विलेय) डाली जाती है। चीनी घुलनशील पदार्थ है, जो गर्म पानी में घुल जाती है; चायपत्ती के अधिकांश ठोस कण अघुलनशील रहते हैं।
3. दूध मिलाकर कुछ देर उबाला जाता है, जिससे चायपत्ती का सत्व पानी में घुल जाता है।
4. अंत में छन्नी से छाना जाता है — चायपत्ती अवशेष के रूप में छन्नी पर रह जाती है और तैयार चाय घुलेय (फ़िल्ट्रेट) के रूप में कप में प्राप्त होती है।
प्र. 3. प्रज्ञा ने तीन अलग-अलग पदार्थों की घुलनशीलताओं को विभिन्न तापमान पर जाँचा तथा नीचे दिए गए आँकड़ों को प्राप्त किया। 100 g जल में विलेय पदार्थ की वह मात्रा, जो संतृप्त विलयन बनाने हेतु आवश्यक है, तालिका में दर्शाई गई है।
विलेय पदार्थ 283 K 293 K 313 K 333 K 353 K
पोटैशियम नाइट्रेट 21 32 62 106 167
सोडियम क्लोराइड 36 36 36 37 37
पोटैशियम क्लोराइड 35 35 40 46 54
अमोनियम क्लोराइड 24 37 41 55 66
(a) 50 g जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन हेतु कितने ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट चाहिए?
हल — 313 K पर 100 g जल में 62 g घुलता है। अतः 50 g जल के लिए = 62 ÷ 2 = 31 g

(b) प्रज्ञा 353 K पर पोटैशियम क्लोराइड का संतृप्त विलयन बनाकर कमरे के तापमान पर ठंडा होने देती है। ठंडा होने पर क्या अवलोकित होगा?
उ. — तापमान घटने पर पोटैशियम क्लोराइड की घुलनशीलता भी घट जाती है, इसलिए अतिरिक्त विलेय पदार्थ विलयन में घुला नहीं रह पाता और ठोस क्रिस्टल के रूप में तली में बैठ (अवक्षेपित हो) जाता है

(c) 293 K पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता ज्ञात कीजिए। किस तापमान पर कौन-सा लवण सबसे अधिक घुलनशील है?
उ. — 293 K पर घुलनशीलता — पोटैशियम नाइट्रेट = 32 g, सोडियम क्लोराइड = 36 g, पोटैशियम क्लोराइड = 35 g, अमोनियम क्लोराइड = 37 g। अतः 293 K पर अमोनियम क्लोराइड (37 g) सबसे अधिक घुलनशील है।

(d) तापमान में परिवर्तन का लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उ. — तापमान बढ़ने पर लगभग सभी लवणों की घुलनशीलता बढ़ती है — पोटैशियम नाइट्रेट में यह वृद्धि सबसे तीव्र है, जबकि सोडियम क्लोराइड की घुलनशीलता में लगभग नगण्य परिवर्तन होता है।
प्र. 4. निम्न की उदाहरण सहित व्याख्या करें: (a) संतृप्त विलयन (b) शुद्ध पदार्थ (c) कोलॉइड (d) निलंबन
(a) संतृप्त विलयन — निश्चित तापमान पर वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ और नहीं घुल सकता, संतृप्त विलयन कहलाता है। जैसे — 293 K पर 100 g जल में 36 g नमक घुलकर बना विलयन।
(b) शुद्ध पदार्थ — वह पदार्थ जो केवल एक ही प्रकार के कणों से बना हो तथा जिसके सभी अवयवी कण रासायनिक रूप से समान प्रकृति के हों, शुद्ध पदार्थ कहलाता है। जैसे — सोना, आसुत जल, ऑक्सीजन गैस।
(c) कोलॉइड — एक विषमांगी मिश्रण, जिसके कणों का आकार निलंबन से छोटा (1 nm–100 nm) होने के कारण यह देखने में समांगी प्रतीत होता है और टिंडल प्रभाव दर्शाता है। जैसे — दूध, स्याही।
(d) निलंबन — एक विषमांगी मिश्रण, जिसमें ठोस कण द्रव में घुलते नहीं बल्कि निलंबित रहते हैं और आँखों से दिखाई देते हैं। जैसे — मिट्टी मिला जल।
प्र. 5. निम्नलिखित में से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वर्गीकृत करें: सोडा जल, लकड़ी, बर्फ़, वायु, मिट्टी, सिरका, छनी हुई चाय।
उ. — समांगी मिश्रण: सोडा जल, बर्फ़, वायु, सिरका, छनी हुई चाय।
विषमांगी मिश्रण: लकड़ी, मिट्टी।
प्र. 6. आप किस प्रकार पुष्टि करेंगे कि दिया हुआ रंगहीन द्रव शुद्ध जल है?
उ. — किसी भी शुद्ध पदार्थ का क्वथनांक व हिमांक निश्चित (fixed) होता है। मानक वायुमंडलीय दाब पर शुद्ध जल का क्वथनांक ठीक 100°C (373 K) तथा हिमांक ठीक 0°C (273 K) होता है। यदि दिया गया द्रव ठीक इन्हीं निश्चित तापमानों पर उबलता व जमता है, तो यह पुष्टि होगी कि दिया गया द्रव शुद्ध जल है।
प्र. 7. निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तुएँ शुद्ध पदार्थ हैं? (a) बर्फ़ (b) दूध (c) लोहा (d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (e) कैल्सियम ऑक्साइड (f) पारा (g) ईंट (h) लकड़ी (i) वायु
उ. — शुद्ध पदार्थ: (a) बर्फ़, (c) लोहा, (d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, (e) कैल्सियम ऑक्साइड, (f) पारा।
मिश्रण (शुद्ध नहीं): (b) दूध, (g) ईंट, (h) लकड़ी, (i) वायु।
प्र. 8. निम्नलिखित मिश्रणों में से विलयन की पहचान करें: (a) मिट्टी (b) समुद्री जल (c) वायु (d) कोयला (e) सोडा जल
उ. — विलयन हैं: (b) समुद्री जल, (c) वायु, (e) सोडा जल।
(a) मिट्टी और (d) कोयला विषमांगी मिश्रण हैं, विलयन नहीं।
प्र. 9. निम्नलिखित में से कौन टिंडल प्रभाव प्रदर्शित करेगा? (a) नमक का घोल (b) दूध (c) कॉपर सल्फ़ेट का विलयन (d) स्टार्च विलयन
उ. — टिंडल प्रभाव दिखाएँगे: (b) दूध और (d) स्टार्च विलयन, क्योंकि दोनों कोलॉइडी प्रकृति के हैं।
(a) नमक का घोल तथा (c) कॉपर सल्फ़ेट का विलयन सत्य (true) विलयन हैं, अतः ये टिंडल प्रभाव नहीं दिखाएँगे।
प्र. 10. निम्नलिखित को तत्व, यौगिक तथा मिश्रण में वर्गीकृत करें: (a) सोडियम (b) मिट्टी (c) चीनी का घोल (d) चाँदी (e) कैल्सियम कार्बोनेट (f) टिन (g) सिलिकन (h) कोयला (i) वायु (j) साबुन (k) मीथेन (l) कार्बन डाइऑक्साइड (m) रक्त
उ. —
तत्व: (a) सोडियम, (d) चाँदी, (f) टिन, (g) सिलिकन।
यौगिक: (e) कैल्सियम कार्बोनेट, (k) मीथेन, (l) कार्बन डाइऑक्साइड।
मिश्रण: (b) मिट्टी, (c) चीनी का घोल, (h) कोयला, (i) वायु, (j) साबुन, (m) रक्त।
प्र. 11. निम्नलिखित में से कौन-कौन से परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन हैं? (a) पौधों की वृद्धि (b) लोहे में जंग लगना (c) लोहे के चूर्ण तथा बालू को मिलाना (d) खाना पकाना (e) भोजन का पाचन (f) जल से बर्फ़ बनना (g) मोमबत्ती का जलना
उ. — रासायनिक परिवर्तन: (a) पौधों की वृद्धि, (b) लोहे में जंग लगना, (d) खाना पकाना, (e) भोजन का पाचन, (g) मोमबत्ती का जलना।
भौतिक परिवर्तन: (c) लोहे के चूर्ण तथा बालू को मिलाना (केवल मिश्रण बनता है, कोई नया पदार्थ नहीं), (f) जल से बर्फ़ बनना (केवल अवस्था परिवर्तन)।

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