NCERT Class 9 Sanskrit Chapter 4: Sa Devi Sarvabhuteshu Shaktirupena Samsthita | सा देवी शक्तिरूपेण संस्थिता व्याख्या

NCERT कक्षा 9 की संस्कृत पुस्तक ऋषिकुल्या के चतुर्थ पाठ 'सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता' की विस्तृत हिंदी व्याख्या, जिसमें महिला दिवस की नाटिका, नारी के सात आभूषण, वीराङ्गना विश्पला व गुंजन सक्सेना की कथाएँ — चित्रों सहित — शामिल हैं।

Aug 27, 2026 - 23:09
Updated: 18 hours ago
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कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 4 'सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता' का फीचर्ड चित्र, जिसमें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह, मंच पर भाषण देती महिला, अतिथि, श्रोतागण और पुस्तक का आकर्षक कवर दर्शाया गया है।
यह चित्र कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 4 – "सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता" पर आधारित एक आकर्षक फीचर्ड इमेज है। बाईं ओर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह का दृश्य दिखाया गया है, जहाँ मंच पर एक महिला वक्ता उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रही हैं। मंच पर सम्मानित अतिथि, दीप प्रज्वलन, पुष्प सज्जा और श्रोताओं की उपस्थिति महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और नेतृत्व का संदेश देती है। दाईं ओर अध्याय का सुंदर पुस्तक कवर प्रदर्शित है, जिसमें नारी शक्ति का प्रतीकात्मक चित्र, पुस्तकें, लेखन सामग्री

NCERT की संस्कृत पाठ्यपुस्तक ऋषिकुल्या (कक्षा 9) का चतुर्थ पाठ "सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता" अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक विद्यालयी कार्यक्रम के संवाद-रूप (नाटिका) में प्रस्तुत है। पाठ में तीन मुख्य पात्र हैं — मेधा (कार्यक्रम की संचालिका), युगन्धरा (मुख्य अतिथि, जनपद-प्रशासनाधिकारिणी) और अन्वीक्षा (कार्यक्रम की अध्यक्षा, उच्च न्यायालय की भूतपूर्व न्यायाधीशा)। यह लेख कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए पाठ की विषयवस्तु, संस्कृत शब्दावली और अभ्यासों की विस्तृत हिंदी व्याख्या प्रस्तुत करता है।

चारों पाठों को एक साथ देखें तो ऋषिकुल्या पाठ्यपुस्तक की विषय-विविधता स्पष्ट होती है — संविधान, प्राचीन ज्ञान-परंपरा और आयुर्वेद के पश्चात् यह चतुर्थ पाठ नारी-शक्ति और साहस के विषय को संस्कृत के माध्यम से प्रस्तुत करता है। सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति के अंतर्गत मान्यता-प्राप्त इस भाषा में विषयों की यही व्यापकता संस्कृत को केवल व्याकरण तक सीमित नहीं रहने देती, ठीक वैसे ही जैसे गणित मंजरी जैसी नई पाठ्यपुस्तकें भी कक्षा 9 के पाठ्यक्रम को समृद्ध कर रही हैं।

पाठ का सार — महिला दिवस पर एक संवाद-नाटिका

पाठ का आरंभ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दृश्य से होता है, जिसमें स्वयंप्रभा महिला-स्वयंसेविका-संस्था की ओर से मेधा कार्यक्रम का संचालन करती है। मुख्य अतिथि के रूप में जनपद की प्रशासनाधिकारिणी युगन्धरा महोदया तथा अध्यक्ष के रूप में उच्च न्यायालय की भूतपूर्व न्यायाधीशा अन्वीक्षा महोदया मंच की शोभा बढ़ाती हैं। मेधा दोनों अतिथियों का तुलसी के पौधे और पुस्तक भेंट कर स्वागत करती है, और यह भी बताती है कि दोनों अतिथियों के नाम ही सार्थक (अन्वर्थ) हैं।

नारी के वास्तविक आभूषण

युगन्धरा महोदया अपने भाषण में सबसे पहले नारी-शक्ति को प्रणाम करती हैं, और यह प्रश्न उठाती हैं कि नारी के वास्तविक आभूषण क्या हैं — क्या स्वर्ण और रजत से बने महँगे हार-कुंडल ही उनके सच्चे आभूषण हैं? इसके उत्तर में वे एक सुभाषित का स्मरण करती हैं:

"बुद्ध्युत्साह-स्मृति-प्रज्ञा-कला-धृति-सहिष्णुताः। नारीणां भूषणान्येवं न मात्रं रूपचारुता॥"

अर्थात् बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, विविध कलाएँ, धृति (धैर्य) और सहिष्णुता — ये सात गुण ही नारी के वास्तविक आभूषण हैं, न कि केवल रूप की सुंदरता।

नारी के सात वास्तविक आभूषणों का प्रतीकात्मक चित्रण

चित्र विवरण: बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति और सहिष्णुता — नारी के सात वास्तविक आभूषण।

वीराङ्गना विश्पला की कथा

इन्हीं आभूषणों से सुशोभित नारियों के उदाहरण के रूप में युगन्धरा वैदिक काल की वीराङ्गना विश्पला की कथा सुनाती हैं। प्राचीन भारत की इसी कालखंड की पृष्ठभूमि आदि मानव और सभ्यता का आरंभ अध्याय में भी मिलती है। पाठ के अनुसार वैदिक युग में "खेल" नामक एक राजा था, जिसकी पत्नी विश्पला युद्ध-निपुण वीराङ्गना थी। एक बार युद्ध में विश्पला रणभूमि में उतरी और शत्रुओं से घिर गई; उसका एक पैर शस्त्रों से कट गया। भीषण पीड़ा सहते हुए भी उसका उत्साह भंग नहीं हुआ और उसका निश्चय अटूट रहा। उसके इस साहस से प्रभावित होकर मार्गदर्शक महर्षि अगस्त्य ने उसी रात्रि देव-चिकित्सक अश्विनीकुमारों को बुलाया, जिन्होंने विश्पला के लिए लोहे से बना कृत्रिम पैर तैयार किया। नए उत्साह के साथ विश्पला पुनः युद्ध में उतरी और विजयश्री प्राप्त की। पाठ उसे वेदकालीन नारी-रत्नों — गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा, अपाला — के मध्य माणिक्य के समान बताता है। संकट में धैर्य न खोने का यही भाव कक्षा 8 की संस्कृत पुस्तक दीपकम् के द्वितीय पाठ की कथा में भी मिलता है, जहाँ एकजुटता संकट को टाल देती है।

आधुनिक युग की वीराङ्गना — गुंजन सक्सेना

पाठ के अनुसार वीराङ्गनाओं की यह परंपरा आधुनिक काल में भी निरंतर बनी हुई है, जिसके उदाहरण के रूप में कारगिल-युद्ध की वीराङ्गना गुंजन सक्सेना का उल्लेख किया गया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की निवासी इस महिला ने भारतीय वायुसेना का वैमानिक-प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर प्रथम महिला युद्ध-वैमानिकी होने का गौरव प्राप्त किया। पाठ के अनुसार कारगिल-युद्ध के दौरान युद्ध-विमान उड़ाते हुए उन्होंने अनेक घायल व संकटग्रस्त सैनिकों को युद्धभूमि से सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया, तथा युद्धरत सैनिकों तक आवश्यक सामग्री की आपूर्ति भी की। संकटपूर्ण परिस्थिति में उनके प्रदर्शित शौर्य व धैर्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया। पाठ यह भी बताता है कि वायुसेना में उनका प्रवेश और प्रशिक्षण सहज नहीं था, फिर भी सभी बाधाओं की परवाह न करते हुए उन्होंने निर्भय मन से अपनी देशसेवा निभाई।

वीराङ्गना विश्पला और गुंजन सक्सेना — प्राचीन व आधुनिक युग का प्रतीकात्मक चित्रण

चित्र विवरण: वैदिक काल की वीराङ्गना विश्पला और आधुनिक युग की वीराङ्गना गुंजन सक्सेना — वीरता की सतत परंपरा।

पूजनीय वीरांगनाएं और नारी-गौरव की परंपरा

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षा अन्वीक्षा महोदया अपने भाषण में रानी लक्ष्मीबाई, जिजाबाई, अहल्यादेवी, चेन्नमा, रुद्रमाम्बा, भगिनी निवेदिता, शारदादेवी और सावित्री जैसी पूज्य नारियों का स्मरण करती हैं, और कहती हैं कि ये सभी अपने कर्तृत्व से स्वयं-प्रकाशित (स्वयंप्रभा) पुण्यश्लोक नारियाँ रही हैं। भारत के राजनैतिक व सामाजिक इतिहास में ऐसी अनेक उल्लेखनीय हस्तियाँ हुई हैं, जिनकी झलक 1000 ईस्वी तक राज्य और समाज अध्याय में भी मिलती है। वे विद्यार्थियों को इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आह्वान करती हैं।

समान प्रगति का संदेश

युगन्धरा महोदया अपने भाषण के अंत में एक श्लोक के माध्यम से यह संदेश देती हैं:

"पुरुषाणामिव स्त्रीणां सर्वाङ्गीणा समुन्नतिः। यत्र स्यात् तत्र राष्ट्रे हि स्वर्गः प्रावतरिष्यति॥"

अर्थात् जिस प्रकार पुरुषों की, उसी प्रकार स्त्रियों की भी सर्वांगीण उन्नति जिस राष्ट्र में होती है, वहाँ मानो स्वर्ग ही उतर आता है। इसी भाव को आगे बढ़ाते हुए अन्वीक्षा महोदया भी अपने समापन-श्लोक में कामना करती हैं:

"महिलागुणशक्तीनां प्राकृतानां विकासनम्। सुशिक्षणैः सुसंस्कारैर्भूयो भवतु भारते॥"

अर्थात् भारत में उत्तम शिक्षा और उत्तम संस्कारों के माध्यम से महिलाओं की स्वाभाविक गुण-शक्तियों का और अधिक विकास हो।

स्त्री और पुरुष की समान प्रगति का प्रतीकात्मक चित्रण

चित्र विवरण: जिस राष्ट्र में स्त्री-पुरुष दोनों की समान प्रगति होती है, वहाँ उन्नति की सच्ची नींव पड़ती है।

पाठ की महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दावली

पाठ के साथ दी गई शब्दावली-सूची "सर्वं शब्देन भासते" में इस पाठ से जुड़े कई महत्वपूर्ण शब्द समझाए गए हैं। कुछ प्रमुख शब्द नीचे दिए गए हैं:

संस्कृत शब्द अर्थ (हिंदी) Meaning (English)
जनपदप्रशासनाधिकारिणी जिलाध्यक्षा District collector
भूतपूर्वन्यायाधीशा पूर्व न्यायाधीश Ex magistrate
अन्वर्थम् सार्थक Having a meaningful name
महार्घाणि महँगे Expensive
सहिष्णुता क्षमाशीलता Tolerance
रूपचारुता रूप की सुन्दरता Beauty
परिवेष्टिता घिरी हुई Surrounded
हतोत्साहा जिसका उत्साह नष्ट हो गया हो Disappointed
निर्धारः निर्णय Affirmation
अक्षय्यम् जो क्षय न हो सके Imperishable
वीरोचितभावम् वीरों के योग्य आचरण Valorous attitude
झञ्झावातवत् तूफान की तरह Like a hurricane
क्षात्रतेजोयुता क्षात्र तेज से परिपूर्ण Radiant with warrior spirit
व्रणितान् जख्मी Wounded
अविगणय्य परवाह न करते हुए Without heeding
सर्वाङ्गीणा सभी अंगों से परिपूर्ण Belonging to all spheres
समुन्नतिः सभी प्रकार से विकास Prosperity
स्वयंप्रभा अपने ही तेज से चमकनेवाली Self-luminous
पुण्यश्लोकाः पावन चरित्र वाली Woman of holy reputation
प्राकृतानाम् स्वाभाविकों का Natural

पाठ में "जनपदप्रशासनाधिकारिणी" (षष्ठी-तत्पुरुष), "भूतपूर्वन्यायाधीशा" (कर्मधारय), "महार्घाणि" व "हतोत्साहा" (बहुव्रीहि), और "अक्षय्यम्" (नञ्-तत्पुरुष) जैसे विविध समासों के उदाहरण भी दिए गए हैं, जो कक्षा 9 के समास-प्रकरण के अभ्यास के लिए उपयोगी हैं। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए अपने पाठ्य-वाचन कौशल को और निखारने का एक अवसर राष्ट्रीय काव्य उत्सव 2026 के रूप में भी उपलब्ध है।

श्लोकों का स्रोत — ग्रामगीतामृतम्

पिछले पाठ के विपरीत, जिसके श्लोक प्राचीन आयुर्वेद-ग्रंथों से लिए गए थे, इस पाठ के दोनों समापन-श्लोक "ग्रामगीतामृतम्" नामक ग्रंथ से उद्धृत किए गए हैं — "पुरुषाणामिव स्त्रीणां सर्वाङ्गीणा समुन्नतिः" वाला श्लोक ग्रामगीतामृतम् के अध्याय 20 के श्लोक 36 से, तथा "महिलागुणशक्तीनां प्राकृतानां विकासनम्" वाला श्लोक अध्याय 20 के श्लोक 18 से लिया गया है। पहला सुभाषित (बुद्ध्युत्साह-स्मृति-प्रज्ञा...) पाठ में बिना नामोल्लेख के "किञ्चित् सुभाषितम्" के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

अभ्यास और गतिविधियाँ

पाठ के अंत में "अभ्यासाद् जायते सिद्धिः" शीर्षक के अंतर्गत पठन-बोध, व्याकरण और शब्द-ज्ञान से जुड़े कई प्रकार के अभ्यास दिए गए हैं:

  • पाठ पर आधारित आठ प्रश्नों के उत्तर लिखना — जैसे महिला दिवस, विश्पला व गुंजन सक्सेना से जुड़े प्रश्न
  • रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न-निर्माण करना
  • वाक्यों में विशेषण (गुणवाचक पद) और विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जाए) को पहचानना
  • दिए गए पदों का समास-विग्रह अथवा मेलन करना
  • पाठ के वाक्यों को उनके मूल क्रम में पुनः व्यवस्थित करना

पाठ के साथ "स्वाध्यायान्मा प्रमदः" खंड में तीनों श्लोकों का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ भी दिया गया है। "यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्" खंड में विद्यार्थियों को विद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम हेतु एक निमंत्रण-पत्र लिखने — जिसमें कार्यक्रम का नाम, स्थान, दिनांक, समय, अध्यक्ष-अतिथि-वक्ता के नाम तथा मुख्य आकर्षण-बिंदु सम्मिलित हों — तथा एक चित्र (वीराङ्गना माता व उसके पुत्र) के आधार पर संक्षिप्त संवाद तैयार करने का कार्य दिया गया है।

प्रश्न एवं उत्तर

पाठ के विभिन्न भागों पर आधारित कुछ प्रश्न और उनके उत्तर नीचे दिए गए हैं:

प्रश्न 1: यह पाठ किस अवसर पर आधारित है?

उत्तर: यह पाठ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर आयोजित एक विद्यालयी कार्यक्रम की नाटिका के रूप में प्रस्तुत है।

प्रश्न 2: पाठ में तीन मुख्य पात्र कौन-से हैं?

उत्तर: मेधा (संचालिका), युगन्धरा (मुख्य अतिथि, जनपद-प्रशासनाधिकारिणी) और अन्वीक्षा (अध्यक्षा, भूतपूर्व न्यायाधीशा)।

प्रश्न 3: नारी के सात वास्तविक आभूषण कौन-से बताए गए हैं?

उत्तर: बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति और सहिष्णुता — ये सात गुण नारी के वास्तविक आभूषण हैं।

प्रश्न 4: वीराङ्गना विश्पला किस काल की थी और उसके साथ क्या घटना हुई?

उत्तर: विश्पला वैदिक काल की वीराङ्गना थी, जिसका एक पैर युद्ध में शत्रुओं के शस्त्रों से कट गया था, परन्तु अश्विनीकुमारों द्वारा बनाए गए कृत्रिम पैर के साथ उसने पुनः युद्ध में विजय प्राप्त की।

प्रश्न 5: विश्पला के लिए कृत्रिम पैर किसने और किस वस्तु से बनाया?

उत्तर: देव-चिकित्सक अश्विनीकुमारों ने उसके लिए लोहे से बना कृत्रिम पैर तैयार किया।

प्रश्न 6: गुंजन सक्सेना कौन थीं और उन्हें किस उपलब्धि के लिए जाना जाता है?

उत्तर: पाठ के अनुसार गुंजन सक्सेना उत्तर प्रदेश की निवासी भारतीय वायुसेना की प्रथम महिला युद्ध-वैमानिकी थीं, जिन्होंने कारगिल-युद्ध में सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने का कार्य किया।

प्रश्न 7: गुंजन सक्सेना को किस सम्मान से सम्मानित किया गया?

उत्तर: पाठ के अनुसार संकटपूर्ण परिस्थिति में प्रदर्शित शौर्य व धैर्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया।

प्रश्न 8: वेदकालीन नारी-रत्नों में विश्पला के साथ किन नामों का उल्लेख है?

उत्तर: गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा और अपाला के साथ विश्पला का उल्लेख वेदकालीन नारी-रत्नों में किया गया है।

प्रश्न 9: अन्वीक्षा महोदया ने अपने भाषण में किन पूज्य नारियों का स्मरण किया?

उत्तर: रानी लक्ष्मीबाई, जिजाबाई, अहल्यादेवी, चेन्नमा, रुद्रमाम्बा, भगिनी निवेदिता, शारदादेवी और सावित्री का।

प्रश्न 10: पाठ के समापन-श्लोक किस ग्रंथ से उद्धृत हैं?

उत्तर: पाठ के दोनों समापन-श्लोक "ग्रामगीतामृतम्" नामक ग्रंथ से उद्धृत हैं।

प्रश्न 11: "पुरुषाणामिव स्त्रीणां सर्वाङ्गीणा समुन्नतिः" श्लोक का क्या भावार्थ है?

उत्तर: जिस राष्ट्र में पुरुषों के समान स्त्रियों की भी सर्वांगीण उन्नति होती है, वहाँ मानो स्वर्ग ही उतर आता है।

प्रश्न 12: कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत किस प्रकार किया गया?

उत्तर: मेधा ने युगन्धरा और अन्वीक्षा महोदया का स्वागत तुलसी के पौधे और पुस्तक भेंट कर किया।

पाठ से मुख्य सीख

इस पाठ से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित मुख्य बातें उभर कर आती हैं:

  • नारी के वास्तविक आभूषण बाह्य श्रृंगार नहीं, अपितु बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति और सहिष्णुता जैसे आंतरिक गुण हैं।
  • वीरता और साहस की परंपरा भारत में वैदिक काल से आधुनिक युग तक निरंतर चली आ रही है — विश्पला से लेकर गुंजन सक्सेना तक।
  • शारीरिक बाधा भी दृढ़ निश्चय और साहस के आगे बाधक नहीं बन पाती, जैसा विश्पला की कथा दर्शाती है।
  • समाज और राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए स्त्री और पुरुष दोनों की समान प्रगति आवश्यक है।
  • उत्तम शिक्षा और संस्कार महिलाओं की स्वाभाविक गुण-शक्तियों के विकास में सहायक होते हैं।

इस प्रकार यह पाठ संस्कृत भाषा-कौशल के साथ-साथ नारी-शक्ति, साहस और समान प्रगति के मूल्यों की समझ भी विद्यार्थियों तक पहुँचाता है। कक्षा 9 के अन्य विषयों की व्याख्या के लिए विद्यार्थी सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 भी देख सकते हैं, जहाँ भूगोल, इतिहास, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र से जुड़ी बुनियादी अवधारणाएँ समझाई गई हैं।

Frequently Asked Questions

यह NCERT कक्षा 9 संस्कृत ऋषिकुल्या का चतुर्थ पाठ है, जो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित एक विद्यालयी कार्यक्रम की नाटिका के रूप में नारी-शक्ति, वीरता और साहस के विषय को प्रस्तुत करता है।

बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति और सहिष्णुता — ये सात गुण नारी के वास्तविक आभूषण हैं, न कि केवल रूप की सुंदरता।

विश्पला वैदिक काल की एक वीराङ्गना थी, जिसका पैर युद्ध में कट गया था, परन्तु अश्विनीकुमारों द्वारा बनाए गए कृत्रिम पैर के साथ उसने पुनः युद्ध में विजय प्राप्त की।

पाठ के अनुसार गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना की प्रथम महिला युद्ध-वैमानिकी थीं, जिन्होंने कारगिल-युद्ध में अपने साहस के लिए शौर्य चक्र प्राप्त किया।

पाठ के दोनों समापन-श्लोक "ग्रामगीतामृतम्" नामक ग्रंथ से उद्धृत हैं, जो स्त्री-पुरुष की समान प्रगति और महिलाओं के गुण-विकास का संदेश देते हैं।
Yash Kumar

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