IIRS आउटरीच कोर्स कैलेंडर 2026: फ्री इसरो सर्टिफिकेट कोर्सेज के लिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
यह लेख भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS-ISRO) द्वारा संचालित निःशुल्क ऑनलाइन आउटरीच कोर्सेज (2026) के बारे में है। इसमें रिमोट सेंसिंग, GIS और AI/ML जैसे विषयों के लिए आधिकारिक कोर्स कैलेंडर, आवश्यक दस्तावेज़, चरण-दर-चरण पंजीकरण प्रक्रिया (Registration Process) और मुफ्त सर्टिफिकेट प्राप्त करने के नियमों की पूरी जानकारी दी गई है।
IIRS आउटरीच कोर्स कैलेंडर 2026 – निःशुल्क ISRO कोर्स, रजिस्ट्रेशन एवं शेड्यूल की पूरी जानकारी
IIRS आउटरीच कोर्स कैलेंडर भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) द्वारा जारी किया जाने वाला आधिकारिक शेड्यूल है। IIRS, इसरो (ISRO) का एक घटक संस्थान है, जो सभी निःशुल्क ऑनलाइन कोर्स, वर्कशॉप और सर्टिफिकेट प्रोग्राम की सूची यहाँ प्रकाशित करता है। इस लेख में बताया गया है कि कैलेंडर कैसे पढ़ें, रजिस्ट्रेशन कैसे करें, और किन दस्तावेज़ों व चरणों की आवश्यकता होती है — यह जानकारी IIRS आउटरीच कोर्स कैलेंडर की लाइव लिस्टिंग पर आधारित है।
IIRS आउटरीच कोर्स कैलेंडर क्या है?
कोर्स कैलेंडर, आउटरीच प्रोग्राम शुरू होने के बाद से अब तक आयोजित हर IIRS–ISRO कोर्स का कालानुक्रमिक रिकॉर्ड है, जिसमें कोर्स का नाम, विषय (डिसिप्लिन), प्रारंभ तिथि, समाप्ति तिथि, आवेदन की अंतिम तिथि, और पंजीकृत प्रतिभागियों की संख्या शामिल होती है। IIRS, अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के अंतर्गत भारत सरकार का संस्थान है, और यहाँ सूचीबद्ध सभी आउटरीच कोर्स पूरी तरह निःशुल्क होते हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे रजिस्ट्रेशन के लिए किसी भी नोडल सेंटर, कोर्स कोऑर्डिनेटर, या व्यक्ति को कोई भुगतान न करें।
आगामी और हाल ही के कोर्स की सबसे नई व विस्तृत जानकारी — ब्रोशर, शेड्यूल और रजिस्ट्रेशन लिंक सहित — EDUSAT News पेज पर मिलती है, जिसे कोर्स कैलेंडर टेबल की तुलना में अधिक बार अपडेट किया जाता है।
निःशुल्क IIRS–ISRO कोर्स क्यों चुनें?
- आउटरीच प्रोग्राम कोर्स के लिए कोई रजिस्ट्रेशन या कोर्स फीस नहीं
- इसरो/IIRS के वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों द्वारा पढ़ाया जाना
- लाइव इंटरएक्टिव ऑनलाइन सत्र, कई कोर्स में रिकॉर्डिंग एक्सेस भी उपलब्ध
- उपस्थिति और परीक्षा मानदंडों के अनुसार प्रतिभागिता या पूर्णता प्रमाणपत्र
- विषयों की विस्तृत श्रृंखला: रिमोट सेंसिंग, GIS, GNSS, पायथन, AI/ML, आपदा प्रबंधन, जल विज्ञान (हाइड्रोलॉजी) आदि
कौन आवेदन कर सकता है?
पात्रता प्रत्येक कोर्स के अनुसार अलग होती है और इसका उल्लेख हर कोर्स के ब्रोशर में किया जाता है, लेकिन सामान्यतः ये कोर्स निम्नलिखित के लिए खुले होते हैं:
- स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र (अधिकतर विज्ञान और तकनीकी पृष्ठभूमि वाले)
- शोधार्थी और पीएचडी छात्र
- संकाय सदस्य और स्कूल शिक्षक (कुछ कोर्स केवल शिक्षकों के लिए)
- सरकारी विभागों के अधिकारी और जियोस्पेशियल क्षेत्र से जुड़े पेशेवर
आवेदन करने से पहले प्रत्येक कोर्स के साथ दिए गए "Course Brochure" और "Course Guidelines" PDF अवश्य देखें, क्योंकि न्यूनतम योग्यता और दस्तावेज़ आवश्यकताएँ कोर्स-दर-कोर्स अलग होती हैं।
हाल ही में घोषित / आगामी IIRS आउटरीच कोर्स (2026)
| कोर्स आईडी | कोर्स का नाम | शेड्यूल | रजिस्ट्रेशन |
|---|---|---|---|
| 188 | AI/ML for Geodata Analysis | 3–14 अगस्त, 2026 | रजिस्टर करें |
| 1054 | वर्कशॉप: उष्णकटिबंधीय चक्रवात निगरानी और पूर्वानुमान के लिए पृथ्वी अवलोकन एवं संख्यात्मक मॉडल अनुप्रयोग | 30 जुलाई, 2026 | रजिस्टर करें |
| 1057 | वर्कशॉप: एरोसोल – मापन, पुनर्प्राप्ति और प्रभाव | 27–28 जुलाई, 2026 | रजिस्टर करें |
| 186 | पृथ्वी से निकट-पृथ्वी अंतरिक्ष तक (From the Earth to the Near-Earth Space) | 6–10 जुलाई, 2026 | रजिस्टर करें |
कोर्स ब्रोशर, शेड्यूल और रजिस्ट्रेशन विंडो की पूरी व निरंतर अपडेट होने वाली सूची के लिए EDUSAT News पेज और आधिकारिक वार्षिक कोर्स कैलेंडर (PDF) देखें।
लोकप्रिय आवर्ती कोर्स श्रेणियाँ
आधारभूत कोर्स
रिमोट सेंसिंग, GIS और GNSS की मूल बातें; भौगोलिक सूचना प्रणाली का अवलोकन; वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का अवलोकन।
तकनीकी / सॉफ्टवेयर आधारित कोर्स
पायथन और मशीन लर्निंग का उपयोग करके जियोडाटा प्रोसेसिंग; जियोडाटा विश्लेषण हेतु AI/ML; जियोकंप्यूटेशन और जियो-वेब सेवाओं का अवलोकन।
अनुप्रयुक्त क्षेत्र कोर्स
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में RS और GIS अनुप्रयोग; शहरी नियोजन के लिए जियोस्पेशियल तकनीक; भूवैज्ञानिक अनुप्रयोगों के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीकों में प्रगति; भू-विरूपण एवं ढलान स्थिरता।
विशेष रुचि / अंतरिक्ष विज्ञान कोर्स
भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों का वैज्ञानिक योगदान; पृथ्वी से निकट-पृथ्वी अंतरिक्ष तक; अंतरिक्ष अन्वेषण पर वार्षिक START कोर्स।
IIRS आउटरीच कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें
चरण-दर-चरण प्रक्रिया
- आधिकारिक रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाएँ: elearning.iirs.gov.in/edusatregistration
- ड्रॉप-डाउन सूची में से वांछित कोर्स चुनें — विषय, अवधि और कोर्स फीस (शून्य) अपने आप भर जाएगी
- व्यक्तिगत विवरण भरें: नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, लिंग, राष्ट्रीयता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी
- पत्राचार और स्थायी पते का विवरण दें
- हाई स्कूल से लेकर स्नातकोत्तर तक की शैक्षणिक योग्यता का विवरण भरें
- निर्धारित अनुसार फोटो और पहचान/योग्यता प्रमाण अपलोड करें
- संबंधित कोर्स की अंतिम आवेदन तिथि से पहले आवेदन जमा करें
विस्तृत निर्देश आधिकारिक रजिस्ट्रेशन गाइड पेज पर उपलब्ध हैं, और आवेदक एप्लिकेशन स्टेटस टूल से अपने आवेदन को ट्रैक कर सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- पहचान प्रमाण
- जन्म तिथि प्रमाण
- शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र
- वैध ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर
कोर्स प्रमाणपत्र
प्रमाणीकरण संबंधित कोर्स पर निर्भर करता है: कुछ कोर्स में प्रतिभागिता प्रमाणपत्र के लिए न्यूनतम उपस्थिति (आमतौर पर 70%) आवश्यक होती है, जबकि कुछ अन्य में पूर्णता प्रमाणपत्र के लिए औपचारिक परीक्षा देनी होती है। परीक्षा प्रक्रिया, समय-सारणी और स्लॉट आवंटन की जानकारी कोर्स समाप्त होने के बाद EDUSAT News पेज पर अलग से प्रकाशित की जाती है।
IIRS कोर्स के बाद करियर के अवसर
- GIS विश्लेषक (GIS Analyst)
- रिमोट सेंसिंग विश्लेषक
- जियोस्पेशियल इंजीनियर
- शहरी एवं क्षेत्रीय योजनाकार
- पर्यावरण सलाहकार
- शोध वैज्ञानिक (जियोइंफॉर्मेटिक्स/जियोसाइंसेज)
- स्पेस टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल
IIRS और इसरो के साथ इसका संबंध
भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (Indian Institute of Remote Sensing) देहरादून में स्थित है और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्य करता है। यह संस्थान मूल रूप से 1966 में स्थापित किया गया था और तब से यह देश में रिमोट सेंसिंग, जियोइंफॉर्मेटिक्स और GNSS प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करने वाला प्रमुख केंद्र रहा है। संस्थान में लगभग साठ से अधिक समर्पित वैज्ञानिक कार्यरत हैं, जो अकादमिक कार्यक्रमों की योजना बनाते हैं, पढ़ाते हैं, और शोध का मार्गदर्शन करते हैं। IIRS के पाठ्यक्रम अकादमिक परिषद (Academic Council) और बोर्ड ऑफ स्टडीज़ (Board of Studies) द्वारा अनुमोदित होते हैं, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इसी कारण इन कोर्स को शैक्षणिक दृष्टि से गंभीरता से लिया जाता है, भले ही ये पूर्णतः निःशुल्क हों।
IIRS केवल अल्पकालिक आउटरीच कोर्स ही नहीं चलाता, बल्कि इसके अंतर्गत M.Sc. जियोइंफॉर्मेटिक्स, पीजी डिप्लोमा इन RS & GIS, पीजी डिप्लोमा जियोइंफॉर्मेटिक्स, और विशेषीकृत/निर्णयकर्ता (Decision Makers) कोर्स जैसे औपचारिक शैक्षणिक कार्यक्रम भी संचालित होते हैं। आउटरीच प्रोग्राम इन्हीं का एक विस्तार है, जिसे देशभर के छात्रों, शिक्षकों और पेशेवरों तक अंतरिक्ष-आधारित तकनीक की पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है।
ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म और आवेदन की प्रक्रिया कैसे काम करती है
IIRS का ई-लर्निंग पोर्टल (elearning.iirs.gov.in) आउटरीच कार्यक्रम के लिए केंद्रीय प्रवेश द्वार है। यहाँ से छात्र स्वयं व्यक्तिगत रूप से रजिस्टर कर सकते हैं, या अपने कॉलेज/विश्वविद्यालय के माध्यम से — जिसके लिए संस्थान को पहले "नोडल सेंटर कोऑर्डिनेटर" के रूप में जोड़ना होता है। संस्थान अपनी वेबसाइट पर विश्वविद्यालय जोड़ने के लिए एक अलग लिंक और निर्देश भी उपलब्ध कराता है, ताकि नए कॉलेज आसानी से आधिकारिक नोडल केंद्र के रूप में पंजीकृत हो सकें।
हर कोर्स के लिए तीन मुख्य दस्तावेज़ प्रकाशित किए जाते हैं — कोर्स ब्रोशर (उद्देश्य, पात्रता और विषयवस्तु की जानकारी), कोर्स शेड्यूल (दैनिक व्याख्यान समय-सारणी), और परीक्षा प्रक्रिया व सूचना (Examination Procedure & Information), जो कोर्स समाप्त होने के बाद परीक्षा तिथि और स्लॉट के बारे में बताता है। आवेदन करने से पहले इन तीनों दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है, क्योंकि कई बार शेड्यूल में संशोधन (Revised Schedule) भी जारी किया जाता है।
आवेदन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- हर कोर्स की एक निश्चित "अंतिम आवेदन तिथि" (Last Date to Apply) होती है — इसके बाद फॉर्म स्वतः बंद हो जाता है
- कुछ कोर्स केवल विशेष योग्यता वालों के लिए होते हैं, जैसे केवल स्नातक (विज्ञान/तकनीकी) या केवल स्कूल शिक्षक — गलत श्रेणी से आवेदन करने पर चयन नहीं होगा
- एक ही ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर से बार-बार अलग-अलग नाम से आवेदन न करें, इससे सत्यापन में समस्या हो सकती है
- अपलोड की गई फोटो और दस्तावेज़ों का आकार निर्धारित सीमा (सामान्यतः फोटो 1 MB तक, पहचान प्रमाण 500 KB तक) से अधिक न हो
- रजिस्ट्रेशन की पुष्टि के लिए स्वयं का दिया हुआ ईमेल नियमित रूप से जाँचते रहें, क्योंकि चयन सूची और कक्षा लिंक ईमेल के माध्यम से ही भेजे जाते हैं
आम गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए
कई आवेदक जल्दीबाज़ी में या पूरी जानकारी पढ़े बिना फॉर्म भर देते हैं, जिसके कारण बाद में समस्याएँ आती हैं। सबसे आम गलतियों में शामिल हैं — गलत ईमेल आईडी दर्ज करना जिससे चयन सूची या क्लास लिंक न मिल पाए, न्यूनतम योग्यता पूरी न होने के बावजूद आवेदन करना, दस्तावेज़ अपलोड करते समय गलत फ़ाइल प्रारूप या आकार का उपयोग करना, और सबसे महत्वपूर्ण — किसी बाहरी व्यक्ति, एजेंट या "कोर्स एजेंसी" के माध्यम से पैसे देकर रजिस्ट्रेशन करवाना। IIRS स्वयं बार-बार यह सलाह देता है कि रजिस्ट्रेशन के लिए किसी को कोई भुगतान न किया जाए, चाहे वह स्वयं को नोडल केंद्र, कोऑर्डिनेटर, या संस्थान का प्रतिनिधि क्यों न बताए। यदि किसी वेबसाइट या व्यक्ति द्वारा शुल्क माँगा जाए, तो उसकी शिकायत सीधे संस्थान के आधिकारिक फीडबैक फॉर्म के माध्यम से की जा सकती है।
निःशुल्क सरकारी कोर्स बनाम पेड सर्टिफिकेशन प्लेटफ़ॉर्म
बाज़ार में उपलब्ध कई निजी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म रिमोट सेंसिंग, GIS और जियोस्पेशियल एनालिटिक्स में सशुल्क सर्टिफिकेट कोर्स बेचते हैं, जिनकी फीस कई हज़ार रुपये तक हो सकती है। इसके विपरीत IIRS–ISRO आउटरीच कार्यक्रम बिल्कुल उसी तकनीकी विषयवस्तु — रिमोट सेंसिंग सिद्धांत, GIS सॉफ़्टवेयर, सैटेलाइट डेटा विश्लेषण, पायथन आधारित जियोप्रोसेसिंग — को बिना किसी शुल्क के, स्वयं इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा पढ़ाता है। अंतर केवल इतना है कि निजी प्लेटफ़ॉर्म का सर्टिफिकेट कंपनी विशेष से जुड़ा होता है, जबकि IIRS का प्रमाणपत्र एक सरकारी अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान से जारी होता है। जो छात्र सीमित बजट में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण चाहते हैं, उनके लिए यह आउटरीच प्रोग्राम एक व्यावहारिक विकल्प है, बशर्ते वे समय पर आवेदन करें, क्योंकि सीटें और आवेदन विंडो सीमित समय के लिए ही खुली रहती हैं।
कोर्स चयन के लिए सुझाव
यदि आप पहली बार आवेदन कर रहे हैं, तो "Basics of Remote Sensing, GIS and GNSS" या "Overview of Geographical Information System" जैसे आधारभूत कोर्स से शुरुआत करना उपयुक्त रहता है, क्योंकि ये विषय की मूल संकल्पनाओं से परिचित कराते हैं। जो छात्र पहले से बुनियादी ज्ञान रखते हैं, वे सीधे "Geodata Processing using Python and Machine Learning" या "AI/ML for Geodata Analysis" जैसे तकनीकी कोर्स चुन सकते हैं। शोधार्थियों और विशेषज्ञ पेशेवरों के लिए भूवैज्ञानिक, जलीय, या आपदा-प्रबंधन केंद्रित कोर्स — जैसे "Land Deformation and Slope Stability" या "Advances in Remote Sensing Data Analysis Techniques for Geological Applications" — अधिक उपयोगी सिद्ध होते हैं। स्कूल शिक्षकों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए "Space Technology & Applications – For School Teachers" जैसे कोर्स भी नियमित रूप से आयोजित होते हैं।
अंत में, चूँकि इनमें से अधिकांश कोर्स की सीटें सीमित होती हैं और अक्सर आवेदन विंडो कुछ ही दिनों में बंद हो जाती है, इसलिए EDUSAT News पेज को साप्ताहिक रूप से जाँचते रहना और नई घोषणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देना सबसे अच्छी रणनीति है। जो छात्र नियमित रूप से एक-दो कोर्स में हर सत्र में भाग लेते हैं, वे कुछ ही वर्षों में रिमोट सेंसिंग और जियोस्पेशियल तकनीक की एक ठोस, बहु-विषयक समझ विकसित कर सकते हैं — वह भी पूरी तरह निःशुल्क।
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