Class 8 संस्कृत पाठ 3: सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु (दीपकम्)

कक्षा 8 की संस्कृत पुस्तक "दीपकम्" के तीसरे पाठ "सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु" के सभी आठ सुभाषित श्लोकों का सरल हिंदी अनुवाद, महत्वपूर्ण शब्दार्थ और अभ्यास प्रश्नों के हल।

Aug 21, 2026 - 16:00
Updated: 2 hours ago
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कक्षा 8 संस्कृत पाठ 3 सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु
"Class 8 Sanskrit Deepakam Chapter 3 Notes" लिखा हुआ बैनर, जिसमें जलता हुआ दीया और देवनागरी अक्षरों वाली खुली किताब का चित्र बना है।

कक्षा 8 की संस्कृत पुस्तक "दीपकम्" का तीसरा पाठ "सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु" आठ प्रसिद्ध नीति-श्लोकों (सुभाषितों) का संकलन है। इस लेख में पाठ की भूमिका, सभी आठ श्लोकों का सरल अर्थ, महत्वपूर्ण शब्दार्थ और पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के हल आसान भाषा में दिए गए हैं, ताकि परीक्षा की तैयारी सरलता से हो सके।

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पाठ का उद्देश्य क्या है?

इस पाठ का उद्देश्य छात्रों को सुभाषित यानी सुंदर और हितकारी वचनों से परिचित कराना है। "सु" (अच्छा) + "भाषित" (कहा गया) मिलकर बनता है "सुभाषित" — यानी वे बातें जो सुंदर ढंग से कही गई हों और हमेशा लोगों के भले के लिए हों। इन आठ श्लोकों के माध्यम से छात्र सीखते हैं कि गुणी व्यक्ति की पहचान क्या है, सज्जन कैसे व्यवहार करते हैं, दुष्ट व्यक्ति की संगति क्यों त्यागनी चाहिए, और भाग्य के साथ पुरुषार्थ (मेहनत) क्यों ज़रूरी है। यह पाठ जीवन को सफल और सार्थक बनाने की सीख देता है।

पाठ की शुरुआत — दादी-पोती का संवाद

पाठ की शुरुआत एक प्यारे संवाद से होती है। एक बालिका अपनी दादी से नई कहानी सुनाने का आग्रह करती है, तो दादी उसे बताती हैं कि आज वह कहानी की जगह कुछ नीति-श्लोक सुनाएँगी, जिन्हें सुभाषित कहते हैं। बालिका के पूछने पर दादी समझाती हैं कि सुभाषित पढ़ने से मनुष्य को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है, और यह हमें बताते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। इसी प्रेरणा से आगे आठ सुभाषित श्लोक दिए गए हैं।

आठों सुभाषित श्लोक और सरल अर्थ

श्लोक सरल भावार्थ
1. गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे।
स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात्॥
देवता भी गाकर कहते हैं कि भारतभूमि पर जन्म लेने वाले मनुष्य धन्य हैं, क्योंकि यह भूमि स्वर्ग और मोक्ष का मार्ग है — इसलिए देवता भी यहाँ मनुष्य रूप में जन्म लेना चाहते हैं। (भारतभूमि की महिमा)
2. गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः।
पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः करी च सिंहस्य बलं न मूषकः॥
गुणी व्यक्ति ही दूसरे के गुण को पहचानता है, गुणहीन नहीं। जैसे कोयल वसंत के सौंदर्य को समझती है पर कौआ नहीं, और हाथी सिंह के बल को पहचानता है पर चूहा नहीं — वैसे ही केवल योग्य व्यक्ति ही योग्यता को समझ सकता है।
3. भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥
फलों से लदा वृक्ष झुक जाता है, जल से भरा बादल भी नीचे झुककर बरसता है — उसी तरह सज्जन लोग समृद्धि पाकर भी विनम्र और निरभिमानी बने रहते हैं। यही परोपकारी लोगों का स्वभाव होता है।
4. यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निघर्षणच्छेदनतापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते कुलेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥
जैसे सोने की शुद्धता घिसकर, काटकर, तपाकर और ठोककर परखी जाती है, वैसे ही व्यक्ति की परख उसके कुल (परिवार), स्वभाव, गुण और कर्म — इन चार बातों से होती है।
5. अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा च कौल्यं च दमः श्रुतं च।
पराक्रमश्चाबहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च॥
बुद्धि, अच्छे कुल में जन्म, इंद्रियों पर संयम, शास्त्र-ज्ञान, पराक्रम, कम बोलना, सामर्थ्य अनुसार दान और कृतज्ञता — ये आठ गुण मनुष्य को समाज में सम्मान दिलाते हैं।
6. न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः वृद्धा न ते ये न वदन्ति धर्मम्।
धर्मः स नो यत्र न सत्यमस्ति सत्यं न तद्यच्छलमभ्युपैति॥
वह सभा सभा नहीं जिसमें अनुभवी-ज्ञानी लोग न हों। वे ज्ञानी नहीं जो सही बात न कहें। वह धर्म धर्म नहीं जिसमें सत्य न हो। और वह सत्य सत्य नहीं जिसमें छल-कपट मिला हो।
7. दुर्जनेन समं सख्यं प्रीतिं चापि न कारयेत्।
उष्णो दहति चाङ्गारः शीतः कृष्णायते करम्॥
दुष्ट व्यक्ति से मित्रता नहीं करनी चाहिए — जैसे गर्म कोयला हाथ जला देता है और ठंडा होने पर भी हाथ को काला कर देता है, वैसे ही दुर्जन हर हाल में नुकसान ही पहुँचाता है।
8. यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत्।
एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यति॥
जैसे एक पहिए से रथ नहीं चल सकता, वैसे ही केवल भाग्य के भरोसे रहने से काम नहीं बनता — इंसान की मेहनत (पुरुषार्थ) के बिना भाग्य भी सफल नहीं होता।

महत्वपूर्ण शब्दार्थ

संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
सुभाषितम् सुंदर/हितकारी वचन
निर्गुणः गुणहीन
पिकः / वायसः कोयल / कौआ
फलोद्गमैः फलों के आने/भार से
अनुद्धताः अभिमानरहित
कनकम् सोना
प्रज्ञा / दमः / श्रुतम् बुद्धि / संयम / शास्त्र-ज्ञान
दुर्जनेन दुष्ट व्यक्ति से
अङ्गारः जलता/जला हुआ कोयला
दैवम् / पुरुषकारः भाग्य / पुरुषार्थ

अभ्यास प्रश्नों के हल

प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरं लिखत

प्रश्न उत्तर
गीतानि के गायन्ति? देवाः
कः बलं न वेत्ति? निर्बलः
कः वसन्तस्य गुणं वेत्ति? पिकः
मूषकः कस्य बलं न वेत्ति? सिंहस्य
फलोद्गमैः के नम्राः भवन्ति? तरवः
केन समं सख्यं न करणीयम्? दुर्जनेन
केन बिना दैवं न सिध्यति? पुरुषकारेण

प्रश्न 2: पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

  • तरवः फलोद्गमैः नम्राः भवन्ति।
  • समृद्धिभिः सत्पुरुषाः अनुद्धताः भवन्ति।
  • सत्पुरुषाणां स्वभावः परोपकारिणां भवति।
  • यत् सत्यं छलम् अभ्युपैति, तत् सत्यं न भवति।
  • पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यति।

प्रश्न 3: स्तम्भयोः मेलनं कुरुत

उक्तिः भावार्थः
गायन्ति देवाः किल गीतकानि भारतभूमेः माहात्म्यवर्णनम्
गुणी गुणं वेत्ति सज्जनः एव गुणानां मर्मज्ञः
भवन्ति नम्राः तरवः फलोद्गमैः सत्पुरुषाणां स्वाभाविकी नम्रता
यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते सुवर्णं चतुर्भिः प्रकारैः परीक्ष्यते
अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा, दमः, दानं, कृतज्ञता इत्यादयः
दुर्जनेन समं सख्यं न कारयेत् दुष्टसङ्गः उष्णाङ्गारसदृशः
एकेन चक्रेण न रथस्य गतिः केवलं दैवं प्रयत्नं विना असिद्धम्

प्रश्न 4: रिक्तस्थानपूर्तिः (मञ्जूषा से)

मञ्जूषा: फलोद्गमैः, गुणं, कृतज्ञता, सिध्यति, श्रुतम्, शीलेन

अपूर्ण वाक्य सही शब्द
गुणी ______ वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः। गुणं
भवन्ति नम्राः तरवः ______। फलोद्गमैः
पुरुषः परीक्ष्यते कुलेन, ______, गुणेन, कर्मणा। शीलेन
गुणाः पुरुषं दीपयन्ति — प्रज्ञा, कौल्यं, दमः, ______। श्रुतम्
दानं यथाशक्ति ______ च। कृतज्ञता
एवं पुरुषकारेण विना दैवं न ______। सिध्यति

प्रश्न 5: समुचितं विकल्पं चिनुत

प्रश्न सही विकल्प
"गायन्ति देवाः किल गीतकानि" श्लोक का मुख्य विषय क्या है? भारतभूमेः गौरवम्
"गुणी गुणं वेत्ति" में गुण कौन नहीं जानता? निर्गुणः
"पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः" का तात्पर्य क्या है? कोयल मधुर गाती है, कौआ नहीं
"भवन्ति नम्राः तरवः फलोद्गमैः" का अर्थ क्या है? फलों से लदे वृक्ष झुक जाते हैं
"न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः" का महत्व क्या है? धर्मोपदेश के लिए ज्ञानी लोग ज़रूरी
दुर्जन से मित्रता क्यों नहीं करनी चाहिए? वह गर्म कोयले जैसा हानिकारक होता है

परीक्षा हेतु त्वरित सुझाव

  • सभी आठों श्लोक अर्थ सहित कंठस्थ करें — इनमें से कोई भी श्लोक व्याख्या के लिए पूछा जा सकता है।
  • हर श्लोक की एक-एक पंक्ति में मुख्य शिक्षा (जैसे विनम्रता, दुर्जन-त्याग, पुरुषार्थ) नोट कर लें।
  • शब्दार्थ तालिका को बार-बार दोहराएँ, क्योंकि रिक्तस्थान और मेलन वाले प्रश्न इन्हीं शब्दों पर आधारित होते हैं।
  • दादी-पोती के संवाद से "सुभाषित" शब्द की परिभाषा (सु + भाषित) ज़रूर याद रखें, यह अक्सर पूछी जाती है।

Naina Saini

"Naina Saini is an Editorial Intern at Aapbiti, specializing in publishing and managing education-focused news articles. Operating under the direct mentorship and guidance of Shakti Rao Mani, the Product Owner of aapbiti.com, Naina is dedicated to delivering accurate, timely, and engaging academic updates. Her role focuses on keeping readers informed about educational trends, exams, admissions, and key academic policies."

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