Class 9 Science Chapter 11 – जनन: जीवन कैसे जारी रहता है | सम्पूर्ण हिंदी व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
NCERT Exploration Class 9 Science Chapter 11 Reproduction हिंदी में – अलैंगिक जनन, वानस्पतिक प्रसार, अर्धसूत्री विभाजन, परागण, निषेचन, मानव जनन तंत्र, ऋतुस्राव चक्र सहित सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर एवं FAQ।
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अध्याय 11: जनन – जीवन कैसे जारी रहता है? परिचय
प्रत्येक जीव की एक निश्चित आयु होती है — वह जन्म लेता है, बढ़ता है, परिपक्व होता है, जनन करता है और अंततः मर जाता है। जनन (Reproduction) एक जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपनी ही प्रजाति के नए जीव उत्पन्न करते हैं — इससे ही पृथ्वी पर जीवन जारी रहता है। जनन दो मुख्य प्रकार का होता है — अलैंगिक (Asexual) और लैंगिक (Sexual)।
NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक: NCERT Exploration Class 9 Science Chapter 11
11.1 अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
अलैंगिक जनन में केवल एक जनक भाग लेता है और संतान आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है। यह जीवाणु (Bacteria), अमीबा, यीस्ट, हाइड्रा, स्पंज और अनेक पौधों में पाया जाता है।
पौधों में वानस्पतिक प्रसार (Vegetative Propagation)
जब नए पौधे पौधे के वानस्पतिक भागों (तना, पत्ती, जड़) से उगते हैं तो इसे वानस्पतिक प्रसार कहते हैं।
- आलू और अदरक: भूमिगत तनों से नए पौधे उगते हैं।
- मनी प्लांट / गन्ना: तने की कटिंग से नए पौधे।
- ब्रायोफिलम (Bryophyllum): पत्तियों के किनारों पर छोटे-छोटे पौधे (Plantlets) उगते हैं।
11.1.1 वानस्पतिक प्रसार के कृषि में लाभ
कृत्रिम वानस्पतिक प्रसार के प्रमुख तरीके:
- कटिंग (Cutting): पौधे की टहनी काटकर 45-60° कोण पर मिट्टी में लगाना। नोड और इंटरनोड वाली टहनी चुनें।
- रोपण/ग्राफ्टिंग (Grafting): दो पौधों को जोड़ना — Plant A (मूल, जड़ सहित) की शाखा पर चीरा लगाकर Plant B की कटिंग डालना। इससे एक ही पौधे पर अलग-अलग किस्मों के फूल/फल मिलते हैं।
- दाब (Layering): लचीली टहनी को मिट्टी में दबाकर जड़ निकलने देना (10-15 दिन), फिर मूल पौधे से काटना।
- ऊतक संवर्धन (Tissue Culture): पौधे के shoot tip (apical meristem) से प्रयोगशाला में पोषण माध्यम पर लाखों पौधे तैयार करना। केले की खेती में क्रांति आई है। वायरस-मुक्त स्वस्थ पौधे बड़ी मात्रा में उत्पन्न होते हैं।
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यीस्ट में मुकुलन (Budding in Yeast)
यीस्ट (Yeast) में जनक कोशिका से एक छोटी कली (Bud) निकलती है जो बड़ी होकर अलग हो जाती है — यह मुकुलन (Budding) है। हाइड्रा (Hydra) में भी मुकुलन होता है।
कवक में बीजाणु निर्माण (Spore Formation in Fungi)
ब्रेड पर उगने वाला फफूँद (Mould) बीजाणु (Spores) से आता है जो वायु में तैरते हैं। जब ये नमी और गर्मी (25-35°C) पाते हैं तो अंकुरित होकर नए जीव बनाते हैं। Rhizopus में थैली (Sac) में और Aspergillus में Hyphae पर Vesicle में बीजाणु बनते हैं।
इसीलिए खाना फ्रिज में रखते हैं — कम तापमान पर फफूँद नहीं पनपता।
फंगी के लाभ: जैविक अपशिष्ट विघटन, एंटीबायोटिक (पेनिसिलिन, अमॉक्सिसिलिन), औद्योगिक अपशिष्ट से भारी धातु हटाना।
अलैंगिक जनन का आधार: समसूत्री विभाजन (Mitosis)
सभी अलैंगिक जनन में समसूत्री विभाजन (Mitosis) होता है जिसमें दोनों पुत्री कोशिकाओं में जनक के समान गुणसूत्र होते हैं → संतान क्लोन (Clones) होती है — आनुवंशिक रूप से बिल्कुल एक जैसी।
11.2 लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
लैंगिक जनन में दो जनक भाग लेते हैं। दोनों की आनुवंशिक सामग्री संतान में मिलती है → विविधता उत्पन्न होती है। लेकिन यदि प्रत्येक पीढ़ी में दोनों जनकों के पूरे गुणसूत्र संतान को मिलते रहें तो गुणसूत्र संख्या दोगुनी होती जाएगी — इस समस्या का समाधान है अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)।
11.2.1 अर्धसूत्री विभाजन और विविधता
गुणसूत्र (Chromosomes): कोशिका के नाभिक में धागे जैसी संरचनाएँ जो आनुवंशिक जानकारी वहन करती हैं। मनुष्य में 23 जोड़े = 46 गुणसूत्र।
अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): वह विशेष कोशिका विभाजन जो युग्मक (Gametes) बनाता है। इसमें गुणसूत्र संख्या आधी (Haploid) हो जाती है।
- नर युग्मक = शुक्राणु (Sperm)
- मादा युग्मक = अंडाणु (Egg)
- पौधों में: पराग कण (Pollen grain) = नर युग्मक; बीजांड (Ovule) = मादा युग्मक
मनुष्य में प्रत्येक युग्मक में 23 गुणसूत्र होते हैं। निषेचन पर 23+23 = 46 → सामान्य संख्या।
विविधता का कारण: 3 जोड़े गुणसूत्रों से 2³ = 8 संयोजन; 23 जोड़ों से 2²³ = 83 लाख से अधिक संयोजन संभव। यही विविधता प्रजाति के अस्तित्व और विकास (Evolution) के लिए आवश्यक है।
11.2.2 आवृत्तबीजी पौधों में लैंगिक जनन
आवृत्तबीजी (Angiosperms) — फूल वाले पौधे — पृथ्वी पर सबसे विविध समूह। फूल जनन अंग हैं।
फूल की संरचना (Structure of Flower)
एक पूर्ण फूल में चार भाग होते हैं (बाहर से अंदर की ओर):
| भाग | कार्य | उप-भाग |
|---|---|---|
| बाह्यदल (Sepal) | कली में फूल की सुरक्षा; हरे रंग का | — |
| दल (Petal) | परागणकर्ताओं को आकर्षित करना; रंगीन, सुगंधित | — |
| पुंकेसर (Stamen) | नर जनन अंग — पराग कण बनाना | तंतु (Filament) + परागकोश (Anther) |
| स्त्रीकेसर (Pistil) | मादा जनन अंग — बीज और फल बनाना | वर्तिकाग्र (Stigma) + वर्तिका (Style) + अंडाशय (Ovary) |
- परागकोश (Anther): पराग कण (नर युग्मक) बनाता है।
- वर्तिकाग्र (Stigma): पराग ग्रहण करता है; चिपचिपा।
- अंडाशय (Ovary): बीजांड होते हैं; प्रत्येक बीजांड में अंडाणु (Egg cell)।
11.2.3 परागण (Pollination)
पराग कण का परागकोश से वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण परागण (Pollination) कहलाता है।
- स्व-परागण (Self-Pollination): पराग उसी फूल के या उसी पौधे के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर।
- पर-परागण (Cross-Pollination): पराग एक पौधे से दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र पर।
11.2.4 परागण की रणनीतियाँ (Pollination Strategies)
| माध्यम | पौधे | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| वायु (Wind) | गेहूँ, मक्का, चावल | हल्के छोटे पराग; लम्बा पंखदार वर्तिकाग्र |
| जल (Water) | Vallisneria, Hydrilla | जल धाराएँ पराग ले जाती हैं |
| कीट (Insects) | सूरजमुखी, गुड़हल, गेंदा | रंगीन, सुगंधित फूल; चिपचिपा बड़ा पराग |
| पक्षी (Birds) | मूँगा पेड़, गुड़हल | Indian white-eye, sunbird द्वारा |
11.2.5 निषेचन और बीज निर्माण (Fertilisation and Seed Formation)
पराग कण वर्तिकाग्र पर पहुँचने पर पराग नलिका (Pollen Tube) बनाता है जो वर्तिका से होते हुए अंडाशय तक जाती है। नर युग्मक अंडाणु से मिलता है — यह निषेचन (Fertilisation) है।
- निषेचित अंडाणु = युग्मनज (Zygote) → भ्रूण (Embryo)
- बीजांड (Ovule) → बीज (Seed)
- अंडाशय (Ovary) → फल (Fruit)
बीज वायु, जल, जंतुओं द्वारा फैलते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में बीज अंकुरित होकर नया पौधा बनाता है।
परागण की दक्षता तुलना
| रणनीति | पराग कण (प्रति फूल) | बीज निर्माण |
|---|---|---|
| वायु-परागण (मक्का, गेहूँ) | 5,00,000 – 10,00,000 | 50-200 |
| कीट-परागण (सूरजमुखी) | 20,000 – 40,000 | 800-1,000 |
वायु-परागण में अधिक पराग इसलिए — लक्षित परागणकर्ता नहीं → बर्बादी अधिक। कीट-परागण अधिक कुशल लेकिन पराग कम।
11.3 जंतुओं में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Animals)
बाह्य निषेचन (External Fertilisation)
मेंढक और मछली जैसे जलीय जंतुओं में मादा जल में अंडे देती है और नर उन पर शुक्राणु छोड़ता है। निषेचन शरीर के बाहर होता है। अधिकांश अंडे नष्ट हो जाते हैं इसलिए बहुत अधिक अंडे दिए जाते हैं।
आंतरिक निषेचन (Internal Fertilisation)
सरीसृप, पक्षी और स्तनधारियों में निषेचन मादा के शरीर के अंदर होता है। अंडों की संख्या कम लेकिन जीवित रहने की संभावना अधिक।
जंतुओं में जनन विविधता
| जंतु | निषेचन | अंडे | जीवित रहना |
|---|---|---|---|
| मछली | बाह्य | 100s-1000s | कम |
| मेंढक | बाह्य | 5000-50000 | कम |
| छिपकली | आंतरिक | 2-20 | मध्यम |
| पक्षी | आंतरिक | 1-15 | मध्यम-उच्च |
तितली का जीवन-चक्र: अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क (Adult)
11.5 मनुष्यों में जनन (Reproduction in Human Beings)
11.5.1 प्रजनन परिपक्वता (Reproductive Maturity)
बचपन से वयस्कता में परिवर्तन के दौरान जनन अंग परिपक्व होते हैं और युग्मक बनने लगते हैं।
11.5.2 पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System)
प्रमुख अंग:
- वृषण (Testes): शुक्राणु बनाते हैं; वृषण-कोश (Scrotum) में स्थित — शरीर से थोड़ा ठंडा रहता है जो शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक। हॉर्मोन भी स्रावित करते हैं।
- शुक्रवाहिका (Vas Deferens): शुक्राणु को वृषण से मूत्रमार्ग तक ले जाती है।
- शुक्राशय (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland): शुक्राणु को पोषण और गतिशीलता देने वाले द्रव स्रावित करते हैं।
- मूत्रमार्ग (Urethra): मूत्र और शुक्राणु का साझा मार्ग।
- शुक्राणु की संरचना: सिर (आनुवंशिक सामग्री) + लम्बी पूँछ (तैरने के लिए)।
11.5.3 स्त्री जनन तंत्र (Female Reproductive System)
- अंडाशय (Ovaries): अंडाणु बनाती हैं; हॉर्मोन स्रावित करती हैं।
- डिम्बवाहिनी / फैलोपियन नली (Oviduct/Fallopian Tube): अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है।
- गर्भाशय (Uterus): थैलीनुमा संरचना जहाँ भ्रूण विकसित होता है।
- ग्रीवा (Cervix): गर्भाशय और योनि के बीच संकरा मार्ग।
- योनि (Vagina): शुक्राणु प्रवेश मार्ग और प्रसव मार्ग।
11.5.4 युग्मकजनन (Gametogenesis)
युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया। मनुष्य कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र → अर्धसूत्री विभाजन से शुक्राणु/अंडाणु में 23। निषेचन पर 23+23 = 46।
शुक्राणु बनाम अंडाणु तुलना
| विशेषता | शुक्राणु (Sperm) | अंडाणु (Egg) |
|---|---|---|
| आकार | बहुत छोटा | बड़ा |
| संख्या | करोड़ों | कुछ ही |
| संचित पोषण | अनुपस्थित | उपस्थित |
| गतिशीलता | सक्रिय (पूँछ से तैरता) | गतिहीन |
11.5.5 निषेचन प्रक्रिया
अंडोत्सर्ग (Ovulation): यौवन से प्रत्येक माह एक परिपक्व अंडाणु किसी एक अंडाशय से निकलता है। यह फैलोपियन नली में जाता है।
लाखों शुक्राणु योनि से प्रवेश करते हैं → फैलोपियन नली तक तैरते हैं → एक शुक्राणु अंडाणु से मिलता है → युग्मनज (Zygote) बनता है।
युग्मनज → समसूत्री विभाजनों से → गर्भाशय की भित्ति में रोपण (Implantation) → गर्भावस्था (Pregnancy) प्रारंभ।
11.5.6 अनिषेचित अंडाणु: ऋतुस्राव (Menstruation)
यदि अंडाणु का निषेचन न हो तो वह 1-2 दिन में नष्ट हो जाता है। गर्भाशय की मोटी रक्त-नाडियों से भरपूर परत की आवश्यकता नहीं → यह परत रक्त सहित योनि से बाहर निकलती है — यही ऋतुस्राव/माहवारी (Menstruation) है। 3-7 दिन तक।
ऋतुस्राव चक्र (Menstrual Cycle) — 28 दिन का
| चरण | दिन | क्या होता है |
|---|---|---|
| ऋतुस्राव | 1-5 | गर्भाशय की परत का निष्कासन |
| पुनर्निर्माण | 6-14 | परत धीरे-धीरे पुनः बनती है; अंडाशय में अंडाणु परिपक्व होता है |
| अंडोत्सर्ग | ~14 | परिपक्व अंडाणु निकलता है |
| तैयारी | 15-28 | गर्भाशय परत मोटी; निषेचन न हो तो चक्र दोहराता है |
चक्र 21-35 दिनों में; यौवन (10-14 वर्ष) से रजोनिवृत्ति (Menopause, ~50 वर्ष) तक।
बच्चे का लिंग निर्धारण: माँ हमेशा X देती है। पिता X (लड़की: XX) या Y (लड़का: XY) देता है → बच्चे का लिंग पिता निर्धारित करता है।
11.5.7 गर्भावस्था और प्रसव (Pregnancy and Childbirth)
गर्भावस्था ~9 माह = तीन त्रैमास (Trimesters):
- प्रथम त्रैमास: भ्रूण निर्माण; प्रमुख अंगों का निर्माण; 9वें सप्ताह से भ्रूण को भ्रूणशिशु (Foetus) कहते हैं।
- द्वितीय त्रैमास: भ्रूणशिशु बड़ा और मजबूत; माँ को हरकत महसूस होती है।
- तृतीय त्रैमास: तेज़ वृद्धि; जन्म के लिए तैयारी।
प्रसव: गर्भाशय की पेशियाँ संकुचित होकर भ्रूणशिशु को जन्म नाल से बाहर करती हैं। जन्म के बाद स्तनपान आवश्यक।
11.5.8-11.5.10 यौन परिपक्वता और जिम्मेदारी
यौन संचारित संक्रमण (STIs): Gonorrhoea, Herpes, Syphilis, HIV/AIDS। कंडोम STI रोकने में सहायक।
गर्भनिरोधक विधियाँ:
- बाधा विधि: Condom, Vaginal Cover — शुक्राणु को अंडाणु तक नहीं जाने देते।
- हॉर्मोनल: Oral Pills — अंडाणु निकलने की प्रक्रिया रोकती हैं।
- IUD: Copper-T — गर्भाशय में लगाया जाता है।
- शल्य विधि: Vas deferens (पुरुष) या फैलोपियन नली (स्त्री) को बंद करना।
- गर्भपात (Abortion): अनचाही गर्भावस्था समाप्त करना; प्रथम त्रैमास में ही। भारत में लिंग-निर्धारण परीक्षण कानूनन निषिद्ध है।
Pause and Ponder – सभी प्रश्नों के उत्तर
प्र. 1: गुड़हल में पराग नलिका वर्तिका से गुज़र रही है — अगली प्रक्रिया?
उत्तर: निषेचन (Fertilisation) होने वाला है। पराग नलिका अंडाशय में बीजांड तक पहुँचेगी और नर युग्मक अंडाणु से मिलेगा → युग्मनज बनेगा।
प्र. 2: मदार और डैंडेलियन बीज — किस प्रकार का बीज-प्रकीर्णन?
उत्तर: दोनों वायु-प्रकीर्णन (Wind Dispersal) के लिए अनुकूलित हैं। मदार के बीजों पर रेशमी बाल और डैंडेलियन पर पैराशूट जैसी संरचनाएँ होती हैं जो उन्हें हवा में तैरने में मदद करती हैं।
प्र. 3: मक्का की दो किस्में — एक से दूसरे में पराग जाने पर बीज
उत्तर: पर-परागण (Cross-Pollination) — एक पौधे का पराग दूसरे पौधे के वर्तिकाग्र पर।
प्र. 4: बाह्य निषेचन में अधिक अंडे क्यों?
उत्तर: बाह्य निषेचन में अंडे पानी में खुले होते हैं → जल धाराओं, शिकारियों और अन्य कारणों से अधिकांश नष्ट हो जाते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में अंडे देने से कुछ अंडे बचकर नए जीव बनाने में सफल होते हैं।
प्र. 5: कौन-सी विधि में युग्मक अधिक सुरक्षित?
उत्तर: आंतरिक निषेचन (Internal Fertilisation) — मादा के शरीर के अंदर निषेचन होता है, युग्मक बाहरी खतरों से सुरक्षित।
प्र. 6: रवि की शारीरिक बदलाव — कौन-सा जीवन-काल?
उत्तर: यौवन (Puberty) — रवि किशोरावस्था में प्रवेश कर रहा है जहाँ जनन अंग परिपक्व होते हैं।
प्र. 7: रीना का चक्र 28 दिन, आखिरी माहवारी 5 मार्च
अगली माहवारी = 5 मार्च + 28 दिन = 2 अप्रैल
प्र. 8: मानव युग्मनज में गुणसूत्र
शुक्राणु (23) + अंडाणु (23) = 46 गुणसूत्र
प्र. 9: STI से बचाव के लिए सुरक्षात्मक साधन
कंडोम (Condom) — नर/मादा दोनों के लिए उपलब्ध। यह बाधा बनाकर STI के संचरण और गर्भावस्था दोनों को रोकता है।
प्र. 10: Oral Pills + बिना कंडोम — क्या जोखिम बचता है?
STI का जोखिम बना रहता है। Oral Pills केवल हॉर्मोन बदलकर अंडाणु निकलना रोकती हैं — ये शारीरिक बाधा नहीं बनातीं। STI (Gonorrhoea, HIV आदि) वायरस/जीवाणु से होते हैं जो कंडोम से रुकते हैं।
प्र. 11: मानव बच्चे की लंबी निर्भरता — फायदे और नुकसान
फायदे: अधिक समय तक सीखने का अवसर → उच्च बौद्धिक विकास; मज़बूत सामाजिक बंधन; माता-पिता से कौशल सीखना; बड़ा और जटिल मस्तिष्क विकास।
नुकसान: माता-पिता पर लम्बे समय तक बोझ; शिशु लम्बे समय तक शिकारियों के प्रति संवेदनशील; कम बच्चों को जन्म देना।
Revise, Reflect, Refine – सभी प्रश्नों के हल
प्रश्न 1: परागकोश हटाए, दूसरे पौधे का पराग लगाया → कौन-सी प्रक्रिया?
उत्तर: (ii) पर-परागण (Cross-Pollination)
परागकोश हटाने से स्व-परागण असंभव हुआ। दूसरे पौधे का पराग = पर-परागण।
प्रश्न 2: लैंगिक जनन के चरण सही क्रम में
सही क्रम: (iii) परागण → (i) वर्तिकाग्र पर पराग अंकुरण → (ii) निषेचन → (iv) युग्मनज निर्माण
प्रश्न 3: Assertion-Reason (युग्मनज का तुरंत प्रत्यारोपण)
A: युग्मनज तुरंत गर्भाशय भित्ति से जुड़ता है → गलत। युग्मनज पहले कई समसूत्री विभाजन करता हुआ गर्भाशय तक यात्रा करता है, फिर प्रत्यारोपण होता है।
R: गर्भाशय भित्ति हमेशा युग्मनज ग्रहण के लिए तैयार रहती है → गलत। केवल ऋतुस्राव चक्र के 15-28वें दिन परत तैयार होती है।
उत्तर: (iv) A गलत है, R सत्य है — (यहाँ R अपेक्षाकृत अधिक सही है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान परत हमेशा बनी रहती है, पर चक्र में हमेशा नहीं।)
अधिक सटीक उत्तर: दोनों कथन अधूरे हैं, लेकिन A स्पष्ट रूप से गलत है।
प्रश्न 4: अलैंगिक जनन में संतान आनुवंशिक रूप से समान क्यों?
अलैंगिक जनन में समसूत्री विभाजन (Mitosis) होता है जिसमें पुत्री कोशिकाओं के गुणसूत्र जनक के समान होते हैं। एकल जनक होने से आनुवंशिक सामग्री में कोई मिश्रण नहीं → संतान जनक की क्लोन (Clone) होती है।
प्रश्न 5: गर्भावस्था में ऋतुस्राव चक्र क्यों रुकता है?
निषेचन और प्रत्यारोपण के बाद भ्रूण HCG (Human Chorionic Gonadotropin) हॉर्मोन स्रावित करता है जो गर्भाशय की परत को बनाए रखता है। परत नहीं झड़ती → ऋतुस्राव बंद। यह भ्रूण के पोषण के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 6: रात में खिलने वाले फूल सफेद/हल्के रंग के क्यों?
रात में खिलने वाले फूलों का परागण मुख्यतः पतंगों और चमगादड़ों द्वारा होता है जो निशाचर (Nocturnal) हैं। सफेद/हल्के रंग चाँदनी रात में अधिक दिखते हैं → परागणकर्ता आकर्षित होते हैं। दिन के फूलों के रंग मधुमक्खियों और तितलियों को आकर्षित करते हैं।
प्रश्न 7: वानस्पतिक प्रसार से उगे पौधे रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों?
वानस्पतिक प्रसार से सभी पौधे आनुवंशिक रूप से समान होते हैं। यदि कोई रोग उनमें से एक को प्रभावित करे तो सभी पौधे प्रभावित हो सकते हैं — कोई रोग-प्रतिरोधी विविधता नहीं। लैंगिक जनन में आनुवंशिक विविधता होती है → कुछ पौधे प्रतिरोधी हो सकते हैं।
प्रश्न 8: केवल स्व-परागण से आनुवंशिक विविधता पर प्रभाव?
स्व-परागण में केवल एक पौधे के जीन मिलते हैं → आनुवंशिक विविधता कम होती जाती है। पीढ़ियों बाद सभी पौधे अधिकांश लक्षणों में समान हो जाते हैं (inbreeding depression)। पर्यावरण बदलाव से अनुकूलन क्षमता घटती है।
प्रश्न 9: जल्दी और समान पौधे उगाने के लिए किसान को सुझाव
अलैंगिक/वानस्पतिक प्रसार के तरीके:
- ऊतक संवर्धन (Tissue Culture): थोड़े ऊतक से बड़ी संख्या में समान पौधे → सबसे तेज़ और प्रभावी।
- कटिंग: सस्ती, सरल — मनी प्लांट, गुड़हल के लिए।
- रोपण (Grafting): वांछित किस्म के गुण बनाए रखना।
ये प्रभावी हैं क्योंकि: समसूत्री विभाजन → आनुवंशिक रूप से समान → मातृ पौधे के सभी गुण बने रहते हैं।
प्रश्न 10: सुरेश का पराग अंकुरण प्रयोग (अलग-अलग चीनी सांद्रता)
(i) परीक्षण योग्य परिकल्पनाएँ:
- चीनी की सांद्रता पराग अंकुरण दर को प्रभावित करती है।
- एक इष्टतम सांद्रता पर अधिकतम अंकुरण होता है।
- बहुत कम (0%) या बहुत अधिक (10%) सांद्रता पर अंकुरण कम होता है।
(ii) समान रखने वाले मानदंड: तापमान, आर्द्रता, प्रकाश, समय, पराग का स्रोत (एक ही फूल), प्रत्येक स्लाइड पर पराग कणों की संख्या।
प्रश्न 11: टमाटर, गेहूँ, पपीता — परागण प्रकार
- टमाटर: पुंकेसर वर्तिकाग्र को ढकते हैं; फूल परागण के बाद खुलते हैं → स्व-परागण (Self-Pollination)
- गेहूँ: हल्के पराग कण; वायु द्वारा → पर-परागण (Cross-Pollination, वायु-परागण)
- पपीता: नर और मादा फूल अलग-अलग पेड़ों पर → पर-परागण (Cross-Pollination)
प्रश्न 12: सेब बाग और मधुमक्खी कॉलोनी प्रयोग
(i) परिकल्पनाएँ: मधुमक्खी कॉलोनी की उपस्थिति सेब का फल-स्थापन बढ़ाती है; मधुमक्खी कॉलोनी से फल-पतन घटता है; प्राकृतिक परागणकर्ताओं की कमी उत्पादन घटाती है।
(ii) मानदंड: स्वतंत्र चर: परागण विधि (प्राकृतिक बनाम मधुमक्खी कॉलोनी); आश्रित चर: फल-स्थापन (%), फल-पतन (%); नियंत्रित: सेब की किस्म, भौगोलिक स्थिति, कृषि विधि।
(iii) विश्लेषण: ग्राफ से — Place B (मधुमक्खी कॉलोनी): फल-स्थापन ~40%, फल-पतन ~8%। Place A (प्राकृतिक): फल-स्थापन ~25%, फल-पतन ~35%।
(iv) निष्कर्ष: मधुमक्खी कॉलोनी से फल-स्थापन अधिक और फल-पतन कम → उच्च उत्पादन। प्राकृतिक परागणकर्ताओं की घटती संख्या गंभीर समस्या है; मधुमक्खी पालन एक प्रभावी समाधान है।
प्रश्न 13: "अंडोत्सर्ग हमेशा दिन 14 पर होता है" — समीक्षा
दावा आंशिक रूप से गलत है। कारण:
- दिन 14 28-दिन के औसत चक्र के लिए है। चक्र 21-35 दिन का हो सकता है → अंडोत्सर्ग दिन अलग होगा।
- अंडोत्सर्ग अगले माहवारी से ~14 दिन पहले होता है — न कि हमेशा दिन 14 पर।
- तनाव, बीमारी, वजन बदलाव, हॉर्मोन असंतुलन अंडोत्सर्ग का दिन बदल सकते हैं।
- 35-दिन के चक्र में अंडोत्सर्ग लगभग दिन 21 पर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र. अलैंगिक और लैंगिक जनन में मूल अंतर?
अलैंगिक: एक जनक, समसूत्री विभाजन, संतान क्लोन, तेज़, आनुवंशिक विविधता नहीं। लैंगिक: दो जनक, अर्धसूत्री विभाजन + निषेचन, संतान में विविधता, धीमा, विकास में सहायक।
प्र. मेयोसिस और माइटोसिस में फर्क?
समसूत्री विभाजन (Mitosis): दो समान पुत्री कोशिकाएँ, गुणसूत्र संख्या समान (2n→2n), शरीर की कोशिकाएँ। अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): चार हैप्लॉइड कोशिकाएँ, गुणसूत्र संख्या आधी (2n→n), युग्मक बनते हैं।
प्र. ग्राफ्टिंग का क्या फायदा?
एक पौधे की जड़ प्रणाली और दूसरे की उत्पादन क्षमता मिलाना। जैसे जंगली गुलाब की जड़ + उच्च उत्पादक गुलाब की टहनी → एक पौधे पर कई रंग के फूल। फल जल्दी आते हैं।
प्र. IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी) क्या है?
अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर प्रयोगशाला में मिलाकर निषेचन कराना, फिर भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित करना। भारत में 1978 में Dr. Subhash Mukhopadhyay ने पहली टेस्ट ट्यूब बेबी (कनुप्रिया उर्फ दुर्गा) का जन्म कराया।
प्र. परागण और निषेचन में क्या अंतर?
परागण: पराग का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण (बाहरी प्रक्रिया)। निषेचन: नर युग्मक और अंडाणु का संलयन (आंतरिक, बीजांड में)।
प्र. फल और बीज में क्या संबंध?
निषेचन के बाद: अंडाशय → फल; बीजांड → बीज; अंडाणु/युग्मनज → भ्रूण। फल बीजों की रक्षा और प्रकीर्णन में मदद करता है।
प्र. शुक्राणु का आकार इतना छोटा और संख्या इतनी अधिक क्यों?
शुक्राणु को लम्बी दूरी तैरनी पड़ती है। अधिकांश रास्ते में मर जाते हैं या पहुँच नहीं पाते। करोड़ों में से केवल एक ही निषेचन करता है। छोटे आकार से तेज़ तैरना संभव।
प्र. ऋतुस्राव को लेकर क्या जागरूकता ज़रूरी है?
माहवारी एक सामान्य और स्वस्थ शारीरिक प्रक्रिया है — शर्म की नहीं, गर्व की बात है ("Period is your pride")। स्वच्छ उत्पाद (Sanitary pad, tampon, menstrual cup) उपयोग करें; हर 4-6 घंटे में बदलें; उचित तरीके से नष्ट करें।
प्र. भारत में PC-PNDT Act क्या है?
Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act — जन्म से पहले भ्रूण का लिंग निर्धारण कानूनन निषिद्ध है। लिंग-चयनात्मक गर्भपात से लिंगानुपात असंतुलित होता है।
अध्याय सारांश (At a Glance)
- जनन: जीव अपनी प्रजाति के नए जीव उत्पन्न करते हैं।
- अलैंगिक जनन: एक जनक, क्लोन संतान — मुकुलन, बीजाणु, वानस्पतिक प्रसार।
- वानस्पतिक प्रसार: कटिंग, रोपण, दाब, ऊतक संवर्धन।
- लैंगिक जनन: दो जनक, अर्धसूत्री विभाजन → युग्मक → निषेचन → विविधता।
- फूल: बाह्यदल, दल, पुंकेसर (नर), स्त्रीकेसर (मादा)।
- परागण: पराग का परागकोश से वर्तिकाग्र तक — स्व या पर-परागण।
- निषेचन: नर युग्मक + अंडाणु = युग्मनज → भ्रूण; बीजांड → बीज; अंडाशय → फल।
- जंतुओं में: बाह्य (मछली, मेंढक) और आंतरिक निषेचन (सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी)।
- मानव जनन: वृषण → शुक्राणु; अंडाशय → अंडाणु; गर्भाशय → भ्रूण का विकास।
- ऋतुस्राव चक्र: ~28 दिन; अंडोत्सर्ग ~14वें दिन।
- गर्भनिरोधक: कंडोम, Oral Pills, IUD (Copper-T), शल्य विधि।
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