NCERT कक्षा 10 गणित अध्याय 1 — वास्तविक संख्याएँ: सम्पूर्ण व्याख्या एवं हल

NCERT कक्षा 10 गणित अध्याय 1 — अंकगणित का मूलभूत प्रमेय, HCF, LCM और √2, √3, √5 की अपरिमेयता का प्रमाण। अभ्यास 1.1 व 1.2 के सभी 10 प्रश्नों का चरणबद्ध हल हिंदी में।

Jun 19, 2026 - 11:43
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NCERT Class 10 Maths Chapter 1 Real Numbers Complete Solutions in Hindi
NCERT कक्षा 10 गणित अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ हल | Aapbiti

NCERT कक्षा 10 गणित का अध्याय 1 — वास्तविक संख्याएँ बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में अंकगणित का मूलभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic), अभाज्य गुणनखंड विधि से HCF और LCM, तथा √2, √3, √5 जैसी संख्याओं की अपरिमेयता का प्रमाण — ये तीन मुख्य विषय हैं। इस पृष्ठ पर अभ्यास 1.1 और 1.2 के सभी प्रश्नों का चरणबद्ध हल हिंदी में दिया गया है — एक भी प्रश्न छूटा नहीं है।

विवरण जानकारी
कक्षा 10
विषय गणित (Mathematics)
अध्याय 1 — वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)
पाठ्यपुस्तक NCERT (पुनर्मुद्रण 2026-27)
कुल अभ्यास 2 (अभ्यास 1.1 और 1.2)
कुल प्रश्न 10 (7 + 3)
मुख्य प्रमेय अंकगणित का मूलभूत प्रमेय, प्रमेय 1.2, प्रमेय 1.3
परीक्षा महत्व बोर्ड परीक्षा में 3–6 अंक

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इस अध्याय को कैसे पढ़ें? पहले 1.2 का सिद्धांत पढ़ें, फिर अभ्यास 1.1 हल करें। उसके बाद 1.3 के प्रमेय पढ़ें और अभ्यास 1.2 करें। प्रमाण (Proof) को केवल समझें — रटें नहीं। बोर्ड में अपने शब्दों में लिखना होता है।

1.1 परिचय — कक्षा 9 से आगे की यात्रा

कक्षा 9 में आपने वास्तविक संख्याओं और अपरिमेय संख्याओं से परिचय प्राप्त किया था। कक्षा 10 में हम दो महत्वपूर्ण प्रमेयों का गहराई से अध्ययन करते हैं। पहला है यूक्लिड का विभाजन कलन (Euclid's Division Algorithm) — जो धनात्मक पूर्णांकों की विभाज्यता से जुड़ा है और HCF निकालने में काम आता है। दूसरा है अंकगणित का मूलभूत प्रमेय — जो गुणन से जुड़ा है। इस पुनर्मुद्रित संस्करण (2026-27) में हम सीधे मूलभूत प्रमेय से शुरुआत करते हैं और इसे दो कार्यों में उपयोग करते हैं: √2, √3, √5 की अपरिमेयता सिद्ध करना, और परिमेय संख्याओं के दशमलव प्रसार की प्रकृति जानना।

1.2 अंकगणित का मूलभूत प्रमेय क्या कहता है?

कक्षा 6 से आप जानते हैं कि हर प्राकृत संख्या को उसके अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है। जैसे — 2 = 2, 4 = 2 × 2, 253 = 11 × 23। अब प्रश्न यह है कि क्या हर संयुक्त (composite) संख्या इसी तरह लिखी जा सकती है? और क्या यह तरीका अद्वितीय है?

उदाहरण के लिए 32760 को अभाज्य गुणनखंडों में लिखें तो: 32760 = 2³ × 3² × 5 × 7 × 13। चाहे किसी भी तरीके से गुणनखंड करें, प्रमेय कहता है कि परिणाम सदा एक ही रहेगा (क्रम को छोड़कर)।

प्रमेय 1.1 (अंकगणित का मूलभूत प्रमेय): प्रत्येक संयुक्त संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है और यह गुणनखंडन अद्वितीय है — अभाज्य गुणनखंडों के क्रम को छोड़कर।

अभाज्य गुणनखंड विधि से HCF और LCM कैसे निकालें?

इस विधि में पहले दोनों (या तीनों) संख्याओं को अभाज्य गुणनखंडों में लिखते हैं, फिर:

  • HCF = प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की न्यूनतम घात का गुणनफल।
  • LCM = प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की अधिकतम घात का गुणनफल।
  • दो संख्याओं के लिए: HCF × LCM = दोनों संख्याओं का गुणनफल।
  • तीन संख्याओं के लिए: यह सूत्र लागू नहीं होता।

अभ्यास 1.1 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: प्रत्येक संख्या को अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में व्यक्त करें

(i) 140

140 ÷ 2 = 70; 70 ÷ 2 = 35; 35 ÷ 5 = 7; 7 अभाज्य है।

140 = 2² × 5 × 7

(ii) 156

156 ÷ 2 = 78; 78 ÷ 2 = 39; 39 ÷ 3 = 13; 13 अभाज्य है।

156 = 2² × 3 × 13

(iii) 3825

3825 ÷ 3 = 1275; 1275 ÷ 3 = 425; 425 ÷ 5 = 85; 85 ÷ 5 = 17; 17 अभाज्य है।

3825 = 3² × 5² × 17

(iv) 5005

5005 ÷ 5 = 1001; 1001 ÷ 7 = 143; 143 ÷ 11 = 13; 13 अभाज्य है।

5005 = 5 × 7 × 11 × 13

(v) 7429

7429 ÷ 17 = 437; 437 ÷ 19 = 23; 23 अभाज्य है।

7429 = 17 × 19 × 23

प्रश्न 2: निम्नलिखित पूर्णांक-युग्मों का LCM और HCF ज्ञात करें और सत्यापित करें कि LCM × HCF = दोनों संख्याओं का गुणनफल

(i) 26 और 91

26 = 2 × 13    91 = 7 × 13

HCF(26, 91) = 13    LCM(26, 91) = 2 × 7 × 13 = 182

सत्यापन: 13 × 182 = 2366 = 26 × 91 ✓

(ii) 510 और 92

510 = 2 × 3 × 5 × 17    92 = 2² × 23

HCF(510, 92) = 2    LCM = 2² × 3 × 5 × 17 × 23 = 23460

सत्यापन: 2 × 23460 = 46920 = 510 × 92 ✓

(iii) 336 और 54

336 = 2⁴ × 3 × 7    54 = 2 × 3³

HCF(336, 54) = 2 × 3 = 6    LCM = 2⁴ × 3³ × 7 = 16 × 27 × 7 = 3024

सत्यापन: 6 × 3024 = 18144 = 336 × 54 ✓

प्रश्न 3: अभाज्य गुणनखंड विधि से निम्नलिखित पूर्णांकों का LCM और HCF ज्ञात करें

(i) 12, 15 और 21

12 = 2² × 3    15 = 3 × 5    21 = 3 × 7

HCF = 3 (केवल 3 उभयनिष्ठ है, न्यूनतम घात = 3¹)

LCM = 2² × 3 × 5 × 7 = 4 × 3 × 5 × 7 = 420

(ii) 17, 23 और 29

17, 23 और 29 — तीनों अभाज्य संख्याएँ हैं।

कोई उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड नहीं → HCF = 1

LCM = 17 × 23 × 29 = 17 × 667 = 11339

(iii) 8, 9 और 25

8 = 2³    9 = 3²    25 = 5²

कोई उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड नहीं → HCF = 1

LCM = 2³ × 3² × 5² = 8 × 9 × 25 = 1800

प्रश्न 4: HCF(306, 657) = 9 दिया है, LCM(306, 657) ज्ञात करें

हम जानते हैं: HCF × LCM = पहली संख्या × दूसरी संख्या

9 × LCM = 306 × 657

LCM = (306 × 657) ÷ 9

LCM = (306 ÷ 9) × 657 = 34 × 657 = 22338

प्रश्न 5: जाँचें कि 6ⁿ किसी प्राकृत संख्या n के लिए अंक 0 पर समाप्त हो सकता है या नहीं

कोई संख्या अंक 0 पर समाप्त हो तो उसे 10 से विभाजित होना चाहिए। अर्थात् उसके अभाज्य गुणनखंड में 2 और 5 दोनों होने चाहिए।

अब, 6ⁿ = (2 × 3)ⁿ = 2ⁿ × 3ⁿ

6ⁿ के अभाज्य गुणनखंड में केवल 2 और 3 हैं। 5 कभी नहीं आएगा।

अंकगणित के मूलभूत प्रमेय की अद्वितीयता से — 6ⁿ के गुणनखंड में 5 का आना असंभव है।

अतः किसी भी प्राकृत संख्या n के लिए 6ⁿ कभी 0 पर समाप्त नहीं होगा।

प्रश्न 6: बताएं कि 7 × 11 × 13 + 13 और 7 × 6 × 5 × 4 × 3 × 2 × 1 + 5 संयुक्त संख्याएँ क्यों हैं

(i) 7 × 11 × 13 + 13

= 13 × (7 × 11 + 1)    [13 उभयनिष्ठ]

= 13 × (77 + 1)

= 13 × 78

= 13 × 2 × 3 × 13

इस संख्या में 1 और स्वयं के अलावा भी गुणनखंड (13, 78, 2, 39 आदि) हैं।

अतः यह एक संयुक्त संख्या है।

(ii) 7 × 6 × 5 × 4 × 3 × 2 × 1 + 5

= 5040 + 5

= 5 × (1008 + 1)    [5 उभयनिष्ठ]

= 5 × 1009

इस संख्या में 5 और 1009 गुणनखंड हैं (1 और स्वयं के अलावा)।

अतः यह भी एक संयुक्त संख्या है।

प्रश्न 7: एक वृत्ताकार पथ पर सोनिया 18 मिनट और रवि 12 मिनट में एक चक्कर लगाते हैं। एक साथ शुरू करने के कितने मिनट बाद वे पुनः प्रारंभिक बिंदु पर मिलेंगे?

वे तभी मिलेंगे जब दोनों ने पूरे-पूरे चक्कर लगाए हों — यानी समय LCM(18, 12) होगा।

18 = 2 × 3²    12 = 2² × 3

LCM(18, 12) = 2² × 3² = 4 × 9 = 36 मिनट

अतः वे 36 मिनट बाद प्रारंभिक बिंदु पर पुनः मिलेंगे।

1.3 अपरिमेय संख्याओं की पुनः समीक्षा — प्रमाण कैसे लिखते हैं?

कक्षा 9 में हमने जाना कि √2, √3 जैसी संख्याएँ अपरिमेय हैं, परंतु उनका प्रमाण नहीं दिया था। कक्षा 10 में हम विरोधाभास द्वारा प्रमाण (Proof by Contradiction) विधि से यह सिद्ध करते हैं।

प्रमेय 1.2: माना p एक अभाज्य संख्या है। यदि p, a² को विभाजित करे, तो p, a को भी विभाजित करता है (जहाँ a एक धनात्मक पूर्णांक है)।

प्रमेय 1.3: √2 अपरिमेय है।

प्रमाण की मुख्य विधि: मान लें √2 = a/b (जहाँ a, b सहअभाज्य हैं, b ≠ 0) → 2b² = a² → 2, a को विभाजित करता है → a = 2c → b² = 2c² → 2, b को भी विभाजित करता है → a और b में 2 उभयनिष्ठ → विरोधाभास (क्योंकि a, b सहअभाज्य थे)। अतः √2 अपरिमेय है।

अभ्यास 1.2 — सम्पूर्ण हल

प्रश्न 1: सिद्ध करें कि √5 अपरिमेय है

प्रमाण (विरोधाभास विधि):

माना √5 परिमेय है। तब हम ऐसे पूर्णांक a और b (b ≠ 0) ढूंढ सकते हैं जहाँ a और b सहअभाज्य हों और:

√5 = a/b

दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: 5b² = a²

अतः 5, a² को विभाजित करता है। प्रमेय 1.2 से — 5, a को भी विभाजित करता है।

अतः a = 5c (किसी पूर्णांक c के लिए)।

a के स्थान पर 5c रखें: 5b² = (5c)² = 25c²

→ b² = 5c²

अतः 5, b² को विभाजित करता है। प्रमेय 1.2 से — 5, b को भी विभाजित करता है।

इस प्रकार 5, a और b दोनों को विभाजित करता है।

परंतु यह हमारी इस मान्यता का खंडन करता है कि a और b सहअभाज्य हैं।

यह विरोधाभास हमारी गलत मान्यता "√5 परिमेय है" के कारण उत्पन्न हुआ।

अतः √5 अपरिमेय है। (सिद्ध)

प्रश्न 2: सिद्ध करें कि 3 + 2√5 अपरिमेय है

प्रमाण:

माना 3 + 2√5 परिमेय है। तब कोई सहअभाज्य पूर्णांक a और b (b ≠ 0) होंगे जैसे:

3 + 2√5 = a/b

→ 2√5 = a/b − 3 = (a − 3b)/b

→ √5 = (a − 3b)/(2b)

चूँकि a, b पूर्णांक हैं, (a − 3b)/(2b) एक परिमेय संख्या है।

अतः √5 परिमेय होगा।

परंतु प्रश्न 1 से सिद्ध है कि √5 अपरिमेय है — यह विरोधाभास है।

अतः हमारी मान्यता गलत थी।

अतः 3 + 2√5 अपरिमेय है। (सिद्ध)

प्रश्न 3: सिद्ध करें कि निम्नलिखित अपरिमेय हैं

(i) 1/√2

माना 1/√2 परिमेय है = a/b (सहअभाज्य, b ≠ 0)।

→ √2 = b/a

चूँकि b/a परिमेय है, √2 परिमेय होगा।

परंतु √2 अपरिमेय है (प्रमेय 1.3)। विरोधाभास।

अतः 1/√2 अपरिमेय है। (सिद्ध)

(ii) 7√5

माना 7√5 परिमेय है = a/b (सहअभाज्य, b ≠ 0)।

→ √5 = a/(7b)

चूँकि a/(7b) परिमेय है, √5 परिमेय होगा।

परंतु √5 अपरिमेय है (प्रश्न 1)। विरोधाभास।

अतः 7√5 अपरिमेय है। (सिद्ध)

(iii) 6 + √2

माना 6 + √2 परिमेय है = a/b (सहअभाज्य, b ≠ 0)।

→ √2 = a/b − 6 = (a − 6b)/b

चूँकि (a − 6b)/b परिमेय है, √2 परिमेय होगा।

परंतु √2 अपरिमेय है (प्रमेय 1.3)। विरोधाभास।

अतः 6 + √2 अपरिमेय है। (सिद्ध)

Aapbiti News Experts ki Salah

बोर्ड परीक्षा के लिए विशेष सुझाव:

  • प्रश्न 6 (अभ्यास 1.1) में उभयनिष्ठ गुणनखंड निकालकर बाहर लें — यही सबसे सरल विधि है।
  • अपरिमेयता के प्रमाण में हर बार "विरोधाभास" शब्द का उल्लेख करें और अंत में "अतः [संख्या] अपरिमेय है — सिद्ध" लिखें।
  • प्रश्न 4 (अभ्यास 1.1) में HCF × LCM = a × b सूत्र सीधे उपयोग करें — गुणनखंड करने की आवश्यकता नहीं।
  • तीन संख्याओं के लिए HCF × LCM ≠ तीनों का गुणनफल — यह याद रखें।
  • अभ्यास 1.2 के सभी प्रश्नों की विधि एक जैसी है — √5 का प्रमाण अच्छे से याद कर लें, बाकी उसी pattern पर हैं।

अध्याय 1 सारांश — त्वरित दोहराई

अवधारणा मुख्य बिंदु
अंकगणित का मूलभूत प्रमेय हर संयुक्त संख्या का अभाज्य गुणनखंडन अद्वितीय होता है।
HCF (अभाज्य गुणनखंड विधि) उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों की न्यूनतम घात का गुणनफल।
LCM (अभाज्य गुणनखंड विधि) सभी अभाज्य गुणनखंडों की अधिकतम घात का गुणनफल।
दो संख्याओं के लिए HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b
प्रमेय 1.2 यदि अभाज्य p, a² को विभाजित करे → p, a को भी विभाजित करता है।
विरोधाभास विधि मान लो संख्या परिमेय है → सिद्ध होता है कि कोई ज्ञात अपरिमेय संख्या परिमेय है → विरोधाभास।
अपरिमेय संख्याएँ √2, √3, √5 और किसी अभाज्य p की √p अपरिमेय होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: अंकगणित का मूलभूत प्रमेय क्यों महत्वपूर्ण है?

यह प्रमेय गणित की नींव है। यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी संख्या का अभाज्य गुणनखंडन एकमात्र है। HCF, LCM, अपरिमेय संख्याओं के प्रमाण — सभी इसी प्रमेय पर आधारित हैं। Carl Friedrich Gauss ने इसका पहला सही प्रमाण दिया था।

प्रश्न: 22/7 को π क्यों नहीं लिखते, जबकि π = 22/7 बोलते हैं?

22/7 केवल π का एक अच्छा सन्निकटन (approximation) है, π बिल्कुल नहीं। π एक अपरिमेय संख्या है, इसलिए इसे p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता। π ≠ 22/7 — यह केवल गणनाओं में सुविधा के लिए उपयोग किया जाता है।

प्रश्न: विरोधाभास विधि में "मान लो" के बाद क्या लिखते हैं?

हमेशा "माना [जो सिद्ध करना है उसका उल्टा] है"। जैसे √5 अपरिमेय सिद्ध करना है तो "माना √5 परिमेय है।" फिर a/b के रूप में लिखो, सहअभाज्य की शर्त रखो, और गणित से सिद्ध करो कि a और b में उभयनिष्ठ गुणनखंड है — जो शर्त का खंडन है।

प्रश्न: तीन संख्याओं के लिए HCF × LCM = तीनों का गुणनफल क्यों नहीं होता?

यह सूत्र केवल दो संख्याओं के लिए है। तीन संख्याओं 6, 72, 120 के लिए HCF = 6, LCM = 360, गुणनफल = 51840। लेकिन 6 × 360 = 2160 ≠ 51840। इसीलिए यह सूत्र तीन संख्याओं पर लागू नहीं होता।

प्रश्न: अभाज्य संख्या और संयुक्त संख्या में क्या अंतर है?

अभाज्य संख्या के ठीक दो गुणनखंड होते हैं — 1 और स्वयं (जैसे 2, 3, 5, 7, 11…)। संयुक्त संख्या के दो से अधिक गुणनखंड होते हैं (जैसे 4, 6, 8, 9…)। 1 न अभाज्य है न संयुक्त।

प्रश्न: 6ⁿ वाले प्रश्न (Q5) में √n वाले n के लिए सोचने की जरूरत क्यों नहीं?

क्योंकि मूलभूत प्रमेय की अद्वितीयता कहती है — 6ⁿ = 2ⁿ × 3ⁿ और इसके अभाज्य गुणनखंड सदा 2 और 3 ही रहेंगे, कभी 5 नहीं आएगा। 0 पर समाप्त होने के लिए 5 का गुणनखंड आवश्यक है — जो संभव ही नहीं।

प्रश्न: परिमेय और अपरिमेय संख्या को पहचानने का सबसे आसान तरीका क्या है?

परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार या तो सांत (terminating) होता है या असांत आवर्ती (non-terminating repeating) होता है। अपरिमेय संख्या का दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती (non-terminating non-repeating) होता है। उदाहरण: 1/3 = 0.333… (परिमेय), √2 = 1.41421356… (अपरिमेय)।

इस अध्याय का कोई भी प्रश्न या Step समझ न आए — नीचे Comment में लिखें। NCERT Solutions के अन्य अध्यायों के लिए हमारा NCERT Solutions पेज देखें। कक्षा 9 गणित मंजरी के हल भी Aapbiti पर उपलब्ध हैं।

Shakti Rao Mani

Shakti Rao Mani शिक्षा नीति, सरकारी योजनाओं और उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा तंत्र पर विशेष रूप से लिखते हैं। Aapbiti के Education Unit से जुड़े हैं और अभिभावकों व छात्रों तक सटीक एवं उपयोगी जानकारी पहुँचाना उनकी प्राथमिकता है।

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